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गाँव का हरामी लाला 
@Kamvasna 05 मई, 2023 131226

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राजस्थान में एक गाँव के सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली 2 अल्हड़, जवान लड़कियाँ  रीतु और मीनू । बचपन की सहेलियाँ , जो आपस में पड़ोसी भी है.

 

वो दोनो लगभग भागती हुई सी लाला जी की दुकान पर पहुँची..

रीतु : ”लाला जी, लालाजी , 2 कोल्ड ड्रिंक दे दो और 1 बिस्कुट का पैकेट , पैसे पापा शाम को देंगे…”

लाला जी ने नज़र भर कर दोनो को देखा
उनके सामने पैदा हुई ये फूलों की कलियाँ पूरी तरह से पक चुकी थी
उन दोनो ने छोटी-2 स्कर्ट के साथ – साथ कसी हुई टी शर्ट पहनी हुई थी..जिसके नीचे ब्रा भी नही थी..

उनके उठते-गिरते सीने को देखकर
और उनकी बिना ब्रा की छातियो के पीछे से झाँक रहे नुकीले गुलाबी निप्पल्स को देखकर
उन्होने अपने सूखे होंठो पर जीभ फेरी..

”अरे, जो लेना है ले लो रीतु, पैसे कौनसा भागे जा रहे है…जा , अंदर से निकाल ले कैम्पा ..”

उन्होने दुकान के पिछले हिस्से में बने एक दूसरे कमरे में रखे फ्रिज की तरफ इशारा किया..

दोनो मुस्कुराती हुई अंदर चल दी

इस बात से अंजान की उस बूढ़े लाला की भूखी नज़रें उनके थिरक रहे नितंबो को देखकर, उनकी तुलना एक दूसरे से कर रहीं है
पर उनमे भरी जवानी की चर्बी को वो सही से तोल भी नही पाए थे की उनके दिल की धड़कन रोक देने वाला दृश्य उनकी आँखो के सामने आ गया..

रीतु ने जब झुककर फ्रीज में से बॉटल निकाली तो उसकी नन्ही सी स्कर्ट उपर खींच गयी, और उसकी बिना चड्डी की गांड लाला जी के सामने प्रकट हो गयी…

कोई और होता तो वहीं का वहीं मर जाता
पर लाला जी ने बचपन से ही बादाम खाए थे
उनकी वजह से उनका स्ट्रॉंग दिल फ़ेल होने से बच गया..

पर साँस लेना भूल गये बेचारे …
फटी आँखो से उन नंगे कुल्हो को देखकर उनका हाथ अपनी घोती में घुस गया…
और अपने खड़े हो चुके लंड की कसावट को महसूस करके उनके शरीर का रोँया-2 खड़ा हो गया..लंड से निकल रहा प्रीकम उनके हाथ पर आ लगा

उन्होने झट्ट से सामने पड़े मर्तबान से 2 क्रीम रोल निकाले और उसे अपनी धोती में घुसा कर अपने लंड पर रगड़ लिया
उसपर लगी क्रीम लाला जी के लंड पर चिपक गयी और लाला जी के लंड का पानी क्रीम रोल पर..

जब दोनो बाहर आई तो लाला जी ने बिस्कुट के पैकेट के साथ वो क्रीम रोल भी उन्हे थमा दिए

और बोले : “ये लो , ये स्पेशल तुम दोनो के लिए है…मेरी तरफ से ”

दोनो उसे देखते ही खुश हो गयी, ये उनका फेवरेट जो था, उन्होने तुरंत वो अपने हाथ में लिया और उस रोल
को मुँह में ले लिया…

लाला जी का तो बुरा हाल हो गया

जिस अंदाज से दोनो ने उसे मुँह में लिया था
उन्हे ऐसा लग रहा था जैसे वो उनका लंड चूस रही है…

लालाजी के लंड का प्रीकम उन्होंने अपनी जीभ से समेट कर निगल लिया
उन्हे तो कुछ पता भी नही चला पर उन दोनो को अपने लंड का पानी चाटते देखकर लाला जी का मन आज कुछ करने को मचल उठा.. .

दोनो उन्हे थेंक्यु लालाजी बोलकर हिरनियों की तरह उछलती हुई बाहर निकल गयी..

लालाजी की नज़रें एक बार फिर से उनके कूल्हों पर चिपक कर रह गयी…
और हाथ अपने लंड को एक बार फिर से रगड़ने लगा..

वो फुसफुसाए ‘साली….रंडिया….बिना ब्रा और कच्छी के घूम रही है….इन्हे तो चावल की बोरी पर लिटाकर रगड़ देने को मन करता है…सालियों ने सुबह –2 लंड खड़ा करवा दिया…अब तो कुछ करना ही पड़ेगा…”

इतना कहकर उन्होने जल्दी से दूकान का शटर डाउन किया और दुकान के सामने वाली गली में घुस गये
वहां रहने वाली शबाना को वो काफ़ी सालो से चोदते आ रहे थे…
वो लालाजी से चुदाई करवाती और उसके बदले अपने घर का राशन उनकी दुकान से उठा लाती थी..

लालाजी की दुकान से निकलते ही रीतु और मीनू ज़ोर-2 से हँसने लगी…

रीतु : “देखा, मैं ना कहती थी की वो ठरकी लाला आज फिर से क्रीम रोल देगा…चल अब जल्दी से शर्त के 10 रूपए निकाल”

मीनू ने हंसते हुए 10 का नोट निकाल कर उसके हाथ पर रख दिया और बोली : “हाँ …हाँ ..ये ले अपने 10 रूपए …मुझे तो वैसे भी इसके बदले क्रीम रोल मिल गया है…”

और एक बार फिर से दोनो ठहाका लगाकर हँसने लगी..

मीनू : “वैसे तेरी डेयरिंग तो माननी पड़ेगी रीतु, आज तूने जो कहा, वो करके दिखा दिया, बिना कच्छी के तेरे नंगे चूतड़ देखकर उस लाला का बुरा हाल हो रहा था…तूने देखा ना, कैसे वो फटी आँखो से तेरे और मेरे सीने को घूर रहा था…जैसे खा ही जाएगा हमारे चुच्चो को…”

रीतु : “और तू भी तो कम नही है री..पहले तो कितने नाटक कर रही थी की बिना ब्रा के नही जाएगी, तेरे दाने काफ़ी बड़े है, दूर से दिखते है…पर बाद में तू सबसे ज़्यादा सीना निकाल कर वही दाने दिखा रही थी…साली एक नंबर की घस्ति बनेगी तू बड़ी होकर…”

इतना कहकर वो दोनो फिर से हँसने लगी…
लालाजी को तरसाकर उनसे चीज़े ऐंठने का ये सिलसिला काफ़ी दिनों से चल रहा था
और दिन ब दिन ये और भी रोचक और उत्तेजक होता जा रहा था..

दूसरी तरफ, लालाजी जब शबाना के घर पहुँचे तो वो अपनी बेटी को नाश्ता करवा रही थी…
लालाजी को इतनी सुबह आए देखकर वो भी हैरान रह गयी पर अंदर से काफ़ी खुश भी हुई…
आज लालजी बिना कहे ही आए थे, यानी उन्हे चुदाई की तलब बड़े ज़ोर से लगी थी..
उसके घर का राशन भी ख़त्म हो चुका था,
उन्हे खुश करके वो शाम को दुकान से समान भी ला सकती थी..

उसने लालाजी को बिठाया और अपनी बेटी को बाहर खेलने भेज दिया..

दरवाजा बंद करते ही लालाजी ने अपनी धोती उतार फेंकी..
अंदर वो कभी कुछ नही पहनते थे…

52 साल की उम्र के बावजूद उनका लंड किसी जवान आदमी के लंड समान अकड़ कर खड़ा था…

शबाना : “या अल्ला, आज इसे क्या हो गया है…लगता है लालाजी ने आज फिर से कच्ची जवानी देख ली है…”

वो लालाजी की रग-2 जानती थी..

लालाजी के पास कुछ कहने-सुनने का समय नही था
उन्होने शबाना की कमीज़ उतारी और उसकी सलवार भी नोच कर फेंक दी..
बाकी कपड़े भी पलक झपकते ही उतर गये…

अब वो उनके सामने नंगी थी…

पर उसे नंगा देखकर भी उनके लंड में वो तनाव नही आ रहा था जो रीतु की गांड की एक झलक देखकर आ गया था..

लालाजी उसके रसीले बदन को देखे जा रहे थे और शबाना ने अपनी चूत में उंगली घुसाकर अपना रस उन्हे दिखाया और बोली : “अब आ भी जाओ लालाजी , देखो ना, मेरी मुनिया आपको देखकर कितना पनिया रही है….जल्दी से अपना ये लौड़ा मेरे अंदर घुसा कर इसकी प्यास बुझा दो लाला….आओ ना…”

उस रसीली औरत ने अपनी रस में डूबी उंगली हिला कर जब लालाजी को अपनी तरफ बुलाया तो वो उसकी तरफ खींचते चले गये..
एक पल के लिए उनके जहन से रीतु और मीनू का चेहरा उतर गया..

वो अपना कड़क लंड मसलते हुए आगे लाए और शबाना की चूत पर रखकर उसपर झुकते चले गये…

लालाजी का वजन काफ़ी था
उनके भारी शरीर और मोटे लंड के नीचे दबकर उस बेचारी शबाना की चीख निकल गयी…

”आआआआआआआआआआआआअहह लालाजी ,……. मार डाला आपने तो…….. ऐसा लग रहा है जैसे कोई सांड चोद रहा है मुझे….. अहह……चूत फाड़ोगे क्या मेरी आज ….”

लालाजी भी चिल्लाए : “भेंन की लौड़ी …..तेरी चूत में ना जाने कितने लंड घुस चुके है, फिर भी तेरी चूत इतनी कसी हुई है…..साली…….कौनसा तेल लगती है इसपर…”

शबाना : “आआआआआअहह….आपकी ही दुकान का तेल है लालाजी ….आज सुबह ही ख़त्म हुआ है…शाम को फिर से लेने आउंगी ….”

उसने चुदाई करवाते-2 ही अपने काम की बात भी कर ली..

लालाजी भी जानते थे की वो कितनी हरामी टाइप की औरत है
पर चुदाई करवाते हुए वो जिस तरह खुल कर मस्ती करती थी
उसी बात के लिए लालाजी उसके कायल थे…

लालाजी ने अपने लंड के पिस्टन से उसकी चूत को किसी मशीन की तरह चोदना जारी रखा..

शबाना : “आआआआआहह लालाजी …आज तो कसम से आपके बूड़े शरीर में जैसे कोई ताक़त आ गयी है….किस कली को देख आए आज….अहह”

लालाजी बुदबुदाए : “वो है ना साली….दोनो रंडिया…अपने मोहल्ले की….रीतु और मीनू….साली बिना ब्रा पेंटी के घूमती है आजकल ……साली हरामजादियाँ …..आज तो कसम से उन्हे दुकान पर ही ठोकने का मन कर रहा था….”

शबाना हँसी और बोली : “उन दोनो ने तो पुर मोहल्ले की नींद उड़ा रखी है लालाजी …. उफफफफ्फ़….उन्हे देखकर मुझे अपनी जवानी के यही दिन याद आ गये…… अहह….. मैने तो इस उम्र में खेत में नंगी खड़ी होकर अपनी चूत मरवाई थी और वो भी 4 लौड़ो से…..और कसम से लालजी, आज भी वैसी ही फीलिंग आ रही है जैसे एक साथ 4 लंड चोद रहे है मुझे….”

लालाजी को वो अपनी जवानी के किस्से सुना रही थी और लालाजी एक बार फिर से रीतु और मीनू के ख़यालो में डूबकर उसकी चूत का बाजा बजाने लगे…

और जल्द ही, रीतु और मीनू के नाम का ढेर सारा रसीला प्रसाद उन्होने शबाना की चूत में उड़ेल दिया…

उसके बाद लालाजी ने अपने कपड़े पहने और बिना कुछ कहे बाहर निकल गये…

दुकान खोलकर वो फिर से अपने काम में लग गये पर उनका मन नही लग रहा था…
अब उन्हे किसी भी हालत में उन दोनो को अपनी बॉटल में उतारना था और उसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार थे.

लालाजी का साहूकारी का भी काम था और गाँव के लोग अक्सर उनसे ऊँचे रेट पर पैसे ले जाते थे…
वैसे तो लालाजी का रोब ही इतना था की बिना कहे ही हर कोई उनकी दुकान पर आकर सूद के पैसे हर महीने दे जाता था, पर फिर भी कई बार उन्हे अपना लट्ठ लेकर निकलना ही पड़ता था वसूली करने …

उनका रोबीला अंदाज ही काफ़ी होता था गाँव के लोगो के लिए, इसलिए जब वो उगाही करने जाते तो पैसे निकलवा कर ही वापिस आते…

लालाजी की पत्नी को मरे 5 साल से ज़्यादा हो चुके थे…
उनकी एक बेटी थी जो साथ के गाँव में ब्याही हुई थी…
शादी के बाद उसने भी एक फूल जैसी बच्ची को जन्म दिया था और वो भी अब 18 की हो चली थी और अक्सर अपने नाना से मिलने, अपनी माँ के साथ उनके घर आया करती थी..

पर जब से लालाजी की बीबी का देहांत हुआ था, उसके बाद से उनकी सैक्स लाइफ में बहुत बदलाव आए थे…
पहले तो उनकी सैक्स लाइफ नीरस थी…
2-4 महीने में कभी कभार उनकी बीबी राज़ी होती तो उसकी मार लेते थे…
पर बीबी के जाने के बाद उनके चंचल मन ने अंगडाइयाँ लेनी शुरू कर दी…
शबाना के साथ भी उनके संबंध उसी दौरान हुए थे…
वो अक्सर उनकी दुकान से समान उधार ले जाती और पैसे लाटाने के नाम पर अपनी ग़रीबी की दुहाई देती…

ऐसे ही एक दिन जब लालाजी उसके घर गये और पैसे का तक़ाज़ा किया तो उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और लाला जी के कदमो मे बैठ गयी…

बस एक वो दिन था और एक आज का दिन है, ऐसा शायद ही कोई हफ़्ता निकलता होगा जब लालाजी का लंड उसकी चूत में जाकर अपनी वसूली नहीं करता था .. बदले में वो अपने घर का राशन बिना किसी रोक टोक के उठा लाती..

पर एक ही औरत को चोदते –2 अब लालजी का मन ऊब सा चुका था…
उनके सामने जब गाँव की कसी हुई जवानियां, अपने मादक शरीर को लेकर निकलती तो उनके लंड का बुरा हाल हो जाता था… और ये बुरा हाल ख़ासकर रीतु की कच्ची अम्बियों को देखकर होता था…

उन दोनो की कामुक हरकतों ने लालाजी का जीना हराम कर रखा था..

खैर, आज जब लालजी ने अपना बही ख़ाता खोला तो उन्होने पाया की रामदीन ने जो पैसे उधार लिए थे, उसका सूद नही आया है अब तक…
रामदीन दरअसल रीतु का पिता था..
बस , फिर क्या था…
लालजी की आँखो में एक चमक सी आ गयी..

उन्होने झत्ट से अपना लट्ठ उठाया, दुकान का शटर नीचे गिराया और चल दिए रीतु के घर की तरफ..

वहां पहुँचकर उन्होने दरवाजा खटकाया पर काफ़ी देर तक कोई बाहर ही नही निकला…
एक पल के लिए तो लालजी को लगा की शायद अंदर कोई नही है…
पर तभी उन्हे एक मीठी सी आवाज़ सुनाई दी..

”कौन है….”

लालाजी के कान और लंड एकसाथ खड़े हो गये…
ये रीतु की आवाज़ थी.

वो अपने रोबीले अंदाज में बोले : “मैं हूँ …लाला…”

अंदर खड़ी रीतु का पूरा शरीर काँप सा गया लालाजी की आवाज़ सुनकर…
दरअसल वो उस वक़्त नहा रही थी…

और नहाते हुए वो सुबह वाली बात को याद करके अपनी मुनिया को मसल भी रही थी की कैसे उसने और मीनू ने मिलकर लालाजी की हालत खराब कर दी थी…
और अपनी चूत मसलते हुए वो ये भी सोच रही थी की उसकी नंगी गांड को देखकर लालाजी कैसे अपने खड़े लंड को रगड़ रहे होंगे…
पर अचानक दरवाजा कूटने की आवाज़ ने उसकी तंद्रा भंग कर दी थी..
काफ़ी देर तक दरवाजा पीटने की आवाज़ सुनकर वो नंगी ही भागती हुई बाहर निकल आई थी क्योंकि उसके अलावा घर पर इस वक़्त कोई नही था..
उसके पिताजी खेतो में थे और माँ उन्हे खाना देने गयी हुई थी..

रीतु के शरारती दिमाग़ में एक और शरारत ने जन्म ले लिया था अब तक..

रीतु बड़े सैक्सी अंदाज में बोली : “नमस्ते लालाजी …कहिए…कैसे आना हुआ…”

लालाजी ने इधर उधर देखा, आस पास देखने वाला कोई नही था…

वो बोले : “अर्रे, दरवाजा बंद करके भला कोई नमस्ते करता है…दरवाजा खोल एक मिनट…. बड़ी देर से खड़का रहा हूँ, तेरे पिताजी से जरुरी काम है ”

रीतु : “ओह्ह …लालाजी …माफ़ करना…पर..मैं नहा रही थी…दरवाजे की आवाज़ सुनकर ऐसे ही भागती आ गयी…नंगी खड़ी हूँ , इसलिए दरवाजा नही खोल रही…एक मिनट रूको..मैं कुछ पहन लेती हूँ …”

उफफफफ्फ़…..
एक तो घर में अकेली…
उपर से नहा धोकर नंगी खड़ी है….
हाय ….
इसकी इसी अदाओं पर तो लालाजी का लंड उसका दीवाना है…

उसने ये सब दरवाजे के इतने करीब आकर, अपनी रसीली आवाज़ में कही थी की दरवाजे के दूसरी तरफ खड़े लालाजी का लंड उनकी धोती में खड़ा होकर दरवाजे की कुण्डी से जा टकराया…

लालाजी दम साधे उसके दरवाजा खोने का इंतजार करने लगे..

एक मिनट में जब दरवाजा खुला तो रीतु को देखकर उनकी साँसे तेज हो गयी….
वो जल्दबाज़ी में एक टॉवल लपेट कर बाहर आ गयी थी…
उसने सिर्फ टॉवल पहना हुआ था और कुछ भी नही…
और उपर से उसके गीले शरीर से पानी बूंदे सरकती हुई उसके मुम्मों के बीच जा रही थी..

लालाजी का दिल धाड़-2 करने लगा..वो उनके सामने ऐसे खड़ी थी जैसे ये पहनावा उसके लिए आम सी बात है, पर अंदर से वो ही जानती थी की उसका क्या हाल हो रहा है

रीतु : “हांजी लालाजी ,आइए ना अंदर…बैठिये …”

लालाजी अंदर आ गये और बरामदे में पड़ी खाट पर जाकर बैठ गये…
उनकी नज़रें रीतु के बदन से ही चिपकी हुई थी…
आज वो सही तरह से उसके शरीर की बनावट को देख पा रहे थे…

रीतु की कमर में एक कटाव पैदा हो चुका था जो उसके रसीले कुल्हो की चौड़ाई दर्शाते हुए नीचे तक फैलता हुआ दिख रहा था…
ब्रा तो वो पहले भी नही पहनती थी इसलिए उसकी गोलाइयों का उन्हे अच्छे से अंदाज़ा था…
करीब 32 का साइज़ था उसके गुलगुलो का..
और उनपर लगे कंचे जितने मोटे लाल निप्पल….
उफफफ्फ़..
उनकी नोक को तो लालजी ने कई बार अपनी आँखो के धनुषबान से भेदा था..

रीतु : “लालाजी …पानी…..ओ लालाजी …..पानी लीजिए….”

लालाजी को उनके ख़यालो से, लंड के बाल पकड़ कर बाहर घसीट लाई थी रीतु, जो उनके सामने पानी का ग्लास लेकर खड़ी थी..

नीचे झुकने की वजह से उस कॉटन के टॉवल पर उसकी जवानी का पूरा बोझ आ पड़ा था…
ऐसा लग रहा था जैसे पानी के गुब्बारे, कपड़े में लपेट कर लटका दिए है किसी ने…
और उनपर लगे मोटे निप्पल उस कपड़े में छेद करके उसकी जवानी का रस बिखेरने तैयार थे…

पर इन सबसे अंजान बन रही रीतु, भोली सी सूरत बना कर लालाजी के पास ही बैठ गयी और बोली : “पिताजी तो शाम को ही मिलते है लालाजी , आपको तो पता ही है…और माँ उनके लिए खाना लेकर अभी थोड़ी देर पहले ही निकली है…घंटा भर तो लगेगा उन्हे भी लोटने में …”

लालाजी को जैसे वो ये बताना चाह रही थी की अगले एक घंटे तक वो अकेली ही है घर पर …

लालाजी ने उसके गोरे बदन को अपनी शराबी आँखो से चोदते हुए कहा : “अर्रे, मैं ठहरा व्यापारी आदमी, मुझे क्या पता की कब वो घर पर रहेगा और कब खेतो में …मुझे तो अपने ब्याज से मतबल है…आज ही देखा मैने, 20 दिन उपर हो चुके है और ससुरे ने ब्याज ही ना दिया…”

लालाजी अपनी आवाज़ में थोड़ा गुस्सा ले आए थे…
रीतु ने तो हमेशा से ही उनके मुँह से मिठास भरी बातें सुनी थी…
इसलिए वो भी थोड़ा घबरा सी गयी…

वो बोली : “लालाजी …इस बार बापू ने नयी मोटर लगवाई है खेतो में, शायद इसलिए पैसो की थोड़ी तंगी सी हो गयी है….”

वैसे तो उसका सफाई देने का कोई मतलब नही था पर लालाजी ताड़ गये की उसे अपनी फैमिली की कितनी चिंता है…

लालाजी : “देख रीतु, तेरा बापू मोटर लगवाए या मोटर गाड़ी लेकर आए, मेरे पैसे टाइम से ना मिले तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ …”

लालाजी का ये रूप देखकर अब रीतु को सच में चिंता होने लगी थी…
उसने सुन तो रखा था की लालाजी ऐसे लोगो से किस तरह का बर्ताव करते है पर ये नही सोचा था की उसके बापू के साथ भी ऐसा हो सकता है…

उसने लालाजी के पाँव पकड़ लिए : “नही लालजी…आप ऐसा ना बोलो…मेरा बापू जल्दी ही कुछ कर देगा…आप ऐसा ना बोलो…थोड़े दिन की मोहलत दोगे तो वो आपके सूद के पैसे दे देंगे..”

लालाजी ने उसकी बाहें पकड़ कर उपर उठा लिया….
उस नन्ही परी की आँखो में आँसू आ रहे थे..

लाला : “अर्रे…तू तो रोने लगी…अर्रे ना….ऐसा ना कर…..मैं इतना भी बुरा ना हू जितना तू सोचन लाग री है”

बात करते-2 लालाजी ने उसे अपने बदन से सटा सा लिया…
उसके जिस्म से निकल रही साबुन की भीनी –2 खुश्बू लालाजी को पागल बना रही थी…
पानी की बूंदे अभी तक उसके शरीर से चो रही थी…
लालाजी की धोती में खड़ा छोटा पहलवान एक बार फिर से हरकत में आया और उसने अपने सामने खड़ी रीतु को झटका मारकर अपने अस्तित्व का एहसास भी करवा दिया..

एक पल के लिए तो रीतु भी घबरा गयी की ये क्या था जो उसके पेट से आ टकराया…
उसने नज़रें नीचे की तो लालाजी की धोती में से झाँक रहे उनके मोटे लंड पर उसकी नज़र पड़ी, जो बड़ी चालाकी से अपना चेहरा बाहर निकाल कर रीतु के बदन को टच कर रहा था…

वो तो एकदम से डर गयी…

आज से पहले उसने लंड का सिर्फ़ नाम ही सुना था
कभी देखा नही था…
ये तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई काली घीस हो…उसकी कलाई कितना मोटा था और लगभग उतना ही लम्बा

उसने घबराकर लालाजी को धक्का दिया और दूर जाकर खड़ी हो गयी…
लालाजी ने भी अपने पालतू जानवर को वापिस उसके पिजरे में धकेल दिया और हंसते हुए चारपाई पर वापिस बैठ गये…

उन्हे तो पता भी नही चला की रीतु ने उनका जंगली चूहा देख लिया है..

लालाजी : “चल, तेरी बात मानकर मैं कुछ दिन और रुक जाता हूँ …इसी बात पर एक चाय तो पीला दे….”

रीतु बेचारी सहमी हुई सी अंदर गयी और चाय बनाने लगी…
उसके जहन में रह-रहकर लालाजी के लंड की शक्ल उभर रही थी…
उसने तो सोचा था की गोरा-चिट्टा , सुंदर सा लंड होता होगा…
जिसे सहलाने में , दबाने में , चूसने में मज़ा मिलता है
इसलिए लड़किया उसकी दीवानी होती है….
उसे क्या पता था की वो निगोडा ऐसा कालू निकलेगा..

जैसे-तैसे उसने चाय बनाई और लालाजी को देने पहुँच गयी..
लालाजी की नज़रें उसके अंग-2 को भेदने में लगी थी, ये बात तो उसे भी अच्छे से पता थी
पर उसे भी तो उन्हे अपना शरीर दिखाकर सताने में मज़ा आता था…

खैर, चाय पीकर लालाजी चले गये…
और उसने आवाज़ देकर अपनी सहेली सोनी को अपने घर बुला लिया..
और उसे लालाजी के घर आने के बाद से लेकर जाने तक का पूरा किस्सा विस्तार से सुनाया..

सोनी : “यार, तू दिन ब दिन बड़ी हरामी होती जा रही है…. पहले तो तू लालजी को सताती थी अपना बदन दिखाकर और आज तुझमे इतनी हिम्मत आ गयी की उनका हथियार भी देख लिया तूने…”

रीतु : “अररी, मैने जान बूझकर नही देखा री…वो तो बस….शायद…मुझे ऐसी हालत में देखकर उनका वो काबू में नही रहा…इसलिए बाहर निकल आया…”

उसने शर्माते हुए ये कहा

सोनी : “ओये, रहने दे तू …तुझे मैं अच्छे से जानती हूँ ….पिछले कुछ दिनों से तू कुछ ज़्यादा ही उड़ने लगी है….यही हाल रहा ना तो जल्द ही चुद भी जाएगी, देख लेना…”

रीतु : “मुझे चुदने की इतनी भी जल्दी नही है री….और ऐसे लंड से चुदने में तो बिल्कुल भी नही….एकदम काला नाग था लाला का लंड …सच में सोनी, देखकर ही घिन्न सी आ रही थी…डर भी लग रहा था…”

सोनी : “तो तूने क्या सोचा था, जैसी इंसान की शक्ल होती है, वैसा ही उनका लंड भी होता है….हा हा…. वो तो सबका ही काला होता है पागल… बस ये देखना है की वो कितना लंबा है और कितना मोटा…और चुदाई करने में कितनी देर तक अकड़ कर रहता है….”

रीतु : “तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तूने पी एच डी कर ली है इसमें …”

सोनी : “यार, तुझे तो पता है ना…आजकल मीनल दीदी आई हुई है घर पर….कल रात मैं उनसे इसी बारे में बाते कर रही थी…और हम दोनो आपस में बहुत खुली हुई है, तुझे भी पता है…इसलिए उन्होने ये सब बातें बड़े विस्तार से बताई मुझे…”

मीनल दरअसल सोनी की बड़ी बहन थी…
जिसकी शादी 2 साल पहले अजमेर में हुई थी….
3-4 महीने में 1 बार वो घर पर आ जाया करती थी..

रीतु : “हम्म ….. हो सकता है उनकी बात सही हो…पर मुझे नही लगता की मैं कभी ऐसे लंड से चुद पाऊँगी ..”

सोनी : “चुदने की बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे तू लालजी के लंड को अंदर लेने को पहले से ही तैयार थी…और अब उसका रंग देखकर मना कर रही है…”

रीतु : “तू चाहे जो भी समझ….पर मुझे नही लगता की मैं कभी चुदाई के बारे में पहले जैसा सोच पाऊँगी …”

बात तो सही थी….
पिछले कुछ दिनों से वो दोनो अक्सर चुदाई की ही बातें किया करती थी…
और लालाजी से पंगे लेने के भी नये-2 तरीके सोचा करती थी..
और ऐसा नही था की गाँव में और लड़के नही थे
वो लालाजी के साथ ही ऐसा इसलिए किया करती थी की ऐसा करने में बदनामी का डर कम था
क्योंकि लालाजी किसी से ज़्यादा बात नही किया करते थे…और उनसे लोग डरते भी थे.
दूसरे लड़को के साथ ऐसी हरकत करने की देर थी की पूरा गाँव उनके पीछे पड़ जाना था..
पर लालाजी के साथ अपने हिसाब से पंगे लेकर वो भी खुश रहती थी और लालजी को भी उनके हिस्से की खुशी मिल जाती थी.
साथ में फ्री का क्रीमरोल तो था ही.

सोनी ने उसे समझाते हुए कहा : “अच्छा तू मुझे एक बात बता….ये लोग अक्सर छुप कर…अंधेरे में .. और रात में ही सैक्स क्यों करते है…”

रीतु ने उसे गोल आँखे करके देखा और बोली : “पता नही…”

सोनी : “वो इसलिए की लंड के रंग और रूप से उन्हे कोई लेना देना नही होता….वो अंदर जाकर कैसा मज़ा देगा सिर्फ़ यही मायने रखता है…बाकी सबकी अपनी-2 सोच है…”

रीतु ने सोचा की बात तो सोनी सही कह रही है….
उसके माँ बाप भी तो सभी के सोने के बाद नंगे होकर चुदाई करते थे…
और वो भी बत्ती बुझा कर…
एक-दो बार उसने सोने का बहाना करके , अंधेरे कमरे में उनके नंगे शरीर की हरकत ही देखी थी…
पर उसे देखकर वो सिर्फ़ उनके मज़े को ही महसूस कर पाई थी, उन दोनो के अंगो को नही देख पाई थी..

रीतु : “हम्म्म ..शायद तू सही कह रही है…”

सोनी : “अच्छा , ज़रा डीटेल में बता ना…कैसा था लालाजी का लंड …”

रीतु की आँखो में गुलाबीपन उतर आया….
वो शरमाते हुए बोली : “यार….मैं तो इतना डर सी गयी थी की उसे ढंग से देख भी नही पाई….बस ये समझ ले की….इतना मोटा था आगे से….”

उसने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली को मिलाकर एक गोला बनाया और सोनी को दिखाया…

सोनी : “सस्स्स्स्स्स्स्सस्स…. हाय …… तू कितनी खुशकिस्मत है….. तूने अपनी लाइफ का पहला लंड देख भी लिया….मैं एक बार फिर तुझसे पीछे रह गयी…”

दोनो खिलखिलाकर हंस पड़ी…

और फिर कुछ सोचकर सोनी बोली : “यार, अगर तू बोल रही है की उनका आगे से इतना मोटा था तो सच में उनसे चुदाई करवाने में काफ़ी मज़ा आएगा…”

रीतु उसके चेहरे को देखकर सोचने लगी की उसकी बात का मतलब क्या है..

सोनी : “मैं तुझे बता रही थी ना मीनल दीदी के बारे में .. उन्होने ही मुझे बताया था… उनके पति यानी मेरे जीजाजी का लंड तो सिर्फ़ इतना मोटा है जितना मेरा अंगूठा…और इतना ही लंबा…बस….इसलिए वो ज़्यादा एंजाय भी नही कर पाती…”

रीतु खुली आँखो से ऐसे लंड को इमेजीन करने लगी जो अंगूठे जितना मोटा और लंबा हो….
और उसके बारे में सोचकर उसे कुछ ज़्यादा एक्साइटमेंट भी नही हुई…
सोचने में ही ऐसा लग रहा है तो अंदर जाकर भला कौन सा तीर मार लेना है ऐसे लंड ने…

इससे अच्छा तो मोटा लंड ही है….
चूत फांके चीरता हुआ जब वो अंदर जाएगा तो कितना मज़ा मिलेगा…
ये सोचकर ही उसकी चूत में एक कसक सी उठी और गीलेपन का एहसास रीतु को दे गयी…

”उम्म्म्मममममममम…… अब ऐसी बाते करेगी तो मुझे फिर से कुछ होने लगेगा…”

यही वो शब्द थे जिन्हे सुनने के लिए सोनी इतनी मेहनत कर रही थी…

वो उसके करीब आई और अपनी जीभ से उसके होंठो को चाटते हुए बोली : “तो कौन बोल रहा है साली की सब्र कर… दिखा दे अपनी रसीली चूत एक बार फिर….लालाजी का नाम लेकर…”

सोनी अपनी सहेली की रग-2 से वाकिफ़ थी….
और शायद अंदर से ये भी जानती थी की लालाजी से चुदने के सपने वो कई दिनों से देख रही है….
ऐसे मौके पर एक बार फिर से लालाजी का नाम लेकर उसने फिर से उसकी चूत का रस पीने का प्रोग्राम पक्का कर लिया…

सोनी को भी इस खेल में मज़ा आता था…
और आए भी क्यो नही, भले ही एक लड़की का दूसरी लड़की के साथ ऐसा रिश्ता ग़लत होता है पर जब तक उनकी चूत में किसी का लंड नही जा सकता तब तक अपनी पक्की सहेली की जीभ तो घुस्वा ही सकते है वो दोनो…
और जब से सोनी ने उसकी चूत का रस पिया था, तब से तो वो उसके नशीले रस की दीवानी सी हो चुकी थी…
हालाँकि उसने खुद अपनी चूत का रस भी उंगली डालकर चखा था..
पर उसमे वो नशा नही था जो रीतु की चूत से निकले रस का था….
जैसे पहली धार की कच्ची शराब हो ….
ठीक वैसा नशा था उसका…

और ये सब बाते करने के पीछे उसका मकसद एक बार फिर से उसकी चूत का रस पीने का था…

सोनी ने जैसे ही रीतु के होंठो को चाटा
उसके तो कुत्ते फैल हो गये…
वो भी उसके होंठो पर टूट पड़ी…
सोनी ने उसकी टॉवल को खींच कर कागज़ की तरह नीचे फेंक दिया…
अंदर से तो वो पूरी नंगी ही थी..

रीतु को उसके गुलाबी निप्पल वाले नन्हे अमरूद भी बहुत पसंद थे….
गोरे-2 कच्चे टिकोरों पर चमक रहे लाल कंचे देखकर उसका मन ललचा उठा उन्हे चूसने के लिए…

वो उन्हे काफ़ी देर तक चूसती रही

फिर सोनी ने उसे उसी खाट पर लिटा दिया जिसपर अभी कुछ देर पहले लालाजी बैठे थे…

सोनी ने भी अपने कपडे झटके से उतार फेंके, वो रीतु के मुकाबले थोड़ी सांवली थी, पर उसका बदन भी काफी कसा हुआ था , वैसे भी लड़कियां नंगी होकर हमेशा ख़ूबसूरत दिखती हैं

और उसकी टांगे अपने कंधे पर लगाकर वो उसकी शहद की दुकान से मिठास बटोरने लगी..

”आआआआहह खा जा इसे…….. निकाल ले सारा जूस अंदर का…..अहह…साली आजकल बहुत बहती है ये…..पी जा सारा रस….पी जा…”

सोनी को तो वो रस वैसे ही बहुत पसंद था….
वो अपनी जीभ की स्ट्रॉ लगाकर उसकी चूत का रस सडप –2 करके पीने लगी…

और अंत में जब रीतु की चूत ने असली घी का त्याग किया तो उसके झड़ते हुए शरीर को महसूस करके वो खटिया भी चरमरा उठी…

और जैसे ही वो शांत हुई की बाहर की कुण्डी खटक गयी…
रीतु की माँ वापिस आ गयी थी खेतो से…

रीतु नंगी ही भागती हुई बाथरूम में घुस गयी और सोनी को सब संभालने का कहकर दरवाजा खोलने को कहा..

सोनी ने जब दराजा खोला तो उसे अपने घर में देखकर उसने इधर – उधर देखा और बोली : “तू यहाँ क्या कर रही है इस बकत ….और ये रीतु कहाँ है…”

सोनी : “वो मैं उसके साथ खेल रही थी…अब वो नहाने गयी है….बोली जब तक माँ नही आती मैं यहीं रूकूं …”

रीतु की माँ :” इसकी जवानी में ना जाने कौनसे उबाल आ रहे है आजकल, दिन में दूसरी बार नहा रही है…और ये देखो, मेरा तौलिया कैसे ज़मीन पर फेंका हुआ है…”

कहते हुए उसने तौलिया उठा कर अंदर रख दिया ….
सोनी भी जानती थी की अब यहाँ से निकल जाने में ही भलाई है…
इसलिए उसकी माँ को ये कहकर की रीतु को उसी के घर भेज देना, वो वहां से आ गयी..

अब उसे और रीतु को कुछ ऐसा प्लान बनाना था ताकि ये रोज-2 के छोटे-मोटे मज़े से बढ़कर कुछ आगे निकल सके…

और इसके लिए लालाजी से अच्छा बंदोबस्त कोई और हो ही नही सकता था..

नहा धोकर रीतु बाहर आई और उसने लालाजी के घर पर आने की बात माँ को बतायी…
लालाजी का नाम सुनकर तो उसकी माँ भी घबरा गयी..
उसे भी लालाजी के बर्ताव के बारे में अच्छे से पता था और वो ये भी जानती थी की उनके हालात आजकल अच्छे नही चल रहे है इसलिए सूद चुकाने में देरी हो रही है…
अपनी माँ को उनकी सोच में छोड़कर वो सोनी के घर पहुँच गयी…

सोनी के पिता का देहांत कई सालों पहले हो चुका था…
इसलिए उनके खेतो का काम उसका बड़ा भाई और माँ मिलकर संभालते थे…
और दोनो शाम से पहले घर आने वाले नही थे
इसलिए उन दोनो को किसी भी बात की रोक टोक या डर नही था..
सोनी की बहन मीनल आजकल अपने ससुराल से आई हुई थी, वो भी अपने बचपन की सहेली बिजली के घर गयी हुई थी…

सोनी : “रीतु , एक तो ये तेरी माँ है ना, दिन ब दिन खड़ूस होती जा रही है… मुझे देखते ही ना जाने कैसी आग सी लग जाती है उन्हे…ऐसा ही रहा तो मैने तेरे घर आना बंद कर देना है…”

रीतु भी ये बात जानती थी की उसकी माँ को सोनी फूटी आँख नही सुहाती …
उनका मानना था की उसके साथ मिलकर वो पूरे गाँव में बिना संगल की गाँय की तरह घूमती रहती है…
उन्हे शायद 1-2 लोगो ने बोला भी था की दोनो के पर निकल आए है आजकल…
अपनी फूट रही जवानी को दोनो गाँव भर में घूमकर दिखाती फिरती है…
इसलिए उन्हे लगता था की सोनी के साथ रीतु ज़्यादा ना ही मिले तो ही सही है..

पर उन दोनो की दोस्ती इन बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ती चली जा रही थी..

रीतु : “छोड़ ना ये रोज की बातें….पहले ये बता की लालाजी को कैसे काबू में लाया जाए…”

सोनी : “अर्रे, वो लाला तो पहले से ही काबू में है… फ्री में क्रीमरोल कोई ऐसे ही नही दे देता… हा हा”

रीतु : “मुझे तो लगता है की वो अपना क्रीम रोल देने की फिराक में है….”

सोनी : “हाँ , वही…काला सा…जो तुझे पसंद नही है….”

रीतु तुनककर बोली : “हाँ , नही है…”

सोनी : “नही है तो पसंद करना पड़ेगा…नही तो लालाजी तेरे काबू में नही आएँगे…”

रीतु ने सोचने वाला चेहरा बना लिया…
जैसे उसकी बात पर गोर कर रही हो.

सोनी : “देख रीतु…बात सिर्फ़ मज़े की नही है…बात तेरे पिताजी के सूद की भी है…हो सकता है लालाजी के साथ मज़े लेने के बाद वो तेरे पिताजी का सूद भी माफ़ कर दे…”

रीतु (थोड़ा गुस्से में ) : “तू कहना क्या चाहती है…लालाजी के सूद के बदले मैं उन्हे अपनी चूत भेंट कर दूँ क्या..मुझे ऐसा-वैसा समझ रखा है क्या तूने..? ”

सोनी : “ओहो….बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे खुद बड़ी दूध की धुली है…और ये काम करना ही नही चाहती…याद है न, पिछले हफ्ते क्या बात हुई थी हमारी, और कल की 10 रूपए वाली शर्त के बाद तो तूने अपनी नंगी गांड भी दिखा दी उस लाला को…अब रह ही क्या गया है, जब 10 रुपय के बदले नंगी गांड दिखा सकती है तो 10 हज़ार के बदले चूत भी तो दे सकती है ना…, इसलिए ये बेकार की बाते मत कर, जो सच है वो यही है की तुझे लाला की ज़रूरत है और लाला को तेरी जवानी की…”

वैसे सोनी सच ही कह रही थी….
रोजाना आपस में सैक्स के बारे में तरह-2 की बातें करने के बाद उन्होने यही सोचा था की अपने हुस्न का जलवा दिखाकर वो लालाजी से समान ऐंठा करेंगी, और ऐसा करने में वो कामयाब भी हो गयी थी…

रीतु :”चल..मान ली तेरी बात…पर लालाजी ने अगर ये बात गाँव भर में फैला दी तो मेरी माँ तो मेरा गला काट देगी….और तेरा भाई भी तुझे जिंदा नही छोड़ेगा…”

सोनी : “बस…यही तो…यही प्लानिंग तो हमें करनी है…ताकि हमारा काम भी हो जाए और लाला भी अपनी ज़ुबान से कुछ ना बोले…”

दोनो आपस में ऐसे बातें कर रही थी जैसे कोई जंग जीतने निकलना हो ..

वैसे ये प्लानिंग किसी जंग से कम की लग भी नही रही थी…
इतने सालों तक संभाल कर रखी जवानी का पहला सौदा बिना सोचे समझे नही करना चाहती थी वो दोनो…

यहाँ एक बात जान लेनी आवश्यक है की चूत की खुजली के बारे में रीतुज़्यादा आगे थी…
उसी का दिमाग़ इस तरह की बातों में ज़्यादा दौड़ता था…
अपने माँ बाप का मूड भाँपकर वो रात भर सिर्फ़ उनकी चुदाई भरी आहें सुनने के लिए जागा करती थी….
अपनी चूत को रगड़ कर वो जब तक दिन में 2-3 बार झड़ नही जाती थी, उसे चैन ही नही आता था…
नहाते हुए भी वो अपने पूरे बदन, ख़ासकर मुम्मो को निचोड़कर रख देती थी…
गाँव के हर मर्द के बारे में सोचकर, उसके लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसकारियां मारते हुए अपनी चूत रगड़ना उसके लिए आम बात थी…
और इसलिए उसने अपनी इन बातों के जाल में सोनी को भी फँसा लिया था…
जब दिन भर उसकी पक्की सहेली सैक्स के बारे में बाते करती तो वो भला कैसे इस रोग से अछूती रह जाती…
जवानी के कीड़े ने उसे भी काट लिया और वो दोनो अक्सर सैक्स से जुड़ी गंदी बाते करके घंटो हँसती रहती…
खेल – २ में वो एक दूसरे के अंगो सहलाती और जल्द ही वो खेल सारी मर्यादाएं लांघकर सैक्स के खेल में बदल गया, जिसमें वो गन्दी वाली मूवीज की तरह लैस्बियन सैक्स भी करने लगी

और इसी दौरान उन्होने शर्त लगाकर, लालाजी को भी सताया और अपनी भड़क रही जवानी को शांत करने का उन्हे ये एक नया तरीका मिल गया..

रीतु बोली : “मेरे दिमाग़ में एक आइडिया है…और अगर वो आइडिया कामयाब हो गया तो पिताजी के पैसो की सिरदर्दी भी दूर हो जाएगी और हमारा काम भी बन जाएगा…और इसके लिए आज शाम को ही हम दोनो लाला की दुकान पर चलेंगे..बोल मंजूर है..”

सोनी जानती थी की उसके खुराफाती दिमाग़ में ज़रूर कुछ गंदा पक रहा है…
पर मज़े लेने की चाह तो उसमे भी बहुत थी और वो जानती थी की वो जो भी करेगी, उसमे मज़े तो दोनो को ही मिलेंगे…

इसलिए उसने तुरंत हां कर दी.

रीतु ने उसे पूरा प्लान समझाया और सारी बात सुनकर सोनी भी उसके दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सकी..

बस…
फिर क्या था….
दोनो शाम को अपनी प्लानिंग के अनुसार लालाजी की दुकान पर पहुँच गयी.

लालाजी ने जब दूर से उन दोनो हुस्न की परियों को अपनी दुकान पर आते देखा तो उनकी धोती में सुस्ता रहा काला अजगर अंगड़ाई लेता हुआ खड़ा हो गया…
जैसे कह रहा हो ‘आ गयी दोनो हरामजादियां , अब आएगा मज़ा‘

लालाजी : “आओ आओ…. क्या हाल है रीतु….सोनी, बोल क्या लेना है आज तुम्हे …”

बात तो वो रीतु से कर रहे थे पर उनका एक हाथ उनकी धोती में घुस कर अपने लंड को रगड़ रहा था…

रीतु ने सोनी की तरफ देखा, उसने एक डरा हुआ सा चेहरा बना रखा था….
जैसे कुछ कहना चाहती हो पर सकुचा रही हो..

लालाजी : “अररी, साँप सूंघ गया है क्या तुझे….बोल ना…क्या लेगी…”

लालाजी का तो मन कर रहा था की बस एक बार बोल दे ‘लालाजी , आपका लंड लूँगी…बोलो…दोगे क्या..‘

पर वो भी जानते थे की वो ऐसा नही बोलेगी…

अचानक लालाजी ने नोट किया की जो कुर्ती रीतु ने पहनी हुई है, उसका गाला काफी गहरा है …
और उसकी वजह से उसकी गोलाइयाँ सॉफ दिख रही है…

लालाजी की तो हालत पतली हो गयी….

कल वो अपनी नंगी गांड दिखा कर गयी थी और आज अपने नंगे आम दिखाने पर उतारू है…..

रीतु ने डरा हुआ सा फेस बना रखा था…
वो धीरे से बोली : “लालाजी ..वो…वो ..आपसे कुछ ख़ास बात करनी थी…”

लालाजी ने आस पास देखा, दूर –2 तक कोई नही दिखाई दे रहा था…
लालाजी अपनी जगह से उठ कर बाहर निकले और अंदर पड़ी चारपाई पर जाकर बैठ गये…
उन्होने दोनो को भी वही बुला लिया..
दरवाजे पर परदा कर दिया ताकि बाहर से कोई उन्हे देख ना सके..

लालाजी की प्यासी नज़रों के सामने रीतु के कबूतर फड़फड़ा रहे थे…
उसकी आधे से ज्यादा गोलाइयाँ उनकी आँखों के सामने थी …

लालाजी ने फ्रिज में से 2 केम्पा निकाल कर उन्हे पकड़ा दी….
ठंडी-2 बोतल हाथ में आते ही दोनो ने उसे मुँह से लगा कर पीना शुरू कर दिया…
बॉटल से 2 बूँद टपक कर उसकी क्लिवेज पर जाकर गिरी और गहरी घाटियों में गायब हो गयी…

लालाजी ने बड़ी मुश्किल से अपने सूखे गले को तर किया…

मन तो कर रहा था की उसकी गोलाईयों पर जीभ फिरा कर वो 2 बूँद भी वेस्ट होने से बचा ले…
पर ऐसा करना मुमकिन नही था..

लालाजी : “हाँ …अब बोल….क्या बात है….किसी चीज़ की ज़रूरत है क्या तुझे…?”

केम्पा पीने के बाद रीतु बोली : “हाँ लालाजी … और आपके सिवा हमारी मदद कोई और नही कर सकता…”

लालाजी ने अपने कान उसकी तरफ लगा दिए और बोले : “हाँ हाँ बोल, क्या मदद चाहिए तुझे…”

रीतु : “लालाजी …वो …वो, हमें….. कुछ पैसो की ज़रूरत थी…”

लालाजी ने उन दोनो को ऐसे देखा जैसे विश्वास ही ना कर पा रहे हो…
भला उन्हे पैसो की क्या ज़रूरत आन पड़ी…

पर वो कुछ नही बोले…..
उनके दिमाग़ में तो कुछ और ही चलना शुरू हो गया था..

रीतु : “हमे दरअसल….12 हज़ार रूपए की सख़्त ज़रुरत है”

लालाजी : “देख रीतु…मुझे वैसे पूछना तो नही चाहिए…पर…इतने पैसे तुझे किस काम के लिए चाहिए…और ये पैसे तू वापिस कैसे करेगी…”

रीतु जानती थी की लालाजी ये सब ज़रूर पूछेंगे…
इसलिए वो पहले से ही जवाब तैयार करके लाई थी…

वो बोली : “वो मैं अभी आपको नही बता सकती…पर मेरा विश्वास करिए…मैं आपके सारे पैसे जल्द ही लौटा दूँगी…”

लालाजी तो अंदर से बहुत खुश हो रहे थे…
उनके हिसाब से तो ये उनके पास अपने आप फँसने चली आई थी…
12 हज़ार उनके लिए बहुत छोटी रकम थी…
और लालाजी अच्छे से जानते थे की उनके चुंगल में एक बार जब कोई फँस जाता है तो पूरी उम्र ब्याज देता रहता है..
असल वही खड़ा रहता है…
और इन दोनो हिरनियों को काबू में करने के लिए इससे अच्छा उपाय कुछ और हो ही नही सकता था..

लालाजी ये तो समझ गये थे की जैसा मुँह बनाकर वो उनके सामने बैठी है, पैसो की ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही है…
इसलिए उन्होने एक बार फिर से पूछा : “पहले तू मुझे बता दे की पैसे किसलिए चाहिए तो मुझे देने में कोई परेशानी नही है..”

रीतु ने तो सोचा था की लाला उनकी बात को जल्द ही मान जाएगा, पर वो भी बनिया आदमी था, इतनी आसानी से पैसे निकालने वाला नही था..

रीतु ने कोई बहाना भी नही बनाया था, इसलिए उसके दिमाग़ ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया…
उसने सोनी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर भी हवाइयां उड़ रही थी, यानी उसका दिमाग़ भी नही चल रहा था..

रीतु ने जल्द ही एक बहाना तैयार कर लिया, और बोली : “देखिए लालाजी , आपको मैं बता तो रही हूँ , पर आपसे निवेदन है की आप किसी से भी इस बारे में कुछ नही बोलना..ख़ासकर हमारे घर वालो से…”

रीतु का इतना कहना था की ठरकी लाला ने आगे बढ़कर उसके हाथ पर अपने हाथ रख दिया और उसके नर्म हाथों को अपने खुरदुरे हाथों से मसलता हुआ बोला : “अर्रे, नही रे…तू मुझपर पूरा बिस्वास कर सकत है….बतला अब…”

पास आने की वजह से लाला उसकी मुम्मो की घाटी को थोड़ी और गहराई से नाप पा रहा था..

रीतु की मुनिया तो एकदम से पनिया गयी….
एक तो लाला के सख़्त हाथ और उपर से उनकी गंदी नज़रे…
ऐसा लग रहा था जैसे उनकी आँखो से कोई शक्ति निकल कर उसके सख़्त मुम्मे मसल रही है…

रीतु : “वो क्या है ना…इस साल हमारी 12वी क्लास ख़तम हो जवेगी…उसके बाद हमें कॉलेज करना है, और हमारे दोनो के घर वाले ये नही चाहते, वो बोल रहे है की इतना खर्चा करना उनके बस की बात नही है…इसलिए हमने सोचा की अभी के लिए आपसे पैसे लेकर अपने-2 फॉर्म भर लेंगे..और साथ में अपने अडोस पड़ोस के बच्चो को टूशन पढ़ा कर पैसे बनाते रहेंगे..ऐसा करने से घर वालो पर भी बोझ नही पड़ेगा और आपके पैसे भी धीरे-2 उतर जाएँगे..”

लालाजी मुस्कुराए और बोले : “वह , इरादा तो बहुत अच्छा है तुम दोनो का…और सच कहूं तो ऐसे काम के लिए मैं पैसे देने से कभी मना नही करता…पर कारोबारी आदमी हूँ , इसलिए सूद पर ही दूँगा…और हर महीने तुम दोनो को 600-600 रुपय मुझे सूद के देने होंगे..”

रीतु ने हिसाब लगाया तो वो काफ़ी ऊँची ब्याज दर थी…
पर उनके दिमाग़ में जो प्लान था उसके सामने ये 10% का ब्याज उनके आड़े आने वाला नही था…
इसलिए दोनो ने तुरंत हां कर दी…

लालाजी ने एक पेपर पर उन दोनो का राज़ीनामा लिया
उनके दस्तख़त करवाकर लाला ने उन दोनो के हाथ में 6-6 हज़ार रूपर रख दिए…

पैसे देखकर दोनो के चेहरे चमक उठे…
और लालाजी को धन्यवाद बोलकर वो दोनो उठ खड़ी हुई…
और जैसे ही वो दोनो जाने लगी तो लाला ने कहा : “अर्रे, इतनी जल्दी भी क्या है…थोड़ी देर रुक जा…अपने क्रीम रोल तो लेते जाओ दोनो…”

इतना कहकर लाला अपनी खीँसे निपोरता हुआ बाहर निकल आया और मर्तबान से 2 लंबे से क्रीमरोल्ल निकाल लिए…
अभी कुछ देर पहले ही फ्रेश बनकर आए थे इसलिए उनकी क्रीम भी ताज़ा थी…
लाला के दिमाग़ में कुछ चालाकी आई और उसने एक रोल में से उपर की क्रीम निकाल कर दूसरे पर लगा दी…
और अंदर आकर वो ज़्यादा क्रीम वाला रोल उसने रीतु की तरफ लहरा दिया..
और जैसा लाला चाहता था, वैसा ही हुआ
उपर रखी क्रीम उछलकर नीचे गिरी और सीधा रीतु के सीने पर आकर चिपक गयी…

लाला का हाथ तुरंत हरकत में आ गया और उसने वो क्रीम उसके सीने से पोंछ डाली..

ये सब इतनी जल्दी हुआ की रीतु को भी समझने का मौका नही मिला की ये हुआ क्या है…
सोनी तो अपने रोल को पकड़ने के साथ ही उसे खाने में व्यस्त हो गयी…
पर रीतु का पूरा शरीर काँप कर रह गया..

लाला ने उसकी छाती पर पड़ी क्रीम को जब अपनी 4 उंगलियो से समेटा तो उसके गुदाज मुम्मो को बुरी तरह से रगड़ता चला गया…

ऐसा लग रहा था जैसे लाला ने उसके मुम्मो के साथ क्रीम वाली होली खेल ली है..

उसका उपरी छाती वाला हिस्सा चिकना हो गया…
लाला ने अपनी बेशर्मी दिखाते हुए वो सॉफ की हुई क्रीम अपने मुँह में लेकर चाट ली..

रीतु तो सुलग कर रह गयी…
आज पहली बार उसके मुम्मो को किसी ने छुआ था…
और वो भी लाला ने..

रीतु जानती थी की वो अगर चाहे तो गाँव के जवान और हॅंडसम लड़को को पटा कर ये सब मज़े ले सकती है
पर उस लाला में ना जाने क्या सम्मोहन था की वो उसके हाथो ऐसा काम करवाने चली आई थी…
और आज पहली बार उसका कमोत्तेजना से भरा स्पर्श पाकर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी थी…

लाला की भी हालत खराब हो गयी थी…
उन्हे पैसे देकर तो अब लाला में भी हिम्मत सी आ गयी थी, इसलिए उसने ऐसा दुस्साहसी कदम उठाया था…
और जब ऐसा करने के बाद भी रीतु ने कुछ नही कहा और अपना क्रीमरोल लेकर चुपचाप खाने लगी तो लाला समझ गया की चिड़िया ने दाना चुग लिया है…
यानी आगे भी वो उसके साथ ऐसी छेड़खानी कर सकता है, वो कुछ नही कहेगी..

उसके बाद लाला को धन्यवाद बोलकर दोनो बाहर निकल आई…

घर आकर दोनो बहुत खुश थी, उनकी प्लानिंग का पहला चरण पूरा हो चुका था.

घर आने के बाद दोनो ने अपना दिमाग़ लगाया की अब इन पैसों को कैसे अपने माँ बाप के थ्रू लालाजी तक पहुँचाया जाए..

और आख़िरकार पूरी रात सोचने के बाद रीतु के दिमाग़ में एक आइडिया आ ही गया.

अगले दिन जब रीतु और सोनी स्कूल में मिले तो उसने सोनी को वो आइडिया बताया और उसने भी अपनी सहमति जता दी.

स्कूल से वापिस आकर रीतु ने खुश होते हुए अपनी माँ को बताया की उसे स्कूल की तरफ से 10 हज़ार रूपए की स्कॉलरशिप मिली है…
पढ़ने में तो वो होशियार थी ही, इसलिए उसकी माँ को कोई शक भी नही हुआ…
कुछ ही देर में सोनी भी आ गयी और खुश होकर उसने भी वही बात दोहराई ….
रीतु की माँ की आँखो में आँसू आ गये…
10 हज़ार उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी…
उसकी माँ के दिमाग़ में सिर्फ़ वही ख्याल आया की उन पैसो से वो लाला का क़र्ज़ उतार सकते है..

रात को जब रीतु के पापा घर आए तो इस खबर को सुनकर वो भी काफ़ी खुश हुए..
रीतु ने बताया की अगले दिन कलेक्टर साहब खुद आकर वो इनाम उसे स्कूल में देंगे..

उसके माँ -बाप ग़रीब होने के साथ-2 अनपढ़ भी थे, इसलिए उन्हे इन बातो का कोई ज्ञान ही नही था … और वो रीतु के स्कूल जाने से भी कतराते थे… इसलिए रीतु के झूट के पकड़े जाने का सवाल ही नही उठता था..

अगले दिन स्कूल से आकर रीतु ने 10 हज़ार रुपय अपनी माँ के हाथ में रख दिए..
जिसे उसके पिताजी ने लालाजी को वापिस कर दिया…
पैसे वापिस करने से पहले रीतु ने उन्हे समझा दिया की वो ये किसी से भी ना कहे की ये पैसे रीतु के स्कूल से मिले है, वरना सब मज़ाक उड़ाएंगे की बेटी को मिले पैसो से अपना क़र्ज़ उतार रहे है…
इसलिए पैसे वापिस करते हुए रीतु के पिताजी ने लाला को यही कहा की अपने ससुराल वालो से ये पैसे उधार लिए है,ताकि वो अपना कर्ज़ा उतार सके..

और इस तरह से लालजी के पैसे वापिस उन्ही के पास पहुँच गये..
और बाकी के बचे 2 हज़ार रुपय उन दोनो ने बाँट लिए…

सब कुछ वैसे ही हो रहा था जैसा उन्होने सोचा था.

अगले दिन जब रीतु लालाजी की दुकान पर गयी तो लालाजी ने पूरी रात सोचकर उसके लिए कुछ अलग ही प्लान बना रखा था.

रीतु को देखकर लालाजी ने कहा : “अरी रीतु..अच्छा हुआ तू आ गयी…तुझसे बहुत ज़रूरी काम था मुझे…”

रीतु : “हाँ लालाजी , बोलिए…क्या काम है..”

अंदर से तो वो भी जानती थी की लालाजी के दिमाग़ मे ज़रूर कुछ गंदा चल रहा है…
वैसे चल तो उसके दिमाग़ में भी रहा था..

लाला : “देख ना..कल रात से तबीयत ठीक नही है…पूरी पीठ दुख रही है…वैध जी से दवाई भी ली..उन्होने ये तेल दिया है…बोले पीठ पर लगा लेना, आराम मिलेगा…अब अपनी पीठ तक मेरा हाथ तो जाएगा नही….इसलिए तुझे ही मेरी मदद करनी पड़ेगी…”

लालाजी तो ऐसे हक़ जता कर बोल रहे थे जैसे पूरे गाँव में कोई और है ही नही जो उनकी मदद कर सके..
और उनके कहने का तरीका ठीक वैसा ही था जैसे रीतु ने उनसे पैसो की मदद माँगी थी…
इसलिए वो भी समझ गयी की उसे भी लालाजी की मदद करनी ही पड़ेगी…

रीतु ने सिर हिला कर हामी भर दी..

लालजी ने तुरंत शटर आधा गिरा दिया और रीतु को लेकर दुकान के पिछले हिस्से में बने अपने घर में आ गए…

रीतु का दिल धाड़ –2 कर रहा था…
ये पहला मौका था जब वो सोनी के बिना लालाजी के पास आई थी…
और धूर्त लाला ने मौका देखते ही उसे अपने झाँसे में ले लिया..

फिर रीतु ने सोचा की अच्छा ही हुआ जो सोनी नही आई वरना लालाजी ये बात बोल ही ना पाते..

अंदर जाते ही लालजी ने अपना कुर्ता उतार दिया..
उनका गठीला बदन देखकर रीतु के रोँये खड़े हो गये…
जाँघो के बीच रसीलापन आ गया और आँखों में गुलाबीपन..

लालाजी अपने बिस्तर पर उल्टे होकर लेट गये और रीतु को एक छोटी सी शीशी देकर पीठ पर मालिश करने को कहा…

रीतु ने तेल अपने हाथ में लेकर जब लालाजी के बदन पर लगाया तो उनके मुँह से एक ठंडी आह निकल गयी…

”आआआआआआआआअहह …… वाााहह रीतु….. तेरे हाथ कितने मुलायम है…. मज़ा आ गया…. ऐसा लग रहा है जैसे रयी छुआ रही है मेरे जिस्म से….आआआअहह शाबाश….. थोड़ा और रगड़ के कर ….आहह”

लालाजी उल्टे लेटे थे और इसी वजह से उन्हे प्राब्लम भी हो रही थी…
उनका खूँटे जैसा लंड खड़ा हो चुका था…
लालाजी ने अपना हाथ नीचे लेजाकर किसी तरह से उसे एडजस्ट करके उपर की तरफ कर लिया…
उनके लंड का सुपाड़ा उनकी नाभि को टच कर रहा था…
पर अभी भी उन्हे खड़े लंड की वजह से उल्टा लेटने में परेशानी हो रही थी…

रीतु ये सब नोट कर रही थी…
और उसे लालाजी की हालत पर हँसी भी आ रही थी.

उसने उन्हे सताने का एक तरीका निकाला..

वो बोली : “लालाजी ..ऐसे हाथ सही से नही पड़ रहा…क्या मैं आपके उपर बैठ जाऊं ..”

लालाजी की तो आँखे फैल गयी ये सुनकर…
नेकी और पूछ –2…
लालाजी ने तुरंत लंबी वाली हाँ कर दी…

बस फिर क्या था, रीतु किसी बंदरिया की तरह उछल कर उनके कूल्हों पर बैठ गयी…

लालाजी तो जैसे जीते-जागते स्वर्ग में पहुँच गये…
ऐसा गद्देदार एहसास तो उन्हे अपने जीवन में आजतक नही मिला था…
ये रीतु के वही कूल्हे थे जिन्हे इधर-उधर मटकते देखकर वो अपनी आँखे सेका करते थे…
आज उसी डबल रोटी जैसी गांड से वो उनके चूतड़ों पर घिसाई कर रही थी…

रीतु ने अपनी टांगे मोड़ कर साइड में लगा दी और दोनो हाथो से उनकी पीठ को उपर से नीचे तक उस तेल से रगड़ने लगी..

लालाजी को एक तरफ मज़ा तो बहुत आ रहा था पर उनकी वो तकलीफ़ पहले से ज़्यादा बढ़ चुकी थी…
उनका लंड नीचे दबकर पहले ही फँसा हुआ सा पड़ा था, उपर से रीतु का भार आ जाने की वजह से उसका कचुंबर सा निकालने को हो गया था…जैसे कोई मोटा अजगर किसी चट्टान के नीचे दब गया हो

रीतु भी अपना पूरा भार अपने कुल्हो पर डालकर लालाजी के चूतड़ों की चटनी बनाने पर उतारू थी…
वो एक लय बनाकर लालाजी के बदन की मालिश कर रही थी…
जिस वजह से लालाजी का शरीर उपर से नीचे तक हिचकोले खाने लगा…
रीतु भी लालाजी की शरीर नुमा नाव पर बैठकर आगे पीछे हो रही थी…

और इस आगे-पीछे का स्वाद लालाजी को भी मिल रहा था…
उनके लंड पर घिस्से लगने की वजह से वो उत्तेजित हो रहे थे…
ये एहसास ठीक वैसा ही था जैसे वो किसी की चूत मार रहे हो अपने नीचे दबाकर…

अपनी उत्तेजना के दौरान एक पल के लिए तो लालाजी के मन में आया की पलटकर रीतु को अपने नीचे गिरा दे और अपना ये बोराया हुआ सा लंड उसकी कुँवारी चूत में पेलकर उसका कांड कर दे…
पर उन्हे ऐसा करने में डर भी लग रहा था की कहीं उसने चीख मारकर सभी को इकट्ठा कर लिया तो उनकी खैर नही…
इसलिए उन्होंने अपने मन और लंड को समझाया की पहले वो रीतु के मन को टटोल लेंगे…
थोड़े टाइम बाद जब उन्हे लगेगा की वो उनसे चुदने के लिए तैयार है और वो इसका ज़िक्र किसी से नही करेगी, तभी उसे चोदने में मज़ा आएगा…

और वैसे भी, अभी के लिए भी जो एहसास उन्हे मिल रहा था वो किसी चुदाई से कम नही था…
उपर से रीतु के बदन का स्पर्श भी उन्हे उनकी उत्तेजना को पूरा भड़काने में कामगार सिद्ध हो रहा था…

इसलिए वो उसी तरह, अपने लंड को बेड पर रगड़कर , अपने ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे..

और अंत में आकर , ना चाहते हुए भी उनके मुँह से आनंदमयी सिसकारियाँ निकल ही गयी..

”आआआआआआहह रीतु…….मज़ा आ गया…….हायययययययययी…………..”

रीतु को तो इस बात की जानकारी भी नही थी की लालाजी झड़ चुके है….
वो तो उनके अकड़ रहे शरीर को देखकर एक पल के लिए डर भी गयी थी की कहीं बूड़े लालाजी को कुछ हो तो नही गया…
पर जब लालाजी ने कुछ बोला तो उसकी जान में जान आई..

लालाजी : “शाबाश रीतु…शाबाश….ऐसी मालिश तो मेरी आज तक किसी ने नही की है…..चल अब उतर जा तू…मुझे तो नींद सी आ रही है….मैं थोड़ा सो लेता हूँ …”

पर रीतु शायद उनके खड़े लंड को देखना चाहती थी…

रीतु : ”थोड़ा पलट भी जाइए लालाजी , आपकी छाती पर भी मालिश कर देती मैं …”

लालाजी का मन तो बहुत था की वो भी उससे अपनी छाती की मालिश करवाए पर उनकी हालत नही थी वो करवाने की…
इसलिए उन्होने कहा : “नही रीतु…आज नही…..फिर कभी कर दियो ….अभी तो नींद सी आ रही है…तू जा …और जाते हुए मर्तबान से क्रीम रोल निकाल ले…”

वो उन्होने इसलिए कहा क्योंकि उनके बिस्तर पर ढेर सारा वीर्य गिरा पड़ा था…
अपनी सेहत के लिए लालाजी बादाम और चने भिगो कर खाते थे, इसलिए उनका वीर्य भी मात्रा से अधिक निकलता था…और उस हालत में वो सीधा होकर वो झड़ा हुआ माल उसे नहीं दिखाना चाहते थे

रीतु नीचे उतरी और 2 क्रीम रोल निकाल कर बाहर आ गयी…

लालाजी अपने बिस्तर से उठे और बेड की हालत देखकर उन्हे भी हँसी आ गयी…
शबाना होती तो इस सारी मलाई को चाट जाती…

लालाजी खड़े होकर अपने मुरझाए हुए लंड को मसलते हुए बोले : ”ये मलाई तो अब एक दिन ये रीतु ही खाएगी…साली को बड़ा मज़ा आ रहा था ना मुझे सताने में …अगली बार इसका अच्छे से बदला लूँगा…फिर देखता हूँ इसकी हालत ..”

लालाजी के दिमाग़ में उसके लिए कुछ स्पेशल प्लान बनने शुरू हो चुके थे.

क्रीम रोल लेकर रीतु सीधा सोनी के घर पहुँच गयी
वो उसके हिस्से का रोल उसे देना चाहती थी और आज का किस्सा भी सुनाना चाहती थी..

दरवाजा सोनी की बहन मीनल ने खोला

वो उसके हाथो में क्रीम रोल देखकर बोली : “ओहो…लगता है लालाजी की दुकान से आ रही है…”

उसके बोलने के स्टाइल और मुस्कुराहट से सॉफ पता चल रहा था की वो सब जानती है..

रीतु को सोनी पर बहुत गुस्सा आया की उसने ये सब बाते अपनी बहन को क्यों बता दी.

मीनल दीदी ने हँसते हुए उसका हाथ पकड़ा और अंदर खींच लिया..

”अररी, घबरा मत, मैं किसी से नही कहने वाली ये सब…तुझे शायद पता नही है, सोनी मुझसे कुछ भी नही छिपाती और न ही मैं उससे….समझी….”

रीतु का चेहरा पीला पड़ गया…
यानी सोनी की बच्ची ने कल उनकी एक दूसरे की चूत चूसने वाली बात भी बता दी है क्या…

उसके चेहरे की परेशानी देखकर वो समझ गयी की वो क्या सोच रही है..

मीनल : “कल जो तुम दोनो ने मज़े लिए थे, वो भी पता है मुझे…ये तो नॉर्मल सी बात है…मैं भी अपनी सहेली बिजली के साथ ये सब किया करती थी…कल जब उसके घर गयी तो फिर से वही किया था हमने…कसम से, पुरानी यादे ताज़ा हो गयी…”

इतना कहकर मीनल ने बड़ी बेशर्मी से अपनी चूत को रीतु के सामने ही मसल दिया..

मीनल की ये बात सुनकर उसे थोड़ी राहत मिली वरना उसे डर था की कहीं वो उसे डराएगी धमकाएगी और माँ को बताने की धमकी देगी..
पर ये तो अपनी बहन सोनी की तरह ही निकली…

वो मुस्कुरा दी और मीनल के साथ अंदर आ गयी…
सोनी नहा रही थी , इसलिए वो उसे लेकर अपने कमरे में आ गयी…
सोनी की माँ और भाई खेतो में गये हुए थे..

मीनल ने अंदर आते ही रीतु से पूछा : “अच्छा सुन, कल सोनी बता रही थी की तूने लाला का लंड देखा…बता ना..कैसा था वो…कितना मोटा था….और लंबा कितना था…बता ना…”

मीनल ने जब लंड बोला तभी से रीतु का शरीर काँप सा उठा था…
उसने तो सोचा भी नही था की कोई लड़की इतनी बेशर्मी से मर्दो के प्राइवेट पार्ट के बारे में बात कर सकती है…

सोनी और उसकी बात अलग थी, मीनल दीदी के साथ वो इतनी घुली मिली नही थी, उसके बावजूद वो उससे ऐसे बेशर्मी भरे सवाल पूछ रही थी.

उसका चेहरा गुलाबी हो गया…
आँखे डबडबा सी गयी….
पर कुछ बोल नही पाई वो.

मीनल उसके करीब आई और अपनी छातिया उसके कंधे पर ज़ोर से दबाकर , उन्हे रगड़ते हुए बोली : “अररी बोल ना…सोनी को तो बड़े मज़े लेकर बताया होगा तूने…मुझे बताने में इतना क्यो शर्मा रही है….ऐसे शरमाएगी तो उसे अपनी चूत में कैसे लेगी….”

लाला के उस ख़ूँख़ार लॅंड को अपनी कोमल चूत के अंदर लेने के नाम से ही बेचारी काँप सी गयी…
उसने घबराकर मीनल को देखा और सकपकाई हुई सी आवाज़ में बोली : “नही दीदी…..वो…वो तो बहुत मोटा है….मेरी चूत में कैसे घुसेगा भला…”

मीनल ने जैसे उसकी नब्ज़ पकड़ ली थी…
वो बोली : “अर्रे…मोटा ही है ना…लंबा तो नही है ना….लंबा होता है तब मुस्किल होत है….”

रीतु चहककर बोली : “अर्रे नही दीदी…मोटा भी है और लंबा भी…..मैने देखा था….ससुरा इतना मोटा था….और इतना लंबा….”

उसने अपनी कलाई की मोटाई और लंबाई दिखा दी मीनल को….
जिसे देखकर और सुनकर उसके मुँह में पानी सा आ गया…

वो फुसफुसाई : “हाय …..कमीना लाला…तभी शादी से पहले मुझे भी चोदने वाली नज़रो से देखा करता था….अगर पता होता तो तभी लपक लेती उसके मोटे लंड को…”

रीतु : “दीदी…..आपने कुछ कहा क्या…”

मीनल : “अर्रे नही री…..बस….तूने जो तारीफ की है, उसके बाद तो मेरा भी मन सा कर रहा है उसे एक बार देखने का….”

रीतु की आँखे फैल सी गयी….
वो बोली : “दीदी…..आप ये कैसी बाते कर रही हो…आपकी तो शादी हो गयी है….और शादी के बाद तो औरत को सिर्फ़ अपने पति के साथ…”

मीनल ने बीच में ही बात काट दी : “अररी, चुप कर…साला ये कौन सा क़ानून है की पति बाहर मुँह मारे तो सब सही है…पत्नी कुछ करे तो ये क़ानून सामने आ जावत है….”

उसके चेहरे से गुस्सा टपक रहा था…
रीतु समझ गयी की उसके पति का ज़रूर किसी और औरत के साथ चक्कर है..

पर उसने इस बारे में ज्यादा पूछना सही नही समझा…

वैसे भी लाला के लंड के बारे में बात करने से उसकी चूत में जो रसीलापन आ रहा था, ऐसी इधर उधर की बाते करने से वो चला जाना था…

वो बोली : “एक बात बताओ मीनल दीदी…अगर आपको मौका मिले तो क्या आप लाला के साथ वो सब…”

बात पूरी होने से पहले ही मीनल तपाक से बोल पड़ी : “हाँ हाँ , बिल्कुल….पहले तो मुझे बिस्वास ही नही हो रहा था लाला के लंड के बारे में सुनकर…मेरे पति का तो इत्ता सा है…सोनी ने बताया होगा तुझे…पर तूने भी वही बात की है, यानी बात सच्ची है….अब तो सच में मेरा भी मन कर रहा है उसे अपनी चूत में पिलवाने का…”

रीतु : “तो ले लो ना जाकर ….लाला तो 24 घंटे अपना हाथ में पकड़ कर बैठा रहता है…वो तो एक मिनट में ही मान जाएगा…”

मीनल : “अर्रे रीतु, तू कितनी भोली है रे….तुझे आज एक पते की बात बताती हूँ मैं ….हम औरतो को उपर वाले ने सिर्फ़ सुंदर शरीर और ये रसीले अंग ही नही दिए है…एक दिमाग़ भी दिया है….और इसका इस्तेमाल जितनी जल्दी करना सीख लेगी, उतना ही तेरी लाइफ और जवानी के लिए अच्छा है…”

रीतु : “मैं समझी नही दीदी…”

मीनल : “मतलब ये है की…मर्द क्या चाहता है ये तो हम सभी जानती है…पर उसे चाहने भर से हमारी जवानी मिल जाए, इतने बेवकूफ़ तो हम भी नही है….मर्द को तरसाकर, उन्हे सताकर, उनका उल्लू बनाकर , बाद में जब उनका लंड लेने में जो मज़ा आता है, उसका कोई मुकाबला नही है…”

रीतु के कच्चे दिमाग़ में अभी तक कुछ घुस नही रहा था

”पर दीदी…ऐसा करने से तो वो समझेगा की हम सिर्फ़ मस्ती भर का काम कर रहे है…वो कहीं और मुँह मार लेगा तब तक…”

मीनल ने उसकी जाँघ पर हाथ रखा और उसे सहलाते हुए बोली : “यहीं तो तेरी जवानी काम आएगी मेरी बिल्लो….उन्हे सताना है…पागल बना है..पर भगाना नही है…समझी…”

तभी पीछे से आवाज़ आई : “किसको सताने की बाते हो रही है दीदी….”

ये सोनी थी जो नहा धोकर बाहर आ गयी थी…..

रीतु ने उसकी तरफ देखा तो हैरान ही रह गयी…
वो नंगी ही बाथरूम से निकलकर बाहर आ गयी थी.

सोनी ने बाहर आते ही शिकायत करी : “क्या दीदी…मैं तो टावल का इंतजार कर रही थी अंदर…आपने दिया ही नही…”

अपने चेहरे पर आए पानी को पोंछते हुए वो रीतु से बोली : “अर्रे रीतु, तू कब आई….और ये क्या है तेरे हाथ में ..क्रीम रोल….लगता है लाला की दुकान से आ रही है सीधा…”

इतना कहकर उसने वो क्रीम रोल लेकर खाना शुरू कर दिया….
उसे तो जैसे अपने नंगेपन से कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था..

हालाँकि रीतु के सामने वो कई बार नंगी हो चुकी थी और वो दोनो एक दूसरे को ऐसे देखने की आदी थी..
पर रीतु ये नही जानती थी की वो घर में भी , अपनी बहन के सामने ऐसे ही बेशर्मो की तरह नंगी खड़ी रह सकती है..

मीनल ये सब नोट कर रही थी…
वो मुस्कुराते हुए बोली : “अर्रे, ऐसे हैरान सी होकर तो ऐसे देख रही है जैसे पहली बार इसे नंगा देखा है तूने…कल ही तो तेरे घर पर वो प्रोग्राम हुआ था जिसमें तुम दोनो ने वो सब मज़े लिए थे…

ये सुनकर एक बार फिर से रीतु शरमा गयी….
उसके होंठ फड़फड़ा से रहे थे…

सोनी : “अररी मेरी जान रीतु, तू भी ना, हमारे बीच सब चलता है….मैं दीदी से कुछ नही छुपाती …इसलिए उन्हे सब पता है हमारे बारे में और लाला के बारे में …”

वो तब तक अपना क्रीम रोल खा चुकी थी और अपनी उंगलिया चाट रही थी..

रीतु भी अब नॉर्मल सी हो चुकी थी…
वो सब मिलकर अंदर जाकर बैठ गयी और फिर मीनल और सोनी के पूछने पर रीतु ने आज वाला किस्सा भी पूरे विस्तार से उन्हे सुना दिया…

वो सब सुनते-2 सोनी तो अपनी चूत उनके सामने ही रगड़ने लग गयी..

मीनल ने भी अपना टॉप एक झटके में उतार फेंका
नीचे की पायजामी भी उसने नीचे खिसका दी
पल भर में ही वो नंगी खड़ी थी.

वो अपने मुम्मे और उनपर लगे दाने दबाने लगी, और वो दाने दबाते हुए बुदबुदा भी रही थी : “साला हरामी लाला….भेंन का लौड़ा …हरामी उल्टा पड़े-2 ही झड़ गया था…इसलिए सीधा नही हुआ…..हाय …..काश मैं होती वहां पर….सारा माल चाट जाती उस लाला का…..अहह

रीतु और सोनी को मर्दो के बारे में इतना डीटेल से नही पता था की वो भी झड़ते है…
और झड़ने के बाद उनके लंड से ढेर सारा मीठा रस निकलता है…

सोनी ने ही उत्सुकततावश पूछ लिया : “दीदी….ये झड़ने के बाद क्या होता है….”

वो अपनी बहन की तरफ पलटी और उसके करीब आकर उसने उसका मुम्मा पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया…
वो चिहुंक उठी…

और फिर अपने दाँये हाथ की एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी….
और ज़ोर-2 से अंदर बाहर करने लगी…

बेचारी सोनी पहले से ही झड़ने के कगार पर थी
उपर से अपनी बहन के जादुई हाथो की करामात से वो बुरी तरह से छटपटाने लगी
और
एक मिनट में ही उसकी चूत से शुद्ध देसी घी निकल कर बाहर आ गया…

मीनल ने अपनी उंगलियो पर लगे उस माल को चाट लिया और धीरे से फुसफुसाई : “ये होता है झड़ना…और जब मर्द झड़ता है ना, तो उसके लंड से ढेर सारा रस निकलता है…वो होता है असली माल….जो चूत में जाए तो बच्चा बना दे और मुँह मे जाए तो स्वाद जगा दे….”

उसने बड़ी डीटेल से, डेमो देकर ये बात उन दोनो अल्हड़ लड़कियों को समझा दी…

रीतु की हालत भी खराब हो रही थी…
उसकी आँखे लाल हो चुकी थी ये सब देखकर और सुनकर…

वो तो यही सोचने मे लगी थी की उसकी वजह से लालाजी के लंड का रस निकल गया था
और वो भी उन्ही के बेड पर…
काश वो देख पाती वो रसीला रस.

पर अभी का सीन देखकर तो उसकी खुद की चूत में से रस निकलने लगा था…

उपर से अपनी सहेली सोनी का ऑर्गॅज़म देखकर और मीनल के सैक्सी हाव भाव देखकर, उसकी रही सही ताक़त भी जवाब दे गयी…

पर इससे पहले की वो या कोई और कुछ कर पाते
बाहर का दरवाजा खड़क गया…

और साथ ही सोनी की माँ और भाई की आवाज़ आई

”दरवाजा खोल सोनी…..इतनी देर क्यो लगा रही है….मीनल…..सोनी…दरवाजा खोलो….”

सोनी बेचारी नंगी ही भागती हुई वापिस बाथरूम के अंदर चली गयी….
रीतु ने अपना हुलिया ठीक किया और मीनल ने अपने कपडे पहने और बाहर जाकर दरवाजा खोल दिया.

आज उनके आ जाने से कुछ ”ख़ास” होने से बच गया था.

पर ये सब ज्यादा देर तक बचकर नहीं रहने वाला था, मीनल के इस खेल में आ जाने से रीतु और सोनी की टीम थोड़ी और जानदार हो गयी थी ,
पर उन्हें क्या पता था की लाला कितना हरामी है, एक तो साहूकार और ऊपर से ठरकी भी
उनकी टीम और चुतों का उसने वो हाल करना था की उन्हें भी जीवनभर याद रहने वाला था

”दरवाजा खोल सोनी…..इतनी देर क्यो लगा रही है….मीनल…..सोनी…दरवाजा खोलो….”

सोनी बेचारी नंगी ही भागती हुई वापिस बाथरूम के अंदर चली गयी….आज उनके आ जाने से कुछ ”ख़ास” होने से बच गया था.पर ये सब ज्यादा देर तक बचकर नहीं रहने वाला था, मीनल के इस खेल में आ जाने से रीतु और सोनी की टीम थोड़ी और जानदार हो गयी थी.
पर उन्हें क्या पता था की लाला कितना हरामी है, एक तो साहूकार और ऊपर से ठरकी भी, उनकी टीम और चुतों का उसने वो हाल करना था की उन्हें भी जीवनभर याद रहने वाला था

सोनी की माँ और भाई के आने के बाद रीतु ने भी वहां देर तक रुकना सही नही समझा…
वो बाहर निकल गयी, पर जाने से पहले मीनल ने उसका हाथ पकड़ा और उसके कान में फुसफुसा कर बोली : “मुझे पता है की अभी भी तेरे मन में बहुत कुछ चल रहा है, तू फ़िक्र मत कर, इसका इंतज़ाम मैं जल्द ही करूँगी…”

रीतु का तो चेहरा ही लाल हो गया ये सुनकर…
यानी अभी कुछ देर पहले जो डेमो मीनल दीदी ने उन्हे दिया था, वो अब खुद करके दिखाएगी…
लाला के साथ.
ये मीनल दीदी तो बड़ी चालू निकली
उनकी आड़ में वो लाला से मज़े लेने के मूड में थी.

पर जो भी था, अपनी चूत मरवाना तो रीतु और सोनी भी नही चाहते थे अभी…
ऐसे में लाला के लंड की करामात वो मीनल दीदी के साथ देखकर कम से कम कुछ मज़ा तो ले ही सकते है..
और शायद मीनल को ऐसा करते देखने के बाद उनमे भी चुदवाने की हिम्मत आ जाए..

यही सब सोचते-2 वो घर चली गयी…

अगली सुबह मीनल अच्छे से तैयार हुई और सीधा लाला की दुकान पर पहुँच गयी…
लाला ने जब दूर से उसे मटकते हुए अपनी दुकान की तरफ़ आते हुए देखा तो वो कसमसा कर अपने लंड (रामलाल) से बोला : “अरे …देख तो रामलाल…वो कौन आ रही है….तेरे दिल की रानी..साली जब से शादी करके गयी है , पहली बार दिखी है…शादी के बाद तो कमाल की लग रही है साली चुदक्कड़ …ज़रा देख तो उसके रसीले आमों को …पहले तो साली चुननी में छुपा कर रखती थी.. और अब साली सीना उभार कर दिखा रही है…

लाला के देखते-2 मीनल के मुम्मे पास आते चले गये और बड़े होते गये…
लाला का हाथ अपनी आदत्नुसार एक बार फिर से अपनी धोती में घुस गया.

लाला :”अरी आजा मीनल आजा…..आज तो बड़े दिनों के बाद दिखाई दी है…लगता है शादी के बाद तेरा मन अच्छे से लग गया है अपने ससुराल में …”

मीनल ने एक कातिल सी मुस्कान लाला को दी और बोली : “मन तो लग ही गया है, पर लाला तेरी याद खींच लाई मुझे , इसलिए मिलने चली आई…”

मीनल के इस बेबाक से जवाब को सुनकर लाला को करंट सा लगा…
आज से पहले उसने ऐसी फ्लर्ट भरी बातो को हमेशा से ही इग्नोर किया था…
शायद तब वो कुँवारी थी
और अपने माँ भाई की इज़्ज़त का उसे डर था..

लाला : “अच्छा किया ये तो तूने जो मिलने चली आई…बता क्या खातिरदारी करूँ तेरी…”

मीनल का मन तो हुआ की लाला से कहे की ये बकचोदी बंद करे और सीधा मुद्दे की बात पर आए…
अंदर चलकर चुदाई कर दे बस..

पर वो भी मज़े लेकर हर काम करना चाहती थी…
भले ही लंड लेने की उसे जल्दी थी पर इतनी भी नही की खुद ही चुदाई के लिए बोल दे…
उसे तो पहले लाला को तरसाना था
सताना था
और जब वो खुद उसके सामने लंड हाथ में लेकर गिड़गिडाएगा
तब वो अपनी चूत देगी उसे…

अभी तक तो यही प्लान था उसका…
बाकी उपर वाला जाने..

मीनल : “खातिरदारी तो आजकल आप सोनी और रीतु की बहुत कर रहे हो लाला…सुना है बच्चियों को बड़े क्रीम रोल खिलाए जा रहे है आजकल…”

क्रीमरोल बोलते हुए मीनल की नज़रें लाला के लंड की तरफ थी, जो काउंटर के पीछे छुपा हुआ था…
और लाला के हिल रहे हाथ देखकर मीनल को सॉफ पता चल रहा था की वो साला ठरकी ज़रूर अपने लंड को मसल रहा होगा..

लाला ने जब क्रीम रोल वाला ताना सुना तो वो खिसियाई हुई सी हँसी हंसता हुआ बोला : “अररी वो…वो तो बस ऐसे ही…. तुझे तो पता है की लाला की दिल कितना बड़ा है…बच्चो को क्रीम रोल देने से वो अगर खुश हो जातीं है तो मुझे भी खुशी होती है..”

मीनल ने आँखे तरेर कर कहा : “हमे तो ना खिलाया तुमने आज तक अपना क्रीम रोल…. हमारा बचपन और जवानी तो ऐसे ही निकल गयी…शादी होकर दूसरे शहर चली गयी..पर क्रीम रोल ना चखा मैने आज तक तेरा लाला…”

उसके द्विअर्थी संवाद को सुनकर लाला के चेहरे पर पसीना चमकने लगा…
साली कितनी चालाकी से वो लाला के लंड को लेने की बात कह रही थी…
पर लाला को अभी भी उसपर विश्वास नही हो रहा था, उसकी खुल्ली बातो को सुनकर कहीं वो ऐसा-वैसा काम कर दे और बाद में गाँव भर में बदनामी हो , ये बात लाला हरगिज़ नही चाहता था…
भले ही कम मिले पर आराम से मिले, यही सिद्धांत था लाला का..
जो उसके दोस्त रामलाल ने उसे सिखाया था..

उसकी बातो को परखने के लिए लाला ने झट्ट से मर्तबान से एक क्रीम रोल निकाल कर उसे थमा दिया..

मीनल ने मुँह बनाते हुए वो रोल पकड़ा और उसे बड़े ही बेमन से मुँह में लेकर चूस डाला…
ठीक वैसे ही जैसे कोई लंड को मुँह में लेकर चूसता है…

एक – दो चुप्पे मारने के बाद उसने उसे काटा तो अंदर भरी क्रीम उसके होंठो और मुँह पर लग गयी…
जिसे उसने अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर चाट लिया..

लाला ये सब बड़े ध्यान से देख रहा था…
उसका तो दिल तभी से धाड़-2 बजने लगा था जब उसने रोल को मुँह में लेकर लंड की तरह चूसा था…
ऐसे तो शबाना चूसती है उसके लंड को…

लाला : “अब बोल…कैसा लगा मेरा क्रीम रोल…”

मीनल ने मुँह बिचका कर कहा : “एकदम ढीला…नर्म सा..मुझे तो कड़क पसंद है…कड़क क्रीम रोल है तो वो चखा लाला…”

लाला का मन तो किया की उसकी घोड़ी बना कर, एक टाँग काउंटर पर रखे और घचाक से अपना लंड उसकी चूत में पेल कर उसे बेदर्दी से तब तक चोदे जब तक वो चिल्लाते हुए अपने मुँह से ये ना बोल दे की ‘बस कर लाला….मार ही डालेगा तू तो…ये कड़क क्रीम रोल तो मेरी जान निकाल रहा है‘

पर लाला जानता था की ऐसा करना अभी के लिए पॉसिबल नही है..

पर लाला अब इतनी बात तो समझ ही चुका था की वो लाला के लंड की ही बात कर रही है…

वो काउंटर से बाहर निकल आया..
और बाहर निकलते ही उसकी धोती में जो तंबू बना हुआ था वो मीनल को दिखाई दे गया…

अब चेहरे पर पसीना चमकने की बारी मीनल की थी…
लाला के लंड का उभार उसके शरीर से करीब एक फुट आगे तक निकला हुआ था…
जैसे उसके धोती के कपड़े को किसी खूँटे पर टाँग रखा हो.

धूर्त लाला के होंठो पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी, वो बोला : “अर्रे, देख तो , तेरे माथे पर तो पसीना है…रुक ज़रा, मैं तुझे केम्पा पिलाता हूँ …आजा अंदर…”

इतना कहकर लाला अंदर वाले कमरे की तरफ चल दिया….
और उसके पीछे –2 एक सम्मोहन में बँधी मीनल भी चल दी…

भले ही वो दुनिया भर की प्लानिंग करके आई थी
पर लाला के लंड के उभार ने ही उसकी चूत के पसीने निकाल दिए थे…
अब तो वो पूरी तरह से चुदने को तैयार थी…
बस लाला के कहने भर की देर थी और उसने अपना नाड़ा खोल देना था..

लाला ने उसके हाथ में कोल्ड ड्रिंक पकड़ाई तो उसका हाथ लाला से छू गया…
ऐसा लगा जैसे कोई कठोर चट्टान से घिस्सा लग गया हो उसका…
मीनल तो उसके रंग रूप और मर्दानेपन की कायल होती जा रही थी…

अचानक मीनल को महसूस हुआ की उसकी जाँघ पर कुछ रेंग रहा है…
उसने नीचे देखा तो उसका शरीर काँप सा गया..
वो लाला के लंड का सुपाड़ा था, जो उसकी धोती से निकल कर उसकी जाँघो को टच कर रहा था…

और ये ठीक वैसा ही था, जैसा की रीतु ने बताया था…
एक दम काला नाग, कलाई जितना मोटा और एकदम कड़क….

लाला ने अपने दाँत निपोर कर कहा : “हाँ तो तू क्या कह रही थी..लाला का क्रीम रोल कड़क नही है… वो तो दुनिया को दिखाने के लिए मर्तबान में रखा है..असली तो गोडाउन में रहता है…”

मीनल की नज़रें कभी लाला के चेहरे पर जाती और कभी उसके लंड पर…

बेचारी कुछ बोलने के काबिल ही नही रह गयी थी…
ऐसे कड़क रोल को तो मुँह में लेकर चूसने में ही उसका जबड़ा फट्ट जाना है…
और जब ये चूत में जाकर हाहाकार मचाएगा तो क्या हाल होगा
ये तो बताने की ज़रूरत ही नही है….

मीनल का पूरा शरीर और दिमाग़ सुन्न सा हो चुका था…
अगर वो चाहती तो एक ही पल में लाला के लंड को पकड़ कर अपनी चूत में घुसवा लेती..
पर दिमाग़ के एक कोने में कुछ और भी चल रहा था
वो रीतु को जो वादा करके आई थी, वो भी तो उसे ही पूरा करना था…
और वो पूरा करने के बाद वो रीतु और सोनी की लाइफ में एक स्टार बन जाएगी, इसका भी उसे विश्वास था…
इसलिए एन्ड टाइम पर उसने अपने आप पर कंट्रोल करते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और बाहर की तरफ चल दी..

लाला को तो लगा था की उसके लंड को देखकर वो चुदे बिना नही रह सकेगी…
पर यहाँ तो उल्टा ही हो गया था…
वो तो भाग रही थी…
कही उसे बुरा तो नही लग गया…
लाला को लग रहा था की उसका पासा उल्टा पड़ गया है…
ऐसे अपने लंड की नुमाइश करके उसने शायद कोई ग़लती कर दी है..

और यही सोचकर वो उसके पीछे भागा..

लाला : “अररी सुन तो…क्या हो गया एकदम से तुझे…कोल्ड ड्रिंक तो पी ले पूरी…”

मीनल : “अचानक कुछ ज़्यादा ही गर्मी लग रही है लाला…अब तो पहाड़ी के पास वाले झरने पर जाकर नहाउंगी , तभी ये गर्मी निकलेगी…”

इतना कहकर वो हिरनी की तरह कुलाँचे भरती हुई उसकी आँखो से ओझल हो गयी..

लाला अपना सिर पकड़ कर बैठ गया..

 

वो दोनो लगभग भागती हुई सी लाला जी की दुकान पर पहुँची..

रीतु : ”लाला जी, लालाजी , 2 कोल्ड ड्रिंक दे दो और 1 बिस्कुट का पैकेट , पैसे पापा शाम को देंगे…”

लाला जी ने नज़र भर कर दोनो को देखा
उनके सामने पैदा हुई ये फूलों की कलियाँ पूरी तरह से पक चुकी थी
उन दोनो ने छोटी-2 स्कर्ट के साथ – साथ कसी हुई टी शर्ट पहनी हुई थी..जिसके नीचे ब्रा भी नही थी..

उनके उठते-गिरते सीने को देखकर
और उनकी बिना ब्रा की छातियो के पीछे से झाँक रहे नुकीले गुलाबी निप्पल्स को देखकर
उन्होने अपने सूखे होंठो पर जीभ फेरी..

”अरे, जो लेना है ले लो रीतु, पैसे कौनसा भागे जा रहे है…जा , अंदर से निकाल ले कैम्पा ..”

उन्होने दुकान के पिछले हिस्से में बने एक दूसरे कमरे में रखे फ्रिज की तरफ इशारा किया..

दोनो मुस्कुराती हुई अंदर चल दी

इस बात से अंजान की उस बूढ़े लाला की भूखी नज़रें उनके थिरक रहे नितंबो को देखकर, उनकी तुलना एक दूसरे से कर रहीं है
पर उनमे भरी जवानी की चर्बी को वो सही से तोल भी नही पाए थे की उनके दिल की धड़कन रोक देने वाला दृश्य उनकी आँखो के सामने आ गया..

रीतु ने जब झुककर फ्रीज में से बॉटल निकाली तो उसकी नन्ही सी स्कर्ट उपर खींच गयी, और उसकी बिना चड्डी की गांड लाला जी के सामने प्रकट हो गयी…

कोई और होता तो वहीं का वहीं मर जाता
पर लाला जी ने बचपन से ही बादाम खाए थे
उनकी वजह से उनका स्ट्रॉंग दिल फ़ेल होने से बच गया..

पर साँस लेना भूल गये बेचारे …
फटी आँखो से उन नंगे कुल्हो को देखकर उनका हाथ अपनी घोती में घुस गया…
और अपने खड़े हो चुके लंड की कसावट को महसूस करके उनके शरीर का रोँया-2 खड़ा हो गया..लंड से निकल रहा प्रीकम उनके हाथ पर आ लगा

उन्होने झट्ट से सामने पड़े मर्तबान से 2 क्रीम रोल निकाले और उसे अपनी धोती में घुसा कर अपने लंड पर रगड़ लिया
उसपर लगी क्रीम लाला जी के लंड पर चिपक गयी और लाला जी के लंड का पानी क्रीम रोल पर..

जब दोनो बाहर आई तो लाला जी ने बिस्कुट के पैकेट के साथ वो क्रीम रोल भी उन्हे थमा दिए

और बोले : “ये लो , ये स्पेशल तुम दोनो के लिए है…मेरी तरफ से ”

दोनो उसे देखते ही खुश हो गयी, ये उनका फेवरेट जो था, उन्होने तुरंत वो अपने हाथ में लिया और उस रोल
को मुँह में ले लिया…

लाला जी का तो बुरा हाल हो गया

जिस अंदाज से दोनो ने उसे मुँह में लिया था
उन्हे ऐसा लग रहा था जैसे वो उनका लंड चूस रही है…

लालाजी के लंड का प्रीकम उन्होंने अपनी जीभ से समेट कर निगल लिया
उन्हे तो कुछ पता भी नही चला पर उन दोनो को अपने लंड का पानी चाटते देखकर लाला जी का मन आज कुछ करने को मचल उठा.. .

दोनो उन्हे थेंक्यु लालाजी बोलकर हिरनियों की तरह उछलती हुई बाहर निकल गयी..

लालाजी की नज़रें एक बार फिर से उनके कूल्हों पर चिपक कर रह गयी…
और हाथ अपने लंड को एक बार फिर से रगड़ने लगा..

वो फुसफुसाए ‘साली….रंडिया….बिना ब्रा और कच्छी के घूम रही है….इन्हे तो चावल की बोरी पर लिटाकर रगड़ देने को मन करता है…सालियों ने सुबह –2 लंड खड़ा करवा दिया…अब तो कुछ करना ही पड़ेगा…”

इतना कहकर उन्होने जल्दी से दूकान का शटर डाउन किया और दुकान के सामने वाली गली में घुस गये
वहां रहने वाली शबाना को वो काफ़ी सालो से चोदते आ रहे थे…
वो लालाजी से चुदाई करवाती और उसके बदले अपने घर का राशन उनकी दुकान से उठा लाती थी..

लालाजी की दुकान से निकलते ही रीतु और मीनू ज़ोर-2 से हँसने लगी…

रीतु : “देखा, मैं ना कहती थी की वो ठरकी लाला आज फिर से क्रीम रोल देगा…चल अब जल्दी से शर्त के 10 रूपए निकाल”

मीनू ने हंसते हुए 10 का नोट निकाल कर उसके हाथ पर रख दिया और बोली : “हाँ …हाँ ..ये ले अपने 10 रूपए …मुझे तो वैसे भी इसके बदले क्रीम रोल मिल गया है…”

और एक बार फिर से दोनो ठहाका लगाकर हँसने लगी..

मीनू : “वैसे तेरी डेयरिंग तो माननी पड़ेगी रीतु, आज तूने जो कहा, वो करके दिखा दिया, बिना कच्छी के तेरे नंगे चूतड़ देखकर उस लाला का बुरा हाल हो रहा था…तूने देखा ना, कैसे वो फटी आँखो से तेरे और मेरे सीने को घूर रहा था…जैसे खा ही जाएगा हमारे चुच्चो को…”

रीतु : “और तू भी तो कम नही है री..पहले तो कितने नाटक कर रही थी की बिना ब्रा के नही जाएगी, तेरे दाने काफ़ी बड़े है, दूर से दिखते है…पर बाद में तू सबसे ज़्यादा सीना निकाल कर वही दाने दिखा रही थी…साली एक नंबर की घस्ति बनेगी तू बड़ी होकर…”

इतना कहकर वो दोनो फिर से हँसने लगी…
लालाजी को तरसाकर उनसे चीज़े ऐंठने का ये सिलसिला काफ़ी दिनों से चल रहा था
और दिन ब दिन ये और भी रोचक और उत्तेजक होता जा रहा था..

दूसरी तरफ, लालाजी जब शबाना के घर पहुँचे तो वो अपनी बेटी को नाश्ता करवा रही थी…
लालाजी को इतनी सुबह आए देखकर वो भी हैरान रह गयी पर अंदर से काफ़ी खुश भी हुई…
आज लालजी बिना कहे ही आए थे, यानी उन्हे चुदाई की तलब बड़े ज़ोर से लगी थी..
उसके घर का राशन भी ख़त्म हो चुका था,
उन्हे खुश करके वो शाम को दुकान से समान भी ला सकती थी..

उसने लालाजी को बिठाया और अपनी बेटी को बाहर खेलने भेज दिया..

दरवाजा बंद करते ही लालाजी ने अपनी धोती उतार फेंकी..
अंदर वो कभी कुछ नही पहनते थे…

52 साल की उम्र के बावजूद उनका लंड किसी जवान आदमी के लंड समान अकड़ कर खड़ा था…

शबाना : “या अल्ला, आज इसे क्या हो गया है…लगता है लालाजी ने आज फिर से कच्ची जवानी देख ली है…”

वो लालाजी की रग-2 जानती थी..

लालाजी के पास कुछ कहने-सुनने का समय नही था
उन्होने शबाना की कमीज़ उतारी और उसकी सलवार भी नोच कर फेंक दी..
बाकी कपड़े भी पलक झपकते ही उतर गये…

अब वो उनके सामने नंगी थी…

पर उसे नंगा देखकर भी उनके लंड में वो तनाव नही आ रहा था जो रीतु की गांड की एक झलक देखकर आ गया था..

लालाजी उसके रसीले बदन को देखे जा रहे थे और शबाना ने अपनी चूत में उंगली घुसाकर अपना रस उन्हे दिखाया और बोली : “अब आ भी जाओ लालाजी , देखो ना, मेरी मुनिया आपको देखकर कितना पनिया रही है….जल्दी से अपना ये लौड़ा मेरे अंदर घुसा कर इसकी प्यास बुझा दो लाला….आओ ना…”

उस रसीली औरत ने अपनी रस में डूबी उंगली हिला कर जब लालाजी को अपनी तरफ बुलाया तो वो उसकी तरफ खींचते चले गये..
एक पल के लिए उनके जहन से रीतु और मीनू का चेहरा उतर गया..

वो अपना कड़क लंड मसलते हुए आगे लाए और शबाना की चूत पर रखकर उसपर झुकते चले गये…

लालाजी का वजन काफ़ी था
उनके भारी शरीर और मोटे लंड के नीचे दबकर उस बेचारी शबाना की चीख निकल गयी…

”आआआआआआआआआआआआअहह लालाजी ,……. मार डाला आपने तो…….. ऐसा लग रहा है जैसे कोई सांड चोद रहा है मुझे….. अहह……चूत फाड़ोगे क्या मेरी आज ….”

लालाजी भी चिल्लाए : “भेंन की लौड़ी …..तेरी चूत में ना जाने कितने लंड घुस चुके है, फिर भी तेरी चूत इतनी कसी हुई है…..साली…….कौनसा तेल लगती है इसपर…”

शबाना : “आआआआआअहह….आपकी ही दुकान का तेल है लालाजी ….आज सुबह ही ख़त्म हुआ है…शाम को फिर से लेने आउंगी ….”

उसने चुदाई करवाते-2 ही अपने काम की बात भी कर ली..

लालाजी भी जानते थे की वो कितनी हरामी टाइप की औरत है
पर चुदाई करवाते हुए वो जिस तरह खुल कर मस्ती करती थी
उसी बात के लिए लालाजी उसके कायल थे…

लालाजी ने अपने लंड के पिस्टन से उसकी चूत को किसी मशीन की तरह चोदना जारी रखा..

शबाना : “आआआआआहह लालाजी …आज तो कसम से आपके बूड़े शरीर में जैसे कोई ताक़त आ गयी है….किस कली को देख आए आज….अहह”

लालाजी बुदबुदाए : “वो है ना साली….दोनो रंडिया…अपने मोहल्ले की….रीतु और मीनू….साली बिना ब्रा पेंटी के घूमती है आजकल ……साली हरामजादियाँ …..आज तो कसम से उन्हे दुकान पर ही ठोकने का मन कर रहा था….”

शबाना हँसी और बोली : “उन दोनो ने तो पुर मोहल्ले की नींद उड़ा रखी है लालाजी …. उफफफफ्फ़….उन्हे देखकर मुझे अपनी जवानी के यही दिन याद आ गये…… अहह….. मैने तो इस उम्र में खेत में नंगी खड़ी होकर अपनी चूत मरवाई थी और वो भी 4 लौड़ो से…..और कसम से लालजी, आज भी वैसी ही फीलिंग आ रही है जैसे एक साथ 4 लंड चोद रहे है मुझे….”

लालाजी को वो अपनी जवानी के किस्से सुना रही थी और लालाजी एक बार फिर से रीतु और मीनू के ख़यालो में डूबकर उसकी चूत का बाजा बजाने लगे…

और जल्द ही, रीतु और मीनू के नाम का ढेर सारा रसीला प्रसाद उन्होने शबाना की चूत में उड़ेल दिया…

उसके बाद लालाजी ने अपने कपड़े पहने और बिना कुछ कहे बाहर निकल गये…

दुकान खोलकर वो फिर से अपने काम में लग गये पर उनका मन नही लग रहा था…
अब उन्हे किसी भी हालत में उन दोनो को अपनी बॉटल में उतारना था और उसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार थे.

लालाजी का साहूकारी का भी काम था और गाँव के लोग अक्सर उनसे ऊँचे रेट पर पैसे ले जाते थे…
वैसे तो लालाजी का रोब ही इतना था की बिना कहे ही हर कोई उनकी दुकान पर आकर सूद के पैसे हर महीने दे जाता था, पर फिर भी कई बार उन्हे अपना लट्ठ लेकर निकलना ही पड़ता था वसूली करने …

उनका रोबीला अंदाज ही काफ़ी होता था गाँव के लोगो के लिए, इसलिए जब वो उगाही करने जाते तो पैसे निकलवा कर ही वापिस आते…

लालाजी की पत्नी को मरे 5 साल से ज़्यादा हो चुके थे…
उनकी एक बेटी थी जो साथ के गाँव में ब्याही हुई थी…
शादी के बाद उसने भी एक फूल जैसी बच्ची को जन्म दिया था और वो भी अब 18 की हो चली थी और अक्सर अपने नाना से मिलने, अपनी माँ के साथ उनके घर आया करती थी..

पर जब से लालाजी की बीबी का देहांत हुआ था, उसके बाद से उनकी सैक्स लाइफ में बहुत बदलाव आए थे…
पहले तो उनकी सैक्स लाइफ नीरस थी…
2-4 महीने में कभी कभार उनकी बीबी राज़ी होती तो उसकी मार लेते थे…
पर बीबी के जाने के बाद उनके चंचल मन ने अंगडाइयाँ लेनी शुरू कर दी…
शबाना के साथ भी उनके संबंध उसी दौरान हुए थे…
वो अक्सर उनकी दुकान से समान उधार ले जाती और पैसे लाटाने के नाम पर अपनी ग़रीबी की दुहाई देती…

ऐसे ही एक दिन जब लालाजी उसके घर गये और पैसे का तक़ाज़ा किया तो उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और लाला जी के कदमो मे बैठ गयी…

बस एक वो दिन था और एक आज का दिन है, ऐसा शायद ही कोई हफ़्ता निकलता होगा जब लालाजी का लंड उसकी चूत में जाकर अपनी वसूली नहीं करता था .. बदले में वो अपने घर का राशन बिना किसी रोक टोक के उठा लाती..

पर एक ही औरत को चोदते –2 अब लालजी का मन ऊब सा चुका था…
उनके सामने जब गाँव की कसी हुई जवानियां, अपने मादक शरीर को लेकर निकलती तो उनके लंड का बुरा हाल हो जाता था… और ये बुरा हाल ख़ासकर रीतु की कच्ची अम्बियों को देखकर होता था…

उन दोनो की कामुक हरकतों ने लालाजी का जीना हराम कर रखा था..

खैर, आज जब लालजी ने अपना बही ख़ाता खोला तो उन्होने पाया की रामदीन ने जो पैसे उधार लिए थे, उसका सूद नही आया है अब तक…
रामदीन दरअसल रीतु का पिता था..
बस , फिर क्या था…
लालजी की आँखो में एक चमक सी आ गयी..

उन्होने झत्ट से अपना लट्ठ उठाया, दुकान का शटर नीचे गिराया और चल दिए रीतु के घर की तरफ..

वहां पहुँचकर उन्होने दरवाजा खटकाया पर काफ़ी देर तक कोई बाहर ही नही निकला…
एक पल के लिए तो लालजी को लगा की शायद अंदर कोई नही है…
पर तभी उन्हे एक मीठी सी आवाज़ सुनाई दी..

”कौन है….”

लालाजी के कान और लंड एकसाथ खड़े हो गये…
ये रीतु की आवाज़ थी.

वो अपने रोबीले अंदाज में बोले : “मैं हूँ …लाला…”

अंदर खड़ी रीतु का पूरा शरीर काँप सा गया लालाजी की आवाज़ सुनकर…
दरअसल वो उस वक़्त नहा रही थी…

और नहाते हुए वो सुबह वाली बात को याद करके अपनी मुनिया को मसल भी रही थी की कैसे उसने और मीनू ने मिलकर लालाजी की हालत खराब कर दी थी…
और अपनी चूत मसलते हुए वो ये भी सोच रही थी की उसकी नंगी गांड को देखकर लालाजी कैसे अपने खड़े लंड को रगड़ रहे होंगे…
पर अचानक दरवाजा कूटने की आवाज़ ने उसकी तंद्रा भंग कर दी थी..
काफ़ी देर तक दरवाजा पीटने की आवाज़ सुनकर वो नंगी ही भागती हुई बाहर निकल आई थी क्योंकि उसके अलावा घर पर इस वक़्त कोई नही था..
उसके पिताजी खेतो में थे और माँ उन्हे खाना देने गयी हुई थी..

रीतु के शरारती दिमाग़ में एक और शरारत ने जन्म ले लिया था अब तक..

रीतु बड़े सैक्सी अंदाज में बोली : “नमस्ते लालाजी …कहिए…कैसे आना हुआ…”

लालाजी ने इधर उधर देखा, आस पास देखने वाला कोई नही था…

वो बोले : “अर्रे, दरवाजा बंद करके भला कोई नमस्ते करता है…दरवाजा खोल एक मिनट…. बड़ी देर से खड़का रहा हूँ, तेरे पिताजी से जरुरी काम है ”

रीतु : “ओह्ह …लालाजी …माफ़ करना…पर..मैं नहा रही थी…दरवाजे की आवाज़ सुनकर ऐसे ही भागती आ गयी…नंगी खड़ी हूँ , इसलिए दरवाजा नही खोल रही…एक मिनट रूको..मैं कुछ पहन लेती हूँ …”

उफफफफ्फ़…..
एक तो घर में अकेली…
उपर से नहा धोकर नंगी खड़ी है….
हाय ….
इसकी इसी अदाओं पर तो लालाजी का लंड उसका दीवाना है…

उसने ये सब दरवाजे के इतने करीब आकर, अपनी रसीली आवाज़ में कही थी की दरवाजे के दूसरी तरफ खड़े लालाजी का लंड उनकी धोती में खड़ा होकर दरवाजे की कुण्डी से जा टकराया…

लालाजी दम साधे उसके दरवाजा खोने का इंतजार करने लगे..

एक मिनट में जब दरवाजा खुला तो रीतु को देखकर उनकी साँसे तेज हो गयी….
वो जल्दबाज़ी में एक टॉवल लपेट कर बाहर आ गयी थी…
उसने सिर्फ टॉवल पहना हुआ था और कुछ भी नही…
और उपर से उसके गीले शरीर से पानी बूंदे सरकती हुई उसके मुम्मों के बीच जा रही थी..

लालाजी का दिल धाड़-2 करने लगा..वो उनके सामने ऐसे खड़ी थी जैसे ये पहनावा उसके लिए आम सी बात है, पर अंदर से वो ही जानती थी की उसका क्या हाल हो रहा है

रीतु : “हांजी लालाजी ,आइए ना अंदर…बैठिये …”

लालाजी अंदर आ गये और बरामदे में पड़ी खाट पर जाकर बैठ गये…
उनकी नज़रें रीतु के बदन से ही चिपकी हुई थी…
आज वो सही तरह से उसके शरीर की बनावट को देख पा रहे थे…

रीतु की कमर में एक कटाव पैदा हो चुका था जो उसके रसीले कुल्हो की चौड़ाई दर्शाते हुए नीचे तक फैलता हुआ दिख रहा था…
ब्रा तो वो पहले भी नही पहनती थी इसलिए उसकी गोलाइयों का उन्हे अच्छे से अंदाज़ा था…
करीब 32 का साइज़ था उसके गुलगुलो का..
और उनपर लगे कंचे जितने मोटे लाल निप्पल….
उफफफ्फ़..
उनकी नोक को तो लालजी ने कई बार अपनी आँखो के धनुषबान से भेदा था..

रीतु : “लालाजी …पानी…..ओ लालाजी …..पानी लीजिए….”

लालाजी को उनके ख़यालो से, लंड के बाल पकड़ कर बाहर घसीट लाई थी रीतु, जो उनके सामने पानी का ग्लास लेकर खड़ी थी..

नीचे झुकने की वजह से उस कॉटन के टॉवल पर उसकी जवानी का पूरा बोझ आ पड़ा था…
ऐसा लग रहा था जैसे पानी के गुब्बारे, कपड़े में लपेट कर लटका दिए है किसी ने…
और उनपर लगे मोटे निप्पल उस कपड़े में छेद करके उसकी जवानी का रस बिखेरने तैयार थे…

पर इन सबसे अंजान बन रही रीतु, भोली सी सूरत बना कर लालाजी के पास ही बैठ गयी और बोली : “पिताजी तो शाम को ही मिलते है लालाजी , आपको तो पता ही है…और माँ उनके लिए खाना लेकर अभी थोड़ी देर पहले ही निकली है…घंटा भर तो लगेगा उन्हे भी लोटने में …”

लालाजी को जैसे वो ये बताना चाह रही थी की अगले एक घंटे तक वो अकेली ही है घर पर …

लालाजी ने उसके गोरे बदन को अपनी शराबी आँखो से चोदते हुए कहा : “अर्रे, मैं ठहरा व्यापारी आदमी, मुझे क्या पता की कब वो घर पर रहेगा और कब खेतो में …मुझे तो अपने ब्याज से मतबल है…आज ही देखा मैने, 20 दिन उपर हो चुके है और ससुरे ने ब्याज ही ना दिया…”

लालाजी अपनी आवाज़ में थोड़ा गुस्सा ले आए थे…
रीतु ने तो हमेशा से ही उनके मुँह से मिठास भरी बातें सुनी थी…
इसलिए वो भी थोड़ा घबरा सी गयी…

वो बोली : “लालाजी …इस बार बापू ने नयी मोटर लगवाई है खेतो में, शायद इसलिए पैसो की थोड़ी तंगी सी हो गयी है….”

वैसे तो उसका सफाई देने का कोई मतलब नही था पर लालाजी ताड़ गये की उसे अपनी फैमिली की कितनी चिंता है…

लालाजी : “देख रीतु, तेरा बापू मोटर लगवाए या मोटर गाड़ी लेकर आए, मेरे पैसे टाइम से ना मिले तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ …”

लालाजी का ये रूप देखकर अब रीतु को सच में चिंता होने लगी थी…
उसने सुन तो रखा था की लालाजी ऐसे लोगो से किस तरह का बर्ताव करते है पर ये नही सोचा था की उसके बापू के साथ भी ऐसा हो सकता है…

उसने लालाजी के पाँव पकड़ लिए : “नही लालजी…आप ऐसा ना बोलो…मेरा बापू जल्दी ही कुछ कर देगा…आप ऐसा ना बोलो…थोड़े दिन की मोहलत दोगे तो वो आपके सूद के पैसे दे देंगे..”

लालाजी ने उसकी बाहें पकड़ कर उपर उठा लिया….
उस नन्ही परी की आँखो में आँसू आ रहे थे..

लाला : “अर्रे…तू तो रोने लगी…अर्रे ना….ऐसा ना कर…..मैं इतना भी बुरा ना हू जितना तू सोचन लाग री है”

बात करते-2 लालाजी ने उसे अपने बदन से सटा सा लिया…
उसके जिस्म से निकल रही साबुन की भीनी –2 खुश्बू लालाजी को पागल बना रही थी…
पानी की बूंदे अभी तक उसके शरीर से चो रही थी…
लालाजी की धोती में खड़ा छोटा पहलवान एक बार फिर से हरकत में आया और उसने अपने सामने खड़ी रीतु को झटका मारकर अपने अस्तित्व का एहसास भी करवा दिया..

एक पल के लिए तो रीतु भी घबरा गयी की ये क्या था जो उसके पेट से आ टकराया…
उसने नज़रें नीचे की तो लालाजी की धोती में से झाँक रहे उनके मोटे लंड पर उसकी नज़र पड़ी, जो बड़ी चालाकी से अपना चेहरा बाहर निकाल कर रीतु के बदन को टच कर रहा था…

वो तो एकदम से डर गयी…

आज से पहले उसने लंड का सिर्फ़ नाम ही सुना था
कभी देखा नही था…
ये तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई काली घीस हो…उसकी कलाई कितना मोटा था और लगभग उतना ही लम्बा

उसने घबराकर लालाजी को धक्का दिया और दूर जाकर खड़ी हो गयी…
लालाजी ने भी अपने पालतू जानवर को वापिस उसके पिजरे में धकेल दिया और हंसते हुए चारपाई पर वापिस बैठ गये…

उन्हे तो पता भी नही चला की रीतु ने उनका जंगली चूहा देख लिया है..

लालाजी : “चल, तेरी बात मानकर मैं कुछ दिन और रुक जाता हूँ …इसी बात पर एक चाय तो पीला दे….”

रीतु बेचारी सहमी हुई सी अंदर गयी और चाय बनाने लगी…
उसके जहन में रह-रहकर लालाजी के लंड की शक्ल उभर रही थी…
उसने तो सोचा था की गोरा-चिट्टा , सुंदर सा लंड होता होगा…
जिसे सहलाने में , दबाने में , चूसने में मज़ा मिलता है
इसलिए लड़किया उसकी दीवानी होती है….
उसे क्या पता था की वो निगोडा ऐसा कालू निकलेगा..

जैसे-तैसे उसने चाय बनाई और लालाजी को देने पहुँच गयी..
लालाजी की नज़रें उसके अंग-2 को भेदने में लगी थी, ये बात तो उसे भी अच्छे से पता थी
पर उसे भी तो उन्हे अपना शरीर दिखाकर सताने में मज़ा आता था…

खैर, चाय पीकर लालाजी चले गये…
और उसने आवाज़ देकर अपनी सहेली सोनी को अपने घर बुला लिया..
और उसे लालाजी के घर आने के बाद से लेकर जाने तक का पूरा किस्सा विस्तार से सुनाया..

सोनी : “यार, तू दिन ब दिन बड़ी हरामी होती जा रही है…. पहले तो तू लालजी को सताती थी अपना बदन दिखाकर और आज तुझमे इतनी हिम्मत आ गयी की उनका हथियार भी देख लिया तूने…”

रीतु : “अररी, मैने जान बूझकर नही देखा री…वो तो बस….शायद…मुझे ऐसी हालत में देखकर उनका वो काबू में नही रहा…इसलिए बाहर निकल आया…”

उसने शर्माते हुए ये कहा

सोनी : “ओये, रहने दे तू …तुझे मैं अच्छे से जानती हूँ ….पिछले कुछ दिनों से तू कुछ ज़्यादा ही उड़ने लगी है….यही हाल रहा ना तो जल्द ही चुद भी जाएगी, देख लेना…”

रीतु : “मुझे चुदने की इतनी भी जल्दी नही है री….और ऐसे लंड से चुदने में तो बिल्कुल भी नही….एकदम काला नाग था लाला का लंड …सच में सोनी, देखकर ही घिन्न सी आ रही थी…डर भी लग रहा था…”

सोनी : “तो तूने क्या सोचा था, जैसी इंसान की शक्ल होती है, वैसा ही उनका लंड भी होता है….हा हा…. वो तो सबका ही काला होता है पागल… बस ये देखना है की वो कितना लंबा है और कितना मोटा…और चुदाई करने में कितनी देर तक अकड़ कर रहता है….”

रीतु : “तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तूने पी एच डी कर ली है इसमें …”

सोनी : “यार, तुझे तो पता है ना…आजकल मीनल दीदी आई हुई है घर पर….कल रात मैं उनसे इसी बारे में बाते कर रही थी…और हम दोनो आपस में बहुत खुली हुई है, तुझे भी पता है…इसलिए उन्होने ये सब बातें बड़े विस्तार से बताई मुझे…”

मीनल दरअसल सोनी की बड़ी बहन थी…
जिसकी शादी 2 साल पहले अजमेर में हुई थी….
3-4 महीने में 1 बार वो घर पर आ जाया करती थी..

रीतु : “हम्म ….. हो सकता है उनकी बात सही हो…पर मुझे नही लगता की मैं कभी ऐसे लंड से चुद पाऊँगी ..”

सोनी : “चुदने की बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे तू लालजी के लंड को अंदर लेने को पहले से ही तैयार थी…और अब उसका रंग देखकर मना कर रही है…”

रीतु : “तू चाहे जो भी समझ….पर मुझे नही लगता की मैं कभी चुदाई के बारे में पहले जैसा सोच पाऊँगी …”

बात तो सही थी….
पिछले कुछ दिनों से वो दोनो अक्सर चुदाई की ही बातें किया करती थी…
और लालाजी से पंगे लेने के भी नये-2 तरीके सोचा करती थी..
और ऐसा नही था की गाँव में और लड़के नही थे
वो लालाजी के साथ ही ऐसा इसलिए किया करती थी की ऐसा करने में बदनामी का डर कम था
क्योंकि लालाजी किसी से ज़्यादा बात नही किया करते थे…और उनसे लोग डरते भी थे.
दूसरे लड़को के साथ ऐसी हरकत करने की देर थी की पूरा गाँव उनके पीछे पड़ जाना था..
पर लालाजी के साथ अपने हिसाब से पंगे लेकर वो भी खुश रहती थी और लालजी को भी उनके हिस्से की खुशी मिल जाती थी.
साथ में फ्री का क्रीमरोल तो था ही.

सोनी ने उसे समझाते हुए कहा : “अच्छा तू मुझे एक बात बता….ये लोग अक्सर छुप कर…अंधेरे में .. और रात में ही सैक्स क्यों करते है…”

रीतु ने उसे गोल आँखे करके देखा और बोली : “पता नही…”

सोनी : “वो इसलिए की लंड के रंग और रूप से उन्हे कोई लेना देना नही होता….वो अंदर जाकर कैसा मज़ा देगा सिर्फ़ यही मायने रखता है…बाकी सबकी अपनी-2 सोच है…”

रीतु ने सोचा की बात तो सोनी सही कह रही है….
उसके माँ बाप भी तो सभी के सोने के बाद नंगे होकर चुदाई करते थे…
और वो भी बत्ती बुझा कर…
एक-दो बार उसने सोने का बहाना करके , अंधेरे कमरे में उनके नंगे शरीर की हरकत ही देखी थी…
पर उसे देखकर वो सिर्फ़ उनके मज़े को ही महसूस कर पाई थी, उन दोनो के अंगो को नही देख पाई थी..

रीतु : “हम्म्म ..शायद तू सही कह रही है…”

सोनी : “अच्छा , ज़रा डीटेल में बता ना…कैसा था लालाजी का लंड …”

रीतु की आँखो में गुलाबीपन उतर आया….
वो शरमाते हुए बोली : “यार….मैं तो इतना डर सी गयी थी की उसे ढंग से देख भी नही पाई….बस ये समझ ले की….इतना मोटा था आगे से….”

उसने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली को मिलाकर एक गोला बनाया और सोनी को दिखाया…

सोनी : “सस्स्स्स्स्स्स्सस्स…. हाय …… तू कितनी खुशकिस्मत है….. तूने अपनी लाइफ का पहला लंड देख भी लिया….मैं एक बार फिर तुझसे पीछे रह गयी…”

दोनो खिलखिलाकर हंस पड़ी…

और फिर कुछ सोचकर सोनी बोली : “यार, अगर तू बोल रही है की उनका आगे से इतना मोटा था तो सच में उनसे चुदाई करवाने में काफ़ी मज़ा आएगा…”

रीतु उसके चेहरे को देखकर सोचने लगी की उसकी बात का मतलब क्या है..

सोनी : “मैं तुझे बता रही थी ना मीनल दीदी के बारे में .. उन्होने ही मुझे बताया था… उनके पति यानी मेरे जीजाजी का लंड तो सिर्फ़ इतना मोटा है जितना मेरा अंगूठा…और इतना ही लंबा…बस….इसलिए वो ज़्यादा एंजाय भी नही कर पाती…”

रीतु खुली आँखो से ऐसे लंड को इमेजीन करने लगी जो अंगूठे जितना मोटा और लंबा हो….
और उसके बारे में सोचकर उसे कुछ ज़्यादा एक्साइटमेंट भी नही हुई…
सोचने में ही ऐसा लग रहा है तो अंदर जाकर भला कौन सा तीर मार लेना है ऐसे लंड ने…

इससे अच्छा तो मोटा लंड ही है….
चूत फांके चीरता हुआ जब वो अंदर जाएगा तो कितना मज़ा मिलेगा…
ये सोचकर ही उसकी चूत में एक कसक सी उठी और गीलेपन का एहसास रीतु को दे गयी…

”उम्म्म्मममममममम…… अब ऐसी बाते करेगी तो मुझे फिर से कुछ होने लगेगा…”

यही वो शब्द थे जिन्हे सुनने के लिए सोनी इतनी मेहनत कर रही थी…

वो उसके करीब आई और अपनी जीभ से उसके होंठो को चाटते हुए बोली : “तो कौन बोल रहा है साली की सब्र कर… दिखा दे अपनी रसीली चूत एक बार फिर….लालाजी का नाम लेकर…”

सोनी अपनी सहेली की रग-2 से वाकिफ़ थी….
और शायद अंदर से ये भी जानती थी की लालाजी से चुदने के सपने वो कई दिनों से देख रही है….
ऐसे मौके पर एक बार फिर से लालाजी का नाम लेकर उसने फिर से उसकी चूत का रस पीने का प्रोग्राम पक्का कर लिया…

सोनी को भी इस खेल में मज़ा आता था…
और आए भी क्यो नही, भले ही एक लड़की का दूसरी लड़की के साथ ऐसा रिश्ता ग़लत होता है पर जब तक उनकी चूत में किसी का लंड नही जा सकता तब तक अपनी पक्की सहेली की जीभ तो घुस्वा ही सकते है वो दोनो…
और जब से सोनी ने उसकी चूत का रस पिया था, तब से तो वो उसके नशीले रस की दीवानी सी हो चुकी थी…
हालाँकि उसने खुद अपनी चूत का रस भी उंगली डालकर चखा था..
पर उसमे वो नशा नही था जो रीतु की चूत से निकले रस का था….
जैसे पहली धार की कच्ची शराब हो ….
ठीक वैसा नशा था उसका…

और ये सब बाते करने के पीछे उसका मकसद एक बार फिर से उसकी चूत का रस पीने का था…

सोनी ने जैसे ही रीतु के होंठो को चाटा
उसके तो कुत्ते फैल हो गये…
वो भी उसके होंठो पर टूट पड़ी…
सोनी ने उसकी टॉवल को खींच कर कागज़ की तरह नीचे फेंक दिया…
अंदर से तो वो पूरी नंगी ही थी..

रीतु को उसके गुलाबी निप्पल वाले नन्हे अमरूद भी बहुत पसंद थे….
गोरे-2 कच्चे टिकोरों पर चमक रहे लाल कंचे देखकर उसका मन ललचा उठा उन्हे चूसने के लिए…

वो उन्हे काफ़ी देर तक चूसती रही

फिर सोनी ने उसे उसी खाट पर लिटा दिया जिसपर अभी कुछ देर पहले लालाजी बैठे थे…

सोनी ने भी अपने कपडे झटके से उतार फेंके, वो रीतु के मुकाबले थोड़ी सांवली थी, पर उसका बदन भी काफी कसा हुआ था , वैसे भी लड़कियां नंगी होकर हमेशा ख़ूबसूरत दिखती हैं

और उसकी टांगे अपने कंधे पर लगाकर वो उसकी शहद की दुकान से मिठास बटोरने लगी..

”आआआआहह खा जा इसे…….. निकाल ले सारा जूस अंदर का…..अहह…साली आजकल बहुत बहती है ये…..पी जा सारा रस….पी जा…”

सोनी को तो वो रस वैसे ही बहुत पसंद था….
वो अपनी जीभ की स्ट्रॉ लगाकर उसकी चूत का रस सडप –2 करके पीने लगी…

और अंत में जब रीतु की चूत ने असली घी का त्याग किया तो उसके झड़ते हुए शरीर को महसूस करके वो खटिया भी चरमरा उठी…

और जैसे ही वो शांत हुई की बाहर की कुण्डी खटक गयी…
रीतु की माँ वापिस आ गयी थी खेतो से…

रीतु नंगी ही भागती हुई बाथरूम में घुस गयी और सोनी को सब संभालने का कहकर दरवाजा खोलने को कहा..

सोनी ने जब दराजा खोला तो उसे अपने घर में देखकर उसने इधर – उधर देखा और बोली : “तू यहाँ क्या कर रही है इस बकत ….और ये रीतु कहाँ है…”

सोनी : “वो मैं उसके साथ खेल रही थी…अब वो नहाने गयी है….बोली जब तक माँ नही आती मैं यहीं रूकूं …”

रीतु की माँ :” इसकी जवानी में ना जाने कौनसे उबाल आ रहे है आजकल, दिन में दूसरी बार नहा रही है…और ये देखो, मेरा तौलिया कैसे ज़मीन पर फेंका हुआ है…”

कहते हुए उसने तौलिया उठा कर अंदर रख दिया ….
सोनी भी जानती थी की अब यहाँ से निकल जाने में ही भलाई है…
इसलिए उसकी माँ को ये कहकर की रीतु को उसी के घर भेज देना, वो वहां से आ गयी..

अब उसे और रीतु को कुछ ऐसा प्लान बनाना था ताकि ये रोज-2 के छोटे-मोटे मज़े से बढ़कर कुछ आगे निकल सके…

और इसके लिए लालाजी से अच्छा बंदोबस्त कोई और हो ही नही सकता था..

नहा धोकर रीतु बाहर आई और उसने लालाजी के घर पर आने की बात माँ को बतायी…
लालाजी का नाम सुनकर तो उसकी माँ भी घबरा गयी..
उसे भी लालाजी के बर्ताव के बारे में अच्छे से पता था और वो ये भी जानती थी की उनके हालात आजकल अच्छे नही चल रहे है इसलिए सूद चुकाने में देरी हो रही है…
अपनी माँ को उनकी सोच में छोड़कर वो सोनी के घर पहुँच गयी…

सोनी के पिता का देहांत कई सालों पहले हो चुका था…
इसलिए उनके खेतो का काम उसका बड़ा भाई और माँ मिलकर संभालते थे…
और दोनो शाम से पहले घर आने वाले नही थे
इसलिए उन दोनो को किसी भी बात की रोक टोक या डर नही था..
सोनी की बहन मीनल आजकल अपने ससुराल से आई हुई थी, वो भी अपने बचपन की सहेली बिजली के घर गयी हुई थी…

सोनी : “रीतु , एक तो ये तेरी माँ है ना, दिन ब दिन खड़ूस होती जा रही है… मुझे देखते ही ना जाने कैसी आग सी लग जाती है उन्हे…ऐसा ही रहा तो मैने तेरे घर आना बंद कर देना है…”

रीतु भी ये बात जानती थी की उसकी माँ को सोनी फूटी आँख नही सुहाती …
उनका मानना था की उसके साथ मिलकर वो पूरे गाँव में बिना संगल की गाँय की तरह घूमती रहती है…
उन्हे शायद 1-2 लोगो ने बोला भी था की दोनो के पर निकल आए है आजकल…
अपनी फूट रही जवानी को दोनो गाँव भर में घूमकर दिखाती फिरती है…
इसलिए उन्हे लगता था की सोनी के साथ रीतु ज़्यादा ना ही मिले तो ही सही है..

पर उन दोनो की दोस्ती इन बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ती चली जा रही थी..

रीतु : “छोड़ ना ये रोज की बातें….पहले ये बता की लालाजी को कैसे काबू में लाया जाए…”

सोनी : “अर्रे, वो लाला तो पहले से ही काबू में है… फ्री में क्रीमरोल कोई ऐसे ही नही दे देता… हा हा”

रीतु : “मुझे तो लगता है की वो अपना क्रीम रोल देने की फिराक में है….”

सोनी : “हाँ , वही…काला सा…जो तुझे पसंद नही है….”

रीतु तुनककर बोली : “हाँ , नही है…”

सोनी : “नही है तो पसंद करना पड़ेगा…नही तो लालाजी तेरे काबू में नही आएँगे…”

रीतु ने सोचने वाला चेहरा बना लिया…
जैसे उसकी बात पर गोर कर रही हो.

सोनी : “देख रीतु…बात सिर्फ़ मज़े की नही है…बात तेरे पिताजी के सूद की भी है…हो सकता है लालाजी के साथ मज़े लेने के बाद वो तेरे पिताजी का सूद भी माफ़ कर दे…”

रीतु (थोड़ा गुस्से में ) : “तू कहना क्या चाहती है…लालाजी के सूद के बदले मैं उन्हे अपनी चूत भेंट कर दूँ क्या..मुझे ऐसा-वैसा समझ रखा है क्या तूने..? ”

सोनी : “ओहो….बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे खुद बड़ी दूध की धुली है…और ये काम करना ही नही चाहती…याद है न, पिछले हफ्ते क्या बात हुई थी हमारी, और कल की 10 रूपए वाली शर्त के बाद तो तूने अपनी नंगी गांड भी दिखा दी उस लाला को…अब रह ही क्या गया है, जब 10 रुपय के बदले नंगी गांड दिखा सकती है तो 10 हज़ार के बदले चूत भी तो दे सकती है ना…, इसलिए ये बेकार की बाते मत कर, जो सच है वो यही है की तुझे लाला की ज़रूरत है और लाला को तेरी जवानी की…”

वैसे सोनी सच ही कह रही थी….
रोजाना आपस में सैक्स के बारे में तरह-2 की बातें करने के बाद उन्होने यही सोचा था की अपने हुस्न का जलवा दिखाकर वो लालाजी से समान ऐंठा करेंगी, और ऐसा करने में वो कामयाब भी हो गयी थी…

रीतु :”चल..मान ली तेरी बात…पर लालाजी ने अगर ये बात गाँव भर में फैला दी तो मेरी माँ तो मेरा गला काट देगी….और तेरा भाई भी तुझे जिंदा नही छोड़ेगा…”

सोनी : “बस…यही तो…यही प्लानिंग तो हमें करनी है…ताकि हमारा काम भी हो जाए और लाला भी अपनी ज़ुबान से कुछ ना बोले…”

दोनो आपस में ऐसे बातें कर रही थी जैसे कोई जंग जीतने निकलना हो ..

वैसे ये प्लानिंग किसी जंग से कम की लग भी नही रही थी…
इतने सालों तक संभाल कर रखी जवानी का पहला सौदा बिना सोचे समझे नही करना चाहती थी वो दोनो…

यहाँ एक बात जान लेनी आवश्यक है की चूत की खुजली के बारे में रीतुज़्यादा आगे थी…
उसी का दिमाग़ इस तरह की बातों में ज़्यादा दौड़ता था…
अपने माँ बाप का मूड भाँपकर वो रात भर सिर्फ़ उनकी चुदाई भरी आहें सुनने के लिए जागा करती थी….
अपनी चूत को रगड़ कर वो जब तक दिन में 2-3 बार झड़ नही जाती थी, उसे चैन ही नही आता था…
नहाते हुए भी वो अपने पूरे बदन, ख़ासकर मुम्मो को निचोड़कर रख देती थी…
गाँव के हर मर्द के बारे में सोचकर, उसके लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसकारियां मारते हुए अपनी चूत रगड़ना उसके लिए आम बात थी…
और इसलिए उसने अपनी इन बातों के जाल में सोनी को भी फँसा लिया था…
जब दिन भर उसकी पक्की सहेली सैक्स के बारे में बाते करती तो वो भला कैसे इस रोग से अछूती रह जाती…
जवानी के कीड़े ने उसे भी काट लिया और वो दोनो अक्सर सैक्स से जुड़ी गंदी बाते करके घंटो हँसती रहती…
खेल – २ में वो एक दूसरे के अंगो सहलाती और जल्द ही वो खेल सारी मर्यादाएं लांघकर सैक्स के खेल में बदल गया, जिसमें वो गन्दी वाली मूवीज की तरह लैस्बियन सैक्स भी करने लगी

और इसी दौरान उन्होने शर्त लगाकर, लालाजी को भी सताया और अपनी भड़क रही जवानी को शांत करने का उन्हे ये एक नया तरीका मिल गया..

रीतु बोली : “मेरे दिमाग़ में एक आइडिया है…और अगर वो आइडिया कामयाब हो गया तो पिताजी के पैसो की सिरदर्दी भी दूर हो जाएगी और हमारा काम भी बन जाएगा…और इसके लिए आज शाम को ही हम दोनो लाला की दुकान पर चलेंगे..बोल मंजूर है..”

सोनी जानती थी की उसके खुराफाती दिमाग़ में ज़रूर कुछ गंदा पक रहा है…
पर मज़े लेने की चाह तो उसमे भी बहुत थी और वो जानती थी की वो जो भी करेगी, उसमे मज़े तो दोनो को ही मिलेंगे…

इसलिए उसने तुरंत हां कर दी.

रीतु ने उसे पूरा प्लान समझाया और सारी बात सुनकर सोनी भी उसके दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सकी..

बस…
फिर क्या था….
दोनो शाम को अपनी प्लानिंग के अनुसार लालाजी की दुकान पर पहुँच गयी.

लालाजी ने जब दूर से उन दोनो हुस्न की परियों को अपनी दुकान पर आते देखा तो उनकी धोती में सुस्ता रहा काला अजगर अंगड़ाई लेता हुआ खड़ा हो गया…
जैसे कह रहा हो ‘आ गयी दोनो हरामजादियां , अब आएगा मज़ा‘

लालाजी : “आओ आओ…. क्या हाल है रीतु….सोनी, बोल क्या लेना है आज तुम्हे …”

बात तो वो रीतु से कर रहे थे पर उनका एक हाथ उनकी धोती में घुस कर अपने लंड को रगड़ रहा था…

रीतु ने सोनी की तरफ देखा, उसने एक डरा हुआ सा चेहरा बना रखा था….
जैसे कुछ कहना चाहती हो पर सकुचा रही हो..

लालाजी : “अररी, साँप सूंघ गया है क्या तुझे….बोल ना…क्या लेगी…”

लालाजी का तो मन कर रहा था की बस एक बार बोल दे ‘लालाजी , आपका लंड लूँगी…बोलो…दोगे क्या..‘

पर वो भी जानते थे की वो ऐसा नही बोलेगी…

अचानक लालाजी ने नोट किया की जो कुर्ती रीतु ने पहनी हुई है, उसका गाला काफी गहरा है …
और उसकी वजह से उसकी गोलाइयाँ सॉफ दिख रही है…

लालाजी की तो हालत पतली हो गयी….

कल वो अपनी नंगी गांड दिखा कर गयी थी और आज अपने नंगे आम दिखाने पर उतारू है…..

रीतु ने डरा हुआ सा फेस बना रखा था…
वो धीरे से बोली : “लालाजी ..वो…वो ..आपसे कुछ ख़ास बात करनी थी…”

लालाजी ने आस पास देखा, दूर –2 तक कोई नही दिखाई दे रहा था…
लालाजी अपनी जगह से उठ कर बाहर निकले और अंदर पड़ी चारपाई पर जाकर बैठ गये…
उन्होने दोनो को भी वही बुला लिया..
दरवाजे पर परदा कर दिया ताकि बाहर से कोई उन्हे देख ना सके..

लालाजी की प्यासी नज़रों के सामने रीतु के कबूतर फड़फड़ा रहे थे…
उसकी आधे से ज्यादा गोलाइयाँ उनकी आँखों के सामने थी …

लालाजी ने फ्रिज में से 2 केम्पा निकाल कर उन्हे पकड़ा दी….
ठंडी-2 बोतल हाथ में आते ही दोनो ने उसे मुँह से लगा कर पीना शुरू कर दिया…
बॉटल से 2 बूँद टपक कर उसकी क्लिवेज पर जाकर गिरी और गहरी घाटियों में गायब हो गयी…

लालाजी ने बड़ी मुश्किल से अपने सूखे गले को तर किया…

मन तो कर रहा था की उसकी गोलाईयों पर जीभ फिरा कर वो 2 बूँद भी वेस्ट होने से बचा ले…
पर ऐसा करना मुमकिन नही था..

लालाजी : “हाँ …अब बोल….क्या बात है….किसी चीज़ की ज़रूरत है क्या तुझे…?”

केम्पा पीने के बाद रीतु बोली : “हाँ लालाजी … और आपके सिवा हमारी मदद कोई और नही कर सकता…”

लालाजी ने अपने कान उसकी तरफ लगा दिए और बोले : “हाँ हाँ बोल, क्या मदद चाहिए तुझे…”

रीतु : “लालाजी …वो …वो, हमें….. कुछ पैसो की ज़रूरत थी…”

लालाजी ने उन दोनो को ऐसे देखा जैसे विश्वास ही ना कर पा रहे हो…
भला उन्हे पैसो की क्या ज़रूरत आन पड़ी…

पर वो कुछ नही बोले…..
उनके दिमाग़ में तो कुछ और ही चलना शुरू हो गया था..

रीतु : “हमे दरअसल….12 हज़ार रूपए की सख़्त ज़रुरत है”

लालाजी : “देख रीतु…मुझे वैसे पूछना तो नही चाहिए…पर…इतने पैसे तुझे किस काम के लिए चाहिए…और ये पैसे तू वापिस कैसे करेगी…”

रीतु जानती थी की लालाजी ये सब ज़रूर पूछेंगे…
इसलिए वो पहले से ही जवाब तैयार करके लाई थी…

वो बोली : “वो मैं अभी आपको नही बता सकती…पर मेरा विश्वास करिए…मैं आपके सारे पैसे जल्द ही लौटा दूँगी…”

लालाजी तो अंदर से बहुत खुश हो रहे थे…
उनके हिसाब से तो ये उनके पास अपने आप फँसने चली आई थी…
12 हज़ार उनके लिए बहुत छोटी रकम थी…
और लालाजी अच्छे से जानते थे की उनके चुंगल में एक बार जब कोई फँस जाता है तो पूरी उम्र ब्याज देता रहता है..
असल वही खड़ा रहता है…
और इन दोनो हिरनियों को काबू में करने के लिए इससे अच्छा उपाय कुछ और हो ही नही सकता था..

लालाजी ये तो समझ गये थे की जैसा मुँह बनाकर वो उनके सामने बैठी है, पैसो की ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही है…
इसलिए उन्होने एक बार फिर से पूछा : “पहले तू मुझे बता दे की पैसे किसलिए चाहिए तो मुझे देने में कोई परेशानी नही है..”

रीतु ने तो सोचा था की लाला उनकी बात को जल्द ही मान जाएगा, पर वो भी बनिया आदमी था, इतनी आसानी से पैसे निकालने वाला नही था..

रीतु ने कोई बहाना भी नही बनाया था, इसलिए उसके दिमाग़ ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया…
उसने सोनी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर भी हवाइयां उड़ रही थी, यानी उसका दिमाग़ भी नही चल रहा था..

रीतु ने जल्द ही एक बहाना तैयार कर लिया, और बोली : “देखिए लालाजी , आपको मैं बता तो रही हूँ , पर आपसे निवेदन है की आप किसी से भी इस बारे में कुछ नही बोलना..ख़ासकर हमारे घर वालो से…”

रीतु का इतना कहना था की ठरकी लाला ने आगे बढ़कर उसके हाथ पर अपने हाथ रख दिया और उसके नर्म हाथों को अपने खुरदुरे हाथों से मसलता हुआ बोला : “अर्रे, नही रे…तू मुझपर पूरा बिस्वास कर सकत है….बतला अब…”

पास आने की वजह से लाला उसकी मुम्मो की घाटी को थोड़ी और गहराई से नाप पा रहा था..

रीतु की मुनिया तो एकदम से पनिया गयी….
एक तो लाला के सख़्त हाथ और उपर से उनकी गंदी नज़रे…
ऐसा लग रहा था जैसे उनकी आँखो से कोई शक्ति निकल कर उसके सख़्त मुम्मे मसल रही है…

रीतु : “वो क्या है ना…इस साल हमारी 12वी क्लास ख़तम हो जवेगी…उसके बाद हमें कॉलेज करना है, और हमारे दोनो के घर वाले ये नही चाहते, वो बोल रहे है की इतना खर्चा करना उनके बस की बात नही है…इसलिए हमने सोचा की अभी के लिए आपसे पैसे लेकर अपने-2 फॉर्म भर लेंगे..और साथ में अपने अडोस पड़ोस के बच्चो को टूशन पढ़ा कर पैसे बनाते रहेंगे..ऐसा करने से घर वालो पर भी बोझ नही पड़ेगा और आपके पैसे भी धीरे-2 उतर जाएँगे..”

लालाजी मुस्कुराए और बोले : “वह , इरादा तो बहुत अच्छा है तुम दोनो का…और सच कहूं तो ऐसे काम के लिए मैं पैसे देने से कभी मना नही करता…पर कारोबारी आदमी हूँ , इसलिए सूद पर ही दूँगा…और हर महीने तुम दोनो को 600-600 रुपय मुझे सूद के देने होंगे..”

रीतु ने हिसाब लगाया तो वो काफ़ी ऊँची ब्याज दर थी…
पर उनके दिमाग़ में जो प्लान था उसके सामने ये 10% का ब्याज उनके आड़े आने वाला नही था…
इसलिए दोनो ने तुरंत हां कर दी…

लालाजी ने एक पेपर पर उन दोनो का राज़ीनामा लिया
उनके दस्तख़त करवाकर लाला ने उन दोनो के हाथ में 6-6 हज़ार रूपर रख दिए…

पैसे देखकर दोनो के चेहरे चमक उठे…
और लालाजी को धन्यवाद बोलकर वो दोनो उठ खड़ी हुई…
और जैसे ही वो दोनो जाने लगी तो लाला ने कहा : “अर्रे, इतनी जल्दी भी क्या है…थोड़ी देर रुक जा…अपने क्रीम रोल तो लेते जाओ दोनो…”

इतना कहकर लाला अपनी खीँसे निपोरता हुआ बाहर निकल आया और मर्तबान से 2 लंबे से क्रीमरोल्ल निकाल लिए…
अभी कुछ देर पहले ही फ्रेश बनकर आए थे इसलिए उनकी क्रीम भी ताज़ा थी…
लाला के दिमाग़ में कुछ चालाकी आई और उसने एक रोल में से उपर की क्रीम निकाल कर दूसरे पर लगा दी…
और अंदर आकर वो ज़्यादा क्रीम वाला रोल उसने रीतु की तरफ लहरा दिया..
और जैसा लाला चाहता था, वैसा ही हुआ
उपर रखी क्रीम उछलकर नीचे गिरी और सीधा रीतु के सीने पर आकर चिपक गयी…

लाला का हाथ तुरंत हरकत में आ गया और उसने वो क्रीम उसके सीने से पोंछ डाली..

ये सब इतनी जल्दी हुआ की रीतु को भी समझने का मौका नही मिला की ये हुआ क्या है…
सोनी तो अपने रोल को पकड़ने के साथ ही उसे खाने में व्यस्त हो गयी…
पर रीतु का पूरा शरीर काँप कर रह गया..

लाला ने उसकी छाती पर पड़ी क्रीम को जब अपनी 4 उंगलियो से समेटा तो उसके गुदाज मुम्मो को बुरी तरह से रगड़ता चला गया…

ऐसा लग रहा था जैसे लाला ने उसके मुम्मो के साथ क्रीम वाली होली खेल ली है..

उसका उपरी छाती वाला हिस्सा चिकना हो गया…
लाला ने अपनी बेशर्मी दिखाते हुए वो सॉफ की हुई क्रीम अपने मुँह में लेकर चाट ली..

रीतु तो सुलग कर रह गयी…
आज पहली बार उसके मुम्मो को किसी ने छुआ था…
और वो भी लाला ने..

रीतु जानती थी की वो अगर चाहे तो गाँव के जवान और हॅंडसम लड़को को पटा कर ये सब मज़े ले सकती है
पर उस लाला में ना जाने क्या सम्मोहन था की वो उसके हाथो ऐसा काम करवाने चली आई थी…
और आज पहली बार उसका कमोत्तेजना से भरा स्पर्श पाकर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी थी…

लाला की भी हालत खराब हो गयी थी…
उन्हे पैसे देकर तो अब लाला में भी हिम्मत सी आ गयी थी, इसलिए उसने ऐसा दुस्साहसी कदम उठाया था…
और जब ऐसा करने के बाद भी रीतु ने कुछ नही कहा और अपना क्रीमरोल लेकर चुपचाप खाने लगी तो लाला समझ गया की चिड़िया ने दाना चुग लिया है…
यानी आगे भी वो उसके साथ ऐसी छेड़खानी कर सकता है, वो कुछ नही कहेगी..

उसके बाद लाला को धन्यवाद बोलकर दोनो बाहर निकल आई…

घर आकर दोनो बहुत खुश थी, उनकी प्लानिंग का पहला चरण पूरा हो चुका था.

घर आने के बाद दोनो ने अपना दिमाग़ लगाया की अब इन पैसों को कैसे अपने माँ बाप के थ्रू लालाजी तक पहुँचाया जाए..

और आख़िरकार पूरी रात सोचने के बाद रीतु के दिमाग़ में एक आइडिया आ ही गया.

अगले दिन जब रीतु और सोनी स्कूल में मिले तो उसने सोनी को वो आइडिया बताया और उसने भी अपनी सहमति जता दी.

स्कूल से वापिस आकर रीतु ने खुश होते हुए अपनी माँ को बताया की उसे स्कूल की तरफ से 10 हज़ार रूपए की स्कॉलरशिप मिली है…
पढ़ने में तो वो होशियार थी ही, इसलिए उसकी माँ को कोई शक भी नही हुआ…
कुछ ही देर में सोनी भी आ गयी और खुश होकर उसने भी वही बात दोहराई ….
रीतु की माँ की आँखो में आँसू आ गये…
10 हज़ार उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी…
उसकी माँ के दिमाग़ में सिर्फ़ वही ख्याल आया की उन पैसो से वो लाला का क़र्ज़ उतार सकते है..

रात को जब रीतु के पापा घर आए तो इस खबर को सुनकर वो भी काफ़ी खुश हुए..
रीतु ने बताया की अगले दिन कलेक्टर साहब खुद आकर वो इनाम उसे स्कूल में देंगे..

उसके माँ -बाप ग़रीब होने के साथ-2 अनपढ़ भी थे, इसलिए उन्हे इन बातो का कोई ज्ञान ही नही था … और वो रीतु के स्कूल जाने से भी कतराते थे… इसलिए रीतु के झूट के पकड़े जाने का सवाल ही नही उठता था..

अगले दिन स्कूल से आकर रीतु ने 10 हज़ार रुपय अपनी माँ के हाथ में रख दिए..
जिसे उसके पिताजी ने लालाजी को वापिस कर दिया…
पैसे वापिस करने से पहले रीतु ने उन्हे समझा दिया की वो ये किसी से भी ना कहे की ये पैसे रीतु के स्कूल से मिले है, वरना सब मज़ाक उड़ाएंगे की बेटी को मिले पैसो से अपना क़र्ज़ उतार रहे है…
इसलिए पैसे वापिस करते हुए रीतु के पिताजी ने लाला को यही कहा की अपने ससुराल वालो से ये पैसे उधार लिए है,ताकि वो अपना कर्ज़ा उतार सके..

और इस तरह से लालजी के पैसे वापिस उन्ही के पास पहुँच गये..
और बाकी के बचे 2 हज़ार रुपय उन दोनो ने बाँट लिए…

सब कुछ वैसे ही हो रहा था जैसा उन्होने सोचा था.

अगले दिन जब रीतु लालाजी की दुकान पर गयी तो लालाजी ने पूरी रात सोचकर उसके लिए कुछ अलग ही प्लान बना रखा था.

रीतु को देखकर लालाजी ने कहा : “अरी रीतु..अच्छा हुआ तू आ गयी…तुझसे बहुत ज़रूरी काम था मुझे…”

रीतु : “हाँ लालाजी , बोलिए…क्या काम है..”

अंदर से तो वो भी जानती थी की लालाजी के दिमाग़ मे ज़रूर कुछ गंदा चल रहा है…
वैसे चल तो उसके दिमाग़ में भी रहा था..

लाला : “देख ना..कल रात से तबीयत ठीक नही है…पूरी पीठ दुख रही है…वैध जी से दवाई भी ली..उन्होने ये तेल दिया है…बोले पीठ पर लगा लेना, आराम मिलेगा…अब अपनी पीठ तक मेरा हाथ तो जाएगा नही….इसलिए तुझे ही मेरी मदद करनी पड़ेगी…”

लालाजी तो ऐसे हक़ जता कर बोल रहे थे जैसे पूरे गाँव में कोई और है ही नही जो उनकी मदद कर सके..
और उनके कहने का तरीका ठीक वैसा ही था जैसे रीतु ने उनसे पैसो की मदद माँगी थी…
इसलिए वो भी समझ गयी की उसे भी लालाजी की मदद करनी ही पड़ेगी…

रीतु ने सिर हिला कर हामी भर दी..

लालजी ने तुरंत शटर आधा गिरा दिया और रीतु को लेकर दुकान के पिछले हिस्से में बने अपने घर में आ गए…

रीतु का दिल धाड़ –2 कर रहा था…
ये पहला मौका था जब वो सोनी के बिना लालाजी के पास आई थी…
और धूर्त लाला ने मौका देखते ही उसे अपने झाँसे में ले लिया..

फिर रीतु ने सोचा की अच्छा ही हुआ जो सोनी नही आई वरना लालाजी ये बात बोल ही ना पाते..

अंदर जाते ही लालजी ने अपना कुर्ता उतार दिया..
उनका गठीला बदन देखकर रीतु के रोँये खड़े हो गये…
जाँघो के बीच रसीलापन आ गया और आँखों में गुलाबीपन..

लालाजी अपने बिस्तर पर उल्टे होकर लेट गये और रीतु को एक छोटी सी शीशी देकर पीठ पर मालिश करने को कहा…

रीतु ने तेल अपने हाथ में लेकर जब लालाजी के बदन पर लगाया तो उनके मुँह से एक ठंडी आह निकल गयी…

”आआआआआआआआअहह …… वाााहह रीतु….. तेरे हाथ कितने मुलायम है…. मज़ा आ गया…. ऐसा लग रहा है जैसे रयी छुआ रही है मेरे जिस्म से….आआआअहह शाबाश….. थोड़ा और रगड़ के कर ….आहह”

लालाजी उल्टे लेटे थे और इसी वजह से उन्हे प्राब्लम भी हो रही थी…
उनका खूँटे जैसा लंड खड़ा हो चुका था…
लालाजी ने अपना हाथ नीचे लेजाकर किसी तरह से उसे एडजस्ट करके उपर की तरफ कर लिया…
उनके लंड का सुपाड़ा उनकी नाभि को टच कर रहा था…
पर अभी भी उन्हे खड़े लंड की वजह से उल्टा लेटने में परेशानी हो रही थी…

रीतु ये सब नोट कर रही थी…
और उसे लालाजी की हालत पर हँसी भी आ रही थी.

उसने उन्हे सताने का एक तरीका निकाला..

वो बोली : “लालाजी ..ऐसे हाथ सही से नही पड़ रहा…क्या मैं आपके उपर बैठ जाऊं ..”

लालाजी की तो आँखे फैल गयी ये सुनकर…
नेकी और पूछ –2…
लालाजी ने तुरंत लंबी वाली हाँ कर दी…

बस फिर क्या था, रीतु किसी बंदरिया की तरह उछल कर उनके कूल्हों पर बैठ गयी…

लालाजी तो जैसे जीते-जागते स्वर्ग में पहुँच गये…
ऐसा गद्देदार एहसास तो उन्हे अपने जीवन में आजतक नही मिला था…
ये रीतु के वही कूल्हे थे जिन्हे इधर-उधर मटकते देखकर वो अपनी आँखे सेका करते थे…
आज उसी डबल रोटी जैसी गांड से वो उनके चूतड़ों पर घिसाई कर रही थी…

रीतु ने अपनी टांगे मोड़ कर साइड में लगा दी और दोनो हाथो से उनकी पीठ को उपर से नीचे तक उस तेल से रगड़ने लगी..

लालाजी को एक तरफ मज़ा तो बहुत आ रहा था पर उनकी वो तकलीफ़ पहले से ज़्यादा बढ़ चुकी थी…
उनका लंड नीचे दबकर पहले ही फँसा हुआ सा पड़ा था, उपर से रीतु का भार आ जाने की वजह से उसका कचुंबर सा निकालने को हो गया था…जैसे कोई मोटा अजगर किसी चट्टान के नीचे दब गया हो

रीतु भी अपना पूरा भार अपने कुल्हो पर डालकर लालाजी के चूतड़ों की चटनी बनाने पर उतारू थी…
वो एक लय बनाकर लालाजी के बदन की मालिश कर रही थी…
जिस वजह से लालाजी का शरीर उपर से नीचे तक हिचकोले खाने लगा…
रीतु भी लालाजी की शरीर नुमा नाव पर बैठकर आगे पीछे हो रही थी…

और इस आगे-पीछे का स्वाद लालाजी को भी मिल रहा था…
उनके लंड पर घिस्से लगने की वजह से वो उत्तेजित हो रहे थे…
ये एहसास ठीक वैसा ही था जैसे वो किसी की चूत मार रहे हो अपने नीचे दबाकर…

अपनी उत्तेजना के दौरान एक पल के लिए तो लालाजी के मन में आया की पलटकर रीतु को अपने नीचे गिरा दे और अपना ये बोराया हुआ सा लंड उसकी कुँवारी चूत में पेलकर उसका कांड कर दे…
पर उन्हे ऐसा करने में डर भी लग रहा था की कहीं उसने चीख मारकर सभी को इकट्ठा कर लिया तो उनकी खैर नही…
इसलिए उन्होंने अपने मन और लंड को समझाया की पहले वो रीतु के मन को टटोल लेंगे…
थोड़े टाइम बाद जब उन्हे लगेगा की वो उनसे चुदने के लिए तैयार है और वो इसका ज़िक्र किसी से नही करेगी, तभी उसे चोदने में मज़ा आएगा…

और वैसे भी, अभी के लिए भी जो एहसास उन्हे मिल रहा था वो किसी चुदाई से कम नही था…
उपर से रीतु के बदन का स्पर्श भी उन्हे उनकी उत्तेजना को पूरा भड़काने में कामगार सिद्ध हो रहा था…

इसलिए वो उसी तरह, अपने लंड को बेड पर रगड़कर , अपने ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे..

और अंत में आकर , ना चाहते हुए भी उनके मुँह से आनंदमयी सिसकारियाँ निकल ही गयी..

”आआआआआआहह रीतु…….मज़ा आ गया…….हायययययययययी…………..”

रीतु को तो इस बात की जानकारी भी नही थी की लालाजी झड़ चुके है….
वो तो उनके अकड़ रहे शरीर को देखकर एक पल के लिए डर भी गयी थी की कहीं बूड़े लालाजी को कुछ हो तो नही गया…
पर जब लालाजी ने कुछ बोला तो उसकी जान में जान आई..

लालाजी : “शाबाश रीतु…शाबाश….ऐसी मालिश तो मेरी आज तक किसी ने नही की है…..चल अब उतर जा तू…मुझे तो नींद सी आ रही है….मैं थोड़ा सो लेता हूँ …”

पर रीतु शायद उनके खड़े लंड को देखना चाहती थी…

रीतु : ”थोड़ा पलट भी जाइए लालाजी , आपकी छाती पर भी मालिश कर देती मैं …”

लालाजी का मन तो बहुत था की वो भी उससे अपनी छाती की मालिश करवाए पर उनकी हालत नही थी वो करवाने की…
इसलिए उन्होने कहा : “नही रीतु…आज नही…..फिर कभी कर दियो ….अभी तो नींद सी आ रही है…तू जा …और जाते हुए मर्तबान से क्रीम रोल निकाल ले…”

वो उन्होने इसलिए कहा क्योंकि उनके बिस्तर पर ढेर सारा वीर्य गिरा पड़ा था…
अपनी सेहत के लिए लालाजी बादाम और चने भिगो कर खाते थे, इसलिए उनका वीर्य भी मात्रा से अधिक निकलता था…और उस हालत में वो सीधा होकर वो झड़ा हुआ माल उसे नहीं दिखाना चाहते थे

रीतु नीचे उतरी और 2 क्रीम रोल निकाल कर बाहर आ गयी…

लालाजी अपने बिस्तर से उठे और बेड की हालत देखकर उन्हे भी हँसी आ गयी…
शबाना होती तो इस सारी मलाई को चाट जाती…

लालाजी खड़े होकर अपने मुरझाए हुए लंड को मसलते हुए बोले : ”ये मलाई तो अब एक दिन ये रीतु ही खाएगी…साली को बड़ा मज़ा आ रहा था ना मुझे सताने में …अगली बार इसका अच्छे से बदला लूँगा…फिर देखता हूँ इसकी हालत ..”

लालाजी के दिमाग़ में उसके लिए कुछ स्पेशल प्लान बनने शुरू हो चुके थे.

क्रीम रोल लेकर रीतु सीधा सोनी के घर पहुँच गयी
वो उसके हिस्से का रोल उसे देना चाहती थी और आज का किस्सा भी सुनाना चाहती थी..

दरवाजा सोनी की बहन मीनल ने खोला

वो उसके हाथो में क्रीम रोल देखकर बोली : “ओहो…लगता है लालाजी की दुकान से आ रही है…”

उसके बोलने के स्टाइल और मुस्कुराहट से सॉफ पता चल रहा था की वो सब जानती है..

रीतु को सोनी पर बहुत गुस्सा आया की उसने ये सब बाते अपनी बहन को क्यों बता दी.

मीनल दीदी ने हँसते हुए उसका हाथ पकड़ा और अंदर खींच लिया..

”अररी, घबरा मत, मैं किसी से नही कहने वाली ये सब…तुझे शायद पता नही है, सोनी मुझसे कुछ भी नही छिपाती और न ही मैं उससे….समझी….”

रीतु का चेहरा पीला पड़ गया…
यानी सोनी की बच्ची ने कल उनकी एक दूसरे की चूत चूसने वाली बात भी बता दी है क्या…

उसके चेहरे की परेशानी देखकर वो समझ गयी की वो क्या सोच रही है..

मीनल : “कल जो तुम दोनो ने मज़े लिए थे, वो भी पता है मुझे…ये तो नॉर्मल सी बात है…मैं भी अपनी सहेली बिजली के साथ ये सब किया करती थी…कल जब उसके घर गयी तो फिर से वही किया था हमने…कसम से, पुरानी यादे ताज़ा हो गयी…”

इतना कहकर मीनल ने बड़ी बेशर्मी से अपनी चूत को रीतु के सामने ही मसल दिया..

मीनल की ये बात सुनकर उसे थोड़ी राहत मिली वरना उसे डर था की कहीं वो उसे डराएगी धमकाएगी और माँ को बताने की धमकी देगी..
पर ये तो अपनी बहन सोनी की तरह ही निकली…

वो मुस्कुरा दी और मीनल के साथ अंदर आ गयी…
सोनी नहा रही थी , इसलिए वो उसे लेकर अपने कमरे में आ गयी…
सोनी की माँ और भाई खेतो में गये हुए थे..

मीनल ने अंदर आते ही रीतु से पूछा : “अच्छा सुन, कल सोनी बता रही थी की तूने लाला का लंड देखा…बता ना..कैसा था वो…कितना मोटा था….और लंबा कितना था…बता ना…”

मीनल ने जब लंड बोला तभी से रीतु का शरीर काँप सा उठा था…
उसने तो सोचा भी नही था की कोई लड़की इतनी बेशर्मी से मर्दो के प्राइवेट पार्ट के बारे में बात कर सकती है…

सोनी और उसकी बात अलग थी, मीनल दीदी के साथ वो इतनी घुली मिली नही थी, उसके बावजूद वो उससे ऐसे बेशर्मी भरे सवाल पूछ रही थी.

उसका चेहरा गुलाबी हो गया…
आँखे डबडबा सी गयी….
पर कुछ बोल नही पाई वो.

मीनल उसके करीब आई और अपनी छातिया उसके कंधे पर ज़ोर से दबाकर , उन्हे रगड़ते हुए बोली : “अररी बोल ना…सोनी को तो बड़े मज़े लेकर बताया होगा तूने…मुझे बताने में इतना क्यो शर्मा रही है….ऐसे शरमाएगी तो उसे अपनी चूत में कैसे लेगी….”

लाला के उस ख़ूँख़ार लॅंड को अपनी कोमल चूत के अंदर लेने के नाम से ही बेचारी काँप सी गयी…
उसने घबराकर मीनल को देखा और सकपकाई हुई सी आवाज़ में बोली : “नही दीदी…..वो…वो तो बहुत मोटा है….मेरी चूत में कैसे घुसेगा भला…”

मीनल ने जैसे उसकी नब्ज़ पकड़ ली थी…
वो बोली : “अर्रे…मोटा ही है ना…लंबा तो नही है ना….लंबा होता है तब मुस्किल होत है….”

रीतु चहककर बोली : “अर्रे नही दीदी…मोटा भी है और लंबा भी…..मैने देखा था….ससुरा इतना मोटा था….और इतना लंबा….”

उसने अपनी कलाई की मोटाई और लंबाई दिखा दी मीनल को….
जिसे देखकर और सुनकर उसके मुँह में पानी सा आ गया…

वो फुसफुसाई : “हाय …..कमीना लाला…तभी शादी से पहले मुझे भी चोदने वाली नज़रो से देखा करता था….अगर पता होता तो तभी लपक लेती उसके मोटे लंड को…”

रीतु : “दीदी…..आपने कुछ कहा क्या…”

मीनल : “अर्रे नही री…..बस….तूने जो तारीफ की है, उसके बाद तो मेरा भी मन सा कर रहा है उसे एक बार देखने का….”

रीतु की आँखे फैल सी गयी….
वो बोली : “दीदी…..आप ये कैसी बाते कर रही हो…आपकी तो शादी हो गयी है….और शादी के बाद तो औरत को सिर्फ़ अपने पति के साथ…”

मीनल ने बीच में ही बात काट दी : “अररी, चुप कर…साला ये कौन सा क़ानून है की पति बाहर मुँह मारे तो सब सही है…पत्नी कुछ करे तो ये क़ानून सामने आ जावत है….”

उसके चेहरे से गुस्सा टपक रहा था…
रीतु समझ गयी की उसके पति का ज़रूर किसी और औरत के साथ चक्कर है..

पर उसने इस बारे में ज्यादा पूछना सही नही समझा…

वैसे भी लाला के लंड के बारे में बात करने से उसकी चूत में जो रसीलापन आ रहा था, ऐसी इधर उधर की बाते करने से वो चला जाना था…

वो बोली : “एक बात बताओ मीनल दीदी…अगर आपको मौका मिले तो क्या आप लाला के साथ वो सब…”

बात पूरी होने से पहले ही मीनल तपाक से बोल पड़ी : “हाँ हाँ , बिल्कुल….पहले तो मुझे बिस्वास ही नही हो रहा था लाला के लंड के बारे में सुनकर…मेरे पति का तो इत्ता सा है…सोनी ने बताया होगा तुझे…पर तूने भी वही बात की है, यानी बात सच्ची है….अब तो सच में मेरा भी मन कर रहा है उसे अपनी चूत में पिलवाने का…”

रीतु : “तो ले लो ना जाकर ….लाला तो 24 घंटे अपना हाथ में पकड़ कर बैठा रहता है…वो तो एक मिनट में ही मान जाएगा…”

मीनल : “अर्रे रीतु, तू कितनी भोली है रे….तुझे आज एक पते की बात बताती हूँ मैं ….हम औरतो को उपर वाले ने सिर्फ़ सुंदर शरीर और ये रसीले अंग ही नही दिए है…एक दिमाग़ भी दिया है….और इसका इस्तेमाल जितनी जल्दी करना सीख लेगी, उतना ही तेरी लाइफ और जवानी के लिए अच्छा है…”

रीतु : “मैं समझी नही दीदी…”

मीनल : “मतलब ये है की…मर्द क्या चाहता है ये तो हम सभी जानती है…पर उसे चाहने भर से हमारी जवानी मिल जाए, इतने बेवकूफ़ तो हम भी नही है….मर्द को तरसाकर, उन्हे सताकर, उनका उल्लू बनाकर , बाद में जब उनका लंड लेने में जो मज़ा आता है, उसका कोई मुकाबला नही है…”

रीतु के कच्चे दिमाग़ में अभी तक कुछ घुस नही रहा था

”पर दीदी…ऐसा करने से तो वो समझेगा की हम सिर्फ़ मस्ती भर का काम कर रहे है…वो कहीं और मुँह मार लेगा तब तक…”

मीनल ने उसकी जाँघ पर हाथ रखा और उसे सहलाते हुए बोली : “यहीं तो तेरी जवानी काम आएगी मेरी बिल्लो….उन्हे सताना है…पागल बना है..पर भगाना नही है…समझी…”

तभी पीछे से आवाज़ आई : “किसको सताने की बाते हो रही है दीदी….”

ये सोनी थी जो नहा धोकर बाहर आ गयी थी…..

रीतु ने उसकी तरफ देखा तो हैरान ही रह गयी…
वो नंगी ही बाथरूम से निकलकर बाहर आ गयी थी.

सोनी ने बाहर आते ही शिकायत करी : “क्या दीदी…मैं तो टावल का इंतजार कर रही थी अंदर…आपने दिया ही नही…”

अपने चेहरे पर आए पानी को पोंछते हुए वो रीतु से बोली : “अर्रे रीतु, तू कब आई….और ये क्या है तेरे हाथ में ..क्रीम रोल….लगता है लाला की दुकान से आ रही है सीधा…”

इतना कहकर उसने वो क्रीम रोल लेकर खाना शुरू कर दिया….
उसे तो जैसे अपने नंगेपन से कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था..

हालाँकि रीतु के सामने वो कई बार नंगी हो चुकी थी और वो दोनो एक दूसरे को ऐसे देखने की आदी थी..
पर रीतु ये नही जानती थी की वो घर में भी , अपनी बहन के सामने ऐसे ही बेशर्मो की तरह नंगी खड़ी रह सकती है..

मीनल ये सब नोट कर रही थी…
वो मुस्कुराते हुए बोली : “अर्रे, ऐसे हैरान सी होकर तो ऐसे देख रही है जैसे पहली बार इसे नंगा देखा है तूने…कल ही तो तेरे घर पर वो प्रोग्राम हुआ था जिसमें तुम दोनो ने वो सब मज़े लिए थे…

ये सुनकर एक बार फिर से रीतु शरमा गयी….
उसके होंठ फड़फड़ा से रहे थे…

सोनी : “अररी मेरी जान रीतु, तू भी ना, हमारे बीच सब चलता है….मैं दीदी से कुछ नही छुपाती …इसलिए उन्हे सब पता है हमारे बारे में और लाला के बारे में …”

वो तब तक अपना क्रीम रोल खा चुकी थी और अपनी उंगलिया चाट रही थी..

रीतु भी अब नॉर्मल सी हो चुकी थी…
वो सब मिलकर अंदर जाकर बैठ गयी और फिर मीनल और सोनी के पूछने पर रीतु ने आज वाला किस्सा भी पूरे विस्तार से उन्हे सुना दिया…

वो सब सुनते-2 सोनी तो अपनी चूत उनके सामने ही रगड़ने लग गयी..

मीनल ने भी अपना टॉप एक झटके में उतार फेंका
नीचे की पायजामी भी उसने नीचे खिसका दी
पल भर में ही वो नंगी खड़ी थी.

वो अपने मुम्मे और उनपर लगे दाने दबाने लगी, और वो दाने दबाते हुए बुदबुदा भी रही थी : “साला हरामी लाला….भेंन का लौड़ा …हरामी उल्टा पड़े-2 ही झड़ गया था…इसलिए सीधा नही हुआ…..हाय …..काश मैं होती वहां पर….सारा माल चाट जाती उस लाला का…..अहह

रीतु और सोनी को मर्दो के बारे में इतना डीटेल से नही पता था की वो भी झड़ते है…
और झड़ने के बाद उनके लंड से ढेर सारा मीठा रस निकलता है…

सोनी ने ही उत्सुकततावश पूछ लिया : “दीदी….ये झड़ने के बाद क्या होता है….”

वो अपनी बहन की तरफ पलटी और उसके करीब आकर उसने उसका मुम्मा पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया…
वो चिहुंक उठी…

और फिर अपने दाँये हाथ की एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी….
और ज़ोर-2 से अंदर बाहर करने लगी…

बेचारी सोनी पहले से ही झड़ने के कगार पर थी
उपर से अपनी बहन के जादुई हाथो की करामात से वो बुरी तरह से छटपटाने लगी
और
एक मिनट में ही उसकी चूत से शुद्ध देसी घी निकल कर बाहर आ गया…

मीनल ने अपनी उंगलियो पर लगे उस माल को चाट लिया और धीरे से फुसफुसाई : “ये होता है झड़ना…और जब मर्द झड़ता है ना, तो उसके लंड से ढेर सारा रस निकलता है…वो होता है असली माल….जो चूत में जाए तो बच्चा बना दे और मुँह मे जाए तो स्वाद जगा दे….”

उसने बड़ी डीटेल से, डेमो देकर ये बात उन दोनो अल्हड़ लड़कियों को समझा दी…

रीतु की हालत भी खराब हो रही थी…
उसकी आँखे लाल हो चुकी थी ये सब देखकर और सुनकर…

वो तो यही सोचने मे लगी थी की उसकी वजह से लालाजी के लंड का रस निकल गया था
और वो भी उन्ही के बेड पर…
काश वो देख पाती वो रसीला रस.

पर अभी का सीन देखकर तो उसकी खुद की चूत में से रस निकलने लगा था…

उपर से अपनी सहेली सोनी का ऑर्गॅज़म देखकर और मीनल के सैक्सी हाव भाव देखकर, उसकी रही सही ताक़त भी जवाब दे गयी…

पर इससे पहले की वो या कोई और कुछ कर पाते
बाहर का दरवाजा खड़क गया…

और साथ ही सोनी की माँ और भाई की आवाज़ आई

”दरवाजा खोल सोनी…..इतनी देर क्यो लगा रही है….मीनल…..सोनी…दरवाजा खोलो….”

सोनी बेचारी नंगी ही भागती हुई वापिस बाथरूम के अंदर चली गयी….
रीतु ने अपना हुलिया ठीक किया और मीनल ने अपने कपडे पहने और बाहर जाकर दरवाजा खोल दिया.

आज उनके आ जाने से कुछ ”ख़ास” होने से बच गया था.

पर ये सब ज्यादा देर तक बचकर नहीं रहने वाला था, मीनल के इस खेल में आ जाने से रीतु और सोनी की टीम थोड़ी और जानदार हो गयी थी ,
पर उन्हें क्या पता था की लाला कितना हरामी है, एक तो साहूकार और ऊपर से ठरकी भी
उनकी टीम और चुतों का उसने वो हाल करना था की उन्हें भी जीवनभर याद रहने वाला था

”दरवाजा खोल सोनी…..इतनी देर क्यो लगा रही है….मीनल…..सोनी…दरवाजा खोलो….”

सोनी बेचारी नंगी ही भागती हुई वापिस बाथरूम के अंदर चली गयी….आज उनके आ जाने से कुछ ”ख़ास” होने से बच गया था.पर ये सब ज्यादा देर तक बचकर नहीं रहने वाला था, मीनल के इस खेल में आ जाने से रीतु और सोनी की टीम थोड़ी और जानदार हो गयी थी.
पर उन्हें क्या पता था की लाला कितना हरामी है, एक तो साहूकार और ऊपर से ठरकी भी, उनकी टीम और चुतों का उसने वो हाल करना था की उन्हें भी जीवनभर याद रहने वाला था

सोनी की माँ और भाई के आने के बाद रीतु ने भी वहां देर तक रुकना सही नही समझा…
वो बाहर निकल गयी, पर जाने से पहले मीनल ने उसका हाथ पकड़ा और उसके कान में फुसफुसा कर बोली : “मुझे पता है की अभी भी तेरे मन में बहुत कुछ चल रहा है, तू फ़िक्र मत कर, इसका इंतज़ाम मैं जल्द ही करूँगी…”

रीतु का तो चेहरा ही लाल हो गया ये सुनकर…
यानी अभी कुछ देर पहले जो डेमो मीनल दीदी ने उन्हे दिया था, वो अब खुद करके दिखाएगी…
लाला के साथ.
ये मीनल दीदी तो बड़ी चालू निकली
उनकी आड़ में वो लाला से मज़े लेने के मूड में थी.

पर जो भी था, अपनी चूत मरवाना तो रीतु और सोनी भी नही चाहते थे अभी…
ऐसे में लाला के लंड की करामात वो मीनल दीदी के साथ देखकर कम से कम कुछ मज़ा तो ले ही सकते है..
और शायद मीनल को ऐसा करते देखने के बाद उनमे भी चुदवाने की हिम्मत आ जाए..

यही सब सोचते-2 वो घर चली गयी…

अगली सुबह मीनल अच्छे से तैयार हुई और सीधा लाला की दुकान पर पहुँच गयी…
लाला ने जब दूर से उसे मटकते हुए अपनी दुकान की तरफ़ आते हुए देखा तो वो कसमसा कर अपने लंड (रामलाल) से बोला : “अरे …देख तो रामलाल…वो कौन आ रही है….तेरे दिल की रानी..साली जब से शादी करके गयी है , पहली बार दिखी है…शादी के बाद तो कमाल की लग रही है साली चुदक्कड़ …ज़रा देख तो उसके रसीले आमों को …पहले तो साली चुननी में छुपा कर रखती थी.. और अब साली सीना उभार कर दिखा रही है…

लाला के देखते-2 मीनल के मुम्मे पास आते चले गये और बड़े होते गये…
लाला का हाथ अपनी आदत्नुसार एक बार फिर से अपनी धोती में घुस गया.

लाला :”अरी आजा मीनल आजा…..आज तो बड़े दिनों के बाद दिखाई दी है…लगता है शादी के बाद तेरा मन अच्छे से लग गया है अपने ससुराल में …”

मीनल ने एक कातिल सी मुस्कान लाला को दी और बोली : “मन तो लग ही गया है, पर लाला तेरी याद खींच लाई मुझे , इसलिए मिलने चली आई…”

मीनल के इस बेबाक से जवाब को सुनकर लाला को करंट सा लगा…
आज से पहले उसने ऐसी फ्लर्ट भरी बातो को हमेशा से ही इग्नोर किया था…
शायद तब वो कुँवारी थी
और अपने माँ भाई की इज़्ज़त का उसे डर था..

लाला : “अच्छा किया ये तो तूने जो मिलने चली आई…बता क्या खातिरदारी करूँ तेरी…”

मीनल का मन तो हुआ की लाला से कहे की ये बकचोदी बंद करे और सीधा मुद्दे की बात पर आए…
अंदर चलकर चुदाई कर दे बस..

पर वो भी मज़े लेकर हर काम करना चाहती थी…
भले ही लंड लेने की उसे जल्दी थी पर इतनी भी नही की खुद ही चुदाई के लिए बोल दे…
उसे तो पहले लाला को तरसाना था
सताना था
और जब वो खुद उसके सामने लंड हाथ में लेकर गिड़गिडाएगा
तब वो अपनी चूत देगी उसे…

अभी तक तो यही प्लान था उसका…
बाकी उपर वाला जाने..

मीनल : “खातिरदारी तो आजकल आप सोनी और रीतु की बहुत कर रहे हो लाला…सुना है बच्चियों को बड़े क्रीम रोल खिलाए जा रहे है आजकल…”

क्रीमरोल बोलते हुए मीनल की नज़रें लाला के लंड की तरफ थी, जो काउंटर के पीछे छुपा हुआ था…
और लाला के हिल रहे हाथ देखकर मीनल को सॉफ पता चल रहा था की वो साला ठरकी ज़रूर अपने लंड को मसल रहा होगा..

लाला ने जब क्रीम रोल वाला ताना सुना तो वो खिसियाई हुई सी हँसी हंसता हुआ बोला : “अररी वो…वो तो बस ऐसे ही…. तुझे तो पता है की लाला की दिल कितना बड़ा है…बच्चो को क्रीम रोल देने से वो अगर खुश हो जातीं है तो मुझे भी खुशी होती है..”

मीनल ने आँखे तरेर कर कहा : “हमे तो ना खिलाया तुमने आज तक अपना क्रीम रोल…. हमारा बचपन और जवानी तो ऐसे ही निकल गयी…शादी होकर दूसरे शहर चली गयी..पर क्रीम रोल ना चखा मैने आज तक तेरा लाला…”

उसके द्विअर्थी संवाद को सुनकर लाला के चेहरे पर पसीना चमकने लगा…
साली कितनी चालाकी से वो लाला के लंड को लेने की बात कह रही थी…
पर लाला को अभी भी उसपर विश्वास नही हो रहा था, उसकी खुल्ली बातो को सुनकर कहीं वो ऐसा-वैसा काम कर दे और बाद में गाँव भर में बदनामी हो , ये बात लाला हरगिज़ नही चाहता था…
भले ही कम मिले पर आराम से मिले, यही सिद्धांत था लाला का..
जो उसके दोस्त रामलाल ने उसे सिखाया था..

उसकी बातो को परखने के लिए लाला ने झट्ट से मर्तबान से एक क्रीम रोल निकाल कर उसे थमा दिया..

मीनल ने मुँह बनाते हुए वो रोल पकड़ा और उसे बड़े ही बेमन से मुँह में लेकर चूस डाला…
ठीक वैसे ही जैसे कोई लंड को मुँह में लेकर चूसता है…

एक – दो चुप्पे मारने के बाद उसने उसे काटा तो अंदर भरी क्रीम उसके होंठो और मुँह पर लग गयी…
जिसे उसने अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर चाट लिया..

लाला ये सब बड़े ध्यान से देख रहा था…
उसका तो दिल तभी से धाड़-2 बजने लगा था जब उसने रोल को मुँह में लेकर लंड की तरह चूसा था…
ऐसे तो शबाना चूसती है उसके लंड को…

लाला : “अब बोल…कैसा लगा मेरा क्रीम रोल…”

मीनल ने मुँह बिचका कर कहा : “एकदम ढीला…नर्म सा..मुझे तो कड़क पसंद है…कड़क क्रीम रोल है तो वो चखा लाला…”

लाला का मन तो किया की उसकी घोड़ी बना कर, एक टाँग काउंटर पर रखे और घचाक से अपना लंड उसकी चूत में पेल कर उसे बेदर्दी से तब तक चोदे जब तक वो चिल्लाते हुए अपने मुँह से ये ना बोल दे की ‘बस कर लाला….मार ही डालेगा तू तो…ये कड़क क्रीम रोल तो मेरी जान निकाल रहा है‘

पर लाला जानता था की ऐसा करना अभी के लिए पॉसिबल नही है..

पर लाला अब इतनी बात तो समझ ही चुका था की वो लाला के लंड की ही बात कर रही है…

वो काउंटर से बाहर निकल आया..
और बाहर निकलते ही उसकी धोती में जो तंबू बना हुआ था वो मीनल को दिखाई दे गया…

अब चेहरे पर पसीना चमकने की बारी मीनल की थी…
लाला के लंड का उभार उसके शरीर से करीब एक फुट आगे तक निकला हुआ था…
जैसे उसके धोती के कपड़े को किसी खूँटे पर टाँग रखा हो.

धूर्त लाला के होंठो पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी, वो बोला : “अर्रे, देख तो , तेरे माथे पर तो पसीना है…रुक ज़रा, मैं तुझे केम्पा पिलाता हूँ …आजा अंदर…”

इतना कहकर लाला अंदर वाले कमरे की तरफ चल दिया….
और उसके पीछे –2 एक सम्मोहन में बँधी मीनल भी चल दी…

भले ही वो दुनिया भर की प्लानिंग करके आई थी
पर लाला के लंड के उभार ने ही उसकी चूत के पसीने निकाल दिए थे…
अब तो वो पूरी तरह से चुदने को तैयार थी…
बस लाला के कहने भर की देर थी और उसने अपना नाड़ा खोल देना था..

लाला ने उसके हाथ में कोल्ड ड्रिंक पकड़ाई तो उसका हाथ लाला से छू गया…
ऐसा लगा जैसे कोई कठोर चट्टान से घिस्सा लग गया हो उसका…
मीनल तो उसके रंग रूप और मर्दानेपन की कायल होती जा रही थी…

अचानक मीनल को महसूस हुआ की उसकी जाँघ पर कुछ रेंग रहा है…
उसने नीचे देखा तो उसका शरीर काँप सा गया..
वो लाला के लंड का सुपाड़ा था, जो उसकी धोती से निकल कर उसकी जाँघो को टच कर रहा था…

और ये ठीक वैसा ही था, जैसा की रीतु ने बताया था…
एक दम काला नाग, कलाई जितना मोटा और एकदम कड़क….

लाला ने अपने दाँत निपोर कर कहा : “हाँ तो तू क्या कह रही थी..लाला का क्रीम रोल कड़क नही है… वो तो दुनिया को दिखाने के लिए मर्तबान में रखा है..असली तो गोडाउन में रहता है…”

मीनल की नज़रें कभी लाला के चेहरे पर जाती और कभी उसके लंड पर…

बेचारी कुछ बोलने के काबिल ही नही रह गयी थी…
ऐसे कड़क रोल को तो मुँह में लेकर चूसने में ही उसका जबड़ा फट्ट जाना है…
और जब ये चूत में जाकर हाहाकार मचाएगा तो क्या हाल होगा
ये तो बताने की ज़रूरत ही नही है….

मीनल का पूरा शरीर और दिमाग़ सुन्न सा हो चुका था…
अगर वो चाहती तो एक ही पल में लाला के लंड को पकड़ कर अपनी चूत में घुसवा लेती..
पर दिमाग़ के एक कोने में कुछ और भी चल रहा था
वो रीतु को जो वादा करके आई थी, वो भी तो उसे ही पूरा करना था…
और वो पूरा करने के बाद वो रीतु और सोनी की लाइफ में एक स्टार बन जाएगी, इसका भी उसे विश्वास था…
इसलिए एन्ड टाइम पर उसने अपने आप पर कंट्रोल करते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और बाहर की तरफ चल दी..

लाला को तो लगा था की उसके लंड को देखकर वो चुदे बिना नही रह सकेगी…
पर यहाँ तो उल्टा ही हो गया था…
वो तो भाग रही थी…
कही उसे बुरा तो नही लग गया…
लाला को लग रहा था की उसका पासा उल्टा पड़ गया है…
ऐसे अपने लंड की नुमाइश करके उसने शायद कोई ग़लती कर दी है..

और यही सोचकर वो उसके पीछे भागा..

लाला : “अररी सुन तो…क्या हो गया एकदम से तुझे…कोल्ड ड्रिंक तो पी ले पूरी…”

मीनल : “अचानक कुछ ज़्यादा ही गर्मी लग रही है लाला…अब तो पहाड़ी के पास वाले झरने पर जाकर नहाउंगी , तभी ये गर्मी निकलेगी…”

इतना कहकर वो हिरनी की तरह कुलाँचे भरती हुई उसकी आँखो से ओझल हो गयी..

लाला अपना सिर पकड़ कर बैठ गया..

 

वो दोनो लगभग भागती हुई सी लाला जी की दुकान पर पहुँची..

रीतु : ”लाला जी, लालाजी , 2 कोल्ड ड्रिंक दे दो और 1 बिस्कुट का पैकेट , पैसे पापा शाम को देंगे…”

लाला जी ने नज़र भर कर दोनो को देखा
उनके सामने पैदा हुई ये फूलों की कलियाँ पूरी तरह से पक चुकी थी
उन दोनो ने छोटी-2 स्कर्ट के साथ – साथ कसी हुई टी शर्ट पहनी हुई थी..जिसके नीचे ब्रा भी नही थी..

उनके उठते-गिरते सीने को देखकर
और उनकी बिना ब्रा की छातियो के पीछे से झाँक रहे नुकीले गुलाबी निप्पल्स को देखकर
उन्होने अपने सूखे होंठो पर जीभ फेरी..

”अरे, जो लेना है ले लो रीतु, पैसे कौनसा भागे जा रहे है…जा , अंदर से निकाल ले कैम्पा ..”

उन्होने दुकान के पिछले हिस्से में बने एक दूसरे कमरे में रखे फ्रिज की तरफ इशारा किया..

दोनो मुस्कुराती हुई अंदर चल दी

इस बात से अंजान की उस बूढ़े लाला की भूखी नज़रें उनके थिरक रहे नितंबो को देखकर, उनकी तुलना एक दूसरे से कर रहीं है
पर उनमे भरी जवानी की चर्बी को वो सही से तोल भी नही पाए थे की उनके दिल की धड़कन रोक देने वाला दृश्य उनकी आँखो के सामने आ गया..

रीतु ने जब झुककर फ्रीज में से बॉटल निकाली तो उसकी नन्ही सी स्कर्ट उपर खींच गयी, और उसकी बिना चड्डी की गांड लाला जी के सामने प्रकट हो गयी…

कोई और होता तो वहीं का वहीं मर जाता
पर लाला जी ने बचपन से ही बादाम खाए थे
उनकी वजह से उनका स्ट्रॉंग दिल फ़ेल होने से बच गया..

पर साँस लेना भूल गये बेचारे …
फटी आँखो से उन नंगे कुल्हो को देखकर उनका हाथ अपनी घोती में घुस गया…
और अपने खड़े हो चुके लंड की कसावट को महसूस करके उनके शरीर का रोँया-2 खड़ा हो गया..लंड से निकल रहा प्रीकम उनके हाथ पर आ लगा

उन्होने झट्ट से सामने पड़े मर्तबान से 2 क्रीम रोल निकाले और उसे अपनी धोती में घुसा कर अपने लंड पर रगड़ लिया
उसपर लगी क्रीम लाला जी के लंड पर चिपक गयी और लाला जी के लंड का पानी क्रीम रोल पर..

जब दोनो बाहर आई तो लाला जी ने बिस्कुट के पैकेट के साथ वो क्रीम रोल भी उन्हे थमा दिए

और बोले : “ये लो , ये स्पेशल तुम दोनो के लिए है…मेरी तरफ से ”

दोनो उसे देखते ही खुश हो गयी, ये उनका फेवरेट जो था, उन्होने तुरंत वो अपने हाथ में लिया और उस रोल
को मुँह में ले लिया…

लाला जी का तो बुरा हाल हो गया

जिस अंदाज से दोनो ने उसे मुँह में लिया था
उन्हे ऐसा लग रहा था जैसे वो उनका लंड चूस रही है…

लालाजी के लंड का प्रीकम उन्होंने अपनी जीभ से समेट कर निगल लिया
उन्हे तो कुछ पता भी नही चला पर उन दोनो को अपने लंड का पानी चाटते देखकर लाला जी का मन आज कुछ करने को मचल उठा.. .

दोनो उन्हे थेंक्यु लालाजी बोलकर हिरनियों की तरह उछलती हुई बाहर निकल गयी..

लालाजी की नज़रें एक बार फिर से उनके कूल्हों पर चिपक कर रह गयी…
और हाथ अपने लंड को एक बार फिर से रगड़ने लगा..

वो फुसफुसाए ‘साली….रंडिया….बिना ब्रा और कच्छी के घूम रही है….इन्हे तो चावल की बोरी पर लिटाकर रगड़ देने को मन करता है…सालियों ने सुबह –2 लंड खड़ा करवा दिया…अब तो कुछ करना ही पड़ेगा…”

इतना कहकर उन्होने जल्दी से दूकान का शटर डाउन किया और दुकान के सामने वाली गली में घुस गये
वहां रहने वाली शबाना को वो काफ़ी सालो से चोदते आ रहे थे…
वो लालाजी से चुदाई करवाती और उसके बदले अपने घर का राशन उनकी दुकान से उठा लाती थी..

लालाजी की दुकान से निकलते ही रीतु और मीनू ज़ोर-2 से हँसने लगी…

रीतु : “देखा, मैं ना कहती थी की वो ठरकी लाला आज फिर से क्रीम रोल देगा…चल अब जल्दी से शर्त के 10 रूपए निकाल”

मीनू ने हंसते हुए 10 का नोट निकाल कर उसके हाथ पर रख दिया और बोली : “हाँ …हाँ ..ये ले अपने 10 रूपए …मुझे तो वैसे भी इसके बदले क्रीम रोल मिल गया है…”

और एक बार फिर से दोनो ठहाका लगाकर हँसने लगी..

मीनू : “वैसे तेरी डेयरिंग तो माननी पड़ेगी रीतु, आज तूने जो कहा, वो करके दिखा दिया, बिना कच्छी के तेरे नंगे चूतड़ देखकर उस लाला का बुरा हाल हो रहा था…तूने देखा ना, कैसे वो फटी आँखो से तेरे और मेरे सीने को घूर रहा था…जैसे खा ही जाएगा हमारे चुच्चो को…”

रीतु : “और तू भी तो कम नही है री..पहले तो कितने नाटक कर रही थी की बिना ब्रा के नही जाएगी, तेरे दाने काफ़ी बड़े है, दूर से दिखते है…पर बाद में तू सबसे ज़्यादा सीना निकाल कर वही दाने दिखा रही थी…साली एक नंबर की घस्ति बनेगी तू बड़ी होकर…”

इतना कहकर वो दोनो फिर से हँसने लगी…
लालाजी को तरसाकर उनसे चीज़े ऐंठने का ये सिलसिला काफ़ी दिनों से चल रहा था
और दिन ब दिन ये और भी रोचक और उत्तेजक होता जा रहा था..

दूसरी तरफ, लालाजी जब शबाना के घर पहुँचे तो वो अपनी बेटी को नाश्ता करवा रही थी…
लालाजी को इतनी सुबह आए देखकर वो भी हैरान रह गयी पर अंदर से काफ़ी खुश भी हुई…
आज लालजी बिना कहे ही आए थे, यानी उन्हे चुदाई की तलब बड़े ज़ोर से लगी थी..
उसके घर का राशन भी ख़त्म हो चुका था,
उन्हे खुश करके वो शाम को दुकान से समान भी ला सकती थी..

उसने लालाजी को बिठाया और अपनी बेटी को बाहर खेलने भेज दिया..

दरवाजा बंद करते ही लालाजी ने अपनी धोती उतार फेंकी..
अंदर वो कभी कुछ नही पहनते थे…

52 साल की उम्र के बावजूद उनका लंड किसी जवान आदमी के लंड समान अकड़ कर खड़ा था…

शबाना : “या अल्ला, आज इसे क्या हो गया है…लगता है लालाजी ने आज फिर से कच्ची जवानी देख ली है…”

वो लालाजी की रग-2 जानती थी..

लालाजी के पास कुछ कहने-सुनने का समय नही था
उन्होने शबाना की कमीज़ उतारी और उसकी सलवार भी नोच कर फेंक दी..
बाकी कपड़े भी पलक झपकते ही उतर गये…

अब वो उनके सामने नंगी थी…

पर उसे नंगा देखकर भी उनके लंड में वो तनाव नही आ रहा था जो रीतु की गांड की एक झलक देखकर आ गया था..

लालाजी उसके रसीले बदन को देखे जा रहे थे और शबाना ने अपनी चूत में उंगली घुसाकर अपना रस उन्हे दिखाया और बोली : “अब आ भी जाओ लालाजी , देखो ना, मेरी मुनिया आपको देखकर कितना पनिया रही है….जल्दी से अपना ये लौड़ा मेरे अंदर घुसा कर इसकी प्यास बुझा दो लाला….आओ ना…”

उस रसीली औरत ने अपनी रस में डूबी उंगली हिला कर जब लालाजी को अपनी तरफ बुलाया तो वो उसकी तरफ खींचते चले गये..
एक पल के लिए उनके जहन से रीतु और मीनू का चेहरा उतर गया..

वो अपना कड़क लंड मसलते हुए आगे लाए और शबाना की चूत पर रखकर उसपर झुकते चले गये…

लालाजी का वजन काफ़ी था
उनके भारी शरीर और मोटे लंड के नीचे दबकर उस बेचारी शबाना की चीख निकल गयी…

”आआआआआआआआआआआआअहह लालाजी ,……. मार डाला आपने तो…….. ऐसा लग रहा है जैसे कोई सांड चोद रहा है मुझे….. अहह……चूत फाड़ोगे क्या मेरी आज ….”

लालाजी भी चिल्लाए : “भेंन की लौड़ी …..तेरी चूत में ना जाने कितने लंड घुस चुके है, फिर भी तेरी चूत इतनी कसी हुई है…..साली…….कौनसा तेल लगती है इसपर…”

शबाना : “आआआआआअहह….आपकी ही दुकान का तेल है लालाजी ….आज सुबह ही ख़त्म हुआ है…शाम को फिर से लेने आउंगी ….”

उसने चुदाई करवाते-2 ही अपने काम की बात भी कर ली..

लालाजी भी जानते थे की वो कितनी हरामी टाइप की औरत है
पर चुदाई करवाते हुए वो जिस तरह खुल कर मस्ती करती थी
उसी बात के लिए लालाजी उसके कायल थे…

लालाजी ने अपने लंड के पिस्टन से उसकी चूत को किसी मशीन की तरह चोदना जारी रखा..

शबाना : “आआआआआहह लालाजी …आज तो कसम से आपके बूड़े शरीर में जैसे कोई ताक़त आ गयी है….किस कली को देख आए आज….अहह”

लालाजी बुदबुदाए : “वो है ना साली….दोनो रंडिया…अपने मोहल्ले की….रीतु और मीनू….साली बिना ब्रा पेंटी के घूमती है आजकल ……साली हरामजादियाँ …..आज तो कसम से उन्हे दुकान पर ही ठोकने का मन कर रहा था….”

शबाना हँसी और बोली : “उन दोनो ने तो पुर मोहल्ले की नींद उड़ा रखी है लालाजी …. उफफफफ्फ़….उन्हे देखकर मुझे अपनी जवानी के यही दिन याद आ गये…… अहह….. मैने तो इस उम्र में खेत में नंगी खड़ी होकर अपनी चूत मरवाई थी और वो भी 4 लौड़ो से…..और कसम से लालजी, आज भी वैसी ही फीलिंग आ रही है जैसे एक साथ 4 लंड चोद रहे है मुझे….”

लालाजी को वो अपनी जवानी के किस्से सुना रही थी और लालाजी एक बार फिर से रीतु और मीनू के ख़यालो में डूबकर उसकी चूत का बाजा बजाने लगे…

और जल्द ही, रीतु और मीनू के नाम का ढेर सारा रसीला प्रसाद उन्होने शबाना की चूत में उड़ेल दिया…

उसके बाद लालाजी ने अपने कपड़े पहने और बिना कुछ कहे बाहर निकल गये…

दुकान खोलकर वो फिर से अपने काम में लग गये पर उनका मन नही लग रहा था…
अब उन्हे किसी भी हालत में उन दोनो को अपनी बॉटल में उतारना था और उसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार थे.

लालाजी का साहूकारी का भी काम था और गाँव के लोग अक्सर उनसे ऊँचे रेट पर पैसे ले जाते थे…
वैसे तो लालाजी का रोब ही इतना था की बिना कहे ही हर कोई उनकी दुकान पर आकर सूद के पैसे हर महीने दे जाता था, पर फिर भी कई बार उन्हे अपना लट्ठ लेकर निकलना ही पड़ता था वसूली करने …

उनका रोबीला अंदाज ही काफ़ी होता था गाँव के लोगो के लिए, इसलिए जब वो उगाही करने जाते तो पैसे निकलवा कर ही वापिस आते…

लालाजी की पत्नी को मरे 5 साल से ज़्यादा हो चुके थे…
उनकी एक बेटी थी जो साथ के गाँव में ब्याही हुई थी…
शादी के बाद उसने भी एक फूल जैसी बच्ची को जन्म दिया था और वो भी अब 18 की हो चली थी और अक्सर अपने नाना से मिलने, अपनी माँ के साथ उनके घर आया करती थी..

पर जब से लालाजी की बीबी का देहांत हुआ था, उसके बाद से उनकी सैक्स लाइफ में बहुत बदलाव आए थे…
पहले तो उनकी सैक्स लाइफ नीरस थी…
2-4 महीने में कभी कभार उनकी बीबी राज़ी होती तो उसकी मार लेते थे…
पर बीबी के जाने के बाद उनके चंचल मन ने अंगडाइयाँ लेनी शुरू कर दी…
शबाना के साथ भी उनके संबंध उसी दौरान हुए थे…
वो अक्सर उनकी दुकान से समान उधार ले जाती और पैसे लाटाने के नाम पर अपनी ग़रीबी की दुहाई देती…

ऐसे ही एक दिन जब लालाजी उसके घर गये और पैसे का तक़ाज़ा किया तो उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और लाला जी के कदमो मे बैठ गयी…

बस एक वो दिन था और एक आज का दिन है, ऐसा शायद ही कोई हफ़्ता निकलता होगा जब लालाजी का लंड उसकी चूत में जाकर अपनी वसूली नहीं करता था .. बदले में वो अपने घर का राशन बिना किसी रोक टोक के उठा लाती..

पर एक ही औरत को चोदते –2 अब लालजी का मन ऊब सा चुका था…
उनके सामने जब गाँव की कसी हुई जवानियां, अपने मादक शरीर को लेकर निकलती तो उनके लंड का बुरा हाल हो जाता था… और ये बुरा हाल ख़ासकर रीतु की कच्ची अम्बियों को देखकर होता था…

उन दोनो की कामुक हरकतों ने लालाजी का जीना हराम कर रखा था..

खैर, आज जब लालजी ने अपना बही ख़ाता खोला तो उन्होने पाया की रामदीन ने जो पैसे उधार लिए थे, उसका सूद नही आया है अब तक…
रामदीन दरअसल रीतु का पिता था..
बस , फिर क्या था…
लालजी की आँखो में एक चमक सी आ गयी..

उन्होने झत्ट से अपना लट्ठ उठाया, दुकान का शटर नीचे गिराया और चल दिए रीतु के घर की तरफ..

वहां पहुँचकर उन्होने दरवाजा खटकाया पर काफ़ी देर तक कोई बाहर ही नही निकला…
एक पल के लिए तो लालजी को लगा की शायद अंदर कोई नही है…
पर तभी उन्हे एक मीठी सी आवाज़ सुनाई दी..

”कौन है….”

लालाजी के कान और लंड एकसाथ खड़े हो गये…
ये रीतु की आवाज़ थी.

वो अपने रोबीले अंदाज में बोले : “मैं हूँ …लाला…”

अंदर खड़ी रीतु का पूरा शरीर काँप सा गया लालाजी की आवाज़ सुनकर…
दरअसल वो उस वक़्त नहा रही थी…

और नहाते हुए वो सुबह वाली बात को याद करके अपनी मुनिया को मसल भी रही थी की कैसे उसने और मीनू ने मिलकर लालाजी की हालत खराब कर दी थी…
और अपनी चूत मसलते हुए वो ये भी सोच रही थी की उसकी नंगी गांड को देखकर लालाजी कैसे अपने खड़े लंड को रगड़ रहे होंगे…
पर अचानक दरवाजा कूटने की आवाज़ ने उसकी तंद्रा भंग कर दी थी..
काफ़ी देर तक दरवाजा पीटने की आवाज़ सुनकर वो नंगी ही भागती हुई बाहर निकल आई थी क्योंकि उसके अलावा घर पर इस वक़्त कोई नही था..
उसके पिताजी खेतो में थे और माँ उन्हे खाना देने गयी हुई थी..

रीतु के शरारती दिमाग़ में एक और शरारत ने जन्म ले लिया था अब तक..

रीतु बड़े सैक्सी अंदाज में बोली : “नमस्ते लालाजी …कहिए…कैसे आना हुआ…”

लालाजी ने इधर उधर देखा, आस पास देखने वाला कोई नही था…

वो बोले : “अर्रे, दरवाजा बंद करके भला कोई नमस्ते करता है…दरवाजा खोल एक मिनट…. बड़ी देर से खड़का रहा हूँ, तेरे पिताजी से जरुरी काम है ”

रीतु : “ओह्ह …लालाजी …माफ़ करना…पर..मैं नहा रही थी…दरवाजे की आवाज़ सुनकर ऐसे ही भागती आ गयी…नंगी खड़ी हूँ , इसलिए दरवाजा नही खोल रही…एक मिनट रूको..मैं कुछ पहन लेती हूँ …”

उफफफफ्फ़…..
एक तो घर में अकेली…
उपर से नहा धोकर नंगी खड़ी है….
हाय ….
इसकी इसी अदाओं पर तो लालाजी का लंड उसका दीवाना है…

उसने ये सब दरवाजे के इतने करीब आकर, अपनी रसीली आवाज़ में कही थी की दरवाजे के दूसरी तरफ खड़े लालाजी का लंड उनकी धोती में खड़ा होकर दरवाजे की कुण्डी से जा टकराया…

लालाजी दम साधे उसके दरवाजा खोने का इंतजार करने लगे..

एक मिनट में जब दरवाजा खुला तो रीतु को देखकर उनकी साँसे तेज हो गयी….
वो जल्दबाज़ी में एक टॉवल लपेट कर बाहर आ गयी थी…
उसने सिर्फ टॉवल पहना हुआ था और कुछ भी नही…
और उपर से उसके गीले शरीर से पानी बूंदे सरकती हुई उसके मुम्मों के बीच जा रही थी..

लालाजी का दिल धाड़-2 करने लगा..वो उनके सामने ऐसे खड़ी थी जैसे ये पहनावा उसके लिए आम सी बात है, पर अंदर से वो ही जानती थी की उसका क्या हाल हो रहा है

रीतु : “हांजी लालाजी ,आइए ना अंदर…बैठिये …”

लालाजी अंदर आ गये और बरामदे में पड़ी खाट पर जाकर बैठ गये…
उनकी नज़रें रीतु के बदन से ही चिपकी हुई थी…
आज वो सही तरह से उसके शरीर की बनावट को देख पा रहे थे…

रीतु की कमर में एक कटाव पैदा हो चुका था जो उसके रसीले कुल्हो की चौड़ाई दर्शाते हुए नीचे तक फैलता हुआ दिख रहा था…
ब्रा तो वो पहले भी नही पहनती थी इसलिए उसकी गोलाइयों का उन्हे अच्छे से अंदाज़ा था…
करीब 32 का साइज़ था उसके गुलगुलो का..
और उनपर लगे कंचे जितने मोटे लाल निप्पल….
उफफफ्फ़..
उनकी नोक को तो लालजी ने कई बार अपनी आँखो के धनुषबान से भेदा था..

रीतु : “लालाजी …पानी…..ओ लालाजी …..पानी लीजिए….”

लालाजी को उनके ख़यालो से, लंड के बाल पकड़ कर बाहर घसीट लाई थी रीतु, जो उनके सामने पानी का ग्लास लेकर खड़ी थी..

नीचे झुकने की वजह से उस कॉटन के टॉवल पर उसकी जवानी का पूरा बोझ आ पड़ा था…
ऐसा लग रहा था जैसे पानी के गुब्बारे, कपड़े में लपेट कर लटका दिए है किसी ने…
और उनपर लगे मोटे निप्पल उस कपड़े में छेद करके उसकी जवानी का रस बिखेरने तैयार थे…

पर इन सबसे अंजान बन रही रीतु, भोली सी सूरत बना कर लालाजी के पास ही बैठ गयी और बोली : “पिताजी तो शाम को ही मिलते है लालाजी , आपको तो पता ही है…और माँ उनके लिए खाना लेकर अभी थोड़ी देर पहले ही निकली है…घंटा भर तो लगेगा उन्हे भी लोटने में …”

लालाजी को जैसे वो ये बताना चाह रही थी की अगले एक घंटे तक वो अकेली ही है घर पर …

लालाजी ने उसके गोरे बदन को अपनी शराबी आँखो से चोदते हुए कहा : “अर्रे, मैं ठहरा व्यापारी आदमी, मुझे क्या पता की कब वो घर पर रहेगा और कब खेतो में …मुझे तो अपने ब्याज से मतबल है…आज ही देखा मैने, 20 दिन उपर हो चुके है और ससुरे ने ब्याज ही ना दिया…”

लालाजी अपनी आवाज़ में थोड़ा गुस्सा ले आए थे…
रीतु ने तो हमेशा से ही उनके मुँह से मिठास भरी बातें सुनी थी…
इसलिए वो भी थोड़ा घबरा सी गयी…

वो बोली : “लालाजी …इस बार बापू ने नयी मोटर लगवाई है खेतो में, शायद इसलिए पैसो की थोड़ी तंगी सी हो गयी है….”

वैसे तो उसका सफाई देने का कोई मतलब नही था पर लालाजी ताड़ गये की उसे अपनी फैमिली की कितनी चिंता है…

लालाजी : “देख रीतु, तेरा बापू मोटर लगवाए या मोटर गाड़ी लेकर आए, मेरे पैसे टाइम से ना मिले तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ …”

लालाजी का ये रूप देखकर अब रीतु को सच में चिंता होने लगी थी…
उसने सुन तो रखा था की लालाजी ऐसे लोगो से किस तरह का बर्ताव करते है पर ये नही सोचा था की उसके बापू के साथ भी ऐसा हो सकता है…

उसने लालाजी के पाँव पकड़ लिए : “नही लालजी…आप ऐसा ना बोलो…मेरा बापू जल्दी ही कुछ कर देगा…आप ऐसा ना बोलो…थोड़े दिन की मोहलत दोगे तो वो आपके सूद के पैसे दे देंगे..”

लालाजी ने उसकी बाहें पकड़ कर उपर उठा लिया….
उस नन्ही परी की आँखो में आँसू आ रहे थे..

लाला : “अर्रे…तू तो रोने लगी…अर्रे ना….ऐसा ना कर…..मैं इतना भी बुरा ना हू जितना तू सोचन लाग री है”

बात करते-2 लालाजी ने उसे अपने बदन से सटा सा लिया…
उसके जिस्म से निकल रही साबुन की भीनी –2 खुश्बू लालाजी को पागल बना रही थी…
पानी की बूंदे अभी तक उसके शरीर से चो रही थी…
लालाजी की धोती में खड़ा छोटा पहलवान एक बार फिर से हरकत में आया और उसने अपने सामने खड़ी रीतु को झटका मारकर अपने अस्तित्व का एहसास भी करवा दिया..

एक पल के लिए तो रीतु भी घबरा गयी की ये क्या था जो उसके पेट से आ टकराया…
उसने नज़रें नीचे की तो लालाजी की धोती में से झाँक रहे उनके मोटे लंड पर उसकी नज़र पड़ी, जो बड़ी चालाकी से अपना चेहरा बाहर निकाल कर रीतु के बदन को टच कर रहा था…

वो तो एकदम से डर गयी…

आज से पहले उसने लंड का सिर्फ़ नाम ही सुना था
कभी देखा नही था…
ये तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई काली घीस हो…उसकी कलाई कितना मोटा था और लगभग उतना ही लम्बा

उसने घबराकर लालाजी को धक्का दिया और दूर जाकर खड़ी हो गयी…
लालाजी ने भी अपने पालतू जानवर को वापिस उसके पिजरे में धकेल दिया और हंसते हुए चारपाई पर वापिस बैठ गये…

उन्हे तो पता भी नही चला की रीतु ने उनका जंगली चूहा देख लिया है..

लालाजी : “चल, तेरी बात मानकर मैं कुछ दिन और रुक जाता हूँ …इसी बात पर एक चाय तो पीला दे….”

रीतु बेचारी सहमी हुई सी अंदर गयी और चाय बनाने लगी…
उसके जहन में रह-रहकर लालाजी के लंड की शक्ल उभर रही थी…
उसने तो सोचा था की गोरा-चिट्टा , सुंदर सा लंड होता होगा…
जिसे सहलाने में , दबाने में , चूसने में मज़ा मिलता है
इसलिए लड़किया उसकी दीवानी होती है….
उसे क्या पता था की वो निगोडा ऐसा कालू निकलेगा..

जैसे-तैसे उसने चाय बनाई और लालाजी को देने पहुँच गयी..
लालाजी की नज़रें उसके अंग-2 को भेदने में लगी थी, ये बात तो उसे भी अच्छे से पता थी
पर उसे भी तो उन्हे अपना शरीर दिखाकर सताने में मज़ा आता था…

खैर, चाय पीकर लालाजी चले गये…
और उसने आवाज़ देकर अपनी सहेली सोनी को अपने घर बुला लिया..
और उसे लालाजी के घर आने के बाद से लेकर जाने तक का पूरा किस्सा विस्तार से सुनाया..

सोनी : “यार, तू दिन ब दिन बड़ी हरामी होती जा रही है…. पहले तो तू लालजी को सताती थी अपना बदन दिखाकर और आज तुझमे इतनी हिम्मत आ गयी की उनका हथियार भी देख लिया तूने…”

रीतु : “अररी, मैने जान बूझकर नही देखा री…वो तो बस….शायद…मुझे ऐसी हालत में देखकर उनका वो काबू में नही रहा…इसलिए बाहर निकल आया…”

उसने शर्माते हुए ये कहा

सोनी : “ओये, रहने दे तू …तुझे मैं अच्छे से जानती हूँ ….पिछले कुछ दिनों से तू कुछ ज़्यादा ही उड़ने लगी है….यही हाल रहा ना तो जल्द ही चुद भी जाएगी, देख लेना…”

रीतु : “मुझे चुदने की इतनी भी जल्दी नही है री….और ऐसे लंड से चुदने में तो बिल्कुल भी नही….एकदम काला नाग था लाला का लंड …सच में सोनी, देखकर ही घिन्न सी आ रही थी…डर भी लग रहा था…”

सोनी : “तो तूने क्या सोचा था, जैसी इंसान की शक्ल होती है, वैसा ही उनका लंड भी होता है….हा हा…. वो तो सबका ही काला होता है पागल… बस ये देखना है की वो कितना लंबा है और कितना मोटा…और चुदाई करने में कितनी देर तक अकड़ कर रहता है….”

रीतु : “तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तूने पी एच डी कर ली है इसमें …”

सोनी : “यार, तुझे तो पता है ना…आजकल मीनल दीदी आई हुई है घर पर….कल रात मैं उनसे इसी बारे में बाते कर रही थी…और हम दोनो आपस में बहुत खुली हुई है, तुझे भी पता है…इसलिए उन्होने ये सब बातें बड़े विस्तार से बताई मुझे…”

मीनल दरअसल सोनी की बड़ी बहन थी…
जिसकी शादी 2 साल पहले अजमेर में हुई थी….
3-4 महीने में 1 बार वो घर पर आ जाया करती थी..

रीतु : “हम्म ….. हो सकता है उनकी बात सही हो…पर मुझे नही लगता की मैं कभी ऐसे लंड से चुद पाऊँगी ..”

सोनी : “चुदने की बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे तू लालजी के लंड को अंदर लेने को पहले से ही तैयार थी…और अब उसका रंग देखकर मना कर रही है…”

रीतु : “तू चाहे जो भी समझ….पर मुझे नही लगता की मैं कभी चुदाई के बारे में पहले जैसा सोच पाऊँगी …”

बात तो सही थी….
पिछले कुछ दिनों से वो दोनो अक्सर चुदाई की ही बातें किया करती थी…
और लालाजी से पंगे लेने के भी नये-2 तरीके सोचा करती थी..
और ऐसा नही था की गाँव में और लड़के नही थे
वो लालाजी के साथ ही ऐसा इसलिए किया करती थी की ऐसा करने में बदनामी का डर कम था
क्योंकि लालाजी किसी से ज़्यादा बात नही किया करते थे…और उनसे लोग डरते भी थे.
दूसरे लड़को के साथ ऐसी हरकत करने की देर थी की पूरा गाँव उनके पीछे पड़ जाना था..
पर लालाजी के साथ अपने हिसाब से पंगे लेकर वो भी खुश रहती थी और लालजी को भी उनके हिस्से की खुशी मिल जाती थी.
साथ में फ्री का क्रीमरोल तो था ही.

सोनी ने उसे समझाते हुए कहा : “अच्छा तू मुझे एक बात बता….ये लोग अक्सर छुप कर…अंधेरे में .. और रात में ही सैक्स क्यों करते है…”

रीतु ने उसे गोल आँखे करके देखा और बोली : “पता नही…”

सोनी : “वो इसलिए की लंड के रंग और रूप से उन्हे कोई लेना देना नही होता….वो अंदर जाकर कैसा मज़ा देगा सिर्फ़ यही मायने रखता है…बाकी सबकी अपनी-2 सोच है…”

रीतु ने सोचा की बात तो सोनी सही कह रही है….
उसके माँ बाप भी तो सभी के सोने के बाद नंगे होकर चुदाई करते थे…
और वो भी बत्ती बुझा कर…
एक-दो बार उसने सोने का बहाना करके , अंधेरे कमरे में उनके नंगे शरीर की हरकत ही देखी थी…
पर उसे देखकर वो सिर्फ़ उनके मज़े को ही महसूस कर पाई थी, उन दोनो के अंगो को नही देख पाई थी..

रीतु : “हम्म्म ..शायद तू सही कह रही है…”

सोनी : “अच्छा , ज़रा डीटेल में बता ना…कैसा था लालाजी का लंड …”

रीतु की आँखो में गुलाबीपन उतर आया….
वो शरमाते हुए बोली : “यार….मैं तो इतना डर सी गयी थी की उसे ढंग से देख भी नही पाई….बस ये समझ ले की….इतना मोटा था आगे से….”

उसने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली को मिलाकर एक गोला बनाया और सोनी को दिखाया…

सोनी : “सस्स्स्स्स्स्स्सस्स…. हाय …… तू कितनी खुशकिस्मत है….. तूने अपनी लाइफ का पहला लंड देख भी लिया….मैं एक बार फिर तुझसे पीछे रह गयी…”

दोनो खिलखिलाकर हंस पड़ी…

और फिर कुछ सोचकर सोनी बोली : “यार, अगर तू बोल रही है की उनका आगे से इतना मोटा था तो सच में उनसे चुदाई करवाने में काफ़ी मज़ा आएगा…”

रीतु उसके चेहरे को देखकर सोचने लगी की उसकी बात का मतलब क्या है..

सोनी : “मैं तुझे बता रही थी ना मीनल दीदी के बारे में .. उन्होने ही मुझे बताया था… उनके पति यानी मेरे जीजाजी का लंड तो सिर्फ़ इतना मोटा है जितना मेरा अंगूठा…और इतना ही लंबा…बस….इसलिए वो ज़्यादा एंजाय भी नही कर पाती…”

रीतु खुली आँखो से ऐसे लंड को इमेजीन करने लगी जो अंगूठे जितना मोटा और लंबा हो….
और उसके बारे में सोचकर उसे कुछ ज़्यादा एक्साइटमेंट भी नही हुई…
सोचने में ही ऐसा लग रहा है तो अंदर जाकर भला कौन सा तीर मार लेना है ऐसे लंड ने…

इससे अच्छा तो मोटा लंड ही है….
चूत फांके चीरता हुआ जब वो अंदर जाएगा तो कितना मज़ा मिलेगा…
ये सोचकर ही उसकी चूत में एक कसक सी उठी और गीलेपन का एहसास रीतु को दे गयी…

”उम्म्म्मममममममम…… अब ऐसी बाते करेगी तो मुझे फिर से कुछ होने लगेगा…”

यही वो शब्द थे जिन्हे सुनने के लिए सोनी इतनी मेहनत कर रही थी…

वो उसके करीब आई और अपनी जीभ से उसके होंठो को चाटते हुए बोली : “तो कौन बोल रहा है साली की सब्र कर… दिखा दे अपनी रसीली चूत एक बार फिर….लालाजी का नाम लेकर…”

सोनी अपनी सहेली की रग-2 से वाकिफ़ थी….
और शायद अंदर से ये भी जानती थी की लालाजी से चुदने के सपने वो कई दिनों से देख रही है….
ऐसे मौके पर एक बार फिर से लालाजी का नाम लेकर उसने फिर से उसकी चूत का रस पीने का प्रोग्राम पक्का कर लिया…

सोनी को भी इस खेल में मज़ा आता था…
और आए भी क्यो नही, भले ही एक लड़की का दूसरी लड़की के साथ ऐसा रिश्ता ग़लत होता है पर जब तक उनकी चूत में किसी का लंड नही जा सकता तब तक अपनी पक्की सहेली की जीभ तो घुस्वा ही सकते है वो दोनो…
और जब से सोनी ने उसकी चूत का रस पिया था, तब से तो वो उसके नशीले रस की दीवानी सी हो चुकी थी…
हालाँकि उसने खुद अपनी चूत का रस भी उंगली डालकर चखा था..
पर उसमे वो नशा नही था जो रीतु की चूत से निकले रस का था….
जैसे पहली धार की कच्ची शराब हो ….
ठीक वैसा नशा था उसका…

और ये सब बाते करने के पीछे उसका मकसद एक बार फिर से उसकी चूत का रस पीने का था…

सोनी ने जैसे ही रीतु के होंठो को चाटा
उसके तो कुत्ते फैल हो गये…
वो भी उसके होंठो पर टूट पड़ी…
सोनी ने उसकी टॉवल को खींच कर कागज़ की तरह नीचे फेंक दिया…
अंदर से तो वो पूरी नंगी ही थी..

रीतु को उसके गुलाबी निप्पल वाले नन्हे अमरूद भी बहुत पसंद थे….
गोरे-2 कच्चे टिकोरों पर चमक रहे लाल कंचे देखकर उसका मन ललचा उठा उन्हे चूसने के लिए…

वो उन्हे काफ़ी देर तक चूसती रही

फिर सोनी ने उसे उसी खाट पर लिटा दिया जिसपर अभी कुछ देर पहले लालाजी बैठे थे…

सोनी ने भी अपने कपडे झटके से उतार फेंके, वो रीतु के मुकाबले थोड़ी सांवली थी, पर उसका बदन भी काफी कसा हुआ था , वैसे भी लड़कियां नंगी होकर हमेशा ख़ूबसूरत दिखती हैं

और उसकी टांगे अपने कंधे पर लगाकर वो उसकी शहद की दुकान से मिठास बटोरने लगी..

”आआआआहह खा जा इसे…….. निकाल ले सारा जूस अंदर का…..अहह…साली आजकल बहुत बहती है ये…..पी जा सारा रस….पी जा…”

सोनी को तो वो रस वैसे ही बहुत पसंद था….
वो अपनी जीभ की स्ट्रॉ लगाकर उसकी चूत का रस सडप –2 करके पीने लगी…

और अंत में जब रीतु की चूत ने असली घी का त्याग किया तो उसके झड़ते हुए शरीर को महसूस करके वो खटिया भी चरमरा उठी…

और जैसे ही वो शांत हुई की बाहर की कुण्डी खटक गयी…
रीतु की माँ वापिस आ गयी थी खेतो से…

रीतु नंगी ही भागती हुई बाथरूम में घुस गयी और सोनी को सब संभालने का कहकर दरवाजा खोलने को कहा..

सोनी ने जब दराजा खोला तो उसे अपने घर में देखकर उसने इधर – उधर देखा और बोली : “तू यहाँ क्या कर रही है इस बकत ….और ये रीतु कहाँ है…”

सोनी : “वो मैं उसके साथ खेल रही थी…अब वो नहाने गयी है….बोली जब तक माँ नही आती मैं यहीं रूकूं …”

रीतु की माँ :” इसकी जवानी में ना जाने कौनसे उबाल आ रहे है आजकल, दिन में दूसरी बार नहा रही है…और ये देखो, मेरा तौलिया कैसे ज़मीन पर फेंका हुआ है…”

कहते हुए उसने तौलिया उठा कर अंदर रख दिया ….
सोनी भी जानती थी की अब यहाँ से निकल जाने में ही भलाई है…
इसलिए उसकी माँ को ये कहकर की रीतु को उसी के घर भेज देना, वो वहां से आ गयी..

अब उसे और रीतु को कुछ ऐसा प्लान बनाना था ताकि ये रोज-2 के छोटे-मोटे मज़े से बढ़कर कुछ आगे निकल सके…

और इसके लिए लालाजी से अच्छा बंदोबस्त कोई और हो ही नही सकता था..

नहा धोकर रीतु बाहर आई और उसने लालाजी के घर पर आने की बात माँ को बतायी…
लालाजी का नाम सुनकर तो उसकी माँ भी घबरा गयी..
उसे भी लालाजी के बर्ताव के बारे में अच्छे से पता था और वो ये भी जानती थी की उनके हालात आजकल अच्छे नही चल रहे है इसलिए सूद चुकाने में देरी हो रही है…
अपनी माँ को उनकी सोच में छोड़कर वो सोनी के घर पहुँच गयी…

सोनी के पिता का देहांत कई सालों पहले हो चुका था…
इसलिए उनके खेतो का काम उसका बड़ा भाई और माँ मिलकर संभालते थे…
और दोनो शाम से पहले घर आने वाले नही थे
इसलिए उन दोनो को किसी भी बात की रोक टोक या डर नही था..
सोनी की बहन मीनल आजकल अपने ससुराल से आई हुई थी, वो भी अपने बचपन की सहेली बिजली के घर गयी हुई थी…

सोनी : “रीतु , एक तो ये तेरी माँ है ना, दिन ब दिन खड़ूस होती जा रही है… मुझे देखते ही ना जाने कैसी आग सी लग जाती है उन्हे…ऐसा ही रहा तो मैने तेरे घर आना बंद कर देना है…”

रीतु भी ये बात जानती थी की उसकी माँ को सोनी फूटी आँख नही सुहाती …
उनका मानना था की उसके साथ मिलकर वो पूरे गाँव में बिना संगल की गाँय की तरह घूमती रहती है…
उन्हे शायद 1-2 लोगो ने बोला भी था की दोनो के पर निकल आए है आजकल…
अपनी फूट रही जवानी को दोनो गाँव भर में घूमकर दिखाती फिरती है…
इसलिए उन्हे लगता था की सोनी के साथ रीतु ज़्यादा ना ही मिले तो ही सही है..

पर उन दोनो की दोस्ती इन बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ती चली जा रही थी..

रीतु : “छोड़ ना ये रोज की बातें….पहले ये बता की लालाजी को कैसे काबू में लाया जाए…”

सोनी : “अर्रे, वो लाला तो पहले से ही काबू में है… फ्री में क्रीमरोल कोई ऐसे ही नही दे देता… हा हा”

रीतु : “मुझे तो लगता है की वो अपना क्रीम रोल देने की फिराक में है….”

सोनी : “हाँ , वही…काला सा…जो तुझे पसंद नही है….”

रीतु तुनककर बोली : “हाँ , नही है…”

सोनी : “नही है तो पसंद करना पड़ेगा…नही तो लालाजी तेरे काबू में नही आएँगे…”

रीतु ने सोचने वाला चेहरा बना लिया…
जैसे उसकी बात पर गोर कर रही हो.

सोनी : “देख रीतु…बात सिर्फ़ मज़े की नही है…बात तेरे पिताजी के सूद की भी है…हो सकता है लालाजी के साथ मज़े लेने के बाद वो तेरे पिताजी का सूद भी माफ़ कर दे…”

रीतु (थोड़ा गुस्से में ) : “तू कहना क्या चाहती है…लालाजी के सूद के बदले मैं उन्हे अपनी चूत भेंट कर दूँ क्या..मुझे ऐसा-वैसा समझ रखा है क्या तूने..? ”

सोनी : “ओहो….बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे खुद बड़ी दूध की धुली है…और ये काम करना ही नही चाहती…याद है न, पिछले हफ्ते क्या बात हुई थी हमारी, और कल की 10 रूपए वाली शर्त के बाद तो तूने अपनी नंगी गांड भी दिखा दी उस लाला को…अब रह ही क्या गया है, जब 10 रुपय के बदले नंगी गांड दिखा सकती है तो 10 हज़ार के बदले चूत भी तो दे सकती है ना…, इसलिए ये बेकार की बाते मत कर, जो सच है वो यही है की तुझे लाला की ज़रूरत है और लाला को तेरी जवानी की…”

वैसे सोनी सच ही कह रही थी….
रोजाना आपस में सैक्स के बारे में तरह-2 की बातें करने के बाद उन्होने यही सोचा था की अपने हुस्न का जलवा दिखाकर वो लालाजी से समान ऐंठा करेंगी, और ऐसा करने में वो कामयाब भी हो गयी थी…

रीतु :”चल..मान ली तेरी बात…पर लालाजी ने अगर ये बात गाँव भर में फैला दी तो मेरी माँ तो मेरा गला काट देगी….और तेरा भाई भी तुझे जिंदा नही छोड़ेगा…”

सोनी : “बस…यही तो…यही प्लानिंग तो हमें करनी है…ताकि हमारा काम भी हो जाए और लाला भी अपनी ज़ुबान से कुछ ना बोले…”

दोनो आपस में ऐसे बातें कर रही थी जैसे कोई जंग जीतने निकलना हो ..

वैसे ये प्लानिंग किसी जंग से कम की लग भी नही रही थी…
इतने सालों तक संभाल कर रखी जवानी का पहला सौदा बिना सोचे समझे नही करना चाहती थी वो दोनो…

यहाँ एक बात जान लेनी आवश्यक है की चूत की खुजली के बारे में रीतुज़्यादा आगे थी…
उसी का दिमाग़ इस तरह की बातों में ज़्यादा दौड़ता था…
अपने माँ बाप का मूड भाँपकर वो रात भर सिर्फ़ उनकी चुदाई भरी आहें सुनने के लिए जागा करती थी….
अपनी चूत को रगड़ कर वो जब तक दिन में 2-3 बार झड़ नही जाती थी, उसे चैन ही नही आता था…
नहाते हुए भी वो अपने पूरे बदन, ख़ासकर मुम्मो को निचोड़कर रख देती थी…
गाँव के हर मर्द के बारे में सोचकर, उसके लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसकारियां मारते हुए अपनी चूत रगड़ना उसके लिए आम बात थी…
और इसलिए उसने अपनी इन बातों के जाल में सोनी को भी फँसा लिया था…
जब दिन भर उसकी पक्की सहेली सैक्स के बारे में बाते करती तो वो भला कैसे इस रोग से अछूती रह जाती…
जवानी के कीड़े ने उसे भी काट लिया और वो दोनो अक्सर सैक्स से जुड़ी गंदी बाते करके घंटो हँसती रहती…
खेल – २ में वो एक दूसरे के अंगो सहलाती और जल्द ही वो खेल सारी मर्यादाएं लांघकर सैक्स के खेल में बदल गया, जिसमें वो गन्दी वाली मूवीज की तरह लैस्बियन सैक्स भी करने लगी

और इसी दौरान उन्होने शर्त लगाकर, लालाजी को भी सताया और अपनी भड़क रही जवानी को शांत करने का उन्हे ये एक नया तरीका मिल गया..

रीतु बोली : “मेरे दिमाग़ में एक आइडिया है…और अगर वो आइडिया कामयाब हो गया तो पिताजी के पैसो की सिरदर्दी भी दूर हो जाएगी और हमारा काम भी बन जाएगा…और इसके लिए आज शाम को ही हम दोनो लाला की दुकान पर चलेंगे..बोल मंजूर है..”

सोनी जानती थी की उसके खुराफाती दिमाग़ में ज़रूर कुछ गंदा पक रहा है…
पर मज़े लेने की चाह तो उसमे भी बहुत थी और वो जानती थी की वो जो भी करेगी, उसमे मज़े तो दोनो को ही मिलेंगे…

इसलिए उसने तुरंत हां कर दी.

रीतु ने उसे पूरा प्लान समझाया और सारी बात सुनकर सोनी भी उसके दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सकी..

बस…
फिर क्या था….
दोनो शाम को अपनी प्लानिंग के अनुसार लालाजी की दुकान पर पहुँच गयी.

लालाजी ने जब दूर से उन दोनो हुस्न की परियों को अपनी दुकान पर आते देखा तो उनकी धोती में सुस्ता रहा काला अजगर अंगड़ाई लेता हुआ खड़ा हो गया…
जैसे कह रहा हो ‘आ गयी दोनो हरामजादियां , अब आएगा मज़ा‘

लालाजी : “आओ आओ…. क्या हाल है रीतु….सोनी, बोल क्या लेना है आज तुम्हे …”

बात तो वो रीतु से कर रहे थे पर उनका एक हाथ उनकी धोती में घुस कर अपने लंड को रगड़ रहा था…

रीतु ने सोनी की तरफ देखा, उसने एक डरा हुआ सा चेहरा बना रखा था….
जैसे कुछ कहना चाहती हो पर सकुचा रही हो..

लालाजी : “अररी, साँप सूंघ गया है क्या तुझे….बोल ना…क्या लेगी…”

लालाजी का तो मन कर रहा था की बस एक बार बोल दे ‘लालाजी , आपका लंड लूँगी…बोलो…दोगे क्या..‘

पर वो भी जानते थे की वो ऐसा नही बोलेगी…

अचानक लालाजी ने नोट किया की जो कुर्ती रीतु ने पहनी हुई है, उसका गाला काफी गहरा है …
और उसकी वजह से उसकी गोलाइयाँ सॉफ दिख रही है…

लालाजी की तो हालत पतली हो गयी….

कल वो अपनी नंगी गांड दिखा कर गयी थी और आज अपने नंगे आम दिखाने पर उतारू है…..

रीतु ने डरा हुआ सा फेस बना रखा था…
वो धीरे से बोली : “लालाजी ..वो…वो ..आपसे कुछ ख़ास बात करनी थी…”

लालाजी ने आस पास देखा, दूर –2 तक कोई नही दिखाई दे रहा था…
लालाजी अपनी जगह से उठ कर बाहर निकले और अंदर पड़ी चारपाई पर जाकर बैठ गये…
उन्होने दोनो को भी वही बुला लिया..
दरवाजे पर परदा कर दिया ताकि बाहर से कोई उन्हे देख ना सके..

लालाजी की प्यासी नज़रों के सामने रीतु के कबूतर फड़फड़ा रहे थे…
उसकी आधे से ज्यादा गोलाइयाँ उनकी आँखों के सामने थी …

लालाजी ने फ्रिज में से 2 केम्पा निकाल कर उन्हे पकड़ा दी….
ठंडी-2 बोतल हाथ में आते ही दोनो ने उसे मुँह से लगा कर पीना शुरू कर दिया…
बॉटल से 2 बूँद टपक कर उसकी क्लिवेज पर जाकर गिरी और गहरी घाटियों में गायब हो गयी…

लालाजी ने बड़ी मुश्किल से अपने सूखे गले को तर किया…

मन तो कर रहा था की उसकी गोलाईयों पर जीभ फिरा कर वो 2 बूँद भी वेस्ट होने से बचा ले…
पर ऐसा करना मुमकिन नही था..

लालाजी : “हाँ …अब बोल….क्या बात है….किसी चीज़ की ज़रूरत है क्या तुझे…?”

केम्पा पीने के बाद रीतु बोली : “हाँ लालाजी … और आपके सिवा हमारी मदद कोई और नही कर सकता…”

लालाजी ने अपने कान उसकी तरफ लगा दिए और बोले : “हाँ हाँ बोल, क्या मदद चाहिए तुझे…”

रीतु : “लालाजी …वो …वो, हमें….. कुछ पैसो की ज़रूरत थी…”

लालाजी ने उन दोनो को ऐसे देखा जैसे विश्वास ही ना कर पा रहे हो…
भला उन्हे पैसो की क्या ज़रूरत आन पड़ी…

पर वो कुछ नही बोले…..
उनके दिमाग़ में तो कुछ और ही चलना शुरू हो गया था..

रीतु : “हमे दरअसल….12 हज़ार रूपए की सख़्त ज़रुरत है”

लालाजी : “देख रीतु…मुझे वैसे पूछना तो नही चाहिए…पर…इतने पैसे तुझे किस काम के लिए चाहिए…और ये पैसे तू वापिस कैसे करेगी…”

रीतु जानती थी की लालाजी ये सब ज़रूर पूछेंगे…
इसलिए वो पहले से ही जवाब तैयार करके लाई थी…

वो बोली : “वो मैं अभी आपको नही बता सकती…पर मेरा विश्वास करिए…मैं आपके सारे पैसे जल्द ही लौटा दूँगी…”

लालाजी तो अंदर से बहुत खुश हो रहे थे…
उनके हिसाब से तो ये उनके पास अपने आप फँसने चली आई थी…
12 हज़ार उनके लिए बहुत छोटी रकम थी…
और लालाजी अच्छे से जानते थे की उनके चुंगल में एक बार जब कोई फँस जाता है तो पूरी उम्र ब्याज देता रहता है..
असल वही खड़ा रहता है…
और इन दोनो हिरनियों को काबू में करने के लिए इससे अच्छा उपाय कुछ और हो ही नही सकता था..

लालाजी ये तो समझ गये थे की जैसा मुँह बनाकर वो उनके सामने बैठी है, पैसो की ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही है…
इसलिए उन्होने एक बार फिर से पूछा : “पहले तू मुझे बता दे की पैसे किसलिए चाहिए तो मुझे देने में कोई परेशानी नही है..”

रीतु ने तो सोचा था की लाला उनकी बात को जल्द ही मान जाएगा, पर वो भी बनिया आदमी था, इतनी आसानी से पैसे निकालने वाला नही था..

रीतु ने कोई बहाना भी नही बनाया था, इसलिए उसके दिमाग़ ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया…
उसने सोनी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर भी हवाइयां उड़ रही थी, यानी उसका दिमाग़ भी नही चल रहा था..

रीतु ने जल्द ही एक बहाना तैयार कर लिया, और बोली : “देखिए लालाजी , आपको मैं बता तो रही हूँ , पर आपसे निवेदन है की आप किसी से भी इस बारे में कुछ नही बोलना..ख़ासकर हमारे घर वालो से…”

रीतु का इतना कहना था की ठरकी लाला ने आगे बढ़कर उसके हाथ पर अपने हाथ रख दिया और उसके नर्म हाथों को अपने खुरदुरे हाथों से मसलता हुआ बोला : “अर्रे, नही रे…तू मुझपर पूरा बिस्वास कर सकत है….बतला अब…”

पास आने की वजह से लाला उसकी मुम्मो की घाटी को थोड़ी और गहराई से नाप पा रहा था..

रीतु की मुनिया तो एकदम से पनिया गयी….
एक तो लाला के सख़्त हाथ और उपर से उनकी गंदी नज़रे…
ऐसा लग रहा था जैसे उनकी आँखो से कोई शक्ति निकल कर उसके सख़्त मुम्मे मसल रही है…

रीतु : “वो क्या है ना…इस साल हमारी 12वी क्लास ख़तम हो जवेगी…उसके बाद हमें कॉलेज करना है, और हमारे दोनो के घर वाले ये नही चाहते, वो बोल रहे है की इतना खर्चा करना उनके बस की बात नही है…इसलिए हमने सोचा की अभी के लिए आपसे पैसे लेकर अपने-2 फॉर्म भर लेंगे..और साथ में अपने अडोस पड़ोस के बच्चो को टूशन पढ़ा कर पैसे बनाते रहेंगे..ऐसा करने से घर वालो पर भी बोझ नही पड़ेगा और आपके पैसे भी धीरे-2 उतर जाएँगे..”

लालाजी मुस्कुराए और बोले : “वह , इरादा तो बहुत अच्छा है तुम दोनो का…और सच कहूं तो ऐसे काम के लिए मैं पैसे देने से कभी मना नही करता…पर कारोबारी आदमी हूँ , इसलिए सूद पर ही दूँगा…और हर महीने तुम दोनो को 600-600 रुपय मुझे सूद के देने होंगे..”

रीतु ने हिसाब लगाया तो वो काफ़ी ऊँची ब्याज दर थी…
पर उनके दिमाग़ में जो प्लान था उसके सामने ये 10% का ब्याज उनके आड़े आने वाला नही था…
इसलिए दोनो ने तुरंत हां कर दी…

लालाजी ने एक पेपर पर उन दोनो का राज़ीनामा लिया
उनके दस्तख़त करवाकर लाला ने उन दोनो के हाथ में 6-6 हज़ार रूपर रख दिए…

पैसे देखकर दोनो के चेहरे चमक उठे…
और लालाजी को धन्यवाद बोलकर वो दोनो उठ खड़ी हुई…
और जैसे ही वो दोनो जाने लगी तो लाला ने कहा : “अर्रे, इतनी जल्दी भी क्या है…थोड़ी देर रुक जा…अपने क्रीम रोल तो लेते जाओ दोनो…”

इतना कहकर लाला अपनी खीँसे निपोरता हुआ बाहर निकल आया और मर्तबान से 2 लंबे से क्रीमरोल्ल निकाल लिए…
अभी कुछ देर पहले ही फ्रेश बनकर आए थे इसलिए उनकी क्रीम भी ताज़ा थी…
लाला के दिमाग़ में कुछ चालाकी आई और उसने एक रोल में से उपर की क्रीम निकाल कर दूसरे पर लगा दी…
और अंदर आकर वो ज़्यादा क्रीम वाला रोल उसने रीतु की तरफ लहरा दिया..
और जैसा लाला चाहता था, वैसा ही हुआ
उपर रखी क्रीम उछलकर नीचे गिरी और सीधा रीतु के सीने पर आकर चिपक गयी…

लाला का हाथ तुरंत हरकत में आ गया और उसने वो क्रीम उसके सीने से पोंछ डाली..

ये सब इतनी जल्दी हुआ की रीतु को भी समझने का मौका नही मिला की ये हुआ क्या है…
सोनी तो अपने रोल को पकड़ने के साथ ही उसे खाने में व्यस्त हो गयी…
पर रीतु का पूरा शरीर काँप कर रह गया..

लाला ने उसकी छाती पर पड़ी क्रीम को जब अपनी 4 उंगलियो से समेटा तो उसके गुदाज मुम्मो को बुरी तरह से रगड़ता चला गया…

ऐसा लग रहा था जैसे लाला ने उसके मुम्मो के साथ क्रीम वाली होली खेल ली है..

उसका उपरी छाती वाला हिस्सा चिकना हो गया…
लाला ने अपनी बेशर्मी दिखाते हुए वो सॉफ की हुई क्रीम अपने मुँह में लेकर चाट ली..

रीतु तो सुलग कर रह गयी…
आज पहली बार उसके मुम्मो को किसी ने छुआ था…
और वो भी लाला ने..

रीतु जानती थी की वो अगर चाहे तो गाँव के जवान और हॅंडसम लड़को को पटा कर ये सब मज़े ले सकती है
पर उस लाला में ना जाने क्या सम्मोहन था की वो उसके हाथो ऐसा काम करवाने चली आई थी…
और आज पहली बार उसका कमोत्तेजना से भरा स्पर्श पाकर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी थी…

लाला की भी हालत खराब हो गयी थी…
उन्हे पैसे देकर तो अब लाला में भी हिम्मत सी आ गयी थी, इसलिए उसने ऐसा दुस्साहसी कदम उठाया था…
और जब ऐसा करने के बाद भी रीतु ने कुछ नही कहा और अपना क्रीमरोल लेकर चुपचाप खाने लगी तो लाला समझ गया की चिड़िया ने दाना चुग लिया है…
यानी आगे भी वो उसके साथ ऐसी छेड़खानी कर सकता है, वो कुछ नही कहेगी..

उसके बाद लाला को धन्यवाद बोलकर दोनो बाहर निकल आई…

घर आकर दोनो बहुत खुश थी, उनकी प्लानिंग का पहला चरण पूरा हो चुका था.

घर आने के बाद दोनो ने अपना दिमाग़ लगाया की अब इन पैसों को कैसे अपने माँ बाप के थ्रू लालाजी तक पहुँचाया जाए..

और आख़िरकार पूरी रात सोचने के बाद रीतु के दिमाग़ में एक आइडिया आ ही गया.

अगले दिन जब रीतु और सोनी स्कूल में मिले तो उसने सोनी को वो आइडिया बताया और उसने भी अपनी सहमति जता दी.

स्कूल से वापिस आकर रीतु ने खुश होते हुए अपनी माँ को बताया की उसे स्कूल की तरफ से 10 हज़ार रूपए की स्कॉलरशिप मिली है…
पढ़ने में तो वो होशियार थी ही, इसलिए उसकी माँ को कोई शक भी नही हुआ…
कुछ ही देर में सोनी भी आ गयी और खुश होकर उसने भी वही बात दोहराई ….
रीतु की माँ की आँखो में आँसू आ गये…
10 हज़ार उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी…
उसकी माँ के दिमाग़ में सिर्फ़ वही ख्याल आया की उन पैसो से वो लाला का क़र्ज़ उतार सकते है..

रात को जब रीतु के पापा घर आए तो इस खबर को सुनकर वो भी काफ़ी खुश हुए..
रीतु ने बताया की अगले दिन कलेक्टर साहब खुद आकर वो इनाम उसे स्कूल में देंगे..

उसके माँ -बाप ग़रीब होने के साथ-2 अनपढ़ भी थे, इसलिए उन्हे इन बातो का कोई ज्ञान ही नही था … और वो रीतु के स्कूल जाने से भी कतराते थे… इसलिए रीतु के झूट के पकड़े जाने का सवाल ही नही उठता था..

अगले दिन स्कूल से आकर रीतु ने 10 हज़ार रुपय अपनी माँ के हाथ में रख दिए..
जिसे उसके पिताजी ने लालाजी को वापिस कर दिया…
पैसे वापिस करने से पहले रीतु ने उन्हे समझा दिया की वो ये किसी से भी ना कहे की ये पैसे रीतु के स्कूल से मिले है, वरना सब मज़ाक उड़ाएंगे की बेटी को मिले पैसो से अपना क़र्ज़ उतार रहे है…
इसलिए पैसे वापिस करते हुए रीतु के पिताजी ने लाला को यही कहा की अपने ससुराल वालो से ये पैसे उधार लिए है,ताकि वो अपना कर्ज़ा उतार सके..

और इस तरह से लालजी के पैसे वापिस उन्ही के पास पहुँच गये..
और बाकी के बचे 2 हज़ार रुपय उन दोनो ने बाँट लिए…

सब कुछ वैसे ही हो रहा था जैसा उन्होने सोचा था.

अगले दिन जब रीतु लालाजी की दुकान पर गयी तो लालाजी ने पूरी रात सोचकर उसके लिए कुछ अलग ही प्लान बना रखा था.

रीतु को देखकर लालाजी ने कहा : “अरी रीतु..अच्छा हुआ तू आ गयी…तुझसे बहुत ज़रूरी काम था मुझे…”

रीतु : “हाँ लालाजी , बोलिए…क्या काम है..”

अंदर से तो वो भी जानती थी की लालाजी के दिमाग़ मे ज़रूर कुछ गंदा चल रहा है…
वैसे चल तो उसके दिमाग़ में भी रहा था..

लाला : “देख ना..कल रात से तबीयत ठीक नही है…पूरी पीठ दुख रही है…वैध जी से दवाई भी ली..उन्होने ये तेल दिया है…बोले पीठ पर लगा लेना, आराम मिलेगा…अब अपनी पीठ तक मेरा हाथ तो जाएगा नही….इसलिए तुझे ही मेरी मदद करनी पड़ेगी…”

लालाजी तो ऐसे हक़ जता कर बोल रहे थे जैसे पूरे गाँव में कोई और है ही नही जो उनकी मदद कर सके..
और उनके कहने का तरीका ठीक वैसा ही था जैसे रीतु ने उनसे पैसो की मदद माँगी थी…
इसलिए वो भी समझ गयी की उसे भी लालाजी की मदद करनी ही पड़ेगी…

रीतु ने सिर हिला कर हामी भर दी..

लालजी ने तुरंत शटर आधा गिरा दिया और रीतु को लेकर दुकान के पिछले हिस्से में बने अपने घर में आ गए…

रीतु का दिल धाड़ –2 कर रहा था…
ये पहला मौका था जब वो सोनी के बिना लालाजी के पास आई थी…
और धूर्त लाला ने मौका देखते ही उसे अपने झाँसे में ले लिया..

फिर रीतु ने सोचा की अच्छा ही हुआ जो सोनी नही आई वरना लालाजी ये बात बोल ही ना पाते..

अंदर जाते ही लालजी ने अपना कुर्ता उतार दिया..
उनका गठीला बदन देखकर रीतु के रोँये खड़े हो गये…
जाँघो के बीच रसीलापन आ गया और आँखों में गुलाबीपन..

लालाजी अपने बिस्तर पर उल्टे होकर लेट गये और रीतु को एक छोटी सी शीशी देकर पीठ पर मालिश करने को कहा…

रीतु ने तेल अपने हाथ में लेकर जब लालाजी के बदन पर लगाया तो उनके मुँह से एक ठंडी आह निकल गयी…

”आआआआआआआआअहह …… वाााहह रीतु….. तेरे हाथ कितने मुलायम है…. मज़ा आ गया…. ऐसा लग रहा है जैसे रयी छुआ रही है मेरे जिस्म से….आआआअहह शाबाश….. थोड़ा और रगड़ के कर ….आहह”

लालाजी उल्टे लेटे थे और इसी वजह से उन्हे प्राब्लम भी हो रही थी…
उनका खूँटे जैसा लंड खड़ा हो चुका था…
लालाजी ने अपना हाथ नीचे लेजाकर किसी तरह से उसे एडजस्ट करके उपर की तरफ कर लिया…
उनके लंड का सुपाड़ा उनकी नाभि को टच कर रहा था…
पर अभी भी उन्हे खड़े लंड की वजह से उल्टा लेटने में परेशानी हो रही थी…

रीतु ये सब नोट कर रही थी…
और उसे लालाजी की हालत पर हँसी भी आ रही थी.

उसने उन्हे सताने का एक तरीका निकाला..

वो बोली : “लालाजी ..ऐसे हाथ सही से नही पड़ रहा…क्या मैं आपके उपर बैठ जाऊं ..”

लालाजी की तो आँखे फैल गयी ये सुनकर…
नेकी और पूछ –2…
लालाजी ने तुरंत लंबी वाली हाँ कर दी…

बस फिर क्या था, रीतु किसी बंदरिया की तरह उछल कर उनके कूल्हों पर बैठ गयी…

लालाजी तो जैसे जीते-जागते स्वर्ग में पहुँच गये…
ऐसा गद्देदार एहसास तो उन्हे अपने जीवन में आजतक नही मिला था…
ये रीतु के वही कूल्हे थे जिन्हे इधर-उधर मटकते देखकर वो अपनी आँखे सेका करते थे…
आज उसी डबल रोटी जैसी गांड से वो उनके चूतड़ों पर घिसाई कर रही थी…

रीतु ने अपनी टांगे मोड़ कर साइड में लगा दी और दोनो हाथो से उनकी पीठ को उपर से नीचे तक उस तेल से रगड़ने लगी..

लालाजी को एक तरफ मज़ा तो बहुत आ रहा था पर उनकी वो तकलीफ़ पहले से ज़्यादा बढ़ चुकी थी…
उनका लंड नीचे दबकर पहले ही फँसा हुआ सा पड़ा था, उपर से रीतु का भार आ जाने की वजह से उसका कचुंबर सा निकालने को हो गया था…जैसे कोई मोटा अजगर किसी चट्टान के नीचे दब गया हो

रीतु भी अपना पूरा भार अपने कुल्हो पर डालकर लालाजी के चूतड़ों की चटनी बनाने पर उतारू थी…
वो एक लय बनाकर लालाजी के बदन की मालिश कर रही थी…
जिस वजह से लालाजी का शरीर उपर से नीचे तक हिचकोले खाने लगा…
रीतु भी लालाजी की शरीर नुमा नाव पर बैठकर आगे पीछे हो रही थी…

और इस आगे-पीछे का स्वाद लालाजी को भी मिल रहा था…
उनके लंड पर घिस्से लगने की वजह से वो उत्तेजित हो रहे थे…
ये एहसास ठीक वैसा ही था जैसे वो किसी की चूत मार रहे हो अपने नीचे दबाकर…

अपनी उत्तेजना के दौरान एक पल के लिए तो लालाजी के मन में आया की पलटकर रीतु को अपने नीचे गिरा दे और अपना ये बोराया हुआ सा लंड उसकी कुँवारी चूत में पेलकर उसका कांड कर दे…
पर उन्हे ऐसा करने में डर भी लग रहा था की कहीं उसने चीख मारकर सभी को इकट्ठा कर लिया तो उनकी खैर नही…
इसलिए उन्होंने अपने मन और लंड को समझाया की पहले वो रीतु के मन को टटोल लेंगे…
थोड़े टाइम बाद जब उन्हे लगेगा की वो उनसे चुदने के लिए तैयार है और वो इसका ज़िक्र किसी से नही करेगी, तभी उसे चोदने में मज़ा आएगा…

और वैसे भी, अभी के लिए भी जो एहसास उन्हे मिल रहा था वो किसी चुदाई से कम नही था…
उपर से रीतु के बदन का स्पर्श भी उन्हे उनकी उत्तेजना को पूरा भड़काने में कामगार सिद्ध हो रहा था…

इसलिए वो उसी तरह, अपने लंड को बेड पर रगड़कर , अपने ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे..

और अंत में आकर , ना चाहते हुए भी उनके मुँह से आनंदमयी सिसकारियाँ निकल ही गयी..

”आआआआआआहह रीतु…….मज़ा आ गया…….हायययययययययी…………..”

रीतु को तो इस बात की जानकारी भी नही थी की लालाजी झड़ चुके है….
वो तो उनके अकड़ रहे शरीर को देखकर एक पल के लिए डर भी गयी थी की कहीं बूड़े लालाजी को कुछ हो तो नही गया…
पर जब लालाजी ने कुछ बोला तो उसकी जान में जान आई..

लालाजी : “शाबाश रीतु…शाबाश….ऐसी मालिश तो मेरी आज तक किसी ने नही की है…..चल अब उतर जा तू…मुझे तो नींद सी आ रही है….मैं थोड़ा सो लेता हूँ …”

पर रीतु शायद उनके खड़े लंड को देखना चाहती थी…

रीतु : ”थोड़ा पलट भी जाइए लालाजी , आपकी छाती पर भी मालिश कर देती मैं …”

लालाजी का मन तो बहुत था की वो भी उससे अपनी छाती की मालिश करवाए पर उनकी हालत नही थी वो करवाने की…
इसलिए उन्होने कहा : “नही रीतु…आज नही…..फिर कभी कर दियो ….अभी तो नींद सी आ रही है…तू जा …और जाते हुए मर्तबान से क्रीम रोल निकाल ले…”

वो उन्होने इसलिए कहा क्योंकि उनके बिस्तर पर ढेर सारा वीर्य गिरा पड़ा था…
अपनी सेहत के लिए लालाजी बादाम और चने भिगो कर खाते थे, इसलिए उनका वीर्य भी मात्रा से अधिक निकलता था…और उस हालत में वो सीधा होकर वो झड़ा हुआ माल उसे नहीं दिखाना चाहते थे

रीतु नीचे उतरी और 2 क्रीम रोल निकाल कर बाहर आ गयी…

लालाजी अपने बिस्तर से उठे और बेड की हालत देखकर उन्हे भी हँसी आ गयी…
शबाना होती तो इस सारी मलाई को चाट जाती…

लालाजी खड़े होकर अपने मुरझाए हुए लंड को मसलते हुए बोले : ”ये मलाई तो अब एक दिन ये रीतु ही खाएगी…साली को बड़ा मज़ा आ रहा था ना मुझे सताने में …अगली बार इसका अच्छे से बदला लूँगा…फिर देखता हूँ इसकी हालत ..”

लालाजी के दिमाग़ में उसके लिए कुछ स्पेशल प्लान बनने शुरू हो चुके थे.

क्रीम रोल लेकर रीतु सीधा सोनी के घर पहुँच गयी
वो उसके हिस्से का रोल उसे देना चाहती थी और आज का किस्सा भी सुनाना चाहती थी..

दरवाजा सोनी की बहन मीनल ने खोला

वो उसके हाथो में क्रीम रोल देखकर बोली : “ओहो…लगता है लालाजी की दुकान से आ रही है…”

उसके बोलने के स्टाइल और मुस्कुराहट से सॉफ पता चल रहा था की वो सब जानती है..

रीतु को सोनी पर बहुत गुस्सा आया की उसने ये सब बाते अपनी बहन को क्यों बता दी.

मीनल दीदी ने हँसते हुए उसका हाथ पकड़ा और अंदर खींच लिया..

”अररी, घबरा मत, मैं किसी से नही कहने वाली ये सब…तुझे शायद पता नही है, सोनी मुझसे कुछ भी नही छिपाती और न ही मैं उससे….समझी….”

रीतु का चेहरा पीला पड़ गया…
यानी सोनी की बच्ची ने कल उनकी एक दूसरे की चूत चूसने वाली बात भी बता दी है क्या…

उसके चेहरे की परेशानी देखकर वो समझ गयी की वो क्या सोच रही है..

मीनल : “कल जो तुम दोनो ने मज़े लिए थे, वो भी पता है मुझे…ये तो नॉर्मल सी बात है…मैं भी अपनी सहेली बिजली के साथ ये सब किया करती थी…कल जब उसके घर गयी तो फिर से वही किया था हमने…कसम से, पुरानी यादे ताज़ा हो गयी…”

इतना कहकर मीनल ने बड़ी बेशर्मी से अपनी चूत को रीतु के सामने ही मसल दिया..

मीनल की ये बात सुनकर उसे थोड़ी राहत मिली वरना उसे डर था की कहीं वो उसे डराएगी धमकाएगी और माँ को बताने की धमकी देगी..
पर ये तो अपनी बहन सोनी की तरह ही निकली…

वो मुस्कुरा दी और मीनल के साथ अंदर आ गयी…
सोनी नहा रही थी , इसलिए वो उसे लेकर अपने कमरे में आ गयी…
सोनी की माँ और भाई खेतो में गये हुए थे..

मीनल ने अंदर आते ही रीतु से पूछा : “अच्छा सुन, कल सोनी बता रही थी की तूने लाला का लंड देखा…बता ना..कैसा था वो…कितना मोटा था….और लंबा कितना था…बता ना…”

मीनल ने जब लंड बोला तभी से रीतु का शरीर काँप सा उठा था…
उसने तो सोचा भी नही था की कोई लड़की इतनी बेशर्मी से मर्दो के प्राइवेट पार्ट के बारे में बात कर सकती है…

सोनी और उसकी बात अलग थी, मीनल दीदी के साथ वो इतनी घुली मिली नही थी, उसके बावजूद वो उससे ऐसे बेशर्मी भरे सवाल पूछ रही थी.

उसका चेहरा गुलाबी हो गया…
आँखे डबडबा सी गयी….
पर कुछ बोल नही पाई वो.

मीनल उसके करीब आई और अपनी छातिया उसके कंधे पर ज़ोर से दबाकर , उन्हे रगड़ते हुए बोली : “अररी बोल ना…सोनी को तो बड़े मज़े लेकर बताया होगा तूने…मुझे बताने में इतना क्यो शर्मा रही है….ऐसे शरमाएगी तो उसे अपनी चूत में कैसे लेगी….”

लाला के उस ख़ूँख़ार लॅंड को अपनी कोमल चूत के अंदर लेने के नाम से ही बेचारी काँप सी गयी…
उसने घबराकर मीनल को देखा और सकपकाई हुई सी आवाज़ में बोली : “नही दीदी…..वो…वो तो बहुत मोटा है….मेरी चूत में कैसे घुसेगा भला…”

मीनल ने जैसे उसकी नब्ज़ पकड़ ली थी…
वो बोली : “अर्रे…मोटा ही है ना…लंबा तो नही है ना….लंबा होता है तब मुस्किल होत है….”

रीतु चहककर बोली : “अर्रे नही दीदी…मोटा भी है और लंबा भी…..मैने देखा था….ससुरा इतना मोटा था….और इतना लंबा….”

उसने अपनी कलाई की मोटाई और लंबाई दिखा दी मीनल को….
जिसे देखकर और सुनकर उसके मुँह में पानी सा आ गया…

वो फुसफुसाई : “हाय …..कमीना लाला…तभी शादी से पहले मुझे भी चोदने वाली नज़रो से देखा करता था….अगर पता होता तो तभी लपक लेती उसके मोटे लंड को…”

रीतु : “दीदी…..आपने कुछ कहा क्या…”

मीनल : “अर्रे नही री…..बस….तूने जो तारीफ की है, उसके बाद तो मेरा भी मन सा कर रहा है उसे एक बार देखने का….”

रीतु की आँखे फैल सी गयी….
वो बोली : “दीदी…..आप ये कैसी बाते कर रही हो…आपकी तो शादी हो गयी है….और शादी के बाद तो औरत को सिर्फ़ अपने पति के साथ…”

मीनल ने बीच में ही बात काट दी : “अररी, चुप कर…साला ये कौन सा क़ानून है की पति बाहर मुँह मारे तो सब सही है…पत्नी कुछ करे तो ये क़ानून सामने आ जावत है….”

उसके चेहरे से गुस्सा टपक रहा था…
रीतु समझ गयी की उसके पति का ज़रूर किसी और औरत के साथ चक्कर है..

पर उसने इस बारे में ज्यादा पूछना सही नही समझा…

वैसे भी लाला के लंड के बारे में बात करने से उसकी चूत में जो रसीलापन आ रहा था, ऐसी इधर उधर की बाते करने से वो चला जाना था…

वो बोली : “एक बात बताओ मीनल दीदी…अगर आपको मौका मिले तो क्या आप लाला के साथ वो सब…”

बात पूरी होने से पहले ही मीनल तपाक से बोल पड़ी : “हाँ हाँ , बिल्कुल….पहले तो मुझे बिस्वास ही नही हो रहा था लाला के लंड के बारे में सुनकर…मेरे पति का तो इत्ता सा है…सोनी ने बताया होगा तुझे…पर तूने भी वही बात की है, यानी बात सच्ची है….अब तो सच में मेरा भी मन कर रहा है उसे अपनी चूत में पिलवाने का…”

रीतु : “तो ले लो ना जाकर ….लाला तो 24 घंटे अपना हाथ में पकड़ कर बैठा रहता है…वो तो एक मिनट में ही मान जाएगा…”

मीनल : “अर्रे रीतु, तू कितनी भोली है रे….तुझे आज एक पते की बात बताती हूँ मैं ….हम औरतो को उपर वाले ने सिर्फ़ सुंदर शरीर और ये रसीले अंग ही नही दिए है…एक दिमाग़ भी दिया है….और इसका इस्तेमाल जितनी जल्दी करना सीख लेगी, उतना ही तेरी लाइफ और जवानी के लिए अच्छा है…”

रीतु : “मैं समझी नही दीदी…”

मीनल : “मतलब ये है की…मर्द क्या चाहता है ये तो हम सभी जानती है…पर उसे चाहने भर से हमारी जवानी मिल जाए, इतने बेवकूफ़ तो हम भी नही है….मर्द को तरसाकर, उन्हे सताकर, उनका उल्लू बनाकर , बाद में जब उनका लंड लेने में जो मज़ा आता है, उसका कोई मुकाबला नही है…”

रीतु के कच्चे दिमाग़ में अभी तक कुछ घुस नही रहा था

”पर दीदी…ऐसा करने से तो वो समझेगा की हम सिर्फ़ मस्ती भर का काम कर रहे है…वो कहीं और मुँह मार लेगा तब तक…”

मीनल ने उसकी जाँघ पर हाथ रखा और उसे सहलाते हुए बोली : “यहीं तो तेरी जवानी काम आएगी मेरी बिल्लो….उन्हे सताना है…पागल बना है..पर भगाना नही है…समझी…”

तभी पीछे से आवाज़ आई : “किसको सताने की बाते हो रही है दीदी….”

ये सोनी थी जो नहा धोकर बाहर आ गयी थी…..

रीतु ने उसकी तरफ देखा तो हैरान ही रह गयी…
वो नंगी ही बाथरूम से निकलकर बाहर आ गयी थी.

सोनी ने बाहर आते ही शिकायत करी : “क्या दीदी…मैं तो टावल का इंतजार कर रही थी अंदर…आपने दिया ही नही…”

अपने चेहरे पर आए पानी को पोंछते हुए वो रीतु से बोली : “अर्रे रीतु, तू कब आई….और ये क्या है तेरे हाथ में ..क्रीम रोल….लगता है लाला की दुकान से आ रही है सीधा…”

इतना कहकर उसने वो क्रीम रोल लेकर खाना शुरू कर दिया….
उसे तो जैसे अपने नंगेपन से कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था..

हालाँकि रीतु के सामने वो कई बार नंगी हो चुकी थी और वो दोनो एक दूसरे को ऐसे देखने की आदी थी..
पर रीतु ये नही जानती थी की वो घर में भी , अपनी बहन के सामने ऐसे ही बेशर्मो की तरह नंगी खड़ी रह सकती है..

मीनल ये सब नोट कर रही थी…
वो मुस्कुराते हुए बोली : “अर्रे, ऐसे हैरान सी होकर तो ऐसे देख रही है जैसे पहली बार इसे नंगा देखा है तूने…कल ही तो तेरे घर पर वो प्रोग्राम हुआ था जिसमें तुम दोनो ने वो सब मज़े लिए थे…

ये सुनकर एक बार फिर से रीतु शरमा गयी….
उसके होंठ फड़फड़ा से रहे थे…

सोनी : “अररी मेरी जान रीतु, तू भी ना, हमारे बीच सब चलता है….मैं दीदी से कुछ नही छुपाती …इसलिए उन्हे सब पता है हमारे बारे में और लाला के बारे में …”

वो तब तक अपना क्रीम रोल खा चुकी थी और अपनी उंगलिया चाट रही थी..

रीतु भी अब नॉर्मल सी हो चुकी थी…
वो सब मिलकर अंदर जाकर बैठ गयी और फिर मीनल और सोनी के पूछने पर रीतु ने आज वाला किस्सा भी पूरे विस्तार से उन्हे सुना दिया…

वो सब सुनते-2 सोनी तो अपनी चूत उनके सामने ही रगड़ने लग गयी..

मीनल ने भी अपना टॉप एक झटके में उतार फेंका
नीचे की पायजामी भी उसने नीचे खिसका दी
पल भर में ही वो नंगी खड़ी थी.

वो अपने मुम्मे और उनपर लगे दाने दबाने लगी, और वो दाने दबाते हुए बुदबुदा भी रही थी : “साला हरामी लाला….भेंन का लौड़ा …हरामी उल्टा पड़े-2 ही झड़ गया था…इसलिए सीधा नही हुआ…..हाय …..काश मैं होती वहां पर….सारा माल चाट जाती उस लाला का…..अहह

रीतु और सोनी को मर्दो के बारे में इतना डीटेल से नही पता था की वो भी झड़ते है…
और झड़ने के बाद उनके लंड से ढेर सारा मीठा रस निकलता है…

सोनी ने ही उत्सुकततावश पूछ लिया : “दीदी….ये झड़ने के बाद क्या होता है….”

वो अपनी बहन की तरफ पलटी और उसके करीब आकर उसने उसका मुम्मा पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया…
वो चिहुंक उठी…

और फिर अपने दाँये हाथ की एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी….
और ज़ोर-2 से अंदर बाहर करने लगी…

बेचारी सोनी पहले से ही झड़ने के कगार पर थी
उपर से अपनी बहन के जादुई हाथो की करामात से वो बुरी तरह से छटपटाने लगी
और
एक मिनट में ही उसकी चूत से शुद्ध देसी घी निकल कर बाहर आ गया…

मीनल ने अपनी उंगलियो पर लगे उस माल को चाट लिया और धीरे से फुसफुसाई : “ये होता है झड़ना…और जब मर्द झड़ता है ना, तो उसके लंड से ढेर सारा रस निकलता है…वो होता है असली माल….जो चूत में जाए तो बच्चा बना दे और मुँह मे जाए तो स्वाद जगा दे….”

उसने बड़ी डीटेल से, डेमो देकर ये बात उन दोनो अल्हड़ लड़कियों को समझा दी…

रीतु की हालत भी खराब हो रही थी…
उसकी आँखे लाल हो चुकी थी ये सब देखकर और सुनकर…

वो तो यही सोचने मे लगी थी की उसकी वजह से लालाजी के लंड का रस निकल गया था
और वो भी उन्ही के बेड पर…
काश वो देख पाती वो रसीला रस.

पर अभी का सीन देखकर तो उसकी खुद की चूत में से रस निकलने लगा था…

उपर से अपनी सहेली सोनी का ऑर्गॅज़म देखकर और मीनल के सैक्सी हाव भाव देखकर, उसकी रही सही ताक़त भी जवाब दे गयी…

पर इससे पहले की वो या कोई और कुछ कर पाते
बाहर का दरवाजा खड़क गया…

और साथ ही सोनी की माँ और भाई की आवाज़ आई

”दरवाजा खोल सोनी…..इतनी देर क्यो लगा रही है….मीनल…..सोनी…दरवाजा खोलो….”

सोनी बेचारी नंगी ही भागती हुई वापिस बाथरूम के अंदर चली गयी….
रीतु ने अपना हुलिया ठीक किया और मीनल ने अपने कपडे पहने और बाहर जाकर दरवाजा खोल दिया.

आज उनके आ जाने से कुछ ”ख़ास” होने से बच गया था.

पर ये सब ज्यादा देर तक बचकर नहीं रहने वाला था, मीनल के इस खेल में आ जाने से रीतु और सोनी की टीम थोड़ी और जानदार हो गयी थी ,
पर उन्हें क्या पता था की लाला कितना हरामी है, एक तो साहूकार और ऊपर से ठरकी भी
उनकी टीम और चुतों का उसने वो हाल करना था की उन्हें भी जीवनभर याद रहने वाला था

”दरवाजा खोल सोनी…..इतनी देर क्यो लगा रही है….मीनल…..सोनी…दरवाजा खोलो….”

सोनी बेचारी नंगी ही भागती हुई वापिस बाथरूम के अंदर चली गयी….आज उनके आ जाने से कुछ ”ख़ास” होने से बच गया था.पर ये सब ज्यादा देर तक बचकर नहीं रहने वाला था, मीनल के इस खेल में आ जाने से रीतु और सोनी की टीम थोड़ी और जानदार हो गयी थी.
पर उन्हें क्या पता था की लाला कितना हरामी है, एक तो साहूकार और ऊपर से ठरकी भी, उनकी टीम और चुतों का उसने वो हाल करना था की उन्हें भी जीवनभर याद रहने वाला था

सोनी की माँ और भाई के आने के बाद रीतु ने भी वहां देर तक रुकना सही नही समझा…
वो बाहर निकल गयी, पर जाने से पहले मीनल ने उसका हाथ पकड़ा और उसके कान में फुसफुसा कर बोली : “मुझे पता है की अभी भी तेरे मन में बहुत कुछ चल रहा है, तू फ़िक्र मत कर, इसका इंतज़ाम मैं जल्द ही करूँगी…”

रीतु का तो चेहरा ही लाल हो गया ये सुनकर…
यानी अभी कुछ देर पहले जो डेमो मीनल दीदी ने उन्हे दिया था, वो अब खुद करके दिखाएगी…
लाला के साथ.
ये मीनल दीदी तो बड़ी चालू निकली
उनकी आड़ में वो लाला से मज़े लेने के मूड में थी.

पर जो भी था, अपनी चूत मरवाना तो रीतु और सोनी भी नही चाहते थे अभी…
ऐसे में लाला के लंड की करामात वो मीनल दीदी के साथ देखकर कम से कम कुछ मज़ा तो ले ही सकते है..
और शायद मीनल को ऐसा करते देखने के बाद उनमे भी चुदवाने की हिम्मत आ जाए..

यही सब सोचते-2 वो घर चली गयी…

अगली सुबह मीनल अच्छे से तैयार हुई और सीधा लाला की दुकान पर पहुँच गयी…
लाला ने जब दूर से उसे मटकते हुए अपनी दुकान की तरफ़ आते हुए देखा तो वो कसमसा कर अपने लंड (रामलाल) से बोला : “अरे …देख तो रामलाल…वो कौन आ रही है….तेरे दिल की रानी..साली जब से शादी करके गयी है , पहली बार दिखी है…शादी के बाद तो कमाल की लग रही है साली चुदक्कड़ …ज़रा देख तो उसके रसीले आमों को …पहले तो साली चुननी में छुपा कर रखती थी.. और अब साली सीना उभार कर दिखा रही है…

लाला के देखते-2 मीनल के मुम्मे पास आते चले गये और बड़े होते गये…
लाला का हाथ अपनी आदत्नुसार एक बार फिर से अपनी धोती में घुस गया.

लाला :”अरी आजा मीनल आजा…..आज तो बड़े दिनों के बाद दिखाई दी है…लगता है शादी के बाद तेरा मन अच्छे से लग गया है अपने ससुराल में …”

मीनल ने एक कातिल सी मुस्कान लाला को दी और बोली : “मन तो लग ही गया है, पर लाला तेरी याद खींच लाई मुझे , इसलिए मिलने चली आई…”

मीनल के इस बेबाक से जवाब को सुनकर लाला को करंट सा लगा…
आज से पहले उसने ऐसी फ्लर्ट भरी बातो को हमेशा से ही इग्नोर किया था…
शायद तब वो कुँवारी थी
और अपने माँ भाई की इज़्ज़त का उसे डर था..

लाला : “अच्छा किया ये तो तूने जो मिलने चली आई…बता क्या खातिरदारी करूँ तेरी…”

मीनल का मन तो हुआ की लाला से कहे की ये बकचोदी बंद करे और सीधा मुद्दे की बात पर आए…
अंदर चलकर चुदाई कर दे बस..

पर वो भी मज़े लेकर हर काम करना चाहती थी…
भले ही लंड लेने की उसे जल्दी थी पर इतनी भी नही की खुद ही चुदाई के लिए बोल दे…
उसे तो पहले लाला को तरसाना था
सताना था
और जब वो खुद उसके सामने लंड हाथ में लेकर गिड़गिडाएगा
तब वो अपनी चूत देगी उसे…

अभी तक तो यही प्लान था उसका…
बाकी उपर वाला जाने..

मीनल : “खातिरदारी तो आजकल आप सोनी और रीतु की बहुत कर रहे हो लाला…सुना है बच्चियों को बड़े क्रीम रोल खिलाए जा रहे है आजकल…”

क्रीमरोल बोलते हुए मीनल की नज़रें लाला के लंड की तरफ थी, जो काउंटर के पीछे छुपा हुआ था…
और लाला के हिल रहे हाथ देखकर मीनल को सॉफ पता चल रहा था की वो साला ठरकी ज़रूर अपने लंड को मसल रहा होगा..

लाला ने जब क्रीम रोल वाला ताना सुना तो वो खिसियाई हुई सी हँसी हंसता हुआ बोला : “अररी वो…वो तो बस ऐसे ही…. तुझे तो पता है की लाला की दिल कितना बड़ा है…बच्चो को क्रीम रोल देने से वो अगर खुश हो जातीं है तो मुझे भी खुशी होती है..”

मीनल ने आँखे तरेर कर कहा : “हमे तो ना खिलाया तुमने आज तक अपना क्रीम रोल…. हमारा बचपन और जवानी तो ऐसे ही निकल गयी…शादी होकर दूसरे शहर चली गयी..पर क्रीम रोल ना चखा मैने आज तक तेरा लाला…”

उसके द्विअर्थी संवाद को सुनकर लाला के चेहरे पर पसीना चमकने लगा…
साली कितनी चालाकी से वो लाला के लंड को लेने की बात कह रही थी…
पर लाला को अभी भी उसपर विश्वास नही हो रहा था, उसकी खुल्ली बातो को सुनकर कहीं वो ऐसा-वैसा काम कर दे और बाद में गाँव भर में बदनामी हो , ये बात लाला हरगिज़ नही चाहता था…
भले ही कम मिले पर आराम से मिले, यही सिद्धांत था लाला का..
जो उसके दोस्त रामलाल ने उसे सिखाया था..

उसकी बातो को परखने के लिए लाला ने झट्ट से मर्तबान से एक क्रीम रोल निकाल कर उसे थमा दिया..

मीनल ने मुँह बनाते हुए वो रोल पकड़ा और उसे बड़े ही बेमन से मुँह में लेकर चूस डाला…
ठीक वैसे ही जैसे कोई लंड को मुँह में लेकर चूसता है…

एक – दो चुप्पे मारने के बाद उसने उसे काटा तो अंदर भरी क्रीम उसके होंठो और मुँह पर लग गयी…
जिसे उसने अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर चाट लिया..

लाला ये सब बड़े ध्यान से देख रहा था…
उसका तो दिल तभी से धाड़-2 बजने लगा था जब उसने रोल को मुँह में लेकर लंड की तरह चूसा था…
ऐसे तो शबाना चूसती है उसके लंड को…

लाला : “अब बोल…कैसा लगा मेरा क्रीम रोल…”

मीनल ने मुँह बिचका कर कहा : “एकदम ढीला…नर्म सा..मुझे तो कड़क पसंद है…कड़क क्रीम रोल है तो वो चखा लाला…”

लाला का मन तो किया की उसकी घोड़ी बना कर, एक टाँग काउंटर पर रखे और घचाक से अपना लंड उसकी चूत में पेल कर उसे बेदर्दी से तब तक चोदे जब तक वो चिल्लाते हुए अपने मुँह से ये ना बोल दे की ‘बस कर लाला….मार ही डालेगा तू तो…ये कड़क क्रीम रोल तो मेरी जान निकाल रहा है‘

पर लाला जानता था की ऐसा करना अभी के लिए पॉसिबल नही है..

पर लाला अब इतनी बात तो समझ ही चुका था की वो लाला के लंड की ही बात कर रही है…

वो काउंटर से बाहर निकल आया..
और बाहर निकलते ही उसकी धोती में जो तंबू बना हुआ था वो मीनल को दिखाई दे गया…

अब चेहरे पर पसीना चमकने की बारी मीनल की थी…
लाला के लंड का उभार उसके शरीर से करीब एक फुट आगे तक निकला हुआ था…
जैसे उसके धोती के कपड़े को किसी खूँटे पर टाँग रखा हो.

धूर्त लाला के होंठो पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी, वो बोला : “अर्रे, देख तो , तेरे माथे पर तो पसीना है…रुक ज़रा, मैं तुझे केम्पा पिलाता हूँ …आजा अंदर…”

इतना कहकर लाला अंदर वाले कमरे की तरफ चल दिया….
और उसके पीछे –2 एक सम्मोहन में बँधी मीनल भी चल दी…

भले ही वो दुनिया भर की प्लानिंग करके आई थी
पर लाला के लंड के उभार ने ही उसकी चूत के पसीने निकाल दिए थे…
अब तो वो पूरी तरह से चुदने को तैयार थी…
बस लाला के कहने भर की देर थी और उसने अपना नाड़ा खोल देना था..

लाला ने उसके हाथ में कोल्ड ड्रिंक पकड़ाई तो उसका हाथ लाला से छू गया…
ऐसा लगा जैसे कोई कठोर चट्टान से घिस्सा लग गया हो उसका…
मीनल तो उसके रंग रूप और मर्दानेपन की कायल होती जा रही थी…

अचानक मीनल को महसूस हुआ की उसकी जाँघ पर कुछ रेंग रहा है…
उसने नीचे देखा तो उसका शरीर काँप सा गया..
वो लाला के लंड का सुपाड़ा था, जो उसकी धोती से निकल कर उसकी जाँघो को टच कर रहा था…

और ये ठीक वैसा ही था, जैसा की रीतु ने बताया था…
एक दम काला नाग, कलाई जितना मोटा और एकदम कड़क….

लाला ने अपने दाँत निपोर कर कहा : “हाँ तो तू क्या कह रही थी..लाला का क्रीम रोल कड़क नही है… वो तो दुनिया को दिखाने के लिए मर्तबान में रखा है..असली तो गोडाउन में रहता है…”

मीनल की नज़रें कभी लाला के चेहरे पर जाती और कभी उसके लंड पर…

बेचारी कुछ बोलने के काबिल ही नही रह गयी थी…
ऐसे कड़क रोल को तो मुँह में लेकर चूसने में ही उसका जबड़ा फट्ट जाना है…
और जब ये चूत में जाकर हाहाकार मचाएगा तो क्या हाल होगा
ये तो बताने की ज़रूरत ही नही है….

मीनल का पूरा शरीर और दिमाग़ सुन्न सा हो चुका था…
अगर वो चाहती तो एक ही पल में लाला के लंड को पकड़ कर अपनी चूत में घुसवा लेती..
पर दिमाग़ के एक कोने में कुछ और भी चल रहा था
वो रीतु को जो वादा करके आई थी, वो भी तो उसे ही पूरा करना था…
और वो पूरा करने के बाद वो रीतु और सोनी की लाइफ में एक स्टार बन जाएगी, इसका भी उसे विश्वास था…
इसलिए एन्ड टाइम पर उसने अपने आप पर कंट्रोल करते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और बाहर की तरफ चल दी..

लाला को तो लगा था की उसके लंड को देखकर वो चुदे बिना नही रह सकेगी…
पर यहाँ तो उल्टा ही हो गया था…
वो तो भाग रही थी…
कही उसे बुरा तो नही लग गया…
लाला को लग रहा था की उसका पासा उल्टा पड़ गया है…
ऐसे अपने लंड की नुमाइश करके उसने शायद कोई ग़लती कर दी है..

और यही सोचकर वो उसके पीछे भागा..

लाला : “अररी सुन तो…क्या हो गया एकदम से तुझे…कोल्ड ड्रिंक तो पी ले पूरी…”

मीनल : “अचानक कुछ ज़्यादा ही गर्मी लग रही है लाला…अब तो पहाड़ी के पास वाले झरने पर जाकर नहाउंगी , तभी ये गर्मी निकलेगी…”

इतना कहकर वो हिरनी की तरह कुलाँचे भरती हुई उसकी आँखो से ओझल हो गयी..

लाला अपना सिर पकड़ कर बैठ गया..

 

”आआआआआआअहह…. चूसो भेंन की लोड़ियों ….चूसो…… लाला का लंड तुम्हारे लिए ही तो इस धरती पर आया है….. मज़ा लो इसका…. मज़ा लो जिंदगी का… अपनी जवानी का…”

लाला तो अपने आपको किसी फरिश्ते की तरह दर्शा रहा था,
जिसका धरती पर आने का मकसद ही चूत को चोदकर उसका उद्धार करना था..

और देखा जाए तो वो उद्धार कर भी रहा था आज तक…
क्योंकि जिसने भी लाला के रामलाल को एक बार अपनी चूत में लिया वो उसका गुणगान किए बिना नही रह सकी.

लाला ने बारी-2 से उन दोनो के मुँह को अलग से भी चोदा …
ख़ासकर रीतु के मुँह को,
क्योंकि लाला भी जानता था की अभी के लिए तो इसके उपर वाले होंठो में ही लंड डाल सकता है वो, नीचे वाले पिंक होंठो का नंबर तो बाद में आएगा..

सीमा भी अपनी बेटी को लाला का लंड चूसते देखकर शायद यही सोच रही थी ‘कितनी बड़ी हो गयी है मेरी बेटी, मैं तो इसे अभी तक बच्ची ही समझती थी, देखो तो ज़रा, कैसे चपर –2 करके लाला के लंड को चूस रही है…‘

उसे शायद गर्व हो रहा था अपनी बेटी पर,
ये देखकर की जो काम वो अपनी जवानी के दिनों में भी नही कर सकी, इसने जवानी शुरू होने से पहले ही करना शुरू कर दिया है,
इसे कहते है अपनी कीमती लाइफ का अच्छे से इस्तेमाल करना,
क्योंकि एक बार जब ये जवानी के दिन चले गये तो बाद में नही लोटने वाले…
ठीक वैसे ही जैसे एक बार शादी हो जाने पर लड़की की लाइफ में जो बंदिशे लगती है, वो शादी से पहले नही होती,

इसलिए जो भी करना हो वो पहले ही कर लेना चाहिए…
चाहे किसी के साथ भी…
दोस्त मिले तो उसके साथ,
प्यार करने वाला आशिक हो तो उसके साथ तो जरूर…
और कोई नही तो अपनी रिश्तेदारी में से ही कोई भी ,
पर कुछ तो उपयोग करना ही चाहिए अपनी कच्ची जवानी का.

और वो उपयोग इस वक़्त रीतु अच्छे से कर रही थी.

लाला के लंड को चूस्कर…

उसकी खुद की थूक निकलकर उसके नन्हे स्तनों पर गिर रही थी, जिसे उसकी माँ ने झुककर सॉफ कर दिया, एक मीठे शहद का एहसास हुआ उसे अंदर तक..

लाला का लंड जब स्टील जैसा हो गया तो उसने उसे रीतु के मुँह से निकाल लिया,
रीतु को तो ऐसा लगा जैसे कोई मीठा लोलीपोप उसके मुँह से छीन लिया हो किसी ने..
अभी तो उसकी मिठास आनी शुरू हुई थी (जो शायद लाला के लंड का प्रिकम था), और लाला ने कितनी बेदर्दी से उसे बाहर खींच लिया..

अब लाला की उत्तेजना का केंद्र सिर्फ़ और सिर्फ़ सीमा थी…
वही सीमा जो उसके लंड के चुंगल से 2 बार बच कर निकल गयी थी…

पर आज वो ऐसा नही होने देना चाहता था,
इसलिए उसने उसी की बेटी की लार से भीगा हुआ लंड उसकी तरफ घुमाया और बोला : “चल सीमा रानी, लेट जा गद्दे पर, आज लाला चोदेगा तेरी मुनिया को…”

लाला एक-2 शब्द ऐसे 

”आआआआआआअहह…. चूसो भेंन की लोड़ियों ….चूसो…… लाला का लंड तुम्हारे लिए ही तो इस धरती पर आया है….. मज़ा लो इसका…. मज़ा लो जिंदगी का… अपनी जवानी का…”

लाला तो अपने आपको किसी फरिश्ते की तरह दर्शा रहा था,
जिसका धरती पर आने का मकसद ही चूत को चोदकर उसका उद्धार करना था..

और देखा जाए तो वो उद्धार कर भी रहा था आज तक…
क्योंकि जिसने भी लाला के रामलाल को एक बार अपनी चूत में लिया वो उसका गुणगान किए बिना नही रह सकी.

लाला ने बारी-2 से उन दोनो के मुँह को अलग से भी चोदा …
ख़ासकर रीतु के मुँह को,
क्योंकि लाला भी जानता था की अभी के लिए तो इसके उपर वाले होंठो में ही लंड डाल सकता है वो, नीचे वाले पिंक होंठो का नंबर तो बाद में आएगा..
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Re: हरामी साहूकार
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Post  by kunal » 24 Nov 2017 12:58

सीमा भी अपनी बेटी को लाला का लंड चूसते देखकर शायद यही सोच रही थी ‘कितनी बड़ी हो गयी है मेरी बेटी, मैं तो इसे अभी तक बच्ची ही समझती थी, देखो तो ज़रा, कैसे चपर –2 करके लाला के लंड को चूस रही है…‘

उसे शायद गर्व हो रहा था अपनी बेटी पर,
ये देखकर की जो काम वो अपनी जवानी के दिनों में भी नही कर सकी, इसने जवानी शुरू होने से पहले ही करना शुरू कर दिया है,
इसे कहते है अपनी कीमती लाइफ का अच्छे से इस्तेमाल करना,
क्योंकि एक बार जब ये जवानी के दिन चले गये तो बाद में नही लोटने वाले…
ठीक वैसे ही जैसे एक बार शादी हो जाने पर लड़की की लाइफ में जो बंदिशे लगती है, वो शादी से पहले नही होती,

इसलिए जो भी करना हो वो पहले ही कर लेना चाहिए…
चाहे किसी के साथ भी…
दोस्त मिले तो उसके साथ,
प्यार करने वाला आशिक हो तो उसके साथ तो जरूर…
और कोई नही तो अपनी रिश्तेदारी में से ही कोई भी ,
पर कुछ तो उपयोग करना ही चाहिए अपनी कच्ची जवानी का.

और वो उपयोग इस वक़्त रीतु अच्छे से कर रही थी.

लाला के लंड को चूस्कर…

उसकी खुद की थूक निकलकर उसके नन्हे स्तनों पर गिर रही थी, जिसे उसकी माँ ने झुककर सॉफ कर दिया, एक मीठे शहद का एहसास हुआ उसे अंदर तक..

लाला का लंड जब स्टील जैसा हो गया तो उसने उसे रीतु के मुँह से निकाल लिया,
रीतु को तो ऐसा लगा जैसे कोई मीठा लोलीपोप उसके मुँह से छीन लिया हो किसी ने..
अभी तो उसकी मिठास आनी शुरू हुई थी (जो शायद लाला के लंड का प्रिकम था), और लाला ने कितनी बेदर्दी से उसे बाहर खींच लिया..

अब लाला की उत्तेजना का केंद्र सिर्फ़ और सिर्फ़ सीमा थी…
वही सीमा जो उसके लंड के चुंगल से 2 बार बच कर निकल गयी थी…

पर आज वो ऐसा नही होने देना चाहता था,
इसलिए उसने उसी की बेटी की लार से भीगा हुआ लंड उसकी तरफ घुमाया और बोला : “चल सीमा रानी, लेट जा गद्दे पर, आज लाला चोदेगा तेरी मुनिया को…”

लाला एक-2 शब्द ऐसे 

”आआआआआआअहह…. चूसो भेंन की लोड़ियों ….चूसो…… लाला का लंड तुम्हारे लिए ही तो इस धरती पर आया है….. मज़ा लो इसका…. मज़ा लो जिंदगी का… अपनी जवानी का…”

लाला तो अपने आपको किसी फरिश्ते की तरह दर्शा रहा था,
जिसका धरती पर आने का मकसद ही चूत को चोदकर उसका उद्धार करना था..

और देखा जाए तो वो उद्धार कर भी रहा था आज तक…
क्योंकि जिसने भी लाला के रामलाल को एक बार अपनी चूत में लिया वो उसका गुणगान किए बिना नही रह सकी.

लाला ने बारी-2 से उन दोनो के मुँह को अलग से भी चोदा …
ख़ासकर रीतु के मुँह को,
क्योंकि लाला भी जानता था की अभी के लिए तो इसके उपर वाले होंठो में ही लंड डाल सकता है वो, नीचे वाले पिंक होंठो का नंबर तो बाद में आएगा..
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Post  by kunal » 24 Nov 2017 12:58

सीमा भी अपनी बेटी को लाला का लंड चूसते देखकर शायद यही सोच रही थी ‘कितनी बड़ी हो गयी है मेरी बेटी, मैं तो इसे अभी तक बच्ची ही समझती थी, देखो तो ज़रा, कैसे चपर –2 करके लाला के लंड को चूस रही है…‘

उसे शायद गर्व हो रहा था अपनी बेटी पर,
ये देखकर की जो काम वो अपनी जवानी के दिनों में भी नही कर सकी, इसने जवानी शुरू होने से पहले ही करना शुरू कर दिया है,
इसे कहते है अपनी कीमती लाइफ का अच्छे से इस्तेमाल करना,
क्योंकि एक बार जब ये जवानी के दिन चले गये तो बाद में नही लोटने वाले…
ठीक वैसे ही जैसे एक बार शादी हो जाने पर लड़की की लाइफ में जो बंदिशे लगती है, वो शादी से पहले नही होती,

इसलिए जो भी करना हो वो पहले ही कर लेना चाहिए…
चाहे किसी के साथ भी…
दोस्त मिले तो उसके साथ,
प्यार करने वाला आशिक हो तो उसके साथ तो जरूर…
और कोई नही तो अपनी रिश्तेदारी में से ही कोई भी ,
पर कुछ तो उपयोग करना ही चाहिए अपनी कच्ची जवानी का.

और वो उपयोग इस वक़्त रीतु अच्छे से कर रही थी.

लाला के लंड को चूस्कर…

उसकी खुद की थूक निकलकर उसके नन्हे स्तनों पर गिर रही थी, जिसे उसकी माँ ने झुककर सॉफ कर दिया, एक मीठे शहद का एहसास हुआ उसे अंदर तक..

लाला का लंड जब स्टील जैसा हो गया तो उसने उसे रीतु के मुँह से निकाल लिया,
रीतु को तो ऐसा लगा जैसे कोई मीठा लोलीपोप उसके मुँह से छीन लिया हो किसी ने..
अभी तो उसकी मिठास आनी शुरू हुई थी (जो शायद लाला के लंड का प्रिकम था), और लाला ने कितनी बेदर्दी से उसे बाहर खींच लिया..

अब लाला की उत्तेजना का केंद्र सिर्फ़ और सिर्फ़ सीमा थी…
वही सीमा जो उसके लंड के चुंगल से 2 बार बच कर निकल गयी थी…

पर आज वो ऐसा नही होने देना चाहता था,
इसलिए उसने उसी की बेटी की लार से भीगा हुआ लंड उसकी तरफ घुमाया और बोला : “चल सीमा रानी, लेट जा गद्दे पर, आज लाला चोदेगा तेरी मुनिया को…”

लाला एक-2 शब्द ऐसे 

पीस कर बोल रहा था जैसे उसे चोदने के लिए नही बल्कि कच्चा खा जाने की बातें कर रहा हो..

रीतु का तो पता नही पर सीमा ने जब लाला के ये शब्द सुने तो वो किसी बंधुआ मजदूर की तरह उसकी बात मानकर बेड पर जा लेटी और अपनी टांगे दोनो तरफ फेला कर लाला से बोली : “आजा लाला….देर किस बात की है…मैं भी कब से तरस रही थी इस पल के लिए…. अब जल्दी से अपना लंड मेरी मुनिया में पेल और मुझे इस तड़पन से मुक्ति दिला…”

और आज तो लाला वैसे ही अपने आप को चुदाई का फरिश्ता समझ रहा था,
ऐसी मुक्ति दिलवाने के लिए ही तो उसने जन्म लिया था ..

वहीँ दूसरी तरफ रीतु मन में सोच रही थी की काश इस वक़्त ये मुनिया उसकी माँ की चूत नहीं बल्कि वो खुद होती, क्योंकि उसके पिताजी प्यार से उसे घर पर मुनिया ही तो बुलाया करते थे।

लाला ने उस गीले लंड को सीमा की चूत पर रखा और उसकी चुचियां पकड़कर बोला : “आज तेरी सारी प्यास मिटा दूँगा मेरी रानी…बस चीखें मत मारियो…”

और वो लाला ने इसलिए कहा था क्योंकि शादी के इतने सालो बाद भी उसकी चूत एकदम कसी हुई सी थी,
जो उसे देखते ही लाला समझ गया था की उसमें अगर उसका लंड घुसेगा तो साली चीख ज़रूर मारेगी ..

और लाला कभी ग़लत हुआ था जो आज होता…..

जैसे ही लाला ने नीचे झुकते हुए अपने लंड का भार उसके उपर डाला, वो उसकी चूत को किसी ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर घुसने लगा…

इतने महीनो बाद हो रही चुदाई की वजह से उसकी चूत की रही सही लंड जाने की जगह भी कसावट में बदल चुकी थी..
जिसे भेदना इस वक़्त रामलाल के लिए भी मुसीबत वाला काम बन चुका था…
अंदरूनी चूत की दीवारे, रामलाल के चेहरे पर ऐसे घिसाई कर रही थी जैसे उसे नोच ही डालेंगी..
पर अपना रामलाल उन खरोंचो की परवाह किए बिना एक बहादुर सैनिक की तरह अंदर घुसता चला गया और उस मांद के अंदर तक घुसकर ही माना…

और इन सबके बीच जो हाल सीमा का हुआ, उसे शब्दो में बयान करना मुमकिन ही नही है…

बस वो तो ऐसे चिल्ला रही थी जैसे लाला उसकी चुदाई नही बल्कि अपने लंड से उसकी चूत में ड्रिलिंग कर रहा है..

”आआआआआआआआआआहह …….. उम्म्म्मममममममममममम……. लाला……….. माआआआआआर दलाआआआआआअ रे………………”

और अपनी माँ की इस तकलीफ़ को उसकी बेटी ने आकर कम किया जब उसने अपनी गरमा गर्म चूत सीधा लाकर उनके मुँह पर रख दी….
इसके 2 फायदे हुए,
एक तो उसकी माँ की चीखें निकलनी बंद हो गयी
दूसरा उसकी खुद की चूत में जो कुलबुली हो रही थी वो भी एकदम से मिट गयी…

सीमा को भले ही लाला के लंड से तकलीफ़ हुई थी शुरू में ,
पर बाद में उसने जब धीरे-2 झटके मारने शुरू किए तो उसके आनंद की सीमा ही नही रही,
एक मिनट में ही उसकी छींके लंबी सिसकारियों में बदल गयी…
लेकिन वो सिसकारियां भी रीतु की चूत तले दब कर रह गयी थी
पर इधर उधर से फुसफुसाती आवाज़ में जो भी बाहर आ रहा था उससे सॉफ जाहिर था की वो मज़े की सिसकारियां ही है, और कुछ नही..

और उपर से रीतु की चूत का स्वाद भी ऐसे मौके पर पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट लग रहा था,
वो भी शायद इसलिए की लाला की चुदाई देखकर रीतु की चूत से अपने आप ही स्पेशल किस्म का शहद निकलने लगा था, जो इस वक़्त उसकी माँ को काफ़ी भा रहा था,
और इसलिए वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे आज उसकी चूत की कटोरी का सारा रस वो ख़त्म करके ही मानेगी…
ठीक वैसे ही जैसे आज वो अपनी चूत का सारा रस लाला के लंड से चुदने के बाद बाहर निकाल देना चाहती थी…

और लाला की किस्मत तो देखते ही बनती थी इस वक़्त…
लंड चूत में था,
हाथ उसके मोटे मुम्मो पर थे,
ऐसे में जब नर्म होंठो वाली रीतु ने जब आगे बढ़कर उसके होंठो पर अपने होंठ लगाए तो उसकी आँखे बंद होती चली गयी….
नर्म होंठ, गर्म चूत और कड़क मुम्मे ,
लाला के सामने ऐसे व्यंजन लगे थे जैसे घर पर पहली बार आए दामाद की खातिरदारी होती है…
लाला उपर से नीचे तक तृप्त सा होकर चुदाई कर रहा था…

लाला का काला भूसंड लंड सीमा की चूत की सीमाएं लाँघता हुआ काफ़ी अंदर तक जा रहा था…
कभी बाहर भी…
और फिर से अंदर.

और जल्द ही सीमा की चूत में ऑर्गॅज़म का एक बुलबुला फूलने लगा,
ऐसा उसे शायद सालो बाद फील हुआ था,
वो अपनी बेटी की गांड को पकड़कर जोरो से उसकी चूत चूसने लगी और अपनी खुद की चूत में मिल रहे सेंसेशन को महसूस करके तड़पने लगी…

”आआआआआआआआआआहह लालाआआआआआआआआआ….. मज़ाआआआआअ आआआआआआआअ गया आआआआआआआ रे……. उम्म्म्ममममममममममम…… उफफफफफफफफफफफ्फ़……. क्या लंड है रे तेरा लाला …… आज पता चला की असली मर्द से चुदाई करवाने मे…. कैसा ….फ़ीईईईल्ल… होता है….. अहह….. ऑश लाला….. चोद मुझे….. ज़ोर से चोद …अहह…. और तेज लाला….. और तेज…..”

और इतना कहते –2 उसने तेज गति से अपनी चूत में टक्कर मार रहे रामलाल के आगे अपने घुटने टेक दिए…
और उसे अपनी चूत से निकले नारियल पानी से नहला कर रख दिया…

झड़ते हुए उसकी आवाज़ भी निकलनी बंद हो गयी….
सिर्फ़ उसका शरीर ही था जो कमान की भाँति टेडा होकर दर्शा रहा था की उसकी चूत का झड़न पतन हो रहा है…

पर लाला अभी तक झड़ा नही था….
वो अपनी पूरी ताक़त से उसके निश्छल शरीर में अपना लंड घुसाकर उसे चोदता रहा…

और तब तक चोदता रहा जब तक उसके लंड का उबाल उसे अपनी छाती तक महसूस नही हो गया…
और जब वो निकला तो उसने सीमा की चूत में ऐसी तबाही का मंज़र पैदा कर दिया की चारो तरफ लाला के लंड से निकला माल ही माल नज़र आ रहा था…
और कुछ नही…

अपनी माँ की ऐसी कमाल की चुदाई इतने करीब से देखकर रीतु की चूत में से भी पानी रिसने लगा और वो सीधा उसकी माँ के मुंह में जाने लगा.

और लाला ने जब हाँफते हुए अपना लंड बाहर निकाला तो एक शिकारी की भाँति रीतु उस पॉइंट पर झपट पड़ी जहाँ से लाला के लंड और उसकी माँ की चूत का मिलन हो रहा था….
अंदर से निकले पानी को उसने अच्छे से सॉफ किया और फिर लाला के पाइप नुमा लंड को मुँह में लेकर उसे चूस डाला…

लाला के लंड का पानी और अपनी माँ की चूत का रस मिलाकर करीब 50 MLथा, जिसे वो पी गयी और ज़ोर से डकार मारकर उसने ये भी दिखाया की वो उसे पच भी गया है…

लाला की हालत खराब हो गयी थी ऐसी चुदाई करके….
एक तो उम्र का तक़ाज़ा और उपर से माँ बेटी की जुगलबंदी,
ऐसे में थकान आना तो लाज़मी था…

इसलिए वो बेड पर कराहते हुए लेट गया…
दोनो माँ बेटियां उसके अगाल बगल आकर उससे लिपट गयी और उसे अपने-2 जिस्म की गर्मी का एहसास देने लगी.

रीतु ने तो कोशिश भी की कि लाला का लंड फिर से तैयार हो जाए, जो भी होना है आज ही हो जाना चाहिए, पर लाला भी जानता था की उसमें अब वो पहले जैसी बात नही रही जब वो दिन में 3-4 बार चुदाई कर लेता था…

इसलिए लाला कुछ देर तक सुस्ताया वहां पर और फिर अपने कपड़े पहन कर अपनी दुकान की तरफ निकल गया…

और पीछे छोड़ गया उन माँ बेटियो को जो उसके जाने के बाद भी नंगी ही पड़ी रही बिस्तरे पर…
लाला के लंड के बारे में सोचते हुए अपनी – 2 रसीली चूत में उँगलियाँ पेलती हुई.

अगले दिन रीतु और मीनू जब स्कूल में अपना लंच कर रही थी तो उन्होने दूर से आती हुई नाज़िया को देखा
उसकी चाल को देखकर ही समझ में आ रहा था की ये अब लंड ले चुकी है…
अपने दोनो कूल्हे दोनो तरफ निकाल कर मटकती हुई वो उन्ही की तरफ आई और अपना लंच बॉक्स खोलकर वही बैठ गयी..

दोनो को पता था की वो लाला के लंड से चुद चुकी है, पर फिर भी वो उसी के मुँह से सुनना चाहती थी..

मीनू : “बड़ी गांड मटका कर चल रही है री नाज़िया…लगता है लाला के लंड ने तेरी टांगे फेला दी है अच्छे से…”

अपनी बात कहकर वो रीतु की तरफ देखते हुए हँसने लगी…
रीतु ने भी उसका साथ दिया..

जिसे देखकर नाज़िया बोली : “हाँ हाँ हंस लो…इसमे कौनसी मज़ाक वाली बात है, मुझे तो इसमे मज़ा ही आया था, इसलिए मुझे इस बात का बुरा नही लग रहा…बुरा तो मुझे तुम्हारे लिए लग रहा है क्योंकि लाला पर तो तुम दोनो की पहले से नज़र थी और उसका लंड खाने को मुझे पहले मिला… हा हा”

उसकी बात सुनकर दोनो चुप हो गयी…
उनकी हँसी का जवाब अच्छे से दिया था नाज़िया ने..
और बात तो सही ही कह रही थी वो..
उनसे पहले ये कल की आई लौंडिया कैसे उनसे चुद गयी.

उसकी चुदाई की बाते जानने के लिए वो दोनो उत्सुक थी…
इसलिए रीतु अपनी ज़ुबान में थोड़ी मिठास लाते हुए बोली : “अरे , हम तो मज़ाक कर रहे थे पगली…वैसे भी तूने तो ले ही लिया है लाला के लंड को, इसमे हमारा भी तो फायदा है ना…”

नाज़िया रोटी खाते-2 रुक गयी और बोली : “फायदा …? तुम्हारा कैसा फायदा है इसमें ..”

इस बार मीनू ने मुस्कुराते हुए इस बात का जवाब दिया : “वो ये की तू हमे आज बताएगी की लाला के लंड को लेने में कैसा फील हुआ, मतलब कुछ तकलीफ़ हुई या आसानी से चला गया वो अंदर…”

ये बाते वो बोल तो रही थी पर ऐसा कहते हुए उसकी चूत में जो चिकनाई का निर्माण हो रहा था उसकी फीलिंग वही दोनो जानती थी…
हालाँकि एक बार फिर से लाला के लंड की चुदाई याद करके नाज़िया भी नीचे से भीग चुकी थी, पर उपर से दिखाकर वो उन्हे ये नही जताना चाहती थी की वो भी ये सुनकर उत्तेजित हो रही है..

वो बोली : “क्या तुम्हे लगता है की लाला का लंड इतनी आसानी से अंदर जाने वालों में से है…..पता है मेरे हाथ से कोहनी तक लंबा लंड था उसका, जब उसने मेरे अंदर डाला…हाय अल्लाह , उस पल को याद करके ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे है…साले ने बेरहमी से पेल दिया था पूरा अंदर, खून भी निकला था…..पर ससुरे को रहम ना आया, पूरा लंड पेलकर ही माना वो हरामी लाला…और वो भी मेरी माँ के सामने..”

ये सुनते ही उन दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा…
लाला ने ये बात तो उन्हे बताई ही नही की शबाना के सामने ही लाला ने उसकी बेटी पेल डाली थी…
साला सच में हरामी है..

और शायद ऐसा ही कुछ वो रीतु के साथ भी करेगा क्योंकि उसकी माँ सीमा को तो वो पहले ही चोद चुका था उसके सामने…
लाला की इस प्लानिंग के बारे में जानकार दोनो के जिस्म अंदर से धधक रहे थे…

रीतु तो जानती थी की उसकी माँ की तरफ से अब कोई रोकटोक नही होगी,
वो तो पहले से ही लाला के लंड की मुरीद बन चुकी है…
अब तो अगली बार लाला उसे ही चोदेगा और वो भी उसकी माँ सीमा के सामने..

वहीं दूसरी तरफ मीनू की हालत भी खराब हो रही थी…
नाज़िया चुद चुकी थी और रीतु भी चुदने को तैयार थी
ऐसे में उसका नंबर कब आएगा ये उसे भी नही पता था..
पर एक बात वो अच्छे से जानती थी की लाला को तो बस चूत चाहिए,
पहले किसकी मिलती है इस बात से उसे कोई फ़र्क नही पड़ता इसलिए उसके दिमाग़ में रीतु से पहले चुदने के प्लान बनने शुरू हो गये..

और अपनी प्लानिंग के बीच वो नाज़िया की बाते भी सुन रही थी जो चुदाई के वक़्त उसके बहुत काम आने वाली थी..

नाज़िया : “अंदर जाने में ही तकलीफ़ हुई बस, उसके बाद तो ऐसा लग रहा था की वो मोटा लंड भी कम है, अंदर के मज़े देने में …कसम से यार, ऐसा लग रहा था जैसे इस मज़े से बढ़कर कुछ और है ही नही दुनिया में , ऐसा नशा सा चढ़ रहा था पूरे जिस्म पर जैसे किसी ने जादू सा कर दिया हो…लाला का लंड मेरी बन्नो के अंदर जा रहा था और वो मेरे मुम्मो को चूस रहा था, काट रहा था…चाट रहा था…”

रीतु की आँखे लाल सुर्ख हो गयी ये सुनते –2 और वो हड़बड़ा कर बोली : “ब….बस…कर ….साली….. अपनी बातें सुना कर मेरी सलवार गीली करवा दी….अब क्लास में कैसे बैठूँगी…”

उसकी बात तो सही थी…
सलवार तो तीनो की गीली हो चुकी थी…
ऐसे में क्लास को बंक करना ही सही लगा उन्हे और वो तीनो चुपके से स्कूल के पीछे वाली टूटी हुई दीवार से निकल कर बाहर आ गयी…

और वहां से वो तीनो सीधा नाज़िया के घर गये जहाँ उसकी अम्मी शबाना घर का काम निपटाने में लगी थी…
उन तीनो को एक साथ देखकर वो बोली : “अर्रे, तुम तीनो स्कूल से भाग आई क्या…”

जिसके जवाब में तीनो एक साथ घूम गयी और अपना भीगा हुआ पिछवाड़ा उन्हे दिखा दिया, जिसे देखते ही वो समझ गयी की वो गीलापन किस चीज़ का है…
उन्होने तीनो को अंदर जाकर सॉफ करने को कहा और फिर से अपना काम करने लगी.

तीनो अल्हड़ चूते खिलखिलाती हुई सी अंदर की तरफ भाग गयी..

शबाना जानती थी की तीनो मे काफ़ी अच्छी दोस्ती है और शायद नाज़िया ने अपनी चुदाई की बाते सुनाकर ही उनका ये हाल किया है…
ये आजकल की लड़किया भी ना कुछ भी अपने पेट में नही रख सकती..

पर फिर उसने सोचा की इतने बड़े लंड को लेना कोई आसान काम थोड़े ही है…
उसका ज़िक्र अपने दोस्तो से करना तो बनता ही है..
शबाना ने उन्हे अंदर भेज तो दिया था पर वो जानती थी की वो आपस में मिलकर ज़रूर कोई गड़बड़ करेंगी…
उसके मन में उत्सुकतता सी बन गयी और अपना काम निपटाने के बाद वो दबे पाँव अंदर वाले कमरे की तरफ चल दी जहाँ वो तीनो गयी थी.

अपने कमरे में जाते ही नाज़िया ने तो बड़ी ही बेबाकी से अपनी सलवार निकाल कर एक कोने में उछाल दी…
नीचे जो कच्छी पहनी हुई थी वो भी भीग चुकी थी…
उसे भी जब उसने उतारा तो उसकी तराशि हुई चूत जो इस वक़्त एकदम लाल सुर्ख होकर दमक रही थी सबके सामने आ गयी…नंगी होकर वो बड़ी ही सैक्सी दिख रही थी

रीतु और मीनू ने भी एक दूसरे को देखा और अपनी-2 सलवारे निकाल दी…
उन दोनो ने उसे टेबल फैन के सामने फेला दिया ताकि वो उनके जाने से पहले सूख भी जाए..

और अंदर उन्होने नाज़िया की तरह कच्छी तो पहनी नही हुई थी इसलिए उन दोनो की भी चूत एकदम नंगी होकर नाज़िया के सामने उजागर हो गयी.

भले ही लंड से चुद चुकी थी नाज़िया, पर अपने सामने एक बार फिर से उन दोनो की चूत देखकर उसके मुँह में फिर से पानी आ गया और उसने अपने होंठो पर जीभ फेराते हुए रीतु की आँखो में देखा, वहां भी उसे वही प्यास दिखी जो इस वक़्त उसकी नज़रों में थी…
मीनू तो पहले से ही तैयार थी, इसलिए उसने उनकी आँखो का इशारा समझते हुए अपनी स्कूल की कमीज़ भी निकाल फेंकी..
अगले एक मिनट मे रीतु और नाज़िया ने भी वही किया और अब तीनो उस कमरे मे नंगी होकर खड़ी थी..

लाला के लंड के बारे में बाते कर-करके तीनो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की उन्होने एक पल भी नही लगाया और आपस में गले मिलते हुए, गुत्थम गुत्था करके तीनो एक दूसरे पर टूट पड़ी…
मीनू ने नाज़िया की भीगी चूत पर हमला किया तो रीतु ने उसके स्तनो पर…

नाज़िया ने भी अपनी उंगली रीतु की चूत में डालकर उसे हिला डाला,

पूरे कमरे में तीनो की सिसकारियां गूँज रही थी,
नाज़िया ने खुद को अपने बिस्तर पर गिरा दिया और रीतु को अपने चेहरे पर आने का न्योता दिया, जिसे उसने खुशी –2 स्वीकार कर लिया.

अपने चेहरे पर बिठाकर उसने रीतु की मिठाई की दुकान से सारी मिठाइयाँ निकालकर खानी शुरू कर दी…
हर बार जब वो अपनी जीभ उसकी चूत में घुसाकर अंदर से माल निकालती तो उसे अलग ही किस्म का स्वाद मिलता…

उसकी देखा देखी मीनू ने भी अपनी जीभ से नाज़िया की चूत को टटोलकर उसमें से मलाई चाटनी शुरू कर दी..

लाला के लंड से चुदने के बाद उसमे थोड़ा खुलापन आ चुका था जिसकी वजह से उसकी जीभ आसानी से अंदर बाहर हो रही थी,
लाला के लंड से चुदी चूत को चाटने में मीनू को एक अलग ही उत्तेजना का एहसास हो रहा था.

वो ये काम कर ही रहे थे की अपने सारे कपड़े निकालकर शबाना भी अंदर आ गयी…

अपनी अम्मी के आने का एहसास मिलते ही नाज़िया ने जब उनकी तरफ देखा तो उन्हे नंगा देखते ही वो समझ गयी की उनके मन का लालच ही उन्हें अंदर खींच लाया है …

पिछली बार भी जब उसने लाला के चले जाने के बाद अपनी अम्मी की चूत चाटी थी और अपनी भी चटवाई थी तो उसमे काफ़ी मज़ा मिला था , उसी मज़े को रीतु और मीनू की चूत के साथ लेने के लिए ही वो वहां आई थी इस वक़्त…

इसलिए उसने मुस्कुराते हुए उन्हे अपनी तरफ बुलाया..

शबाना आंटी को एकदम से कमरे में आया देखकर पहले तो रीतु और मीनू डर सी गयी पर उनके चेहरे पर आई हुई हवस को देखकर वो दोनो भी समझ गयी की ये उनकी बेटी के साथ पहली बार नही है..
और जब वो बेटी के साथ मज़े ले सकती है तो उन्हे बीच में मज़े लेने में क्या प्राब्लम हो सकती है…

इसलिए वो भी निश्चिंत होकर शबाना आंटी के साथ मज़े लेने लगे..

हालाँकि इन सबमे से किसी ने भी आज तक लेस्बियन सैक्स या उससे जुड़ी किसी भी बात के बारे में नही सुना था पर इस वक़्त जो काम ये सब मिलकर कर रही थी उससे तो एक अच्छी ख़ासी ब्लू फिल्म बनाई जा सकती थी…

खैर, ब्लू फिल्म तो बन ही रही थी वहां पर,
और शबाना के आने के बाद तो इस फिल्म में चार चाँद से लग गये थे,
क्योंकि उसने जब बेड पर आकर उन कुँवारी चुतों को चाटना शुरू किया तो तीनो किसी बकरी के मेमनों की तरह मिमियाती हुई चिल्लाने लगी क्योंकि अपने अनुभव का उपयोग करके शबाना उनके कच्चे जिस्मो के उन अंगो से खेल रही थी जिससे वो खुद आज तक अंजान थे…

तीनो एक दूसरे के पीछे लाइन बनाकर बकरी बन गए और एक दूसरे की चूत चाटने लगे

कमरे में चूत से निकले पानी की महक फेली हुई थी….

सभी ने जी भरकर एक दूसरे की चूत को चूसा भी और तब तक चाटा भी जब तक उसमे से निकले पानी को उन्होने सूखा नही दिया…

आज की इस छूट चुसाई ने उन सबके दिलो में कभी ना बुझने वाली प्यास को और भी बड़ा दिया था….
जो अब लाला के लंड से ही बुझने वाली थी..

सभी के दिमाग़ में लाला के लंड की ही तस्वीर घूम रही थी..

पर इन सबमे से अगली बार लाला के लंड से चुदने का सौभाग्य किसे मिलेगा ये उनमें से कोई भी नही जानता था…

या शायद जानता था…..

रीतु और मीनू जब वहां से निकल कर अपने घर की तरफ जा रहे थे तो उन दोनो के मन में यही उथल पुथल मची हुई थी की उनके सामने आई इस नाज़िया की बच्ची ने उनसे पहले बाजी मारकर लाला के लंड का मज़ा ले लिया है ..

हालाँकि बीच में तो रीतु की माँ सीमा भी आई थी जो मज़े लेकर अगली चुदाई का इंतजार कर रही थी पर वो तो उसकी सग़ी माँ थी ना, उनका तो बनता है…
पर ऐसे चिंचपोक्ली टाइप के लोग भी बीच में आकर उनसे पहले मज़े लेकर निकल जाए तो उनकी जवानी के ये रसीले दिन तो बेकार जाते चले जाएँगे..

और अंदर ही अंदर रीतु ये भी जानती थी की मीनू की चूत भी उतनी ही कुलबुला रही है जितनी की उसकी…
तभी तो वो स्कूल से छुट्टी करके लाला की दुकान पर जा पहुँची थी…
वो तो लाला का मूड नही था वरना अब तक वो इसे भी चोद ही चुका होता…

अपने अंदर के डर पर काबू करके बड़ी मुश्किल से लाला के मोटे लंड को लेने की हिम्मत कर पाई थी रीतु…
और जब से वो हिम्मत की थी तब से मौका ही नही मिल पा रहा था चुदने का..

अब वो मौका मीनू को मिलता है या उसे खुद को, ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा…

पर इस चुदाई के बीच वो अपनी दोस्ती को नही लाना चाहती थी,
इसलिए उसने मीनू से खुल कर बात करना ही उचित समझा.

रीतु : “यार मीनू ..अब तो अंदर की खुजली इतनी बढ़ चुकी है की बिना लंड के मज़ा भी नही आता… एक दूसरे की चूत चाट कर कब तक मज़े लेते रहेंगे…”

मीनू : “हाँ यार…अब तो बहुत हो गया…ये लाला पता नही इतना क्यो तरसा रहा है हम दोनो को…आज इसका फ़ैसला कर ही लेते है उसके पास जाकर..”

रीतु :”वो तो हम कर ही लेंगे..पर उससे पहले हम दोनो को ये फ़ैसला करना पड़ेगा की हम दोनो में से पहले कौन चुदाई करवाएगा लाला से…”

मीनू भी जानती थी की उसकी तरह रीतु भी पहले चुदना चाहती है लाला से, इसलिए ये बात बोल रही है…

मीनू : “तो इसके लिए तुम्हारे पास कोई तरीका है क्या…?? की कौन पहले चुदेगा लाला से…”

रीतु तब तक इस बात जा जवाब अपने दिमाग़ में सोच ही चुकी थी…
और उस हिसाब से चला जाए तो उनकी दोस्ती पर इस चुदाई का असर नही पड़ने वाला था..

रीतु : “देख मीनू ..मैं नही चाहती की इस छोटी सी बात के लिए हम दोनो की दोस्ती में दरार आए…इसलिए मेरे दिमाग़ में एक प्लान है…अगर तू मान जाए तो हम दोनो को मज़े मिल सकते है…”

मीनू एकदम से गंभीर हो गयी..
वो भी जानती थी की लाला के लंड से चुदने के लिए उसके मन में पहले भी कपट आ चुका था…
ऐसे में उनकी दोस्ती को बचाने वाले इस प्लान को सुनना तो बनता ही था..

रीतु : “तुझे याद है, लाला के हमारी लाइफ में आने से पहले हम दोनो अक्सर किसके बारे में सोचकर ये सब चूसम-चुसाई किया करते थे…”

उसकी ये बात सुनते ही मीनू चोंक गयी…
क्योंकि यहाँ उसके भाई रामू की बातें हो रही थी…

वही भाई जिसके उपर रीतु की कब से नज़र थी, और वो उसे सिर्फ़ देखने भर के लिए दिन में 5-6 चक्कर मीनू के घर के लगा लिया करती थी…
और उसी के बारे में सोचकर वो अक्सर उत्तेजित भी हो जाय करती थी
और ऐसी ही उत्तेजना से भरे एक दिन रीतु ने मीनू को चूम लिया था…
उस चुम्मे का एहसास ही इतना रसीला था की दोनो उस नशे में डूबते चले गये और कपडे एक दूसरे के नंगे जिस्मों को प्यार करना शुरू कर दिया था…

उस दिन के बाद वो दोनो अक्सर उस तरह से मिला करते थे…
मीनू के घर में, उसके उपर वाले कमरे में दोनो घंटो एक दूसरे के नंगे जिस्म को मसलते, चूत चाटते और तब तक चाटते जब तक वो झड़ नही जाते…

उस समय भी रीतु की उत्तेजना का केंद्र मीनू का भाई रामू ही रहता था…
वो उसके गठीले जिस्म के बारे में बात करके , उसके लंबे लंड की कल्पना करके बदहवासी वाली हालत में उससे चुदने की बातें किया करती थी….
और उसके सामने नंगी लेटी हुई मीनू भला कब तक इस बात से अछूती रहती और एक दिन अपने जवान भाई के जिस्म और लंड की बाते सुनकर उसने भी अपने दिल का गुबार निकाल ही दिया और अपने दिल की छुपी हुई बात उजागर कर दी की वो भी अपने भाई को उतना ही चाहती है जितना की रीतु..

और उसके बाद वो दोनो अक्सर मीनू के भाई का लंड लेने की बातें करते हुए साथ में झड़ा करती थी..

पर उन दोनो में से किसी की भी हिम्मत नही थी रामू से सीधी बात करने की क्योंकि वो काफ़ी ग़ुस्सेल किस्म का बंदा था इसलिए सिर्फ उसका नाम ही उनके लिए उत्तेजना को बढ़ाकर अपने जिस्मों को शांत करने का एकमात्र साधन था.

रामू अपने में ही मस्त रहता था..
अपने पिताजी के देहांत के बाद वो कड़ी मेहनत से , अपनी माँ के साथ मिलकर पूरा दिन खेतो में काम करता ताकि उसकी बहन को पढ़ाई या उनके खान पान में कोई दिक्कत न आये

गुस्से वाला तो वो था ही, और एक दिन रामू के गुस्से का कहर उन दोनो पर टूट ही पड़ा जब उसने दोनो को कमरे में बंद पाकर मीनू के कमरे का दरवाजा पीटना शुरू कर दिया…

अपनी माँ और भाई के घर में होते हुए उन्होने रिस्क तो ले लिया और जब भावनाओ में बहकर दोनो ने दरवाजा बंद करके एक दूसरे के नंगे जिस्मो को चाटना शुरू किया तो रामू को उनपर शक हो गया की वो दोनो छुपकर कहीं कोई नशा वगैरह तो नही करते…
इसलिए वो ऊपर आया और उसने बेतहाशा दरवाजा पीटना शुरू कर दिया…
हड़बड़ाहट में दोनो ने किसी तरह से अपने-2 कपड़े पहने और दरवाजा खोला …
रामू ने पूरा कमरा छान मारा पर उसे ऐसी कोई आपत्तिजनक वस्तु नही दिखाई दी… हालाँकि उसने जमीन पर पड़ी मीनू की गीली कच्छी देख ली पर गाँव में रहकर ऐसी हरकत उसकी बहन करेगी इसका उसे विश्वास नहीं था , इसलिए उसका गुस्सा उस वक़्त शांत हो गया , पर आगे से दरवाजा खुला रखकर ही बैठने की हिदायत दी उसने उन दोनों को.

और तब से ही मीनू की माँ को भी रीतु एक आँख नही सुहाती थी…
रीतु ने भी उनके सामने मीनू के घर जाना बंद कर दिया…
पर उनके बीच के जिस्मानी प्यार का सिलसिला वैसे ही चलता रहा …
छुप-छुपकर ही सही वो एक दूसरे की चूत का मज़ा ले ही लिया करती थी…

और उन्ही दिनों लाला की ठरकी नज़रों को पहचान कर दोनो ने उससे मज़े लेने शुरू कर दिए…
और इस तरह से धीरे-2 उनकी हवस का केंद्र रामू से हट कर लाला की तरफ हो गया…
और तब से दोनो ने पीछे मुड़कर देखा ही नही..
उसका कारण ये भी था की लाला हमेशा उन्हे देखकर लार टपकाता था और अपनी लच्छेदार बातो से उन्हे अपने जाल में फँसाने के लिए मीठा बोलता रहता था..
और तब से वो जान बूझकर ही सही, लाला के जाल में फँसती चली गयी..

और आज रीतु ने जब एक बार फिर से रामू भाई की बात की तो मीनू की समझ में आ गया की उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है..

रीतु ने खुद ही सॉफ-2 बोल दिया : “देख मीनू ..हम दोनो में से लाला पहले किसे चोदेगा और किसे नही ये हम दोनो को ही डिसाईड करना होगा…और इसके लिए हमे रामू भैय्या को बीच में लाना होगा, ताकि एक जब लाला से चुदे तो दूसरी को उतनी तकलीफ़ या पछतावा ना हो जितना होनी चाहिए…”

मीनू : “यानी, तू चाहती है की मैं लाला से चुद जाऊं और तू रामू भाई के साथ मज़े ले लेगी…ये तो बिल्कुल पर्फेक्ट रहेगा…यही करते है.”

रीतु : “ज़्यादा सयानी ना बन….जितनी खुजली तेरी चूत में हो रही है लाला से पहले चुदने की उतनी ही मेरी चूत में भी है…इसलिए ये तो भूल जा की लाला तुझे इतनी आसानी से मिल जाएगा…”

मीनू का दिमाग़ घूम गया ये सुनकर…
यानी उसके दिमाग़ में कुछ अलग ही पक रहा था.

रीतु : “देख..उन दिनों जितना मैं रामू के बारे में बाते करते हुए तेरी चूत मसलती थी उतना ही तू भी अपने भाई के बारे में सोचकर मेरी चूत चाटा करती थी…है ना..”

मीनू ने हाँ में सिर हिलाया

रीतु : “तो इसलिए हम दोनो टॉस करेंगे…और जीतने वाले को लाला से चुदने का पहला मौका मिलेगा और हारने वाला रामू से चुदवा लेगा…”

मीनू का दिमाग़ ही घूम गया…
अपने भाई के बारे में सोचकर अपनी सहेली की चूत चाटना अलग बात थी…
पर उससे सच में चुदाई करवाना अलग बात थी…
ऐसा तो वो सोच ही नही सकती थी.

रीतु : “क्या सोच रही है…यही ना की अगर तू टॉस हार गयी तो अपने भाई के साथ तू वो कैसे करेगी..उपर से वो इतना खड़ूस टाइप का है…बात-2 पर गुस्सा भी करता है….पर मेरी जान, है तो वो एक मर्द ही ना…जवान जिस्म तो उसे भी पसंद आएगा…और ये भी तो हो सकता है की तू टॉस जीत जाए और लाला से चुदने का मौका पहले तुझे मिल जाए…और सच कहूं , ऐसे में तेरा भाई अगर दूसरे विकल्प के तौर पर मिलेगा तो मुझे उतनी तकलीफ़ नही होगी जितना की होने वाली थी…आख़िर वो भी एक बांका मर्द है…उपर से जवान भी…और मेरी पहली चाहत भी , दोनो ही सूरत में लाला से चुदने का मौका तो बाद में तुझे भी मिल ही जाएगा और मुझे भी…”

रीतु अपने दिमाग़ में सारी केल्कुलेशन कर चुकी थी…
यानी दोनो ही सूरत में दोनो के हाथ कुछ ना कुछ आने ही वाला था..

एक पल के लिए तो मीनू ने सोचा की बेकार में अपने भाई को बीच में लाने का कोई मतलब नही बनता, रीतु को ही लाला से पहले चुदने का मौका दे देना चाहिए…बाद में उसका भी नंबर आ ही जाएगा..

पर अंदर ही अंदर उसका मन रामू का नाम सुनकर ललचा भी रहा था…
ये सच था की वो काफ़ी गुस्से वाला था और थोड़ा खड़ूस भी था,
उसके साथ भी वो सीधे मुँह बात नही करता था पर जब से रीतु के साथ नंगे होकर उसके बारे में बाते करनी शुरू की थी तब से ही एक अलग ही स्थान बन चुका था अपने भाई के लिए उसके दिल में …
हालाँकि ये ग़लत था पर इस बात पर उसका कोई बस नही चलता था..

इसलिए उसने अनमने मन से बात मानने का बहाना करते हुए हां कर दी…
रीतु भी यही चाहती थी क्योंकि अंदर ही अंदर रामू के लंड से चुदने की भूख उसमे भी थी…
ऐसे में उसका नंबर पहले आये या बाद में, आएगा जरूर ।

और रीतु ने ये भी सॉफ कर दिया की कोई भी जीते, रामू से चुदाई करवाने में वो दोनो एक दूसरे की मदद करेंगी..
और वो उसने इसलिए कहा ताकि मीनू के बाद रामू उसे भी चोद सके या फिर उसकी चुदाई के बाद मीनू का भाई अपनी बहन की भी चूत बजाए ताकि उसका जो ख़ौफ़ है , वो उनपर हावी ना रहे बाद में.

दोनो ने सब क्लियर कर लिया और फिर मीनू ने अपने पर्स से एक रुपय का सिक्का निकाल कर टॉस की…
रीतु ने हेड माँगा और हेड ही आया…
यानी वो जीत गयी थी और अब लाला के लंड से चुदने का मौका पहले उसे मिला था…
और मीनू को अब अपने भाई रामू से अपनी सील खुलवानी पड़ेगी..

दोनो के मन में अलग-2 तरह की कल्पनाओ के जहाज़ उड़ने लगे…

एक तरफ रीतु लाला से अपनी चूत का उद्घाटन करवाने के ख़याल से खुश हो रही थी और दूसरी तरफ मीनू भी अपने भाई के लंड को अपने अंदर लेने की कल्पना मात्र से गीली हुई जा रही थी…

दोनो को ही पता था की बाद उनके पार्ट्नर्स चेंज भी होंगे…
ऐसे में लाला से चुदने का मौका मीनू को भी मिलेगा और रीतु भी रामू के लंड से चुदाई करवाकर अपनी कच्ची जवानी के पहले प्यार को पा सकेगी..

पर अब मुद्दा ये था की पहले कौन चुदने के लिए जाएगा…
क्योंकि ये तो पहले ही तय हो चुका था की दोनो में से कोई भी चुदाई के लिए तैयार हो, एक दूसरे का साथ वो दोनो देंगी…

इसलिए एक बार फिर से टॉस हुआ, ये जानने के लिए की पहले रीतु लाला के पास जाए या मीनू अपनी भाई के पास…

और इस बार मीनू जीती…
यानी रीतु को मीनू की हेल्प करनी थी अब, उसे अपने भाई से चुदवाने में …
और बाद में उसे लाला से अपनी चूत मरवानी थी..

लाला से चुदाई करवाने का समय बढ़ता जा रहा था…
लेकिन इस नए एंगल यानी रामू के आने से दोनो के मन सावन के मोर की तरह नाच रहे थे…
एक नयी उत्तेजना का संचार हो चुका था दोनो की सोच में …
जो अब चुदाई तक जाकर ही रुकनी थी.

घर पहुँच कर दोनो ने रामू को पटाने के उपाय सोचने शुरू कर दिए…
और वो उपाय इतने रोमांचक और उत्तेजक थे की उन्हे सोचने मात्र से ही दोनो की चूत गीली होती चली गयी और कुछ ही देर में दोनो एकदम नंगी होकर एक दूसरे के बदन को चूम-चाट रही थी..

रीतु ने अपनी 2 उंगलियाँ एक साथ मीनू की कच्ची फांको के बीच घुसा दी..

मीनू : “आआआआआआआआअहह……. भेंन की लौड़ी …… उम्म्म्मममममममम…. धीरेरए कर……. अपनी उंगली से ही फाड़ डालेगी क्या मेरी चूत की झिल्ली…..”

रीतु ने उसके मुम्मो को चूसते हुए अपनी उंगली की रफ़्तार तेज कर दी और सिसकारी मारकर बोली : “साली कुतिया ……तेरी ये चूत तो अपने भाई के लंड को लेने की कल्पना मात्र से ही इतनी गीली हुई पड़ी है….ऐसी तो लाला का नाम सुनकर भी नहीं हुई थी आजतक….. लगता है तेरी चूत भी यही चाहती है की तेरे भाई का लंड जल्द से जल्द इसके अंदर घुस जाए….”

मीनू : “अहह…….. बस कर यार……. रामू भाई के लंड के बारे में बोलकर तूने पहले से ही मुझे इतना गीला कर दिया है….आज तो इस कमरे में बाढ़ आकर रहेगी…”

और उसके झड़ने की आशंका मात्र से ही रीतु ने अपनी चूत का मुंह उसकी गीली चूत पर लगा कर उसे रगड़ना शुरू कर दिया, जैसे सच में रामू उसकी चूत मार रहा ह

और अगले ही पल उसकी चूत से बिना किसी आवाज़ के एक तेज धार निकल कर , अपना बाँध तोड़ती हुई बाहर निकल आयी और रीतु की चूत रंगहीन पानी से सन कर रह गयी …

मीनू का पूरा शरीर अकड़ गया : “अहह……. रामू…….. डाल दे भाई….मेरी चूत में अपना लौड़ा ….अहह…..”

उसके झड़ने की हालत देखकर ही रीतु को अंदाज़ा हो रहा था की रामू का लंड लेते हुए इसका क्या हाल होने वाला है…

उसने उसकी चूत में जीभ ड़ालकर उसका सारा रस चाट लिया

अब तो उन्हे बस अपने बनाए प्लान पर अमल करना था जिसमे फंसकर उस खड़ूस रामू को अपनी बहन की चुदाई करनी ही पड़ेगी…

अब रामू की बात कहानी में आई है तो उसके बारे में कुछ बातें बता देता हूँ आपको..
अपने पिता की अचानक मौत से घर की सारी ज़िम्मेदारी रामू के कंधो पर आ पड़ी थी…
हालाँकि उसमें उसकी माँ ने भी उसका सहयोग किया था पर घर का मर्द होने के नाते रामू को भी अपनी ज़िम्मेदारियों का अच्छे से एहसास था…
जब तक पिता का साया उसके सर पर था उसे कमाई करने और खेतों के बारे में सोचने की कोई चिंता ही नही थी…
अपने कसरती बदन की वजह से वो पूरे गाँव की लड़कियो में फेमस था…

पर उसका दिल अपनी बहन मीनल की सहेली बिजली पर आया हुआ था…
उसके साथ प्यार की पींगे बढ़नी शुरू ही हुई थी की रामू के पिता का देहांत हो गया और बाद में बिजली के बदन की आग जो रामू ने जलाई थी, उसे लाला ने अपने लंड के पानी से बुझाया था.

अपने खेतो और काम के अंदर रामू इतना डूबा की उसे अब किसी और बात को सोचने – समझने की फ़ुर्सत हि नहीं थी…
अपनी जवान हो रही बहन और विधवा माँ का उसे सहारा बनना था इसलिए उसके मिज़ाज में भी प्यार की जगह कड़वाहट ने ले ली…तभी रीतु और मीनू उसे खड़ूस कहा करती थी.

पर एक मर्द तो आख़िर मर्द ही होता है ना..
इसलिए रामू को भी उसका लंड बात-बेबात परेशान करता ही रहता था.

और उसे पूरा दिन अपनी माँ के साथ खेतो में रहना पड़ता था इसलिए उसका दिल ना चाहते हुए भी अपनी माँ की तरफ आकर्षित होता चला गया…
और आज आलम ये था की खेतों में काम करते हुए वो अपनी माँ के मांसल शरीर को वो चोर नज़रों से देखकर अपनी आँखे सेका करता था.

रामू की माँ गोरी की उम्र करीब 42 की थी…
3 बच्चो के बाद भी उसका बदन एकदम कड़क था..
कारण था खेतो में मेहनत भरे काम करना, जो वो अपने पति के साथ भी किया करती थी.
और पति की मृत्यु के बाद तो उसके हरे भरे बदन को चखने वाला भी कोई नही था,
ऐसे में उस कड़क जिस्म की महक जब रामू तक गयी तो वो अपनी सग़ी माँ के प्रति आकर्षित होने से खुद को नही बचा पाया..
और अक्सर सोते हुए, नहाते हुए या फिर कभी-2 तो खेतो में काम करते हुए भी वो अपने लंड को रगड़ता रहता था.

आज भी कुछ ऐसा ही हो रहा था…
खेतों में उसकी माँ गोरी काम कर रही थी और दूर पेड़ के पीछे , पेशाब करने के बहाने गया हुआ रामू, अपनी माँ को झुके देखकर, उनकी निकली हुई गांड पर उसकी नजरें थी जिसे देखकर वो मुट्ठ मार रहा था…

”आआआआआहह माआआआआआअ……. क्या गांड है रे तेरी माँsssssss…. उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ……. मन तो कर रहा है की तेरी साड़ी उठा कर अपना लंड पेल दूँ अंदर….. आअह्ह्ह….. क्या रसीले चूतड़ है तेरे माँ …..अपनी जीभ अंदर डालकर सारी मलाई खा जाऊंगा मैं तेरी…..साली कुत्तिया बना कर चोदुँगा इसी खेत में”

अपने लंड को जोरो से पीटते हुए रामू बदहवासी में अपनी माँ के रसीले बदन को देखकर गालियां बक रहा था

और अचानक उसकी माँ ने पलट कर उसकी तरफ देखा और ज़ोर से आवाज़ लगाकर बोली : “रामू…ओ रामू….अब आ भी जेया जल्दी…. कितना टेम लगता है तूझे पेसाब करन में …खाने का टेम भी हो रहा है…”

वो तो गनीमत थी की रामू काफ़ी दूर था, वरना वो अपना लंड हिलाता हुआ सॉफ दिख जाता उन्हे…

पर वो भी बड़ा कमीना था,
अपनी माँ को अपनी तरफ देखते पाकर उसके हाथो की गति और तेज हो गयी…
और एक गंदी सी गाली और देते हुए उसके लंड ने ढेर सारा पानी उस पेड़ के मोटे तने पर फेंकना शुरू कर दिया…

”आआआआहह….भेंन की लोड़ी ……तेरी चूत में डालूँगा इस लोड़े का पानी एक दिन….फाड़ डालूँगा तेरी चूत को मैं मांमाआआआआअ….”

और शांत होने के बाद उसने अपने लंड को धोती में वापिस घुसाया और वापिस अपनी माँ की तरफ आ गया और उन्हे पानी से हाथ धुलवाने के लिए कहा…..

और हाथ धुलवाते हुए जैसे ही गोरी की नज़र अपने बेटे के हाथ पर पड़ी, उसके दिल की धड़कन रुक सी गयी…
रामू के हाथ पर उसके लंड से निकले गाड़े रस की एक लकीर खींची रह गयी थी…
जिसे शायद रामू ने भी नही देखा था…
वो तो अपनी मुट्ठ मारकर बड़ी शान से वापिस आया और माँ के मोटे मुम्मो को देखते हुए हाथ धुलवाने लगा..

गोरी का शरीर पहले ही वो सब देखकर काँप रहा था,
हाथ धुलवाने के बाद जब उसने नज़रे उठाकर रामू की तरफ देखा तो उसे अपनी छाती की तरफ घूरते हुए पाया,
धूप में काम करने की वजह से उसका ब्लाउस पूरा गीला हो चुका था, वैसे भी वो उपर के 1-2 हुक खोलकर रखती थी ताकि हवा अंदर जाती रहे…
और उसी वजह से रामू उन तरबूजो को देखकर अपनी लार टपका रहा था…

ये देखकर गोरी का माथा ठनका …
और उसने गुस्से से भरकर रामू से कहा : “कहाँ ध्यान है रे तेरा….चल हाथ धूल गये है, खाना खा ले..”

रामू का चेहरा एकदम से पीला पड़ गया…
आज पहली बार उसकी माँ ने उसकी चोरी पकड़ी थी..
और अभी तो उसे ये नही पता था की उसकी माँ ने उसके हाथ पर लगा वीर्य भी देख लिया है
वरना एक साथ 2 चोरी पकड़े जाने का बोझ पता नही वो कैसे सह पाता.

अब गोरी भी थोड़ी सतर्क होकर बैठी थी अपने बेटे के सामने…
उसने अपने ब्लाउज़ के दोनो हुक बंद कर लिए ताकि जो अपनी तरफ से अंग प्रदर्शन वो कर रही थी वो तो बंद हो ही जाए…

पर मन ही मन वो इस घटना को देखकर ये सोचने पर ज़रूर मजबूर हो गयी थी की आख़िर उसका सागा बेटा उसे उस नज़र से क्यो देख रहा था…
और उसके हाथ पर लगे उस वीर्य को देखकर वो ये भी समझ ही चुकी थी की इतनी देर तक पेशाब के बहाने वो मुट्ठ ही मार रहा था…
और ये काम तो वो लगभग 2-3 बार करता था दिन में..
यानी हर बार वो जब भी मूतने जाता था तो मुट्ठ मारकर ही आता था वापिस.

हे भगवान…
इन जवान लोंडो में कितनी एनर्जी भरी होती है….
पूरा अपने बाप पर ही गया है ये भी…
वो भी शादी के बाद एक दिन में कम से कम 2 बार तो उसकी चुदाई कर ही दिया करते थे…
कई बार तो अपने खेतों में ही चुदी थी वो अपने पति के लंड से
फिर जैसे-2 बच्चे होते गये उनकी चुदाई का फासला बढ़ता चला गया..
और फिर एक दिन उसके पति जब उन्हे छोड़कर चले गये तो वो सब बंद ही हो गया…
उसने भी अपने बच्चों की खातिर अपनी जवानी की परवाह किए बिना अपना जीवन उनके लिए समर्पित कर दिया…
हालाँकि इस बीच एक दो बार उस ठरकी लाला ने उसपर भी डोरे डालने की कोशिश की थी पर उसका रूखा रवेय्या देखकर लाला ने भी फिर कोई कोशिश नही की…
लाला का सिंपल फंडा था, आती है तो आ वरना अपनी माँ चूदा ।
उसके पास गाँव की कमसिन चुतों की कोई कमी थी भला जो वो 3 बच्चों की माँ पर अपना टेलेंट जाया करता.

और ये सब सोचते-2 उसे जब ये एहसास हुआ की आज भी उसके बदन में किसी को आकर्षित करने की क्षमता है तो उसका दिल पुलकित हो उठा…
पूरा दिन मिट्टी में काम करने के बाद उसकी हालत किसी भूतनी जैसी हो जाती थी…
घर जाकर नहाती, बच्चों के लिए खाना बनाती और गहरी नींद में सो जाती…
यही दिनचर्या रह गयी थी उसकी…
ऐसे में अपनी तरफ आई अपने ही बेटे की इस नज़र ने उसके अंदर एक कोहराम सा मचा दिया था.

खाना खाते हुए वो रामू को देख रही थी और ना चाहते हुए भी उसकी नज़रे उसकी धोती की तरफ चली गयी और ज़मीन पर बैठने की वजह से उसके लंड का एक हिस्सा भी उसे दिखाई दे गया…
उसने तुरंत अपनी नज़रे फेर ली..
अपने बेटे को ऐसी नज़रो से देखने में उसे आत्मग्लानि का एहसास हो रहा था.

वहीं दूसरी तरफ रामू भी अपनी माँ के चेहरे को देखकर ये जानने की कोशिश कर रहा था की उनके मन में क्या चल रहा है..
पर अपनी माँ की डांट से उसे ये एहसास ज़रूर हो गया की आगे से उसे सतर्क रहना पड़ेगा..

उसके बाद उसने इस तरह की कोई हरकत नही की और हमेशा की तरह सांझ होते-2 दोनो माँ बेटा घर की तरफ चल दिए.

रामू के पास एक साइकिल थी, जिसपर बैठकर वो आया-जाया करते थे
अब उनके घर जाने के इस साधन में भी रामू की एक चाल थी…
वो अपनी माँ को पीछे बैठाकर खेतो में ले जाया करता था…
और जब से उसके मन में अपनी माँ के लिए कपट आया था , तब से उसने उनके मस्त बदन को छूने के नये-2 बहाने ढूँढने शुरू कर दिए थे…
इसलिए उसने बड़ी चालाकी से पीछे बैठने के केरियर को तोड़ दिया, जिसकी वजह से उसकी माँ को साइकल के आगे वाले डंडे पर बैठना पड़ता था…
भरा हुआ शरीर था इसलिए वो फँस कर आती थी आगे की तरफ और साइकल चलाते हुए रामू की दोनो टांगे उपर नीचे होती हुई अपनी माँ के मांसल जिस्म से रगड़ खाया करती थी…
और सबसे ज़्यादा मज़े तो उसके लंड के थे जो अपनी माँ की कमर के ठीक पीछे चिपक कर उसके गुदाजपन के मज़े लिया करता था…
और घर जाते-2 रामू के लंड की हालत ऐसी हो जाती थी जैसे उसने धोती में कोई रॉकेट छुपा रखा हो…
उपर से रामू अपनी माँ के ब्लाउज़ में झाँककर उन हिलते हुए मुम्मो को देखकर भी मज़ा लिया करता था.

पर आज गोरी को आगे बैठने में थोड़ी सकुचाहत हो रही थी लेकिन कोई और चारा भी नही था…
इसलिए वो बैठी और वो दोनो घर की तरफ चल दिए…
रास्ते भर वही होता रहा जो रोज हुआ करता था…
पर आज गोरी की अपने बेटे की हरकतों पर कड़ी नज़र थी…
इसलिए आधे रास्ते बाद जब उसकी कमर पर उसे रामू के लंड की चुभन महसूस हुई तो उसका शक यकीन में बदल गया की उसका बेटा उसके बदन का दीवाना है.

घर पहुँचकर वो सीधा अपने कमरे में गयी और अपने कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस कर नहाने लगी…
नहाते हुए उसके जहन में रामू की सारी हरकतें चलचित्र की भाँति चल रही थी…
उसे दिख रहा था की कैसे वो पेड़ के नीचे खड़ा होकर मुट्ठ मार रहा है और खेतो में काम करते हुए उसके बदन को अपनी भूखी नज़रो से देख रहा है…
साइकल पर बैठकर उपर से उसके हिलते हुए मुम्मे देख रहा है.

उफफफफ्फ़…..
वो फिर से अपने बेटे के बारे में गंदे विचार ले आई थी…
सुबह तो उसने सोचा था की ऐसी कोई भी बात अपने मन में नही लाएगी और ज़रूरत पड़ी तो रामू को भी कठोर शब्दो से समझा देगी की अपनी माँ के प्रति ऐसी भावना रखना सही नही है…

पर ये भी तो हो सकता है की वो सारा उसका वहम हो…
हो सकता है की वो किसी और के बारे में सोचकर ये सब करता हो और अपनी माँ को उस नज़र से देखना संयोग मात्र ही हो.

उसने मन में सोचा की काश ऐसा ही हो, यही उन माँ बेटे के संबंधो के लिए सही रहेगा..

उधर रामू बाहर खाट पर बैठा अपनी माँ के ही विचारो में खोया हुआ था की उसकी बहन मीनू अंदर आई…

उस भोले को भला क्या पता था की आज उसकी बहन के मन में उसके लिए क्या चल रहा है…
करीब 2 घंटे तक रीतु के घर बैठकर उसने अपने भाई को आकर्षित करने के नये-2 तरीके ईजाद किए थे…
और वो इतने उत्तेजक थे की उन्हे सोचकर ही उसकी चूत में पानी भर आया था…
उन्हे जब वो अमल करेगी तो उसका क्या हाल होने वाला था ये तो सिर्फ़ वही जानती थी…
पर आज से वो इस जंग का आगाज़ ज़रूर कर देना चाहती थी.

इसलिए वो लंगड़ाती हुई सी घर पर आई, ये लंगड़ाना उसकी चाल का एक हिस्सा था.

रामू ने जब उसे ऐसे चलते हुए देखा तो वो घबरा कर उसके करीब आया और उसे अपनी बाँहों का सहारा देकर अंदर ले आया…

रामू : “अर्रे…ये क्या हुआ मीनू ..कहीं चोट लगी है क्या…कैसे हुआ ये ….”

उसके चेहरे पर आई उसके लिए घबराहट सॉफ देखी जा सकती थी…
वो अपनी बहन से बहुत प्यार करता था…
इसका एहसास मीनू को भी था.

मीनू : “कुछ नही भैय्या ..वो रीतु के घर से आते हुए पैर मुड़ गया एक गड्डे में जाकर….हाय …सही से चला भी नही जा रहा ….”

रामू ने उसे लाकर खटिया पर बिठाया और नीचे झुककर उसके पैर का मुआयना करने लगा…
उसने एक घाघरा पहना हुआ था, जिसे उपर करते ही उसकी गोरी पिंडलियाँ उसके सामने आ गयी जो एकदम भर चुकी थी…
रामू भी उसकी भरी हुई टांगे देखकर हैरान था की कब और कैसे उसकी छोटी बहन इतनी बड़ी हो गयी है…
उसकी पिंडलियाँ ऐसी है तो उसकी जांघे कैसी होगी….
शायद माँ जैसी मांसल होंगी वो भी…
या हो ही जाएँगी..
आख़िर है तो उन्ही की बेटी ना.

यानी अपनी बहन के माध्यम से भी वो अपनी माँ को ही इमेजीन कर रहा था…
और अभी तक अपनी बहन के लिए उसके मन में कोई बुरा विचार नही था…
और इन विचारो को मीनू जल्द ही बदलने वाली थी.

रामू ने उसकी पिंडली को अच्छे से देखा पर उसे कुछ ख़ास दिखाई नही दिया…
कुछ हुआ होता तो दिखता ना…
मीनू ने उसे अंदरूनी मोच कहकर अंदर दर्द होने का बहाना बनाया…
रामू ने जब कहा की वो उसे डॉक्टर के पास ले चलता है तो वो एकदम से बोली : “नही नही…डॉक्टर के पास नही…उसे तो कुछ नही आता…बस हर बात पर पिछवाड़े पर सुई लगा देता है….”

रामू उसकी बच्चो वाली बात सुनकर हंस दिया…
और बोला : “अब तू बड़ी हो गयी है मीनू ..अब तेरे पिछवाड़े पर नही बल्कि हाथ में लगेगी सुई…और ये मोच है कोई चोट नही जो तुझे टीका लगाना पड़े डॉक्टर को…कोई गोली दे देगा तो दर्द में आराम आ जाएगा ना…”

मीनू अपने चेहरे पर क्यूट सी स्माइल लाते हुए बोली : “ना भाई ना….मुझे नही जाना डॉक्टर के पास और ना ही कोई गोली खानी है…बस रात को मालिश करवा लूँगी, वही बहुत है…कल तक ठीक हो जानी है …”

तब तक उनकी माँ गोरी भी नहा धोकर आ गयी…
रामू को अपनी बहन के पैरो में बैठा देखकर वो भी चिंतित हो गयी…
रामू ने उन्हे सारी बात सुना डाली…माँ ने भी डॉक्टर के पास चलने को कहा पर मीनू ने मना कर दिया
गोरी भागकर दूध गर्म कर लाई और उसमें हल्दी डालकर मीनू को दिया…बेचारी ने बड़ी मुश्किल से उसे पिया.

रात का खाना खाने के बाद जब वो अपने उपर वाले कमरे में जाने लगी तो रामू ने उससे कहा की वो नीचे ही सो जाए पर उसने यही बहाना बनाया की उसे अपने बिस्तर के सिवा कही और नींद नही आती…

माँ अंदर बर्तन धो रही थी, इसलिए उसने रामू से कहा की हो सके तो वो उसे उपर तक उठा कर ले जाए.
रामू के लिए ये कोई मुश्किल काम नही था…
पर अभी कुछ देर पहले ही उसे मीनू की जवानी का एहसास हुआ था इसलिए वो थोड़ा सकुचा भी रहा था…
मीनू ने भी विनती करी की वो प्लीज़ उसे उपर तक उठा कर ले जाए वरना माँ देखेगी तो गुस्सा करेगी की अब वो छोटे नही रहे …

रामू जानता था की माँ ऐसा करने से मना करेगी और गुस्सा भी होगी…
इसलिए उनके बाहर आने से पहले ही उसने झट्ट से मीनू के फूल जैसे बदन को अपनी बाँहों में उठाया और उपर चल दिया…
उसके नन्हे संतरे उसकी छाती में शूल की तरह चुभ रहे थे पर उसने उनकी तरफ कुछ ख़ास ध्यान नही दिया…
पर उसकी जाँघो को पकड़ कर उसने जरूर जान लिया की वो सच में काफ़ी भर चुकी है.

उसे बिस्तर पर लिटाकर जब वो जाने लगा तो मीनू ने बड़े प्यार से उसे थेंक्स और बोली : “भाई…आप माँ के सोने के बाद प्लीज़ उपर आकर मेरी मालिश कर देना …बहुत दर्द हो रहा है … माँ को बोलूँगी तो वो ज़बरदस्ती मुझे डॉक्टर के पास भेज देंगी…और वहां मुझे जाना नही है…”

रामू ने उसे मुस्कुराते हुए आश्वासन दिया की ठीक है वो आ जाएगा रात को.

और उसके बाद वो नीचे चला गया…

और मीनू मन ही मन अपनी योजना के पहले चरण को साकार होते देखकर खुश हो रही थी.

आज की रात उसे रामू को अपने हुस्न का दीवाना बना देना था,
यही प्लानिंग की थी उसने और रीतु ने मिल कर…
और रामू के हाव भाव देखकर इतना तो वो जान ही चुकी थी की मर्द चाहे कोई भी हो, भाई हो या बाप, हुस्न के आगे उसे झुकना ही पड़ता है…
तभी तो उसका ये खड़ूस भाई इतने प्यार से उसके साथ बर्ताव कर रहा था.

अब वो रात की तैय्यारी करने लगी…
आज कुछ ख़ास होने वाला था उसके कमरे में.

यहाँ मीनू के दिमाग़ में रामू चल रहा था तो नीचे रामू के दिमाग़ में माँ के साथ-2 अब मीनू के ख़याल भी आ-जा रहे थे…
और उधर उनकी माँ गोरी भी ना चाहते हुए फिर से अपने बेटे की बाते सोचने लगी थी सोते हुए…
एक ही दिन में घर के तीनो सदस्यो के दिल में एक दूसरे के लिए गंदे विचारो का निर्माण शुरू हो चुका था…
जो आगे चलकर सबको मजा देने वाला था.

मीनू तो अपने कमरे में जाने के बाद ऐसे एक्साईटिड हो रही थी मानो आज उसकी सुहागरात हो…
हालाँकि पहली ही बार में उसे अपने भाई का शिकार नही करना था पर उसके साथ कुछ भी करने के एहसास से ही उसके दिल में काफ़ी रंग बिरंगी तितलिया उड़ रही थी..

रामू के नीचे जाने के बाद वो झट्ट से उठी और अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गयी…

अपने नंगे शरीर को शीशे के सामने देखकर वो अपने योवन पर इतरा रही थी…
आज से पहले वो ऐसी अवस्था में खुद को देखकर यही बोला करती थी मन में की वो किस्मत वाला ही होगा जिसे ऐसा मक्खन जैसे बदन मिलेगा…
पर आज उसने यही कहा ‘रामू भैय्या आप तो किस्मत वाले हो , जो आपको मैं मिल रही हूँ …देख लेना, कितना मज़ा आने वाला है आपको…और मुझे भी…‘

इतना कहकर वो खुद की ही बात पर हंस दी

वैसे सच ही तो कह रही थी वो,
एक कुँवारी और कसी हुई चूत जब किसी को मिलती है तो उसे मारने का मज़ा सिर्फ़ वही बता सकता है,
और अपनी उसी कमसिन चूत में 1 उंगली डाल कर जब मीनू ने उसे अंदर धकेला तो अंदर का गाड़ा नींबू पानी बाहर छलक गया…

उस पानी को उसने अपने मुँह में लेकर चाट लिया…

और अपने घुंघराले बालों में दूसरे हाथ की उंगलिया घुमाते हुए सोचने लगी ‘हाय ….कैसा फील होगा रामूभैय्या को जब वो इस रस को चूसेंगे…‘

उसकी कल्पना मात्र से ही उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गये..

खैर, उसने जल्दी से अपनी पेंटी पहनी,
हालाँकि स्कूल में भी वो पेंटी नहीं पहनती थी पर आज की जो प्लानिंग उसने रीतु के साथ मिलकर की थी, उसमें इस पेंटी का काफ़ी अहम रोल था,
उसके उपर उसने एक स्कर्ट पहनी जो उसके घुटनो तक ही आ रही थी और उपर उसने बिना ब्रा के एक टाइट सी टी शर्ट…
अब वो सच में एक सैक्सी माल लग रही थी.

फिर वो अपने बिस्तर पर लेट कर अपने प्यारे भाई का इंतजार करने लगी..

नीचे रामू भी आज बेचैन था,
हालाँकि उसने आज तक अपनी बहन को इस नज़र से नही देखा था पर पता नही क्यों उसकी पिंडलियाँ देखने के बाद वो उसकी तरफ आकर्षित सा हो गया था…
क्योंकि वो गोरी पिंडलियाँ उसे उसकी माँ के बदन का एहसास दे गयी थी, जिसे वो ना जाने कब से छूना चाहता था, चूमना चाहता था…

और मीनू को उपर ले जाते वक़्त भी उसके बदन के एहसास ने कुछ जागृत सा कर दिया था उसके अंदर..

इसलिए जब मीनू ने उसे मालिश करने के लिए कहा तो उसने तुरंत हां कर दी क्योंकि मीनू के बदन को छूने के एहसास के पीछे वो अपनी माँ सीमा को महसूस करना चाहता था..

सीमा के दिमाग़ में सोते हुए पुर दिन के चलचित्र चल रहे थे और वो पता नही क्या-2 सोचे जा रही थी…..
पर खेतो में की हुई मेहनत ने उसकी आँखो को कब बोझल कर दिया ये उसे भी पता नहीं चला और कुछ ही देर में वो रोजाना की तरह खर्राटे मारकर सो गयी…

थका हुआ तो रामू भी था पर उसके पास एक लक्ष्य था जिसने उसे जगा कर रखा हुआ था..
माँ के सोने के बाद वो कुछ देर तक तो उन्हे तकता रहा और फिर धीरे से उठकर वो उपर चला गया..
दरवाजा पहले से खुला था, जिसे उसने अंदर से बंद कर दिया..

कमरे में हल्की रोशनी वाला बल्ब जल रहा था और ज़मीन पर बिस्तर लगाकर मीनू गहरी नींद में सो रही थी..

रामू ने उसे उपर से नीचे तक देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया…
आज पहली बार उसके मन में अपनी बहन के प्रति ग़लत विचार आ रहे थे…
कपड़ों में तो उसकी जवानी का पता ही नही चलता था पर ऐसे सोते हुए वो उसे अच्छे से देख पा रहा था…

लंबी-2 टांगे और भरी हुई पिंडलियाँ…
स्कर्ट भी थोड़ा उपर खिसक कर जाँघो तक पहुँची हुई थी जिसकी वजह से वो उसकी कच्छी को छोड़कर सब कुछ देख पा रहा था…
सीना ढलका हुआ था नीचे की तरफ जिससे उसके उभारो का वजह भी वो देख पा रहा था की वो कितने बड़े हो चुके है…
कुल मिलाकर उस दृशय ने उसके लंड को खड़ा कर दिया था..

वो मन में सोचने लगा की वो किस तरह का बंदा है…
अपनी ही माँ और अब बहन के बारे में वो इस तरह से सोचता है…
पर ये विचार भी जितनी जल्दी आया था उतनी ही जल्दी चला भी गया और वो मीनू के करीब जाकर बैठ गया…

उसके हाथ ना चाहते हुए भी उसकी गोरी टाँगो पर पहुँच गये और उसे सहलाने लगे…

मीनू की हालत बुरी हो रही थी.

वो तो पिछले आधे घंटे से रामू का इंतजार कर रही थी,
और जब उसके कदमो की आहट सीढ़ियों पर सुनाई दी तो झट्ट से उसने अपनी स्कर्ट को थोड़ा उपर किया और गहरी नींद में सोने का नाटक करने लगी,
एक सैक्सी सा पोज़ बनाकर लेट गयी थी वो, और इस पोज़ की प्रेक्टिस उसने करीब 6-7 बार की थी रीतु के घर रहकर…
और उसे इस अवस्था में देखकर वही हुआ जिसका उसने और रीतु ने अंदाज़ा लगाया था,
रामू किसी ठरकी कुत्ते की तरह उसके करीब आकर उसकी नंगी टाँगो को महसूस करने लगा…

उसके हाथ जैसे-2 उपर आ रहे थे उसके शरीर का तापमान बढ़ता जा रहा था…
मीनू से साँस लेनी भी मुश्किल हो गयी जब रामू के हाथ उसकी मोटी जाँघो पर आकर लगे..

और उसने झत्ट से अपनी आँखे खोल दी…
रामू का हाथ बिजली की तेज़ी से वापिस चला गया..

रामू : “ओह्ह्ह …जाग गयी तुम..मुझे तो लगा था की गहरी नींद में सो रही हो, मैं तो जाने ही लगा था बस…”

मीनू ने कराहते हुए रामू का हाथ पकड़ लिया : “आह…भाई, आप को लगती ना तब पता चलता की कितनी तकलीफ़ हो रही है मुझे..देखो ज़रा, थोड़ी सूजन भी आ गयी है..”

इतना कहते हुए उसने रामू का हाथ अपनी चोट वाली जगह पर रख दिया और एक बार फिर से कराह उठी…

रामू को इस बार सच मे लगा की उसे काफ़ी तकलीफ़ हो रही है और वो साला अपनी बहन को ऐसी नज़रों से देखने में लगा हुआ था…
धिक्कार है उसपर.

वो जल्दी से उठा और दर्द निवारक तेल की शीशी लेकर उसके पैरो पर उडेल कर उसे मसाज करने लगा..

मीनू की एक टाँग उपर थी और दूसरी नीचे, इस वजह से उसके चाँदनी चॉक का दरवाजा पूरा खुला हुआ था जिसमें से उसके ताजमहल की झलक उसे सॉफ दिखाई दे रही थी…
वो तो एक महीन सा परदा था उसपर वरना उस खूबसूरती के नमूने को देखकर शायद वो मसाज करना भूलकर उसकी चूत मारना शुरू कर चुका होता..

रामू की नज़रो को अपनी चूत पर महसूस करके उसकी चूत से भी अंगारे निकलने लगे..

और एक मिनट भी नही लगा और उस सफेद कच्छी पर एक गीला धब्बा चमकने लगा..

रामू की नज़रें मीनू के चेहरे पर गयी तो वो मसाज का मज़ा लेते हुए अपनी आँखे मूंदे होले –2 मुस्कुरा रही थी…
थोड़ा नीचे नज़रे की तो उसकी कसी हुई टी शर्ट में चमकते हुए बटन देखकर वो समझ गया की उसने ब्रा नही पहनी है…
हालाँकि उसकी चुचिया इतनी बड़ी नही थी पर उसके निप्पल में ही इतनी कशिश थी की उसकी नजरें वहां जम कर रह गयी …

उसके हाथो की पकड़ धीरे-2 सख़्त होने लगी…
वो उसकी टाँगो के माँस को अच्छे से महसूस कर लेना चाहता था और ऐसा करते-2 कब उसके हाथ उपर खिसकने लगे ये उसे भी पता नही चला…
नज़रें उसकी छाती पर थी और हाथ उपर खिसकते जा रहे थे…
रामू को तो इसका पता नही चल रहा था क्योंकि वो तो किसी सम्मोहन में बंध चुका था…
पर मीनू की हालत खराब हो चली थी,

और ना चाहते हुए भी मीनू के मुँह से एक कराह निकल गयी

”अहह ओह भाययय्या”

रामू ने उसकी जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाते हुए कहा : “क्या हुआ मीनू…यहां भी दर्द हो रहा है क्या…”

मीनू ने थरथराती हुई सी आवाज में कहा : “यहाँ दर्द तो नही है भाई, पर पता नही क्यों आपके यहाँ हाथ लगाने से मुझे अंदर से क्या हो रहा है…अलग किस्म का मज़ा सा आ रहा है….करते रहो भाई, ऐसे ही करते रहो..”

रामू के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान आ गयी…
शायद वो अपनी छोटी बहन की नादानी की वजह से हंस रहा था…
वो सोच रहा था की बेचारी को ये भी पता नही है की उसका शरीर उत्तेजित हो रहा है जिसकी वजह से उसे मज़ा आ रहा है…

और फिर उसने मन में सोचा की उसकी नासमझी को हथियार बनाकर वो उसके जिस्म से खेल सकता है, और ऐसा करने में उसकी बहन का उसके प्रति नज़रिया भी नही बदलेगा और वो मज़े भी ले लेगा..

इसलिए वो बोला : “हाँ मीनू …ये शायद इसलिए हो रहा है क्योंकि तुम्हारा शरीर काफ़ी थका हुआ है, और थके हुए हिस्से पर जब मालिश की जाती है तो दर्द भी जाता है और मज़ा भी मिलता है… ”

मीनू अपने भाई की चिकनी चुपड़ी बातो को सुनकर होले से मुस्कुरा दी पर कुछ बोली नही…..

और उसकी चुप्पी को रामू ने उसकी स्वीकृति समझा और अपना हाथ थोड़ा और उपर बड़ा दिया…
और अब उसका हाथ उसकी चूत से टच कर रहा था…
बस एक महीन सा कपड़ा था बीच में वरना आज उनके रिश्ते के मायने ही बदल जाने थे…
बदल तो वो वैसे भी रहे थे क्योंकि इस वक़्त रामू के दिमाग़ में उसकी बहन नही बल्कि एक रसीले बदन वाली जवान लड़की तैर रही थी जिसके पूरे बदन की मालिश करके वो उसके हर दर्द को मज़े में बदल देना चाहता था..

इसलिए अपने हाथो को उपर करके वो लगभग हर बार उन्हे मीनू की चूत से टकरा रहा था…
मीनू दिखा तो नही रही थी पर वही जानती थी की उसकी चूत में उन टक्करो का क्या असर पड़ रहा है..
उसका सीना उपर नीचे हो रहा था..
निप्पलों की नोक और धारदार होकर उसकी टी शर्ट को भेदने लगी,
पेट वाले हिस्से में रह रहकर थिरक होने लगी…
होंठ अपने आप फड़फड़ाने लगे.

और उसके शरीर की इन सभी हरकतों को रामू बड़े ध्यान से देख रहा था…
वो तो यही समझ रहा था की मीनू इतनी नासमझ है की उसे ये पता भी नही चल पा रहा की ये जवानी की लहरे है जो उसके शरीर से उठ रही है और वो पगली इसे मसाज का कमाल समझकर खुश हो रही है..

रामू के दोनो हाथ उसकी दोनो टाँगो को उपर से नीचे तक सहला चुके थे…
चूत पर वो अभी हाथ डालना नही चाहता था क्योंकि इसका मतलब तो कोई गँवार भी समझ सकता था..
इसलिए उसने मीनू को पलटकर पेट के बल लेटने को कहा

इसके पीछे भी एक कारण था, और वो था उसकी भरंवा गांड ।

आज से पहले उसने सिर्फ़ अपनी बहन की गांड को ही नोट किया था..
क्योंकि उसके शरीर का वही एक हिस्सा था जो बाहर की तरफ निकला हुआ था और अपनी तरफ आकर्षित करता था, आज वो उन्ही नन्हे टीलों के गुदाजपन का मज़ा लेना चाहता था.

मीनू भी समझ गयी की लाला की तरह उसका भाई भी उसकी भरी हुई गांड का दीवाना है और होता भी क्यो नही वो थी ही इतनी सैक्सी की उसे एक बार जो देख ले तो उसे मसलने की इच्छा अपने आप आ जाती थी मन में.

पीछे की तरफ भी रामू ने तेल की धार पर अपने हाथो की थिरकन का कमाल दिखाया जो धीरे-2 उसकी स्कर्ट के अंदर जाता चला गया…
और अब वक़्त था उसकी स्कर्ट में छिपे चाँद के जोड़े को देखने का,
इसलिए रामू ने मीनू से कहा : “ये तेल तेरे कपड़ो में लग रहा है, इसे उपर कर दूँ क्या…? ”

मीनू ने मंद-2 मुस्कुराते हुए मन में सोचा ‘साला भोंदू , इतना पुराना आइडिया लाया है गांड को देखने के लिए, कुछ तो नया सोचता भाई..‘

पर अपनी नासमझी का परिचय देते हुए वो भोले सी आवाज़ में बोली : “भाई, जो करना है कर लो…मुझे तो इतना मज़ा आज तक नही मिला..”

यानी वो कहना चाहती थी की मेरी तरफ से छूट है, कर ले अपने मन की इच्छा पूरी..

रामू ने अपने काँपते हाथो से उसकी गांड का घूँघट उपर उठा दिया…
और सच में वो उसकी गांड की सुंदरता देखकर चकाचोंध हो गया..

उसका मुँह खुला का खुला रह गया और उसमें से ढेर सारी लार निकल कर उसकी गांड पर आ गिरी

ठंडे तेल के मुक़ाबले गर्म लार को महसूस करके फिर से वो आनंद भरे स्वर में कराह उठी…

”अहह…. अह्ह्ह्ह भैय्या ….म्*म्म्ममम”

रामू हंस दिया की कैसी पागल है, उसकी लार को भी तेल समझ कर कसमसा रही है..

फिर उसने सोचा की काश वो उसी लार में चुपड़ी जीभ से उसकी गांड के कटोरों को चाट पाता,
उन्हे अपने गीले होंठों से चूमा चाटा और अपने लार से सने दांतो से उनपर काट पाता.

और जिस रफ़्तार से उसकी गांड को देखकर उसके मन में ये विचार आ रहे थे उससे पता चल रहा था की वो वक़्त भी जल्द आने वाला है..

उसने एक बार फिर से वही पुराना डायलोग दोहराया : “नि…मीनू ..वो वो तेरी….तेरी कच्छी खराब हो जाएगी…तेल लगने से…कहे तो…इसको…”

वो अपनी बात पूरी भी नही कर पाया था की मीनू ने अपनी गांड उचकाई और अपनी कच्छी को पकड़ कर नीचे कर दिया.

मीनू : “भैय्या , आप तो ऐसे शरमा रहे हो जैसे ये बहुत बड़ी बात है….ये लो…अब लगाओ अच्छे से तेल”

उसकी इस हरकत से उसके भाई को हार्ट आटेक आते-2 बचा..
साली उसी के साथ खेल गयी..

अभी तक वो उसे उत्तेजित करने में लगा था और अब एक ही बार में उसने उसके लंड की वो हालत कर दी की उसका लंड बैठे नही बैठ रहा था…
सामने का नज़ारा ही इतना सैक्सी था.

उसने अपने काँपते हुए हाथ जैसे ही उसकी गांड की तरफ बढ़ाये की नीचे से उसकी माँ की तेज आवाज़ आई

”रामू……ओ रामू……कहाँ गया रे….”

एक ही झटके में रामू खड़ा हो गया और उसके पीछे-2 खड़ी होकर मीनू भी अपने बिस्तर पर बैठ गयी और उसका चेहरा सीधा आ टकराया उसके खड़े हुए लंड से…
बेचारा संभाल भी नही पाया था और उसके खड़े हुए लंड का एहसास मीनू को मिल गया…
उसे इस वक़्त बड़ी शर्म महसूस हो रही थी, अपने हाथो से अपने खड़े लंड को ढकता हुआ वो नीचे की तरफ भागा..

मीनू ने भी जल्दी से अपने कपड़े ठीक किए और चादर में घुसकर सोने का नाटक करने लगी….
मन में उसने 100 गालिया दे डाली थी अपनी माँ को…
आज वो नही जागती तो बहुत कुछ होने के आसार बन चुके थे उनके बीच…

अगली बार अब कोई और प्लान बनाना पड़ेगा रामू भैय्या के लिए.

रामू जब नीचे पहुँचा तो वहां से सीधा बाथरूम में घुस गया और बाहर आते हुए आवाज़ करके निकला ताकि उसकी माँ समझ ले की वो बाथरूम में था.

पर उसे सफाई देने की ज़रूरत ही नही पड़ी क्योंकि जब तक वो वापिस अपने बिस्तर पर पहुँचा तो उसकी माँ फिर से खर्राटे मार रही थी.

बीचे में शायद एक पल के लिए उनकी नींद खुली थी और रामू को अपने बिस्तर पर ना पाकर उन्होने आवाज़ लगा दी थी, और फिर से सो गयी थी…
उनका तो कुछ नही बिगड़ा पर उस वजह से रामू और मीनू का खेल बिगड़ कर रह गया था.

रामू को इस वक़्त अपनी माँ पर बहुत गुस्सा आ रहा था, मन तो कर रहा था की उसी खड़े लंड को उनकी उभरी हुई गांड में पेल डाले..

और ये ख़याल आते ही उसकी आँखे चमक उठी…
आधी रात होने को थी, मीनू का भी अब नीचे आना संभव नही था, माँ भी गहरी नींद में थी , ऐसे में उनके जिस्म के साथ कुछ तो मज़ा लिया ही जा सकता है..

ये सोचते ही वो उछलकर बैठ गया और दबे पाँव अपनी माँ के करीब पहुँचा,
वो पेट के बाल उल्टी होकर सो रही थी, पहले तो उनके चेहरे को उसने गोर से देखा और फिर एक-दो आवाज़ें लगाकर उसने सुनिश्चित भी कर लिया की वो गहरी नींद में सो रही है और फिर धीरे से उसने अपना हाथ उनकी मोटी गांड पर रख दिया.

उफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या फीलिंग थी,
आज पहली बार उसने अपनी माँ की गांड को छुआ था.और आशा के अनुरूप वो एकदम कड़क और गद्देदार थी.
रामू ने अपनी उंगलियाँ अंदर की तरफ धंसा दी और उस गद्देपन को महसूस करके खुश होने लगा.

उसकी लुंगी में खड़ा हुआ लंड उसने खुद ही बाहर निकाल लिया और एक हाथ से उसे मसलते हुए अपनी माँ की गांड की गहराई नापने लगा..

”ओह माँआआआआअ……. क्या गांड है रे तेरी…..सच में …..एक दिन लंड पेलुँगा इसके अंदर अपना….अहह”

उसकी माँ की साड़ी की फिसलन बता रही थी की अंदर उसने भी कुछ नही पहना हुआ है…
पेटीकोट और साड़ी के नीचे नंगी चूत लेकर सो रही थी वो इस वक़्त.

माँ की गांड मसलने के बाद उसकी हिम्मत थोड़ी और बढ़ चुकी थी,
उसने माँ की पिंडलियों से साड़ी को धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया…
जैसे-2 उनका नंगा जिस्म सामने आ रहा था, उसकी साँसे तेज होती जा रही थी.
और अंत में आकर वो घुटनो से थोड़ा उपर आकर अटक गयी,
पर फिर भी लोंडे ने हिम्मत नही हारी और तिरछा बैठकर उसने अपने हाथ को अंदर की तरफ सरका दिया…

अंदर का माहौल थोड़ा भारी सा था, हल्की नमी लिए हुए वो हिस्सा थोड़ा गरम भी था, और जब उसके हाथ माँ के नंगे चूतड़ों से टकराए तो वो कांपकर रह गया,
ऐसा लग रहा था जैसे माँस से बना बड़ा सा तरबूज पकड़ लिया हो उसने..
अपनी उंगलियों से उपर से नीचे तक सहलाने के बाद जब उसकी उंगलियाँ गांड की दरारों में घुसी तो उनके शरीर में कुछ हलचल सी हुई,
एक पल के लिए उसने अपनी हरकतें रोक दी पर अगले ही पल फिर से उन्हे सहलाने लगा…

और उसकी इस हरकत ने उसकी माँ की नींद खोल ही दी आख़िरकार…
हालाँकि अभी तक तो वो सो ही रही थी और उसके द्वारा किए जा रहे स्पर्श को वो सपना समझ कर मज़े ले रही थी,
पर चूत के करीब जब हाथ पहुँचा तो उसकी नींद खुल ही गयी…
और एक पल भी नही लगा उसे ये समझने में की रामू ही उसके साथ वो सब कर रहा है…

सुबह से उसकी हरकतों को नोट करने के बाद वो इतना तो जान ही चुकी थी की उसका बेटा उसके जिस्म का दीवाना है, पर इस वक़्त उसे ऐसी हरकत करते देखकर भी उसकी ये हिम्मत नही हो रही थी की अपने बेटे को वो रंगे हाथो पकड़ ले और उसे डांटे या मारे…

पर उसके बारे में सुबह से सोच-सोचकर उसके जिस्म ने भी जिस अंदाज से जवाब दिया था, वो भी उसे रामू को टोकने से मना कर रहा था..
हालाँकि था वो उसका सगा बेटा पर मज़े साला ऐसे दे रहा था जैसे गाँव का हरामी साहूकार लाला देता है सबको..

लाला के बारे में तो उसने अपनी सहेलियो से सिर्फ़ सुना ही था पर यहाँ तो उसके बेटे ने उसे छूकर वो सारी बाते सच ही कर दी थी जो उसकी उम्र की औरतें उसे सुनाया करती थी की इस उम्र में भी उन्हे सैक्स करने में कितना मज़ा आता है…

बरसो बाद उसकी बंजर ज़मीन पर फिर से पानी रिसना शुरू हो चुका था…
इसलिए वो चाहकर भी अपने बेटे को अपने खेतो की जुताई करने से नही रोक पा रही थी.

रामू की भूख बढ़ती जा रही थी,
उसने एक एक अपनी चारो उंगलियां अपनी माँ की चूत में उतार दी..
वहां की चिकनाई उसे ऐसा करने में मदद कर रही थी…
शरीर पहाड़ जैसा था उसका पर उसकी अक्ल में इतनी बात नही घुस पा रही थी की औरत की चूत जब पानी छोड़े तो इसका मतलब वो जाग ही रही है,
पर उसके हिसाब से तो वो गहरी नींद में ही थी अब तक..

उसने उस रस से भीगे हाथ को बाहर निकाला और चाट लिया,
और जब स्वाद उसके मुँह लगा तो हर उंगली को कुल्फी की भाँति चूसने लगा…
उसकी चूसने की आवाज़े सुनकर उसकी माँ का शरीर काँप रहा था की कैसे उसी चूत से निकला उसका बेटा वहां के जूस को भी चूस रहा है…

अब उससे सब्र करना मुश्किल सा हो रहा था इसलिए उसने करवट बदलने के बहाने अपने शरीर को सीधा कर लिया…
रामू तुरंत किसी लक्कड़बग्घे की तरह रेंगकर अपने बिस्तर में घुस गया.

भले ही अपनी माँ के साथ आज वो इतना आगे निकल चुका था पर उनकी डांट का डर अभी तक उसके दिलो दिमाग में था, इसलिए वो किसी भी कीमत पर पकड़ा नही जाना चाहता था…

पहले उपर वो मीनू के साथ कुछ करते-2 रह गया और अब नीचे अपनी माँ के साथ भी…
भले ही दोनो तरफ आज की रात वो असफल रहा था पर ये तो पहले दिन की शुरूवात थी,
जो आगे चलकर और भी गुल खिलाने वाली थी.

अगली सुबह लाला हमेशा की तरह अपनी दुकान खोलकर गली में इधर से उधर जा रही औरतों और लड़कियों की गांड देखकर अपना लंड मसल रहा था..

और बुदबुदा भी रहा था : “साली…. मेरी दुकान के सामने से निकलते हुए इनके कूल्हे कुछ ज़्यादा ही मटकने लग जाते है…. पूरे गाँव को अपने खेतो में लिटाकर चोद डालूँगा एक दिन, तब पता चलेगा इन छिनालो को…”

हालाँकि उसे चुतों की कमी नही थी, पर फिर भी ऐसी कोई चिड़िया जो उसके चुंगल में आज तक नही फँस पाई थी, उन्हे देखकर उसके मुँह से ऐसा निकल ही जाता था.

दोपहर होने को थी, उसकी पसंदीदा चूते यानी रीतु और मीनू, जिन्हे वो अभी तक चोद नही पाया था पर वो किसी भी वक़्त उसके रामलाल से चुद सकती थी, वो इस वक़्त स्कूल में थी, वरना आज वो पूरे मूड में था उनमें से किसी एक की चूत का उद्घाटन करने के लिए..

नाज़िया भी उनके साथ स्कूल में ही होगी, वरना उसे एक बार और पेलकर वो उसके संकरेपन को थोड़ा और खोल देता आज..

अंत में उसके पास दो ही विकल्प रह गये, रीतु की माँ सीमा और नाज़िया की अम्मी शबाना…

शबाना को भी वो कई सालों से चोदता आ रहा था इसलिए उसका मन सीमा की तरफ ही घूम रहा था, इसलिए वो झत्ट से उठा और सीमा के घर जाने के लिए तैयार होने लगा…

लेकिन जैसे ही वो दुकान का शटर गिराने लगा, सामने से उसे शबाना आती हुई दिखाई दे गयी..

वो करीब आई और अपनी मनमोहक मुस्कान के साथ बोली : “लगता है लालाजी किसी मिशन पर निकलने वाले हो…कहो तो मैं आपकी कोई मदद कर दूँ …”

अब उसके कहने का तरीका ही इतना सैक्सी था की एक पल में ही लाला के लंड ने उसके लिए हां कर दी…
लाला के हिसाब से तो लंड – 2 पर लिखा होता है चुदने वाली का नाम…
और आज ये चुदाई के नाम की पर्ची शबाना के नाम की निकली थी,
जो उसने खुद ही खोलकर उनके सामने रख दी थी..

लाला ने मुस्कुराते हुए कहा : “अररी शबाना…तेरे होते हुए भला मैं कौन से मिशन पर जाऊंगा भला…तू आ गयी है तो चल अंदर गोडाउन में …एक पुराने चावल का कट्टा खोला था कल…चल तुझे दिखता हूँ वो..”

शबाना : “हाय लाला जी…आप तो अंतर्यामी निकले…आपको कैसे पता की मैं चावल लेने ही आई थी…वो क्या हुआ ना, नाज़िया आने ही वाली है, पर देखा तो घर में चावल ही नही है…तो सोचा की मैं आपसे आकर ले जाऊ …”

लाला : “अररी, जो भी सोचा तूने, सही सोचा…नाज़िया के लिए तो लाला के चावल तो क्या, सब कुछ पेशे खिदमत है…”

इतना कहते हुए उसने बड़ी ही बेशर्मी से अपने खड़े हुए लंड को उसके सामने ही मसल दिया…

शबाना मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ दौड़ गयी और उसके पीछे –2 लाला अपनी दुकान का आधा शटर गिराकर अंदर आ गया..

वो पहले से ही उछल कर एक बोरी पर चढ़ी बैठी थी…
लाला के आने से पहले ही उसने अपने ब्लाउस के हुक आगे की तरफ से खोल दिए और उसके आते ही उन्हे अपने नर्म मुम्मो से लिपटा लिया…

लाला को हमेशा से उसकी यही बात अच्छी लगती थी…
सैक्स करने के लिए अपनी तरफ से वो हमेशा पहल करती थी, बिना कोई वक़्त गँवाए..

वो भी उसके लटक रहे खरबूजों को अपने मुँह में लेकर जोरों से चूसने लगा…

उससे पंगे लेने के लिए वो बोला : “अब तेरे में वो बात नही रही शबाना… अब ये लटक चुके है .. पहले जैसे कड़क नही रहे अब ये…”

वो भी लाला के चेहरे को अपनी छाती पर रगड़ते हुए कसमसाई : “ओह्ह्ह .. लाला…अब तुझे ये क्यों अच्छे लगने लगे…नाज़िया के नन्हे अमरूद चूस्कर उनके कड़कपन का मुकाबला कर रहा है ना तू इनसे… पर कसम से, अपनी जवानी में मैं भी उतनी ही कड़क थी…”

लाला को इस बात की सबसे ज़्यादा खुशी थी की उसी के सामने उसकी बेटी को पेलने के बाद अब वो उसके बारे में इतना खुलकर शबाना से बात कर सकता है…
एक माँ के सामने उसी की बेटी के हुस्न की तारीफ करके उसे सच में काफ़ी मज़ा मिल रहा था.

ऐसे में शबाना को अपनी बेटी से ज़्यादा अच्छा दिखने के लिए लाला को कुछ ज़्यादा ही खुश करने की एनर्जी मिली…
भले ही वो उसकी माँ थी पर थी तो वो एक औरत ही ना,
अपने सामने भला वो किसी और की बड़ाई कैसे सुनती.

इसलिए उसने एक पल भी नही लगाया अपने सारे कपड़े निकालने में …
गोडाउन की नमी में उसका शरीर काँप कर रह गया जब वो पूरी नंगी होकर लाला के सामने खड़ी हुई..

लाला की तरकीब काम कर गयी थी,
शबाना के हाव भाव बता रहे थे की बेटी से कंपेयर करने के बाद उसके शरीर में कितनी सफूर्ती आ चुकी है…

वो झत्ट से लाला के कदमो में बैठी और उसकी धोती को खींचकर उसने अलग कर दिया..
और लाला के लंड को एक ही बार में मुँह में लेकर चूसने लगी..

लाला भी उसके मुँह को बुरी तरह चोदने में लगा हुआ था,
आज वो उसपर किसी भी तरह का रहम नही कर रहा था..

उसने उसके लम्बे बालो का बँधा हुआ जूड़ा पकड़ा और उसके मुँह को किसी कुतिया की तरह चोदने लगा…
ऐसी बेदर्दी से अपने लंड को उसके मुँह में पेलने से उसके लंड पर भी दाँत लग रहे थे

पर इस वक़्त ज़ोर से मुखचोदन में जो मज़ा मिल रहा था उसका कोई मुकाबला नही था.

और जल्द ही लाला का लंड एकदम स्टील जैसा हो गया….
अब तो वो चावल की बोरी को भी भेदकर खोल सकता था…
उसने शबाना को उपर उठाया और उसी पुराने चावल की बोरी पर औंधा करके लिटा दिया और पीछे से उसकी एक टाँग को कुतिया की तरह उठाकर उसमे वो नुकीला रामलाल पेल दिया…

हल्के अंधकार में वो किसी घोड़ी की तरह हिनहीना उठी…

उसकी चूत से बह रहा सारा रस लंड के साथ अंदर की तरफ चला गया और चिकनाई बनकर वो रामलाल की सेवा करने लगा..

उसके मोटे अंगूर दाने जितने निप्पल खुरदूरी बोरी पर घिसकर लाल हो चुके थे…
थोड़ी देर और ऐसी घिसाई चलती रही तो उनमे से दूध टपकने में देर नही लगने वाली थी…
इसलिए शबाना ने अपने हाथ बोरी पर रखकर बीच में दायरा बना लिया और अब लाला के झटके इतने तेज थे की उसके झूलते हुए मुम्मे उसके शरीर को ही चोट पहुँचा रहे थे…
यानी कुल मिलाकर लाला ने अपने लंड से आतंक मचा रखा था.

”अहह लाला……. ओह….. क्या चोदता है रे लाला….. कसम से….इतने सालो से चुदाई करवा रही हूँ तुझसे पर आज भी पिछली बार से ज़्यादा मज़ा मिलता है…. अहह …. ओह लाला………….. उम्म्म्ममममममममम……. चोद साले …..चोद मुझे…… ”

लाला ने उसकी गांड का स्टेयरिंग अपने हाथो में पकड़ा हुआ था और उसे तेज़ी से चलाता हुआ वो जल्द ही उसकी चूत में झड़ने लगा…
अपने लंड नुमा ट्रक को उसने पूरा उसकी चूत में क्रेश कर दिया था.

और हाँफता हुआ सा वो उसके उपर गिरकर अपनी टूटी हुई सांसो को नियंत्रित करने लगा..

लाला तो वहीं बिछी चारपाई पर पसर गया पर शबाना ने अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए…
उसकी बेटी के आने का टाइम हो रहा था…
लाला ने जाते-2 उसे 1 किलो चावल पेक कर दिए और बाकी के चावल शाम को उसके घर पहुँचाने का वादा किया…

शबाना समझ गयी की आज की रात लाला एक बार फिर से उसकी फूल सी बेटी नाज़िया को चोदेगा.
पर अब उसे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता था…
क्योंकि उसकी चुदाई भी हो चुकी थी और चावल वाला काम भी हो चुका था.

वहीँ दूसरी तरफ स्कूल से आते हुए मीनू ने अपनी रात की आप बीती रीतु को शुरू से आख़िर तक सुना डाली… रीतु भी उसकी बात सुनकर हंस दी क्योंकि उसे रामू की हालत पर हँसी आ रही थी,
बेचारे की झंड हो गयी थी रात को…
वैसे दिल तो मीनू का भी टूटा था, क्योंकि उसने तो पूरा मन बना लिया था अपने और रामू के बीच की दीवार को तोड़ने का पर आख़िरी वक़्त पर उसकी माँ ने सारा खेल ही बिगाड़ कर रख दिया..

हालाँकि रीतु और उसने मिलकर प्लान तो काफ़ी अच्छा बनाया था पर उसकी माँ ने बीच में आकर सब गड़बड़ कर दिया था…
इसलिए पहले उसकी माँ से निपटने की ज़रूरत थी उन्हे…
और इसके लिए उन्होने आपस में मिलकर एक और प्लान बनाया और उसे सार्थक करने के लिए वो घर के बदले सीधा मीनू की माँ और भाई के खेतो की तरफ चल दिए..

आज तो मीनू ने सोच ही लिया था की बात आगे बढ़कर ही रहेगी.

खेतो मे तो रोज की तरहा एक नयी फिल्म चल रही थी..

अपनी माँ को घोड़ी बनकर झुके देखकर, खेतो में काम कर रहे रामू की आँखे चौड़ी हो गयी
जब उसने उनकी निकली हुई गांड देखी…
खेतों में बुवाई करने के लिए वो झुक झुक कर आगे बढ़ती जा रही थी, और बीज बोती जा रही थी,
इस बात से अंजान की उसके ठीक पीछे खड़ा उनका जवान पट्ठा उसके पुट्ठे देखकर अपना लंड मसल रहा है…

”आअहहह…… माँमाआआआआआ…. क्या मोटी गांड है रे तेरी…… इसमें एक दिन अपना लंड पेलुँगा इन्ही खेतों में …कसम से…तेरी बुवाई चलती रहेगी और मेरी चुदाई…. एक कोने से दूसरे कोने तक ऐसे ही घोड़ी बनाकर दौडाऊंगा तुझे… अपना लंड अंदर डाले-2…अहह….”

खुली आँखो से वो शेखचिल्ली की भाँति सपने देखने में लगा था…
वो भी इस बात से अंजान था की उसकी माँ का सारा ध्यान उसी की तरफ है.

कल रात की सारी बाते सोच-सोचकर सीमा की चूत सुबह से ही गीली हो रही थी…
ऐसा नही था की उसे भी ये माँ बेटे का अनुचित आकर्षण पसंद था
पर ये एक ऐसी फीलिंग थी जो एक बार मन में आ जाए तो वो उसके विपरीत सोच ही नही पा रही थी…
हालाँकि वो अच्छी तरह से जानती थी की दुनिया समाज और यहाँ तक की उसकी खुद की नज़रों में भी ये ग़लत है पर वो सब बाते एक तरफ थी और ये वाली फीलिंग एक तरफ
और इस फीलिंग ने उसके मसतिष्क को पूरी तरह से अपने कब्ज़े में ले लिया था..

झुकी होने की वजह से वो अपने पीछे खड़े रामू को कनखियो से देख भी पा रही थी, जिसका हाथ अपने लंड पर ही था…

वो चाहती तो उसे रंगे हाथो पकड़ कर उससे सब कुछ कबूल करवा सकती थी पर उसे पता था की वो ऐसा करेगा नही…

जैसे रात को उसके जागने के एहसास से ही वो वापिस अपने बिस्तर पर चला गया था…
वो कितना फट्टू है ये वो अच्छे से जानती थी.

अपना काम निपटा कर वो जब खड़ी हुई तो रामू खुद ही दूसरी तरफ मुँह करके दूर पेड़ के पीछे की तरफ चल दिया…

सीमा : “ओ रामू…. अब कहाँ चल दिया…. मुझे और बीज पकड़ा ज़रा, आज ये बुवाई का पूरा काम निपटाना है…”

रामू अपने खड़े हुए लंड को संभालता हुआ दूसरी तरफ चलता चला गया और पीछे मुँह करके बोला : “अभी देता हूँ माँ ….बस थोड़ा मूत आऊं …बड़ी जोर से लगी है…”

उसकी माँ के चेहरे पर अर्थपूर्ण मुस्कान फैल गयी….
वो जानती थी की कैसा मूत लगा है उसे…

रामू का लंड इस हदद तक खड़ा था की वो उसकी धोती के बाँधने वाली जगह से उपर की तरफ अपना मुँह निकाल कर खड़ा था…एकदम कुतुब मीनार की तरह…

पेड़ के पीछे पहुँचते ही रामू ने अपनी धोती नीचे खिसकाई और अपना विशालकाय लंड बाहर निकाल कर जोरों से उसकी रगड़ाई करने लगा…

”ओह माँमाआअ…… साली तेरी चूत भी तेरी जैसी चिकनी है….काश कल रात उसे चूस पाता ….अहह……”

दूर खड़ी सीमा की नज़रें अपने बेटे को ढूँढती हुई जब पेड़ो के पास गई तो उसे अपनी तरफ ही मुँह करके खड़े पाया….
भला ये कौनसा तरीका होता है मूतने का…
अपनी माँ की तरफ मुँह करके कौन मूतता है भला…
पर वो अब ये जान चुकी थी की ये मूत नही बल्कि मुट्ठ का मामला है…
उसका बेटा रोजाना उसे देखकर ही उस पेड़ के नीचे जाकर मुट्ठ मारता होगा…

ओह्ह बेचारा….
ऐसे ही करता रहा तो इसने अपना शरीर ही खराब कर लेना है…
जब शादी होगी तो कैसे चुदाई कर पाएगा ये अपनी बीबी की…
और इसका सारा दोष उसी के उपर आएगा, क्योंकि उसकी इस हरकत की असली वजह तो वो खुद ही थी ना…
और ये सोचकर सीमा ने मन ही मन ये निश्चय कर लिया की चाहे उसे अपनी मर्यादा को लाँघना ही पड़े, वो अपने बेटे का शरीर इस तरह से खराब नही होने देगी…
चाहे इसके लिए उसे अपने शरीर को उसे सोंपना ही क्यो ना पड़े…

अपनी संतान के लिए एक माँ क्या-2 कर सकती है ये बताने का वक़्त आ चुका था..
भले ही इसके पीछे उसका खुद का भी स्वार्थ छिपा था..
अपने पति के जाने के बाद बरसो पुरानी चूत में जो जंग लग चुका था वो पानी बहकर उसी की वजह से ही तो बाहर निकला था…
अब उसे उसी पानी में अपने लाड़ले को नहलाना था, ताकि वो ग़लत आदतों की वजह से अपना शरीर खराब ना करे..

उन दोनो के बीच ये रासलीला चल रही थी और उन दोनो की ही नज़रों से अंजान रीतु और मीनू वहां पहुँच चुकी थी…

माँ तो खेतो के बीच थी पर अपने भाई को पेड़ो के नीचे खड़ा देखकर मीनू उसी तरफ चल दी…
रामू अपनी माँ के हुस्न में इतना खोया हुआ था की उसे अपने दांयी ओर से आती अपनी बहन और उसकी सहेली के आने का आभास ही नही हुआ..

जैसे-2 दोनो रामू के करीब जाती गयी उनकी आँखे आश्चर्य से फैलती चली गयी…
रामू बड़ी ही बेशर्मी से अपनी माँ को देखकर अपना गन्ने जैसा लंड पीट रहा था..

मीनू का तो दिमाग़ ही घूम गया ये देखकर पर रीतु का शातिर दिमाग़ सब समझ गया…
जिस रामू को अपनी बहन को चोदने के लिए ये सब जतन वो करवा रही थी वो रामू तो अपनी माँ का दीवाना निकला..

यानी इस हिसाब से तो उसे पटाना उतना मुश्किल नही होगा जितना वो दोनो अब तक समझ रहे थे….
एक बंदा जब मांदरचोद हो सकता है तो बहनचोद भी हो सकता है…

और उन दोनो के लिए सबसे बड़ी बात ये थी की आज उन दोनो ने ही रामू का लंड पहली बार देखा था..
एकदम मस्त था वो..
हालाँकि लाला जैसा गठीला नही था पर जवानी के हिसाब से एक नया रूप लिए हुए था वो…

मीनू जो पहले से ही उसके लंड को लेने का मन बना चुकी थी, उसके लंड को देखकर अपनी चूत मसलने लगी और धीरे से बुदबुदा उठी ‘अहह…. देख ले री…. यही जाएगा तेरी बन्नो के अंदर….. उम्म्म्ममम…. कितना चिकना है ये तो….. चूत में लगते ही फिसलता चला जाएगा अंदर तक….‘

वहीं रीतु भी उसे देखकर ललचा गयी…
उसे भी पता था की लाला से अपनी चूत की ओपनिंग करवाने के बाद उसे ये लंड भी चखने को ज़रूर मिलेगा…
आख़िर रामू उसे भी काफ़ी पसंद था..

रीतु ने मीनू के कान में फुसफुसा कर कहा : ‘तेरा भाई तो और भी बड़ा हरामी निकला…साला अपनी माँ को देखकर ही अपना लंड हिला रहा है…तेरे पीछे तो ये पालतू कुत्ते की तरह घूमेगा…‘

उसकी बात सुनकर मीनू ने भी फुसफुसा कर कहा : ”और फिर उस कुत्ते से कुतिया वाले पोज़ में अपने अंदर डालवाउंगी इसके लंड को….सस्स्सस्स अहह….”

ये सुनकर रीतु ज़ोर से हंस दी..
और वो ज़ोर से इसलिए हँसी ताकि रामू का ध्यान उनकी तरफ आ जाए…
और हुआ भी ऐसा ही….
उसने जैसे ही अपनी तरफ आती हुई मीनू और रीतु को देखा, अपने लंड को झट्ट से उसने फिर से अपनी घोती में डाल लिया…

बातें करते-2 वो दोनो उसके करीब आई तो रामू बोला : “अर्रे, आज तुम दोनों यहाँ खेतों में कैसे आ गयी….”

और फिर मीनू की तरफ देखकर बोला : “अब तेरा पैर का दर्द कैसा है…”

मीनू और रीतु ने रास्ते में ही एक नया प्लान बना लिया था, उसी के अनुसार वो बोली : “बस भैय्या, चला तो जा रहा है पर ज़्यादा ज़ोर देने से दर्द अभी भी हो रहा है…इसलिए सोचा की आपको बोल दूँगी ताकि आप अपनी साइकल पर घर छोड़ आओ मुझे…”

बेचारे रामू का दिल ज़ोर से धड़क उठा…
रात वाली बातें उसके दिमाग़ से निकल भी नही आई थी और ऐसे मीनू का ये बेबाकपन उसे फिर से उन्ही विचारो की तरफ खींच रहा था..

मीनू और रीतु को देखकर रामू की माँ भी वहां आ गयी…
रामू ने उन्हे सारी बात बताई तो वो गुस्सा होने लगी की डॉक्टर को ही दिखाना सही रहेगा..
पर मीनू ने ज़ोर देकर कहा की घर पर मालिश से कल तक ठीक नही हुई तो वो खुद ही डॉक्टर के पास चलेगी..
उसकी माँ भी जानती थी की डॉक्टर के इंजेक्षन से उसे बचपन से ही डर लगता है..
इसलिए जैसा मीनू चाहती थी , उन्होने रामू को बोलकर मीनू को उसकी साइकल से घर जाने को कहा…
और ये भी कहा की शाम को वो खुद ही घर आ जाएगी..

अब साइकल पर कैरियर तो था नही, इसलिए सिर्फ़ मीनू ही उसके साथ आगे बैठकर जा सकती थी…
उनके जाने के बाद रीतु भी अपनी गांड मटकाती हुई अपने घर की तरफ पैदल ही चल दी..

रामू ने जब मीनू को बिठा कर साइकल चलानी शुरू की तो मीनू ने खुद ही अपने शरीर को पीछे की तरफ करके छोड़ दिया ताकि उसका भाई उसकी मखमली पीठ का एहसास ले सके..

पर जब रामू की टाँगे उसकी गांड से रगड़ाई करते हुए उसकी जाँघो पर आई तो उसका पूरा शरीर ही झनझना उठा…
वो तरंगे उसकी टाँगो से लेकर उसकी चूत तक को कंपित कर रही थी…
उसका ढीला शरीर अकड़ने लगा और उसकी छातियाँ और भी बाहर निकल आई…

ये सब देखकर उसका भाई रामू अपनी किस्मत पर इठला रहा था…
क्योंकि अपनी बहन की तरफ से उसे खुद ही ऐसे सिग्नल मिल रहे थे जिसमें वो उसे आसानी से चोद सकता था..
एक पल के लिए उसे ये भी लगा था की कहीं ये पैर की मोच और मालिश करवाना उसकी बहन की कोई चाल तो नही है पर फिर उसने खुद ही इस ख़याल को नकार दिया की उसमें इतनी अक्ल कहाँ है भला..

पर वो नही जानता था की वो अब उतनी नासमझ भी नही रही है जितना वो सोच रहा है…
रीतु के साथ मिलकर वो एक चालाक लोमड़ी बन चुकी है
और आज इस लोमड़ी ने अच्छा सा प्लान बना लिया था की कैसे अपना हुस्न दिखाकर रामू को अपना पालतू कुत्ता बनाना है.

 

रास्ता तोड़ा लंबा था, और रामू को भी आज जल्दी नही थी क्योंकि इस तरह से मीनू को बिठाकर उसने कभी भी साइकल नही चलाई थी..

उपर से उसके शरीर को छूने से उसमें जो उर्जा का संचार हो रहा था वो भी कुछ अलग ही था…

आख़िर जवान जिस्म का स्पर्श अपने आप में एक ताज़गी लिए होता है.

 

वहीं दूसरी तरफ मीनू भी अपनी गांड पर पड़ रहे भाई के ठुड्डे महसूस करके अंदर ही अंदर कराह रही थी…

मन तो उसका कर रहा था की उसका भाई उसे नंगा करके उसकी गांड पर ज़ोर-2 से थप्पड़ मारे ताकि उसकी ये जो उत्तेजना अंदर से निकल रही है वो और भी बढ़ जाए..

 

 

 

तभी रामू ने अपनी गर्म साँसे उसके कानों में छोड़ते हुए पूछा : “एक बात तो बता , कल रात तुझे मज़ा आया था क्या, जब मैने तेरी टाँगो की मालिश की थी…”

 

मीनू समझ गयी की उसके ठरकी भाई के दिमाग़ में क्या चल रहा है…

 

वो बोली : “भाई..बोला तो था मैने कल भी…मज़ा भी आया था और कुछ अजीब सा फील भी हुआ था…”

 

रामू ने इस बार अपने होंठो से उसके कानो को छू लिया और फुसफुसाया : “कैसा फील हुआ था …गंदा वाला या अच्छा वाला…”

 

रामू के गीले होंठो को अपने कानो पर महसूस करके उसके मुँह से एक हुंकार सी निकल गयी….

अगर ये हरकत उसने बंद कमरे में की होती तो इसका हर्जाना उसे अपना लंड चुस्वाकार चुकाना पड़ता कसम से…

पर गनीमत थी की वो गाँव के बीचो बीच से निकल रहे थे, ऐसे में वो कोई हरकत नही कर सकती थी..

 

वो फुसफुसाई : “आह….भाई…ये गुदगुदी तो ना करो ना…और मज़ा मिला था इसका मतलब अच्छी वाली फीलिंग ही होगी ना…”

 

रामू मुस्कुराया और बोला : “पहले कभी ऐसा मज़ा मिला है क्या…”

 

वो आवेश में बोल गयी : “हाँ ..बहुत बार…”

 

और ये बोलते के साथ ही उसने अपनी जीभ दांतो तले दबा दी…

ये क्या बोल गयी पगली..

 

रामू ने चौंकते हुए उसके चेहरे को देखा और साइकल रोक दी.. और बोला : “मतलब…?”

 

अब वो अपनी बात से पलट नही सकती थी….

उसका दिमाग़ जोरो से चलने लगा…

अब वो लाला का नाम तो ले नही सकती थी की उसने पहले भी उसे इस तरह के काफ़ी मज़े दिए है उपर से…

इसलिए उसने ना चाहते हुए भी रीतु का नाम ले दिया

 

मीनू : “वो…वो भाई….. रीतु और मैं अक्सर एक दूसरे के साथ ऐसे खेल खेला करते है… तब भी ऐसा ही फील होता है…”

 

रामू के तो रोंगटे खड़े हो गये ये सुनते ही…

यानी बंद कमरे में ये दोनो यही किया करती थी….

गुस्सा तो उसे बहुत आया ये सुनकर पर अगले ही पल उसके दिमाग़ में रीतु का जवान और नंगा जिस्म कौंध गया…

 

 

 

एक दम पका हुआ फल था वो…

उसके बारे में पहले उसने कई बार सोच-सोचकर मुट्ठ मारी थी…

वो भी उसे प्यार भरी नज़रों से देखा करती थी…

पर पिताजी की मृत्यु के बाद वो सब कहां गायब हो गया ये उसे भी पता नही चला…

आज मीनू ने जब रीतु के साथ उस तरह की हरकत करने की बातें कही तो उसे वो सारी बातें याद आती चली गयी..

 

उसकी बहन तो अपनी तरफ से पहले ही लाइन दे रही थी…

अब रीतु का ये राज जानकार रामू के दिमाग़ में उसे पाने का एक फूल प्रूफ प्लान बनना शुरू हो चुका था..

 

और इसलिए लिए उसे पहले मीनू को अपने जाल में फँसना पड़ेगा..

और यही करने तो वो घर जा रहा था..

 

इसलिए वो बड़े प्यार से बोला : “ओह्ह …रीतु के साथ ना…वो तो घर वाली बात है… उसके साथ आए या मेरे साथ..मज़ा मिलना चाहिए बस…आज भी वैसा ही मज़ा दूँगा घर चलकर…”

 

वो भी खुश हो गयी…

और खुशी के मारे उसकी छातिया थोड़ी और बाहर निकल आई…

जिन्हे देखकर रामू का लंड स्टील का डंडा बनकर मीनू की पीठ में चुभ रहा था…

 

खैर, किसी तरह से वो घर पहुँचे..

मीनू उछलकर साइकल से उतरी और उपर वाले कमरे में भागती चली गयी…

एक बार फिर से रामू उसके हिलते हुए चूतड़ देखकर अपना लंड अड्जस्ट करने लगा..

 

मीनू लगभग भागती हुई सी अपने कमरे में गयी और वहां से सीधा बाथरूम में.

 

पूरे रास्ते अपने भाई के ठुड्ड अपने कुल्हो पर खाने की वजह से उसकी गांड लाल हो चुकी थी…

और उसकी वजह से उसकी चूत में जो रक्त संचार हुआ था उससे वो भी एकदम गीली और लाल हुई पड़ी थी…

 

 

 

उसने अपनी सलवार और कच्छी निकाल फेंकी और तौलिये से अपनी गीली चूत को अच्छी तरह से सॉफ किया…

पर वो जितना भी सॉफ करती उतना ही गीलापन अंदर से बाहर निकल आता…

आख़िर में थक हारकर उसने दूसरी कच्छी उठाकर पहन ली और उपर से उसने वही कल रात वाली स्कर्ट पहन ली, उपर की कमीज़ उतारकर एक ढीला सा टॉप पहन लिया..

 

तब तक रामू भी उपर आ गया…और आवाज़ देकर उसने मीनू को बाहर आने को कहा..

 

वो तो पहले से ही तैयार थी…

सकुचाते हुए वो बाथरूम से ऐसे निकली जैसे कोई दुल्हन अपनी सेज की तरफ जाती है..

 

रामू का लंड अभी तक खड़ा था और आज तो उसने उसे बिठाने और छुपाने की भी कोई चेष्टा नही की,

वो चाहता था की उसके उभार को उसकी बहन देखे और जैसे वो तड़प रहा है वो भी तडपे..

 

और हुआ भी ऐसा ही…

बाथरूम से निकलकर , आँखे झुका कर जब वो रामू के करीब पहुँची तो उसकी झुकी नज़रें सीधा अपने भाई के उभार पर ही गयी..जो उसकी धोती में खड़ा हुआ, बँधा हुआ, अपने कड़कपन का एहसास दे रहा था..

 

उसे देखते ही उसके तन बदन में एक लहर सी दौड़ गयी..

चूत गिचगिचा गयी और उसमें से गाड़ा रस एक बार फिर से रिसने लगा..

 

रामू ने उसे पकड़ कर उसके बेड पर लिटा दिया और बोला : “चल अब उल्टी होकर लेट जा …मैं तेरी टाँगो की मालिश कर देता हूँ …”

 

वो बिना कुछ कहे, उसकी बात मानकर , अपनी गांड उचका कर बेड पर लेट गयी…

कल रात के मुक़ाबले आज वो कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित थी, शायद इसलिए क्योंकि आज उन्हे रोकने और टोकने वाला कोई नही था…

पूरे घर पर वो दोनो जवान जिस्म अकेले ही थे.

 

रामू ने तेल की शीशी उठाई और काँपते हाथो से उसकी लंबी स्कर्ट को उठा कर वो तेल उसकी नंगी टाँगो पर डाल कर उन्हे मसलने लगा..

 

एक चिर परिचित सा एहसास मीनू को फिर से गुनगुना गया…

वो अपनी पतली और सुरीली आवाज़ में कराह उठी.

 

”आआआआआअहह भैयययययययययययययया”

 

 

 

और आज तो रामू कल की तरह झिझक भी नही रहा था…

उसके हाथ धीरे-2 उपर आते गये जहां उसकी जाँघो का माँस और भी ज़्यादा होता चला जा रहा था…

रामू की उंगलियां उसके गोरे माँस में धंसकर एक लाल निशान बना रही थी.

 

रामू ने मीनू की स्कर्ट थोड़ी और उपर की तो उसे उसकी शहद में भीगी कच्छी दिखाई दे गयी…

शक तो उसे पहले से था की वो भीग रही होगी नीचे से पर उसके गीलेपन को देखकर उसे पूरा यकीन हो गया की वो पूरी तरह से इस खेल का मज़ा ले रही थी.

 

 

 

रामू ने उसकी स्कर्ट के हुक्स को खोलते हुए कहा : “ये उतार दे..बेकार में तेल लगने से खराब हो जाएगी ..”

 

उसने मासूम बने रहने का नाटक करते हुए उस ढीली सी स्कर्ट को नीचे सरका दिया…

 

अब वो सिर्फ़ एक पेंटी में उसके सामने उल्टी होकर लेटी थी…

 

और कल की तरह उसने एक बार फिर से उसकी कच्छी के लास्टिक को दोनो तरफ से पकड़ा और उसे नीचे करके उतार दिया…

इस बार तो उसने कल की तरह ओपचारिकता करके बोलने की भी ज़रूरत नही समझी…

 

और मीनू ने भी अपने भाई के सामने पूरी तरह से समर्पण करते हुए अपनी कमर उठा कर अपनी गीली कच्छी उतार दी और रामू को एक बार फिर से अपने भरे हुए तरबूजों के दर्शन करवा दिए…

 

 

 

 

इस बार तो उन्हे रामू ने जी भरकर देखा…

अपनी उंगलियों से उन्हे अच्छी तरह से दबाया…

उसकी उंगलियां बड़े ही डेंजर तरीके से उसकी चूत के इर्द गिर्द धूम रही थी…

पर वो उन्हे अंदर की तरफ नही धकेल रहा था…

शायद अपनी बहन को सताने का उसे एक अच्छा उपाय मिल चुका था…

 

उसने तेल की धार इस बार सीधी उसकी सुबक रही चूत पर गिराई , जिसे महसूस करके वो ऐसे छटपटाने लगी जैसे उसकी ठरक को बड़ाने वाला कोई बटन दबा दिया हो उसने..

 

”ओह भाई………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…… उम्म्म्मममममममममममम….. ये क्या कर रहे हो…..अहह”

 

पर उसने उसकी बात का जवाब देने की कोई ज़रूरत नही समझी और एक बार फिर से उसकी गांड का आटा गूंधने लगा…

और इस बार भी उसने उसकी चूत को अनदेखा ही किया, जिसपर उसकी उंगलियाँ महसूस करने के लिए वो अब और ज़ोर से तड़पने लगी थी..

 

गोर करने वाली बात ये थी की यहाँ तो पैरों में लगी उस मोच की मालिश चल रही थी जो कभी लगी ही नही थी..

और लगी भी थी तो वो काफ़ी नीचे थी…

यहां उपर आकर रामू किस करह की मालिश में मशगूल हो चुका था ये शायद उसे भी पता नही चल सका था..

 

मीनू के होंठ फड़फड़ा रहे थे….

वो सिसकारी मारते हुए बोली : “आह्ह्ह …. भैययय्या……… वहां करो ना….. जहाँ तेल गिराया था…..अहह”

 

रामू ने बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी पर काबू किया क्योंकि वो उसकी हालत को अच्छे से समझ पा रहा था..

 

वो बोला : “हाँ मीनू..वहीं तो कर रहा हूँ ….तेरी गांड की अच्छे से मालिश कर रहा हूँ …”

 

एक ही बार में उसने वो सारी हदें पार कर दी जिन्हे बनने में सालो का समय लगा था…

ना चूतड़ बोला ना हिप्स…

सीधा गांड बोलकर रामू ने दोनो के बीच की शर्म की दीवार को पस्त कर दिया..

 

मीनू सीसीया उठी : “आअहह……गांड पर नही….वहां ….व .वो……वो …..मेरी…. पुसी….पर”

 

रामू ने अंजान बनने का नाटक किया : “क्या ?….कहां पर….पुस्सी…..ये का होत है…”

 

मीनू भी जानती थी की उस अनपड़ को भला पुसी का क्या पता…

वो तो ठेठ देहाती था…

उसे तो यही गांड चूत वाली बात समझ आनी थी…

 

और वैसे भी, रामू ने खुद ही उस तरह की भाषा का इस्तेमाल करके ये जता दिया था की उनमें अब भाई बहन जैसा कुछ नही रहा है…

 

मीनू : “भाई….वो…वो…मेरी चूत पर…वहां की मालिश करो ना….”

 

रामू का लंड एकदम बौरा सा गया ये सुनते ही…

उसकी खुद की सग़ी बहन जो उसके सामने नंगी होकर उल्टी लेटी हुई थी..

 

और फिर उसने भी अपने काँपते हुए हाथो से ढेर सारा तेल अपनी उंगली में समेटा और उसे धीरे से लेजाकर उसकी कराहती हुई चूत पर रख कर धीरे से दबा दिया.

 

पक्क की आवाज़ के साथ वो तेल से भीगी उंगली उसकी चूत के अंदर फिसलती चली गयी और पूरी अंदर घुसकर ही मानी…

 

”आआआआआआआआआअहह ओह भेययय्याआआआआ….. उम्म्म्मममममममममम”

 

 

 

ऐसे मौके पर उसे भी भैय्या कहने में एक अलग ही तरह की उत्तेजना महसूस हो रही थी..

 

अब तो उनके बीच की रही सही शर्म की दीवार भी गिर चुकी थी…

इसलिए रामू ने अपने दूसरे हाथ से अपनी धोती की गाँठ खोल कर अपने हुंकारते हुए शेर को बाहर निकाल लिया और अपनी धोती एक तरफ फेंकते हुए वो अपने खड़े हुए लंड को लेकर सीधा अपनी फूल सी बहन के उपर लेट गया…

 

”अहह भाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स”

 

उसकी गांड के चीरे पर उपर से नीचे तक एक डंडे की भाँति वो धँस कर रह गया…

मीनू को ऐसा लगा जैसे उसकी गांड पर कोई लंबा सा डंडा फँसा कर रख दिया हो…

 

उसका फूल सा शरीर चरमरा सा गया अपने भाई के वजन से..

पर इस वक़्त तो उसे अपने शरीर से ज़्यादा नीचे रिस रही चूत की चिंता थी , जिसमें कभी भी उसके भाई का लंड घुस सकता था..

 

पर वो इतना आसान भी नही था और रामू उसे इतनी आसानी से करना भी नहीं चाहता था…

आज वो अपनी माँ के घर पर ना होने का पूरा फायदा उठा लेना चाहता था…

 

भले ही मीनू अपने भाई के वजन के तले दबी जा रही थी पर फिर भी उसके लंड के एहसास को अपनी चूत पर महसूस करके उसे मज़ा ही मिल रहा था..

 

रामू ने धीरे-2 अपने शरीर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया..

जैसे रेल गाड़ी में बैठकर धक्के लगते है, ठीक वैसे ही वो अपने शरीर को हिलाने लगा..

 

मीनू को अपनी गांड पर उस डंडे का एहसास उपर से नीचे तक महसूस हो रहा था..

एक अजीब सी शक्ति उसकी चूत के अंदर से उस लंड को अपनी तरफ बुला रही थी पर रामू था की उसे उपर ही उपर से घिस्से मारे जा रहा था..

 

बार-2 वो अपने फड़कते होंठो से ये बोलने की कोशिश करती की अब डाल भी दो ना भैय्या पर वो कह नही पाती थी…

रामू भी उसकी हालत को देखकर उन पलों का मज़ा ले रहा था..

 

उसने लगभग अपने दोनो होंठ उसके कान में घुसेड़ते हुए कहा : “क्या हुआ मीनू …अब कैसा फील हो रहा है तुझे…बोल ना…”

 

वो अपनी उसी सुरीली आवाज़ में कराहती हुई बोली : “अहह…..अच्छा …. बहुत अच्छा …… कल से भी ज़्यादा…… उम्म्म्मम…….”

 

 

 

रामू तो उसे पूरी तरह से अपनी बोतल में उतारने के चक्कर में था…

नीचे का नाड़ा तो वो खोल ही चुका था अब उपर का हुक खोलना बाकी रह गया था..

 

वो बोला : “ओ मीनू…ऐसा मज़ा तुझे पूरा लेना है क्या…”

 

मीनू तो जैसे बरसों से इसी बात का इंतजार कर रही थी…

वो कराहते हुए बोली : “भैय्या ..आज सारे मज़े दे दो मुझे….मैं तैयार हूँ …”

 

रामू मन में बुदबुदाया ‘साली…चुदाई के लिए तो ऐसे कुलबुला रही है जैसे डेली पैसेंजर हो….‘

 

पर उसे अभी चोदने से पहले वो उसके फूल से शरीर का पूरा मज़ा लेना चाहता था..

 

वो उसके उपर से हटा और उसे सीधा होकर लेटने को कहा..

और रामू ने उसे अपनी टी शर्ट भी उतारने को कहा ताकि वो उसकी पूरी तरह से मालिश कर सके ..

 

वो उठी और अपनी टी शर्ट उतार कर वो जन्मजात नंगी होकर अपने बिस्तर पर लेट गयी…

उसे अभी शर्म आ रही थी इसलिए उसने अपनी आँखे बंद कर ली…

पर रामू तो बेशर्म बन चुका था…

अपनी जवान बहन को अपने सामने नंगा लेटे देखकर उसकी तो आँखे फटी की फटी रह गयी…

वो उसके रसीले बदन को उपर से नीचे तक देखते हुए अपने लंड को मसलने लगा..

 

 

 

और लंड मसलते हुए वो बुदबुदाया : “साली….ऐसा नशीला बदन है तेरा…पहले पता होता तो कब का चोद चुका होता..”

 

और मीनू तो जैसे एक बादल के टुकड़े पर तैर रही थी…

उसके चारों तरफ का माहौल इतना रोमॅंटिक हो चुका था की इस वक़्त तो उसकी चूत पर कोई एक दस्तक भी दे डाले तो वो झड़ जाती…

सैक्स में ऐसी उत्तेजना का संचार होता है शरीर में ये उसे आज ही पता चला..

अब तो वो मन ही मन यही चाह रही थी की रामू अपने लंड का खूँटा जल्द से जल्द उसकी चूत में गाड़ डाले और उसे इतनी बेरहमी से चोदे की लाला के लंड को लेने में भी उसे तकलीफ़ ना हो.

 

रामू ने एक बार फिर से उसकी बॉडी पर ढेर सारा तेल डाला और उसे मसलने लगा…

तेल में चुपड़ कर उसकी बॉडी देसी परांठे जैसी हो गयी..

मन तो उसका कर रहा था की इस करारे परांठे को वो चपर –2 करके खा जाए…

 

 

 

पर उससे पहले उसे चुदाई से पहले की जाने वाली सारी क्रियाओं का मज़ा भी तो लेना था..

 

वो धीरे से नीचे झुका और उसने मीनू के कड़क निप्पल को मुँह में भरकर चूस लिया…

 

”आआआआआआआआअहह ओह भैय्याययययययाआ”

 

 

 

लाला के पोपले मुँह के मुक़ाबले रामू के सख़्त होंठ वाकई में कमाल के लग रहे थे उसे…

उसने रामू के सिर पर हाथ रखकर उसे अपनी छाती के उपर गिरा कर भींच लिया ताकि वो उसे अच्छी तरह से चूस सके..

 

रामू तो पहले से ही अपना पूरा मुँह खोलकर उसके मुम्मे को मुँह में डाल चुका था…

मीनू ने जब हेल्प की तो एक ही बार में उसने दोनो निप्पल अपने मुँह में लेकर उनपर दांतो से काट लिया, एक करंट सा दौड़ गया अपने भाई की इस हरकत से उसके सहरीर में.

 

धीरे-2 वो नीचे की तरफ जाने लगा…

जिस खुश्बू को वो कल रात से भुला नही पाया था उसकी तह तक जाकर वो उसे चूस लेना चाहता था…

और जैसे ही उसका चेहरा मीनू की चूत के उपर पहुँचा, तो मीनू ने एक जोरदार चीख मारकर उसे खुद ही अपनी चूत के अंदर खींच लिया…

 

 

 

”ओह भईआययय्याआआआआआ……. उम्म्म्मममममममममम….. चाआटो मुझे……. अहह चूऊस डाआलो……… मिटा दो मेरे अंदर की……साआरीइ…..खुजली…”

 

जिस तरह से वो ये सब बोल रही थी उससे सॉफ पता चल रहा था की ये उसका पहली बार नही है..

पर जैसा की मीनू खुद ही बोल चुकी थी की उसने रीतु के साथ ये सब मज़े लिए है तो रामू भी अपने काम में लगा रहा, अगर उसे ये पता चल जाता की जिस चूत को वो चूस रहा है उसे रीतु के अलावा लाला ने भी चूसा है तो पता नही वो क्या कर बैठता…

 

पर अभी के लिए तो उसे अपनी बहन की इस कुँवारी चूत को चूसने में काफ़ी मज़ा आ रहा था…

ऐसा लग रहा था जैसे अन्नानास का ताज़ा रस निकल रहा है उसकी चूत से….

थोड़ा खट्टा और थोड़ा मीठा…

और उसकी चूत के मखमली होंठो को चूसने में भी एक अलग ही मज़ा मिल रहा था….

 

 

 

और अचानक मीनू का शरीर हिचकोले खाने लगा…

आज की शाम का पहला ऑर्गॅज़म उसके शरीर से निकालकर चूत के रास्ते रास बनकर बाहर निकलने लगा जिसे उसके भाई रामू ने बेख़ुबी से चूस कर निपटा दिया…

 

और अपने उन भीगे होंठो को लेजाकर उसने सीधा मीनू के होंठो पर रख दिया और उन्हे बुरी तरह से चूसने लगा..

 

अपने भाई से मिल रही पहली किस्स और वो भी अपनी चूत के रस से भीगे होंठो से…

ये मीनू की उत्तेजना को बड़ाने के लिए प्रयाप्त था…

वो रामू की गोद में चड़कर उससे बुरी तरह से लिपट गयी, जैसे उसके अंदर समा जाना चाहती हो

और उस स्मूच का जवाब उससे भी बड़ी वाली स्मूच से देने लगी

 

 

 

उसने तो अपनी टांगे भी फेला डाली…

ताकि इस किस्स को करते-2 रामू अपना लंड अंदर पेल ही डाले…

जो होगा देखा जाएगा…

पर रामू तो रामू ही था..

अभी तो उसे अपने राजा बेटे यानी अपने लंड को भी थोड़े मज़े दिलवाने थे

और वो काम उसकी चूत के होंठो से ज़्यादा उसके मुँह के होंठ कर सकते थे.

 

इसलिए उसने मीनू की उस चुदाई के ऑफर को थोड़ी देर के लिए साइड में रखते हुए उसे अपने लंड की तरफ धकेल दिया ताकि वो उसे अच्छे से चूस कर चुदाई के लिए तैयार कर सके..

 

मीनू भी काफ़ी देर से अपने भाई के छोटे भाई को पकड़ने और मुँह में लेने के लिए तड़प रही थी…

अब मौका मिला था तो वो उसे पूरी तरह से इस्तेमाल कर लेना चाहती थी…

 

वो नागिन की तरह सरकती हुई नीचे तक गयी और रामू के लंड को हाथ में पकड़ कर उसे एकटक निहारने लगी… अपनी चूत को फाड़ने वाले इस लंड को वो अपनी आँखो में हमेशा के लिए बसा लेना चाहती थी…

जैसे पहला प्यार कभी नही भुलाया जाता ठीक वैसे ही वो इस पहली चुदाई में होने वाले हथियार को हमेशा के लिए अपनी आँखो में बसा लेना चाहती थी…

ताकि आज के बाद जब भी उसकी चुदाई हो तो इस लंड को मन में सोचकर उस पल को याद कर सके और पहली चुदाई का मज़ा हर बार ले सके.

 

उसने धीरे से अपनी साँप जैसी जीभ निकाली और उसके लंड पर आई ओस की बूँद को चाट कर निगल गयी…

 

”आआआआआआआअहह भाई……. इतना मीठा है तुम्हारे लंड का पानी…… उम्म्म्ममममम”

 

 

 

और फिर उसके बाद तो वो रुकी ही नही…..

अपनी जीभ और होंठो को उस मोटे खीरे जैसे लंड के चारों तरफ लपेटकर वो उसकी मोटाई और गहराई नापने लगी….

रामू ने उसके चेहरे को अपने हाथो से पकड़ा और अपना मोटा और लंबा लंड उसके मुँह में डालकर उसके मुँह को चूत की तरह चोदने लगा..

उसके मखमली होंठो में लंड फँसाकर हिलाने में इतना मज़ा मिल रहा था तो उसकी चूत मारने में कितना मज़ा आएगा, यही सोचकर उसका लंड और भी कड़क होकर अंदर बाहर होने लगा.

 

 

 

रामू अपनी आँखे बंद करके उसके रेशमी होंठो को अपने लंड पर महसूस करके कराहने लगा….

 

”अहह….. ओह मीनू …… मेरी ज़ाआआआनन्न…. उम्म्म्ममममममममम…. चूऊस साली……अहह……. खा जा इसे पूरा ….”

 

खाने के नाम से उसे लंड के नीचे लटके टटटे भी याद आ गये…

उसने लंड को बाहर निकाला और उसकी बॉल्स मुँह में भरकर उनका रस निचोड़ने लगी….

 

रामू को भी आज से पहले ऐसा मज़ा आज तक नही मिला था….

आज से पहले तो वो अपने हाथ का खिलाड़ी था

और वो जानता था की अब उसे अपना हाथ इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं पड़ेगी क्योंकि अब तो ये रोज ही हुआ करेगा…

 

मीनू तो उत्तेजना के मारे इतनी पागल सी हो चुकी थी की उसे अब रामू के हर अंग को चूसने में मज़ा मिल रहा था… उसकी बॉल्स को चूसते –2 वो कब उसकी गांड के छेद को चाटने लगी ये भी उसे पता नही चला…

रामू के लिए ये एक अलग तरह का एक्सपीरियेन्स था…

एक अजीब तरह की गुनगुनाहट का एहसास हुआ उसे जब मीनू ने उसके लंड को मुट्ठी में भरा,

उसके झूल रहे टटटे उसकी आँखो में धाँसे जेया रहे थे

और उसके करिश्माई होंठ रामू के निचले छेद पर बुरी तरह जमकर वहां की चुसाई कर रहे थे….

रामू का पूरा शरीर हवा में तैर रहा था…

 

 

 

और अचानक अपनी बंद आँखो के पीछे उसे ये एहसास हुआ की ये जो मज़ा उसे मिल रहा है वो मीनू नही बल्कि उसकी माँ उसे दे रही है…

यानी इस वक़्त भी उसके जहन में उसकी माँ के ख़याल ही आ रहे थे…

 

और उसे पता भी नही चला की कब अपने चरम पर पहुँचते हुए उसके मुँह से मीनू के बदले अपनी माँ के लिए वो शब्द निकल गये जो शायद उसे अपनी बहन के सामने बोलने ही नही चाहिए थे…

 

”ओह माँ आआआआआआ….. चूस मेरे लंड को…….. खा जा इसे….माँ ”

 

और अगले ही पल उसने चौंकते हुए अपनी आँखे खोल दी….

और ऐसा ही कुछ मीनू ने भी किया जब उसने अपने भाई के मुँह से अपनी माँ के लिए वो सब सुना…

 

पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी…

कमान से निकले तीर की भाँति शब्द भी लौटकर आने वाले नही थे…

और ना ही वो पिचकारी लोटने वाली थी जो उसके उन शब्दो के साथ ही उसके लंड से निकली थी…

 

 

 

एक के बाद एक पिचकारी मारते हुए रामू के लंड ने मीनू के चेहरे को तर बतर कर दिया…

 

पर झड़ने के बाद होने वाली वो खुशी उसके चेहरे से गायब थी…

क्योंकि मीनू की नज़रें उससे लाखो सवाल कर रही थी.

 

और उसे पता भी नही चला की कब अपने चरम पर पहुँचते हुए उसके मुँह से मीनू के बदले अपनी माँ के लिए वो शब्द निकल गये जो शायद उसे अपनी बहन के सामने बोलने ही नही चाहिए थे…

 

”ओह माँ आआआआआआ….. चूस मेरे लंड को…….. खा जा इसे….माँ ”

 

और अगले ही पल उसने चौंकते हुए अपनी आँखे खोल दी…. और ऐसा ही कुछ मीनू ने भी किया जब उसने अपने भाई के मुँह से अपनी माँ के लिए वो सब सुना…पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी…

कमान से निकले तीर की भाँति शब्द भी लौटकर आने वाले नही थे…और ना ही उसके लंड की वो पिचकारी लोटने वाली थी जो उसके उन शब्दो के साथ ही उसके लंड से निकली थी…

 

 

 

एक के बाद एक पिचकारी मारते हुए रामू के लंड ने मीनू के चेहरे को तर बतर कर दिया…पर झड़ने के बाद होने वाली वो खुशी उसके चेहरे से गायब थी…क्योंकि मीनू की नज़रें उससे लाखो सवाल कर रही थी.

 

**********

अब आगे

**********

 

रामू कुछ देर तक उसके सवालो से भरे चेहरे को देखता रहा और फिर बिना कुछ कहे अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल गया और अपनी साइकल उठा कर फिर से खेतों की तरफ चल दिया.

 

मीनू की तो समझ में ही नही आया की ये एकदम से हुआ क्या है…

उसके और रामू के बीच की वो दीवार अब गिर चुकी थी और ऐसे में तो रामू को उसके नंगे हुस्न को देखकर पागल हो जाना चाहिए था…

पर वो साला तो माँ के बारे में सोच रहा था..

इसका मतलब सॉफ था, वो उससे ज़्यादा अपनी माँ का दीवाना था,

तभी तो अपनी नंगी बहन से लंड चुसवाते हुए भी उसे उन्ही का ख़याल आ रहा था.

 

वो झल्लाती हुई सी उठी और अपने बाथरूम में घुसकर अपना चेहरा सॉफ करने लगी…

अब तो रीतु ही इस बात का कोई समाधान निकाल सकती है…

इसलिए उसने अपना हुलिया ठीक किया और कपड़े पहन कर वो रीतु के घर की तरफ चल दी.

 

उधर शाम को लाला ने अपने लंड की गर्मी देखते हुए अपनी दुकान जल्दी बढ़ा दी…

उसकी धोती में क़ैद रामलाल तभी से नाज़िया के नाम की रट लगाए हुए था जब से उसकी माँ शबाना उसे शाम को घर आने का न्योता देकर गयी थी.

 

एक बार फिर से शबाना की बेटी को उसकी अम्मी के सामने चोदने का मज़ा वो खोना नही चाहता था..

इसलिए अपनी बुलेट पर चावल की बोरी लादकर वो उनके घर की तरफ चल दिया.

 

शबाना को शायद लाला का ही इंतजार था, इसलिए दरवाजा पहले से ही खुला मिला उन्हे….

लाला अंदर आया, बोरी को साइड में रखा और घर के अंदर चल दिया.

 

पूरे घर में शांति सी छाई हुई थी और अंधेरा भी था, लाला तो अपने लंड को लालटेन बनाकर नाज़िया को ढूंढता हुआ सा अंदर घुसता चला गया..

नाज़िया तो नही दिखी पर अपने कमरे में कपड़े बदलती हुई शबाना ज़रूर दिखाई दे गयी,

उसका गीला बदन देखकर पता चल रहा था की वो अभी-2 नहा कर आई है…

घर में लाइट नही थी, इसलिए बाहर जल रही मोमबत्ती की हल्की रोशनी वहां पहुँच रही थी जिसमें उसके हुस्न का दीदार हो रहा था लाला को…

वो अभी सिर्फ़ कच्छी ही पहन पाई थी और उपर से नंगी थी और लाला के लंड को और सख़्त करने के लिए उसके वो बड़े मुम्मे ही काफ़ी थे..

 

 

 

 

लाला : “हाय …मेरी जान….क्या कहर मचाने का इरादा है…”

 

शबाना तो लाला को अपने कमरे में देखते ही एकदम से चोंक सी गयी…

ऐसे नाटक करने लगी जैसे उनके आने का पता ही नही चला उस छिनाल को.

 

अपने मुम्मो को अपने हाथो से ढ़कते हुए वो हड़बड़ाई हुई सी आवाज में बोली : “ओह्ह्ह .. लालाजी…आप……!!!!”

 

लाला ने अपनी धोती को उपर करके अपना सेवक रामलाल बाहर निकाल लिया ,

लाला के चमक रहे सुपाड़े को देखकर उसकी गीली कच्छी और भी गीली होने लगी,

उसकी चूत अपने ही रस में डूबकर गिचगिचाने लगी…..

 

लाला : “आया तो मैं नाज़िया के लिए था पर तेरे हुस्न को देखकर अब आँखे हटाने का मन सा नही कर रहा ….”

 

तब तक शबाना भी अपनी वो नकली शर्म त्याग कर उनके करीब आ गयी और अपने मोटे मुम्मे लाला की छाती से रगड़ते हुए बोली : “नाज़िया और मुझमें ज़्यादा फ़र्क थोड़े ही है लालाजी…. उससे ज़्यादा आग लगी रहती है मेरी निगोडी चूत में ..और आपके लंड को देखकर तो वो और भी भड़क जाती है…”

 

उसकी बातो से लाला को जलन की बू आ रही थी…

कही ऐसा तो नही था की उसके आने से पहले शबाना ने जान बूझकर नाज़िया को कहीं भेज दिया हो…

भले ही माँ थी वो उसकी पर एक औरत के प्रेमी पर जब उसकी खुद की बेटी नज़र डाले तो वो अपना आपा खो ही देती है…

 

पर लाला को इससे आगे कुछ सोचने समझने का मौका ही नही मिला क्योंकि नाज़िया ने अपने गीले और नंगे बदन को लाला से रगड़ते हुए अपना सारा पानी पोंछ डाला…

लाला की घनी मूँछ और दाढ़ी से भरे चेहरे को वो बेतहाशा चूमने लगी, लाला के लंड को पकड़ कर उसे दोहने लगी और अपने पैर उचका कर उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी..

 

लाला : “ओह्ह्ह्ह …..शबाना…..मेरी जान …. आज लगता है तुझे कुछ ज़्यादा ही गर्मी चढ़ी हुई है….”

 

पर शबाना उन बातो का जवाब देने के मूड में नही थी इस वक़्त…

वो लाला के गठीले बदन को चूमते हुए उनके कुर्ते को निकालने लगी और जैसे ही वो उतरा उसने अपने प्यासे होंठ लाला के निप्पल पर लगा कर उनका दूध पीना शुरू कर दिया…

 

लाला : “ओह मदारचोद ……साआाअली…… उम्म्म्मममममम…… चाट ले इसे…… आज तो तुझे मेरे टटटे भी चाटने होंगे…. वो तुझ जैसा कोई और नही चाट्ता….”

 

अपनी ये तारीफ सुनकर वो तैश में आ गयी और उन्हे चूसते हुए नीचे तक जाने लगी…

लाला ने एक झटके में अपनी धोती भी उतार फेंकी और वो अब किसी रेसलिंग के पहेलवान की तरह पूरा नंगा खड़ा था शबाना के अखाड़े में …

वो नीचे बैठी और लाला के टट्टो को मुँह में लेकर उन्हे जोरों से चूसने लगी जैसे उसके कल के नाश्ते का मक्खन उनमें से ही निकलेगा…

 

 

 

शबाना मे एक खूबी ज़रूर थी जो लाला को हमेशा से पसंद थी और वो ये की उसे अपनी जीभ और मुँह को उसके किसी भी अंग में घुसाने में कोई शर्म या घिन्न नही आती थी…

चाहे वो उसके टटटे हो या फिर उसकी गांड का छेद.

 

लाला की बॉल्स चूसने के बाद उसका अगला निशाना लाला की गांड का छेड़ ही था…

उसने लाला के एक पैर को अपने कंधे पर रखा और नीचे घुस कर उन्हे नीचे से चाटने लगी…

जैसे कोई कार मैकेनिक गाड़ी के नीचे घुस कर काम करता है, ठीक वैसे ही वो लाला की गाड़ी की मरम्मत करने में लगी हुई थी..

 

 

 

लाला का मोटा लंड किसी हिचकोले खा रहा था

 

”अहह शबाआंआआआआआना …… उम्म्म्ममममममममममममममम…. मजाआाआ आआआआआअ गय्यहा आआआआअ…. अहह….”

 

और तभी लाला की आँखे खुली और उन्होने शबाना के ठीक पीछे नाज़िया को खड़े देखा….

जिसके हाथ में कुछ सिलाई के लाए हुए कपड़े थे जो शायद उसने किसी के घर देने के लिए भेजा था…

उसके चेहरे पर भी आश्चर्य के भाव थे क्योंकि वो भी जानती थी की लाला उसके लिए ही शाम को आने वाला है और शायद तभी से उसकी चूत में हो रही कुलबुलाहट उसे चैन से बैठने नही दे रही थी…

ऐसे में एकदम आख़िरी वक़्त पर जब उसकी माँ ने सिलाई के कपड़े देकर उसे देकर आने को कहा तो वो झल्ला गयी थी क्योंकि जहां उसकी अम्मी उसे भेज रही थी वो घर काफ़ी दूर था …

पर एक बात और थी की रास्ते में लाला की दुकान भी पड़ती थी, और वहां पहुँचकर उसने देखा की लाला दुकान बंद करके उसके घर की तरफ ही जा रहा है तो वो उसी शॉर्टकट रास्ते से वापिस घर की तरफ भाग ली पर तब तक उसकी माँ की चाल कामयाब हो चुकी थी,

लाला का लंड उसके हाथ में था और वो उसके कदमो में पड़ी उसके टटटे और गांड चाट रही थी…

 

अब लाला को भी थोड़ी मस्ती सूझी…

वो जानता था की नाज़िया की चूत भी उसके लंड के लिए उतनी ही मचल रही है जितनी की शबाना की,

पर शबाना ने अपनी चालाकी से पहले बाजी मार ली थी…

पूरी नंगी होकर वो इस खेल में पहले ही शामिल हो चुकी थी इसलिए अब उसे हटाया तो जा नही सकता था पर इतना ज़रूर था की इस खेल को थोड़ा और रोचक ज़रूर बनाया जा सकता था.

 

इसलिए लाला कुछ सोच समझकर बोला : “ओह्ह्ह ….शबाना …मेरी जान…माना की तेरे जैसे टटटे कोई नही चूसता पर नाज़िया जैसा लंड भी कोई और नही चूस सकता …कसम से…”

 

लाला का इतना कहना था की शबाना भरभराकर बोली : “ओह्ह्ह लाला…..वो कल की बच्ची क्या चूसेगी… मुझे देखकर ही तो सीखी है वो सब….”

 

इतना कहते हुए उसने लाला के रामलाल को मुँह में डाला और उसे उपर से नीचे तक अपनी थूक से नहला कर चूसने लगी..

 

अपनी माँ की ये बात सुनते ही नाज़िया भी जोश में आ गयी

और वो भी बेशर्मो की तरह उनके सामने आती हुई बोली : “नही अम्मी…..ऐसा नही है… मुझे सिखाने में आपसे ज़्यादा मेरे हुनर का हाथ है… मुझमें ही हमेशा से इस तरह से लंड को चूसने की ललक थी, मेरी सहेलियों ने अक्सर बताया था की लंड को कैसे चूसा जाता है, और लाला के लंड को चूसने से पहले मैने ना जाने कितने केले खाए थे अकेले में, घंटो उन्हें चूसकर प्रेक्टिस करती रहती थी, तब जाकर ऐसा हुनर आया है मुझमे …”

 

वो तो अपना मुक़द्दमा लेकर सीधा अपनी माँ के सामने कूद पड़ी थी..अनजाने में ही सही पर उनके घर में ज्यादा केले क्यों आते थे, इनका राज खोल दिया था नाज़िआ ने.

 

शबाना भी उसे एकदम से अपने सामने खड़े देखकर चोंक सी गयी,

क्योंकि उसे गये हुए अभी कुछ ही देर हुई थी और उसके अंदाज़े के अनुसार तो उसे अभी और भी टाइम लगना था वापिस आने में..

 

पर वो एकदम से सामने भी आ गयी और उसकी बात सुनकर अपनी दलील भी दे रही थी,

इससे सॉफ जाहिर था की उसे अपनी अम्मी की कही बात पसंद नही आई…

 

पर अब लाला के सामने वो अपनी बेटी से लड़कर उस बात का बतंगड़ नही बनाना चाहती थी,

इसलिए वो खड़ी हुई और अपनी बेटी को पूचकारते हुए प्यार से बोली : “अररी, आजा मेरी लाडो, मैं तो लाला से बस यही कह रही थी की ये तो एक खानदानी हुनर है जो मुझसे तेरे में गया है…तू अपना दिल छोटा ना कर…ये देख, लालाजी तो तेरे लिए ही आए है यहां ..और जब तक तू वापिस आती तो मैने सोचा की मैं ही इनकी कुछ खिदमत कर देती हूँ …पर अब तू आ गयी है तो तू भी आजा…”

 

साली बड़ी हरामी औरत थी वो…

उसने बड़े प्यार से अपनी बेटी को अपने शब्दो के जाल में उलझा कर उसे शांत करा लिया…

नाज़िया भी बात को ज़्यादा बढ़ाना नही चाहती थी क्योंकि लाला के आतिशी लंड को देखकर उसकी चूत बुरी तरह से पनिया रही थी…

ऐसे में वो अपनी अम्मी से लड़कर उस खूबसूरत लंड से हाथ धोना नहीं चाहती थी.

 

इसलिए उसने तुरंत अपनी कुरती उतार फेंकी और नीचे से अपनी शमीज़ को भी उतार दिया…

उसकी नन्ही और नुकीली ब्रेस्ट देखकर लाला का लंड और भी ज़्यादा ज़ोर से हुंकारने लगा…

अपनी कच्छी भी उसने एक ही झटके में उतार डाली और अब वो पूरी नंगी होकर खड़ी थी लाला के सामने,

और उसके नंगे हुस्न को देखकर लाला की लार टपके ही जा रही थी..

 

 

 

और अगले ही पल वो दोनो माँ बेटियां लाला के सामने बैठकर अपने-2 हिस्से के अंगो को चूसने और चुभलाने लगी..

 

नाज़िया ने लंड को चूसा तो शबाना ने लाला के टट्टो को…

 

खुशनसीब होते है वो लोग जिनके लंड और टटटे दो अलग-2 मुँह में होते है और वो भी एक ही वक़्त में…

और इस वक़्त लाला के साथ ऐसा हो रहा था…

वो तो अपना मुँह फाड़े , अपनी आँखे बंद किए ऐसे खड़ा था जैसे किसी देश का प्रधान हो…

 

और लाला के रामलाल को अच्छी तरह से खुश करने के बाद वो दोनो लाला का हाथ पकड़ कर पास पड़े बेड तक ले गयी और उन्हे लिटा कर दोनो लाला के इर्द गिर्द चिपक कर उन्हे चूमने लगी…

एक तरफ मोटे और गद्देदार मुम्मे थे और दूसरी तरफ नन्हीं और कड़क चुचियां..

लाला ने पूरी जिंदगी यही तो कमाया था जो उसे ऐसा सुख मिल रहा था…

और इसका सारा श्रेय उनके लंड रामलाल को जाता था जो इस उम्र में भी ऐसी परफॉर्मेंस देकर उन्हे इस तरह की ऐश करवा रहा था..

 

पहले चुदना नाज़िया को था इसलिए वो बिना किसी विरोध के लाला के उपर सवार हो गयी और और लाला की आँखो में देखते हुए उसने अपना हाथ नीचे डालकर रामलाल को पकड़ा और उसे अपनी चूत के मुहाने पर रखकर धीरे से सीसीया उठी और फिर अपनी माँ के चेहरे को देखते हुए वो धीरे-2 उस लंबे डंडे पर अपनी चूत के बल उतरने लगी…

 

एक तो डंडा इतना चिकना और उपर से चूत भी रस बरसा रही थी,

ऐसे में उस मोटे लंड को उस कमसिन चूत में उतरने में ज़रा भी तकलीफ़ नही हुई…

और जल्द ही वो पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में हड़प कर गयी..

 

 

 

और उसके बाद जब उसने लाला के सीने पर अपने हाथ रखकर अपनी कमर मटकानी शुरू की तो लाला सिर्फ़ उसकी नन्ही बूबियाँ हिलती हुई देखता रहा…

बाकी का काम यानी अंदर बाहर का वो खुद ही करती रही…

 

लाला के मोटे लंड पर उसकी कसी हुई चूत किसी मखमली कपड़े का एहसास दे रही थी…

हर बार जब वो अपनी रस से भीगी चूत को लाला के लंड पर ढप्प से टकराती तो चूत के रस की बूंदे छलक कर दूर तक जा गिरती..

 

 

 

और वो बूंदे जब शबाना के शरीर पर पड़ती तो वो ऐसे मचल उठती जैसे तपते हुए रेगिस्तान पर पानी का छिड़काव कर दिया हो…

 

अपनी बेटी को देखकर लाला के लंड को लेने की इच्छा उसमें भी थी…

पर अभी तो नाज़िया का नंबर लगा हुआ था, इसलिए उसे अपनी बार की प्रतीक्षा करनी थी…

 

और जल्द ही लाला के साथ-2 नाज़िया का शरीर भी अकड़ने लगा…

और जल्द ही लाला के जिस्म का लावा नाज़िया की चूत से निकले गर्म पानी के साथ मिलकर एक नये रसायन का निर्माण करने लगा…

 

”ओह लाला जी……….. अहह क्या लॅंड है आपका….. कसम से…… मन करता है की पूरी जिंदगी आपसे चुदवाती रहु…..अहह….”

 

उसकी माँ शबाना ने मन में सोचा की अभी से इसके ये जलवे है तो बड़ी होकर पता नही क्या कहर ढाएगी…

सच ही निकला था उसके मुँह से कुछ देर पहले की चुदाई के ये तरीके उसके अंदर से ही निकले है जो उसकी बेटी ने सीख लिए है…

 

लाला भी अपना सारा पानी निकाल कर अपने आप को थोड़ा हल्का महसूस कर रहा था…

 

 

 

नाज़िया का नम सा शरीर उसके उपर गिरा और वो उसके गुलाबी होंठो को चूसते हुए लंड की पिचकारियों का अंत तक मज़ा लेता रहा…

 

और इसी बीच शबाना सरककर उन दोनो की टाँगो के बीच पहुँच गयी और चूत और लंड के मिलन स्थल से निकल रही मलाई को चाटकार सॉफ करने लगी…

और करती भी क्यो नही आख़िर खुद की गरज जो थी उसे…

लाला के लंड को लेने की.

 

दूसरी तरफ मीनू भुनभुनाती हुई रीतु के घर पहुँच गयी…

और उसने एक ही साँस में रास्ते से लेकर लंड चुसाई तक की बात उसे सुना डाली और ये भी बताया की आख़िर में झड़ते हुए रामू ने किस अंदाज में अपनी माँ का नाम लिया था…

 

रीतु भी ये सब सुनकर गहरी सोच में डूब गयी…

मामला पहले से ज़्यादा गंभीर और पेचीदा हो चुका था…

पर अंदर ही अंदर वो जानती थी की अंत में इस खेल में कितना मज़ा आने वाला है…

 

रीतु के चेहरे पर पहले तो चिंता के भाव थे..

पर फिर धीरे-2 वो मुस्कुराने लगी

और ऐसे मुस्कुराइ जैसे मीनू की बात सुनने के बाद उसे अपनी अगली चाल के लिए कोई आइडिया मिल गया हो.

 

मीनू : “अब कुछ बोलेगी भी…मेरी हालत खराब हुई पड़ी है और तू मुस्कुराए जा रही है…कुछ तो बोल…”

 

रीतु : “अब हमे कुछ करने की ज़रूरत नही है…करेगा तो अब रामू और वो भी जैसा हम कहेंगे वैसा …”

 

मीनू : “मतलब ??”

 

रीतु : “मतलब ये मेरी जान की अब तेरी चूत को ज़्यादा इंतजार नही करना पड़ेगा…तेरा भाई रामू उसे बुरी तरह रोंदेगा, चोदेगा और अपना लंड अंदर डालकर इसमें अपना पानी भी निकालेगा…”

 

पीस कर बोल रहा था जैसे उसे चोदने के लिए नही बल्कि कच्चा खा जाने की बातें कर रहा हो..

रीतु का तो पता नही पर सीमा ने जब लाला के ये शब्द सुने तो वो किसी बंधुआ मजदूर की तरह उसकी बात मानकर बेड पर जा लेटी और अपनी टांगे दोनो तरफ फेला कर लाला से बोली : “आजा लाला….देर किस बात की है…मैं भी कब से तरस रही थी इस पल के लिए…. अब जल्दी से अपना लंड मेरी मुनिया में पेल और मुझे इस तड़पन से मुक्ति दिला…”

और आज तो लाला वैसे ही अपने आप को चुदाई का फरिश्ता समझ रहा था,
ऐसी मुक्ति दिलवाने के लिए ही तो उसने जन्म लिया था ..

वहीँ दूसरी तरफ रीतु मन में सोच रही थी की काश इस वक़्त ये मुनिया उसकी माँ की चूत नहीं बल्कि वो खुद होती, क्योंकि उसके पिताजी प्यार से उसे घर पर मुनिया ही तो बुलाया करते थे।

लाला ने उस गीले लंड को सीमा की चूत पर रखा और उसकी चुचियां पकड़कर बोला : “आज तेरी सारी प्यास मिटा दूँगा मेरी रानी…बस चीखें मत मारियो…”

और वो लाला ने इसलिए कहा था क्योंकि शादी के इतने सालो बाद भी उसकी चूत एकदम कसी हुई सी थी,
जो उसे देखते ही लाला समझ गया था की उसमें अगर उसका लंड घुसेगा तो साली चीख ज़रूर मारेगी ..

और लाला कभी ग़लत हुआ था जो आज होता…..

जैसे ही लाला ने नीचे झुकते हुए अपने लंड का भार उसके उपर डाला, वो उसकी चूत को किसी ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर घुसने लगा…

इतने महीनो बाद हो रही चुदाई की वजह से उसकी चूत की रही सही लंड जाने की जगह भी कसावट में बदल चुकी थी..
जिसे भेदना इस वक़्त रामलाल के लिए भी मुसीबत वाला काम बन चुका था…
अंदरूनी चूत की दीवारे, रामलाल के चेहरे पर ऐसे घिसाई कर रही थी जैसे उसे नोच ही डालेंगी..
पर अपना रामलाल उन खरोंचो की परवाह किए बिना एक बहादुर सैनिक की तरह अंदर घुसता चला गया और उस मांद के अंदर तक घुसकर ही माना…

और इन सबके बीच जो हाल सीमा का हुआ, उसे शब्दो में बयान करना मुमकिन ही नही है…

बस वो तो ऐसे चिल्ला रही थी जैसे लाला उसकी चुदाई नही बल्कि अपने लंड से उसकी चूत में ड्रिलिंग कर रहा है..

”आआआआआआआआआआहह …….. उम्म्म्मममममममममममम……. लाला……….. माआआआआआर दलाआआआआआअ रे………………”

और अपनी माँ की इस तकलीफ़ को उसकी बेटी ने आकर कम किया जब उसने अपनी गरमा गर्म चूत सीधा लाकर उनके मुँह पर रख दी….
इसके 2 फायदे हुए,
एक तो उसकी माँ की चीखें निकलनी बंद हो गयी
दूसरा उसकी खुद की चूत में जो कुलबुली हो रही थी वो भी एकदम से मिट गयी…

सीमा को भले ही लाला के लंड से तकलीफ़ हुई थी शुरू में ,
पर बाद में उसने जब धीरे-2 झटके मारने शुरू किए तो उसके आनंद की सीमा ही नही रही,
एक मिनट में ही उसकी छींके लंबी सिसकारियों में बदल गयी…
लेकिन वो सिसकारियां भी रीतु की चूत तले दब कर रह गयी थी
पर इधर उधर से फुसफुसाती आवाज़ में जो भी बाहर आ रहा था उससे सॉफ जाहिर था की वो मज़े की सिसकारियां ही है, और कुछ नही..

और उपर से रीतु की चूत का स्वाद भी ऐसे मौके पर पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट लग रहा था,
वो भी शायद इसलिए की लाला की चुदाई देखकर रीतु की चूत से अपने आप ही स्पेशल किस्म का शहद निकलने लगा था, जो इस वक़्त उसकी माँ को काफ़ी भा रहा था,
और इसलिए वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे आज उसकी चूत की कटोरी का सारा रस वो ख़त्म करके ही मानेगी…
ठीक वैसे ही जैसे आज वो अपनी चूत का सारा रस लाला के लंड से चुदने के बाद बाहर निकाल देना चाहती थी…

और लाला की किस्मत तो देखते ही बनती थी इस वक़्त…
लंड चूत में था,
हाथ उसके मोटे मुम्मो पर थे,
ऐसे में जब नर्म होंठो वाली रीतु ने जब आगे बढ़कर उसके होंठो पर अपने होंठ लगाए तो उसकी आँखे बंद होती चली गयी….
नर्म होंठ, गर्म चूत और कड़क मुम्मे ,
लाला के सामने ऐसे व्यंजन लगे थे जैसे घर पर पहली बार आए दामाद की खातिरदारी होती है…
लाला उपर से नीचे तक तृप्त सा होकर चुदाई कर रहा था…

लाला का काला भूसंड लंड सीमा की चूत की सीमाएं लाँघता हुआ काफ़ी अंदर तक जा रहा था…
कभी बाहर भी…
और फिर से अंदर.

और जल्द ही सीमा की चूत में ऑर्गॅज़म का एक बुलबुला फूलने लगा,
ऐसा उसे शायद सालो बाद फील हुआ था,
वो अपनी बेटी की गांड को पकड़कर जोरो से उसकी चूत चूसने लगी और अपनी खुद की चूत में मिल रहे सेंसेशन को महसूस करके तड़पने लगी…

”आआआआआआआआआआहह लालाआआआआआआआआआ….. मज़ाआआआआअ आआआआआआआअ गया आआआआआआआ रे……. उम्म्म्ममममममममममम…… उफफफफफफफफफफफ्फ़……. क्या लंड है रे तेरा लाला …… आज पता चला की असली मर्द से चुदाई करवाने मे…. कैसा ….फ़ीईईईल्ल… होता है….. अहह….. ऑश लाला….. चोद मुझे….. ज़ोर से चोद …अहह…. और तेज लाला….. और तेज…..”

और इतना कहते –2 उसने तेज गति से अपनी चूत में टक्कर मार रहे रामलाल के आगे अपने घुटने टेक दिए…
और उसे अपनी चूत से निकले नारियल पानी से नहला कर रख दिया…

झड़ते हुए उसकी आवाज़ भी निकलनी बंद हो गयी….
सिर्फ़ उसका शरीर ही था जो कमान की भाँति टेडा होकर दर्शा रहा था की उसकी चूत का झड़न पतन हो रहा है…

पर लाला अभी तक झड़ा नही था….
वो अपनी पूरी ताक़त से उसके निश्छल शरीर में अपना लंड घुसाकर उसे चोदता रहा…

और तब तक चोदता रहा जब तक उसके लंड का उबाल उसे अपनी छाती तक महसूस नही हो गया…
और जब वो निकला तो उसने सीमा की चूत में ऐसी तबाही का मंज़र पैदा कर दिया की चारो तरफ लाला के लंड से निकला माल ही माल नज़र आ रहा था…
और कुछ नही…

अपनी माँ की ऐसी कमाल की चुदाई इतने करीब से देखकर रीतु की चूत में से भी पानी रिसने लगा और वो सीधा उसकी माँ के मुंह में जाने लगा.

और लाला ने जब हाँफते हुए अपना लंड बाहर निकाला तो एक शिकारी की भाँति रीतु उस पॉइंट पर झपट पड़ी जहाँ से लाला के लंड और उसकी माँ की चूत का मिलन हो रहा था….
अंदर से निकले पानी को उसने अच्छे से सॉफ किया और फिर लाला के पाइप नुमा लंड को मुँह में लेकर उसे चूस डाला…

लाला के लंड का पानी और अपनी माँ की चूत का रस मिलाकर करीब 50 MLथा, जिसे वो पी गयी और ज़ोर से डकार मारकर उसने ये भी दिखाया की वो उसे पच भी गया है…

लाला की हालत खराब हो गयी थी ऐसी चुदाई करके….
एक तो उम्र का तक़ाज़ा और उपर से माँ बेटी की जुगलबंदी,
ऐसे में थकान आना तो लाज़मी था…

इसलिए वो बेड पर कराहते हुए लेट गया…
दोनो माँ बेटियां उसके अगाल बगल आकर उससे लिपट गयी और उसे अपने-2 जिस्म की गर्मी का एहसास देने लगी.

रीतु ने तो कोशिश भी की कि लाला का लंड फिर से तैयार हो जाए, जो भी होना है आज ही हो जाना चाहिए, पर लाला भी जानता था की उसमें अब वो पहले जैसी बात नही रही जब वो दिन में 3-4 बार चुदाई कर लेता था…

इसलिए लाला कुछ देर तक सुस्ताया वहां पर और फिर अपने कपड़े पहन कर अपनी दुकान की तरफ निकल गया…

और पीछे छोड़ गया उन माँ बेटियो को जो उसके जाने के बाद भी नंगी ही पड़ी रही बिस्तरे पर…
लाला के लंड के बारे में सोचते हुए अपनी – 2 रसीली चूत में उँगलियाँ पेलती हुई.

अगले दिन रीतु और मीनू जब स्कूल में अपना लंच कर रही थी तो उन्होने दूर से आती हुई नाज़िया को देखा
उसकी चाल को देखकर ही समझ में आ रहा था की ये अब लंड ले चुकी है…
अपने दोनो कूल्हे दोनो तरफ निकाल कर मटकती हुई वो उन्ही की तरफ आई और अपना लंच बॉक्स खोलकर वही बैठ गयी..

दोनो को पता था की वो लाला के लंड से चुद चुकी है, पर फिर भी वो उसी के मुँह से सुनना चाहती थी..

मीनू : “बड़ी गांड मटका कर चल रही है री नाज़िया…लगता है लाला के लंड ने तेरी टांगे फेला दी है अच्छे से…”

अपनी बात कहकर वो रीतु की तरफ देखते हुए हँसने लगी…
रीतु ने भी उसका साथ दिया..

जिसे देखकर नाज़िया बोली : “हाँ हाँ हंस लो…इसमे कौनसी मज़ाक वाली बात है, मुझे तो इसमे मज़ा ही आया था, इसलिए मुझे इस बात का बुरा नही लग रहा…बुरा तो मुझे तुम्हारे लिए लग रहा है क्योंकि लाला पर तो तुम दोनो की पहले से नज़र थी और उसका लंड खाने को मुझे पहले मिला… हा हा”

उसकी बात सुनकर दोनो चुप हो गयी…
उनकी हँसी का जवाब अच्छे से दिया था नाज़िया ने..
और बात तो सही ही कह रही थी वो..
उनसे पहले ये कल की आई लौंडिया कैसे उनसे चुद गयी.

उसकी चुदाई की बाते जानने के लिए वो दोनो उत्सुक थी…
इसलिए रीतु अपनी ज़ुबान में थोड़ी मिठास लाते हुए बोली : “अरे , हम तो मज़ाक कर रहे थे पगली…वैसे भी तूने तो ले ही लिया है लाला के लंड को, इसमे हमारा भी तो फायदा है ना…”

नाज़िया रोटी खाते-2 रुक गयी और बोली : “फायदा …? तुम्हारा कैसा फायदा है इसमें ..”

इस बार मीनू ने मुस्कुराते हुए इस बात का जवाब दिया : “वो ये की तू हमे आज बताएगी की लाला के लंड को लेने में कैसा फील हुआ, मतलब कुछ तकलीफ़ हुई या आसानी से चला गया वो अंदर…”

ये बाते वो बोल तो रही थी पर ऐसा कहते हुए उसकी चूत में जो चिकनाई का निर्माण हो रहा था उसकी फीलिंग वही दोनो जानती थी…
हालाँकि एक बार फिर से लाला के लंड की चुदाई याद करके नाज़िया भी नीचे से भीग चुकी थी, पर उपर से दिखाकर वो उन्हे ये नही जताना चाहती थी की वो भी ये सुनकर उत्तेजित हो रही है..

वो बोली : “क्या तुम्हे लगता है की लाला का लंड इतनी आसानी से अंदर जाने वालों में से है…..पता है मेरे हाथ से कोहनी तक लंबा लंड था उसका, जब उसने मेरे अंदर डाला…हाय अल्लाह , उस पल को याद करके ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे है…साले ने बेरहमी से पेल दिया था पूरा अंदर, खून भी निकला था…..पर ससुरे को रहम ना आया, पूरा लंड पेलकर ही माना वो हरामी लाला…और वो भी मेरी माँ के सामने..”

ये सुनते ही उन दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा…
लाला ने ये बात तो उन्हे बताई ही नही की शबाना के सामने ही लाला ने उसकी बेटी पेल डाली थी…
साला सच में हरामी है..

और शायद ऐसा ही कुछ वो रीतु के साथ भी करेगा क्योंकि उसकी माँ सीमा को तो वो पहले ही चोद चुका था उसके सामने…
लाला की इस प्लानिंग के बारे में जानकार दोनो के जिस्म अंदर से धधक रहे थे…

रीतु तो जानती थी की उसकी माँ की तरफ से अब कोई रोकटोक नही होगी,
वो तो पहले से ही लाला के लंड की मुरीद बन चुकी है…
अब तो अगली बार लाला उसे ही चोदेगा और वो भी उसकी माँ सीमा के सामने..

वहीं दूसरी तरफ मीनू की हालत भी खराब हो रही थी…
नाज़िया चुद चुकी थी और रीतु भी चुदने को तैयार थी
ऐसे में उसका नंबर कब आएगा ये उसे भी नही पता था..
पर एक बात वो अच्छे से जानती थी की लाला को तो बस चूत चाहिए,
पहले किसकी मिलती है इस बात से उसे कोई फ़र्क नही पड़ता इसलिए उसके दिमाग़ में रीतु से पहले चुदने के प्लान बनने शुरू हो गये..

और अपनी प्लानिंग के बीच वो नाज़िया की बाते भी सुन रही थी जो चुदाई के वक़्त उसके बहुत काम आने वाली थी..

नाज़िया : “अंदर जाने में ही तकलीफ़ हुई बस, उसके बाद तो ऐसा लग रहा था की वो मोटा लंड भी कम है, अंदर के मज़े देने में …कसम से यार, ऐसा लग रहा था जैसे इस मज़े से बढ़कर कुछ और है ही नही दुनिया में , ऐसा नशा सा चढ़ रहा था पूरे जिस्म पर जैसे किसी ने जादू सा कर दिया हो…लाला का लंड मेरी बन्नो के अंदर जा रहा था और वो मेरे मुम्मो को चूस रहा था, काट रहा था…चाट रहा था…”

रीतु की आँखे लाल सुर्ख हो गयी ये सुनते –2 और वो हड़बड़ा कर बोली : “ब….बस…कर ….साली….. अपनी बातें सुना कर मेरी सलवार गीली करवा दी….अब क्लास में कैसे बैठूँगी…”

उसकी बात तो सही थी…
सलवार तो तीनो की गीली हो चुकी थी…
ऐसे में क्लास को बंक करना ही सही लगा उन्हे और वो तीनो चुपके से स्कूल के पीछे वाली टूटी हुई दीवार से निकल कर बाहर आ गयी…

और वहां से वो तीनो सीधा नाज़िया के घर गये जहाँ उसकी अम्मी शबाना घर का काम निपटाने में लगी थी…
उन तीनो को एक साथ देखकर वो बोली : “अर्रे, तुम तीनो स्कूल से भाग आई क्या…”

जिसके जवाब में तीनो एक साथ घूम गयी और अपना भीगा हुआ पिछवाड़ा उन्हे दिखा दिया, जिसे देखते ही वो समझ गयी की वो गीलापन किस चीज़ का है…
उन्होने तीनो को अंदर जाकर सॉफ करने को कहा और फिर से अपना काम करने लगी.

तीनो अल्हड़ चूते खिलखिलाती हुई सी अंदर की तरफ भाग गयी..

शबाना जानती थी की तीनो मे काफ़ी अच्छी दोस्ती है और शायद नाज़िया ने अपनी चुदाई की बाते सुनाकर ही उनका ये हाल किया है…
ये आजकल की लड़किया भी ना कुछ भी अपने पेट में नही रख सकती..

पर फिर उसने सोचा की इतने बड़े लंड को लेना कोई आसान काम थोड़े ही है…
उसका ज़िक्र अपने दोस्तो से करना तो बनता ही है..
शबाना ने उन्हे अंदर भेज तो दिया था पर वो जानती थी की वो आपस में मिलकर ज़रूर कोई गड़बड़ करेंगी…
उसके मन में उत्सुकतता सी बन गयी और अपना काम निपटाने के बाद वो दबे पाँव अंदर वाले कमरे की तरफ चल दी जहाँ वो तीनो गयी थी.

अपने कमरे में जाते ही नाज़िया ने तो बड़ी ही बेबाकी से अपनी सलवार निकाल कर एक कोने में उछाल दी…
नीचे जो कच्छी पहनी हुई थी वो भी भीग चुकी थी…
उसे भी जब उसने उतारा तो उसकी तराशि हुई चूत जो इस वक़्त एकदम लाल सुर्ख होकर दमक रही थी सबके सामने आ गयी…नंगी होकर वो बड़ी ही सैक्सी दिख रही थी

रीतु और मीनू ने भी एक दूसरे को देखा और अपनी-2 सलवारे निकाल दी…
उन दोनो ने उसे टेबल फैन के सामने फेला दिया ताकि वो उनके जाने से पहले सूख भी जाए..

और अंदर उन्होने नाज़िया की तरह कच्छी तो पहनी नही हुई थी इसलिए उन दोनो की भी चूत एकदम नंगी होकर नाज़िया के सामने उजागर हो गयी.

भले ही लंड से चुद चुकी थी नाज़िया, पर अपने सामने एक बार फिर से उन दोनो की चूत देखकर उसके मुँह में फिर से पानी आ गया और उसने अपने होंठो पर जीभ फेराते हुए रीतु की आँखो में देखा, वहां भी उसे वही प्यास दिखी जो इस वक़्त उसकी नज़रों में थी…
मीनू तो पहले से ही तैयार थी, इसलिए उसने उनकी आँखो का इशारा समझते हुए अपनी स्कूल की कमीज़ भी निकाल फेंकी..
अगले एक मिनट मे रीतु और नाज़िया ने भी वही किया और अब तीनो उस कमरे मे नंगी होकर खड़ी थी..

लाला के लंड के बारे में बाते कर-करके तीनो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की उन्होने एक पल भी नही लगाया और आपस में गले मिलते हुए, गुत्थम गुत्था करके तीनो एक दूसरे पर टूट पड़ी…
मीनू ने नाज़िया की भीगी चूत पर हमला किया तो रीतु ने उसके स्तनो पर…

नाज़िया ने भी अपनी उंगली रीतु की चूत में डालकर उसे हिला डाला,

पूरे कमरे में तीनो की सिसकारियां गूँज रही थी,
नाज़िया ने खुद को अपने बिस्तर पर गिरा दिया और रीतु को अपने चेहरे पर आने का न्योता दिया, जिसे उसने खुशी –2 स्वीकार कर लिया.

अपने चेहरे पर बिठाकर उसने रीतु की मिठाई की दुकान से सारी मिठाइयाँ निकालकर खानी शुरू कर दी…
हर बार जब वो अपनी जीभ उसकी चूत में घुसाकर अंदर से माल निकालती तो उसे अलग ही किस्म का स्वाद मिलता…

उसकी देखा देखी मीनू ने भी अपनी जीभ से नाज़िया की चूत को टटोलकर उसमें से मलाई चाटनी शुरू कर दी..

लाला के लंड से चुदने के बाद उसमे थोड़ा खुलापन आ चुका था जिसकी वजह से उसकी जीभ आसानी से अंदर बाहर हो रही थी,
लाला के लंड से चुदी चूत को चाटने में मीनू को एक अलग ही उत्तेजना का एहसास हो रहा था.

वो ये काम कर ही रहे थे की अपने सारे कपड़े निकालकर शबाना भी अंदर आ गयी…

अपनी अम्मी के आने का एहसास मिलते ही नाज़िया ने जब उनकी तरफ देखा तो उन्हे नंगा देखते ही वो समझ गयी की उनके मन का लालच ही उन्हें अंदर खींच लाया है …

पिछली बार भी जब उसने लाला के चले जाने के बाद अपनी अम्मी की चूत चाटी थी और अपनी भी चटवाई थी तो उसमे काफ़ी मज़ा मिला था , उसी मज़े को रीतु और मीनू की चूत के साथ लेने के लिए ही वो वहां आई थी इस वक़्त…

इसलिए उसने मुस्कुराते हुए उन्हे अपनी तरफ बुलाया..

शबाना आंटी को एकदम से कमरे में आया देखकर पहले तो रीतु और मीनू डर सी गयी पर उनके चेहरे पर आई हुई हवस को देखकर वो दोनो भी समझ गयी की ये उनकी बेटी के साथ पहली बार नही है..
और जब वो बेटी के साथ मज़े ले सकती है तो उन्हे बीच में मज़े लेने में क्या प्राब्लम हो सकती है…

इसलिए वो भी निश्चिंत होकर शबाना आंटी के साथ मज़े लेने लगे..

हालाँकि इन सबमे से किसी ने भी आज तक लेस्बियन सैक्स या उससे जुड़ी किसी भी बात के बारे में नही सुना था पर इस वक़्त जो काम ये सब मिलकर कर रही थी उससे तो एक अच्छी ख़ासी ब्लू फिल्म बनाई जा सकती थी…

खैर, ब्लू फिल्म तो बन ही रही थी वहां पर,
और शबाना के आने के बाद तो इस फिल्म में चार चाँद से लग गये थे,
क्योंकि उसने जब बेड पर आकर उन कुँवारी चुतों को चाटना शुरू किया तो तीनो किसी बकरी के मेमनों की तरह मिमियाती हुई चिल्लाने लगी क्योंकि अपने अनुभव का उपयोग करके शबाना उनके कच्चे जिस्मो के उन अंगो से खेल रही थी जिससे वो खुद आज तक अंजान थे…

तीनो एक दूसरे के पीछे लाइन बनाकर बकरी बन गए और एक दूसरे की चूत चाटने लगे

कमरे में चूत से निकले पानी की महक फेली हुई थी….

सभी ने जी भरकर एक दूसरे की चूत को चूसा भी और तब तक चाटा भी जब तक उसमे से निकले पानी को उन्होने सूखा नही दिया…

आज की इस छूट चुसाई ने उन सबके दिलो में कभी ना बुझने वाली प्यास को और भी बड़ा दिया था….
जो अब लाला के लंड से ही बुझने वाली थी..

सभी के दिमाग़ में लाला के लंड की ही तस्वीर घूम रही थी..

पर इन सबमे से अगली बार लाला के लंड से चुदने का सौभाग्य किसे मिलेगा ये उनमें से कोई भी नही जानता था…

या शायद जानता था…..

रीतु और मीनू जब वहां से निकल कर अपने घर की तरफ जा रहे थे तो उन दोनो के मन में यही उथल पुथल मची हुई थी की उनके सामने आई इस नाज़िया की बच्ची ने उनसे पहले बाजी मारकर लाला के लंड का मज़ा ले लिया है ..

हालाँकि बीच में तो रीतु की माँ सीमा भी आई थी जो मज़े लेकर अगली चुदाई का इंतजार कर रही थी पर वो तो उसकी सग़ी माँ थी ना, उनका तो बनता है…
पर ऐसे चिंचपोक्ली टाइप के लोग भी बीच में आकर उनसे पहले मज़े लेकर निकल जाए तो उनकी जवानी के ये रसीले दिन तो बेकार जाते चले जाएँगे..

और अंदर ही अंदर रीतु ये भी जानती थी की मीनू की चूत भी उतनी ही कुलबुला रही है जितनी की उसकी…
तभी तो वो स्कूल से छुट्टी करके लाला की दुकान पर जा पहुँची थी…
वो तो लाला का मूड नही था वरना अब तक वो इसे भी चोद ही चुका होता…

अपने अंदर के डर पर काबू करके बड़ी मुश्किल से लाला के मोटे लंड को लेने की हिम्मत कर पाई थी रीतु…
और जब से वो हिम्मत की थी तब से मौका ही नही मिल पा रहा था चुदने का..

अब वो मौका मीनू को मिलता है या उसे खुद को, ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा…

पर इस चुदाई के बीच वो अपनी दोस्ती को नही लाना चाहती थी,
इसलिए उसने मीनू से खुल कर बात करना ही उचित समझा.

रीतु : “यार मीनू ..अब तो अंदर की खुजली इतनी बढ़ चुकी है की बिना लंड के मज़ा भी नही आता… एक दूसरे की चूत चाट कर कब तक मज़े लेते रहेंगे…”

मीनू : “हाँ यार…अब तो बहुत हो गया…ये लाला पता नही इतना क्यो तरसा रहा है हम दोनो को…आज इसका फ़ैसला कर ही लेते है उसके पास जाकर..”

रीतु :”वो तो हम कर ही लेंगे..पर उससे पहले हम दोनो को ये फ़ैसला करना पड़ेगा की हम दोनो में से पहले कौन चुदाई करवाएगा लाला से…”

मीनू भी जानती थी की उसकी तरह रीतु भी पहले चुदना चाहती है लाला से, इसलिए ये बात बोल रही है…

मीनू : “तो इसके लिए तुम्हारे पास कोई तरीका है क्या…?? की कौन पहले चुदेगा लाला से…”

रीतु तब तक इस बात जा जवाब अपने दिमाग़ में सोच ही चुकी थी…
और उस हिसाब से चला जाए तो उनकी दोस्ती पर इस चुदाई का असर नही पड़ने वाला था..

रीतु : “देख मीनू ..मैं नही चाहती की इस छोटी सी बात के लिए हम दोनो की दोस्ती में दरार आए…इसलिए मेरे दिमाग़ में एक प्लान है…अगर तू मान जाए तो हम दोनो को मज़े मिल सकते है…”

मीनू एकदम से गंभीर हो गयी..
वो भी जानती थी की लाला के लंड से चुदने के लिए उसके मन में पहले भी कपट आ चुका था…
ऐसे में उनकी दोस्ती को बचाने वाले इस प्लान को सुनना तो बनता ही था..

रीतु : “तुझे याद है, लाला के हमारी लाइफ में आने से पहले हम दोनो अक्सर किसके बारे में सोचकर ये सब चूसम-चुसाई किया करते थे…”

उसकी ये बात सुनते ही मीनू चोंक गयी…
क्योंकि यहाँ उसके भाई रामू की बातें हो रही थी…

वही भाई जिसके उपर रीतु की कब से नज़र थी, और वो उसे सिर्फ़ देखने भर के लिए दिन में 5-6 चक्कर मीनू के घर के लगा लिया करती थी…
और उसी के बारे में सोचकर वो अक्सर उत्तेजित भी हो जाय करती थी
और ऐसी ही उत्तेजना से भरे एक दिन रीतु ने मीनू को चूम लिया था…
उस चुम्मे का एहसास ही इतना रसीला था की दोनो उस नशे में डूबते चले गये और कपडे एक दूसरे के नंगे जिस्मों को प्यार करना शुरू कर दिया था…

उस दिन के बाद वो दोनो अक्सर उस तरह से मिला करते थे…
मीनू के घर में, उसके उपर वाले कमरे में दोनो घंटो एक दूसरे के नंगे जिस्म को मसलते, चूत चाटते और तब तक चाटते जब तक वो झड़ नही जाते…

उस समय भी रीतु की उत्तेजना का केंद्र मीनू का भाई रामू ही रहता था…
वो उसके गठीले जिस्म के बारे में बात करके , उसके लंबे लंड की कल्पना करके बदहवासी वाली हालत में उससे चुदने की बातें किया करती थी….
और उसके सामने नंगी लेटी हुई मीनू भला कब तक इस बात से अछूती रहती और एक दिन अपने जवान भाई के जिस्म और लंड की बाते सुनकर उसने भी अपने दिल का गुबार निकाल ही दिया और अपने दिल की छुपी हुई बात उजागर कर दी की वो भी अपने भाई को उतना ही चाहती है जितना की रीतु..

और उसके बाद वो दोनो अक्सर मीनू के भाई का लंड लेने की बातें करते हुए साथ में झड़ा करती थी..

पर उन दोनो में से किसी की भी हिम्मत नही थी रामू से सीधी बात करने की क्योंकि वो काफ़ी ग़ुस्सेल किस्म का बंदा था इसलिए सिर्फ उसका नाम ही उनके लिए उत्तेजना को बढ़ाकर अपने जिस्मों को शांत करने का एकमात्र साधन था.

रामू अपने में ही मस्त रहता था..
अपने पिताजी के देहांत के बाद वो कड़ी मेहनत से , अपनी माँ के साथ मिलकर पूरा दिन खेतो में काम करता ताकि उसकी बहन को पढ़ाई या उनके खान पान में कोई दिक्कत न आये

गुस्से वाला तो वो था ही, और एक दिन रामू के गुस्से का कहर उन दोनो पर टूट ही पड़ा जब उसने दोनो को कमरे में बंद पाकर मीनू के कमरे का दरवाजा पीटना शुरू कर दिया…

अपनी माँ और भाई के घर में होते हुए उन्होने रिस्क तो ले लिया और जब भावनाओ में बहकर दोनो ने दरवाजा बंद करके एक दूसरे के नंगे जिस्मो को चाटना शुरू किया तो रामू को उनपर शक हो गया की वो दोनो छुपकर कहीं कोई नशा वगैरह तो नही करते…
इसलिए वो ऊपर आया और उसने बेतहाशा दरवाजा पीटना शुरू कर दिया…
हड़बड़ाहट में दोनो ने किसी तरह से अपने-2 कपड़े पहने और दरवाजा खोला …
रामू ने पूरा कमरा छान मारा पर उसे ऐसी कोई आपत्तिजनक वस्तु नही दिखाई दी… हालाँकि उसने जमीन पर पड़ी मीनू की गीली कच्छी देख ली पर गाँव में रहकर ऐसी हरकत उसकी बहन करेगी इसका उसे विश्वास नहीं था , इसलिए उसका गुस्सा उस वक़्त शांत हो गया , पर आगे से दरवाजा खुला रखकर ही बैठने की हिदायत दी उसने उन दोनों को.

और तब से ही मीनू की माँ को भी रीतु एक आँख नही सुहाती थी…
रीतु ने भी उनके सामने मीनू के घर जाना बंद कर दिया…
पर उनके बीच के जिस्मानी प्यार का सिलसिला वैसे ही चलता रहा …
छुप-छुपकर ही सही वो एक दूसरे की चूत का मज़ा ले ही लिया करती थी…

और उन्ही दिनों लाला की ठरकी नज़रों को पहचान कर दोनो ने उससे मज़े लेने शुरू कर दिए…
और इस तरह से धीरे-2 उनकी हवस का केंद्र रामू से हट कर लाला की तरफ हो गया…
और तब से दोनो ने पीछे मुड़कर देखा ही नही..
उसका कारण ये भी था की लाला हमेशा उन्हे देखकर लार टपकाता था और अपनी लच्छेदार बातो से उन्हे अपने जाल में फँसाने के लिए मीठा बोलता रहता था..
और तब से वो जान बूझकर ही सही, लाला के जाल में फँसती चली गयी..

और आज रीतु ने जब एक बार फिर से रामू भाई की बात की तो मीनू की समझ में आ गया की उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है..

रीतु ने खुद ही सॉफ-2 बोल दिया : “देख मीनू ..हम दोनो में से लाला पहले किसे चोदेगा और किसे नही ये हम दोनो को ही डिसाईड करना होगा…और इसके लिए हमे रामू भैय्या को बीच में लाना होगा, ताकि एक जब लाला से चुदे तो दूसरी को उतनी तकलीफ़ या पछतावा ना हो जितना होनी चाहिए…”

मीनू : “यानी, तू चाहती है की मैं लाला से चुद जाऊं और तू रामू भाई के साथ मज़े ले लेगी…ये तो बिल्कुल पर्फेक्ट रहेगा…यही करते है.”

रीतु : “ज़्यादा सयानी ना बन….जितनी खुजली तेरी चूत में हो रही है लाला से पहले चुदने की उतनी ही मेरी चूत में भी है…इसलिए ये तो भूल जा की लाला तुझे इतनी आसानी से मिल जाएगा…”

मीनू का दिमाग़ घूम गया ये सुनकर…
यानी उसके दिमाग़ में कुछ अलग ही पक रहा था.

रीतु : “देख..उन दिनों जितना मैं रामू के बारे में बाते करते हुए तेरी चूत मसलती थी उतना ही तू भी अपने भाई के बारे में सोचकर मेरी चूत चाटा करती थी…है ना..”

मीनू ने हाँ में सिर हिलाया

रीतु : “तो इसलिए हम दोनो टॉस करेंगे…और जीतने वाले को लाला से चुदने का पहला मौका मिलेगा और हारने वाला रामू से चुदवा लेगा…”

मीनू का दिमाग़ ही घूम गया…
अपने भाई के बारे में सोचकर अपनी सहेली की चूत चाटना अलग बात थी…
पर उससे सच में चुदाई करवाना अलग बात थी…
ऐसा तो वो सोच ही नही सकती थी.

रीतु : “क्या सोच रही है…यही ना की अगर तू टॉस हार गयी तो अपने भाई के साथ तू वो कैसे करेगी..उपर से वो इतना खड़ूस टाइप का है…बात-2 पर गुस्सा भी करता है….पर मेरी जान, है तो वो एक मर्द ही ना…जवान जिस्म तो उसे भी पसंद आएगा…और ये भी तो हो सकता है की तू टॉस जीत जाए और लाला से चुदने का मौका पहले तुझे मिल जाए…और सच कहूं , ऐसे में तेरा भाई अगर दूसरे विकल्प के तौर पर मिलेगा तो मुझे उतनी तकलीफ़ नही होगी जितना की होने वाली थी…आख़िर वो भी एक बांका मर्द है…उपर से जवान भी…और मेरी पहली चाहत भी , दोनो ही सूरत में लाला से चुदने का मौका तो बाद में तुझे भी मिल ही जाएगा और मुझे भी…”

रीतु अपने दिमाग़ में सारी केल्कुलेशन कर चुकी थी…
यानी दोनो ही सूरत में दोनो के हाथ कुछ ना कुछ आने ही वाला था..

एक पल के लिए तो मीनू ने सोचा की बेकार में अपने भाई को बीच में लाने का कोई मतलब नही बनता, रीतु को ही लाला से पहले चुदने का मौका दे देना चाहिए…बाद में उसका भी नंबर आ ही जाएगा..

पर अंदर ही अंदर उसका मन रामू का नाम सुनकर ललचा भी रहा था…
ये सच था की वो काफ़ी गुस्से वाला था और थोड़ा खड़ूस भी था,
उसके साथ भी वो सीधे मुँह बात नही करता था पर जब से रीतु के साथ नंगे होकर उसके बारे में बाते करनी शुरू की थी तब से ही एक अलग ही स्थान बन चुका था अपने भाई के लिए उसके दिल में …
हालाँकि ये ग़लत था पर इस बात पर उसका कोई बस नही चलता था..

इसलिए उसने अनमने मन से बात मानने का बहाना करते हुए हां कर दी…
रीतु भी यही चाहती थी क्योंकि अंदर ही अंदर रामू के लंड से चुदने की भूख उसमे भी थी…
ऐसे में उसका नंबर पहले आये या बाद में, आएगा जरूर ।

और रीतु ने ये भी सॉफ कर दिया की कोई भी जीते, रामू से चुदाई करवाने में वो दोनो एक दूसरे की मदद करेंगी..
और वो उसने इसलिए कहा ताकि मीनू के बाद रामू उसे भी चोद सके या फिर उसकी चुदाई के बाद मीनू का भाई अपनी बहन की भी चूत बजाए ताकि उसका जो ख़ौफ़ है , वो उनपर हावी ना रहे बाद में.

दोनो ने सब क्लियर कर लिया और फिर मीनू ने अपने पर्स से एक रुपय का सिक्का निकाल कर टॉस की…
रीतु ने हेड माँगा और हेड ही आया…
यानी वो जीत गयी थी और अब लाला के लंड से चुदने का मौका पहले उसे मिला था…
और मीनू को अब अपने भाई रामू से अपनी सील खुलवानी पड़ेगी..

दोनो के मन में अलग-2 तरह की कल्पनाओ के जहाज़ उड़ने लगे…

एक तरफ रीतु लाला से अपनी चूत का उद्घाटन करवाने के ख़याल से खुश हो रही थी और दूसरी तरफ मीनू भी अपने भाई के लंड को अपने अंदर लेने की कल्पना मात्र से गीली हुई जा रही थी…

दोनो को ही पता था की बाद उनके पार्ट्नर्स चेंज भी होंगे…
ऐसे में लाला से चुदने का मौका मीनू को भी मिलेगा और रीतु भी रामू के लंड से चुदाई करवाकर अपनी कच्ची जवानी के पहले प्यार को पा सकेगी..

पर अब मुद्दा ये था की पहले कौन चुदने के लिए जाएगा…
क्योंकि ये तो पहले ही तय हो चुका था की दोनो में से कोई भी चुदाई के लिए तैयार हो, एक दूसरे का साथ वो दोनो देंगी…

इसलिए एक बार फिर से टॉस हुआ, ये जानने के लिए की पहले रीतु लाला के पास जाए या मीनू अपनी भाई के पास…

और इस बार मीनू जीती…
यानी रीतु को मीनू की हेल्प करनी थी अब, उसे अपने भाई से चुदवाने में …
और बाद में उसे लाला से अपनी चूत मरवानी थी..

लाला से चुदाई करवाने का समय बढ़ता जा रहा था…
लेकिन इस नए एंगल यानी रामू के आने से दोनो के मन सावन के मोर की तरह नाच रहे थे…
एक नयी उत्तेजना का संचार हो चुका था दोनो की सोच में …
जो अब चुदाई तक जाकर ही रुकनी थी.

घर पहुँच कर दोनो ने रामू को पटाने के उपाय सोचने शुरू कर दिए…
और वो उपाय इतने रोमांचक और उत्तेजक थे की उन्हे सोचने मात्र से ही दोनो की चूत गीली होती चली गयी और कुछ ही देर में दोनो एकदम नंगी होकर एक दूसरे के बदन को चूम-चाट रही थी..

रीतु ने अपनी 2 उंगलियाँ एक साथ मीनू की कच्ची फांको के बीच घुसा दी..

मीनू : “आआआआआआआआअहह……. भेंन की लौड़ी …… उम्म्म्मममममममम…. धीरेरए कर……. अपनी उंगली से ही फाड़ डालेगी क्या मेरी चूत की झिल्ली…..”

रीतु ने उसके मुम्मो को चूसते हुए अपनी उंगली की रफ़्तार तेज कर दी और सिसकारी मारकर बोली : “साली कुतिया ……तेरी ये चूत तो अपने भाई के लंड को लेने की कल्पना मात्र से ही इतनी गीली हुई पड़ी है….ऐसी तो लाला का नाम सुनकर भी नहीं हुई थी आजतक….. लगता है तेरी चूत भी यही चाहती है की तेरे भाई का लंड जल्द से जल्द इसके अंदर घुस जाए….”

मीनू : “अहह…….. बस कर यार……. रामू भाई के लंड के बारे में बोलकर तूने पहले से ही मुझे इतना गीला कर दिया है….आज तो इस कमरे में बाढ़ आकर रहेगी…”

और उसके झड़ने की आशंका मात्र से ही रीतु ने अपनी चूत का मुंह उसकी गीली चूत पर लगा कर उसे रगड़ना शुरू कर दिया, जैसे सच में रामू उसकी चूत मार रहा ह

और अगले ही पल उसकी चूत से बिना किसी आवाज़ के एक तेज धार निकल कर , अपना बाँध तोड़ती हुई बाहर निकल आयी और रीतु की चूत रंगहीन पानी से सन कर रह गयी …

मीनू का पूरा शरीर अकड़ गया : “अहह……. रामू…….. डाल दे भाई….मेरी चूत में अपना लौड़ा ….अहह…..”

उसके झड़ने की हालत देखकर ही रीतु को अंदाज़ा हो रहा था की रामू का लंड लेते हुए इसका क्या हाल होने वाला है…

उसने उसकी चूत में जीभ ड़ालकर उसका सारा रस चाट लिया

अब तो उन्हे बस अपने बनाए प्लान पर अमल करना था जिसमे फंसकर उस खड़ूस रामू को अपनी बहन की चुदाई करनी ही पड़ेगी…

अब रामू की बात कहानी में आई है तो उसके बारे में कुछ बातें बता देता हूँ आपको..
अपने पिता की अचानक मौत से घर की सारी ज़िम्मेदारी रामू के कंधो पर आ पड़ी थी…
हालाँकि उसमें उसकी माँ ने भी उसका सहयोग किया था पर घर का मर्द होने के नाते रामू को भी अपनी ज़िम्मेदारियों का अच्छे से एहसास था…
जब तक पिता का साया उसके सर पर था उसे कमाई करने और खेतों के बारे में सोचने की कोई चिंता ही नही थी…
अपने कसरती बदन की वजह से वो पूरे गाँव की लड़कियो में फेमस था…

पर उसका दिल अपनी बहन मीनल की सहेली बिजली पर आया हुआ था…
उसके साथ प्यार की पींगे बढ़नी शुरू ही हुई थी की रामू के पिता का देहांत हो गया और बाद में बिजली के बदन की आग जो रामू ने जलाई थी, उसे लाला ने अपने लंड के पानी से बुझाया था.

अपने खेतो और काम के अंदर रामू इतना डूबा की उसे अब किसी और बात को सोचने – समझने की फ़ुर्सत हि नहीं थी…
अपनी जवान हो रही बहन और विधवा माँ का उसे सहारा बनना था इसलिए उसके मिज़ाज में भी प्यार की जगह कड़वाहट ने ले ली…तभी रीतु और मीनू उसे खड़ूस कहा करती थी.

पर एक मर्द तो आख़िर मर्द ही होता है ना..
इसलिए रामू को भी उसका लंड बात-बेबात परेशान करता ही रहता था.

और उसे पूरा दिन अपनी माँ के साथ खेतो में रहना पड़ता था इसलिए उसका दिल ना चाहते हुए भी अपनी माँ की तरफ आकर्षित होता चला गया…
और आज आलम ये था की खेतों में काम करते हुए वो अपनी माँ के मांसल शरीर को वो चोर नज़रों से देखकर अपनी आँखे सेका करता था.

रामू की माँ गोरी की उम्र करीब 42 की थी…
3 बच्चो के बाद भी उसका बदन एकदम कड़क था..
कारण था खेतो में मेहनत भरे काम करना, जो वो अपने पति के साथ भी किया करती थी.
और पति की मृत्यु के बाद तो उसके हरे भरे बदन को चखने वाला भी कोई नही था,
ऐसे में उस कड़क जिस्म की महक जब रामू तक गयी तो वो अपनी सग़ी माँ के प्रति आकर्षित होने से खुद को नही बचा पाया..
और अक्सर सोते हुए, नहाते हुए या फिर कभी-2 तो खेतो में काम करते हुए भी वो अपने लंड को रगड़ता रहता था.

आज भी कुछ ऐसा ही हो रहा था…
खेतों में उसकी माँ गोरी काम कर रही थी और दूर पेड़ के पीछे , पेशाब करने के बहाने गया हुआ रामू, अपनी माँ को झुके देखकर, उनकी निकली हुई गांड पर उसकी नजरें थी जिसे देखकर वो मुट्ठ मार रहा था…

”आआआआआहह माआआआआआअ……. क्या गांड है रे तेरी माँsssssss…. उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ……. मन तो कर रहा है की तेरी साड़ी उठा कर अपना लंड पेल दूँ अंदर….. आअह्ह्ह….. क्या रसीले चूतड़ है तेरे माँ …..अपनी जीभ अंदर डालकर सारी मलाई खा जाऊंगा मैं तेरी…..साली कुत्तिया बना कर चोदुँगा इसी खेत में”

अपने लंड को जोरो से पीटते हुए रामू बदहवासी में अपनी माँ के रसीले बदन को देखकर गालियां बक रहा था

और अचानक उसकी माँ ने पलट कर उसकी तरफ देखा और ज़ोर से आवाज़ लगाकर बोली : “रामू…ओ रामू….अब आ भी जेया जल्दी…. कितना टेम लगता है तूझे पेसाब करन में …खाने का टेम भी हो रहा है…”

वो तो गनीमत थी की रामू काफ़ी दूर था, वरना वो अपना लंड हिलाता हुआ सॉफ दिख जाता उन्हे…

पर वो भी बड़ा कमीना था,
अपनी माँ को अपनी तरफ देखते पाकर उसके हाथो की गति और तेज हो गयी…
और एक गंदी सी गाली और देते हुए उसके लंड ने ढेर सारा पानी उस पेड़ के मोटे तने पर फेंकना शुरू कर दिया…

”आआआआहह….भेंन की लोड़ी ……तेरी चूत में डालूँगा इस लोड़े का पानी एक दिन….फाड़ डालूँगा तेरी चूत को मैं मांमाआआआआअ….”

और शांत होने के बाद उसने अपने लंड को धोती में वापिस घुसाया और वापिस अपनी माँ की तरफ आ गया और उन्हे पानी से हाथ धुलवाने के लिए कहा…..

और हाथ धुलवाते हुए जैसे ही गोरी की नज़र अपने बेटे के हाथ पर पड़ी, उसके दिल की धड़कन रुक सी गयी…
रामू के हाथ पर उसके लंड से निकले गाड़े रस की एक लकीर खींची रह गयी थी…
जिसे शायद रामू ने भी नही देखा था…
वो तो अपनी मुट्ठ मारकर बड़ी शान से वापिस आया और माँ के मोटे मुम्मो को देखते हुए हाथ धुलवाने लगा..

गोरी का शरीर पहले ही वो सब देखकर काँप रहा था,
हाथ धुलवाने के बाद जब उसने नज़रे उठाकर रामू की तरफ देखा तो उसे अपनी छाती की तरफ घूरते हुए पाया,
धूप में काम करने की वजह से उसका ब्लाउस पूरा गीला हो चुका था, वैसे भी वो उपर के 1-2 हुक खोलकर रखती थी ताकि हवा अंदर जाती रहे…
और उसी वजह से रामू उन तरबूजो को देखकर अपनी लार टपका रहा था…

ये देखकर गोरी का माथा ठनका …
और उसने गुस्से से भरकर रामू से कहा : “कहाँ ध्यान है रे तेरा….चल हाथ धूल गये है, खाना खा ले..”

रामू का चेहरा एकदम से पीला पड़ गया…
आज पहली बार उसकी माँ ने उसकी चोरी पकड़ी थी..
और अभी तो उसे ये नही पता था की उसकी माँ ने उसके हाथ पर लगा वीर्य भी देख लिया है
वरना एक साथ 2 चोरी पकड़े जाने का बोझ पता नही वो कैसे सह पाता.

अब गोरी भी थोड़ी सतर्क होकर बैठी थी अपने बेटे के सामने…
उसने अपने ब्लाउज़ के दोनो हुक बंद कर लिए ताकि जो अपनी तरफ से अंग प्रदर्शन वो कर रही थी वो तो बंद हो ही जाए…

पर मन ही मन वो इस घटना को देखकर ये सोचने पर ज़रूर मजबूर हो गयी थी की आख़िर उसका सागा बेटा उसे उस नज़र से क्यो देख रहा था…
और उसके हाथ पर लगे उस वीर्य को देखकर वो ये भी समझ ही चुकी थी की इतनी देर तक पेशाब के बहाने वो मुट्ठ ही मार रहा था…
और ये काम तो वो लगभग 2-3 बार करता था दिन में..
यानी हर बार वो जब भी मूतने जाता था तो मुट्ठ मारकर ही आता था वापिस.

हे भगवान…
इन जवान लोंडो में कितनी एनर्जी भरी होती है….
पूरा अपने बाप पर ही गया है ये भी…
वो भी शादी के बाद एक दिन में कम से कम 2 बार तो उसकी चुदाई कर ही दिया करते थे…
कई बार तो अपने खेतों में ही चुदी थी वो अपने पति के लंड से
फिर जैसे-2 बच्चे होते गये उनकी चुदाई का फासला बढ़ता चला गया..
और फिर एक दिन उसके पति जब उन्हे छोड़कर चले गये तो वो सब बंद ही हो गया…
उसने भी अपने बच्चों की खातिर अपनी जवानी की परवाह किए बिना अपना जीवन उनके लिए समर्पित कर दिया…
हालाँकि इस बीच एक दो बार उस ठरकी लाला ने उसपर भी डोरे डालने की कोशिश की थी पर उसका रूखा रवेय्या देखकर लाला ने भी फिर कोई कोशिश नही की…
लाला का सिंपल फंडा था, आती है तो आ वरना अपनी माँ चूदा ।
उसके पास गाँव की कमसिन चुतों की कोई कमी थी भला जो वो 3 बच्चों की माँ पर अपना टेलेंट जाया करता.

और ये सब सोचते-2 उसे जब ये एहसास हुआ की आज भी उसके बदन में किसी को आकर्षित करने की क्षमता है तो उसका दिल पुलकित हो उठा…
पूरा दिन मिट्टी में काम करने के बाद उसकी हालत किसी भूतनी जैसी हो जाती थी…
घर जाकर नहाती, बच्चों के लिए खाना बनाती और गहरी नींद में सो जाती…
यही दिनचर्या रह गयी थी उसकी…
ऐसे में अपनी तरफ आई अपने ही बेटे की इस नज़र ने उसके अंदर एक कोहराम सा मचा दिया था.

खाना खाते हुए वो रामू को देख रही थी और ना चाहते हुए भी उसकी नज़रे उसकी धोती की तरफ चली गयी और ज़मीन पर बैठने की वजह से उसके लंड का एक हिस्सा भी उसे दिखाई दे गया…
उसने तुरंत अपनी नज़रे फेर ली..
अपने बेटे को ऐसी नज़रो से देखने में उसे आत्मग्लानि का एहसास हो रहा था.

वहीं दूसरी तरफ रामू भी अपनी माँ के चेहरे को देखकर ये जानने की कोशिश कर रहा था की उनके मन में क्या चल रहा है..
पर अपनी माँ की डांट से उसे ये एहसास ज़रूर हो गया की आगे से उसे सतर्क रहना पड़ेगा..

उसके बाद उसने इस तरह की कोई हरकत नही की और हमेशा की तरह सांझ होते-2 दोनो माँ बेटा घर की तरफ चल दिए.

रामू के पास एक साइकिल थी, जिसपर बैठकर वो आया-जाया करते थे
अब उनके घर जाने के इस साधन में भी रामू की एक चाल थी…
वो अपनी माँ को पीछे बैठाकर खेतो में ले जाया करता था…
और जब से उसके मन में अपनी माँ के लिए कपट आया था , तब से उसने उनके मस्त बदन को छूने के नये-2 बहाने ढूँढने शुरू कर दिए थे…
इसलिए उसने बड़ी चालाकी से पीछे बैठने के केरियर को तोड़ दिया, जिसकी वजह से उसकी माँ को साइकल के आगे वाले डंडे पर बैठना पड़ता था…
भरा हुआ शरीर था इसलिए वो फँस कर आती थी आगे की तरफ और साइकल चलाते हुए रामू की दोनो टांगे उपर नीचे होती हुई अपनी माँ के मांसल जिस्म से रगड़ खाया करती थी…
और सबसे ज़्यादा मज़े तो उसके लंड के थे जो अपनी माँ की कमर के ठीक पीछे चिपक कर उसके गुदाजपन के मज़े लिया करता था…
और घर जाते-2 रामू के लंड की हालत ऐसी हो जाती थी जैसे उसने धोती में कोई रॉकेट छुपा रखा हो…
उपर से रामू अपनी माँ के ब्लाउज़ में झाँककर उन हिलते हुए मुम्मो को देखकर भी मज़ा लिया करता था.

पर आज गोरी को आगे बैठने में थोड़ी सकुचाहत हो रही थी लेकिन कोई और चारा भी नही था…
इसलिए वो बैठी और वो दोनो घर की तरफ चल दिए…
रास्ते भर वही होता रहा जो रोज हुआ करता था…
पर आज गोरी की अपने बेटे की हरकतों पर कड़ी नज़र थी…
इसलिए आधे रास्ते बाद जब उसकी कमर पर उसे रामू के लंड की चुभन महसूस हुई तो उसका शक यकीन में बदल गया की उसका बेटा उसके बदन का दीवाना है.

घर पहुँचकर वो सीधा अपने कमरे में गयी और अपने कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस कर नहाने लगी…
नहाते हुए उसके जहन में रामू की सारी हरकतें चलचित्र की भाँति चल रही थी…
उसे दिख रहा था की कैसे वो पेड़ के नीचे खड़ा होकर मुट्ठ मार रहा है और खेतो में काम करते हुए उसके बदन को अपनी भूखी नज़रो से देख रहा है…
साइकल पर बैठकर उपर से उसके हिलते हुए मुम्मे देख रहा है.

उफफफफ्फ़…..
वो फिर से अपने बेटे के बारे में गंदे विचार ले आई थी…
सुबह तो उसने सोचा था की ऐसी कोई भी बात अपने मन में नही लाएगी और ज़रूरत पड़ी तो रामू को भी कठोर शब्दो से समझा देगी की अपनी माँ के प्रति ऐसी भावना रखना सही नही है…

पर ये भी तो हो सकता है की वो सारा उसका वहम हो…
हो सकता है की वो किसी और के बारे में सोचकर ये सब करता हो और अपनी माँ को उस नज़र से देखना संयोग मात्र ही हो.

उसने मन में सोचा की काश ऐसा ही हो, यही उन माँ बेटे के संबंधो के लिए सही रहेगा..

उधर रामू बाहर खाट पर बैठा अपनी माँ के ही विचारो में खोया हुआ था की उसकी बहन मीनू अंदर आई…

उस भोले को भला क्या पता था की आज उसकी बहन के मन में उसके लिए क्या चल रहा है…
करीब 2 घंटे तक रीतु के घर बैठकर उसने अपने भाई को आकर्षित करने के नये-2 तरीके ईजाद किए थे…
और वो इतने उत्तेजक थे की उन्हे सोचकर ही उसकी चूत में पानी भर आया था…
उन्हे जब वो अमल करेगी तो उसका क्या हाल होने वाला था ये तो सिर्फ़ वही जानती थी…
पर आज से वो इस जंग का आगाज़ ज़रूर कर देना चाहती थी.

इसलिए वो लंगड़ाती हुई सी घर पर आई, ये लंगड़ाना उसकी चाल का एक हिस्सा था.

रामू ने जब उसे ऐसे चलते हुए देखा तो वो घबरा कर उसके करीब आया और उसे अपनी बाँहों का सहारा देकर अंदर ले आया…

रामू : “अर्रे…ये क्या हुआ मीनू ..कहीं चोट लगी है क्या…कैसे हुआ ये ….”

उसके चेहरे पर आई उसके लिए घबराहट सॉफ देखी जा सकती थी…
वो अपनी बहन से बहुत प्यार करता था…
इसका एहसास मीनू को भी था.

मीनू : “कुछ नही भैय्या ..वो रीतु के घर से आते हुए पैर मुड़ गया एक गड्डे में जाकर….हाय …सही से चला भी नही जा रहा ….”

रामू ने उसे लाकर खटिया पर बिठाया और नीचे झुककर उसके पैर का मुआयना करने लगा…
उसने एक घाघरा पहना हुआ था, जिसे उपर करते ही उसकी गोरी पिंडलियाँ उसके सामने आ गयी जो एकदम भर चुकी थी…
रामू भी उसकी भरी हुई टांगे देखकर हैरान था की कब और कैसे उसकी छोटी बहन इतनी बड़ी हो गयी है…
उसकी पिंडलियाँ ऐसी है तो उसकी जांघे कैसी होगी….
शायद माँ जैसी मांसल होंगी वो भी…
या हो ही जाएँगी..
आख़िर है तो उन्ही की बेटी ना.

यानी अपनी बहन के माध्यम से भी वो अपनी माँ को ही इमेजीन कर रहा था…
और अभी तक अपनी बहन के लिए उसके मन में कोई बुरा विचार नही था…
और इन विचारो को मीनू जल्द ही बदलने वाली थी.

रामू ने उसकी पिंडली को अच्छे से देखा पर उसे कुछ ख़ास दिखाई नही दिया…
कुछ हुआ होता तो दिखता ना…
मीनू ने उसे अंदरूनी मोच कहकर अंदर दर्द होने का बहाना बनाया…
रामू ने जब कहा की वो उसे डॉक्टर के पास ले चलता है तो वो एकदम से बोली : “नही नही…डॉक्टर के पास नही…उसे तो कुछ नही आता…बस हर बात पर पिछवाड़े पर सुई लगा देता है….”

रामू उसकी बच्चो वाली बात सुनकर हंस दिया…
और बोला : “अब तू बड़ी हो गयी है मीनू ..अब तेरे पिछवाड़े पर नही बल्कि हाथ में लगेगी सुई…और ये मोच है कोई चोट नही जो तुझे टीका लगाना पड़े डॉक्टर को…कोई गोली दे देगा तो दर्द में आराम आ जाएगा ना…”

मीनू अपने चेहरे पर क्यूट सी स्माइल लाते हुए बोली : “ना भाई ना….मुझे नही जाना डॉक्टर के पास और ना ही कोई गोली खानी है…बस रात को मालिश करवा लूँगी, वही बहुत है…कल तक ठीक हो जानी है …”

तब तक उनकी माँ गोरी भी नहा धोकर आ गयी…
रामू को अपनी बहन के पैरो में बैठा देखकर वो भी चिंतित हो गयी…
रामू ने उन्हे सारी बात सुना डाली…माँ ने भी डॉक्टर के पास चलने को कहा पर मीनू ने मना कर दिया
गोरी भागकर दूध गर्म कर लाई और उसमें हल्दी डालकर मीनू को दिया…बेचारी ने बड़ी मुश्किल से उसे पिया.

रात का खाना खाने के बाद जब वो अपने उपर वाले कमरे में जाने लगी तो रामू ने उससे कहा की वो नीचे ही सो जाए पर उसने यही बहाना बनाया की उसे अपने बिस्तर के सिवा कही और नींद नही आती…

माँ अंदर बर्तन धो रही थी, इसलिए उसने रामू से कहा की हो सके तो वो उसे उपर तक उठा कर ले जाए.
रामू के लिए ये कोई मुश्किल काम नही था…
पर अभी कुछ देर पहले ही उसे मीनू की जवानी का एहसास हुआ था इसलिए वो थोड़ा सकुचा भी रहा था…
मीनू ने भी विनती करी की वो प्लीज़ उसे उपर तक उठा कर ले जाए वरना माँ देखेगी तो गुस्सा करेगी की अब वो छोटे नही रहे …

रामू जानता था की माँ ऐसा करने से मना करेगी और गुस्सा भी होगी…
इसलिए उनके बाहर आने से पहले ही उसने झट्ट से मीनू के फूल जैसे बदन को अपनी बाँहों में उठाया और उपर चल दिया…
उसके नन्हे संतरे उसकी छाती में शूल की तरह चुभ रहे थे पर उसने उनकी तरफ कुछ ख़ास ध्यान नही दिया…
पर उसकी जाँघो को पकड़ कर उसने जरूर जान लिया की वो सच में काफ़ी भर चुकी है.

उसे बिस्तर पर लिटाकर जब वो जाने लगा तो मीनू ने बड़े प्यार से उसे थेंक्स और बोली : “भाई…आप माँ के सोने के बाद प्लीज़ उपर आकर मेरी मालिश कर देना …बहुत दर्द हो रहा है … माँ को बोलूँगी तो वो ज़बरदस्ती मुझे डॉक्टर के पास भेज देंगी…और वहां मुझे जाना नही है…”

रामू ने उसे मुस्कुराते हुए आश्वासन दिया की ठीक है वो आ जाएगा रात को.

और उसके बाद वो नीचे चला गया…

और मीनू मन ही मन अपनी योजना के पहले चरण को साकार होते देखकर खुश हो रही थी.

आज की रात उसे रामू को अपने हुस्न का दीवाना बना देना था,
यही प्लानिंग की थी उसने और रीतु ने मिल कर…
और रामू के हाव भाव देखकर इतना तो वो जान ही चुकी थी की मर्द चाहे कोई भी हो, भाई हो या बाप, हुस्न के आगे उसे झुकना ही पड़ता है…
तभी तो उसका ये खड़ूस भाई इतने प्यार से उसके साथ बर्ताव कर रहा था.

अब वो रात की तैय्यारी करने लगी…
आज कुछ ख़ास होने वाला था उसके कमरे में.

यहाँ मीनू के दिमाग़ में रामू चल रहा था तो नीचे रामू के दिमाग़ में माँ के साथ-2 अब मीनू के ख़याल भी आ-जा रहे थे…
और उधर उनकी माँ गोरी भी ना चाहते हुए फिर से अपने बेटे की बाते सोचने लगी थी सोते हुए…
एक ही दिन में घर के तीनो सदस्यो के दिल में एक दूसरे के लिए गंदे विचारो का निर्माण शुरू हो चुका था…
जो आगे चलकर सबको मजा देने वाला था.

मीनू तो अपने कमरे में जाने के बाद ऐसे एक्साईटिड हो रही थी मानो आज उसकी सुहागरात हो…
हालाँकि पहली ही बार में उसे अपने भाई का शिकार नही करना था पर उसके साथ कुछ भी करने के एहसास से ही उसके दिल में काफ़ी रंग बिरंगी तितलिया उड़ रही थी..

रामू के नीचे जाने के बाद वो झट्ट से उठी और अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गयी…

अपने नंगे शरीर को शीशे के सामने देखकर वो अपने योवन पर इतरा रही थी…
आज से पहले वो ऐसी अवस्था में खुद को देखकर यही बोला करती थी मन में की वो किस्मत वाला ही होगा जिसे ऐसा मक्खन जैसे बदन मिलेगा…
पर आज उसने यही कहा ‘रामू भैय्या आप तो किस्मत वाले हो , जो आपको मैं मिल रही हूँ …देख लेना, कितना मज़ा आने वाला है आपको…और मुझे भी…‘

इतना कहकर वो खुद की ही बात पर हंस दी

वैसे सच ही तो कह रही थी वो,
एक कुँवारी और कसी हुई चूत जब किसी को मिलती है तो उसे मारने का मज़ा सिर्फ़ वही बता सकता है,
और अपनी उसी कमसिन चूत में 1 उंगली डाल कर जब मीनू ने उसे अंदर धकेला तो अंदर का गाड़ा नींबू पानी बाहर छलक गया…

उस पानी को उसने अपने मुँह में लेकर चाट लिया…

और अपने घुंघराले बालों में दूसरे हाथ की उंगलिया घुमाते हुए सोचने लगी ‘हाय ….कैसा फील होगा रामूभैय्या को जब वो इस रस को चूसेंगे…‘

उसकी कल्पना मात्र से ही उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गये..

खैर, उसने जल्दी से अपनी पेंटी पहनी,
हालाँकि स्कूल में भी वो पेंटी नहीं पहनती थी पर आज की जो प्लानिंग उसने रीतु के साथ मिलकर की थी, उसमें इस पेंटी का काफ़ी अहम रोल था,
उसके उपर उसने एक स्कर्ट पहनी जो उसके घुटनो तक ही आ रही थी और उपर उसने बिना ब्रा के एक टाइट सी टी शर्ट…
अब वो सच में एक सैक्सी माल लग रही थी.

फिर वो अपने बिस्तर पर लेट कर अपने प्यारे भाई का इंतजार करने लगी..

नीचे रामू भी आज बेचैन था,
हालाँकि उसने आज तक अपनी बहन को इस नज़र से नही देखा था पर पता नही क्यों उसकी पिंडलियाँ देखने के बाद वो उसकी तरफ आकर्षित सा हो गया था…
क्योंकि वो गोरी पिंडलियाँ उसे उसकी माँ के बदन का एहसास दे गयी थी, जिसे वो ना जाने कब से छूना चाहता था, चूमना चाहता था…

और मीनू को उपर ले जाते वक़्त भी उसके बदन के एहसास ने कुछ जागृत सा कर दिया था उसके अंदर..

इसलिए जब मीनू ने उसे मालिश करने के लिए कहा तो उसने तुरंत हां कर दी क्योंकि मीनू के बदन को छूने के एहसास के पीछे वो अपनी माँ सीमा को महसूस करना चाहता था..

सीमा के दिमाग़ में सोते हुए पुर दिन के चलचित्र चल रहे थे और वो पता नही क्या-2 सोचे जा रही थी…..
पर खेतो में की हुई मेहनत ने उसकी आँखो को कब बोझल कर दिया ये उसे भी पता नहीं चला और कुछ ही देर में वो रोजाना की तरह खर्राटे मारकर सो गयी…

थका हुआ तो रामू भी था पर उसके पास एक लक्ष्य था जिसने उसे जगा कर रखा हुआ था..
माँ के सोने के बाद वो कुछ देर तक तो उन्हे तकता रहा और फिर धीरे से उठकर वो उपर चला गया..
दरवाजा पहले से खुला था, जिसे उसने अंदर से बंद कर दिया..

कमरे में हल्की रोशनी वाला बल्ब जल रहा था और ज़मीन पर बिस्तर लगाकर मीनू गहरी नींद में सो रही थी..

रामू ने उसे उपर से नीचे तक देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया…
आज पहली बार उसके मन में अपनी बहन के प्रति ग़लत विचार आ रहे थे…
कपड़ों में तो उसकी जवानी का पता ही नही चलता था पर ऐसे सोते हुए वो उसे अच्छे से देख पा रहा था…

लंबी-2 टांगे और भरी हुई पिंडलियाँ…
स्कर्ट भी थोड़ा उपर खिसक कर जाँघो तक पहुँची हुई थी जिसकी वजह से वो उसकी कच्छी को छोड़कर सब कुछ देख पा रहा था…
सीना ढलका हुआ था नीचे की तरफ जिससे उसके उभारो का वजह भी वो देख पा रहा था की वो कितने बड़े हो चुके है…
कुल मिलाकर उस दृशय ने उसके लंड को खड़ा कर दिया था..

वो मन में सोचने लगा की वो किस तरह का बंदा है…
अपनी ही माँ और अब बहन के बारे में वो इस तरह से सोचता है…
पर ये विचार भी जितनी जल्दी आया था उतनी ही जल्दी चला भी गया और वो मीनू के करीब जाकर बैठ गया…

उसके हाथ ना चाहते हुए भी उसकी गोरी टाँगो पर पहुँच गये और उसे सहलाने लगे…

मीनू की हालत बुरी हो रही थी.

वो तो पिछले आधे घंटे से रामू का इंतजार कर रही थी,
और जब उसके कदमो की आहट सीढ़ियों पर सुनाई दी तो झट्ट से उसने अपनी स्कर्ट को थोड़ा उपर किया और गहरी नींद में सोने का नाटक करने लगी,
एक सैक्सी सा पोज़ बनाकर लेट गयी थी वो, और इस पोज़ की प्रेक्टिस उसने करीब 6-7 बार की थी रीतु के घर रहकर…
और उसे इस अवस्था में देखकर वही हुआ जिसका उसने और रीतु ने अंदाज़ा लगाया था,
रामू किसी ठरकी कुत्ते की तरह उसके करीब आकर उसकी नंगी टाँगो को महसूस करने लगा…

उसके हाथ जैसे-2 उपर आ रहे थे उसके शरीर का तापमान बढ़ता जा रहा था…
मीनू से साँस लेनी भी मुश्किल हो गयी जब रामू के हाथ उसकी मोटी जाँघो पर आकर लगे..

और उसने झत्ट से अपनी आँखे खोल दी…
रामू का हाथ बिजली की तेज़ी से वापिस चला गया..

रामू : “ओह्ह्ह …जाग गयी तुम..मुझे तो लगा था की गहरी नींद में सो रही हो, मैं तो जाने ही लगा था बस…”

मीनू ने कराहते हुए रामू का हाथ पकड़ लिया : “आह…भाई, आप को लगती ना तब पता चलता की कितनी तकलीफ़ हो रही है मुझे..देखो ज़रा, थोड़ी सूजन भी आ गयी है..”

इतना कहते हुए उसने रामू का हाथ अपनी चोट वाली जगह पर रख दिया और एक बार फिर से कराह उठी…

रामू को इस बार सच मे लगा की उसे काफ़ी तकलीफ़ हो रही है और वो साला अपनी बहन को ऐसी नज़रों से देखने में लगा हुआ था…
धिक्कार है उसपर.

वो जल्दी से उठा और दर्द निवारक तेल की शीशी लेकर उसके पैरो पर उडेल कर उसे मसाज करने लगा..

मीनू की एक टाँग उपर थी और दूसरी नीचे, इस वजह से उसके चाँदनी चॉक का दरवाजा पूरा खुला हुआ था जिसमें से उसके ताजमहल की झलक उसे सॉफ दिखाई दे रही थी…
वो तो एक महीन सा परदा था उसपर वरना उस खूबसूरती के नमूने को देखकर शायद वो मसाज करना भूलकर उसकी चूत मारना शुरू कर चुका होता..

रामू की नज़रो को अपनी चूत पर महसूस करके उसकी चूत से भी अंगारे निकलने लगे..

और एक मिनट भी नही लगा और उस सफेद कच्छी पर एक गीला धब्बा चमकने लगा..

रामू की नज़रें मीनू के चेहरे पर गयी तो वो मसाज का मज़ा लेते हुए अपनी आँखे मूंदे होले –2 मुस्कुरा रही थी…
थोड़ा नीचे नज़रे की तो उसकी कसी हुई टी शर्ट में चमकते हुए बटन देखकर वो समझ गया की उसने ब्रा नही पहनी है…
हालाँकि उसकी चुचिया इतनी बड़ी नही थी पर उसके निप्पल में ही इतनी कशिश थी की उसकी नजरें वहां जम कर रह गयी …

उसके हाथो की पकड़ धीरे-2 सख़्त होने लगी…
वो उसकी टाँगो के माँस को अच्छे से महसूस कर लेना चाहता था और ऐसा करते-2 कब उसके हाथ उपर खिसकने लगे ये उसे भी पता नही चला…
नज़रें उसकी छाती पर थी और हाथ उपर खिसकते जा रहे थे…
रामू को तो इसका पता नही चल रहा था क्योंकि वो तो किसी सम्मोहन में बंध चुका था…
पर मीनू की हालत खराब हो चली थी,

और ना चाहते हुए भी मीनू के मुँह से एक कराह निकल गयी

”अहह ओह भाययय्या”

रामू ने उसकी जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाते हुए कहा : “क्या हुआ मीनू…यहां भी दर्द हो रहा है क्या…”

मीनू ने थरथराती हुई सी आवाज में कहा : “यहाँ दर्द तो नही है भाई, पर पता नही क्यों आपके यहाँ हाथ लगाने से मुझे अंदर से क्या हो रहा है…अलग किस्म का मज़ा सा आ रहा है….करते रहो भाई, ऐसे ही करते रहो..”

रामू के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान आ गयी…
शायद वो अपनी छोटी बहन की नादानी की वजह से हंस रहा था…
वो सोच रहा था की बेचारी को ये भी पता नही है की उसका शरीर उत्तेजित हो रहा है जिसकी वजह से उसे मज़ा आ रहा है…

और फिर उसने मन में सोचा की उसकी नासमझी को हथियार बनाकर वो उसके जिस्म से खेल सकता है, और ऐसा करने में उसकी बहन का उसके प्रति नज़रिया भी नही बदलेगा और वो मज़े भी ले लेगा..

इसलिए वो बोला : “हाँ मीनू …ये शायद इसलिए हो रहा है क्योंकि तुम्हारा शरीर काफ़ी थका हुआ है, और थके हुए हिस्से पर जब मालिश की जाती है तो दर्द भी जाता है और मज़ा भी मिलता है… ”

मीनू अपने भाई की चिकनी चुपड़ी बातो को सुनकर होले से मुस्कुरा दी पर कुछ बोली नही…..

और उसकी चुप्पी को रामू ने उसकी स्वीकृति समझा और अपना हाथ थोड़ा और उपर बड़ा दिया…
और अब उसका हाथ उसकी चूत से टच कर रहा था…
बस एक महीन सा कपड़ा था बीच में वरना आज उनके रिश्ते के मायने ही बदल जाने थे…
बदल तो वो वैसे भी रहे थे क्योंकि इस वक़्त रामू के दिमाग़ में उसकी बहन नही बल्कि एक रसीले बदन वाली जवान लड़की तैर रही थी जिसके पूरे बदन की मालिश करके वो उसके हर दर्द को मज़े में बदल देना चाहता था..

इसलिए अपने हाथो को उपर करके वो लगभग हर बार उन्हे मीनू की चूत से टकरा रहा था…
मीनू दिखा तो नही रही थी पर वही जानती थी की उसकी चूत में उन टक्करो का क्या असर पड़ रहा है..
उसका सीना उपर नीचे हो रहा था..
निप्पलों की नोक और धारदार होकर उसकी टी शर्ट को भेदने लगी,
पेट वाले हिस्से में रह रहकर थिरक होने लगी…
होंठ अपने आप फड़फड़ाने लगे.

और उसके शरीर की इन सभी हरकतों को रामू बड़े ध्यान से देख रहा था…
वो तो यही समझ रहा था की मीनू इतनी नासमझ है की उसे ये पता भी नही चल पा रहा की ये जवानी की लहरे है जो उसके शरीर से उठ रही है और वो पगली इसे मसाज का कमाल समझकर खुश हो रही है..

रामू के दोनो हाथ उसकी दोनो टाँगो को उपर से नीचे तक सहला चुके थे…
चूत पर वो अभी हाथ डालना नही चाहता था क्योंकि इसका मतलब तो कोई गँवार भी समझ सकता था..
इसलिए उसने मीनू को पलटकर पेट के बल लेटने को कहा

इसके पीछे भी एक कारण था, और वो था उसकी भरंवा गांड ।

आज से पहले उसने सिर्फ़ अपनी बहन की गांड को ही नोट किया था..
क्योंकि उसके शरीर का वही एक हिस्सा था जो बाहर की तरफ निकला हुआ था और अपनी तरफ आकर्षित करता था, आज वो उन्ही नन्हे टीलों के गुदाजपन का मज़ा लेना चाहता था.

मीनू भी समझ गयी की लाला की तरह उसका भाई भी उसकी भरी हुई गांड का दीवाना है और होता भी क्यो नही वो थी ही इतनी सैक्सी की उसे एक बार जो देख ले तो उसे मसलने की इच्छा अपने आप आ जाती थी मन में.

पीछे की तरफ भी रामू ने तेल की धार पर अपने हाथो की थिरकन का कमाल दिखाया जो धीरे-2 उसकी स्कर्ट के अंदर जाता चला गया…
और अब वक़्त था उसकी स्कर्ट में छिपे चाँद के जोड़े को देखने का,
इसलिए रामू ने मीनू से कहा : “ये तेल तेरे कपड़ो में लग रहा है, इसे उपर कर दूँ क्या…? ”

मीनू ने मंद-2 मुस्कुराते हुए मन में सोचा ‘साला भोंदू , इतना पुराना आइडिया लाया है गांड को देखने के लिए, कुछ तो नया सोचता भाई..‘

पर अपनी नासमझी का परिचय देते हुए वो भोले सी आवाज़ में बोली : “भाई, जो करना है कर लो…मुझे तो इतना मज़ा आज तक नही मिला..”

यानी वो कहना चाहती थी की मेरी तरफ से छूट है, कर ले अपने मन की इच्छा पूरी..

रामू ने अपने काँपते हाथो से उसकी गांड का घूँघट उपर उठा दिया…
और सच में वो उसकी गांड की सुंदरता देखकर चकाचोंध हो गया..

उसका मुँह खुला का खुला रह गया और उसमें से ढेर सारी लार निकल कर उसकी गांड पर आ गिरी

ठंडे तेल के मुक़ाबले गर्म लार को महसूस करके फिर से वो आनंद भरे स्वर में कराह उठी…

”अहह…. अह्ह्ह्ह भैय्या ….म्*म्म्ममम”

रामू हंस दिया की कैसी पागल है, उसकी लार को भी तेल समझ कर कसमसा रही है..

फिर उसने सोचा की काश वो उसी लार में चुपड़ी जीभ से उसकी गांड के कटोरों को चाट पाता,
उन्हे अपने गीले होंठों से चूमा चाटा और अपने लार से सने दांतो से उनपर काट पाता.

और जिस रफ़्तार से उसकी गांड को देखकर उसके मन में ये विचार आ रहे थे उससे पता चल रहा था की वो वक़्त भी जल्द आने वाला है..

उसने एक बार फिर से वही पुराना डायलोग दोहराया : “नि…मीनू ..वो वो तेरी….तेरी कच्छी खराब हो जाएगी…तेल लगने से…कहे तो…इसको…”

वो अपनी बात पूरी भी नही कर पाया था की मीनू ने अपनी गांड उचकाई और अपनी कच्छी को पकड़ कर नीचे कर दिया.

मीनू : “भैय्या , आप तो ऐसे शरमा रहे हो जैसे ये बहुत बड़ी बात है….ये लो…अब लगाओ अच्छे से तेल”

उसकी इस हरकत से उसके भाई को हार्ट आटेक आते-2 बचा..
साली उसी के साथ खेल गयी..

अभी तक वो उसे उत्तेजित करने में लगा था और अब एक ही बार में उसने उसके लंड की वो हालत कर दी की उसका लंड बैठे नही बैठ रहा था…
सामने का नज़ारा ही इतना सैक्सी था.

उसने अपने काँपते हुए हाथ जैसे ही उसकी गांड की तरफ बढ़ाये की नीचे से उसकी माँ की तेज आवाज़ आई

”रामू……ओ रामू……कहाँ गया रे….”

एक ही झटके में रामू खड़ा हो गया और उसके पीछे-2 खड़ी होकर मीनू भी अपने बिस्तर पर बैठ गयी और उसका चेहरा सीधा आ टकराया उसके खड़े हुए लंड से…
बेचारा संभाल भी नही पाया था और उसके खड़े हुए लंड का एहसास मीनू को मिल गया…
उसे इस वक़्त बड़ी शर्म महसूस हो रही थी, अपने हाथो से अपने खड़े लंड को ढकता हुआ वो नीचे की तरफ भागा..

मीनू ने भी जल्दी से अपने कपड़े ठीक किए और चादर में घुसकर सोने का नाटक करने लगी….
मन में उसने 100 गालिया दे डाली थी अपनी माँ को…
आज वो नही जागती तो बहुत कुछ होने के आसार बन चुके थे उनके बीच…

अगली बार अब कोई और प्लान बनाना पड़ेगा रामू भैय्या के लिए.

रामू जब नीचे पहुँचा तो वहां से सीधा बाथरूम में घुस गया और बाहर आते हुए आवाज़ करके निकला ताकि उसकी माँ समझ ले की वो बाथरूम में था.

पर उसे सफाई देने की ज़रूरत ही नही पड़ी क्योंकि जब तक वो वापिस अपने बिस्तर पर पहुँचा तो उसकी माँ फिर से खर्राटे मार रही थी.

बीचे में शायद एक पल के लिए उनकी नींद खुली थी और रामू को अपने बिस्तर पर ना पाकर उन्होने आवाज़ लगा दी थी, और फिर से सो गयी थी…
उनका तो कुछ नही बिगड़ा पर उस वजह से रामू और मीनू का खेल बिगड़ कर रह गया था.

रामू को इस वक़्त अपनी माँ पर बहुत गुस्सा आ रहा था, मन तो कर रहा था की उसी खड़े लंड को उनकी उभरी हुई गांड में पेल डाले..

और ये ख़याल आते ही उसकी आँखे चमक उठी…
आधी रात होने को थी, मीनू का भी अब नीचे आना संभव नही था, माँ भी गहरी नींद में थी , ऐसे में उनके जिस्म के साथ कुछ तो मज़ा लिया ही जा सकता है..

ये सोचते ही वो उछलकर बैठ गया और दबे पाँव अपनी माँ के करीब पहुँचा,
वो पेट के बाल उल्टी होकर सो रही थी, पहले तो उनके चेहरे को उसने गोर से देखा और फिर एक-दो आवाज़ें लगाकर उसने सुनिश्चित भी कर लिया की वो गहरी नींद में सो रही है और फिर धीरे से उसने अपना हाथ उनकी मोटी गांड पर रख दिया.

उफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या फीलिंग थी,
आज पहली बार उसने अपनी माँ की गांड को छुआ था.और आशा के अनुरूप वो एकदम कड़क और गद्देदार थी.
रामू ने अपनी उंगलियाँ अंदर की तरफ धंसा दी और उस गद्देपन को महसूस करके खुश होने लगा.

उसकी लुंगी में खड़ा हुआ लंड उसने खुद ही बाहर निकाल लिया और एक हाथ से उसे मसलते हुए अपनी माँ की गांड की गहराई नापने लगा..

”ओह माँआआआआअ……. क्या गांड है रे तेरी…..सच में …..एक दिन लंड पेलुँगा इसके अंदर अपना….अहह”

उसकी माँ की साड़ी की फिसलन बता रही थी की अंदर उसने भी कुछ नही पहना हुआ है…
पेटीकोट और साड़ी के नीचे नंगी चूत लेकर सो रही थी वो इस वक़्त.

माँ की गांड मसलने के बाद उसकी हिम्मत थोड़ी और बढ़ चुकी थी,
उसने माँ की पिंडलियों से साड़ी को धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया…
जैसे-2 उनका नंगा जिस्म सामने आ रहा था, उसकी साँसे तेज होती जा रही थी.
और अंत में आकर वो घुटनो से थोड़ा उपर आकर अटक गयी,
पर फिर भी लोंडे ने हिम्मत नही हारी और तिरछा बैठकर उसने अपने हाथ को अंदर की तरफ सरका दिया…

अंदर का माहौल थोड़ा भारी सा था, हल्की नमी लिए हुए वो हिस्सा थोड़ा गरम भी था, और जब उसके हाथ माँ के नंगे चूतड़ों से टकराए तो वो कांपकर रह गया,
ऐसा लग रहा था जैसे माँस से बना बड़ा सा तरबूज पकड़ लिया हो उसने..
अपनी उंगलियों से उपर से नीचे तक सहलाने के बाद जब उसकी उंगलियाँ गांड की दरारों में घुसी तो उनके शरीर में कुछ हलचल सी हुई,
एक पल के लिए उसने अपनी हरकतें रोक दी पर अगले ही पल फिर से उन्हे सहलाने लगा…

और उसकी इस हरकत ने उसकी माँ की नींद खोल ही दी आख़िरकार…
हालाँकि अभी तक तो वो सो ही रही थी और उसके द्वारा किए जा रहे स्पर्श को वो सपना समझ कर मज़े ले रही थी,
पर चूत के करीब जब हाथ पहुँचा तो उसकी नींद खुल ही गयी…
और एक पल भी नही लगा उसे ये समझने में की रामू ही उसके साथ वो सब कर रहा है…

सुबह से उसकी हरकतों को नोट करने के बाद वो इतना तो जान ही चुकी थी की उसका बेटा उसके जिस्म का दीवाना है, पर इस वक़्त उसे ऐसी हरकत करते देखकर भी उसकी ये हिम्मत नही हो रही थी की अपने बेटे को वो रंगे हाथो पकड़ ले और उसे डांटे या मारे…

पर उसके बारे में सुबह से सोच-सोचकर उसके जिस्म ने भी जिस अंदाज से जवाब दिया था, वो भी उसे रामू को टोकने से मना कर रहा था..
हालाँकि था वो उसका सगा बेटा पर मज़े साला ऐसे दे रहा था जैसे गाँव का हरामी साहूकार लाला देता है सबको..

लाला के बारे में तो उसने अपनी सहेलियो से सिर्फ़ सुना ही था पर यहाँ तो उसके बेटे ने उसे छूकर वो सारी बाते सच ही कर दी थी जो उसकी उम्र की औरतें उसे सुनाया करती थी की इस उम्र में भी उन्हे सैक्स करने में कितना मज़ा आता है…

बरसो बाद उसकी बंजर ज़मीन पर फिर से पानी रिसना शुरू हो चुका था…
इसलिए वो चाहकर भी अपने बेटे को अपने खेतो की जुताई करने से नही रोक पा रही थी.

रामू की भूख बढ़ती जा रही थी,
उसने एक एक अपनी चारो उंगलियां अपनी माँ की चूत में उतार दी..
वहां की चिकनाई उसे ऐसा करने में मदद कर रही थी…
शरीर पहाड़ जैसा था उसका पर उसकी अक्ल में इतनी बात नही घुस पा रही थी की औरत की चूत जब पानी छोड़े तो इसका मतलब वो जाग ही रही है,
पर उसके हिसाब से तो वो गहरी नींद में ही थी अब तक..

उसने उस रस से भीगे हाथ को बाहर निकाला और चाट लिया,
और जब स्वाद उसके मुँह लगा तो हर उंगली को कुल्फी की भाँति चूसने लगा…
उसकी चूसने की आवाज़े सुनकर उसकी माँ का शरीर काँप रहा था की कैसे उसी चूत से निकला उसका बेटा वहां के जूस को भी चूस रहा है…

अब उससे सब्र करना मुश्किल सा हो रहा था इसलिए उसने करवट बदलने के बहाने अपने शरीर को सीधा कर लिया…
रामू तुरंत किसी लक्कड़बग्घे की तरह रेंगकर अपने बिस्तर में घुस गया.

भले ही अपनी माँ के साथ आज वो इतना आगे निकल चुका था पर उनकी डांट का डर अभी तक उसके दिलो दिमाग में था, इसलिए वो किसी भी कीमत पर पकड़ा नही जाना चाहता था…

पहले उपर वो मीनू के साथ कुछ करते-2 रह गया और अब नीचे अपनी माँ के साथ भी…
भले ही दोनो तरफ आज की रात वो असफल रहा था पर ये तो पहले दिन की शुरूवात थी,
जो आगे चलकर और भी गुल खिलाने वाली थी.

अगली सुबह लाला हमेशा की तरह अपनी दुकान खोलकर गली में इधर से उधर जा रही औरतों और लड़कियों की गांड देखकर अपना लंड मसल रहा था..

और बुदबुदा भी रहा था : “साली…. मेरी दुकान के सामने से निकलते हुए इनके कूल्हे कुछ ज़्यादा ही मटकने लग जाते है…. पूरे गाँव को अपने खेतो में लिटाकर चोद डालूँगा एक दिन, तब पता चलेगा इन छिनालो को…”

हालाँकि उसे चुतों की कमी नही थी, पर फिर भी ऐसी कोई चिड़िया जो उसके चुंगल में आज तक नही फँस पाई थी, उन्हे देखकर उसके मुँह से ऐसा निकल ही जाता था.

दोपहर होने को थी, उसकी पसंदीदा चूते यानी रीतु और मीनू, जिन्हे वो अभी तक चोद नही पाया था पर वो किसी भी वक़्त उसके रामलाल से चुद सकती थी, वो इस वक़्त स्कूल में थी, वरना आज वो पूरे मूड में था उनमें से किसी एक की चूत का उद्घाटन करने के लिए..

नाज़िया भी उनके साथ स्कूल में ही होगी, वरना उसे एक बार और पेलकर वो उसके संकरेपन को थोड़ा और खोल देता आज..

अंत में उसके पास दो ही विकल्प रह गये, रीतु की माँ सीमा और नाज़िया की अम्मी शबाना…

शबाना को भी वो कई सालों से चोदता आ रहा था इसलिए उसका मन सीमा की तरफ ही घूम रहा था, इसलिए वो झत्ट से उठा और सीमा के घर जाने के लिए तैयार होने लगा…

लेकिन जैसे ही वो दुकान का शटर गिराने लगा, सामने से उसे शबाना आती हुई दिखाई दे गयी..

वो करीब आई और अपनी मनमोहक मुस्कान के साथ बोली : “लगता है लालाजी किसी मिशन पर निकलने वाले हो…कहो तो मैं आपकी कोई मदद कर दूँ …”

अब उसके कहने का तरीका ही इतना सैक्सी था की एक पल में ही लाला के लंड ने उसके लिए हां कर दी…
लाला के हिसाब से तो लंड – 2 पर लिखा होता है चुदने वाली का नाम…
और आज ये चुदाई के नाम की पर्ची शबाना के नाम की निकली थी,
जो उसने खुद ही खोलकर उनके सामने रख दी थी..

लाला ने मुस्कुराते हुए कहा : “अररी शबाना…तेरे होते हुए भला मैं कौन से मिशन पर जाऊंगा भला…तू आ गयी है तो चल अंदर गोडाउन में …एक पुराने चावल का कट्टा खोला था कल…चल तुझे दिखता हूँ वो..”

शबाना : “हाय लाला जी…आप तो अंतर्यामी निकले…आपको कैसे पता की मैं चावल लेने ही आई थी…वो क्या हुआ ना, नाज़िया आने ही वाली है, पर देखा तो घर में चावल ही नही है…तो सोचा की मैं आपसे आकर ले जाऊ …”

लाला : “अररी, जो भी सोचा तूने, सही सोचा…नाज़िया के लिए तो लाला के चावल तो क्या, सब कुछ पेशे खिदमत है…”

इतना कहते हुए उसने बड़ी ही बेशर्मी से अपने खड़े हुए लंड को उसके सामने ही मसल दिया…

शबाना मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ दौड़ गयी और उसके पीछे –2 लाला अपनी दुकान का आधा शटर गिराकर अंदर आ गया..

वो पहले से ही उछल कर एक बोरी पर चढ़ी बैठी थी…
लाला के आने से पहले ही उसने अपने ब्लाउस के हुक आगे की तरफ से खोल दिए और उसके आते ही उन्हे अपने नर्म मुम्मो से लिपटा लिया…

लाला को हमेशा से उसकी यही बात अच्छी लगती थी…
सैक्स करने के लिए अपनी तरफ से वो हमेशा पहल करती थी, बिना कोई वक़्त गँवाए..

वो भी उसके लटक रहे खरबूजों को अपने मुँह में लेकर जोरों से चूसने लगा…

उससे पंगे लेने के लिए वो बोला : “अब तेरे में वो बात नही रही शबाना… अब ये लटक चुके है .. पहले जैसे कड़क नही रहे अब ये…”

वो भी लाला के चेहरे को अपनी छाती पर रगड़ते हुए कसमसाई : “ओह्ह्ह .. लाला…अब तुझे ये क्यों अच्छे लगने लगे…नाज़िया के नन्हे अमरूद चूस्कर उनके कड़कपन का मुकाबला कर रहा है ना तू इनसे… पर कसम से, अपनी जवानी में मैं भी उतनी ही कड़क थी…”

लाला को इस बात की सबसे ज़्यादा खुशी थी की उसी के सामने उसकी बेटी को पेलने के बाद अब वो उसके बारे में इतना खुलकर शबाना से बात कर सकता है…
एक माँ के सामने उसी की बेटी के हुस्न की तारीफ करके उसे सच में काफ़ी मज़ा मिल रहा था.

ऐसे में शबाना को अपनी बेटी से ज़्यादा अच्छा दिखने के लिए लाला को कुछ ज़्यादा ही खुश करने की एनर्जी मिली…
भले ही वो उसकी माँ थी पर थी तो वो एक औरत ही ना,
अपने सामने भला वो किसी और की बड़ाई कैसे सुनती.

इसलिए उसने एक पल भी नही लगाया अपने सारे कपड़े निकालने में …
गोडाउन की नमी में उसका शरीर काँप कर रह गया जब वो पूरी नंगी होकर लाला के सामने खड़ी हुई..

लाला की तरकीब काम कर गयी थी,
शबाना के हाव भाव बता रहे थे की बेटी से कंपेयर करने के बाद उसके शरीर में कितनी सफूर्ती आ चुकी है…

वो झत्ट से लाला के कदमो में बैठी और उसकी धोती को खींचकर उसने अलग कर दिया..
और लाला के लंड को एक ही बार में मुँह में लेकर चूसने लगी..

लाला भी उसके मुँह को बुरी तरह चोदने में लगा हुआ था,
आज वो उसपर किसी भी तरह का रहम नही कर रहा था..

उसने उसके लम्बे बालो का बँधा हुआ जूड़ा पकड़ा और उसके मुँह को किसी कुतिया की तरह चोदने लगा…
ऐसी बेदर्दी से अपने लंड को उसके मुँह में पेलने से उसके लंड पर भी दाँत लग रहे थे

पर इस वक़्त ज़ोर से मुखचोदन में जो मज़ा मिल रहा था उसका कोई मुकाबला नही था.

और जल्द ही लाला का लंड एकदम स्टील जैसा हो गया….
अब तो वो चावल की बोरी को भी भेदकर खोल सकता था…
उसने शबाना को उपर उठाया और उसी पुराने चावल की बोरी पर औंधा करके लिटा दिया और पीछे से उसकी एक टाँग को कुतिया की तरह उठाकर उसमे वो नुकीला रामलाल पेल दिया…

हल्के अंधकार में वो किसी घोड़ी की तरह हिनहीना उठी…

उसकी चूत से बह रहा सारा रस लंड के साथ अंदर की तरफ चला गया और चिकनाई बनकर वो रामलाल की सेवा करने लगा..

उसके मोटे अंगूर दाने जितने निप्पल खुरदूरी बोरी पर घिसकर लाल हो चुके थे…
थोड़ी देर और ऐसी घिसाई चलती रही तो उनमे से दूध टपकने में देर नही लगने वाली थी…
इसलिए शबाना ने अपने हाथ बोरी पर रखकर बीच में दायरा बना लिया और अब लाला के झटके इतने तेज थे की उसके झूलते हुए मुम्मे उसके शरीर को ही चोट पहुँचा रहे थे…
यानी कुल मिलाकर लाला ने अपने लंड से आतंक मचा रखा था.

”अहह लाला……. ओह….. क्या चोदता है रे लाला….. कसम से….इतने सालो से चुदाई करवा रही हूँ तुझसे पर आज भी पिछली बार से ज़्यादा मज़ा मिलता है…. अहह …. ओह लाला………….. उम्म्म्ममममममममम……. चोद साले …..चोद मुझे…… ”

लाला ने उसकी गांड का स्टेयरिंग अपने हाथो में पकड़ा हुआ था और उसे तेज़ी से चलाता हुआ वो जल्द ही उसकी चूत में झड़ने लगा…
अपने लंड नुमा ट्रक को उसने पूरा उसकी चूत में क्रेश कर दिया था.

और हाँफता हुआ सा वो उसके उपर गिरकर अपनी टूटी हुई सांसो को नियंत्रित करने लगा..

लाला तो वहीं बिछी चारपाई पर पसर गया पर शबाना ने अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए…
उसकी बेटी के आने का टाइम हो रहा था…
लाला ने जाते-2 उसे 1 किलो चावल पेक कर दिए और बाकी के चावल शाम को उसके घर पहुँचाने का वादा किया…

शबाना समझ गयी की आज की रात लाला एक बार फिर से उसकी फूल सी बेटी नाज़िया को चोदेगा.
पर अब उसे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता था…
क्योंकि उसकी चुदाई भी हो चुकी थी और चावल वाला काम भी हो चुका था.

वहीँ दूसरी तरफ स्कूल से आते हुए मीनू ने अपनी रात की आप बीती रीतु को शुरू से आख़िर तक सुना डाली… रीतु भी उसकी बात सुनकर हंस दी क्योंकि उसे रामू की हालत पर हँसी आ रही थी,
बेचारे की झंड हो गयी थी रात को…
वैसे दिल तो मीनू का भी टूटा था, क्योंकि उसने तो पूरा मन बना लिया था अपने और रामू के बीच की दीवार को तोड़ने का पर आख़िरी वक़्त पर उसकी माँ ने सारा खेल ही बिगाड़ कर रख दिया..

हालाँकि रीतु और उसने मिलकर प्लान तो काफ़ी अच्छा बनाया था पर उसकी माँ ने बीच में आकर सब गड़बड़ कर दिया था…
इसलिए पहले उसकी माँ से निपटने की ज़रूरत थी उन्हे…
और इसके लिए उन्होने आपस में मिलकर एक और प्लान बनाया और उसे सार्थक करने के लिए वो घर के बदले सीधा मीनू की माँ और भाई के खेतो की तरफ चल दिए..

आज तो मीनू ने सोच ही लिया था की बात आगे बढ़कर ही रहेगी.

खेतो मे तो रोज की तरहा एक नयी फिल्म चल रही थी..

अपनी माँ को घोड़ी बनकर झुके देखकर, खेतो में काम कर रहे रामू की आँखे चौड़ी हो गयी
जब उसने उनकी निकली हुई गांड देखी…
खेतों में बुवाई करने के लिए वो झुक झुक कर आगे बढ़ती जा रही थी, और बीज बोती जा रही थी,
इस बात से अंजान की उसके ठीक पीछे खड़ा उनका जवान पट्ठा उसके पुट्ठे देखकर अपना लंड मसल रहा है…

”आअहहह…… माँमाआआआआआ…. क्या मोटी गांड है रे तेरी…… इसमें एक दिन अपना लंड पेलुँगा इन्ही खेतों में …कसम से…तेरी बुवाई चलती रहेगी और मेरी चुदाई…. एक कोने से दूसरे कोने तक ऐसे ही घोड़ी बनाकर दौडाऊंगा तुझे… अपना लंड अंदर डाले-2…अहह….”

खुली आँखो से वो शेखचिल्ली की भाँति सपने देखने में लगा था…
वो भी इस बात से अंजान था की उसकी माँ का सारा ध्यान उसी की तरफ है.

कल रात की सारी बाते सोच-सोचकर सीमा की चूत सुबह से ही गीली हो रही थी…
ऐसा नही था की उसे भी ये माँ बेटे का अनुचित आकर्षण पसंद था
पर ये एक ऐसी फीलिंग थी जो एक बार मन में आ जाए तो वो उसके विपरीत सोच ही नही पा रही थी…
हालाँकि वो अच्छी तरह से जानती थी की दुनिया समाज और यहाँ तक की उसकी खुद की नज़रों में भी ये ग़लत है पर वो सब बाते एक तरफ थी और ये वाली फीलिंग एक तरफ
और इस फीलिंग ने उसके मसतिष्क को पूरी तरह से अपने कब्ज़े में ले लिया था..

झुकी होने की वजह से वो अपने पीछे खड़े रामू को कनखियो से देख भी पा रही थी, जिसका हाथ अपने लंड पर ही था…

वो चाहती तो उसे रंगे हाथो पकड़ कर उससे सब कुछ कबूल करवा सकती थी पर उसे पता था की वो ऐसा करेगा नही…

जैसे रात को उसके जागने के एहसास से ही वो वापिस अपने बिस्तर पर चला गया था…
वो कितना फट्टू है ये वो अच्छे से जानती थी.

अपना काम निपटा कर वो जब खड़ी हुई तो रामू खुद ही दूसरी तरफ मुँह करके दूर पेड़ के पीछे की तरफ चल दिया…

सीमा : “ओ रामू…. अब कहाँ चल दिया…. मुझे और बीज पकड़ा ज़रा, आज ये बुवाई का पूरा काम निपटाना है…”

रामू अपने खड़े हुए लंड को संभालता हुआ दूसरी तरफ चलता चला गया और पीछे मुँह करके बोला : “अभी देता हूँ माँ ….बस थोड़ा मूत आऊं …बड़ी जोर से लगी है…”

उसकी माँ के चेहरे पर अर्थपूर्ण मुस्कान फैल गयी….
वो जानती थी की कैसा मूत लगा है उसे…

रामू का लंड इस हदद तक खड़ा था की वो उसकी धोती के बाँधने वाली जगह से उपर की तरफ अपना मुँह निकाल कर खड़ा था…एकदम कुतुब मीनार की तरह…

पेड़ के पीछे पहुँचते ही रामू ने अपनी धोती नीचे खिसकाई और अपना विशालकाय लंड बाहर निकाल कर जोरों से उसकी रगड़ाई करने लगा…

”ओह माँमाआअ…… साली तेरी चूत भी तेरी जैसी चिकनी है….काश कल रात उसे चूस पाता ….अहह……”

दूर खड़ी सीमा की नज़रें अपने बेटे को ढूँढती हुई जब पेड़ो के पास गई तो उसे अपनी तरफ ही मुँह करके खड़े पाया….
भला ये कौनसा तरीका होता है मूतने का…
अपनी माँ की तरफ मुँह करके कौन मूतता है भला…
पर वो अब ये जान चुकी थी की ये मूत नही बल्कि मुट्ठ का मामला है…
उसका बेटा रोजाना उसे देखकर ही उस पेड़ के नीचे जाकर मुट्ठ मारता होगा…

ओह्ह बेचारा….
ऐसे ही करता रहा तो इसने अपना शरीर ही खराब कर लेना है…
जब शादी होगी तो कैसे चुदाई कर पाएगा ये अपनी बीबी की…
और इसका सारा दोष उसी के उपर आएगा, क्योंकि उसकी इस हरकत की असली वजह तो वो खुद ही थी ना…
और ये सोचकर सीमा ने मन ही मन ये निश्चय कर लिया की चाहे उसे अपनी मर्यादा को लाँघना ही पड़े, वो अपने बेटे का शरीर इस तरह से खराब नही होने देगी…
चाहे इसके लिए उसे अपने शरीर को उसे सोंपना ही क्यो ना पड़े…

अपनी संतान के लिए एक माँ क्या-2 कर सकती है ये बताने का वक़्त आ चुका था..
भले ही इसके पीछे उसका खुद का भी स्वार्थ छिपा था..
अपने पति के जाने के बाद बरसो पुरानी चूत में जो जंग लग चुका था वो पानी बहकर उसी की वजह से ही तो बाहर निकला था…
अब उसे उसी पानी में अपने लाड़ले को नहलाना था, ताकि वो ग़लत आदतों की वजह से अपना शरीर खराब ना करे..

उन दोनो के बीच ये रासलीला चल रही थी और उन दोनो की ही नज़रों से अंजान रीतु और मीनू वहां पहुँच चुकी थी…

माँ तो खेतो के बीच थी पर अपने भाई को पेड़ो के नीचे खड़ा देखकर मीनू उसी तरफ चल दी…
रामू अपनी माँ के हुस्न में इतना खोया हुआ था की उसे अपने दांयी ओर से आती अपनी बहन और उसकी सहेली के आने का आभास ही नही हुआ..

जैसे-2 दोनो रामू के करीब जाती गयी उनकी आँखे आश्चर्य से फैलती चली गयी…
रामू बड़ी ही बेशर्मी से अपनी माँ को देखकर अपना गन्ने जैसा लंड पीट रहा था..

मीनू का तो दिमाग़ ही घूम गया ये देखकर पर रीतु का शातिर दिमाग़ सब समझ गया…
जिस रामू को अपनी बहन को चोदने के लिए ये सब जतन वो करवा रही थी वो रामू तो अपनी माँ का दीवाना निकला..

यानी इस हिसाब से तो उसे पटाना उतना मुश्किल नही होगा जितना वो दोनो अब तक समझ रहे थे….
एक बंदा जब मांदरचोद हो सकता है तो बहनचोद भी हो सकता है…

और उन दोनो के लिए सबसे बड़ी बात ये थी की आज उन दोनो ने ही रामू का लंड पहली बार देखा था..
एकदम मस्त था वो..
हालाँकि लाला जैसा गठीला नही था पर जवानी के हिसाब से एक नया रूप लिए हुए था वो…

मीनू जो पहले से ही उसके लंड को लेने का मन बना चुकी थी, उसके लंड को देखकर अपनी चूत मसलने लगी और धीरे से बुदबुदा उठी ‘अहह…. देख ले री…. यही जाएगा तेरी बन्नो के अंदर….. उम्म्म्ममम…. कितना चिकना है ये तो….. चूत में लगते ही फिसलता चला जाएगा अंदर तक….‘

वहीं रीतु भी उसे देखकर ललचा गयी…
उसे भी पता था की लाला से अपनी चूत की ओपनिंग करवाने के बाद उसे ये लंड भी चखने को ज़रूर मिलेगा…
आख़िर रामू उसे भी काफ़ी पसंद था..

रीतु ने मीनू के कान में फुसफुसा कर कहा : ‘तेरा भाई तो और भी बड़ा हरामी निकला…साला अपनी माँ को देखकर ही अपना लंड हिला रहा है…तेरे पीछे तो ये पालतू कुत्ते की तरह घूमेगा…‘

उसकी बात सुनकर मीनू ने भी फुसफुसा कर कहा : ”और फिर उस कुत्ते से कुतिया वाले पोज़ में अपने अंदर डालवाउंगी इसके लंड को….सस्स्सस्स अहह….”

ये सुनकर रीतु ज़ोर से हंस दी..
और वो ज़ोर से इसलिए हँसी ताकि रामू का ध्यान उनकी तरफ आ जाए…
और हुआ भी ऐसा ही….
उसने जैसे ही अपनी तरफ आती हुई मीनू और रीतु को देखा, अपने लंड को झट्ट से उसने फिर से अपनी घोती में डाल लिया…

बातें करते-2 वो दोनो उसके करीब आई तो रामू बोला : “अर्रे, आज तुम दोनों यहाँ खेतों में कैसे आ गयी….”

और फिर मीनू की तरफ देखकर बोला : “अब तेरा पैर का दर्द कैसा है…”

मीनू और रीतु ने रास्ते में ही एक नया प्लान बना लिया था, उसी के अनुसार वो बोली : “बस भैय्या, चला तो जा रहा है पर ज़्यादा ज़ोर देने से दर्द अभी भी हो रहा है…इसलिए सोचा की आपको बोल दूँगी ताकि आप अपनी साइकल पर घर छोड़ आओ मुझे…”

बेचारे रामू का दिल ज़ोर से धड़क उठा…
रात वाली बातें उसके दिमाग़ से निकल भी नही आई थी और ऐसे मीनू का ये बेबाकपन उसे फिर से उन्ही विचारो की तरफ खींच रहा था..

मीनू और रीतु को देखकर रामू की माँ भी वहां आ गयी…
रामू ने उन्हे सारी बात बताई तो वो गुस्सा होने लगी की डॉक्टर को ही दिखाना सही रहेगा..
पर मीनू ने ज़ोर देकर कहा की घर पर मालिश से कल तक ठीक नही हुई तो वो खुद ही डॉक्टर के पास चलेगी..
उसकी माँ भी जानती थी की डॉक्टर के इंजेक्षन से उसे बचपन से ही डर लगता है..
इसलिए जैसा मीनू चाहती थी , उन्होने रामू को बोलकर मीनू को उसकी साइकल से घर जाने को कहा…
और ये भी कहा की शाम को वो खुद ही घर आ जाएगी..

अब साइकल पर कैरियर तो था नही, इसलिए सिर्फ़ मीनू ही उसके साथ आगे बैठकर जा सकती थी…
उनके जाने के बाद रीतु भी अपनी गांड मटकाती हुई अपने घर की तरफ पैदल ही चल दी..

रामू ने जब मीनू को बिठा कर साइकल चलानी शुरू की तो मीनू ने खुद ही अपने शरीर को पीछे की तरफ करके छोड़ दिया ताकि उसका भाई उसकी मखमली पीठ का एहसास ले सके..

पर जब रामू की टाँगे उसकी गांड से रगड़ाई करते हुए उसकी जाँघो पर आई तो उसका पूरा शरीर ही झनझना उठा…
वो तरंगे उसकी टाँगो से लेकर उसकी चूत तक को कंपित कर रही थी…
उसका ढीला शरीर अकड़ने लगा और उसकी छातियाँ और भी बाहर निकल आई…

ये सब देखकर उसका भाई रामू अपनी किस्मत पर इठला रहा था…
क्योंकि अपनी बहन की तरफ से उसे खुद ही ऐसे सिग्नल मिल रहे थे जिसमें वो उसे आसानी से चोद सकता था..
एक पल के लिए उसे ये भी लगा था की कहीं ये पैर की मोच और मालिश करवाना उसकी बहन की कोई चाल तो नही है पर फिर उसने खुद ही इस ख़याल को नकार दिया की उसमें इतनी अक्ल कहाँ है भला..

पर वो नही जानता था की वो अब उतनी नासमझ भी नही रही है जितना वो सोच रहा है…
रीतु के साथ मिलकर वो एक चालाक लोमड़ी बन चुकी है
और आज इस लोमड़ी ने अच्छा सा प्लान बना लिया था की कैसे अपना हुस्न दिखाकर रामू को अपना पालतू कुत्ता बनाना है.

 

रास्ता तोड़ा लंबा था, और रामू को भी आज जल्दी नही थी क्योंकि इस तरह से मीनू को बिठाकर उसने कभी भी साइकल नही चलाई थी..

उपर से उसके शरीर को छूने से उसमें जो उर्जा का संचार हो रहा था वो भी कुछ अलग ही था…

आख़िर जवान जिस्म का स्पर्श अपने आप में एक ताज़गी लिए होता है.

 

वहीं दूसरी तरफ मीनू भी अपनी गांड पर पड़ रहे भाई के ठुड्डे महसूस करके अंदर ही अंदर कराह रही थी…

मन तो उसका कर रहा था की उसका भाई उसे नंगा करके उसकी गांड पर ज़ोर-2 से थप्पड़ मारे ताकि उसकी ये जो उत्तेजना अंदर से निकल रही है वो और भी बढ़ जाए..

 

 

 

तभी रामू ने अपनी गर्म साँसे उसके कानों में छोड़ते हुए पूछा : “एक बात तो बता , कल रात तुझे मज़ा आया था क्या, जब मैने तेरी टाँगो की मालिश की थी…”

 

मीनू समझ गयी की उसके ठरकी भाई के दिमाग़ में क्या चल रहा है…

 

वो बोली : “भाई..बोला तो था मैने कल भी…मज़ा भी आया था और कुछ अजीब सा फील भी हुआ था…”

 

रामू ने इस बार अपने होंठो से उसके कानो को छू लिया और फुसफुसाया : “कैसा फील हुआ था …गंदा वाला या अच्छा वाला…”

 

रामू के गीले होंठो को अपने कानो पर महसूस करके उसके मुँह से एक हुंकार सी निकल गयी….

अगर ये हरकत उसने बंद कमरे में की होती तो इसका हर्जाना उसे अपना लंड चुस्वाकार चुकाना पड़ता कसम से…

पर गनीमत थी की वो गाँव के बीचो बीच से निकल रहे थे, ऐसे में वो कोई हरकत नही कर सकती थी..

 

वो फुसफुसाई : “आह….भाई…ये गुदगुदी तो ना करो ना…और मज़ा मिला था इसका मतलब अच्छी वाली फीलिंग ही होगी ना…”

 

रामू मुस्कुराया और बोला : “पहले कभी ऐसा मज़ा मिला है क्या…”

 

वो आवेश में बोल गयी : “हाँ ..बहुत बार…”

 

और ये बोलते के साथ ही उसने अपनी जीभ दांतो तले दबा दी…

ये क्या बोल गयी पगली..

 

रामू ने चौंकते हुए उसके चेहरे को देखा और साइकल रोक दी.. और बोला : “मतलब…?”

 

अब वो अपनी बात से पलट नही सकती थी….

उसका दिमाग़ जोरो से चलने लगा…

अब वो लाला का नाम तो ले नही सकती थी की उसने पहले भी उसे इस तरह के काफ़ी मज़े दिए है उपर से…

इसलिए उसने ना चाहते हुए भी रीतु का नाम ले दिया

 

मीनू : “वो…वो भाई….. रीतु और मैं अक्सर एक दूसरे के साथ ऐसे खेल खेला करते है… तब भी ऐसा ही फील होता है…”

 

रामू के तो रोंगटे खड़े हो गये ये सुनते ही…

यानी बंद कमरे में ये दोनो यही किया करती थी….

गुस्सा तो उसे बहुत आया ये सुनकर पर अगले ही पल उसके दिमाग़ में रीतु का जवान और नंगा जिस्म कौंध गया…

 

 

 

एक दम पका हुआ फल था वो…

उसके बारे में पहले उसने कई बार सोच-सोचकर मुट्ठ मारी थी…

वो भी उसे प्यार भरी नज़रों से देखा करती थी…

पर पिताजी की मृत्यु के बाद वो सब कहां गायब हो गया ये उसे भी पता नही चला…

आज मीनू ने जब रीतु के साथ उस तरह की हरकत करने की बातें कही तो उसे वो सारी बातें याद आती चली गयी..

 

उसकी बहन तो अपनी तरफ से पहले ही लाइन दे रही थी…

अब रीतु का ये राज जानकार रामू के दिमाग़ में उसे पाने का एक फूल प्रूफ प्लान बनना शुरू हो चुका था..

 

और इसलिए लिए उसे पहले मीनू को अपने जाल में फँसना पड़ेगा..

और यही करने तो वो घर जा रहा था..

 

इसलिए वो बड़े प्यार से बोला : “ओह्ह …रीतु के साथ ना…वो तो घर वाली बात है… उसके साथ आए या मेरे साथ..मज़ा मिलना चाहिए बस…आज भी वैसा ही मज़ा दूँगा घर चलकर…”

 

वो भी खुश हो गयी…

और खुशी के मारे उसकी छातिया थोड़ी और बाहर निकल आई…

जिन्हे देखकर रामू का लंड स्टील का डंडा बनकर मीनू की पीठ में चुभ रहा था…

 

खैर, किसी तरह से वो घर पहुँचे..

मीनू उछलकर साइकल से उतरी और उपर वाले कमरे में भागती चली गयी…

एक बार फिर से रामू उसके हिलते हुए चूतड़ देखकर अपना लंड अड्जस्ट करने लगा..

 

मीनू लगभग भागती हुई सी अपने कमरे में गयी और वहां से सीधा बाथरूम में.

 

पूरे रास्ते अपने भाई के ठुड्ड अपने कुल्हो पर खाने की वजह से उसकी गांड लाल हो चुकी थी…

और उसकी वजह से उसकी चूत में जो रक्त संचार हुआ था उससे वो भी एकदम गीली और लाल हुई पड़ी थी…

 

 

 

उसने अपनी सलवार और कच्छी निकाल फेंकी और तौलिये से अपनी गीली चूत को अच्छी तरह से सॉफ किया…

पर वो जितना भी सॉफ करती उतना ही गीलापन अंदर से बाहर निकल आता…

आख़िर में थक हारकर उसने दूसरी कच्छी उठाकर पहन ली और उपर से उसने वही कल रात वाली स्कर्ट पहन ली, उपर की कमीज़ उतारकर एक ढीला सा टॉप पहन लिया..

 

तब तक रामू भी उपर आ गया…और आवाज़ देकर उसने मीनू को बाहर आने को कहा..

 

वो तो पहले से ही तैयार थी…

सकुचाते हुए वो बाथरूम से ऐसे निकली जैसे कोई दुल्हन अपनी सेज की तरफ जाती है..

 

रामू का लंड अभी तक खड़ा था और आज तो उसने उसे बिठाने और छुपाने की भी कोई चेष्टा नही की,

वो चाहता था की उसके उभार को उसकी बहन देखे और जैसे वो तड़प रहा है वो भी तडपे..

 

और हुआ भी ऐसा ही…

बाथरूम से निकलकर , आँखे झुका कर जब वो रामू के करीब पहुँची तो उसकी झुकी नज़रें सीधा अपने भाई के उभार पर ही गयी..जो उसकी धोती में खड़ा हुआ, बँधा हुआ, अपने कड़कपन का एहसास दे रहा था..

 

उसे देखते ही उसके तन बदन में एक लहर सी दौड़ गयी..

चूत गिचगिचा गयी और उसमें से गाड़ा रस एक बार फिर से रिसने लगा..

 

रामू ने उसे पकड़ कर उसके बेड पर लिटा दिया और बोला : “चल अब उल्टी होकर लेट जा …मैं तेरी टाँगो की मालिश कर देता हूँ …”

 

वो बिना कुछ कहे, उसकी बात मानकर , अपनी गांड उचका कर बेड पर लेट गयी…

कल रात के मुक़ाबले आज वो कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित थी, शायद इसलिए क्योंकि आज उन्हे रोकने और टोकने वाला कोई नही था…

पूरे घर पर वो दोनो जवान जिस्म अकेले ही थे.

 

रामू ने तेल की शीशी उठाई और काँपते हाथो से उसकी लंबी स्कर्ट को उठा कर वो तेल उसकी नंगी टाँगो पर डाल कर उन्हे मसलने लगा..

 

एक चिर परिचित सा एहसास मीनू को फिर से गुनगुना गया…

वो अपनी पतली और सुरीली आवाज़ में कराह उठी.

 

”आआआआआअहह भैयययययययययययययया”

 

 

 

और आज तो रामू कल की तरह झिझक भी नही रहा था…

उसके हाथ धीरे-2 उपर आते गये जहां उसकी जाँघो का माँस और भी ज़्यादा होता चला जा रहा था…

रामू की उंगलियां उसके गोरे माँस में धंसकर एक लाल निशान बना रही थी.

 

रामू ने मीनू की स्कर्ट थोड़ी और उपर की तो उसे उसकी शहद में भीगी कच्छी दिखाई दे गयी…

शक तो उसे पहले से था की वो भीग रही होगी नीचे से पर उसके गीलेपन को देखकर उसे पूरा यकीन हो गया की वो पूरी तरह से इस खेल का मज़ा ले रही थी.

 

 

 

रामू ने उसकी स्कर्ट के हुक्स को खोलते हुए कहा : “ये उतार दे..बेकार में तेल लगने से खराब हो जाएगी ..”

 

उसने मासूम बने रहने का नाटक करते हुए उस ढीली सी स्कर्ट को नीचे सरका दिया…

 

अब वो सिर्फ़ एक पेंटी में उसके सामने उल्टी होकर लेटी थी…

 

और कल की तरह उसने एक बार फिर से उसकी कच्छी के लास्टिक को दोनो तरफ से पकड़ा और उसे नीचे करके उतार दिया…

इस बार तो उसने कल की तरह ओपचारिकता करके बोलने की भी ज़रूरत नही समझी…

 

और मीनू ने भी अपने भाई के सामने पूरी तरह से समर्पण करते हुए अपनी कमर उठा कर अपनी गीली कच्छी उतार दी और रामू को एक बार फिर से अपने भरे हुए तरबूजों के दर्शन करवा दिए…

 

 

 

 

इस बार तो उन्हे रामू ने जी भरकर देखा…

अपनी उंगलियों से उन्हे अच्छी तरह से दबाया…

उसकी उंगलियां बड़े ही डेंजर तरीके से उसकी चूत के इर्द गिर्द धूम रही थी…

पर वो उन्हे अंदर की तरफ नही धकेल रहा था…

शायद अपनी बहन को सताने का उसे एक अच्छा उपाय मिल चुका था…

 

उसने तेल की धार इस बार सीधी उसकी सुबक रही चूत पर गिराई , जिसे महसूस करके वो ऐसे छटपटाने लगी जैसे उसकी ठरक को बड़ाने वाला कोई बटन दबा दिया हो उसने..

 

”ओह भाई………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…… उम्म्म्मममममममममममम….. ये क्या कर रहे हो…..अहह”

 

पर उसने उसकी बात का जवाब देने की कोई ज़रूरत नही समझी और एक बार फिर से उसकी गांड का आटा गूंधने लगा…

और इस बार भी उसने उसकी चूत को अनदेखा ही किया, जिसपर उसकी उंगलियाँ महसूस करने के लिए वो अब और ज़ोर से तड़पने लगी थी..

 

गोर करने वाली बात ये थी की यहाँ तो पैरों में लगी उस मोच की मालिश चल रही थी जो कभी लगी ही नही थी..

और लगी भी थी तो वो काफ़ी नीचे थी…

यहां उपर आकर रामू किस करह की मालिश में मशगूल हो चुका था ये शायद उसे भी पता नही चल सका था..

 

मीनू के होंठ फड़फड़ा रहे थे….

वो सिसकारी मारते हुए बोली : “आह्ह्ह …. भैययय्या……… वहां करो ना….. जहाँ तेल गिराया था…..अहह”

 

रामू ने बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी पर काबू किया क्योंकि वो उसकी हालत को अच्छे से समझ पा रहा था..

 

वो बोला : “हाँ मीनू..वहीं तो कर रहा हूँ ….तेरी गांड की अच्छे से मालिश कर रहा हूँ …”

 

एक ही बार में उसने वो सारी हदें पार कर दी जिन्हे बनने में सालो का समय लगा था…

ना चूतड़ बोला ना हिप्स…

सीधा गांड बोलकर रामू ने दोनो के बीच की शर्म की दीवार को पस्त कर दिया..

 

मीनू सीसीया उठी : “आअहह……गांड पर नही….वहां ….व .वो……वो …..मेरी…. पुसी….पर”

 

रामू ने अंजान बनने का नाटक किया : “क्या ?….कहां पर….पुस्सी…..ये का होत है…”

 

मीनू भी जानती थी की उस अनपड़ को भला पुसी का क्या पता…

वो तो ठेठ देहाती था…

उसे तो यही गांड चूत वाली बात समझ आनी थी…

 

और वैसे भी, रामू ने खुद ही उस तरह की भाषा का इस्तेमाल करके ये जता दिया था की उनमें अब भाई बहन जैसा कुछ नही रहा है…

 

मीनू : “भाई….वो…वो…मेरी चूत पर…वहां की मालिश करो ना….”

 

रामू का लंड एकदम बौरा सा गया ये सुनते ही…

उसकी खुद की सग़ी बहन जो उसके सामने नंगी होकर उल्टी लेटी हुई थी..

 

और फिर उसने भी अपने काँपते हुए हाथो से ढेर सारा तेल अपनी उंगली में समेटा और उसे धीरे से लेजाकर उसकी कराहती हुई चूत पर रख कर धीरे से दबा दिया.

 

पक्क की आवाज़ के साथ वो तेल से भीगी उंगली उसकी चूत के अंदर फिसलती चली गयी और पूरी अंदर घुसकर ही मानी…

 

”आआआआआआआआआअहह ओह भेययय्याआआआआ….. उम्म्म्मममममममममम”

 

 

 

ऐसे मौके पर उसे भी भैय्या कहने में एक अलग ही तरह की उत्तेजना महसूस हो रही थी..

 

अब तो उनके बीच की रही सही शर्म की दीवार भी गिर चुकी थी…

इसलिए रामू ने अपने दूसरे हाथ से अपनी धोती की गाँठ खोल कर अपने हुंकारते हुए शेर को बाहर निकाल लिया और अपनी धोती एक तरफ फेंकते हुए वो अपने खड़े हुए लंड को लेकर सीधा अपनी फूल सी बहन के उपर लेट गया…

 

”अहह भाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स”

 

उसकी गांड के चीरे पर उपर से नीचे तक एक डंडे की भाँति वो धँस कर रह गया…

मीनू को ऐसा लगा जैसे उसकी गांड पर कोई लंबा सा डंडा फँसा कर रख दिया हो…

 

उसका फूल सा शरीर चरमरा सा गया अपने भाई के वजन से..

पर इस वक़्त तो उसे अपने शरीर से ज़्यादा नीचे रिस रही चूत की चिंता थी , जिसमें कभी भी उसके भाई का लंड घुस सकता था..

 

पर वो इतना आसान भी नही था और रामू उसे इतनी आसानी से करना भी नहीं चाहता था…

आज वो अपनी माँ के घर पर ना होने का पूरा फायदा उठा लेना चाहता था…

 

भले ही मीनू अपने भाई के वजन के तले दबी जा रही थी पर फिर भी उसके लंड के एहसास को अपनी चूत पर महसूस करके उसे मज़ा ही मिल रहा था..

 

रामू ने धीरे-2 अपने शरीर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया..

जैसे रेल गाड़ी में बैठकर धक्के लगते है, ठीक वैसे ही वो अपने शरीर को हिलाने लगा..

 

मीनू को अपनी गांड पर उस डंडे का एहसास उपर से नीचे तक महसूस हो रहा था..

एक अजीब सी शक्ति उसकी चूत के अंदर से उस लंड को अपनी तरफ बुला रही थी पर रामू था की उसे उपर ही उपर से घिस्से मारे जा रहा था..

 

बार-2 वो अपने फड़कते होंठो से ये बोलने की कोशिश करती की अब डाल भी दो ना भैय्या पर वो कह नही पाती थी…

रामू भी उसकी हालत को देखकर उन पलों का मज़ा ले रहा था..

 

उसने लगभग अपने दोनो होंठ उसके कान में घुसेड़ते हुए कहा : “क्या हुआ मीनू …अब कैसा फील हो रहा है तुझे…बोल ना…”

 

वो अपनी उसी सुरीली आवाज़ में कराहती हुई बोली : “अहह…..अच्छा …. बहुत अच्छा …… कल से भी ज़्यादा…… उम्म्म्मम…….”

 

 

 

रामू तो उसे पूरी तरह से अपनी बोतल में उतारने के चक्कर में था…

नीचे का नाड़ा तो वो खोल ही चुका था अब उपर का हुक खोलना बाकी रह गया था..

 

वो बोला : “ओ मीनू…ऐसा मज़ा तुझे पूरा लेना है क्या…”

 

मीनू तो जैसे बरसों से इसी बात का इंतजार कर रही थी…

वो कराहते हुए बोली : “भैय्या ..आज सारे मज़े दे दो मुझे….मैं तैयार हूँ …”

 

रामू मन में बुदबुदाया ‘साली…चुदाई के लिए तो ऐसे कुलबुला रही है जैसे डेली पैसेंजर हो….‘

 

पर उसे अभी चोदने से पहले वो उसके फूल से शरीर का पूरा मज़ा लेना चाहता था..

 

वो उसके उपर से हटा और उसे सीधा होकर लेटने को कहा..

और रामू ने उसे अपनी टी शर्ट भी उतारने को कहा ताकि वो उसकी पूरी तरह से मालिश कर सके ..

 

वो उठी और अपनी टी शर्ट उतार कर वो जन्मजात नंगी होकर अपने बिस्तर पर लेट गयी…

उसे अभी शर्म आ रही थी इसलिए उसने अपनी आँखे बंद कर ली…

पर रामू तो बेशर्म बन चुका था…

अपनी जवान बहन को अपने सामने नंगा लेटे देखकर उसकी तो आँखे फटी की फटी रह गयी…

वो उसके रसीले बदन को उपर से नीचे तक देखते हुए अपने लंड को मसलने लगा..

 

 

 

और लंड मसलते हुए वो बुदबुदाया : “साली….ऐसा नशीला बदन है तेरा…पहले पता होता तो कब का चोद चुका होता..”

 

और मीनू तो जैसे एक बादल के टुकड़े पर तैर रही थी…

उसके चारों तरफ का माहौल इतना रोमॅंटिक हो चुका था की इस वक़्त तो उसकी चूत पर कोई एक दस्तक भी दे डाले तो वो झड़ जाती…

सैक्स में ऐसी उत्तेजना का संचार होता है शरीर में ये उसे आज ही पता चला..

अब तो वो मन ही मन यही चाह रही थी की रामू अपने लंड का खूँटा जल्द से जल्द उसकी चूत में गाड़ डाले और उसे इतनी बेरहमी से चोदे की लाला के लंड को लेने में भी उसे तकलीफ़ ना हो.

 

रामू ने एक बार फिर से उसकी बॉडी पर ढेर सारा तेल डाला और उसे मसलने लगा…

तेल में चुपड़ कर उसकी बॉडी देसी परांठे जैसी हो गयी..

मन तो उसका कर रहा था की इस करारे परांठे को वो चपर –2 करके खा जाए…

 

 

 

पर उससे पहले उसे चुदाई से पहले की जाने वाली सारी क्रियाओं का मज़ा भी तो लेना था..

 

वो धीरे से नीचे झुका और उसने मीनू के कड़क निप्पल को मुँह में भरकर चूस लिया…

 

”आआआआआआआआअहह ओह भैय्याययययययाआ”

 

 

 

लाला के पोपले मुँह के मुक़ाबले रामू के सख़्त होंठ वाकई में कमाल के लग रहे थे उसे…

उसने रामू के सिर पर हाथ रखकर उसे अपनी छाती के उपर गिरा कर भींच लिया ताकि वो उसे अच्छी तरह से चूस सके..

 

रामू तो पहले से ही अपना पूरा मुँह खोलकर उसके मुम्मे को मुँह में डाल चुका था…

मीनू ने जब हेल्प की तो एक ही बार में उसने दोनो निप्पल अपने मुँह में लेकर उनपर दांतो से काट लिया, एक करंट सा दौड़ गया अपने भाई की इस हरकत से उसके सहरीर में.

 

धीरे-2 वो नीचे की तरफ जाने लगा…

जिस खुश्बू को वो कल रात से भुला नही पाया था उसकी तह तक जाकर वो उसे चूस लेना चाहता था…

और जैसे ही उसका चेहरा मीनू की चूत के उपर पहुँचा, तो मीनू ने एक जोरदार चीख मारकर उसे खुद ही अपनी चूत के अंदर खींच लिया…

 

 

 

”ओह भईआययय्याआआआआआ……. उम्म्म्मममममममममम….. चाआटो मुझे……. अहह चूऊस डाआलो……… मिटा दो मेरे अंदर की……साआरीइ…..खुजली…”

 

जिस तरह से वो ये सब बोल रही थी उससे सॉफ पता चल रहा था की ये उसका पहली बार नही है..

पर जैसा की मीनू खुद ही बोल चुकी थी की उसने रीतु के साथ ये सब मज़े लिए है तो रामू भी अपने काम में लगा रहा, अगर उसे ये पता चल जाता की जिस चूत को वो चूस रहा है उसे रीतु के अलावा लाला ने भी चूसा है तो पता नही वो क्या कर बैठता…

 

पर अभी के लिए तो उसे अपनी बहन की इस कुँवारी चूत को चूसने में काफ़ी मज़ा आ रहा था…

ऐसा लग रहा था जैसे अन्नानास का ताज़ा रस निकल रहा है उसकी चूत से….

थोड़ा खट्टा और थोड़ा मीठा…

और उसकी चूत के मखमली होंठो को चूसने में भी एक अलग ही मज़ा मिल रहा था….

 

 

 

और अचानक मीनू का शरीर हिचकोले खाने लगा…

आज की शाम का पहला ऑर्गॅज़म उसके शरीर से निकालकर चूत के रास्ते रास बनकर बाहर निकलने लगा जिसे उसके भाई रामू ने बेख़ुबी से चूस कर निपटा दिया…

 

और अपने उन भीगे होंठो को लेजाकर उसने सीधा मीनू के होंठो पर रख दिया और उन्हे बुरी तरह से चूसने लगा..

 

अपने भाई से मिल रही पहली किस्स और वो भी अपनी चूत के रस से भीगे होंठो से…

ये मीनू की उत्तेजना को बड़ाने के लिए प्रयाप्त था…

वो रामू की गोद में चड़कर उससे बुरी तरह से लिपट गयी, जैसे उसके अंदर समा जाना चाहती हो

और उस स्मूच का जवाब उससे भी बड़ी वाली स्मूच से देने लगी

 

 

 

उसने तो अपनी टांगे भी फेला डाली…

ताकि इस किस्स को करते-2 रामू अपना लंड अंदर पेल ही डाले…

जो होगा देखा जाएगा…

पर रामू तो रामू ही था..

अभी तो उसे अपने राजा बेटे यानी अपने लंड को भी थोड़े मज़े दिलवाने थे

और वो काम उसकी चूत के होंठो से ज़्यादा उसके मुँह के होंठ कर सकते थे.

 

इसलिए उसने मीनू की उस चुदाई के ऑफर को थोड़ी देर के लिए साइड में रखते हुए उसे अपने लंड की तरफ धकेल दिया ताकि वो उसे अच्छे से चूस कर चुदाई के लिए तैयार कर सके..

 

मीनू भी काफ़ी देर से अपने भाई के छोटे भाई को पकड़ने और मुँह में लेने के लिए तड़प रही थी…

अब मौका मिला था तो वो उसे पूरी तरह से इस्तेमाल कर लेना चाहती थी…

 

वो नागिन की तरह सरकती हुई नीचे तक गयी और रामू के लंड को हाथ में पकड़ कर उसे एकटक निहारने लगी… अपनी चूत को फाड़ने वाले इस लंड को वो अपनी आँखो में हमेशा के लिए बसा लेना चाहती थी…

जैसे पहला प्यार कभी नही भुलाया जाता ठीक वैसे ही वो इस पहली चुदाई में होने वाले हथियार को हमेशा के लिए अपनी आँखो में बसा लेना चाहती थी…

ताकि आज के बाद जब भी उसकी चुदाई हो तो इस लंड को मन में सोचकर उस पल को याद कर सके और पहली चुदाई का मज़ा हर बार ले सके.

 

उसने धीरे से अपनी साँप जैसी जीभ निकाली और उसके लंड पर आई ओस की बूँद को चाट कर निगल गयी…

 

”आआआआआआआअहह भाई……. इतना मीठा है तुम्हारे लंड का पानी…… उम्म्म्ममममम”

 

 

 

और फिर उसके बाद तो वो रुकी ही नही…..

अपनी जीभ और होंठो को उस मोटे खीरे जैसे लंड के चारों तरफ लपेटकर वो उसकी मोटाई और गहराई नापने लगी….

रामू ने उसके चेहरे को अपने हाथो से पकड़ा और अपना मोटा और लंबा लंड उसके मुँह में डालकर उसके मुँह को चूत की तरह चोदने लगा..

उसके मखमली होंठो में लंड फँसाकर हिलाने में इतना मज़ा मिल रहा था तो उसकी चूत मारने में कितना मज़ा आएगा, यही सोचकर उसका लंड और भी कड़क होकर अंदर बाहर होने लगा.

 

 

 

रामू अपनी आँखे बंद करके उसके रेशमी होंठो को अपने लंड पर महसूस करके कराहने लगा….

 

”अहह….. ओह मीनू …… मेरी ज़ाआआआनन्न…. उम्म्म्ममममममममम…. चूऊस साली……अहह……. खा जा इसे पूरा ….”

 

खाने के नाम से उसे लंड के नीचे लटके टटटे भी याद आ गये…

उसने लंड को बाहर निकाला और उसकी बॉल्स मुँह में भरकर उनका रस निचोड़ने लगी….

 

रामू को भी आज से पहले ऐसा मज़ा आज तक नही मिला था….

आज से पहले तो वो अपने हाथ का खिलाड़ी था

और वो जानता था की अब उसे अपना हाथ इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं पड़ेगी क्योंकि अब तो ये रोज ही हुआ करेगा…

 

मीनू तो उत्तेजना के मारे इतनी पागल सी हो चुकी थी की उसे अब रामू के हर अंग को चूसने में मज़ा मिल रहा था… उसकी बॉल्स को चूसते –2 वो कब उसकी गांड के छेद को चाटने लगी ये भी उसे पता नही चला…

रामू के लिए ये एक अलग तरह का एक्सपीरियेन्स था…

एक अजीब तरह की गुनगुनाहट का एहसास हुआ उसे जब मीनू ने उसके लंड को मुट्ठी में भरा,

उसके झूल रहे टटटे उसकी आँखो में धाँसे जेया रहे थे

और उसके करिश्माई होंठ रामू के निचले छेद पर बुरी तरह जमकर वहां की चुसाई कर रहे थे….

रामू का पूरा शरीर हवा में तैर रहा था…

 

 

 

और अचानक अपनी बंद आँखो के पीछे उसे ये एहसास हुआ की ये जो मज़ा उसे मिल रहा है वो मीनू नही बल्कि उसकी माँ उसे दे रही है…

यानी इस वक़्त भी उसके जहन में उसकी माँ के ख़याल ही आ रहे थे…

 

और उसे पता भी नही चला की कब अपने चरम पर पहुँचते हुए उसके मुँह से मीनू के बदले अपनी माँ के लिए वो शब्द निकल गये जो शायद उसे अपनी बहन के सामने बोलने ही नही चाहिए थे…

 

”ओह माँ आआआआआआ….. चूस मेरे लंड को…….. खा जा इसे….माँ ”

 

और अगले ही पल उसने चौंकते हुए अपनी आँखे खोल दी….

और ऐसा ही कुछ मीनू ने भी किया जब उसने अपने भाई के मुँह से अपनी माँ के लिए वो सब सुना…

 

पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी…

कमान से निकले तीर की भाँति शब्द भी लौटकर आने वाले नही थे…

और ना ही वो पिचकारी लोटने वाली थी जो उसके उन शब्दो के साथ ही उसके लंड से निकली थी…

 

 

 

एक के बाद एक पिचकारी मारते हुए रामू के लंड ने मीनू के चेहरे को तर बतर कर दिया…

 

पर झड़ने के बाद होने वाली वो खुशी उसके चेहरे से गायब थी…

क्योंकि मीनू की नज़रें उससे लाखो सवाल कर रही थी.

 

और उसे पता भी नही चला की कब अपने चरम पर पहुँचते हुए उसके मुँह से मीनू के बदले अपनी माँ के लिए वो शब्द निकल गये जो शायद उसे अपनी बहन के सामने बोलने ही नही चाहिए थे…

 

”ओह माँ आआआआआआ….. चूस मेरे लंड को…….. खा जा इसे….माँ ”

 

और अगले ही पल उसने चौंकते हुए अपनी आँखे खोल दी…. और ऐसा ही कुछ मीनू ने भी किया जब उसने अपने भाई के मुँह से अपनी माँ के लिए वो सब सुना…पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी…

कमान से निकले तीर की भाँति शब्द भी लौटकर आने वाले नही थे…और ना ही उसके लंड की वो पिचकारी लोटने वाली थी जो उसके उन शब्दो के साथ ही उसके लंड से निकली थी…

 

 

 

एक के बाद एक पिचकारी मारते हुए रामू के लंड ने मीनू के चेहरे को तर बतर कर दिया…पर झड़ने के बाद होने वाली वो खुशी उसके चेहरे से गायब थी…क्योंकि मीनू की नज़रें उससे लाखो सवाल कर रही थी.

 

**********

अब आगे

**********

 

रामू कुछ देर तक उसके सवालो से भरे चेहरे को देखता रहा और फिर बिना कुछ कहे अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल गया और अपनी साइकल उठा कर फिर से खेतों की तरफ चल दिया.

 

मीनू की तो समझ में ही नही आया की ये एकदम से हुआ क्या है…

उसके और रामू के बीच की वो दीवार अब गिर चुकी थी और ऐसे में तो रामू को उसके नंगे हुस्न को देखकर पागल हो जाना चाहिए था…

पर वो साला तो माँ के बारे में सोच रहा था..

इसका मतलब सॉफ था, वो उससे ज़्यादा अपनी माँ का दीवाना था,

तभी तो अपनी नंगी बहन से लंड चुसवाते हुए भी उसे उन्ही का ख़याल आ रहा था.

 

वो झल्लाती हुई सी उठी और अपने बाथरूम में घुसकर अपना चेहरा सॉफ करने लगी…

अब तो रीतु ही इस बात का कोई समाधान निकाल सकती है…

इसलिए उसने अपना हुलिया ठीक किया और कपड़े पहन कर वो रीतु के घर की तरफ चल दी.

 

उधर शाम को लाला ने अपने लंड की गर्मी देखते हुए अपनी दुकान जल्दी बढ़ा दी…

उसकी धोती में क़ैद रामलाल तभी से नाज़िया के नाम की रट लगाए हुए था जब से उसकी माँ शबाना उसे शाम को घर आने का न्योता देकर गयी थी.

 

एक बार फिर से शबाना की बेटी को उसकी अम्मी के सामने चोदने का मज़ा वो खोना नही चाहता था..

इसलिए अपनी बुलेट पर चावल की बोरी लादकर वो उनके घर की तरफ चल दिया.

 

शबाना को शायद लाला का ही इंतजार था, इसलिए दरवाजा पहले से ही खुला मिला उन्हे….

लाला अंदर आया, बोरी को साइड में रखा और घर के अंदर चल दिया.

 

पूरे घर में शांति सी छाई हुई थी और अंधेरा भी था, लाला तो अपने लंड को लालटेन बनाकर नाज़िया को ढूंढता हुआ सा अंदर घुसता चला गया..

नाज़िया तो नही दिखी पर अपने कमरे में कपड़े बदलती हुई शबाना ज़रूर दिखाई दे गयी,

उसका गीला बदन देखकर पता चल रहा था की वो अभी-2 नहा कर आई है…

घर में लाइट नही थी, इसलिए बाहर जल रही मोमबत्ती की हल्की रोशनी वहां पहुँच रही थी जिसमें उसके हुस्न का दीदार हो रहा था लाला को…

वो अभी सिर्फ़ कच्छी ही पहन पाई थी और उपर से नंगी थी और लाला के लंड को और सख़्त करने के लिए उसके वो बड़े मुम्मे ही काफ़ी थे..

 

 

 

 

लाला : “हाय …मेरी जान….क्या कहर मचाने का इरादा है…”

 

शबाना तो लाला को अपने कमरे में देखते ही एकदम से चोंक सी गयी…

ऐसे नाटक करने लगी जैसे उनके आने का पता ही नही चला उस छिनाल को.

 

अपने मुम्मो को अपने हाथो से ढ़कते हुए वो हड़बड़ाई हुई सी आवाज में बोली : “ओह्ह्ह .. लालाजी…आप……!!!!”

 

लाला ने अपनी धोती को उपर करके अपना सेवक रामलाल बाहर निकाल लिया ,

लाला के चमक रहे सुपाड़े को देखकर उसकी गीली कच्छी और भी गीली होने लगी,

उसकी चूत अपने ही रस में डूबकर गिचगिचाने लगी…..

 

लाला : “आया तो मैं नाज़िया के लिए था पर तेरे हुस्न को देखकर अब आँखे हटाने का मन सा नही कर रहा ….”

 

तब तक शबाना भी अपनी वो नकली शर्म त्याग कर उनके करीब आ गयी और अपने मोटे मुम्मे लाला की छाती से रगड़ते हुए बोली : “नाज़िया और मुझमें ज़्यादा फ़र्क थोड़े ही है लालाजी…. उससे ज़्यादा आग लगी रहती है मेरी निगोडी चूत में ..और आपके लंड को देखकर तो वो और भी भड़क जाती है…”

 

उसकी बातो से लाला को जलन की बू आ रही थी…

कही ऐसा तो नही था की उसके आने से पहले शबाना ने जान बूझकर नाज़िया को कहीं भेज दिया हो…

भले ही माँ थी वो उसकी पर एक औरत के प्रेमी पर जब उसकी खुद की बेटी नज़र डाले तो वो अपना आपा खो ही देती है…

 

पर लाला को इससे आगे कुछ सोचने समझने का मौका ही नही मिला क्योंकि नाज़िया ने अपने गीले और नंगे बदन को लाला से रगड़ते हुए अपना सारा पानी पोंछ डाला…

लाला की घनी मूँछ और दाढ़ी से भरे चेहरे को वो बेतहाशा चूमने लगी, लाला के लंड को पकड़ कर उसे दोहने लगी और अपने पैर उचका कर उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी..

 

लाला : “ओह्ह्ह्ह …..शबाना…..मेरी जान …. आज लगता है तुझे कुछ ज़्यादा ही गर्मी चढ़ी हुई है….”

 

पर शबाना उन बातो का जवाब देने के मूड में नही थी इस वक़्त…

वो लाला के गठीले बदन को चूमते हुए उनके कुर्ते को निकालने लगी और जैसे ही वो उतरा उसने अपने प्यासे होंठ लाला के निप्पल पर लगा कर उनका दूध पीना शुरू कर दिया…

 

लाला : “ओह मदारचोद ……साआाअली…… उम्म्म्मममममम…… चाट ले इसे…… आज तो तुझे मेरे टटटे भी चाटने होंगे…. वो तुझ जैसा कोई और नही चाट्ता….”

 

अपनी ये तारीफ सुनकर वो तैश में आ गयी और उन्हे चूसते हुए नीचे तक जाने लगी…

लाला ने एक झटके में अपनी धोती भी उतार फेंकी और वो अब किसी रेसलिंग के पहेलवान की तरह पूरा नंगा खड़ा था शबाना के अखाड़े में …

वो नीचे बैठी और लाला के टट्टो को मुँह में लेकर उन्हे जोरों से चूसने लगी जैसे उसके कल के नाश्ते का मक्खन उनमें से ही निकलेगा…

 

 

 

शबाना मे एक खूबी ज़रूर थी जो लाला को हमेशा से पसंद थी और वो ये की उसे अपनी जीभ और मुँह को उसके किसी भी अंग में घुसाने में कोई शर्म या घिन्न नही आती थी…

चाहे वो उसके टटटे हो या फिर उसकी गांड का छेद.

 

लाला की बॉल्स चूसने के बाद उसका अगला निशाना लाला की गांड का छेड़ ही था…

उसने लाला के एक पैर को अपने कंधे पर रखा और नीचे घुस कर उन्हे नीचे से चाटने लगी…

जैसे कोई कार मैकेनिक गाड़ी के नीचे घुस कर काम करता है, ठीक वैसे ही वो लाला की गाड़ी की मरम्मत करने में लगी हुई थी..

 

 

 

लाला का मोटा लंड किसी हिचकोले खा रहा था

 

”अहह शबाआंआआआआआना …… उम्म्म्ममममममममममममममम…. मजाआाआ आआआआआअ गय्यहा आआआआअ…. अहह….”

 

और तभी लाला की आँखे खुली और उन्होने शबाना के ठीक पीछे नाज़िया को खड़े देखा….

जिसके हाथ में कुछ सिलाई के लाए हुए कपड़े थे जो शायद उसने किसी के घर देने के लिए भेजा था…

उसके चेहरे पर भी आश्चर्य के भाव थे क्योंकि वो भी जानती थी की लाला उसके लिए ही शाम को आने वाला है और शायद तभी से उसकी चूत में हो रही कुलबुलाहट उसे चैन से बैठने नही दे रही थी…

ऐसे में एकदम आख़िरी वक़्त पर जब उसकी माँ ने सिलाई के कपड़े देकर उसे देकर आने को कहा तो वो झल्ला गयी थी क्योंकि जहां उसकी अम्मी उसे भेज रही थी वो घर काफ़ी दूर था …

पर एक बात और थी की रास्ते में लाला की दुकान भी पड़ती थी, और वहां पहुँचकर उसने देखा की लाला दुकान बंद करके उसके घर की तरफ ही जा रहा है तो वो उसी शॉर्टकट रास्ते से वापिस घर की तरफ भाग ली पर तब तक उसकी माँ की चाल कामयाब हो चुकी थी,

लाला का लंड उसके हाथ में था और वो उसके कदमो में पड़ी उसके टटटे और गांड चाट रही थी…

 

अब लाला को भी थोड़ी मस्ती सूझी…

वो जानता था की नाज़िया की चूत भी उसके लंड के लिए उतनी ही मचल रही है जितनी की शबाना की,

पर शबाना ने अपनी चालाकी से पहले बाजी मार ली थी…

पूरी नंगी होकर वो इस खेल में पहले ही शामिल हो चुकी थी इसलिए अब उसे हटाया तो जा नही सकता था पर इतना ज़रूर था की इस खेल को थोड़ा और रोचक ज़रूर बनाया जा सकता था.

 

इसलिए लाला कुछ सोच समझकर बोला : “ओह्ह्ह ….शबाना …मेरी जान…माना की तेरे जैसे टटटे कोई नही चूसता पर नाज़िया जैसा लंड भी कोई और नही चूस सकता …कसम से…”

 

लाला का इतना कहना था की शबाना भरभराकर बोली : “ओह्ह्ह लाला…..वो कल की बच्ची क्या चूसेगी… मुझे देखकर ही तो सीखी है वो सब….”

 

इतना कहते हुए उसने लाला के रामलाल को मुँह में डाला और उसे उपर से नीचे तक अपनी थूक से नहला कर चूसने लगी..

 

अपनी माँ की ये बात सुनते ही नाज़िया भी जोश में आ गयी

और वो भी बेशर्मो की तरह उनके सामने आती हुई बोली : “नही अम्मी…..ऐसा नही है… मुझे सिखाने में आपसे ज़्यादा मेरे हुनर का हाथ है… मुझमें ही हमेशा से इस तरह से लंड को चूसने की ललक थी, मेरी सहेलियों ने अक्सर बताया था की लंड को कैसे चूसा जाता है, और लाला के लंड को चूसने से पहले मैने ना जाने कितने केले खाए थे अकेले में, घंटो उन्हें चूसकर प्रेक्टिस करती रहती थी, तब जाकर ऐसा हुनर आया है मुझमे …”

 

वो तो अपना मुक़द्दमा लेकर सीधा अपनी माँ के सामने कूद पड़ी थी..अनजाने में ही सही पर उनके घर में ज्यादा केले क्यों आते थे, इनका राज खोल दिया था नाज़िआ ने.

 

शबाना भी उसे एकदम से अपने सामने खड़े देखकर चोंक सी गयी,

क्योंकि उसे गये हुए अभी कुछ ही देर हुई थी और उसके अंदाज़े के अनुसार तो उसे अभी और भी टाइम लगना था वापिस आने में..

 

पर वो एकदम से सामने भी आ गयी और उसकी बात सुनकर अपनी दलील भी दे रही थी,

इससे सॉफ जाहिर था की उसे अपनी अम्मी की कही बात पसंद नही आई…

 

पर अब लाला के सामने वो अपनी बेटी से लड़कर उस बात का बतंगड़ नही बनाना चाहती थी,

इसलिए वो खड़ी हुई और अपनी बेटी को पूचकारते हुए प्यार से बोली : “अररी, आजा मेरी लाडो, मैं तो लाला से बस यही कह रही थी की ये तो एक खानदानी हुनर है जो मुझसे तेरे में गया है…तू अपना दिल छोटा ना कर…ये देख, लालाजी तो तेरे लिए ही आए है यहां ..और जब तक तू वापिस आती तो मैने सोचा की मैं ही इनकी कुछ खिदमत कर देती हूँ …पर अब तू आ गयी है तो तू भी आजा…”

 

साली बड़ी हरामी औरत थी वो…

उसने बड़े प्यार से अपनी बेटी को अपने शब्दो के जाल में उलझा कर उसे शांत करा लिया…

नाज़िया भी बात को ज़्यादा बढ़ाना नही चाहती थी क्योंकि लाला के आतिशी लंड को देखकर उसकी चूत बुरी तरह से पनिया रही थी…

ऐसे में वो अपनी अम्मी से लड़कर उस खूबसूरत लंड से हाथ धोना नहीं चाहती थी.

 

इसलिए उसने तुरंत अपनी कुरती उतार फेंकी और नीचे से अपनी शमीज़ को भी उतार दिया…

उसकी नन्ही और नुकीली ब्रेस्ट देखकर लाला का लंड और भी ज़्यादा ज़ोर से हुंकारने लगा…

अपनी कच्छी भी उसने एक ही झटके में उतार डाली और अब वो पूरी नंगी होकर खड़ी थी लाला के सामने,

और उसके नंगे हुस्न को देखकर लाला की लार टपके ही जा रही थी..

 

 

 

और अगले ही पल वो दोनो माँ बेटियां लाला के सामने बैठकर अपने-2 हिस्से के अंगो को चूसने और चुभलाने लगी..

 

नाज़िया ने लंड को चूसा तो शबाना ने लाला के टट्टो को…

 

खुशनसीब होते है वो लोग जिनके लंड और टटटे दो अलग-2 मुँह में होते है और वो भी एक ही वक़्त में…

और इस वक़्त लाला के साथ ऐसा हो रहा था…

वो तो अपना मुँह फाड़े , अपनी आँखे बंद किए ऐसे खड़ा था जैसे किसी देश का प्रधान हो…

 

और लाला के रामलाल को अच्छी तरह से खुश करने के बाद वो दोनो लाला का हाथ पकड़ कर पास पड़े बेड तक ले गयी और उन्हे लिटा कर दोनो लाला के इर्द गिर्द चिपक कर उन्हे चूमने लगी…

एक तरफ मोटे और गद्देदार मुम्मे थे और दूसरी तरफ नन्हीं और कड़क चुचियां..

लाला ने पूरी जिंदगी यही तो कमाया था जो उसे ऐसा सुख मिल रहा था…

और इसका सारा श्रेय उनके लंड रामलाल को जाता था जो इस उम्र में भी ऐसी परफॉर्मेंस देकर उन्हे इस तरह की ऐश करवा रहा था..

 

पहले चुदना नाज़िया को था इसलिए वो बिना किसी विरोध के लाला के उपर सवार हो गयी और और लाला की आँखो में देखते हुए उसने अपना हाथ नीचे डालकर रामलाल को पकड़ा और उसे अपनी चूत के मुहाने पर रखकर धीरे से सीसीया उठी और फिर अपनी माँ के चेहरे को देखते हुए वो धीरे-2 उस लंबे डंडे पर अपनी चूत के बल उतरने लगी…

 

एक तो डंडा इतना चिकना और उपर से चूत भी रस बरसा रही थी,

ऐसे में उस मोटे लंड को उस कमसिन चूत में उतरने में ज़रा भी तकलीफ़ नही हुई…

और जल्द ही वो पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में हड़प कर गयी..

 

 

 

और उसके बाद जब उसने लाला के सीने पर अपने हाथ रखकर अपनी कमर मटकानी शुरू की तो लाला सिर्फ़ उसकी नन्ही बूबियाँ हिलती हुई देखता रहा…

बाकी का काम यानी अंदर बाहर का वो खुद ही करती रही…

 

लाला के मोटे लंड पर उसकी कसी हुई चूत किसी मखमली कपड़े का एहसास दे रही थी…

हर बार जब वो अपनी रस से भीगी चूत को लाला के लंड पर ढप्प से टकराती तो चूत के रस की बूंदे छलक कर दूर तक जा गिरती..

 

 

 

और वो बूंदे जब शबाना के शरीर पर पड़ती तो वो ऐसे मचल उठती जैसे तपते हुए रेगिस्तान पर पानी का छिड़काव कर दिया हो…

 

अपनी बेटी को देखकर लाला के लंड को लेने की इच्छा उसमें भी थी…

पर अभी तो नाज़िया का नंबर लगा हुआ था, इसलिए उसे अपनी बार की प्रतीक्षा करनी थी…

 

और जल्द ही लाला के साथ-2 नाज़िया का शरीर भी अकड़ने लगा…

और जल्द ही लाला के जिस्म का लावा नाज़िया की चूत से निकले गर्म पानी के साथ मिलकर एक नये रसायन का निर्माण करने लगा…

 

”ओह लाला जी……….. अहह क्या लॅंड है आपका….. कसम से…… मन करता है की पूरी जिंदगी आपसे चुदवाती रहु…..अहह….”

 

उसकी माँ शबाना ने मन में सोचा की अभी से इसके ये जलवे है तो बड़ी होकर पता नही क्या कहर ढाएगी…

सच ही निकला था उसके मुँह से कुछ देर पहले की चुदाई के ये तरीके उसके अंदर से ही निकले है जो उसकी बेटी ने सीख लिए है…

 

लाला भी अपना सारा पानी निकाल कर अपने आप को थोड़ा हल्का महसूस कर रहा था…

 

 

 

नाज़िया का नम सा शरीर उसके उपर गिरा और वो उसके गुलाबी होंठो को चूसते हुए लंड की पिचकारियों का अंत तक मज़ा लेता रहा…

 

और इसी बीच शबाना सरककर उन दोनो की टाँगो के बीच पहुँच गयी और चूत और लंड के मिलन स्थल से निकल रही मलाई को चाटकार सॉफ करने लगी…

और करती भी क्यो नही आख़िर खुद की गरज जो थी उसे…

लाला के लंड को लेने की.

 

दूसरी तरफ मीनू भुनभुनाती हुई रीतु के घर पहुँच गयी…

और उसने एक ही साँस में रास्ते से लेकर लंड चुसाई तक की बात उसे सुना डाली और ये भी बताया की आख़िर में झड़ते हुए रामू ने किस अंदाज में अपनी माँ का नाम लिया था…

 

रीतु भी ये सब सुनकर गहरी सोच में डूब गयी…

मामला पहले से ज़्यादा गंभीर और पेचीदा हो चुका था…

पर अंदर ही अंदर वो जानती थी की अंत में इस खेल में कितना मज़ा आने वाला है…

 

रीतु के चेहरे पर पहले तो चिंता के भाव थे..

पर फिर धीरे-2 वो मुस्कुराने लगी

और ऐसे मुस्कुराइ जैसे मीनू की बात सुनने के बाद उसे अपनी अगली चाल के लिए कोई आइडिया मिल गया हो.

 

मीनू : “अब कुछ बोलेगी भी…मेरी हालत खराब हुई पड़ी है और तू मुस्कुराए जा रही है…कुछ तो बोल…”

 

रीतु : “अब हमे कुछ करने की ज़रूरत नही है…करेगा तो अब रामू और वो भी जैसा हम कहेंगे वैसा …”

 

मीनू : “मतलब ??”

 

रीतु : “मतलब ये मेरी जान की अब तेरी चूत को ज़्यादा इंतजार नही करना पड़ेगा…तेरा भाई रामू उसे बुरी तरह रोंदेगा, चोदेगा और अपना लंड अंदर डालकर इसमें अपना पानी भी निकालेगा…”

 

पीस कर बोल रहा था जैसे उसे चोदने के लिए नही बल्कि कच्चा खा जाने की बातें कर रहा हो..

रीतु का तो पता नही पर सीमा ने जब लाला के ये शब्द सुने तो वो किसी बंधुआ मजदूर की तरह उसकी बात मानकर बेड पर जा लेटी और अपनी टांगे दोनो तरफ फेला कर लाला से बोली : “आजा लाला….देर किस बात की है…मैं भी कब से तरस रही थी इस पल के लिए…. अब जल्दी से अपना लंड मेरी मुनिया में पेल और मुझे इस तड़पन से मुक्ति दिला…”

और आज तो लाला वैसे ही अपने आप को चुदाई का फरिश्ता समझ रहा था,
ऐसी मुक्ति दिलवाने के लिए ही तो उसने जन्म लिया था ..

वहीँ दूसरी तरफ रीतु मन में सोच रही थी की काश इस वक़्त ये मुनिया उसकी माँ की चूत नहीं बल्कि वो खुद होती, क्योंकि उसके पिताजी प्यार से उसे घर पर मुनिया ही तो बुलाया करते थे।

लाला ने उस गीले लंड को सीमा की चूत पर रखा और उसकी चुचियां पकड़कर बोला : “आज तेरी सारी प्यास मिटा दूँगा मेरी रानी…बस चीखें मत मारियो…”

और वो लाला ने इसलिए कहा था क्योंकि शादी के इतने सालो बाद भी उसकी चूत एकदम कसी हुई सी थी,
जो उसे देखते ही लाला समझ गया था की उसमें अगर उसका लंड घुसेगा तो साली चीख ज़रूर मारेगी ..

और लाला कभी ग़लत हुआ था जो आज होता…..

जैसे ही लाला ने नीचे झुकते हुए अपने लंड का भार उसके उपर डाला, वो उसकी चूत को किसी ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर घुसने लगा…

इतने महीनो बाद हो रही चुदाई की वजह से उसकी चूत की रही सही लंड जाने की जगह भी कसावट में बदल चुकी थी..
जिसे भेदना इस वक़्त रामलाल के लिए भी मुसीबत वाला काम बन चुका था…
अंदरूनी चूत की दीवारे, रामलाल के चेहरे पर ऐसे घिसाई कर रही थी जैसे उसे नोच ही डालेंगी..
पर अपना रामलाल उन खरोंचो की परवाह किए बिना एक बहादुर सैनिक की तरह अंदर घुसता चला गया और उस मांद के अंदर तक घुसकर ही माना…

और इन सबके बीच जो हाल सीमा का हुआ, उसे शब्दो में बयान करना मुमकिन ही नही है…

बस वो तो ऐसे चिल्ला रही थी जैसे लाला उसकी चुदाई नही बल्कि अपने लंड से उसकी चूत में ड्रिलिंग कर रहा है..

”आआआआआआआआआआहह …….. उम्म्म्मममममममममममम……. लाला……….. माआआआआआर दलाआआआआआअ रे………………”

और अपनी माँ की इस तकलीफ़ को उसकी बेटी ने आकर कम किया जब उसने अपनी गरमा गर्म चूत सीधा लाकर उनके मुँह पर रख दी….
इसके 2 फायदे हुए,
एक तो उसकी माँ की चीखें निकलनी बंद हो गयी
दूसरा उसकी खुद की चूत में जो कुलबुली हो रही थी वो भी एकदम से मिट गयी…

सीमा को भले ही लाला के लंड से तकलीफ़ हुई थी शुरू में ,
पर बाद में उसने जब धीरे-2 झटके मारने शुरू किए तो उसके आनंद की सीमा ही नही रही,
एक मिनट में ही उसकी छींके लंबी सिसकारियों में बदल गयी…
लेकिन वो सिसकारियां भी रीतु की चूत तले दब कर रह गयी थी
पर इधर उधर से फुसफुसाती आवाज़ में जो भी बाहर आ रहा था उससे सॉफ जाहिर था की वो मज़े की सिसकारियां ही है, और कुछ नही..

और उपर से रीतु की चूत का स्वाद भी ऐसे मौके पर पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट लग रहा था,
वो भी शायद इसलिए की लाला की चुदाई देखकर रीतु की चूत से अपने आप ही स्पेशल किस्म का शहद निकलने लगा था, जो इस वक़्त उसकी माँ को काफ़ी भा रहा था,
और इसलिए वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे आज उसकी चूत की कटोरी का सारा रस वो ख़त्म करके ही मानेगी…
ठीक वैसे ही जैसे आज वो अपनी चूत का सारा रस लाला के लंड से चुदने के बाद बाहर निकाल देना चाहती थी…

और लाला की किस्मत तो देखते ही बनती थी इस वक़्त…
लंड चूत में था,
हाथ उसके मोटे मुम्मो पर थे,
ऐसे में जब नर्म होंठो वाली रीतु ने जब आगे बढ़कर उसके होंठो पर अपने होंठ लगाए तो उसकी आँखे बंद होती चली गयी….
नर्म होंठ, गर्म चूत और कड़क मुम्मे ,
लाला के सामने ऐसे व्यंजन लगे थे जैसे घर पर पहली बार आए दामाद की खातिरदारी होती है…
लाला उपर से नीचे तक तृप्त सा होकर चुदाई कर रहा था…

लाला का काला भूसंड लंड सीमा की चूत की सीमाएं लाँघता हुआ काफ़ी अंदर तक जा रहा था…
कभी बाहर भी…
और फिर से अंदर.

और जल्द ही सीमा की चूत में ऑर्गॅज़म का एक बुलबुला फूलने लगा,
ऐसा उसे शायद सालो बाद फील हुआ था,
वो अपनी बेटी की गांड को पकड़कर जोरो से उसकी चूत चूसने लगी और अपनी खुद की चूत में मिल रहे सेंसेशन को महसूस करके तड़पने लगी…

”आआआआआआआआआआहह लालाआआआआआआआआआ….. मज़ाआआआआअ आआआआआआआअ गया आआआआआआआ रे……. उम्म्म्ममममममममममम…… उफफफफफफफफफफफ्फ़……. क्या लंड है रे तेरा लाला …… आज पता चला की असली मर्द से चुदाई करवाने मे…. कैसा ….फ़ीईईईल्ल… होता है….. अहह….. ऑश लाला….. चोद मुझे….. ज़ोर से चोद …अहह…. और तेज लाला….. और तेज…..”

और इतना कहते –2 उसने तेज गति से अपनी चूत में टक्कर मार रहे रामलाल के आगे अपने घुटने टेक दिए…
और उसे अपनी चूत से निकले नारियल पानी से नहला कर रख दिया…

झड़ते हुए उसकी आवाज़ भी निकलनी बंद हो गयी….
सिर्फ़ उसका शरीर ही था जो कमान की भाँति टेडा होकर दर्शा रहा था की उसकी चूत का झड़न पतन हो रहा है…

पर लाला अभी तक झड़ा नही था….
वो अपनी पूरी ताक़त से उसके निश्छल शरीर में अपना लंड घुसाकर उसे चोदता रहा…

और तब तक चोदता रहा जब तक उसके लंड का उबाल उसे अपनी छाती तक महसूस नही हो गया…
और जब वो निकला तो उसने सीमा की चूत में ऐसी तबाही का मंज़र पैदा कर दिया की चारो तरफ लाला के लंड से निकला माल ही माल नज़र आ रहा था…
और कुछ नही…

अपनी माँ की ऐसी कमाल की चुदाई इतने करीब से देखकर रीतु की चूत में से भी पानी रिसने लगा और वो सीधा उसकी माँ के मुंह में जाने लगा.

और लाला ने जब हाँफते हुए अपना लंड बाहर निकाला तो एक शिकारी की भाँति रीतु उस पॉइंट पर झपट पड़ी जहाँ से लाला के लंड और उसकी माँ की चूत का मिलन हो रहा था….
अंदर से निकले पानी को उसने अच्छे से सॉफ किया और फिर लाला के पाइप नुमा लंड को मुँह में लेकर उसे चूस डाला…

लाला के लंड का पानी और अपनी माँ की चूत का रस मिलाकर करीब 50 MLथा, जिसे वो पी गयी और ज़ोर से डकार मारकर उसने ये भी दिखाया की वो उसे पच भी गया है…

लाला की हालत खराब हो गयी थी ऐसी चुदाई करके….
एक तो उम्र का तक़ाज़ा और उपर से माँ बेटी की जुगलबंदी,
ऐसे में थकान आना तो लाज़मी था…

इसलिए वो बेड पर कराहते हुए लेट गया…
दोनो माँ बेटियां उसके अगाल बगल आकर उससे लिपट गयी और उसे अपने-2 जिस्म की गर्मी का एहसास देने लगी.

रीतु ने तो कोशिश भी की कि लाला का लंड फिर से तैयार हो जाए, जो भी होना है आज ही हो जाना चाहिए, पर लाला भी जानता था की उसमें अब वो पहले जैसी बात नही रही जब वो दिन में 3-4 बार चुदाई कर लेता था…

इसलिए लाला कुछ देर तक सुस्ताया वहां पर और फिर अपने कपड़े पहन कर अपनी दुकान की तरफ निकल गया…

और पीछे छोड़ गया उन माँ बेटियो को जो उसके जाने के बाद भी नंगी ही पड़ी रही बिस्तरे पर…
लाला के लंड के बारे में सोचते हुए अपनी – 2 रसीली चूत में उँगलियाँ पेलती हुई.

अगले दिन रीतु और मीनू जब स्कूल में अपना लंच कर रही थी तो उन्होने दूर से आती हुई नाज़िया को देखा
उसकी चाल को देखकर ही समझ में आ रहा था की ये अब लंड ले चुकी है…
अपने दोनो कूल्हे दोनो तरफ निकाल कर मटकती हुई वो उन्ही की तरफ आई और अपना लंच बॉक्स खोलकर वही बैठ गयी..

दोनो को पता था की वो लाला के लंड से चुद चुकी है, पर फिर भी वो उसी के मुँह से सुनना चाहती थी..

मीनू : “बड़ी गांड मटका कर चल रही है री नाज़िया…लगता है लाला के लंड ने तेरी टांगे फेला दी है अच्छे से…”

अपनी बात कहकर वो रीतु की तरफ देखते हुए हँसने लगी…
रीतु ने भी उसका साथ दिया..

जिसे देखकर नाज़िया बोली : “हाँ हाँ हंस लो…इसमे कौनसी मज़ाक वाली बात है, मुझे तो इसमे मज़ा ही आया था, इसलिए मुझे इस बात का बुरा नही लग रहा…बुरा तो मुझे तुम्हारे लिए लग रहा है क्योंकि लाला पर तो तुम दोनो की पहले से नज़र थी और उसका लंड खाने को मुझे पहले मिला… हा हा”

उसकी बात सुनकर दोनो चुप हो गयी…
उनकी हँसी का जवाब अच्छे से दिया था नाज़िया ने..
और बात तो सही ही कह रही थी वो..
उनसे पहले ये कल की आई लौंडिया कैसे उनसे चुद गयी.

उसकी चुदाई की बाते जानने के लिए वो दोनो उत्सुक थी…
इसलिए रीतु अपनी ज़ुबान में थोड़ी मिठास लाते हुए बोली : “अरे , हम तो मज़ाक कर रहे थे पगली…वैसे भी तूने तो ले ही लिया है लाला के लंड को, इसमे हमारा भी तो फायदा है ना…”

नाज़िया रोटी खाते-2 रुक गयी और बोली : “फायदा …? तुम्हारा कैसा फायदा है इसमें ..”

इस बार मीनू ने मुस्कुराते हुए इस बात का जवाब दिया : “वो ये की तू हमे आज बताएगी की लाला के लंड को लेने में कैसा फील हुआ, मतलब कुछ तकलीफ़ हुई या आसानी से चला गया वो अंदर…”

ये बाते वो बोल तो रही थी पर ऐसा कहते हुए उसकी चूत में जो चिकनाई का निर्माण हो रहा था उसकी फीलिंग वही दोनो जानती थी…
हालाँकि एक बार फिर से लाला के लंड की चुदाई याद करके नाज़िया भी नीचे से भीग चुकी थी, पर उपर से दिखाकर वो उन्हे ये नही जताना चाहती थी की वो भी ये सुनकर उत्तेजित हो रही है..

वो बोली : “क्या तुम्हे लगता है की लाला का लंड इतनी आसानी से अंदर जाने वालों में से है…..पता है मेरे हाथ से कोहनी तक लंबा लंड था उसका, जब उसने मेरे अंदर डाला…हाय अल्लाह , उस पल को याद करके ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे है…साले ने बेरहमी से पेल दिया था पूरा अंदर, खून भी निकला था…..पर ससुरे को रहम ना आया, पूरा लंड पेलकर ही माना वो हरामी लाला…और वो भी मेरी माँ के सामने..”

ये सुनते ही उन दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा…
लाला ने ये बात तो उन्हे बताई ही नही की शबाना के सामने ही लाला ने उसकी बेटी पेल डाली थी…
साला सच में हरामी है..

और शायद ऐसा ही कुछ वो रीतु के साथ भी करेगा क्योंकि उसकी माँ सीमा को तो वो पहले ही चोद चुका था उसके सामने…
लाला की इस प्लानिंग के बारे में जानकार दोनो के जिस्म अंदर से धधक रहे थे…

रीतु तो जानती थी की उसकी माँ की तरफ से अब कोई रोकटोक नही होगी,
वो तो पहले से ही लाला के लंड की मुरीद बन चुकी है…
अब तो अगली बार लाला उसे ही चोदेगा और वो भी उसकी माँ सीमा के सामने..

वहीं दूसरी तरफ मीनू की हालत भी खराब हो रही थी…
नाज़िया चुद चुकी थी और रीतु भी चुदने को तैयार थी
ऐसे में उसका नंबर कब आएगा ये उसे भी नही पता था..
पर एक बात वो अच्छे से जानती थी की लाला को तो बस चूत चाहिए,
पहले किसकी मिलती है इस बात से उसे कोई फ़र्क नही पड़ता इसलिए उसके दिमाग़ में रीतु से पहले चुदने के प्लान बनने शुरू हो गये..

और अपनी प्लानिंग के बीच वो नाज़िया की बाते भी सुन रही थी जो चुदाई के वक़्त उसके बहुत काम आने वाली थी..

नाज़िया : “अंदर जाने में ही तकलीफ़ हुई बस, उसके बाद तो ऐसा लग रहा था की वो मोटा लंड भी कम है, अंदर के मज़े देने में …कसम से यार, ऐसा लग रहा था जैसे इस मज़े से बढ़कर कुछ और है ही नही दुनिया में , ऐसा नशा सा चढ़ रहा था पूरे जिस्म पर जैसे किसी ने जादू सा कर दिया हो…लाला का लंड मेरी बन्नो के अंदर जा रहा था और वो मेरे मुम्मो को चूस रहा था, काट रहा था…चाट रहा था…”

रीतु की आँखे लाल सुर्ख हो गयी ये सुनते –2 और वो हड़बड़ा कर बोली : “ब….बस…कर ….साली….. अपनी बातें सुना कर मेरी सलवार गीली करवा दी….अब क्लास में कैसे बैठूँगी…”

उसकी बात तो सही थी…
सलवार तो तीनो की गीली हो चुकी थी…
ऐसे में क्लास को बंक करना ही सही लगा उन्हे और वो तीनो चुपके से स्कूल के पीछे वाली टूटी हुई दीवार से निकल कर बाहर आ गयी…

और वहां से वो तीनो सीधा नाज़िया के घर गये जहाँ उसकी अम्मी शबाना घर का काम निपटाने में लगी थी…
उन तीनो को एक साथ देखकर वो बोली : “अर्रे, तुम तीनो स्कूल से भाग आई क्या…”

जिसके जवाब में तीनो एक साथ घूम गयी और अपना भीगा हुआ पिछवाड़ा उन्हे दिखा दिया, जिसे देखते ही वो समझ गयी की वो गीलापन किस चीज़ का है…
उन्होने तीनो को अंदर जाकर सॉफ करने को कहा और फिर से अपना काम करने लगी.

तीनो अल्हड़ चूते खिलखिलाती हुई सी अंदर की तरफ भाग गयी..

शबाना जानती थी की तीनो मे काफ़ी अच्छी दोस्ती है और शायद नाज़िया ने अपनी चुदाई की बाते सुनाकर ही उनका ये हाल किया है…
ये आजकल की लड़किया भी ना कुछ भी अपने पेट में नही रख सकती..

पर फिर उसने सोचा की इतने बड़े लंड को लेना कोई आसान काम थोड़े ही है…
उसका ज़िक्र अपने दोस्तो से करना तो बनता ही है..
शबाना ने उन्हे अंदर भेज तो दिया था पर वो जानती थी की वो आपस में मिलकर ज़रूर कोई गड़बड़ करेंगी…
उसके मन में उत्सुकतता सी बन गयी और अपना काम निपटाने के बाद वो दबे पाँव अंदर वाले कमरे की तरफ चल दी जहाँ वो तीनो गयी थी.

अपने कमरे में जाते ही नाज़िया ने तो बड़ी ही बेबाकी से अपनी सलवार निकाल कर एक कोने में उछाल दी…
नीचे जो कच्छी पहनी हुई थी वो भी भीग चुकी थी…
उसे भी जब उसने उतारा तो उसकी तराशि हुई चूत जो इस वक़्त एकदम लाल सुर्ख होकर दमक रही थी सबके सामने आ गयी…नंगी होकर वो बड़ी ही सैक्सी दिख रही थी

रीतु और मीनू ने भी एक दूसरे को देखा और अपनी-2 सलवारे निकाल दी…
उन दोनो ने उसे टेबल फैन के सामने फेला दिया ताकि वो उनके जाने से पहले सूख भी जाए..

और अंदर उन्होने नाज़िया की तरह कच्छी तो पहनी नही हुई थी इसलिए उन दोनो की भी चूत एकदम नंगी होकर नाज़िया के सामने उजागर हो गयी.

भले ही लंड से चुद चुकी थी नाज़िया, पर अपने सामने एक बार फिर से उन दो