कामवासना डॉट नेट

-Advertisement-

मेरी मदमस्त मम्मी - 1 
@Kamvasna 05 मई, 2023 17764

लंबी कहानी को बिना स्क्रॉल किए पढ़ने के लिए प्ले स्टोर से Easy Scroll एप डाउनलोड करें।

 

मेरी माँ दिखने में काफी कामुक है। वो काफी खूबसूरत भी है। बचपन से ही में अपनी माँ का दीवाना रहा हूँ। मेरी माँ वैसे तो काफी सीधी और सरल है लेकिन एक बार जब मैंने उन्हे एक आदमी के साथ देखा तो मेरी यह गलतफहमी दूर हो गई। तब मेरी उम्र 10-12 साल थी। मेरे पापा ट्रक ड्राइवर है और वो जब घर पर आते है तो उनके साथ कोई न कोई दूसरा आदमी जरूर होता है। ऐसे ही एक बार जब पापा घर पर आए तो उनके साथ एक आदमी था। शाम का टाइम था तो पापा और वो आदमी छत पर बैठकर दारू पीने लगे। फिर उन्होंने खाना खाया और फिर वो छत पर ही सो गए। मैं भी उनके साथ ही छत पर ही सो गया और मम्मी नीचे आँगन में सो गई। 

 

फिर कोई रात के 12 बजे होंगे। मैं पेशाब करने के लिए उठा। मैं पेशाब करने के लिए नीचे जाने लगा तो मैंने देखा के आँगन मे लाइट जल रही थी। फिर मैं जैसे ही सीढ़ियों पर आया तो देखा के आँगन में चारपाई वो आदमी बैठा है और मम्मी उसके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी है। मैंने तब मम्मी को पहली बार पूरी नंगी देखा था। ये सब देखकर मैं सीढ़ियों पर ही छिपकर बैठ गया और उन्हे देखने लगा। वो आपस में बातें कर रहे थे और मम्मी ने तब मेकअप वगैरह कर रखा था तो वो काफी सेक्सी लग रही थी। फिर मम्मी ने खुद अपने हाथों से उस आदमी को नंगा किया और फिर उसके लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। जब उस आदमी का लंड पूरा खड़ा हो गया तो मम्मी उसके ऊपर चढ़ गई और उसके लंड को अपनी चुत में लेकर ऊपर नीचे होने लगी। उन दोनों की सिसकारियाँ तब पूरे आँगन में गूंज रही थी। मम्मी बिना किसी डर और शर्म के उस आदमी से चुद रही थी वो भी ऐसे खुले आँगन में। फिर कुछ देर बाद उनकी सिसकारियाँ तेज हो गई और फिर वो दोनों झड़ गए तो फिर मम्मी उस आदमी के ऊपर ही लेट गई। 

 

फिर वो आदमी मम्मी के बोबो को सहलाने लगा और वो फिर से बातें करने लगे। फिर उस आदमी ने अपने कपड़े पहन लिए और मम्मी भी अपने कपड़े पहनने लगी तो मैं खड़ा हुआ और नीचे आने लगा। क्योंकि मेरे पेशाब बहुत जोर से आ रहा था। मैं नीचे आ रहा था तब मम्मी अपना ब्लॉउज पहन रही थी। फिर मुझे देखकर मम्मी ने जल्दी से अपना ब्लॉउज पहना और फिर मेरी तरफ देखकर हंसने लगी। फिर मैं सीधा जाकर टॉइलेट में घुस गया और पेशाब करने लगा। टॉइलेट घर के पीछे की तरफ बना था। फिर मैं पेशाब करके आया इतने में वो आदमी ऊपर जा चुका था और आँगन की लाइट बुझी हुई थी और मम्मी भी चारपाई पर लेटी हुई थी। फिर मैं भी ऊपर जाकर लेट गया और कुछ देर बाद मुझे भी नींद आ गई। 

 

फिर जब भी कोई हमारे घर पर आता तो मैं मम्मी का ध्यान रखता। वो आदमी भी हमारे घर काफी बार आया और जितनी बार आया मम्मी की चुदाई करके ही गया। उसके अलावा भी कोई आता तो मम्मी उससे भी चुदवा लेती। फिर एक बार मैं स्कूल से जल्दी घर आ गया तो देखा के एक आदमी हमारे घर से निकला है और फिर घर में गया तो देखा के मम्मी अपने कपड़े ठीक रही है। ये देखकर मैं समझ गया के मम्मी उससे चुदी है। फिर एक बार मम्मी किसी से फोन पर बात कर रही थी और कह रही थी के तुम आ जाना आज। फिर ये सुनकर मैं समझ गया। फिर मैं तैयार होकर स्कूल के लिए निकल पड़ा। लेकिन मेरा बिल्कुल भी मन नहीं था स्कूल जाने का और मैं देखना भी चाहता था के आज कौन आने वाला है। तो इस कारण मैं आधे रास्ते से ही वापिस आ गया और फिर किसी तरह छत पर जाकर बैठ गया। 

 

फिर मैंने नीचे देखा तो देखा के मम्मी बिल्कुल नंगी होकर घूम रही है और नहाने की तैयारी कर रही है। तब सर्दियों के दिन थे तो मैंने देखा के मम्मी आँगन में ही धूप में बैठकर नहाने लगी और नहाने के बाद अपने सारे बदन पर तेल से मालिश की और फिर मेकअप वगैरह करने लगी और फिर चारपाई पर लेट गई और अपनी चिकनी चुत सहलाने लगी और साथ ने अपने एक बोबे को अपने एक हाथ से सहलाने लगी। फिर मम्मी ने किसी को फोन किया और फिर ऐसे ही उससे बात करने लगी। मम्मी का आज ये रूप देखकर मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। फिर किसी ने गेट खटखटाया तो मम्मी नंगी ही उठकर गेट की तरफ जाने लगी। ये देखकर तो मैं और भी हैरान रह गया। फिर जैसे ही मम्मी ने गेट खोला तो दो आदमी अंदर आए। फिर एक दूसरे को देखकर वो तीनों मुस्कुराने लगे। फिर उनमे से एक ने मम्मी की कमर में हाथ डाल लिया और दूसरा आदमी मम्मी के बोबे दबाने लगा। फिर वो तीनों आँगन में आ गए और आकर चारपाई पर बैठ गए। फिर उनमे से एक ने मम्मी को अपनी गोद में बैठा लिया और फिर मम्मी के बोबो को चूसने लगा। 

 

इतने में दूसरा आदमी नंगा हो गया तो मम्मी उसके लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। फिर उस दूसरे नंगे आदमी ने मम्मी को खड़ा कर लिया और मम्मी से चिपक गया और अपने हाथ पीछे की और ले जाकर मम्मी की गाँड दबाने लगा। फिर इतने में वो दूसरा आदमी भी नंगा हो गया। फिर मम्मी नीचे बैठकर उन दोनों आदमी के लंड चूसने लगी। फिर उनमें से एक ने मम्मी को चारपाई पर लेटाया और फिर मम्मी की चुदाई करने लगा और दूसरा आदमी उन्हे देखने लगा और साथ में अपना लंड सहलाता रहा। फिर जैसे ही पहला आदमी झड़ा तो दूसरा आदमी मम्मी की चुदाई करने लगा। इस तरह उन दोनों ने मिलकर मम्मी को पूरे एक घंटे तक चोदा। फिर चुदाई के बाद मम्मी उनके लिए चाय बनाकर लाई और फिर वो काफी हंस हँसकर बाते करने लगे और साथ में मम्मी के बदन को सहलाने लगे। फिर चाय पीने के बाद वो खड़े होकर आँगन में घूमने लगे और बारी बारी से मम्मी को अपनी बाहों में लेकर मम्मी से मस्ती करने लगे। उनके लंड फिर से खड़े हो गए तो इस बार वो मम्मी को घोड़ी बनाकर गाँड चुदाई करने लगे। 

 

मम्मी की गाँड को भी उन्होंने एक घंटे तक पेला। फिर झड़ने के बाद वो तीनों मम्मी को साथ लेकर उस एक चारपाई पर ही लेट गए और मम्मी उनके लंड को सहलाने लगी। फिर कुछ देर बाद उनके लंड फिर से खड़े हो गए तो उन्होंने फिर मम्मी को चोदा। इस तरह सुबह 11 बजे से लेकर 4 बजे तक लेकर वो मम्मी की चुदाई करते रहे। फिर वो दोनों आदमी अपने कपड़े पहनकर चले गए और फिर मम्मी ने नंगी जाकर ही गेट बंद करके आई। जब मम्मी गेट बंद करके आ रही थी तो मम्मी के बड़े बड़े बोबे और मम्मी की मस्तानी चाल को देखकर तो किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाए। फिर मैं भी छत से उतरकर मैन गेट से घर के अंदर आ गया तो देखा के मम्मी एक कमरे में कपड़े बदल रही थी। फिर वो बाहर आई और मेरे लिए चाय बनाई। वो तब काफी खुश थी। मम्मी मुझसे बहुत प्यार करती थी और मेरा काफी ख्याल भी रखती थी। फिर जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ तो मुझे चुदाई का पूरा ज्ञान हो गया और घर में तो मैं मम्मी की चुदाई देखने को मिल ही जाती थी। मेरा लंड भी अब खड़ा ही रहता था और मैं बार बार लंड को खुजलाता रहता था। ये देखकर मम्मी मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा देती। 

 

इतने मर्दों से चुदाई करके मम्मी काफी खुल गई थी। इस कारण वो घर पर ब्लॉउज और पेटीकोट में ही रहती। ब्लॉउज मे से मम्मी के बड़े बड़े बोबे आधे से ज्यादा दिखाई देते रहते थे। कई बार जब मम्मी नहाने जाती और अपने कपड़े ले जाना भूल जाती तो वो सिर्फ तौलिया लेकर बाहर आ जाती और फिर कमरे में जाकर कपड़े पहनती। पापा घर पर होते तब भी मम्मी ऐसे ही रहती। पापा तो शराबी है इस कारण मम्मी उन्हे कुछ नहीं समझती और मुझसे तो मम्मी वैसे ही नहीं शर्माती थी। जब मैं छोटा था तब तो मम्मी मेरे साथ नंगी होकर ही नहा लेती थी। 

 

फिर पापा नशा ज्यादा करने लगे तो वो घर पर ही रहने लगे थे। फिर मम्मी ने मुझसे ट्रक पर ड्राइवर लगने के लिए कहा। क्योंकि पापा तो घर पर आ गए थे इस कारण घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था। फिर मैंने सोचा के अगर मैं ड्राइवर लग गया तो मम्मी तो पीछे से दूसरे मर्दों से ऐसे ही चुदवाती रहेगी। फिर मैंने मम्मी से कहा के मैंने इधर उधर बात कर रखी है। किसी को ड्राइवर की जरूरत होगी तो वो बता देंगे। पापा घर पर आ गए थे और अब मैं भी बड़ा हो गया था तो मम्मी अब दूसरे मर्दों से नहीं चुदवा सकती थी। इस कारण रात को सोते टाइम या तो वो अपने हाथ से करती या किचन में जाकर बैगन अंदर डालकर करती। मेरा भी लंड अब चुत मांग रहा था। इस कारण मैं भी अपने कमरे मे लेटा लेटा अपना लंड सहलाता रहता। फिर एक बार ऐसे ही मैं अपने कमरे में लेटा था और मैं अपना लंड सहला रहा था। तब बाहर से कुछ आवाज आई तो मैंने खड़ा होकर देखा तो मम्मी बिल्कुल नंगी होकर घूम रही थी। शायद पानी पीने आई थी। फिर मम्मी को देखकर मैं अपना लंड जोर जोर से हिलाने लगा और फिर झड़ गया। उस दिन के बाद से मैं लगभग रोज ही मम्मी को याद करके मूठ मारने लगा। 

 

फिर एक दिन मैं बिल्कुल नंगा होकर लेटा था और अपना लंड हिला रहा था। तब दोपहर का टाइम था तो मैंने गेट भी बंद नहीं कर रखे थे। फिर तभी मम्मी मेरे कमरे मे आ गई। उनके हाथ में फोन था। मेरे मामा का फोन था और वो मुझसे बात करना चाहते थे तो मम्मी ने मुझसे बात करने के लिए कहा। फिर मैं फोन कान से लगाकर बात करने लगा और साथ में अपने लंड को एक कपड़े से ढक लिया। फिर कुछ देर तो वहीं खड़ी रही और फिर वहाँ से चली गई। लेकिन बाद में मम्मी ने मुझे कुछ नहीं कहा। इसके बाद तो मम्मी भी मुझे खुलकर लाइन देने लगी। एक दिन सुबह के टाइम मैं किचन में गया तो देखा के मम्मी का ब्लॉउज खुला हुआ था और पेटीकोट नीचे पड़ा था और मम्मी एक हाथ मे बैगन लेकर अपनी चुत में अंदर बाहर कर रही थी और दूसरे हाथ से अपने बोबो को सहला रही थी और साथ में सिसकारियाँ ले रही थी। ये देखकर मैं देखता ही रह गया। फिर मुझे देखकर मम्मी मुस्कुराने लगी और फिर चुत से बैगन निकालकर साइड में रखा और फिर अपना पेटीकोट उठाकर पहनने लगी और फिर अपने ब्लॉउज को बंद किया। 

 

मम्मी सुबह 10 बजे तक घर का सारा काम कर लेती थी और फिर नहाकर कमरे में जाकर नंगी होकर पापा के साथ लेट जाती। पापा का मूड होता तो पापा कर लेते वरना मम्मी बैगन से कर लेती। फिर एक बार में कमरे में गया तो पापा तो सोये हुए थे और मम्मी अपने पैर चौड़े करके अपनी चुत में बैगन अंदर बाहर कर रही थी। तब बाहर कोई पड़ोस की औरत आई थी। मुझे देखकर मम्मी खड़ी हुई और पहले तो मम्मी ने अपनी चुत पर अपना एक हाथ रखा लेकिन फिर हटा दिया और फिर मेरे सामने ही अपना ब्लॉउज लेकर पहनने लगी और मुझसे बोली के तू जाके बोल दे आ रही हूँ मैं। फिर मैं कमरे से बाहर आ गया। फिर अगले दिन से ही मम्मी नहाने के बाद सिर्फ तौलिया लेकर कमरे में जाती और फिर नंगी होकर बेड पर लेट जाती। तौलिया भी सिर्फ आगे की तरफ रखती और पीछे से मम्मी पूरी नंगी होती। मैं भी ऐसे रोज मम्मी को देखकर अपना लंड हिलाता। फिर एक बार जब मम्मी नहाकर आई तो मैं तब अपने कमरे से बाहर निकला। तो मम्मी मुझे देखकर बिल्कुल नहीं शरमाई और वैसे ही तौलिया लेकर अपने कमरे मे जाने लगी और जब कमरे में पहुँचने से पहले ही तौलिया अपने आगे से हटाकर अपने बाल पोंछने लगी और फिर तौलिया कमरे से बाहर सुखाकर बिल्कुल नंगी होकर कमरे में चली गई और जाकर पापा के साथ लेट गई। पापा खाना खाकर सो जाते है तो मम्मी इसका पूरा फायदा उठाती। मम्मी की चुत भी लंड मांग रही है ये साफ दिख रहा था। 

 

मम्मी मेरे साथ काफी हँसकर बात करती और ऐसे कपड़े पहनती के जिसमें से उनका बदन काफी हद तक दिखता रहता। एक बार सुबह सुबह मैं आँगन में सोया हुआ था और मम्मी वहाँ झाड़ू लगा रही थी। फिर मुझे झाड़ू की आवाज सुनकर मुझे जाग आ गई लेकिन फिर भी मैं लेटा रहा। फिर मैंने देखा के झाड़ू झाड़ू लगाते लगाते मम्मी का पेटीकोट ढीला होकर खुल गया और मम्मी नीचे से पूरी नंगी हो गई। झाड़ू लगाने वाली थोड़ी ही रही थी तो मम्मी ने एक हाथ में अपना पेटीकोट उठा लिया और फिर से झाड़ू लगाने लगी। झाड़ू लगाते टाइम मम्मी की बड़ी गाँड बहुत मस्त लग रही थी। फिर मम्मी ने झाड़ू लगा ली और फिर मम्मी ऊपर हुई तो नीचे झुकने की वजह से मम्मी के बड़े बड़े बोबे मम्मी के ब्लॉउज से बाहर आ गए थे। फिर मम्मी ने पहले अपना पेटीकोट पहना और फिर अपने बोबे अंदर किये और फिर से काम में लग गई। इससे मम्मी को काफी हंसी आ रही थी। फिर कुछ देर बाद मैं उठा तो मेरी तरफ देखकर भी हँसने लगी। फिर मैंने मम्मी से हंसने का कारण पूछा तो मम्मी ने बता दिया के उनका पेटीकोट अचानक से ढीला होकर खुल गया। फिर मम्मी जोर जोर से हंसने लगी। मम्मी को हँसता देखकर मुझे भी हंसी आ गई। 

 

ज्यादा नशा करने के कारण पापा काफी कमजोर हो गए थे। फिर एक बार दोपहर को जब मैं मम्मी के कमरे की तरफ गया तो मैंने देखा के पापा नंगे थे और उनका लंड मम्मी की लाख कोशिश करने के बाद भी बस थोड़ा सा ही खड़ा हो पाया था। फिर पापा उस थोड़े से खड़े लंड को ही मम्मी के ऊपर आकर मम्मी की चुत पर रगड़ने लगे और फिर वो तब ही झड़ गए। झड़ने के बाद पापा तो साइड में होकर सो गए और फिर मम्मी बैगन से करने लगी। इसका तो मुझे पहले से ही पता था के पापा मम्मी को खुश नहीं रख पाते है तभी मम्मी और मर्दों से चुदती है। उस दिन देख भी लिया। मम्मी पापा के सामने भी ऐसे कम कपड़ों में घर में घूमती रहती है तो पापा कुछ नहीं कहते है। इसके अलावा जब मैं कमरे में होता हूँ तो मम्मी पापा के सामने नंगी भी हो जाती है और जब मैं कमरे से बाहर आता हूँ तो मम्मी अपने ऊपर कोई कपड़ा ले लेती है। 

 

नीचे आँगन में मुझे काफी गर्मी लगती और मुझे रात को नंगा होकर लंड हिलाना होता था तो इस कारण मैं छत पर सोने लगा। फिर मैंने जैसे ही छत पर चला जाता तो देखता के मम्मी नंगी होकर घूमने लग जाती और सुबह उठकर नीचे आता तब तक मम्मी नंगी ही रहती। मैं भी छत पर नंगा होकर सोता और अपना लंड हिलाता। मम्मी रात को मुझे दूध देने आती तो वो सीढ़ियों तक ही आती और फिर वहीं दूध रखकर और मुझे आवाज देकर वापिस चली जाती। मुझे ये मामला कुछ समझ नहीं आया। लेकिन फिर एक दिन जब मैं दूध लेने गया तो मैंने मम्मी को वापिस जाते हुए देखा। तब मम्मी बिल्कुल नंगी थी। तब जाकर मुझे समझ में आया। मैं कई बार ऊपर से नंगी मम्मी को देखता और लंड हिला लेता। फिर एक बार यूं हुआ के मम्मी को दूध रखकर जाने मे देरी हो गई और मुझसे नहीं रहा गया तो मैं नंगा होकर अपने लंड पर तेल लगाकर मालिश करने लगा। मालिश करते करते मुझे मजा आने लगा तो मैं आँखें बंद करके मजा लेने लगा। फिर अचानक मम्मी ने दूध के लिए आवाज दी तो मेरी आँख खुली। 

 

फिर मैंने सीढ़ियों की तरफ देखा तो उस दिन मम्मी सबसे ऊपरी सीढ़ी पर खड़ी थी। मैंने भी मम्मी को नंगी देख लिया था। मम्मी पता नहीं कब से खड़ी होकर मुझे देख रही थी। मम्मी का एक हाथ अपनी चुत पर था तो शायद मम्मी मुझे देखकर अपनी चुत सहला रही थी। फिर मैंने दूध लेने गया तो मम्मी को नीचे जाते हुए देखने लगा और साथ मे लंड सहलाता रहा। फिर मैंने देखा के मम्मी नीचे जाकर चारपाई पर लेटकर उंगली करने लगी और फिर मैं भी लंड हिलाने लगा। फिर मैं छत पर जाकर उस जगह खड़ा हो जहां से एकदम नीचे मम्मी और पापा सोते थे। छत की चारदीवारी के बीच में जाली लगी हुई थी तो मैंने अपना लंड उस जाली से बाहर निकाल लिया और हिलाने लगा। मम्मी तो आँखें बंद करके उंगली कर रही थी तो मैं छत से नीचे झुक कर मम्मी को गौर से देखना लगा। फिर कुछ देर बाद मम्मी तो झड़ गई तो वो शांत हो गई और मैं वैसे ही खड़े खड़े लंड हिलाता रहा। आँगन में तब बल्ब जल रहा था और उसकी रोशनी मुझ पर पड़ रही थी तो आँखें खुलने के बाद मम्मी भी मुझे देख सकती थी। 

 

फिर मैं झड़ने वाला हुआ तो मेरी आँखें बंद हुई और मैं अपना लंड जोर जोर से हिलाने लगा। मैं उसी पोज मे रहा। फिर मैं झड़ने लगा तो मेरा पानी निकलकर नीच गिरने लगा। लेकिन इसका मुझे ध्यान नहीं रहा। फिर 2-3 पिचकारी निकलने के बाद मेरी आँख खुली तो देखा के मेरा पानी जाकर मम्मी पर पड़ रहा था और मम्मी उठकर बैठ गई थी और ऊपर की तरफ ही देख रही थी। फिर मैंने लंड अंदर की तरफ कर लिया और झड़ने लगा। फिर मैंने नीचे देखा तो मम्मी एक कपड़े से अपने बदन को पोंछ रही थी और फिर वो उठकर ऊपर आने लगी। मम्मी एक दम नंगी ऊपर आ रही थी। ये देखकर मैं कुछ समझ ही नहीं  पा रहा था के मैं क्या करूँ। फिर मैं वैसे ही खड़ा रहा। फिर मम्मी ऊपर आई तो वो मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और थोड़े गुस्से से कहने लगी के नीचे तेरे पापा पर गिर जाता तो। फिर मैं कुछ नहीं बोला। मैं नीची गर्दन करके खड़ा रहा। फिर मम्मी बोली के कुछ दिन बाद तेरे पापा कहीं जाने वाले है फिर मैं करती हूँ कुछ। इतने दिन कंट्रोल कर। फिर मैं बोला के कंट्रोल नहीं होता है। फिर मम्मी मुसकुराती हुई बोली के क्यों तेरी माँ सारा दिन तेरे सामने नंगी घूमती है तब नहीं होता है क्या कंट्रोल। ये सुनकर मैंने मम्मी की तरफ देखा और फिर मैं भी मुस्कुराने लगा। फिर मम्मी बोली के चल सो जा अब। 

 

फिर मम्मी नीचे चली गई और मैं मम्मी को ही देखता रहा। फिर मम्मी ने ऊपर की तरफ मुझे देखा और फिर मुसकुराते हुए मुझे सोने के लिए इशारा किया। फिर मम्मी ने आँगन का बल्ब बंद कर दिया और फिर वो सो गई तो फिर मैं भी जाकर लेट गया। लेकिन मुझे नींद कहाँ आने वाली थी। मेरे दिमाग में मम्मी की ही बातें घूमती रही। मम्मी ने कहा के मैं करती हूँ कुछ। मेरे समझ में नहीं आ रहा था के मम्मी क्या करने वाली है। फिर थोड़ी देर बाद मैं वैसे ही नंगा ही सो गया। फिर अगले दिन सुबह ही मुझे जल्दी ही जाग आ गई तो मैंने नीचे देखा तो मम्मी अभी तक उठी नहीं थी। फिर दिन निकल गया तो मैं उठकर नीचे गया तो देखा के मम्मी नंगी ही झाड़ू लगा रही थी। फिर मुझे देखकर मम्मी मुस्कुराने लगी और फिर मुझसे कहा के किचन में चाय पड़ी है जाकर पी लो। फिर मैं किचन में गया और जाकर चाय पीने लगा। फिर कुछ देर बाद मम्मी भी वहाँ आ गई। मैं मम्मी के बोबो को ही देख रहा था। ये देखकर मम्मी बोली के दूध पीना है क्या। फिर ये सुनकर मैं मुस्कुराने लगा। फिर मम्मी मुस्कुराई और बाहर की तरफ देखा के पापा उठे है या नहीं फिर मम्मी ने अपने एक बोबे को अपने हाथ में लेकर मेरी तरफ किया तो फिर मैं जाकर मम्मी के बोबे को चूसने लगा। मुझे तो यकीन नहीं हुआ के मम्मी के बोबो से अभी भी दूध निकल रहा था। 

 

फिर मम्मी ने कहा के ये दूध नहीं है। ये सफेद पानी है जो निकलता रहता है। फिर मैं मम्मी के दूसरे बोबे को भी चूसने लगा। मम्मी अपनी छाती पूरी आगे की और तानकर खड़ी थी। मैं एक बोबे को चूस रहा था और दूसरे को सहला रहा था। फिर तभी पापा के खाँसने की आवाज आई तो हमने बाहर देखा तो पापा उठ चुके थे। फिर मम्मी ने मुझे जाने के लिए कहा तो फिर मैंने कहा के मैं बाहर जाऊंगा तो आपको कपड़े पहनने पड़ेंगे और फिर वापिस खोलने पड़ेंगे। इससे अच्छा आप चली जाओ मैं यहीं किचन में छुप जाता हूँ। मेरी बात सुनकर मम्मी मुसकुराती हुई बाहर चली गई और मैं वहीं किचन में ही रहा। फिर मम्मी ने पापा को पानी दिया और फिर किचन में आकर उनके लिए चाय ले गई और फिर झाड़ू लगाने लगी। पापा चाय पीकर टॉइलेट में चले गए। फिर मैं किचन से निकलकर बाहर आ गया और फिर झाड़ू लगाती हुई मम्मी को देखने लगे। मम्मी भी मुझे देखकर मुस्कुराने लगी। फिर मैं पीछे से जाकर मम्मी से लिपट गया और मम्मी के दोनों बोबे अपने हाथों में पकड़ लिए और सहलाने लगा। मुझे और मम्मी को दोनों को पता था के पापा टॉइलेट से अभी नहीं आने वाले थे तो हम ऐसे ही चिपके हुए खड़े रहे। 

 

फिर मम्मी ने झाड़ू छोड़कर मेरी तरफ मुड़ गई और मुझे अपने सीने से लगा लिया। अब मेरा मुँह मम्मी के दोनों बोबो के बीच था। मैंने मम्मी को अपनी बाहों में पूरा जकड़ लिया था। फिर कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे। फिर मम्मी ने मुझे अपने कमरे में जाने के लिए कहा तो मैं फिर कमरे मे चला गया और मम्मी फिर से झाड़ू लगाने लगी। फिर थोड़ी देर बाद पापा आ गए और वो वहीं आँगन में ही बैठ गए और मम्मी नंगी ही काम करती रही। फिर पापा ने मेरे बारे में पूछा तो मम्मी ने झूठ बोल दिया के वो बाहर गया है। फिर मम्मी ने पापा को भी बाहर बैठने के लिए कहा। फिर पापा उठकर घर के बाहर की साइड जाकर बैठ गए। पापा के जाने के बाद मैं कमरे से बाहर आ गया। मैं तब बिल्कुल नंगा था।  तब मम्मी किचन में उकड़ूँ बैठकर खाना बना रही थी तो मैं भी जाकर मम्मी के समाने बैठ गया। मम्मी मुझे देखने लगी और फिर मम्मी की नजर मेरे लंड पर पड़ी और वो लंड को देखती रही।  तब मैं भी मम्मी की चिकनी चुत देख रहा था। मेरी नजर अपनी चुत पर देखकर मम्मी मुस्कुराने लगी और फिर पूछने लगी के क्या देख रहा है। फिर मैं भी मुस्कुराकर बोला के कुछ नहीं। फिर मम्मी मेरे सामने ही अपनी चुत खुजलाने लगी और मैं देखने लगा। फिर मैं भी अपना खड़ा लंड सहलाने लगा। 

 

मम्मी को नंगी देखकर मैं काफी गरम हो चुका था और फिर मुझसे रहा नहीं गया तो मैं फिर जोर जोर से अपना लंड हिलाने लगा। मुझे लंड हिलाता देखकर मम्मी ने मुझे कुछ नहीं कहा और बस मुझे देखती रही। मैं तब अपने पैर फैलाकर बैठा था और लंड हिलाए जा रहा था। फिर मैं झड़ने वाला हुआ तो फिर मम्मी से मेरे पास आकर बैठने के लिए कहा। फिर मम्मी मेरे सामने आकर बैठ गई और फिर वो भी अपनी चुत सहलाने लगी और दूसरे हाथ से अपने एक बोबे को सहलाने लगी। मम्मी को ऐसे देखकर मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैं झड़ने लगा और सारा पानी वहीं फर्श पर छोड़ने लगा। एक आधी पिचकारी मम्मी पर भी जाकर गिरी लेकिन मम्मी ने कुछ नहीं कहा। फिर मैं पूरा झड़ गया और मेरा लंड भी थोड़ा ढीला हो गया तो फिर मम्मी मेरे और नजदीक आई और मेरे लंड पर अपना हाथ रखा और फिर धीरे से सहलाने लगी और मुझे अपनी छाती से लगाते हुए बोली के तू अब कमरे में चला जा। मैं तेरे पापा को नहाने के लिए कह देती हूँ और फिर उन्हे खाना खिला देती हूँ फिर वो जाकर कमरे में सो जाएंगे। फिर मैं मम्मी की बात सुनकर थोड़ी देर बाद कमरे में चला गया और मम्मी फिर से खाना बनाने लगी। फिर खाना बन गया तो मम्मी ने पापा को आवाज देकर बुलाया और फिर उन्हे नहाने के लिए कहा तो फिर वो नहाने चले गए। नहाने के बाद मम्मी ने उन्हे खाना खिला दिया। खाना खाकर वो जाकर कमरे में सो गए। 

 

फिर पापा के कमरे में जाते ही मम्मी मेरे कमरे मे आ गई और मुझे नहाने के लिए कहा। तब मैं लेटा हुआ था। फिर मुझे लेटा हुआ देखकर मम्मी भी मेरे पास आकर लेट गई और फिर मैं मम्मी से चिपक गया और मम्मी ने भी मुझे अपनी बाहों में ले लिया। फिर मैं मम्मी के बोबो को चूसने लगा। फिर मम्मी भी मेरे बदन को सहलाने लगी और फिर मेरे लंड को भी हाथ मे लेकर देखने लगी और फिर धीरे धीरे सहलाने लगी। जिससे की मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मम्मी ने लंड सहलाना छोड़ दिया और फिर मम्मी मेरे पेट पर और छाती पर हाथ फेरने लगी। फिर मम्मी ने बड़े प्यार से मुझे नहाने के लिए कहा। फिर हम दोनों खड़े हुए और कमरे से बाहर आ गए। फिर मैं नहाने के लिए चला गया और फिर मम्मी भी थोड़ी देर बाद बाथरूम में आ गई और एक कोने में बैठकर कपड़े धोने लगी। वो लगातार मुझे ही देखे जा रही थी। फिर उन्होंने मेरी पीठ की सफाई की और खुद की पीठ की भी करवाई। कपड़े धोकर फिर मम्मी भी नहाने लगी। हम दोनों साथ ही नहाने लगे। मम्मी ने मेरी गाँड की दरार में हाथ डालकर सफाई की और मेरे लंड के आसपास के जगह की साबुन लगाकर सफाई की। फिर मैंने भी मम्मी की गाँड और चुत के आसपास काफी साबुन लगाया और फिर हाथ से मसलने लगा। मम्मी भी मेरा साथ दे रही थी। फिर मैंने मम्मी की छाती और दोनों बोबो के आसपास की जगह रगड़ने लगा और मेल उतारने लगा। 

 

इस तरह हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया। इस दौरान हम गरम भी हो गए थे। मम्मी भी बार बार अपनी चुत को सहला रही थी और मैं भी अपने लंड को मसल रहा था। फिर नहाने के बाद हम दोनो बाथरूम से बाहर आ गए। फिर मैं तो अपने कमरे में चला गया और मम्मी कपड़े सुखाने लगी। फिर कपड़े सुखाकर मम्मी अपने कमरे मे चली गई और फिर कुछ देर बाद वो मेरे कमरे मे आई तो वो थोड़ा तैयार होकर आई। मम्मी तब और भी कामुक लग रही थी। फिर वो मेरे पास आकर लेट गई और फिर अपनी चुत को सहलाने लगी और अंदर उंगली करने लगी। फिर मम्मी जोर जोर से अपनी चुत सहलाने लगी और उंगली करने लगी। मैं ये सब देखने लगा। फिर मैं उठकर मम्मी के सामने आ गया तो मम्मी ने अपने दोनों पैर खोल दिए जिससे की मुझे पूरी तरह से मम्मी की चुत दिखने लगी। फिर मैंने अपने एक हाथ से मम्मी की चुत को सहलाने लगा तो मम्मी ने अपना हाथ हटा लिया और फिर आँखें बंद करके दोनों हाथ पीछे की तरफ करके लेट गई। फिर मेरा मन मम्मी की चुत चाटने का करने लगा तो फिर मैं अपना मुँह मम्मी की चुत के पास ले गया और फिर अपनी जुबान से मम्मी की चिकनी चुत चाटने लगा। जिससे मम्मी जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी और फिर मेरे सिर को अपने हाथ से अपनी चुत में घुसाने लगी। मैं समझ गया के मम्मी को मजा आ रहा है। 

 

मैं मजे से मम्मी की चुत चाट रहा था। मुझे मम्मी की चुत से खुशबू आ रही थी। फिर कुछ देर बाद मम्मी ने अपने पैर ऊपर की तरफ उठा दिए तो फिर मेरे सामने मम्मी की गाँड का छेद आ गया तो फिर मैं उसे भी चाटने लगा। इसके बाद मम्मी और भी ज्यादा सिसकारियाँ लेने लगी। मम्मी की गाँड का छेद बड़ा था। मैंने छेद में उंगली भी डालकर देखी तो मेरी उंगली अंदर आसानी से चली गई। फिर मेरे चाटने से ही मम्मी झड़ गई और शांत हो गई। फिर मैं घुटनों के बल खड़ा होकर अपना लंड हिलाने लगा। फिर मम्मी ने मुझे लंड हिलाते देखा तो फिर वो उठकर बैठ गई और फिर अपने दोनों हाथों से मेरे लंड को जोर जोर से हिलाने लगी। फिर मेरे पानी निकलने वाला हुआ तो फिर मैंने मम्मी से कहा के मम्मी मैं झड़ने वाला हूँ तो मम्मी ने उसी वक्त मेरा पूरा लंड अपने मुँह के अंदर डाल लिया और अपने हाथ मेरी गाँड पर रख लिए। फिर मम्मी ने 2-3 बार मेरा लंड चूसा तो मैं झड़ने लगा। फिर मम्मी मेरा सारा पानी पी गई और मेरे लंड को चाटकर साफ कर दिया। फिर मेरा लंड ढीला नहीं हो गया तब तक मम्मी ने मेरे लंड को अपने मुँह में डाले रखा। फिर मम्मी ने लंड को अपने मुँह से निकाला और फिर मेरी तरफ देखकर हंसने लगी। 

 

फिर मैं मम्मी के पीछे जाकर बैठ गया और दोनों हाथों से मम्मी के बोबो को दबाने लगा और बीच बीच में मम्मी की चुत भी सहला देता। फिर हम बातें करने लगे। मैंने मम्मी को बता दिया के मैं उनकी चुदाई बचपन से देख रहा हूँ। ये सुनकर मम्मी हैरान हो गई। फिर मैंने मम्मी को वो किस्सा भी सुनाया जब मम्मी ने उन दो मर्दों से चुदवाया था। ये सब सुनकर फिर मम्मी कहने लगी के मैं क्या करती। तुम्हारे पापा तो कुछ करते नहीं थे और मुझसे रहा नहीं जाता था तो मुझे उनसे करवाना पड़ा। फिर मैंने मम्मी से कहा के मुझे पता है मम्मी। आपको उनसे करवाकर काफी खुश होती इस कारण मैंने अभी तक किसी को भी आपके बारे में नहीं बताया। मेरी बात सुनकर मम्मी मेरी तरफ मुँह करके बैठ गई और मुझे अपने सीने से लगा लिया। फिर मम्मी बोली के मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ। फिर मैं मम्मी से बोला के मैं भी आपको बहुत प्यार करता हूँ। फिर इतना कहकर मैंने मम्मी को लेटा लिया और मैं खुद मम्मी के ऊपर आ गया और मम्मी के ऊपर लेट गया। मम्मी ने भी अपने हाथ मेरी पीठ पर रख लिए और मेरी पीठ सहलाने लगी। फिर मम्मी बोली के तुझे सब कुछ पता है तो तेरा भी मुझ पर पूरा हक है। तेरे पापा कुछ दिन बाद कहीं जाने वाले है। उनके जाने के बाद तू मुझसे जैसे चाहे वैसे कर सकता है। लेकिन अभी नहीं। क्योंकि मुझे पता है अगर एक बार तू मुझसे कर लेगा तो मैं भी खुद को नहीं रोक पाऊँगी और के बार करने के बाद हम बस दिन रात करते ही रहेंगे। 

 

इस कारण हम तेरे पापा के जाने के बाद ही करेंगे। उससे पहले कुछ नहीं। मम्मी की बात सुनकर मैं काफी खुश हुआ। क्योंकि मम्मी ने चुदाई के लिए खुद ही मान गई थी। फिर मैं मम्मी के ऊपर से उतरकर साइड में लेट गया और अपना एक हाथ मम्मी की चुत पर रख लिया। फिर हम कुछ और बातें करने लगे। फिर मम्मी पेशाब करने गई तो मैं भी मम्मी के साथ चला गया। मम्मी पेशाब करने लगी तो मैं वहीं खड़ा होकर मम्मी की चुत से निकलता हुआ पेशाब देखना लगा। फिर मैं मम्मी के सामने बैठकर मम्मी की पेशाब की धार के सामने अपना हाथ कर दिया तो मम्मी का पेशाब मेरे हाथ पर गिरने लगा। ये देखकर मम्मी हंसने लगी। फिर मैंने अपना हाथ धो लिया। फिर पेशाब करके आने के बाद मम्मी ने मुझसे सोने के लिए कहा और वो खुद अपने कमरे में जाने लगी तो जाने से पहले मैंने मम्मी को पीछे से पकड़ लिया और दोनों हाथों से मम्मी के बोबे दबाने लगा और साथ में अपने लंड को मम्मी की गाँड पर मसलने लगा। फिर मैंने मम्मी को अपनी तरफ घूमा लिया और फिर मैं मम्मी के बोबो को चूसने लगा। फिर मेरा मन तो नहीं भरा था लेकिन फिर भी मैंने मम्मी को जाने दिया तो मम्मी जाकर पापा के पास लेट गई और फिर मैं भी अपना लंड सहलाता हुआ अपने कमरे में चला गया और फिर मैं सो गया। 

 

तब दोपहर का टाइम था और फिर 2 घंटे के बाद मम्मी मेरे कमरे में आई। मैं तब नंगा ही सोया था। फिर मम्मी ने मुझे आवाज दी तो मुझे जाग आ गई। फिर मैंने देखा के मम्मी भी अभी तक नंगी ही थी। फिर मैं उठकर खड़ा हुआ और जाकर मम्मी से चिपक गया और मम्मी के बोबो को और चुत को सहलाने लगा। फिर कुछ देर सहलाने के बाद मम्मी ने मुझे चाय पीने के लिए कहा। मम्मी मेरे लिए चाय लेकर आई थी। मेरा लंड खड़ा हो गया तो फिर एक हाथ से मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया। फिर मैं पेशाब करने के लिए जाने लगा तो मम्मी भी मेरे साथ साथ चलने लगी वो भी मेरा लंड पड़कर। हम आँगन में आ चुके थे और मम्मी ने अभी तक मेरा लंड पकड़ रखा था। फिर मम्मी का कमरा आया तो मम्मी अपने कमरे में चली गई और मैं पीछे पेशाब करने चला गया। फिर पेशाब करके आकर मैं चाय पीने लगा। मैंने जब से मम्मी को नंगी देखा था तब से मेरा बाहर जाने का बिल्कुल भी मन नहीं करता और मैं बस घर पर ही रहता ज्यादातर और अब तो मम्मी को भी सब पता चल गया था के मैं उन्हे बचपन से चुदते हुए देखता आ रहा हूँ तो उन्होंने भी अब मुझसे जो बची कूची शर्म थी वो भी करनी छोड़ दी। 

 

फिर शाम को मम्मी घर का काम करने लगी और मम्मी ने पापा को बाहर वाले कमरे मे बैठा दिया। फिर मैं भी अपने कमरे से बाहर आ गया और अपना लंड सहलाते हुए मम्मी के पीछे पीछे घूमने लगा और साथ में हम बातें करने लगे। मम्मी काम करती फिर रही थी तो कभी मैं मम्मी की गाँड सहला देता तो कभी उनके बोबे दबा देता और एक बार तो उन्हे पीछे से पकड़कर उनकी गाँड की दरार में लंड डाल दिया और रगड़ने लगा। फिर मम्मी खाना बनाने लगी तो मैं उनके सामने बैठ गया। फिर तब मेरा मन उनकी चुत चाटने को हुआ। वो तब बैठी थी तो फिर मैं उनके सामने लेट गया और उनकी चुत को चाटने लगा। फिर मम्मी अपने पैर फैलाकर और अपनी चुत थोड़ी ऊंची करके बैठ गई जिससे की मुझे उनकी चुत चाटने में काफी आसानी हो गई। वो साथ में खाना भी बनाती रही। खाना बनाने तक मैं उनकी चुत चाटता रहा। मैं भी गरम हो चुका था। तो फिर जब मेरा पानी निकलने वाला हुआ तो मैं घुटनों के बल खड़ा होकर अपना लंड हिलाने लगा तो फिर मम्मी ने खाना बनाकर छोड़कर मेरा लंड मुँह मे लिया और चूसने लगी और फिर मैं मम्मी के मुँह में ही झड़ गया और मम्मी ने मेरा सारा पानी पी लिया। फिर झड़ने के बाद भी मम्मी मेरा लंड कई देर तक सहलाती और देखती रही। 

 

फिर इतने में बाहर से पापा ने आवाज दी। तब मेरा लंड मम्मी के हाथ में था। फिर मम्मी उठकर बाहर चली गई और मैं किचन में ही छुप गया। फिर पापा चले गए तो फिर मैं किचन से निकलकर अपने कमरे मे चला गया। फिर थोड़ी देर बाद पापा अंदर आ गए और फिर नहाकर आँगन में लेट गए। मेरा कमरे वो लेटे थे उनके पीछे की तरफ था। मैं कमरे में नंगा ही बैठा था और फिर मम्मी वहाँ आई तो मैं अपने कमरे से बाहर निकलकर मम्मी को पीछे से पकड़ लिया और उनको दोनों बोबो को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगा। पहले तो मम्मी ने धीरे से कहा के तुम्हारे पापा देख लेंगे लेकिन फिर वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं कई देर तक ऐसे मम्मी के बदन को सहलाता रहा। फिर मम्मी मुझसे बोली के मैं तेरे पापा को खाना खिलाकर तेरे पास छत पर आ जाऊँगी। तू छत पर चला जा। फिर मैंने मम्मी को छोड़ दिया तो फिर मम्मी ने पापा को खाना परोस दिया और फिर वो किचन में चली गई और फिर मैं भी कपड़े पहनकर अपने कमरे से निकला और फिर छत पर चला गया। 

 

मैं छत पर जाकर फिर से नंगा हो गया और फिर नीचे देखना लगा के क्या हो रहा है। फिर मम्मी आँगन में इधर उधर घूमने लगी और फिर उन्होंने ऊपर देखा तो मैं उन्हे देखकर कल की तरह ही जाली से अपना लंड बाहर निकालकर हिलाने लगा। ये देखकर मम्मी को हंसी आ गई। फिर पापा के खाना खाने के बाद वो लेट गए तो फिर मम्मी चुपके से मेरा और अपना खाना डालकर ऊपर ले आई और फिर हम साथ में खाना खाने लगे। फिर खाना खाने के बाद मम्मी बोली के मैं कुछ देर मैं दूध लेकर आती हूँ और फिर वो नीचे चली गई। फिर मैं लेट गया और मम्मी का इंतजार करने लगा। फिर कुछ देर बाद मम्मी दूध लेकर आ गई और आकर मेरे पास लेट गई। फिर मैंने मम्मी से पूछा के आज तुम पूरा दिन नंगी ही रही हो। फिर ये सुनकर मम्मी बोली के अरे हाँ आज तो मैंने सुबह से एक बार भी कपड़े नहीं पहने है। फिर मम्मी ने मुझसे पूछा के तुम्हें मुझे नंगी देखना अच्छा लगता है क्या। फिर मैं बोला के हाँ। फिर मम्मी ने पूछा के जब तुम मुझे गैर मर्दों से चुदते हुए देखते थे तो तुम्हें गुस्सा नहीं आता था क्या। फिर मैं बोला के मुझे तुम्हें उनके साथ देखकर मजा आता था। ये सुनकर मम्मी हंसने लगी। फिर मैंने मम्मी से पूछा के तुम्हें चुदना पसंद है ना तो मम्मी खुश होकर बोली के बहुत। 

 

फिर ऐसे ही हम चुदाई की बातें करने लगे और मम्मी मुझसे पूछने लगी के तुमने किसी को चोदा है क्या फिर मैंने कहा के नहीं। फिर मम्मी मुझे चुदाई के बारे में बताने लगी। साथ में हम एक दूसरे की चुत और लंड को सहलाने लगे। फिर हम गरम हो गए तो फिर पहले मैं मम्मी की चुत चूसने लगा और फिर वो झड़ गई तो फिर उन्होंने भी मेरा लंड चूसा। इस प्रकार उस रात हमने 3-4 बार एक दूसरे के लंड और चुत को चूसा। फिर एक बार मैंने मम्मी के दोनों बोबो के बीच लंड डालकर रगड़ा भी। फिर आधी रात को मम्मी नीचे जाकर सो गई और मैं ऊपर ही सो गया। 

 

फिर अगले दिन से सब कुछ वैसे ही चलने लगा। मम्मी अब हरदम नंगी ही रहने लगी और मौका पाकर मैं मम्मी के बदन को सहला देता। फिर दोपहर और रात को हम एक दूसरे के लंड और चुत को चूसकर पानी निकाल देते। मम्मी को भी मेरे साथ मजा आने लगा था वो भी मेरे काम करती करती मेरे कमरे मे आ जाती और मेरे लंड को सहलाने लग जाती और कई बार तो चूस भी देती। फिर तो मैं भी मेरे कमरे मे नंगा रहने लगा। फिर एक बार यूं हुआ की शाम का टाइम था। पापा बाहर वाले कमरे से आँगन मे आए और फिर बेहोश होकर गिर पड़े। मम्मी तब किचन में थी और मैं अपने कमरे मे था। मम्मी ने पापा को आँगन में पड़ा हुआ देखा तो वो किचन से आँगन मे दौड़कर आई और साथ मे मुझे आवाज दी। मम्मी की आवाज सुनकर मैं उठकर कमरे के गेट तक गया और फिर देखा के पापा आँगन मे पड़े है और मम्मी उन्हे उठाने की कोशिश कर रही है। तब मैं नंगा था और कमरे के गेट पर खड़ा खड़ा अपना लंड सहलाता हुआ मम्मी और पापा को देख रहा था। फिर मुझे देखकर मम्मी मुझे फिर से आवाज देने लगी। मैं नंगा था तो मैं दुविधा मे पड़ गया के कपड़े पहनकर जाऊँ या ऐसे ही चला जाऊँ। लेकिन मम्मी आवाज पर आवाज दे रही थी तो मैं नंगा ही चला गया। 

 

फिर मैंने और मम्मी ने पापा को उठाकर अंदर कमरे मे ले गए और चारपाई पर सुला दिया। फिर मम्मी पानी लेकर आई और पापा के मुँह पर पानी के छींटे देने लगी। जिससे की पापा थोड़े थोड़े होश मे आने लगे। मैं और मम्मी तब नंगे थे तो मम्मी ने मेरी तरफ इशारा करके मुझे कपड़े पहनकर आने के लिए कहा। फिर मैं जल्दी से कपड़े पहनकर आ गया। मम्मी लगातार पापा के मुँह पर पानी के छींटे मार रही थी तो कुछ देर बाद पापा को पूरा होश हो आ गया। तब मम्मी एक दम नंगी ही थी। फिर होश में आने के बाद पापा कहने लगे के बस ऐसे ही चक्कर आ गया था। तब मम्मी एक दम नंगी थी और मैं भी वहीं खड़ा था लेकिन तब भी पापा ने कुछ नहीं कहा। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी ने आँगन में चारपाई लगा दी और फिर पापा और मैं बाहर आकर उस पर बैठ गए और मम्मी नंगी ही घर का काम कर रही थी और हम दोनों मम्मी को देख रहे थे। फिर खाना वगैरह बनाने के बाद मम्मी ने हम दोनों को खाना परोसा और खुद भी हमारे साथ बैठकर खाने लगी। मम्मी पैर चौड़े करके बैठी थी जिस कारण मम्मी की चुत साफ दिख रही थी। जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर खाना खाने के बाद पापा तो लेट गए और मम्मी बर्तन वगैरह साफ करने लगी। फिर मैं भी मम्मी के पास चला गया और फिर मम्मी ने मुझे नीचे ही सोने के लिए कहा।

 

फिर मम्मी ने मेरी और चारपाई वहीं पर लगा दी। फिर हम अपनी अपनी चारपाई पर लेट गए। रात हो चुकी थी। मम्मी की चारपाई बीच में थी। पापा तो सो चुके थे। मेरी और मम्मी की चारपाई आपस में चिपकी हुई थी। फिर मैं नंगा हो गया और अपने लंड को सहलाने लगा और मम्मी भी मुझे देखकर अपनी चुत सहलाने लगी। फिर मैं मम्मी की चारपाई पर चला गया और मम्मी के बोबो को चूसने लगा। मैं गरम हो चुका था तो फिर मम्मी उठी और मेरे लंड को चूसने लगी। पास मे ही पापा लेटे थे लेकिन हमें उनका बिल्कुल भी डर नहीं था। फिर मम्मी ने चूस चूस कर मेरे लंड का पानी निकाल दिया और फिर वो खुद लेट गई और अपने पैर हवा में ऊंचे कर लिए। फिर मैं जाकर मम्मी की चुत चूसने लगा। मम्मी सिसकारियाँ लेने लगी और फिर कुछ देर बाद वो भी शांत हो गई। फिर मम्मी मेरे और खुद के लिए दूध लेकर आई और फिर दूध पीकर हम फिर से एक दूसरे से चिपक कर लेट गए। मम्मी करवट लेकर लेटी थी तो मैंने लंड मम्मी के चूतड़ों में डाल दिया और फिर धीरे धीरे सहलाने लगा। 

 

फिर उस पूरी रात मैं मम्मी से चिपक कर सोता रहा। फिर अगले दिन सुबह मम्मी तो उठकर घर के काम मे लग गई और मैं मम्मी की चारपाई पर नंगा ही सोया रहा। फिर मम्मी मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे खड़े लंड को सहलाने लगी तब मुझे जाग आ गई। तब दिन पूरा निकल चुका था। पापा तब तक नहीं उठे थे। फिर मम्मी ने मुझे वहीं चाय लाकर दी और फिर चाय पीकर मैं और मम्मी दोनों साथ मे फ्रेश होने गए। तो हम दोनों टॉइलेट मे आगे पीछे बैठ गए। मम्मी मेरे आगे बैठी थी। फिर हम दोनों ने लेट्रिन कर ली और फिर मैंने मम्मी की गाँड धोई और फिर खुद की गाँड धोई। फिर मेरा मन मम्मी की गाँड चाटने का हुआ तो फिर मैंने टॉइलेट से बाहर निकलकर मम्मी को दीवार के सहारे खड़ा लिया और फिर मम्मी की गाँड चाटने लगा। मैंने मम्मी की गाँड चाटकर अपने थूक से गीली कर दी। फिर हम दोनों अन्दर गए। फिर मम्मी तो झाड़ू लगाने लगी और मैं नंगा ही रहा और मम्मी को देखकर अपना लंड सहलाता रहा। फिर थोड़ी देर बाद पापा उठ गए तो मैं अपने कमरे मे चला गया और फिर पापा चाय वगैरह पीकर बाहर जाकर बैठ गए तो मैं फिर से बाहर आ गया और फिर मम्मी के बदन को सहलाने लगा। 

 

इस प्रकार अब मम्मी को नंगी रहें का लाइसेन्स मिल गया था तो मैं मन करता तब मम्मी को पकड़ लेता और मजे करने लग जाता। मैं और मम्मी दोनों ही चुदाई के लिए तड़प रहे थे। अब तो कई बार ऐसा होता के पापा बाहर आँगन में बैठे रहते और मेरे कमरे में या किचन में मम्मी मेरा लंड चूस रही होती या मैं मम्मी की चुत चूस रहा होता। 

इस भाग में इतना ही, अगले बाग में बताऊँगा के पापा के जाने के बाद कैसे मैंने और मम्मी ने चुदाई की और फिर आगे क्या क्या हुआ...

 

आपको यह कहानी कैसी लगी, कृपया कमेन्ट करके जरूर बताएं। 

 

मेरी मदमस्त मम्मी - 2

संबधित कहानियां
विधवा मम्मी ने अपने बेटे से चुदकर अपनी प्यास बुझाई
विधवा मम्मी ने अपने बेटे से चुदकर...
जिसकी मम्मी ऐसी हो उसे और क्या चाहिए
जिसकी मम्मी ऐसी हो उसे और क्या...
मम्मी पोंछा लगा रही थी तो बेटे ने ये कर दिया
मम्मी पोंछा लगा रही थी तो बेटे...

कमेंट्स


कमेन्ट करने के लिए लॉगइन करें या जॉइन करें

लॉगइन करें  या   जॉइन करें
  • अभी कोई कमेन्ट नहीं किया गया है!