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मेरी सास मेरी बीवी बनी - 3 
@Kamvasna 17 अक्टूबर, 2023 3463

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कहानी आगे जारी हैं...

मेरी सास मेरी बीवी बनी - 2

तब ससुर तो सीमा की गाँड देखकर देखते ही रह जाते हैं। तब सीमा की गाँड से जीजाजी का डाला हुआ पानी निकल रहा था तो ससुर समझ जाते है उनके बेटे ने अभी अभी सीमा की गाँड मारी हैं। तब सीमा को ऐसे देखकर तो ससुर अपना लण्ड हिलाने के लिए कमरे में चले जाते हैं तो तब फिर सीमा हम सबके लिए चाय बनाती हैं। फिर मै, जीजाजी और सीमा की सास तो आंगन में बैठकर ही चाय पीने लगते है और सीमा फिर ससुर को चाय देने के लिए उनके कमरे में चली जाती है। तब ससुर तो कमरे में नीचे से नंगे होकर चारपाई पर लेटकर अपना लण्ड सहला रहे थे। तब उनकी आंखें बंद थी और वो साथ मे सीमा का नाम ले रहे थे। फिर सीमा चुपके से कमरे में जाकर चाय रखकर वहीं खड़ी हो जाती है और फिर उन्हें चाय पीने के लिए कहती है तो फिर ये सुनकर ससुर अपनी आंखें खोलते है और फिर सामने सीमा को देखकर थोड़ा घबरा जाते है तो ये देखकर सीमा हँसने लगती है। इतने में ससुर के लण्ड से पानी निकलने लगता है तो फिर सीमा तो लगातार हंसती रहती है और ससुर शर्मिंदा हो जाते है। 

 

फिर सीमा यहीं रुकने वाली कहाँ थी। फिर वो ससुर से कहती हैं के आप शादी में जा रहे हैं तो ये कपड़े क्यों पहने हैं। आप ये कपड़े खोल दीजिए और मै आपको अंदर से दूसरे अच्छे कपड़े ला देती हूँ। तो फिर ये सुनकर बेचारे ससुर क्या करते। फिर वो खड़े होकर अपने सब कपड़े खोल देते हैं और पूरे नंगे हो जाते हैं। फिर सीमा अपने ससुर के पास जाकर उनके खोले हुए कपड़े उठाने लगती हैं तो फिर वो जानबूझकर अपने ससुर की तरफ गिर जाती है तो फिर उसे पकड़ लेते हैं। तब सीमा भी ससुर से चिपक कर खड़ी हो जाती हैं। फिर सीमा धक्का देकर ससुर और खुद को चारपाई पर गिरा देती हैं। तब सीमा की भी ऊपर से चुन्नी निकल जाती हैं तो फिर उसका चेहरा ससुर के सामने आ जाता हैं। तब सीमा अपने ससुर के ऊपर थी तो फिर सीमा अपने ससुर के ऊपर घोड़ी बन जाती हैं तो ससुर तो सीमा के लटकते हुए बोबो को देखते ही रह जाते। फिर सीमा जानबूझकर अपने बोबे अपने ससुर के मुंह की तरफ कर देती हैं तो सीमा के बोबो का एहसास पाकर ससुर का लण्ड फिर से खड़ा हो जाता है। फिर इतना ही नहीं फिर सीमा ससुर के ऊपर से उतरकर उनके साइड में उल्टी होकर लेट जाती है और फिर अपनी गाँड सहलाते हुए ससुर से कहती है के लगता है के मेरे पैर में मोच आ गई है तो फिर ससुर सीमा के पैर को दबाने लगते है और फिर वो पैर दबाते हुए सीमा की गाँड तक आ जाते है। फिर ससुर का लण्ड खड़ा देखकर वो सोचती है और फिर ससुर से अपने हाथ दबाने के लिए कहती है तो फिर ससुर सीमा से पीछे से चिपक कर लेट जाते है तो फिर सीमा ससुर के लण्ड को अपनी गाँड से रगड़ने लगती है तो तब ससुर को मजा आने लगता है तो फिर कुछ देर ससुर सीमा की गाँड पर ही झड़ जाते है तो फिर सीमा अपने ससुर की तरफ देखती है तो फिर वो जब नीचे देखते है तो उनका लण्ड का पानी सीमा की गाँड पर लग जाता है तो फिर वो एक कपड़ा लेकर सीमा की गाँड पोंछ देते है। फिर सीमा अपने ससुर की तरफ करवट लेकर लेट जाती है और अपने ससुर से अपने बोबे चुस्वाने लगती है। 

 

फिर सीमा कुछ देर बाद ससुर से कहती है के बाकी मस्ती बाद में करेंगे और फिर उठकर अंदर चली जाती है और फिर ससुर भी बहुत खुश हो जाते है। फिर सीमा ससुर को दूसरे कपड़े दे देती है तो फिर ससुर और जीजाजी चले जाते है। फिर सीमा ससुर के साथ कि गई मस्ती की बातें मुझे और सास को बताती है तो सास हँसने लग जाती है और फिर सीमा को बेशर्म कहती है। फिर सीमा घर का सब काम करके नहाकर आ जाती है और फिर वो अपना और सास का मेकअप वगैरह करती है और फिर पूरी तैयार हो जाती है। फिर मै उन दोनों की जमकर चुदाई करता हूँ। तब सास को भी बहुत मजा आता है। फिर दो दिन तक हम तीनों मिलकर काफी चुदाई करते है। फिर दो दिन बाद ससुर और जीजाजी आने वाले होते हैं तो फिर सीमा और सास सज संवरकर तैयार हो जाती हैं। तब वो दोनो बिल्कुल नंगी ही होती है। फिर जब ससुर और जीजाजी आते हैं तो वो सीधा आंगन में ही आ जाते हैं और तब जीजाजी और ससुर तो सास और सीमा को देखकर देखते ही रह जाते है। तब फिर जीजाजी तो सबके सामने ही अपनी मां के बोबो को सहलाने लग जाते हैं तो ये देखकर फिर ससुर भी सीमा को अपनी बाहों में लेकर उसके बदन को सहलाने लगते हैं। फिर सीमा ससुर और अपने पति यानी जीजाजी से कपड़े खोलकर देने के लिए कहती हैं तो वो कपड़े खोलकर नंगे हो जाते है। फिर हम सब बैठकर बातें करने लगते है। फिर ससुर के सामने ही मै पहले सीमा की सास के बदन को सहलाता हूँ और फिर मै सीमा के साथ चिपक कर भी उसके बदन को सहलाता हूँ तो ये देखकर ससुर देखते ही रह जाते है। फिर सीमा तो मेरा लण्ड पकड़कर भी सहलाने लग जाती है। 

 

फिर तब चाय वगैरह पीने के बाद जीजाजी तो अपनी मां को घोड़ी बनाकर वहीं चोदने लग जाते है तो ये देखकर ससुर भी सीमा से चुदाई के लिए कहते है तो तब शाम हो चुकी थी तो फिर सीमा ससुर से रात को सुहागरात मनाने के लिए कहती है और फिर सुहागरात की तैयारी करने के लिए कहती है तो ये सुनकर ससुर खुश हो जाते है। फिर ससुर और मै बाहर वाले कमरे में चले जाते है और फिर सीमा घर के काम मे लग जाती है। फिर मै सीमा के ससुर को संगीता और उसकी मां और मीनू के बारे में बताता हूँ तो ये सुनकर ससुर और ज्यादा गर्म हो जाते है। फिर ससुर कुछ फूल लाते है और फिर उन्हें कमरे में बेड पर बिछा देते है और कमरे को थोड़ा बहुत सजा देते है। फिर रात होती है तब खाना वगैरह खाकर सीमा तैयार होने चली जाती है और फिर लाल रंग की ब्रा पैंटी पहनकर मेकअप वगैरह करके आ जाती है। तब सीमा को देखकर तो हम सब देखते ही रह जाते है। फिर ससुर तो सीमा की कमर में हाथ डालकर उसे अपने साथ कमरे में ले जाते है और फिर उधर मै जीजाजी और उनकी मां को लेकर छत पर चले जाते है। फिर मै और जीजाजी उनकी मां की खूब चुदाई करते है और फिर सो जाते है। 

 

सुबह मै और सास उठकर नीचे चले आते है तब तक ससुर और सीमा उठे नहीं थे। फिर थोड़ा दिन और चढ़ता है तो फिर वो दोनो कमरे से बाहर हंसते हुए निकलते है। उन्हें देखकर सास भी हँसने लग जाती है। शायद ससुर और सीमा ने एक दूसरे के साथ जमकर चुदाई की थी। फिर ससुर तो बाहर वाले कमरे में चले जाते है और फिर सीमा हमे रात की चुदाई के बारे में बताने लगती है। वो कहती है के ससुर में तो अभी भी काफी जान है। फिर ये सुनकर सास कहती है के हाँ वो मेरी भी खूब चुदाई करते है। ससुर ने सीमा को एक सोने की चैन भी दी थी। उधर सास को भी अपने बेटे के साथ बहुत मजा आ रहा था तो वो भी अब काफी खुश थी। फिर सीमा ने बताया के रात को ससुर ने उसकी चुत में पानी डाल दिया था तो वो प्रेग्नेंट हो जाएगी तो फिर हमने सास को बताया के सीमा का लड़का मेरा है। इससे पहले भी सीमा के एक लड़की थी जो कि जीजाजी की थी। फिर सास बोली के कोई बात नहीं तू एक और बच्चा कर लेना। इस बच्चे के होने के बाद तो सीमा के तीन बच्चे हो जायेगे और वो भी तीन अलग अलग मर्दो से। 

 

फिर ससुर अंदर आते है और फिर वो सीमा को उनके साथ बाजार चलने के लिए कहते है तो फिर सास सीमा से कहती है के तू तैयार हो जा। बाकी घर का काम मै कर लुंगी। तो फिर सीमा नहाने चली जाती है। फिर नहाकर सीमा अच्छे से तैयार होकर एक सूट पहन लेती है। वो तब सूट में भी काफी सेक्सी लग रही थी। फिर इतने में सास खाना बना लेती है तो फिर जीजाजी भी उठकर आ जाते है तो फिर हम सब खाना खाने लगते है। फिर खाना खाकर मै सीमा और ससुर को लेकर शहर चला जाता हूँ। फिर ससुर सीमा को बहुत सारे कपड़े और सोने की ज्वैलरी आदि सब खूब दिलाते है। जिससे सीमा बहुत खुश हो जाती है। फिर ससुर तो सीमा को अपनी रानी बनाकर रखते है। फिर सीमा जब ससुर को उनका बच्चा पैदा करने का कहती है तो फिर ससुर तो और भी ज्यादा खुश हो जाते है। फिर तो घर का सब काम सास करती है और सीमा ससुर के साथ मजे करती है। रात को भी सीमा ससुर के साथ ही सोती है। उधर फिर मैं भी ससुर के सामने सीमा की चुदाई करने लगा था और फिर सीमा के कहने पर मै और ससुर दोनो मिलकर सीमा की चुदाई करने लगे। तो इसमें सीमा को बहुत मजा आता। ससुर को भी बहुत मजा आता। फिर तो सीमा ने जीजाजी और ससुर से भी एक साथ चुदवाया। 

 

फिर मैंने ससुर को बताया के सीमा मजदूरों से और पंडित से भी चुद चुकी है। फिर हमने ससुर को हमारे गांव के बारे में बताया तो वो तो सुनकर बहुत ज्यादा गर्म हो गए। फिर मेरे मन मे ख्याल आया के इस बार जीजाजी की जगह ससुर को सीमा का पति बनाकर साथ ले चलते है तो फिर इस बात से सीमा भी सहमत थी। उधर ससुर भी काफी खुश हुए ये सुनकर। उधर घर का काम करने के लिए और बच्चे संभालने के लिए सास थी ही। फिर सास को भी इससे कोई दिक्कत नहीं थी। मुझे आये हुए काफी दिन हो चुके थे तो फिर मै ससुर और सीमा को लेकर वापिस जाने लगा। तब सीमा ने ऊपर सिर्फ ब्रा पहनी और नीचे सलवार पहन ली। जब सीमा ऐसे जाने लगी तो सास ने सीमा से पूछा के ऐसे ही जाओगी तो फिर सीमा ने कहा के हां। पर अब सास भी घर मे सारा दिन नंगी ही रहती थी और तो और वो तो सुबह सुबह झाड़ू लगाने के लिए घर से बाहर नंगी ही चली जाती थी तो सास ने फिर कुछ नहीं कहा। फिर हम तीनों मेरे गांव जाने लगे। 

 

फिर गांव पहुंचकर मैंने और सीमा ने जब सब बात संगीता, उसकी मां और मीनू को बताई तो वो तो सुनती ही रह गई। फिर संगीता नंगी ही सीमा के ससुर से मिलने गई तो फिर वो तो संगीता को देखते ही रह गए। फिर संगीता उनसे हंसी मजाक करने लगी और फिर उनसे चुदवाया भी। फिर ससुर ने संगीता की मां की भी चुदाई की। उधर फिर मीनू भी अब पूरी खुल चुकी थी तो फिर उसने भी सीमा के ससुर से चुदवा लिया। फिर तो हम सब और मजदूर मिलकर खूब चुदाई करते। इतना ही नहीं फिर ससुर और सीमा ने जाकर मंदिर में भी चुदाई की और फिर मैंने भी मंदिर में सीमा की चुदाई की। मंदिर में अब तो 10 से ज्यादा जोड़े एक साथ चुदाई करते थे। ये नजारा देखकर तो कोई भी देखता ही रह जाय। अब गांव में कुछ ही घर बचे थे। बाकी सब अपने घर मे चुदाई करने लगे थे। वैसे हमारा गांव छोटा ही था तो हमारे गांव में सबसे ज्यादा अमीर में ही था। मंदिर में सब अपनी बहू बेटी की खुलकर चुदाई करते और घर पर तो करते ही करते थे तो शर्म तो रही नहीं थी। तो फिर संगीता ने सुबह सुबह नंगी होकर मंदिर जाना शुरू कर दिया था। तब पहले तो संगीता खेतो में से होकर जाती थी तो तब तो वहां कुछ ही लोग उसे नंगी देखते थे। फिर संगीता तो गांव में से होकर जाने लगी। तब संगीता जानबूझकर थोड़ा दिन निकल जाता तब जाती। ताकि सब उसे नंगी देख सके। तब उसके साथ दोनो मजदूर होते और मै भी होता था। उधर पंडित ने सबको कह दिया था जो औरत संगीता की तरह नंगी होकर मंदिर जाएगी। उसकी सब मनोकामना पूरी होगी। तो इससे गांव की कुछ और भी औरतें नंगी मंदिर जाने लगी। लेकिन वो सुबह जल्दी जाकर ही आ जाती थी तो उन्हें कोई नहीं देख पाता था। लेकिन संगीता को तो शायद गांव का हर आदमी नंगी देख चुका था। 

 

इतना ही नहीं जब संगीता मंदिर जाकर वापिस आती तब तो सब लोग गांव की गलियों में घूम रहे होते या अपने घरों के आगे बैठे होते और तब संगीता उन सबके सामने नंगी ही चलकर आती। संगीता को नंगी देखकर तो गांव के हर आदमी का लण्ड खड़ा हो जाता था। तब सब मर्द संगीता को देखते और शायद अपना लण्ड भी हिलाते थे। गांव में 10-15 लोग एक साथ बैठे रहते और फिर संगीता उन सबके सामने से बिना शर्माए नंगी ही चली जाती। उधर फिर मंदिर में एक दिन मै और संगीता चुदाई कर रहे थे तो तब संगीता मुझ पर घोड़ी बनी हुई थी और मेरा लण्ड उसकी चुत में था। तब वहां दोनो मजदूर भी खड़े थे तो फिर मैंने एक मजदूर को इशारा किया तो फिर वो आकर संगीता की गाँड मारने लगा। जिससे संगीता को तो और ज्यादा मजा आने लगा। तब दो दो मर्दो से एक साथ चुदाई देखकर सब देखते ही रह गए। फिर चुदाई के बाद संगीता मुस्कुराने लगी और फिर खड़ी होकर इधर उधर घूमने लगी। फिर तो संगीता सबके सामने ही मजदूरों के लण्ड पकड़कर सहलाती रहती और फिर तो वो पंडित से भी चुदाई करवाती और उनका लण्ड चूस लेती। इसके अलावा संगीता संगीता सबको चुदाई का ज्ञान तो देती ही रहती थी। गांव की सब औरतें अपनी समस्या या शिकायत लेकर संगीता के पास ही आती थी। इसके अलावा गांव के मर्द भी संगीता के पास आने लगे थे। 

 

मंदिर में सीमा भी जाती थी तो फिर ससुर सीमा की खूब चुदाई करते थे और मै सीमा की गाँड मारता था। फिर सीमा तो डेढ़ साल बाद ही दोबारा प्रेग्नेंट हो गई तो हम सब काफी खुश हो गए। फिर सीमा तो जमकर चुदाई करने लगी। क्योंकि फिर तो कुछ महीने उसे बिना चुदाई के ही रहना था। फिर तो एक दिन मैंने और ससुर ने सबके सामने सीमा की एक साथ चुदाई की। तो सब देखते ही रह गए। लेकिन इतना ही नहीं फिर सीमा भी संगीता के साथ नंगी ही मंदिर जाने लगी और उनके साथ मै भी होता तो सब देखते ही रह जाते थे। सीमा को तो गांव के सब लोग अच्छी तरह जानते थे। सीमा का बदन काफी सेक्सी है तो फिर सीमा को देखकर तो मै बिल्कुल रह ही नहीं पाता था। उधर सीमा भी काफी नटखट थी तो फिर हम जब गांव से बाहर निकलने वाले होते उससे पहले ही सीमा तो मेरे लण्ड को सहलाने लग जाती। इतना ही नहीं फिर एक दिन तो मै सीमा को गली में ही एक मकान के सहारे खड़ा करके उसकी गाँड मारने लगा। तब वहां से 4-5 लोग भी गुजरे तो वो तो हमे देखते ही रह गए। पर हम दोनो चुदाई करते रहे। फिर तो हर रोज हम ऐसे ही चुदाई करने लगे। फिर पंडित ने मेरे कहने पर मर्दो को भी कह दिया के वो भी औरतों की तरह ही नंगे होकर मंदिर जाकर अपनी मनोकामना पूरी कर सकते है। तो फिर सबसे पहले मै ही नंगा होकर गया था तो सब मुझे देखते ही रह गए। फिर सुबह सुबह जब मै संगीता और सीमा मंदिर जाते तो तभी गांव के कुछ मर्द भी मंदिर जाते। तब पहले तो मुझे और दोनो मजदूरों को मिलाकर 5-6 मर्द हुए और फिर तो 10-15 मर्द हो गए और तब उन सबके बीच संगीता और सीमा बिल्कुल नंगी होती और वो ऐसे ही मंदिर जाती और फिर वापिस आती। तब तो वो संगीता और सीमा को देखकर अपना लण्ड भी हिलाते और आपस मे हम काफी गंदी गंदी बातें भी करते। जिससे वो सब मेरे दोस्त बन गए और हम आपस मे खूब चुदाई की बातें करते। इतना ही नहीं संगीता और सीमा भी हमारे साथ बातें करती और खूब हंसती। 

 

फिर उन सबके सामने ही सीमा और संगीता मुझसे चिपक जाती और फिर हम आपस मे एक दूसरे के बदन को सहलाते। सीमा भी सबके सामने ही मेरे लण्ड को सहलाती और फिर तो चूस भी लेती। फिर इतना ही नहीं एक दिन तो सबके सामने ही मैंने सीमा और संगीता की चुदाई भी कर दी। अब सीमा और संगीता को भी अपने चारों और नंगे मर्द देखकर बहुत मजा आता था। इसके अलावा सीमा और संगीता सबके सामने ही मजदूरों से और पंडित से और सीमा के ससुर से भी चुदाई करवा लेती थी तो तब सब देखते ही रह जाते। तब अगर कोई सीमा और संगीता को चुदाई के लिए कहता तो वो कह देती के क्यों तुम्हारे घर माँ बहन नहीं है। तो ये सुनकर वो कुछ नहीं बोल पाते थे। वो सब घर और मंदिर में तो अपने घर की औरतों के साथ चुदाई करते थे पर ऐसे सबके सामने खुलेआम उनके साथ चुदाई करने और उन्हें अपने साथ नंगी ले जाने की हिम्मत किसी की नहीं थी। पर सीमा और संगीता चाहती भी नहीं थी के वो अपने घर की औरतों को अपने साथ लाये। वो तो चाहती थी के वो सब बस उनके आसपास ही घूमते रहे।

 

वैसे तो संगीता और सीमा मंदिर जाने के नाम पर नंगी गांव में चली जाती थी। लेकिन फिर अब जब वो गांव के काफी मर्दो के सामने नंगी हो चुकी थी तो अब शर्म करना बेकार था। तो फिर एक दिन सीमा और संगीता गांव में अपने मेकअप वगैरह का सामान लेने के लिए किसी के घर गई। तो वो दोनो बिल्कुल नंगी ही गई। इतना ही नहीं उनके साथ दोनो मजदूर भी गए थे और वो भी दोनो नंगे थे और उनके लण्ड खड़े थे। तब ये देखकर तो हर कोई देखता ही रह गया। फिर संगीता और सीमा ने सामान वगैरह लिया और फिर अपने बदन से बाल वगैरह भी हटवाये। फिर उन दोनों ने मेकअप भी करवाया और फिर उन्होंने अपने बालों का जुड़ा वगैरह किया। फिर उन्होंने अपने गले और कमर में कुछ ज्वेलरी भी पहनी। फिर जब वो पूरी तैयार हो गई तो वो काफी सेक्सी लग रही थी। फिर वो दोनो ऐसे ही घर आने लगी तो तब दोनो मजदूर उनके पीछे पीछे चलते हुए अपना लण्ड सहला रहे थे और कुछ और भी मर्द उन्हें देखकर अपना लण्ड बाहर निकालकर हिलाने लगे थे। फिर मजदूर उन दोनों के बिल्कुल पीछे पीछे चल रहे थे जिससे कि उनका खड़ा लण्ड सीमा और संगीता की गाँड से टच हो रहा था। फिर सीमा और संगीता उनका लण्ड हाथ से पकड़ उन्हें अपने से दूर हटा देती। इतना ही नहीं फिर उबड़ खाबड़ रस्ते पर चलते हुए सीमा और संगीता गिरने की एक्टिंग करती तो दोनो मजदूर उन्हें पकड़ने के बहाने अपनी बाहों में भर लेते। फिर सीमा और संगीता भी उनके साथ चिपक जाती और फिर पूरा वो भी पूरा मजा लेती। सीमा और संगीता भी अब गर्म होने लगी थी। तो उन्हें अपनी चुदाई करवानी थी। तो फिर वो गांव के ही एक घर मे चली गई। उस घर मे तब दो बाप बेटे और उनकी बीवियां थी। तब उनकी बीवियां नंगी घूम रही थी और वो दोनो नंगे ही बैठे थे। फिर सीमा और संगीता को देखकर तो वो देखते ही रह गए। फिर सीमा और संगीता नीचे ही घोड़ी बन गई तो दोनो मजदूर उनकी चुदाई करने लगे। ये देखकर तो वो सब देखते ही रह गए। फिर दोनो मजदूर झड़े तब तक वो दोनो बाप बेटे भी गर्म हो चुके थे तो फिर सीमा और संगीता ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर उन्होंने उन दोनों बाप बेटे को चोदने का इशारा किया तो फिर वो भी संगीता और सीमा की चुदाई करने लगे। 

 

फिर चुदाई के बाद सब बैठकर बातें करने लगे। फिर वहां उन दोनों बाप बेटे की बीवियां भी आ गई। जिन्हें देखकर दोनो मजदूरों के लण्ड खड़े हो चुके थे और उन दोनों बाप बेटों के लण्ड भी दोबारा खड़े हो चुके थे तो सीमा और संगीता तो उन दोनों बाप बेटों से चुदवाने लगी और दोनो मजदूर उनकी बीवियों की चुदाई करने लगे। चुदाई के बाद सब काफी खुश लग रहे थे। फिर सीमा और संगीता और दोनो मजदूर घर आ गए और उन्होंने घर आकर सब बात बताई तो फिर मै गर्म हो गया और सीमा और संगीता की चुदाई की। क्योंकि वो दोनो तब काफी सेक्सी लग रही थी। 

 

फिर गांव के लोग मेरे दोस्त बन गए थे और कुछ लोग वैसे ही हमारे घर आ जाते थे तो फिर हम सब बैठकर खूब बातें करते। तब उन सबके सामने सीमा और संगीता नंगी ही घूमती रहती और वो भी हमारे साथ बैठकर खूब बातें करती। फिर इतना ही नहीं सीमा और संगीता तो फिर सबके सामने ही उनमें से कुछ के साथ चिपक जाती। तब वो सब भी इसी उम्मीद में रहते के काश उन्हें सीमा और संगीता की चुदाई करने के लिए मिल जाये। तब हम सब नंगे ही होते थे और सीमा और संगीता को उनके सामने नंगी रहने में बहुत मजा आता था। एक तरह से वो सब संगीता और सीमा के गुलाम ही बन चुके थे। फिर ये देखकर संगीता की मां भी गर्म हो जाती थी। फिर सीमा और संगीता सरेआम दूसरे मर्दो के साथ नंगी ही घूमने लगी। घूमना तो छोड़ो वो सरेआम उनसे चिपक जाती और फिर लण्ड भी पकड़ लेती। ये सब देखकर मै बहुत गर्म हो जाता था। फिर एक दिन मै, संगीता, सीमा और दोनो मजदूर और कुछ गांव के लोग हम सब एक साथ मंदिर जा रहे थे तो फिर गांव में गली में ही एक जगह खड़े होकर हम गांव के कुछ लोगो से बातें करने लगे। वहां गांव के वो लोग बड़े बुजुर्ग थे और उन्होंने तो कपड़े पहन रखे थे लेकिन संगीता और सीमा को देखकर लण्ड तो उनके भी खड़े हो चुके थे। फिर सीमा और संगीता ही उनसे बातें कर रही थी। तब मै सीमा के एकदम पीछे खड़ा था और अपना खड़ा लण्ड उसकी गाँड की दरार में डालकर सहला रहा था। जिससे सीमा को भी काफी मजा आ रहा था। फिर सीमा पीछे की तरफ होकर मुझसे चिपक गई तो मैंने किसी तरह लण्ड उसकी गाँड में डाल दिया तो फिर वो मुस्कुराने लगी और फिर मै धीरे धीरे धक्के लगाने लगा तो वहां खड़े हुए सब लोगो को पता चल गया था के सीमा की गाँड में मेरा लण्ड था। 

 

तब ये देखकर सब मजे लेने लगे और फिर सीमा ने भी एक हाथ पीछे ले जाकर मेरी गाँड पर रख दिया और फिर मैंने भी सीमा के दोनो बोबो को दोनो हाथों से पकड़कर खड़ा हो गया और दबाने लगा और धक्के भी तेज कर दिए। फिर ये देखकर तो संगीता ने अपने पीछे खड़े मजदूर से उसका लण्ड अपनी गाँड में डलवा लिया और फिर वो भी चुदवाने लगी। इतना ही नहीं फिर वो तो अपने पास नंगे खड़े गांव के किसी दूसरे मर्द का लण्ड भी सहलाने लगी थी। तब ये नजारा देखकर तो हर कोई देखता रह गया। फिर मै तो सबके सामने सीमा की चुत भी सहलाने लगा। उधर फिर मजदूर संगीता की गाँड में झड़ गया तो फिर संगीता तो सबके सामने ही दूसरे मजदूर से जाकर चिपक गई और फिर वो संगीता के बदन को सहलाने लगा। उधर फिर सीमा को मैने मेरी तरफ मुँह करके खड़ा कर लिया और फिर उसकी एक टांग उठाकर उसकी चुत में लण्ड डालकर करने लगा। तब ये सब तो सब देखते ही रह गए। तब आसपास घरों के लोग भी अपनी छतों पर चढ़कर हमे देखने लग गए थे। लेकिन अब हमें किसी की भी कोई परवाह नहीं थी। फिर सीमा और संगीता को देखकर तो जो लोग कपड़े पहने खड़े थे वो भी अपना लण्ड बाहर निकालकर हिलाने लगे थे। फिर मै सीमा की चुत में झड़ गया तो फिर सीमा मेरे आगे सीधी खड़ी हो गई और उधर फिर संगीता दोनो हाथों से लण्ड हिला रही थी। फिर उनके लण्ड से पानी की पिचकारी निकलने लगी और वो झड़ गए। कुछ लोग अपने हाथ से ही अपने लण्ड हिला रहे थे तो वो भी झड़ गए। 

 

फिर हम सब मंदिर जाने के लिए चल पड़े। लेकिन ऐसे खुल्लम खुल्ला चुदाई करके बहुत मजा आया। फिर हम सब ऐसे ही मस्ती करते रहे। फिर हमें संगीता के गांव भी जाना था संगीता और मेरी लड़की के नामकरण के लिए। तो फिर मै, संगीता, संगीता की माँ, सीमा और उसके ससुर, मीनू और दोनो मजदूरों को लेकर संगीता के गांव यानी मेरे नए ससुराल चला गया। तब मीनू के पापा तो घर पर ही रह गए और पण्डित और उसकी बीवी बाद में आ गए। फिर वहां जाने ले बाद हम सब संगीता के नामकरण की तैयारियां करने लगे। तो संगीता के पापा ने अपने खास दोस्तो को भी बुलाया। उनका एक दोस्त अपनी बेटी की चुदाई करता था तो फिर संगीता के पापा ने उसे भी बुला लिया। उधर सुरेंदर के ससुर अपनी बीवी को भी लाने का कह रहे थे। उधर संगीता अपनी सहेली से मिलने गई और फिर उसे भी बुला लिया और खूब मजा करने के लिए कहा। तब संगीता के पापा ने संगीता और मीनू की काफी चुदाई की। उन्होंने सीमा की भी चुदाई की। फिर हमने उन्हें जब अपने गांव की चुदाई की कहानी और मंदिर वाली बात बताई तो संगीता के पापा बहुत खुश हो गए और फिर मैंने उन्हें अपने दोस्तों के साथ हमारे गांव आने के लिए कहा तो वो मान गए। तब हम सबको तो नंगा रहने की आदत थी तो फिर हम सब घर पर तो नंगे ही रहते थे। पर संगीता अपने साथ मीनू और सीमा को अपने सहेली के घर नंगी ही ले गई थी। फिर हम सब संगीता की लड़की के नामकरण की तैयारी कर रहे थे और साथ मे खूब चुदाई की भी। तो सब औरतों ने अपनी चुत के बाल साफ करवाकर उन्हें चिकनी कर लिया था और वो सब की सब अपने बदन को निखारने में लगी थी। फिर सुरेंदर के ससुर नामकरण से पहले ही अपनी बीवी को लेकर आ गए थे तो फिर सुरेंदर के ससुर ने अपनी बीवी के सामने ही अपनी बेटी आशा की चुदाई की और अपनी बीवी को सुरेंदर से चुदवाया तो फिर सुरेंदर की सास भी खुश हो गई। फिर तो संगीता के पापा ने भी सुरेंदर की सास की चुदाई की। फिर नामकरण वाले दिन सब लोग आ गए। तब घर की सब औरतें एक दम नंगी थी और सब घर के आंगन में बैठे थे। फिर सब मर्द सब औरतों को घूर रहे थे। तब हम सब 25 से 30 लोग थे। उधर संगीता की सहेली भी नंगी हो गई थी और मै उसकी चुदाई कर चुका था। वैसे वो हमेशा घूंघट करके रखती है तो उसे संगीता के पापा के गांव के दोस्त उसे नहीं पहचान सकते थे। फिर नामकरण के बाद जिसे जो औरत अच्छी लगी वो उसके साथ चुदाई करने लगे। हालांकि औरतें कम थी तो एक औरत के साथ लगभग 3 से 4 मर्द थे। उधर सुरेंदर ने अपने एक दो दोस्तों और खेत मे काम करने वाले मजदूरों को भी बुला रखा था। 

 

संगीता के पापा तो अपने दोस्तों के साथ मिलकर मीनू और सीमा की चुदाई कर रहे थे और सुरेंदर और उसका ससुर अपने दोस्तों और खेत के मजदूरों के साथ मिलकर आशा और अपनी सास की चुदाई कर रहा था। उधर हम बाकी सब भी एक दूसरे से चुदाई करके मजे ले रहे थे। फिर दोपहर तक चुदाई के बाद सबको भूख लग चुकी थी तो फिर सब औरतों ने मिलकर खाना बनाया और फिर हम सबने खाना खाया और साथ मे हम खूब गंदी गंदी बातें भी कर रहे थे। फिर खाना खाने के बाद हम फिर से चुदाई करने लगे। तब सब आपस मे बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे तो सब औरतों ने कम से कम 8 से 10 मर्दो से तो चुदवा ही लिया होगा और उनकी चुदाई कितनी बार हुई ये तो बताना मुश्किल था। फिर शाम को संगीता के पापा के दोस्त और संगीता की सहेली तो चली गई थी और फिर हम सब भी खाना खाकर सो गए थे। क्योंकि सब थक चुके थे। फिर अगली सुबह पंडित और उसकी बीवी चले गए। फिर सुरेन्दर अपने सास, ससुर और आशा को लेकर खेत मे चला गया और फिर वहां सुरेंदर ने अपने कुछ दोस्तों और मजदूरों को बुला रखा था। तो फिर वो सब मिलकर आशा और उसकी मां की चुदाई करने लगे। उधर संगीता के पापा ने अपने दोस्तों और दोस्तो के दोस्तो जो कि सब ठरकी थे उनके साथ मिलकर चुदाई का प्रोग्राम पहले से ही बना रखा था तो फिर संगीता और मीनू अपने अपने बच्चों को संभालने के लिए अपनी सहेली को घर पर ही बुला लिया था। फिर उधर संगीता, उसकी मां, मीनू और सीमा चारो तैयार हो गई। फिर उन चारों को नंगी ही जीप में बैठाकर हम सब गांव के बाहर एक खाली घर था वहां पर चले गए। वहां गए तब हमने देखा के वहां पर लगभग 15 लोग आए हुए थे और साथ में संगीता के पापा, मुझे, सीमा के ससुर और मजदूरों को मिलाकर हम सब 20 से ज्यादा ही मर्द हो चुके थे और तब सिर्फ वो 4 औरतें थी। तो जब वो चारो जब सबके सामने गई तो तब जो उन्हें पहली बार देख रहे थे वो तो उन चारों को देखते ही रह गए थे। 

 

फिर लगभग पांच जने एक एक औरत से मस्ती करने लगे। हम सब मिलकर चुदाई करने लगे। हर एक राउंड के बाद हम सब औरत बदल लेते थे तो लगभग सभी मर्दो ने उन चारों औरतों की चुदाई कर ली थी और इन चारों ने भी हर एक मर्द से चुदवा लिया था। यानी हर एक औरत ने लगभग 20 लण्ड अपनी चुत और गाँड में लिए थे। फिर दिन भर की चुदाई के बाद हम सभी थोड़े थक गए थे। पर हम सबको बहुत मजा आया था। फिर हम सब शाम को घर आये तब तक सुरेंदर और बाकी सब भी खेत से आ चुके थे तो तब आशा और उसकी मां भी थकी हुई लग रही थी। उधर फिर उन्होंने संगीता और बाकी सब औरतों को देखा तो वो भी सब समझ गए थे। फिर गर्म गर्म पानी से नहाकर हम सब फ्रेश हो गए और फिर हम खाना खाकर अपनी अपनी पसंद की औरत को लेकर सो गए। फिर अगले दिन सुरेंदर के ससुर और सास भी चले गए। फिर सुरेंदर ने संगीता से कहा के उसके दोस्त उसकी चुदाई करना चाहते है तो ये सुनकर संगीता झट से तैयार हो गई। फिर सुरेंदर के दोस्त आने वाले थे तो संगीता सज संवरकर तैयार हो गई। तब संगीता ने एक टाइट सूट पहन लिया। तब संगीता बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर कुछ देर बाद ही सुरेंदर के 4-5 दोस्त घर आ गए। फिर वो तब संगीता को देखते ही रह गए थे। फिर संगीता उन सबके बीच खड़ी होकर उनसे बातें करने लगी। फिर सुरेंदर का एक दोस्त संगीता के बोबो को दबाने लगा तो फिर संगीता भी पैंट में हाथ डालकर उसका लण्ड सहलाने लगी। फिर सुरेंदर और संगीता उन सबके साथ चली गई। उधर फिर मै, संगीता के पापा, सीमा के ससुर और मजदूर वगैरह आशा, सीमा, मीनू और संगीता की मां की चुदाई करने लगे। फिर शाम हो गई तो तब संगीता और सुरेंदर आये। तब संगीता फिर हमें बताने लगी के सुरेंदर और उसके दोस्त संगीता को अपने एक दोस्त के घर ले गए थे। वहां सुरेंदर के 4-5 दोस्त और थे। उनमें से कुछ दोस्त कुंवारे थे। फिर वो सब संगीता को देखकर देखते ही रह गए। फिर संगीता उनके सामने नंगी हुई तो वो सब देखते ही रह गए। फिर वो संगीता पर टूट पड़े और फिर हर एक नए संगीता की कम से कम 4 से 5 बार चुदाई की। ये सुनकर हम सब मर्द गर्म हो गए तो फिर हमने भी संगीता की चुदाई की। 

 

इस तरह फिर संगीता के गांव संगीता के घर के आसपास संगीता के पापा के दोस्तो और सुरेंदर के दोस्तो के घर थे और वो संगीता की चुदाई भी कर चुके थे। फिर संगीता के कहने पर उन सबने अपनी घर की औरतों को किसी बहाने से अपने अपने गांव भेज दिया। तो लगभग सभी की औरतें चली गई थी और घरों पर सिर्फ आदमी ही रह गए थे। उनमें से कुछ ने संगीता की चुदाई नहीं कि थी तो फिर उन्हें भी संगीता के बारे में सब कुछ बताकर उन्हें भी अपनी तरफ कर लिया। फिर संगीता लगभग दोपहर के समय घर से बिल्कुल नंगी होकर बाहर निकली तो तब गली में सब लोग संगीता को देखने के लिए तैयार खड़े थे। फिर संगीता गली में चलने लगी तो सभी संगीता को देखकर देखते ही रह गए। तब गली में लोग अपने घरों के बाहर बैठे या खड़े थे और संगीता को ही देख रहे थे। तब गली में लगभग 30-40 मर्द थे। सभी संगीता को देखकर अपना लण्ड हिला रहे थे। तब संगीता के साथ मै और सुरेंदर थे। तब संगीता सब से हंस हँसकर बाते कर रही थी। संगीता तो बेशर्म हो चुकी थी। उसे अब किसी की शर्म नहीं थी। फिर सबके सामने ही सुरेंदर संगीता के बदन को सहलाने लगा तो ये देखकर सब और ज्यादा गर्म हो गए। फिर गली में ही एक घर के आगे बनी चौकी पर संगीता घोड़ी बन गई और फिर सुरेंदर और मै उसकी चुदाई करने लगे। फिर कुछ और लोगो ने भी संगीता की चुदाई की। फिर हम संगीता को लेकर किसी के घर चले गए और फिर वहां पर बारी बारी से सभी ने संगीता की चुदाई की। फिर शाम तक चुदाई करवाने के बाद वो वापिस घर आ गई। ये देखकर तो तब संगीता के पापा भी देखते ही रह गए और फिर उन्होंने भी अपनी रण्डी बेटी की चुदाई की। 

 

उधर मीनू भी अपनी मां के ऐसे कारनामे देखकर काफी गर्म हो चुकी थी। फिर उस गली में ही एक परचून की दुकान थी तो फिर संगीता दिन में कई बार उस दुकान पर चली जाती। तब संगीता ऊपर ब्रा और नीचे सलवार पहनकर जाती। तब उस दुकान में पहले से ही कई मर्द खड़े होते तो फिर वो संगीता की चुदाई कर लेते। फिर इतना ही नहीं एक दिन फिर संगीता अपनी मां को लेकर चली गई। तब संगीता ने ऊपर ब्रा नहीं पहन रखी थी और नीचे बस सलवार पहन रखी थी। उधर संगीता की मां ने ऊपर ब्रा पहन रखी थी और थोड़ा घूंघट कर रखा था तो कोई समझ नहीं पा रहा था के संगीता के साथ कौन है। फिर दुकान में जाने के बाद जब संगीता की मां ने घूंघट उठाया तो सब देखते ही रह गए हैं। फिर उन दोनों मां बेटी ने वहां मौजूद 5-6 मर्दो से चुदवाया। संगीता की मां भी देखने मे काफी सेक्सी लगती थी। फिर चुदाई के बाद संगीता की मां भी बिना ब्रा के वापिस घर आई। फिर तो संगीता की मां भी चुदाई के मजे लेने लगी। फिर तो कुछ दिन बाद ही संगीता की मां बिल्कुल नंगी होकर सबके सामने गई। तब साथ मे सुरेंदर और मैं भी थे। फिर हम सबने संगीता की मां की काफी चुदाई की। फिर तो वो दोनो मां बेटी खुलकर मजे लेने लगी। तब आसपड़ोस में रहने वाले सब मर्द उन दोनों मां बेटी की चुदाई कर चुके थे। फिर संगीता के कारनामे की खबर पूरे गांव में फैल गई थी। संगीता दिखने में बहुत आकर्षक लगती थी तो सब संगीता की चुदाई करना चाहते थे। 

लेकिन फिर संगीता का मन करता वो उसी से ही चुदवाती। आस पड़ोस के मर्द संगीता को देखकर काफी गर्म हो जाते थे और फिर वो अपनी अपनी बीवियों की काफी चुदाई करते। जिससे कुछ औरतें तो काफी खुश हुई लेकिन कुछ दुखी हुई। क्योंकि उनके पति उन्हें हरदम ही घोड़ी बनाये रखते थे तो फिर उन्होंने दुखी होकर अपने पतियों को संगीता से चुदाई करने की खुल्लम खुल्ला इजाजत दे दी थी। उधर कुछ औरतें संगीता को देखकर फिर वो भी थोड़ी खुलकर रहने लगी। वो गहरे गले का सूट पहनने लगी जिससे उनके बोबे काफी हद तक दिखते रहते और फिर वो अपने घर बस ऐसे ही रहने लगी। उन्हें देखकर तो उनके घर के बड़े बुजुर्ग अपना लण्ड मसलकर रह जाते और उनके पति उनकी खूब चुदाई करते। इस तरह संगीता ले कारण सब घरों का माहौल पूरा बदल गया था। जब इसका पता हमको चला तो हम काफी खुश हुए। फिर एक बार संगीता और संगीता की मां पड़ोस में किसी के घर गई। तब उस घर में एक आदमी जिसकी उम्र लगभग 60 साल थी, उसकी बीवी, उसका एक बेटा और बेटे की बीवी और एक बेटी जो कि अभी कुंवारी थी रहते थे। फिर संगीता और उसकी मां ने ऊपर सिर्फ ब्रा पहन रखी थी और नीचे सलवार थी। तब फिर वो उस घर की औरतों से बातें करने लगी और फिर वो सब चुदाई की बातें करने लगी। तो वो सब अपनी चुत सहलाने लगी। उधर उस घर के मर्द संगीता और उसकी मां को देखकर अपना लण्ड सहला रहे थे। 

 

वो तीनो औरतों पहले से ही घर पर गहरे गले वाले सूट पहन रही थी तो उनके बोबे देखकर बाप बेटे देखते ही रह जाते थे। फिर बात करते करते वो पांचों औरतें गर्म हो चुकी थी तो फिर वो सब एक कमरे में जाकर नंगी हो गई और फिर उन्होंने एक दूसरे की चुत चाटकर और बोबो को चूसकर एक दूसरे से काफी मजे किये। फिर वो जब सब बाहर आने लगी तो संगीता के कहने पर उन तीनों ने भी ऊपर सिर्फ ब्रा पहन ली। फिर वो दोनो बाप बेटे तो उन्हें ब्रा में देखकर देखते ही रह गए। फिर संगीता और उसकी मां सबके सामने ही उन बाप बेटे से जाकर चिपक गई और फिर उन्हें कमरे में ले गई और फिर उन्होंने जमकर चुदाई की। तो फिर चुदाई के बाद बाप तो संगीता के साथ कमरे से बाहर निकला और बेटा संगीता की मां के साथ और तब उन दोनों मां बेटी ने ऊपर  ब्रा नहीं पहनी थी। लेकिन उन्हें ऐसे देखकर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। फिर संगीता और उसकी मां तो वापिस घर आ गए और उधर उस घर में वो बाप तो अपनी बेटी और बहू को सिर्फ ब्रा में देखकर गर्म होता रहता और उधर बेटा अपनी मां और बहन को देखकर। फिर बेटा और बाप तो अपनी अपनी बीवियों की चुदाई रोज कर रहे थे लेकिन वो कुंवारी लड़की बेचारी बस अपनी चुत सहलाकर ही रह जाती। 

 

तो ये देखकर वो लड़की अपने बाप भाई के सामने ही अपनी चुत सहलाती रहती और अपनी ब्रा के ऊपर से ही अपने बोबो को दबाती रहती। ये देखकर तो वो देखते ही रह जाते। उधर बहु भी अपने ससुर को अपने बोबे खूब दिखाती तो वो तो लण्ड मसलते ही रह जाते और ये देखकर बहु हँसने लगती। फिर तो उन सबने मिलकर आपस मे सलाह करके उस लड़की को पहले अपने भाई से चुदवाया और फिर उसके बाप ने भी उसकी चुदाई की। उधर फिर बहु ने भी अपने ससुर से चुदवा लिया और बेटे ने अपनी मां की चुदाई कर दी। उधर फिर उन्होंने संगीता और उसकी मां को अपने घर बुलाया और फिर वो सब एक साथ नंगे हो गए और आपस मे फिर खूब चुदाई की। उधर संगीता और उसकी मां के कारनामे भी बढ़ते ही जा रहे थे। सब संगीता और उसकी मां के पीछे पागल हो चुके थे। फिर तो हर कोई बस उन दोनों की ही चुदाई करना चाहता था। ये सब देखकर वो दोनो मां बेटी काफी खुश हुई। गांवों में जहां औरतें घूंघट करके रखती थी और वहीं संगीता और उसकी मां बिल्कुल नंगी होकर घूमती थी। ये देखकर तो सबके होश उड़ जाते थे। फिर संगीता सीमा को भी अपने साथ नंगी करके ले गई तो सब सीमा को देखते ही रह गए। फिर सीमा ने भी कई मर्दो से चुदवाया। फिर तो सीमा गली में ही दीवार के सहारे झुक कर खड़ी हो गई और अपनी गाँड खोलकर दिखाने लगी तो तब ये देखकर सीमा को चोदने वालो की लाइन लग गई। उस दिन करीब 20 से ज्यादा मर्दो ने सीमा की गाँड मारी। उधर फिर मैंने और सुरेंदर ने सबके सामने सीमा और संगीता की चुदाई की। फिर सुरेंदर तो अपनी नंगी मां बहन के साथ घर से बाहर नंगा ही चला जाता और सबके सामने उन दोनों के बदन को खूब सहलाता। सुरेंदर को ऐसे मजा करते देख फिर कुछ लोगो ने भी अपनी विधवा बहन और माँ की चुदाई करना शुरू कर दिया था। अब धीरे धीरे गली के सब घरों में माहौल खुलता जा रहा था और सब खुलकर चुदाई करना चाहते थे। पर अभी भी कोई इस बारे में खुलकर बात नहीं करता था। 

 

अब आशा भी पूरी तरह से खुल चुकी थी तो फिर वो अब खेत ऊपर सिर्फ ब्रा पहनकर ही जाने लगी। इतना ही नहीं फिर सुरेंदर के दोस्तो और दोस्तो के दोस्तो नव चुदाई का फिर से प्लान बनाया तो इस बार सुरेंदर संगीता के साथ आशा को भी ले गया। फिर सुरेंदर और उसके दोस्तों ने मिलकर उन दोनों की खूब चुदाई की। उधर घर पर मै, संगीता के पापा और सीमा के ससुर मिलकर मीनू की चुदाई करते और मन करने पर बाकी की चुदाई भी कर लेते थे। इस तरह फिर काफी मस्ती करने के बाद मै, संगीता, सीमा, मीनू, सीमा के ससुर और साथ गए मजदूर वापिस आ गए। वापिस आते टाइम सभी औरतें नंगी ही जीप में चढ़ी और फिर नंगी ही उतरी। फिर इसके बाद भी वो नंगी ही रही। ठंड ज्यादा पड़ती बस तभी कुछ पहनती थी वरना वो नंगी ही रहती थी। उधर सीमा का थोड़ा सा पेट बाहर निकल आया था तो उसके ससुर उसे लेकर चले गए। फिर तो हम पहले की तरह ही मस्ती और चुदाई करने लगे। फिर कुछ दिन बाद ही संगीता के मम्मी पापा आ गए। फिर संगीता के पापा तो गांव का माहौल देखते ही रह गए। फिर उन्होंने भी मंदिर में सबके सामने संगीता की चुदाई की और तो और वो उसके साथ नंगे होकर मंदिर भी जाते। ये सब नजारे देखकर संगीता के पापा तो देखते ही रह जाते। इतना ही नहीं फिर संगीता गांव के मर्दो से भी चुदवाने लगी। घर हो, मंदिर हो, चाहे वो कहीं भी हो उसकी गाँड में किसी न किसी मर्द का लण्ड जरूर होता। वो जब मंदिर जाती तो गांव के मर्द उसके पीछे से चिपक कर चलते और फिर जब संगीता का मूड बन जाता तो वो बीच रास्ते मे ही चुदवाने लग जाती। कुछ ही दिनों में संगीता लगभग सभी मर्दो से चुदवा चुकी थी। लेकिन संगीता है ही ऐसी के उससे किसी का मन नहीं भरता तो फिर वो दोबारा संगीता को चोदने लग जाते। 

 

संगीता का अब एक लण्ड से कुछ नहीं होता था तो फिर हम सब मिलकर उसकी चुत और गाँड में दो दो लण्ड डालकर चुदाई करने लगे। संगीता को देखकर तो बचे हुए घरों के लोगो ने भी अपने घर चुदाई करना शुरू कर दिया था। अब तो सब चुदाई के मजे ले रहे थे। अब तो किसी के भी घर चले जाओ तो हर घर मे चुदाई करते हुए ही लोग मिलते और औरतें नंगी घूमती हुई मिलती। इसके अलावा जब औरतें अपने घर की छत वगैरह पर कपड़े सुखाने जाती तो तब भी वो नंगी ही होती। सब जाती धर्म छोड़कर अब तो बस एक चुदाई का धर्म ही रह गया था हमारे गांव में। फिर पंडित ने अपने बीवी और संगीता को गांव के सभी घरों में भेजा तो संगीता और पंडित की बीवी वो भी बिल्कुल नंगी सभी के घरों में गई। फिर कुछ औरतें ऐसी थी जो कि संगीता की तरह ही गांव में नंगी रहना चाहती थी तो फिर संगीता ने उनके घरवालों को समझाया तो फिर वो तैयार हो गए। तो इस तरह फिर लगभग 5-6 औरतें ऐसी थी जो कि अब गांव में नंगी रहने वाली थी। जो कि किसी की माँ थी, किसी की बहन थी, किसी की बेटी और बीवी थी। फिर वो सब औरतें भी संगीता के साथ नंगी ही मंदिर जाने लगी। फिर पहले तो वो थोड़ी शर्मा रही थी लेकिन फिर उन सबकी शर्म चली गई। फिर कुछ औरतें और भी आ गई तो अब लगभग 10 से 12 औरतें हो गई थी जो कि नंगी ही मंदिर जाती थी और उनके पीछे गांव के मर्द होते थे। फिर संगीता के कहने पर वो भी गांव के बाकी मर्दो से चुदवाने लगी और मजे करने लगी। हर मर्द को नई नई औरत चोदने के लिए मिल जाती थी तो फिर वो अपने घर की औरतों को भी दूसरे मर्दो से चुदवाने के लिए नहीं रोकता था। फिर हमारे गांव के चुदाई के इस रहस्य को गुप्त रखने के लिए हम आपस मे गांव में ही शादी करने लगे। ताकि और दूसरे गांव वालों को इसका पता ना चल सके। इसके अलावा हमने कुछ नियम भी बनाये। जिसमे लड़का 16 साल का और लड़कियां 14 की होने पर ही चुदाई कर पायेगी। 

 

फिर पंडित गांव में एक दूसरे के घर रिश्ता करवाकर शादी करवाने लगा और शादी में सब लोग नंगे ही होते और शादी के बाद दूल्हा दुल्हन सबके सामने ही सुहागरात मनाते और साथ मे बाकी सब लोग भी चुदाई कर सकते थे। इस प्रकार सब लोग ऐसे ही शादी करने लगे। इसके अलावा कोई भी अपने घर के किसी भी सदस्य से शादी कर सकता था तो फिर इसके बाद तो कई लोगो ने अपनी जवान बेटियों के साथ शादी की, कुछ ने अपनी बहन और मां के साथ शादी की। अब कोई कितने भी औरतों और मर्दो से शादी कर सकता था तो फिर चार भाइयों ने मिलकर अपनी एक बहन से शादी कर ली और कई ठरकी बूढ़ों ने तो अपनी दो बेटियों और बहुओं से शादी कर ली। इस प्रकार इसके बाद तो गांव का माहौल काफी बदल गया। फिर तो गांव की गलियों में मर्द तो लगभग नंगे ही घूमने लगे थे और तो और फिर तो औरतें भी काम वगैरह के सिलसिले में घर से बाहर नंगी ही जाने लगी थी और उन्हें कोई कुछ नहीं कहता था। क्योंकि सब अब अपने अपने घर मे चुदाई करके ख़ुश थे। लेकिन फिर भी कई औरतें गली में ही मर्दो से चुदवा लेती थी। अब लगभग सभी गांव के लोग बहुत खुश थे और उनका ज्यादा टाइम बस चुदाई करने में ही चला जाता था। गांव के सब लोगो मे एकता थी और वो एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते थे। अमीर गरीब का भेद मिट चुका था। कोई भी मर्द और औरत अब सहमति से एक दूसरे से चुदाई कर लेते थे। जोर जबरदस्ती करने वाले को उचित दंड भी दिया जाता था। 

 

इस तरह हमने अपने ही नियम कायदे बना लिए थे और सब उन्ही के अनुसार चलते थे। गांव में रहने वाली सब औरतों की चुत और गाँड के छेद कुछ महीनों में ही बड़े बड़े हो जाते थे। ज्यादा चुदाई के कारण मर्द भी थक जाते थे। फिर इसके लिए संगीता ने सबको अपनी खुराक बढ़ाने और एक्सरसाइज वगैरह करने के लिए कहा तो फिर सब ऐसा ही करने लगे। जिससे गांव में कई मर्दो ने अपनी अच्छी खासी बॉडी बना ली और उधर औरतों ने भी अपने बदन से एक्स्ट्रा चर्बी को हटा दिया तो वो और भी ज्यादा सेक्सी दिखने लगी और उनकी चुत और गाँड भी पहले से ज्यादा टाइट रहने लगे। अब तो गांव में बच्चे बच्चे को चुदाई का ज्ञान हो चुका था और जब उनकी चुदाई की उम्र हो जाती तो वो खुलकर मजे लेते। इस तरह हम सब गांव में मिलकर रहते और साथ मे खूब चुदाई करते। 

 

उधर फिर मेरी बहन सीमा ने अपने ससुर के बच्चे को जन्म दिया जो कि लड़का था तो हम सब काफी खुश हुए। फिर तो सीमा बस अपने ससुर के साथ ही रहती और उनसे ही चुदवाती। उधर संगीता की मां, सुरेंदर, आशा भी हमारे गांव में आकर खूब मस्ती करते थे। उधर फिर संगीता और उसकी मां कुछ दिनों से अपने गांव जाकर संगीता के पापा के दोस्तो और सुरेंदर के दोस्तो से चुदवाकर आ जाती थी। इसके अलावा भी वो नए नए मर्दो से बहुत चुदवाती थी। 

 

इस तरह हम सब मजे से रहने लगे और साथ मे खुलकर खूब चुदाई करते। 

 

कहानी समाप्त हुई!

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