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मेरी सास मेरी बीवी बनी - 2 
@Kamvasna 17 अक्टूबर, 2023 4458

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कहानी आगे जारी हैं...

मेरी सास मेरी बीवी बनी-1

फिर सीमा झड़ जाती है और फिर उधर मीनू और आशा भी झड़ जाती हैं। फिर तब सुरेंदर आ जाता है तो फिर सीमा जाकर उससे चिपक जाती है और फिर वो सुरेंदर से अपने बोबो और चुत को चुस्वाने लग जाती है। फिर उधर आशा सुरेंदर का लण्ड चुसने लग जाती है और फिर वो झड़ जाता है। फिर हम बातें करने लग जाते है। फिर कुछ देर बाद मां वहां आती है और वो तब बाकी सबको डांटकर वहां से भगा देती है और हमे सुहागरात मनाने के लिए कहती है। 

 

फिर मै संगीता के पूरे बदन को चूमने लग जाता हूँ और फिर हम चुदाई करने लगते है। फिर तब मुझे संगीता की गाँड मारने का ख्याल आता है तो फिर संगीता भी मान जाती है। फिर मै अपने लंड पर काफी सारा तेल लगाकर लण्ड संगीता की गाँड में डालने लगता हूँ तो संगीता दर्द से चिल्लाने लगती है। लेकिन मै लण्ड पूरा संगीता की गाँड में डाल देता हूँ और संगीता चिल्लाती रह जाती है। संगीता की चीख सुनकर मां कमरे में आती है और फिर वो संगीता से कहती है के एक बार दर्द सहन करले फिर तो मजा ही आएगा। फिर वो बाहर चली जाती है और मै लगातार संगीता की गाँड मारने लग जाता हूँ। फिर थोड़ी देर बाद संगीता को भी मजा आने लगता है तो फिर वो भी मेरा साथ देने लगती है। फिर मै संगीता की गाँड में ही झड़ जाता हूँ। फिर हम लेटकर आराम करने लगते है। फिर मै संगीता की गाँड का छेद देखता हूँ तो वो सूजा हुआ होता है। फिर थोड़ी देर बाद मै फिर से संगीता की चुत और गाँड की चुदाई करने लगता हूँ। फिर उस रात हम आधीरात के बाद ही सोते है। फिर सुबह संगीता जल्दी उठकर नहाकर तैयार हो जाती है और तब नंगी ही होती है बस गहने और ज्वैलरी वगैरह ही पहने होते है। फिर वो मुझे उठाती है तो मै तो उसे देखता ही रह जाता हूँ। फिर वो मुझे लेकर मां के पास चली जाती है। तब संगीता की चाल थोड़ी बिगड़ी हुई होती है और उसका गाँड का छेद अभी भी सूजा हुआ होता है। 

 

फिर हम दोनो जाकर मां का आशीर्वाद लेते है तो तब माँ हम दोनो को अपनी छाती से लगा लेती है। फिर वहां तब आशा, सीमा और बाकी सब भी बैठे होते है तो उन्हें पता चल जाता है के संगीता ने गाँड मरवाई है रात मुझसे तो वो सब हँसने लग जाते है। फिर मां हम दोनो को खाना वगैरह खाकर मंदिर जाने के लिए कहती है और फिर मै तो नहाने चला जाता हूँ और संगीता जाकर सबके लिए खाना बनाने लगती है। फिर उतने में पंडित भी आ जाता है और फिर मै और संगीता पंडित से आशीर्वाद लेने जाते है तो तब कमरे में सुरेंदर और मेरा ससुर भी बैठा होता है। तब पंडित तो संगीता को देखकर देखता ही रह जाता है। वो संगीता के बदन को अच्छी तरह निहारता है। फिर मै भी सबके सामने ही संगीता के बोबो और चुत को सहलाने लग जाता हूँ। फिर हम सब खाना खा लेते है तो फिर सुरेंदर, मै, सीमा, मां और पंडित जीप में बैठकर मंदिर चले जाते है। तब सीमा, मै, संगीता और मां नंगे ही होते है। फिर हम पूजा वगैरह करते है। फिर मां पंडित से कहती हैं के वो मेरे और संगीता के लड़का हो इसके लिए पूजा करे। फिर मैंने मां से कहा के मुझे तो लड़की चाहिए और वो भी बिल्कुल संगीता जैसी। फिर ये सुनकर मां हँसने लग जाती है और कहती है के हाँ हाँ ठीक है। फिर मां ने मुझसे पूछा के तुमने रात को इसकी चुत में पानी डाला था तो फिर मैंने कहा के नहीं मैंने तो रात को सब पानी इसकी गाँड में ही डाला था। ये सुनकर संगीता मुस्कुराने लग जाती है। फिर मां कहती है के तो ठीक है फिर यहीं पर इसकी चुत अपने पानी से भर दो और आशीर्वाद ले लो। 

 

फिर मै संगीता को अपनी बाहों में लेकर उसके बदन को सहलाने लगता हूँ। फिर तभी सीमा माँ से कहती है के मुझे भी भाई जैसा लड़का चाहिए। फिर मां कहती के तो तू भी अपने भाई से अपनी चुत में इसके लण्ड का पानी डलवा लेना। फिर उधर मै संगीता के बोबो और चुत को सहलाने लग जाता हूँ तो फिर वो सिस्कारियाँ लेने लग जाती है। फिर संगीता घोड़ी बन जाती है और मै पीछे से उसकी चुत मारने लगता हूँ तो सब गर्म हो जाते है। सीमा और मां अपनी चुत सहलाने लगती है और सुरेंदर भी नंगा होकर अपना लण्ड हिलाने लग जाता है। उधर पंडित भी बहुत गर्म हो जाता है तो फिर मां उसके पास जाकर उसकी धोती खोल देती है तो फिर वो भी नंगा हो जाता है और अपना लण्ड हिलाने लग जाता है। अपने भाई और मां के सामने संगीता को मुझसे चुदवाता देखकर पंडित तो फुल गर्म हो जाता है। लेकिन अभी तो और भी बहुत कुछ बाकी था। फिर मां सुरेंदर के पास चली जाती है तो फिर सुरेंदर मां के बोबो को सहलाने लगता है। फिर सुरेंदर अपनी मां के पीछे खड़ा होकर उनकी गाँड की दरार में लण्ड डालकर रगड़ने लग जाता है और फिर झड़ जाता है। फिर मेरी नटखट बहन सीमा पंडित के पास जाकर उसके बदन पर हाथ फेरने लग जाती है तो फिर पंडित तो सीमा को अपने इतने नजदीक देखकर बहुत गर्म हो जाता है और फिर झड़ जाता है। उधर फिर मै भी झड़ जाता हूँ और अपने पानी से संगीता की चुत भर देता हूँ और कुछ पानी संगीता की चुत से बाहर भी निकलने लगता है। 

 

फिर मै तो वहीं बैठ जाता हूँ और फिर संगीता मां के कहने पर उल्टी लेट जाती है ताकि मेरा सारा पानी अच्छे से उसकी चुत में चला जाये। फिर सीमा मेरे पास आ जाती है और फिर वो मेरे बदन को चूमने लग जाती है। फिर वो मेरे लण्ड को सहलाने लग जाती है और फिर मै भी उसके बदन को सहलाने लगता हूँ। फिर संगीता खड़ी होकर सुरेंदर से जाकर चिपक जाती है और फिर वो भी सुरेंदर के लण्ड को सहलाने लग जाती है। फिर सीमा तो मेरा लण्ड चुसने लग जाती है और चूसकर पूरा खड़ा कर देती है। फिर मै सीमा को लेटाकर उसके ऊपर आकर उसके बदन को चूमने लगता हूँ तो फिर सीमा काफी गर्म हो जाती है। फिर मै सीमा की चुत में लण्ड डालकर चुदाई करने लगता हूँ तो ये देखकर पंडित तो देखता ही रह जाता है। फिर उधर सुरेंदर भी संगीता के बोबो को चुसने लगता है। चुदाई के टाइम सीमा को काफी मजा आता है और फिर वो काफी जोर जोर से सिस्कारियाँ लेने लग जाती है। उसकी सिस्कारियाँ सुनकर फिर मै भी उसकी चुदाई की स्पीड बढ़ा देता हूँ। उधर फिर मां पंडित के पास जाकर उससे अपने बोबे चुस्वाने लग जाती है। फिर वो खुद पंडित का लण्ड पकड़कर सहलाने लग जाती है। जिससे वो तब ही झड़ जाता है। फिर उधर सुरेंदर भी झड़ जाता है। फिर मै भी सीमा की चुत में अपना लण्ड पूरा अंदर तक उसकी बच्चे दानी तक डालकर झड़ने लगता हूँ तो मेरा गर्म पानी उसे महसूस होने लगता है। फिर मै उसके ऊपर ही लेट जाता हूँ। 

 

मंदिर के आसपास का इलाका सुनसान है तो फिर हम सब मंदिर से निकलकर नंगे ही वहां घूमने लगते है। फिर थोड़ी देर घूमने के बाद हम वापिस आने लगते है तब पंडित और सुरेंदर तो कपड़े पहनकर आगे बैठ जाते है और हम बाकी सब नंगे ही पीछे बैठ जाते है। फिर मेरी मस्ती खोर बहन सीमा नंगी ही आगे जाकर बैठ जाती है। फिर जब गांव आने वाला होता है तब वो पीछे आ जाती है। फिर घर पहुंचकर सुरेंदर तो बाहर वाले कमरे में जाकर सो जाता है और फिर पंडित को मै उसकी दक्षिणा और साथ मे खाने पीने का और भी सामान दे देता हूँ तो वो खुश हो जाता है। फिर सीमा जाकर मीनू के पास सो जाती है और फिर मां और संगीता को लेकर मै दूसरे कमरे में चला जाता हूँ। फिर हम तीनों सो जाते है। फिर थोड़ी देर सोने के बाद मै उन दोनों के बदन को सहलाने लगता हूँ तो फिर वो भी मेरा लण्ड पकड़कर सहलाने लग जाती है। फिर मै मां की चुदाई करने लगता हूँ और फिर उनकी कसकर चुदाई करता हूँ। जिससे वो खुश हो जाती है। फिर कुछ अगले दिन मेरा ससुर अपनी बहन और बच्चों को लेकर उन्हें छोड़ने चला जाता है। फिर मां सुरेंदर और आशा को भी वापिस भेज देती है। अब घर पर सिर्फ मै और और वो तीनो मां बेटी और सीमा ही रह जाती है। फिर दो तीन बाद ही सीमा को उल्टियां होने लगती है और वो प्रेग्नेंट हो जाती है। हालांकि मंदिर में चुदाई के बाद मैंने उसकी दोबारा चुदाई नहीं कि थी। फिर ये देखकर हम सब बहुत खुश हो जाते और इसके अगले दिन ही संगीता भी प्रेग्नेंट हो जाती है। फिर मै सीमा को जाकर उसके ससुराल छोड़ आता हूँ। अब घर पर सिर्फ मै और वो तीनो मां बेटी ही रह जाती है। फिर मै रोज रात को उन तीनों की एक साथ चुदाई करने लगा। फिर मां मुझे और संगीता को अपने साथ अपने गांव यानी मेरे नए ससुराल चलने के लिए कहती है तो फिर मै उन्हें हां कह देता हूँ। फिर मेरे पुराने ससुर अपनी बहन और बच्चों को छोड़ कर वापिस आ जाते है तो फिर वो तो घर पर मीनू के साथ रह जाते है और फिर मै, मां और संगीता मेरे नए ससुराल चले जाते है। 

 

फिर वहां जाने के बाद सब हमारा अच्छे से स्वागत करते है। मै सुरेंदर और आशा से तो पहले ही मिल चुका था। उनके दो बच्चे भी थे पर वो अपने ननिहाल रहकर पढ़ते थे। उधर मेरे नए ससुर भी काफी ठरकी आदमी थे। उन्हें मेरी मां और मेरी नई सास यानी संगीता की मां ने सब कुछ बता दिया था। तो फिर जब मै और संगीता उनका आशीर्वाद लेने गए तो फिर उन्होंने मुझसे संगीता को खुश रखने के लिए कहा और फिर संगीता के पहले वाले पति के बारे में कहने लगे के उसका तो खड़ा ही नहीं होता था। फिर उन्होंने मेरे सामने ही संगीता को अपने गले लगाया और फिर उसकी कमर में हाथ डालकर खड़े होकर उसके बदन को देखकर उसकी तारीफ करने लगे। फिर वो संगीता के बोबो को देखकर बोले के दामाद जी को अपना दूध पिलाया या नहीं तो ये सुनकर संगीता हँसने लगती है। लेकिन मै ये सुनकर हैरान रह जाता हूँ। फिर संगीता मुझे कहती है के पापा ऐसे ही है। फिर मेरे नए ससुर मुझसे काफी खुलकर बातें करते है और वो अपनी बीवी, आशा और संगीता को देखकर उनके बारे मे खूब गंदी गंदी बातें करते है। जिन्हें सुनकर मै तो फुल गर्म हो जाता हूँ। फिर रोज रात को मेरे नए ससुर अपनी बीवी को नंगी करके उनकी गाँड मारते है। उधर रात को मै, सुरेंदर, आशा और संगीता नंगे होकर एक कमरे में सोते। फिर सुरेंदर के साथ संगीता सोती तो मेरे साथ आशा सो जाती। फिर एक बार जब मैं आशा की गाँड मार रहा था तो तब मैंने आशा से पूछा के वो अपने ससुर से भी गाँड मरवाती है क्या। तो फिर आशा ने कहा के हां। फिर वो बोली के जब मै रोज सुबह सुबह उनके कमरे की सफाई करने जाती हूँ तो फिर वो मेरी गाँड मारते है। ये सुनकर मै काफी हैरान हो गया। फिर मैंने पूछा के इसके बारे में सुरेंदर और तुम्हारी सास को पता है तो फिर वो बोली के हाँ सबको पता है। फिर वो बोली के मुझे गाँड मरवानी थी पर मेरे पति को गाँड मारना पसंद नहीं था तो फिर मै ससुर से गाँड मरवाने लगी और उन्होंने कुछ नहीं कहा। फिर सुबह मैंने इसके बारे में सबसे बात की तो सबने आशा और ससुर की चुदाई की बात स्वीकार कर ली। संगीता को भी इसका पहले से पता था।

 

फिर मै बोला के इतना सब होने के बाद भी आप घर पर कपड़े पहनकर रहते हो। फिर मां बोली के हाँ मुझे तो अब नंगी रहने की आदत पड़ चुकी है तो मुझे तो कपड़े पहनना अच्छा ही नहीं लगता है। फिर मै बोला के तो ठीक है फिर हम आज से सब नंगे ही रहेंगे। फिर आशा ससुर के कमरे में सफाई करने नंगी ही चली गई तो फिर ससुर आशा की चुदाई करने लगे। तब फिर कमरे में मै सुरेंदर को लेकर चला गया। फिर हमें देखकर ससुर हैरान हो गए लेकिन फिर हम दोनो ने भी उनके सामने आशा की चुदाई की तो वो काफी खुश हो गए। फिर जब ससुर में मेरा लण्ड देखा तो वो देखते ही रह गए। फिर वो बोले के अब तो संगीता खूब खुश रहती होगी। फिर मैंने कहा के संगीता ही नहीं अब तो उसकी मां भी खुश रहती है। ये सुनकर ससुर थोड़ा हैरान हो गए। लेकिन तभी मां यानी मेरे नए ससुर की बीवी नंगी ही कमरे में आ गई। तो ये सुनकर ससुर तो देखते ही रह गए। फिर मैंने ससुर और सुरेंदर के सामने ही मां को अपनी बाहों में ले लिया और फिर उनके बोबो को चुसने लगा। फिर वो बेड पर घोड़ी बन गई तो मैंने अपना पूरा लण्ड उनकी गाँड में उतार दिया तो ये देखकर तो ससुर की सांस ही रुक गई। फिर मैंने सास की कुछ देर तक चुदाई की। लेकिन अभी तो और भी कुछ बाकी था। फिर कमरे में संगीता आ गई नंगी ही। तो ससुर तो संगीता को देखते ही रह गए। हालांकि तब संगीता अपने पापा से थोड़ी थोड़ी शर्मा रही थी। फिर ससुर तो संगीता को देखकर देखते ही रह गए। फिर संगीता बेड पर आ गई तो ससुर फिर संगीता के बोबो और गाँड को सहलाने लगे और फिर वो संगीता के बोबो को चुसने लगे। 

 

फिर संगीता तो अपने पापा का लंड पकड़कर सहलाने लगी तो फिर वो तो तब ही झड़ गए। तब फिर मैं संगीता की चुदाई करने लगा। फिर चुदाई के बाद हम घर के आंगन में गए तो वहां आशा नंगी ही थी। फिर मैंने ससुर से कहा के अब से हम नंगे ही रहेंगे। फिर ये सुनकर तो ससुर खुशी से उछल पड़े। फिर सास ने ससुर को मेरी और संगीता की शादी की सब बात बताई तो ससुर बोले ले के ऐसी शादी में तो मुझे भी बुला लेना था। फिर सुरेंदर तो खेत चला गया और घर पर सिर्फ हम ही रह गए। फिर संगीता अपने पापा से अपनी चुत चटवाने लगी और फिर ससुर उसकी चुत पर अपना लण्ड रगड़ने लगे तो फिर मैंने संगीता से खुलकर अपने पापा से चुदवाने के लिए कहा तो फिर संगीता घोड़ी बन गई तो फिर ससुर उसकी गाँड मारने लगे। ससुर का लण्ड ज्यादा मोटा नहीं था तो संगीता की गाँड में आराम से चला गया। फिर वो संगीता की गाँड मारने लगे। उन्हें संगीता की गाँड मारकर काफी मजा आया। फिर तो ससुर संगीता की और मै उनकी बीवी यानी संगीता की मां की चुदाई करने लगे। रात को हम सब एक ही कमरे में सोने लगे और खूब मस्ती करने लगे। अपने पापा से चुदाई के बाद संगीता ने पहली बार अपने भाई का लण्ड भी अपनी चुत और गाँड में ले लिया। उधर संगीता की मां ने भी अपने बेटे सुरेंदर से चुदाई करवाली। फिर तो हम रात को किसी के भी साथ सो जाते और खूब चुदाई करते। 

 

हम सब घर के आंगन में नंगे ही रहते थे और घर के बाहर काफी खुली जगह पड़ी हैं और वहाँ गली भी हैं। जहां से लोग आते जाते रहते थे। फिर आशा तो घर का काम करती करती बाहर नंगी ही चली जाती थी। फिर संगीता की मां भी नंगी जाने लगी। उन्हें जब कोई गली में आता जाता दिखाई देता तो फिर वो वापिस अंदर आ जाती थी। फिर संगीता भी बाहर जाने लगी और फिर वो तो मैन गेट तक नंगी ही चली जाती। इतना ही नहीं फिर तो कमरे के बाहर बनी चौकी पर मै और ससुर मिलकर उन तीनों की चुदाई भी करने लगे। फिर इसके बाद तो वो तीनो काफी खुल गई। 

 

फिर एक बार रात को हम लेटे थे और फिर ससुर के पेट मे कुछ गड़बड़ हो गई तो फिर उन्होंने बाहर घूमकर आने के लिए बोला। तो फिर उनके मै और संगीता भी चले गए। तब हम तीनों नंगे थे। फिर पहले तो हम घर मे ही घूमते रहे और फिर मैंने ससुर से घर के बाहर चलने के लिए कहा तो फिर ससुर मान गए और फिर हम तीनों घर का मैन गेट खोलकर घर के बाहर आ गए। ऐसे घर के बाहर बिल्कुल नंगी खड़ी होकर संगीता को काफी मजा आ रहा था। तब सर्दी ज्यादा नहीं थी और वैसे भी हम गर्म थे। फिर हम तीनों एक गली में चलने लगे। तब लगभग सभी लोग सोए हुए थे तो गली में कोई नहीं था। तब संगीता को तो विस्वास ही नहीं हो रहा था के वो ऐसे घर से बाहर नंगी घूम रही है। तब हम तीनों घर से थोड़ा दूर चले आये थे। तब हम तीनों गर्म हो चुके थे तो फिर गली में ही संगीता को दीवार के सहारे खड़ा करके हम उसकी चुदाई करने लगे। फिर चुदाई के बाद हम घर आ गए और फिर आकर सबको ये बात बताई तो सब सुनकर काफी हैरान हो गए। फिर ऐसे ही अगले दिन सुबह मै, ससुर और संगीता फिर से घर से बाहर नंगे ही चले गये। फिर हम बस अपने घर के आसपास ही घूमते रहे। वहां आसपास कम ही घर थे। तो पूरा दिन निकलने तक संगीता तो गली में नंगी ही घूम रही थी। उधर सास सुबह सुबह मंदिर जाती थी तो फिर उनके साथ मै और संगीता भी जाने लगे। हम खेतो में से होकर जाते थे तो तब संगीता और उसकी मां दोनो नंगी हो जाती थी और उनके कपड़े में ले लेता था। फिर मंदिर आने पर वो फिर से कपड़े पहन लेती थी। फिर तो सास को भी ऐसे खुले में नंगी रहने में काफी मजा आने लगा तो फिर तो वो रोज नंगी ही मंदिर जाने लगी। फिर रास्ते मे मै उन दोनों की चुदाई भी कर देता था। फिर ससुर भी हमारे साथ जाने लगे और फिर तो हम और भी ज्यादा मस्ती करने लगे। 

 

फिर तो हम सुबह जल्दी घर से मंदिर के लिए निकल जाते तो फिर सास और संगीता घर से ही नंगी ही जाने लगी थी। फिर थोड़ी दूर चलने के बाद हम खेतो में घुस जाते तो फिर हमें देखने वाला कोई नहीं होता था। फिर तो उन दोनों मां बेटी की हिम्मत अब काफी बढ़ गई थी। उन्हें अगर अब पूरे गांव के सामने नंगी रहना पड़े तो भी शायद वो नंगी भी रह सकती थी। 

 

फिर घर के बिल्कुल सामने थोड़ा दूर संगीता की सहेली का घर था तो फिर संगीता ने उससे मिलकर आने का प्रोग्राम बनाया। संगीता की वो सहेली घर पर साथ मे औरतों का सजने स्वंरने का हर सामान रखती थी और साथ मे कपड़े भी सिलती थी। फिर संगीता उसके घर जाने के लिए नीचे सलवार और ऊपर सिर्फ ब्रा पहन ली और ऊपर चुन्नी ले ली। फिर संगीता मुझे भी साथ लेकर उनके घर चली गई। तब दोपहर का टाइम था तो तब गली में कोई नहीं था। उधर हम जब संगीता की सहेली के घर पहुंचे तो उसके घर पर वो तब अकेली ही थी। उसका पति काम पर गया था और बच्चे स्कूल। वो संगीता को देखकर काफी खुश हुई। फिर संगीता ने अपनी सहेली को पूरी बात बताई और फिर मुझसे भी मिलवाया। तो फिर संगीता की सहेली बोली के तुम दोनो की जोड़ी काफी अच्छी लगती है। फिर वो मेरे सामने ही एक दूसरे से गंदी बातें करने लगी। फिर वो दोनो मेरे सामने एक दूसरे के बोबो को भी सहलाने लगी और मजाक करने लगी। फिर संगीता ने अपनी ब्रा खोल दी और ऊपर से पूरी नंगी हो गई। ये देखकर संगीता की सहेली देखती ही रह गई। फिर संगीता उससे कहने लगी के मैंने अपनी जिंदगी के काफी साल ऐसे ही बर्बाद कर दिए है। अब मै बिल्कुल खुलकर रहना चाहती हूं। फिर वो दोनो एक कमरे में चली गई। जहां औरतों के ब्रा पैंटी, चूड़ियां और बाकी और भी काफी सामान था। फिर संगीता वो सब सामान देखने लगी और फिर अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर वहीं पर पूरी नंगी हो गई तो ये देखकर संगीता की सहेली शर्माने लगी। फिर संगीता एक ब्रा पैंटी लेकर पहनने लगी। फिर वो और भी सामान लेने लगी घर मे ब्रा पैंटी में ही घूमने लगी। फिर ये देखकर मै गर्म हो चुका था तो फिर संगीता मेरे पास आई और अपनी सहेली के सामने ही मेरे अंडरवियर को छोड़कर मेरे सब कपड़े खोल दिये। फिर मेरी बॉडी देखकर वो देखती ही रह गई। फिर संगीता मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लण्ड को सहलाकर अपनी सहेली से कहने लगी के अगर तुम इसे देख लोगी तो पागल ही हो जाओगी। फिर संगीता मेरा अंडरवियर नीचे करने लगती है तो ये देखकर उसकी सहेली वहां से चली जाती है और फिर मै और संगीता चुदाई करने लगते है। 

 

फिर चुदाई के बाद संगीता एक दम नंगी ही अपने सहेली के पास चली जाती है और फिर मै भी कपड़े पहनकर उनके पास चला जाता हूँ। तब वो दोनो सहेलियां एक दूसरे से मस्ती मजाक कर रही होती है। फिर संगीता एक ब्रा पैंटी पहन लेती है और फिर अपनी सहेली से कहती है के मै ऐसे ही घर जाऊंगी तो फिर उसकी सहेली को भी मालूम हो जाता है के संगीता कुछ भी कर सकती है। फिर सब सामान लेकर संगीता मेरे साथ ब्रा पैंटी में ही अपने सहेली के घर से बाहर निकलती है और फिर हम अपने घर जाने लगते है जो कि बिल्कुल सामने ही था। उधर संगीता हम दोनो को जाते हुए को देखने लगती है। संगीता दिन में सरेआम सिर्फ ब्रा पैंटी में घूम रही थी। फिर थोड़ी देर बाद ही हम घर के अंदर चले जाते है। लेकिन फिर संगीता तो ब्रा पैंटी खोलकर पूरी नंगी हो जाती है और फिर घर से बाहर निकलकर देखती है तो कोई नहीं था तो फिर वो तो बिल्कुल नंगी ही फिर से अपनी सहेली के घर जाने लगती है। ये देखकर तो संगीता की सहेली देखती ही रह जाती है। फिर वो अपनी सहेली के घर पहुंचकर और फिर वापिस नंगी ही आ जाती है। फिर हम घर के अंदर चले जाते है। फिर ये सब संगीता अपनी मां को बताती है तो वो सुनती ही रह जाती है। फिर वो संगीता से कहती हैं के ये तो कुछ नहीं वो तो कई मर्दो के सामने नंगी हो चुकी है। फिर मैंने सास से कहा के आप फिर से उन सभी मर्दो को बुलाइये और हमारे सामने उनके सामने नंगी रहिए तो फिर सास बोलती है के हाँ ठीक है। फिर वो अपने पति यानी ससुर से बात करती है तो फिर ससुर भी मान जाते है। फिर ससुर अपने कुछ खास दोस्तों को और अपने खेत मे काम करने वाले कुछ मजदूरों को और साथ मे सुरेंदर के ससुर और अपने साले यानी सास के भाई को भी बुला लेते है तो कुल मिलाकर वो सब 8 से 10 लोग हो जाते है। 

 

फिर वो सब लोग कुछ दिनों बाद हमारे घर पर आ जाते है। वो सब लोग ज्यादातर बूढ़े ही लोग थे। यानी उन सबकी उम्र 50 साल से ऊपर ही थी। फिर उन सबके आने के बाद वो सब ससुर के साथ उनके कमरे में बैठ जाते है और बातें करने लगते है। वो सब के सब एक दम ठरकी थे तो वो गंदी बातें गंदी गालियों के साथ करने लगते है। तब मै और सुरेंदर भी उन सबके साथ बैठकर बाते कर रहे थे। उन सब की बाते सुनकर मेरा तो लण्ड खड़ा हो जाता हैं और फिर मै तब कपड़ो के ऊपर से ही अपने लण्ड को सहलाने लगता हूँ  तो मेरे पास बैठे कई आदमी मेरे लण्ड के साइज को देखकर देखते ही रह जाते हैं। फिर सास हम सब के लिए चाय पानी लेकर आती हैं तो तब भी सबकी गंदी बातें वैसे ही चालू रहती हैं। गांव में औरतें दूसरे मर्दो के सामने घूंघट करती है पर सास तो बिना घूंघट के थी और उन्होंने कुर्ता भी ऐसा पहन रखा था जिसमें से उनके आधे बोबे दिख रहे थे। सास ने मेकअप वगैरह भी कर रखा था और वो काफी सेक्सी लग रही थी। फिर सब सास को ही देखने लगते है। फिर सबके चाय पीने के बाद खाली कप वगैरह लेने के लिए संगीता आती है। तब संगीता ने खुले गले का कुर्ता पहन रखा था और वो जब झुकती तो उसके बोबे पूरे दिखने लगते है। ये देखकर तो सबके लण्ड टाइट होने ही थी। पर ये तो अभी शुरुआत ही थी। फिर सास कपड़े बदलकर एक पतला सा सूट पहन लेती है जिसमे से सास का बदन साफ दिख रहा होता है। फिर सास वैसे ही कमरे मे आकर बैठ जाती है और हम सबके साथ बातें करने लगती हैं।

 

सास के बैठे होने के बावजूद भी सब चुदाई कि बातें करते हैं और फिर उन सबके साथ सास भी खूब ठहाके लगा लगाकर हँसती हैं। सास को देखकर सब अपना लंड सहलाये जा रहे थे। सास भी उन सबके सामने अपने बदन का खुला प्रदर्शन कर रही थी। तब वहाँ उनका भाई भी बैठा था पर वो भी इसके मजे ले रहा था। फिर धीरे धीरे शाम हो रही थी वैसे वैसे ही सास, संगीता और आशा के कपड़े कम होते जा रहे थे। फिर सास सबके पीने के लिए पानी मँगवाती है तो फिर आशा सबके लिए पानी लेकर आती है। तब आशा ने ऊपर सिर्फ स्वेटर पहन रखी थी और नीचे सलवार। स्वेटर मे से आशा के आधे से ज्यादा बोबे दिख रहे थे। आशा को ऐसे देखकर सुरेंदर का ससुर यानि आशा का बाप तो देखता ही रह गया। फिर वो कुछ नहीं बोल पाया और बस अपनी बेटी हो देखता ही रहा। उधर आशा भी अपने पापा से थोड़ा शर्मा रही थी। फिर तभी वहाँ संगीता आ जाती है। तब संगीता ने ऊपर सिर्फ ब्रा पहनी होती है और नीचे सलवार पहनी थी। तब संगीता ने ऊपर एक दुपट्टा ले रखा था लेकिन वो भी बार बार गिर रहा था तो सबको संगीता के बोबो के दर्शन अच्छे से हो रहे थे। फिर इतना ही नहीं फिर संगीता जब खाली गिलास उठाने लगती है तो फिर वो एक आदमी की गोद मे गिर जाती है। फिर वो आदमी संगीता के नंगे पेट को पकड़ लेता है। फिर संगीता थोड़ी देर बाद उसकी गोद से खड़ी होती है और फिर सब गिलास लेकर चली जाती है। इतने सब के बाद तो वो सब और ज्यादा गंदी बातें करने लगते है। फिर सास ससुर के पास ही बैठी होती है तो फिर ससुर सास से मस्ती मजाक करने लग जाते है और फिर वो सब के सामने ही सास के बोबो को सहलाने लग जाते है और फिर किस भी करने लग जाते हैं। ये देखकर सब मजे लेने लगते है। फिर ससुर तो सास को अपनी बाहों मे ले लेते है। इतना ही नहीं फिर ससुर तो सास को सबके सामने ही अपने पास लेटा लेते है। 

 

फिर वो सब से सास की चुदाई की बातें करने लगते है। इस सबमे सास को भी बहुत मजा आ रहा होता है। फिर ससुर तो सास की सलवार का नाड़ा खोल देते है और फिर सास से चुदाई के लिए कहते है तो फिर सास कहती है के चुदाई अभी कर लोगे तो फिर रात को क्या करोगे। फिर सास खड़ी होकर कमरे से जाने लगती है और फिर जानबूझकर अपनी सलवार थोड़ी ढीली छोड़ देती है जिससे की पीछे से सास की नंगी गाँड दिखने लगती है। ये देखकर तो सब देखते ही रह जाते हैं। फिर शाम होने को होती है तो फिर ससुर शराब लाने के लिए कहते है तो फिर अंदर से सास, संगीता और आशा दारू की बोतल और ग्लास लेकर आती है। तब सास, संगीता और आशा ने ऊपर ब्रा और नीचे सलवार पहनी होती है और फिर वो सबको दारू डालकर देने लगती है तो सब उन्हे देखते ही रह जाते हैं। फिर सास तो वहीं बैठ जाती है और फिर संगीता और आशा सबके लिए खाना लेने चली जाती है। फिर सब दारू पीने लगते है और फिर ससुर सास से मस्ती करने लगते है। वो पहले सास के एक बोबे को उनकी ब्रा से बाहर निकाल देते है और फिर उसे चूसने लगते है तो सब देखते ही रह जाते है। फिर वो सास के दूसरे बोबे को भी बाहर निकाल देते है। फिर ससुर सास की सलवार मे हाथ डालकर उसकी चुत को सहलाने लगते है तो सास को मजा आने लगता है। फिर ससुर अपने कपड़े निकालकर नंगे हो जाते है और फिर बाकी सब को भी नंगा होने के लिए कह देते है तो फिर मैं भी अपने कपड़े निकालकर नंगा हो जाता हूँ तो फिर सब मेरा लंड देखते ही रह जाते है। फिर सास भी सबके सामने अपनी सलवार और ब्रा खोलकर पूरी नंगी हो जाती है। 

 

फिर वो सबके बीच मे नंगी घूमकर सबको शराब पिलाने लगती है। उधर जब संगीता और आशा को पता चलता है के कमरे मे सब नंगे हो चुके है तो फिर वो भी अपनी सलवार खोलकर सिर्फ ब्रा पैंटी मे कमरे मे आ जाती है। फिर उन्हे देखकर तो सब के होश उड़ जाते है। लेकिन अभी तो और भी बहुत कुछ होना बाकी था। फिर सास और संगीता जानबूझकर मर्दों पर गिरने लगती है। ताकि वो भी उनके बदन के मजे ले सके। फिर तभी संगीता आशा को धक्का मारकर उसके बाप पर गिरा देती है। फिर आशा का बाप तो अपनी बेटी को अपनी बाहों मे देखकर देखता ही रहा जाता है। उधर आशा भी अब मस्तीखोर हो चुकी थी तो फिर वो जानबूझकर अपनी ब्रा नीचे कर देती है और उसके दोनों बोबे उसके बाप के सामने झूलने लगते हैं। फिर ये देखकर उसका बाप उसके बोबो को सहलाने लगता है। तो ये देखकर आशा मुस्कुराने लगती है। उधर फिर संगीता सबके सामने अपनी ब्रा पैंटी खोलकर पूरी नंगी हो जाती है और फिर वो मर्दों के पास जाकर उनके हाथ से अपने बोबो को सहलाने लगती है। उधर फिर आशा अपने बाप पर उलटी लेटी होती है तो फिर वो अपनी ही बेटी की पैंटी खींचकर नीचे कर देता है और गाँड सहलाने लगता है। फिर आशा अपनी पैंटी और ब्रा पूरी निकाल देती है और फिर अपने बाप के साथ लेट जाती है। उधर फिर बाकी सब सास और संगीता के बदन को सहलाने लगते है और फिर ससुर सबके सामने संगीता को बेड पर ले जाकर लेटा देता है और फिर उसके ऊपर चढ़कर उसकी चुत मे लंड डालकर चुदाई करने लगता है। ये देखकर तो सब देखते ही रह जाते है। फिर इतना ही फिर मैं सास को घोड़ी बनाकर गाँड मारने लगता हूँ। 

 

ये देखकर तो सब अपने लंड हिलाने लग जाते है और कुछ तो झड़ भी जाते है। फिर ससुर भी संगीता को घोड़ी बनाकर चोदने लग जाते है। फिर आशा का बाप भी अपनी बेटी की चुत सहलाने लगता है। उसके साथ साथ उसके पास बैठे मर्द भी आशा के बदन को सहलाने लगते है। फिर आशा भी अपने बाप का और एक पास बैठे एक आदमी का लंड हाथ मे पकड़कर सहलाने लग जाती है। फिर ससुर संगीता की गाँड से लंड निकालकर आशा के पास आ जाते है और फिर उसके बाप और सबके सामने ही आशा की चुत मे लंड डालकर चुदाई करने लगते है। उधर फिर सुरेंदर जाकर संगीता की चुदाई करने लगता है। इतना ही नहीं फिर सुरेंद्र मेरी सास और अपनी माँ की भी सबके सामने चुदाई करता है तो ये देखरक तो सबके होश उड़ जाते है। फिर मैं आशा को घोड़ी बनाकर उसके बाप के सामने ही अपना मोटा लंड उसकी गाँड मे डालकर चुदाई करने लगता हूँ। तो फिर आशा का बाप अपनी बेटी की गाँड मे मेरा लंड अंदर बाहर होता देखकर देखता ही रह जाता है और फिर लंड हिलाने लगता हैं। फिर मैं आशा का मुँह उसके बाप के लंड के पास कर देता हूँ तो फिर वो अपने बाप का लंड मुँह मे लेकर चूसने लगती है। फिर उसका बाप थोड़ी देर बाद ही झड़ जाता है तो आशा अपने बाप के लंड का सारा पानी पी लेती है और फिर वो अपने बाप के सामने ही दूसरे मर्द का लंड मुँह मे लेकर चूसने लगती है। उधर फिर सास और संगीता भी बाकी मर्दों का लंड हाथ मे लेकर हिलाने लगती है और कुछ का चूसने भी लगती है। 

 

फिर जब सब झड़कर थक जाते है तो फिर सब शांत होकर बैठ जाते है। तब सब काफी खुश होते है। फिर अब आशा का बाप तो बिना शरमाये अपनी बेटी के बोबो को सहला रहा था और उधर सुरेंदर अपनी माँ की चुत सहला रहा था और ससुर संगीता के बदन को सहला रहे थे। फिर ससुर तो संगीता के बदन को सहलाते हुए कहते है के मेरी बेटी मुझे बहुत मजा देती है। उधर फिर सास सुरेंदर का लंड सहलाते हुए कहती है के इसका लंड मेरी गाँड तक पहुँच ही नहीं पाता है तो फिर सुरेंद्र कहता है के तुम्हारी गाँड बहुत बड़ी है। फिर सुरेंद्र अपनी माँ की गाँड पर थप्पड़ मारने लगता है तो फिर सास हंसने लग जाती है। फिर सास अपने भाई के ऊपर जाकर उसे अपने बोबे चुसवाने लग जाती है और फिर पीछे से सुरेंद्र अपनी माँ की गाँड खोलकर चाटने लग जाता है। तब कुछ लोगों का पेशाब तो वहीं निकल जाता है और फिर बाकी हम सब बाहर पेशाब करने के लिए चले जाते है। तब लगभग आधी रात हो चुकी थी। फिर तब सास, संगीता और आशा सबके सामने ही नीचे बैठकर पेशाब करने लगती है। फिर वो खड़ी होकर वहीं घूमने लगती है तो सब उन्हे देखते ही रह जाते है। फिर पेशाब करने के बाद आशा अपने पापा को लेकर अंदर वाले कमरे मे चली जाती है और फिर वहीं सो जाती है। फिर हम बाकी सब जब पेशाब करने जाते है तो कुछ लोग तो पहले ही सो चुके होते है और फिर हम बाकी भी सो जाते है। तब संगीता तो सुरेंद्र और अपने पापा के साथ सो जाती है और सास मेरे साथ सो जाती है। 

 

फिर सुबह हम सब देरी से ही उठते है। तब तक धूप भी निकल चुकी होती है। फिर आशा हम सबके लिए चाय बनाकर लाती है। फिर हम सब चाय पीने लगते है। फिर सुबह जब सब लोग संगीता और सास को नंगी देखते है तो वो कहते है के हम तो समझ रहे थे के कोई सपना है पर ये तो सच है। ये सुनकर सब हंसने लगते है। फिर हम सब उठकर कमरे से बाहर आकर बैठ जाते है। तब सास और संगीता सबके बीच नंगी ही बैठी होती है और आशा नंगी ही घर का काम कर रही होती है। फिर संगीता उठकर आशा के साथ घर का काम करवाने लगती है तो फिर उसने बताया के रात को उसके पापा ने उसकी चुदाई की थी तो ये सुनकर वो दोनों मुस्कुराने लगती है। फिर सब घर के पीछे पड़ी खाली जगह मे जाकर टट्टी करने लगते है। तब फिर वहाँ सास और संगीता भी टट्टी करने लगती है। वो सब लोग उन दोनों माँ बेटी के दीवाने हो चुके थे। फिर वो सब उनके बदन की तारीफ करने लगते है और फिर गंदी बातें करने लगते हैं। फिर टट्टी करने के बाद सास और संगीता अपनी गाँड धोने के लिए कहती है तो तब दो आदमी जाकर उनकी गाँड धो देते है। फिर संगीता सबके साथ जाकर चिपकने लगती है तो फिर वो उसके बदन को सहलाने लगते है और संगीता उनके लंड को हिलाने लगती है। फिर सास और संगीता अपने पैर खोलकर लेट जाती है और अपनी चुत और गाँड चटवाने लगती है। 

 

फिर सब गरम हो जाते है तो फिर सास, संगीता और आशा की चुदाई करने के लिए तड़पने लगते है तो फिर इसके लिए वो तीनों और मैं, ससुर और सुरेंदर भी राजी हो जाते है। क्योंकि तब माहौल ही ऐसा बन गया था। फिर वो तीनों घोड़ी बन जाती है और फिर सब एक एक करके उनकी चुदाई करने लगते है। उन तीनों की चुदाई होते देख मुझे, ससुर और सुरेंद्र को भी बहुत मजा आता है। फिर सास, संगीता और आशा उन सबसे चुदवाने के बाद काफी खुश होती है और बाकी सब भी बहुत खुश होते है। फिर हम सब मर्द तो नहाने लगते है और वो तीनों खाना बनाने लगती है। फिर नहाने के बाद हम सब मर्द तो नंगे ही आँगन मे बैठ जाते है और फिर वो तीनों हमे खाना परोस देती है तो फिर हम सब मर्द खाना खाकर आराम करने लगते है। फिर सास, संगीता और आशा तीनों नहाकर तैयार होने लगती है। तभी वो तीनों जब तैयार होकर आती है तो सब उन्हे देखते ही रह जाते है। फिर वो तीनों आँगन के बीचोंबीच गद्दे लगाती है और फिर हम उस पर लेट जाते है और फिर उन तीनों की चुदाई करने लगते है। तभी कोई बाहर से घर का गेट खटखटाता है तो फिर सुरेंद्र भागकर देखकर आता है तो तब संगीता की सहेली आई होती है। फिर सुरेंद्र आकर संगीता को बताता है तो फिर संगीता नंगी ही खड़ी होकर उसके पास चली जाती है। तब संगीता को देखकर उसकी सहेली देखती ही रह जाती है। फिर वो अपनी सहेली से बाहर ही खड़ी होकर बात करने लगती है। तब अंदर से चुदाई की आवाजें भी आ रही होती है तो फिर संगीता की सहेली उससे पूछती है के ये आवाजें कैसी है तो फिर संगीता उसे कह देती है के कुछ नहीं है। फिर संगीता की सहेली संगीता को इतनी सजी धजी और तैयार हुई देखकर पूछती है के ये क्या है तो फिर संगीता उसे बताती है के घर पर कोई नहीं है तो मैं चुदाई करवा रही थी। फिर ये सुनकर संगीता की सहेली हंसने लग जाती है और फिर वो वापिस चली जाती है और फिर संगीता वापिस अंदर आकर चुदवाने लग जाती है। 

 

फिर चुदाई के बाद हम सब थककर बैठ जाते है और फिर चाय वगैरह पीने लगते हैं। तब दोपहर होती है तो फिर हम घर में इधर उधर घूमने लगते हैं। तब फिर संगीता और सास घर की छत पर जाकर ही खुलेआम घूमने लगती है। जैसे उन्हे किसी की परवाह ही ना हो। उधर फिर ससुर भी कुछ आदमियों के साथ नंगे ही कमरे के बाहर चौकी पर जाकर बैठ जाते है। फिर वहीं संगीता उन्हे नंगी ही चाय देकर आ जाती है। तब ऐसा माहौल बन गया था जैसे हम हमेशा से नंगे ही रह रहे हो। फिर इतना ही नहीं संगीता तो फिर वहाँ बाहर भी नंगी ही घूमने लगती है। फिर वो घर के मैंन गेट के बाहर चली जाती है और फिर वो सीधा अपनी सहेली के घर जाने लगती है तो सब उसे घर से बाहर ऐसे नंगी घूमता देखकर देखते ही रह जाते है। तब हम सब उसे देख रहे होते है। लेकिन फिर संगीता अपनी सहेली के घर ना जाकर बीच रास्ते से ही वापिस आ जाती है तो ये देखकर तो सबके होश ऊड़ जाते है। फिर हम सभी फिर से गरम हो जाते है तो फिर चुदाई करने लग जाते है। फिर रात को भी हम सब खूब चुदाई करते है और रात भर चुदाई करते है। फिर हम सब सुबह देरी से उठते है। फिर उस दिन सब खाना खाकर चले जाते है। उनके जाने के बाद सास, संगीता और आशा बहुत खुश होती है। लेकिन फिर भी चुदाई ऐसे ही चलती रहती है। क्योंकि ससुर के खास दोस्त कुछ दिनों से घर पर आते रहते है तो फिर तो वो सास की और संगीता की चुदाई कर लेते है। उधर सुरेंद्र आशा को लेकर खेत चला जाता और फिर खेत मे उसे नंगी ही रखता। फिर वहाँ पर खेत में काम करने वाले मजदूर आशा की चुदाई करते रहते। फिर आशा की जगह कई बार सुरेंदर अपनी मां को लेकर चला जाता और फिर खेत मे सास नंगी ही रहती और फिर अपने बेटे और मजदूरों से खूब चुदवाती। उधर संगीता अब तो दिन में कई बार घर से बाहर नंगी जाने लगी। ससुर के कुछ खास दोस्त हमारे घर के नजदीक ही रहते थे तो फिर वो भी आ जाते और वो संगीता की नंगी जवानी के खूब मजे लेते। 

 

दिन में सब लोग खेतों वगैरह में चले जाते तो सब के घर खाली ही होते थे तो देखने वाला कोई नहीं होता था। फिर तो संगीता दिन में सरेआम घर से बाहर गली में ससुर और उनके दोस्तों के साथ नंगी घूमती रहती। उधर सुरेंदर के ससुर और बाकी रिश्तेदार भी कुछ दिनों से मिलने के लिए आते रहते तो फिर वो भी आकर खूब चुदाई करते। आशा के पिताजी जब आशा को खेत मे मजदूरों से चुदते हुए देखते तो फिर वो भी काफी गर्म हो जाते और फिर आशा की खूब चुदाई करते। फिर संगीता और उसकी मां और मै और ससुर भी कुछ दिनों से खेत मे चले जाते और फिर वहां वहां पर ससुर के दोस्त और मजदूर सब इकट्ठे हो जाते। तब फिर हम सब संगीता, उसकी मां और आशा की खूब चुदाई करते। हम वहां सुबह ही चले जाते और फिर रात को ही आते। सारा दिन खेत मे नंगे होकर चुदाई करने में बहुत मजा आता था। फिर रात को जब खेत से वापिस आते तो फिर तो अंधेरा होने के कारण संगीता, उसकी मां और आशा तीनो नंगी ही पैदल ही घर आती। तब वो बिल्कुल नंगी गांव के बीच मे से आती थी। अब तो वो तीनो इतना ज्यादा खुल चुकी थी के वो दिन में भी सबके सामने नंगी आ सकती थी। फिर घर पर भी ससुर के दोस्त, खेत मे काम करने वाले मजदूर और कई बार कोई रिश्तेदार भी आ जाता तो उनके सामने भी वो नंगी ही रहती है। कई बार तो कई कई दिन निकल जाते थे और वो तीनो कोई भी कपड़ा नहीं पहनती थी। हालांकि सर्दियां शुरू हो गई थी पर फिर भी वो बस ऊपर एक स्वेटर पहने रहती और नीचे कभी कभार कुछ पहन लेती थी। बाकी टाइम नंगी ही रहती थी। 

 

मुझे और संगीता को आये हुए एक महीना होने को था। लेकिन हमें टाइम का बिल्कुल भी पता नहीं चला। फिर मेरी सास यानी संगीता की मां ने हमे जाने के लिए कहा और कहा के संगीता के बच्चा होने वाला होगा तब मै आ जाऊंगी। लेकिन फिर भी मै और संगीता कुछ दिन और वहीं रुके। मैंने भी संगीता की मां को घर के बाहर नंगी ले जाकर खूब चोदी। उधर संगीता की सहेली भी मेरा लण्ड कई बार देख चुकी थी तो फिर संगीता ने जब उससे चुदवाने के लिए कहा तो वो शर्माने लगी। लेकिन फिर एक दिन संगीता के कहने पर मैंने उसकी चुदाई कर दी। चुदाई के बाद वो काफी खुश हुई। फिर तो कई बार और मैंने उसकी चुदाई की। फिर इसके बाद जब संगीता की सहेली को मेरी और संगीता की मां की चुदाई का पता चला तो वो काफी हैरान हुई। लेकिन फिर संगीता की मां ने उससे कहा के ऐसा मर्द और ऐसा लण्ड मिलता कहाँ है तो ये सुनकर वो हँसने लगी। फिर एक दिन संगीता अपने सहेली के सामने ही घर से बाहर नंगी खड़ी होकर अपने पापा के दोस्तो के साथ बातें कर रही थी तो ये देखकर तो संगीता की सहेली देखती ही रह गई। फिर संगीता ने अपनी सहेली से कहा के मैं तो बस अपनी जवानी के मजे ले रही हूँ। लेकिन फिर यही नहीं इसके बाद तो संगीता सुरेंदर के साथ नंगी ही अपनी सहेली के घर चली गई तो फिर ये देखकर तो वो और भी ज्यादा हैरान हो गई। फिर तो वो उसके सामने ही अपने भाई के साथ चिपकने लगी और फिर वो भी संगीता के बदन को सहलाने लगी। ये देखकर संगीता की सहेली काफी गर्म हो गई तो फिर उसके सामने ही संगीता सुरेंदर से चुदवाने लगी और फिर मैं संगीता की सहेली की चुदाई करने लगा। फिर इसके बाद तो संगीता की सहेली दिन में घर पर नंगी ही रहने लगी। फिर तो संगीता की मां अपने बेटे को लेकर संगीता की सहेली के पास नंगी ही चली गई और फिर सुरेंदर तब अपनी मां की गाँड में मुंह डालकर गाँड चाटने लगा और फिर चुत भी चाटि और बोबो को भी खूब दबाया। ये देखकर संगीता की सहेली अपनी चुत सहलाने लगी। फिर एक दिन संगीता और मै संगीता की सहेली के घर गए हुए थे। वहां संगीता की सहेली ने संगीता के मेकअप वगैरह करके उसके बालों का जुड़ा वगैरह किया और तब संगीता एकदम सेक्सी लगने लगी थी। 

 

फिर संगीता ने अपने सहेली के घर के बाहर ही अपने पापा और उनके कुछ दोस्तों को और सुरेंदर को बुला लिया था। तब वो लगभग 7-8 मर्द हो चुके थे। सुरेंदर अपने साथ एक दो मजदूरों को भी ले आया था। फिर संगीता ऐसे ही नंगी ही अपनी सहेली के घर से बाहर निकलकर जाकर उनके पास खड़ी हो गई। तब ये सब देखकर तो संगीता की सहेली देखती ही रह गई। तब मै और संगीता की सहेली घर से ही ये सब देख रहे थे। तब संगीता उन सबसे हंस हंस कर बाते कर रही थी और वो सब संगीता के बदन को सहला रहे थे। फिर उनमें से कुछ अपने लण्ड बाहर निकालकर खड़े हो जाते है तो फिर संगीता उनके लण्ड को सहलाने लग जाती है। तब संगीता गजब की सेक्सी लग रही थी और सब का मन उसकी चुदाई का हो रहा था। तब पास में ही एक पुराना कमरा था जिसके छत नहीं थी तो फिर संगीता उस कमरे में चली जाती है और फिर बाकी सब भी संगीता के पीछे पीछे उस कमरे में चले जाते है। फिर ये देखकर तो संगीता की सहेली बहुत गर्म हो जाती है। फिर वो भी समझ जाती है के संगीता उन सबसे चुदवाने वाली है। फिर मैं और संगीता की सहेली भी चुदाई करने लग जाते है। तब फिर हमारी चुदाई तो कुछ देर में खत्म हो जाती है तो फिर संगीता की सहेली संगीता का इंतजार करने लग जाती है। फिर वो मुझसे कहती के संगीता को इतना टाइम क्यों लग रहा है फिर मैंने उससे कहा के वो लोग भी तो 7-8 है। फिर ये सुनकर वो मुस्कुराने लग जाती है। 

 

उधर संगीता घोड़ी बन कर उनसे चुदवा रही थी। फिर तभी संगीता कमरे से बाहर निकलती है और तब साथ मे उसके पापा होते है। वो दोनो तब नंगे होते है और ससुर ने संगीता की कमर में हाथ डाल रखा होता है। तब संगीता अपने चेहरे को अपने हाथ हिलाकर हवा दे रही थी। तब शायद उसे गर्मी लग रही थी। क्योंकि कमरे की छत नहीं थी और धूप भी काफी ज्यादा थी। फिर तभी 3-4 लोग और बिल्कुल नंगे कमरे से बाहर आ जाते है। तब ये देखकर तो संगीता की सहेली देखती ही रह जाती है और वो फिर से गर्म हो जाती है। फिर कुछ देर बाद संगीता फिर से कमरे में जाकर चुदवाने लगती है और और उधर मै और संगीता की सहेली भी चुदाई करने लगते है। फिर थोड़ी देर बाद हम देखते है कि संगीता कमरे से बाहर आकर सरेआम ही घोड़ी बन जाती है और चुदवाने लगती है। लेकिन फिर थोड़ी देर बाद ही जब सब चुदाई कर लेते है तो सब लोग चले जाते है और फिर संगीता हमारे पास आ जाती है। तब संगीता की गाँड से उन सबका पानी बह रहा होता है और संगीता पसीने से भीगी हुई होती है। फिर संगीता उकड़ू बैठकर पेशाब करने लगती है और अपनी गाँड से उन सबका पानी निकाल देती है। फिर संगीता अच्छी तरह से नहाकर फिर से सज सवँरकर तैयार हो जाती है। 

 

फिर संगीता की सहेली भी हँसकर संगीता से खूब मजे करने के लिए कहती है। फिर मै और संगीता वापिस आ जाते है। तब संगीता का पेट थोड़ा थोड़ा निकलने लगता है और हमे आये हुए काफी टाइम भी हो जाता है तो फिर हम वापिस अपने गांव लौट जाते है। फिर संगीता और मीनू पहले की तरह ही नंगी रहने लगती है और हम खूब चुदाई करते है। संगीता के बच्चा होने वाला था लेकिन फिर भी हम चुदाई कर लेते थे। उधर अब पंडित ने शराब छोड़ दी थी और फिर वो भी हमारे घर आने जाने लगा था। उसके सामने भी हम सब नंगे ही रहते थे। तब मीनू के पापा भी वहीं हमारे पास ही रहते थे। फिर उधर मैंने मीनू की गाँड मारनी शुरू कर दी। पहले तो उसे दर्द हुआ था लेकिन फिर उसे भी मजा आने लगा तो फिर तो बस मुझसे अपनी गाँड ही मरवाने लगी। हमारा घर खेत मे था तो संगीता और मीनू तो घर के बाहर खेत मे भी नंगी ही चली जाती थी। उधर फिर खेत वगैरह और पशुओं का काम करने के लिए मैंने सुरेंदर से कहकर वहां से दो मजदूर मंगवा लिए थे। वो संगीता की चुदाई कर चुके थे तो फिर उनके सामने संगीता और मीनू नंगी रहती और वो बीबी नंगे ही रहते थे। मैंने और संगीता ने मीनू को वहां की मस्ती के बारे में सब बता दिया था। तो वो काफी खुश हुई। उधर संगीता और मीनू को देखकर उन दोनों मजदूरों के लण्ड खड़े ही रहते थे। फिर संगीता तो चुदवा नहीं सकती थी और मीनू को अभी मै उनसे चुदवाना नहीं चाहता था तो फिर वो दोनो एक दूसरे की गाँड ही मारने लगे। फिर मैंने भी उन दोनों की गाँड मारी तो मुझे भी काफी मजा आया। 

 

फिर हमसे मिलने के लिये एक दिन सुरेंदर और आशा आये तो फिर उन्होंने आशा की खूब चुदाई की। फिर तो सुरेंदर महीने में कुछ दिनों के लिए आशा को लेकर आने लगा तो फिर हम सब मिलकर आशा की खूब चुदाई करते। फिर उधर मै सीमा को भी उसके ससुराल से लेकर आ गया तो फिर सीमा और संगीता दोनो साथ साथ ही एक दूसरे का ध्यान रखने लगी। वो दोनो अपना पेट पकड़कर नंगी ही इधर उधर घूमती रहती और मीनू भी उन दोनों का बहुत ध्यान रखती। फिर मैंने संगीता की मां को बुलवा लिया तो फिर वो संगीता और सीमा का ध्यान रखती ही थी साथ मे वो हमसे चुदकर हमारा ध्यान भी रखती थी। फिर 9 महीने होने पर पहले सीमा के लड़का हुआ तो हम सब काफी खुश हुए। फिर कुछ दिन बाद ही संगीता के भी लड़की हो गई और वो एकदम संगीता के जैसे ही थी। यानी हम जैसा चाहते थे वैसा ही हुआ। हमारी सब मनोकामना पूरी हो गई थी। संगीता की मां की मदद से दोनो की डिलीवरी घर पर ही हो गई थी। उधर सीमा के ससुराल वाले भी काफी खुश हुए। फिर कुछ समय बाद सीमा और संगीता एकदम ठीक हो गई तो फिर उनकी चुदाई मैंने ही शुरू की। संगीता और सीमा के बोबो का बचा हुआ दूध मै ही पी जाता था। फिर हम गांव के पुराने मंदिर में फिर से गये और पूजा वगैरह की। फिर पंडित और हम सबने गांव में ये बात फैला दी के उस मंदिर में जो जैसी इच्छा करता है वैसा ही बच्चा हो जाता है। तो फिर गांव के कई लोग पंडित के पास आने लगे। लेकिन फिर संगीता ने इसमें एक बात और जोड़ दी के जो उस मंदिर में नंगे होकर चुदाई करेंगे। सिर्फ उनकी मनोकामना ही पूरी होगी। तो फिर कई लोग इसके लिए तैयार हो गए। फिर उन्होंने मंदिर में नंगे होकर चुदाई करने लगे। जिन्हें हम भी दूर बैठकर देखते थे। तो हमे बहुत मजा आता था। फिर जिन्होंने भी मंदिर में चुदाई की उनके सच मे उनकी इच्छा के अनुरूप बच्चा हो गया। फिर तो ये बात आसपास के गांवों में भी फैल गई और पंडित के पास खूब चढ़ावा आने लगा तो फिर उसकी बीवी अपने बच्चों को लेकर वापिस आ गई और पंडित के पास रहने लगी। जिससे पंडित भी अब काफी खुश रहने लगा। 

 

उधर सीमा को जब संगीता ने अपने मायके मे की गई मस्ती के बारे मे बताया तो फिर उसका मन भी वैसे ही मस्ती करने के लिए करने लगा तो फिर वो घर पर ही दोनों मजदूरों से चुदवाने लगी और उधर संगीता और उसकी माँ की हम मिलकर चुदाई करने लगे। उधर फिर पंडित भी उनकी चुदाई करने लगा। पंडित की बीवी काफी लालची थी तो फिर मैं पंडित को काफी दान दक्षिणा देता था। तो फिर पंडित के कहने पर और दक्षिणा पाने के लालच मे वो मेरे सामने अपना पल्लू गिरा देती थी तो फिर एक दिन मैंने उसकी भी चुदाई कर दी। फिर वो भी हमारे घर आने जाने लगी तो उसे भी सब बातों का पता चला गया तो फिर वो भी हमारे साथ खुलकर मजे लेने लगी। फिर हम घर के अलावा खेतों में और फिर जहां भी हमारा मन करता हम चुदाई करने लग जाते। उधर फिर सीमा को उसके ससुराल वाले लेने के लिए आने वाले थे तो फिर सीमा जाने की तैयारी करने लगी। फिर हमने घर पर ही एक छोटा सा कार्यक्रम रखा। फिर सीमा के लड़के का नामकरण किया और फिर उसे उसके ससुराल वाले ले गए। उधर फिर हम सब मिलकर मस्ती करने लगे। फिर मैं, पंडित और दोनों मजदूरों के साथ मिलकर संगीता और उसकी माँ की दिन रात चुदाई करते रहते। उधर सबको पता चल गया था के वहाँ पर लोग नंगे होकर चुदाई करते है तो गाँव के कई लोग वहाँ आकर चुदाई देखने लगे। फिर पहले तो हमने इसे रोकने के बारे मे सोचा लेकिन फिर हमने सोचा के मजा लेने दो सबको। 

 

 

फिर मैं भी संगीता और मीनू को मंदिर मे सबके सामने ले जाकर कई बार चोद चुका था। फिर तो वहाँ चुदाई करने वालों के सब के उनकी इच्छा के अनुसार बच्चा हो रहा था तो फिर तो और ज्यादा लोग आने लगे। वो सब पंडित से संपर्क करते और फिर पंडित उन्हे टाइम दे देता। फिर तो दिन रात मंदिर मे चुदाई चलने लगी। उन सबको तब शर्म भी नहीं आती थी क्योंकि उन्हे अपनी इच्छा के अनुसार बच्चा जो चाहिए था। मंदिर मे चुदाई करने से फिर तो जिनके बच्चे नहीं हो रहे थे उनके भी बच्चे होने लगे थे। फिर तो और ज्यादा लोग आने लगे। फिर तो पहले 2-2 जोड़े मंदिर मे एक साथ चुदाई करने लगे और फिर 2 के 4 हो गए। उन चारों जोड़ों के साथ मैंने भी कई बार चुदाई की है। वो सब के सब एक दूसरे के सामने पूरे नंगे होकर चुदाई करते है और एक दूसरे की नंगी बीवी को देखकर ही उनका लंड खड़ा हो जाता है। कुछ के बच्चे नहीं भी होते तो फिर वो 2-2 या 3-3 बार आकर भी मंदिर मे चुदाई करते थे। फिर पंडित और उसकी बीवी मंदिर मे ही रहने लगे। वो दोनों नंगे ही रहते ताकि उन्हे देखकर किसी को शर्म ना आए। फिर पंडित की बीवी की जगह कई बार संगीता और उसकी माँ भी मंदिर मे जाकर नंगी रहती और फिर वो सबके सामने पंडित से चुदवा भी लेती। इस तरह फिर मंदिर मे रासलीला का प्रोग्राम चलने लगा। फिर इतना ही नहीं फिर वहाँ पर संगीता सबको एक साथ बैठाकर अलग अलग स्टाइल से चुदाई का पाठ पढ़ाने लगी और फिर वो सबके सामने पंडित से चुदवाकर भी उन सबको बताती के चुदाई कैसे करनी है। 

 

 

फिर तो सब वहाँ अपनी बीवियों की अलग अलग तरीके से चुदाई करते। जिससे उन्हे बहुत मजा आता। बच्चे की चाहत मे सब वहाँ बेशर्म होकर खूब चुदाई करते। फिर कुछ लोग इसका विरोध करने लगे तो संयोग से उनमें से कुछ के घर ऐसी अनहोनी हो गई के फिर वो माफी मांगने के लिए पंडित के पास आए और अपनी गलती सुधारने के लिए पूछने लगे के उन्हे क्या करना होगा। फिर पंडित ने हमसे आकर पूछा के वो क्या कहे उनसे। तो फिर संगीता और उसकी माँ ने कुछ सोचकर बताने के लिए कहा। फिर हम सब सोचने लगे के क्या किया जाए। फिर हमारे कहने पर पंडित ने उनसे कहा के मंदिर मे नंगे होकर पूजा करें और फिर सब औरत और मर्द चुदाई करें। लेकिन तब उनमे सभी शादीशुदा नहीं थे। तब उनमे से एक परिवार मे पति पत्नी और उनके दो बच्चे थे जिनमे एक लड़का और लड़की थे। जो की शादीशुदा नहीं थे तो फिर वो बोले के हम क्या करें तो फिर हमारे कहने पर पंडित ने उनसे कहा के वो पति पत्नी आपस मे चुदाई करें और उनके लड़का लड़की आपस मे चुदाई करेंगे। ये सुनकर वो थोड़े हैरान हुए लेकिन वो कर भी क्या सकते थे। फिर वो चारों मंदिर मे आए और फिर नंगे होकर पूजा की फिर वो चारों चुदाई करने लगे। उनके बच्चे उनकी आँखों के सामने ही एक दूसरे से चुदाई कर रहे थे। ये देखकर पहले तो उन्हे अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन फिर उन्हे भी मजा आने लगा। फिर मंदिर मे चुदाई के बाद वो सब आपस मे खुल गए तो फिर घर पर भी वो ऐसे ही चुदाई करने लगे। फिर अपने बेटे का लंड देखकर उसकी माँ रह नहीं पाई तो फिर वो अपने बेटे से चुदवाने लगी और उधर बाप भी अपनी जवान बेटी को देखकर रह नहीं पाया तो फिर वो उसकी चुदाई करने लगा। इस तरह फिर वो खुशी से रहने लगे और उनके सब संकट दूर हो गए। फिर उन्हे देखकर बाकी और भी लोग पंडित के पास आए। फिर उन्हे भी पंडित ने यही करने के लिए बताया। 

 

 

तब एक दूसरे परिवार मे पति पत्नी और उनके एक लड़का और दो लड़कियाँ थी। लड़के की शादी हो चुकी थी तो फिर उन दोनों बाप बेटे ने मिलकर अपनी बीवी की चुदाई के अलावा एक एक लड़की की और चुदाई की। जिससे उन्हे भी चुदाई मे बहुत मजा आया। फिर घर पर वो जाकर वो आदमी अपनी बहु की चुदाई करने लगा और बेटा अपनी माँ की। फिर वो दोनों लड़किया भी अपने बाप और भाई से खुलकर चुदवाने लगी। इससे उनके भी सब संकट दूर हो गए। फिर इतना ही नहीं दान दक्षिणा लेने के बहाने फिर पंडित और बीवी उनके घर जाकर भी पूजा वगैरह करने लगे। जिसमे सब नंगे रहते और फिर चुदाई करते। इसमे उन घर वालों को भी बहुत मजा आता। फिर वो पंडित हमे आकर बताता के कुछ घर की औरतों के चुत और गाँड के छेद तो काफी बड़े बड़े हो गए है और कुछ घरों मे मर्द उस औरत की ज्यादा चुदाई करते जो सबसे सुंदर होती। इस तरह फिर जब ये बात पूरे गाँव मे फैल गई तो फिर तो जो विरोध कर थे, उनके अलावा भी लोग मंदिर मे पूजा करने के लिए पंडित से कहने लगे। फिर इस बहाने वो भी अपनी घर की औरतों की चुदाई करने लगे। 

 

लेकिन अभी तो ये सिर्फ शुरुआत थी। आगे और भी बहुत कुछ होना बाकी था अभी। फिर संगीता की माँ ने संगीता ने उसकी लड़की का नामकरण करने के लिए गाँव चलने के लिए कहा तो फिर संगीता बोली के सीमा को और ले चलते है साथ मे, इस बहाने वो भी मजे कर लेगी। तो फिर मैं सीमा को लेने उसके ससुराल चला गया। तब सीमा ने मुझे वहाँ रुकने के लिए कहा तो फिर मैं एक रात के लिए वहाँ रुक गया। तब सीमा मुझसे चुदने के लिए मरी जा रही थी और मेरा भी हाल कुछ ऐसा ही था। सीमा ससुराल मे नंगी तो नहीं रह सकती थी तो फिर वो घर पर चोली घाघरा पहनने लगी थी। चोली मे से उसके बोबो के उभार काफी हद तक दिखते रहते थे। तो फिर मैंने उससे पूछा के कोई तुम्हें कुछ कहता नहीं। तो फिर सीमा ने बताया के मेरी सास तो कुछ कहती नहीं है और मेरे ससुर भी बस मुझे देखकर ही खुश होते रहते है और तुम्हारे जीजाजी तो कुछ कहते ही नहीं है चाहे मैं कुछ भी पहनूँ। फिर मैं गया तब सीमा ने एक स्पेशल टाइप की चोली पहनी थी जो की उसके बोबो से काफी छोटी थी और उसने घाघरा भी अपने पेट से काफी नीचे बांध रखा था। जिससे उसकी चुत के बाल थोड़े थोड़े दिख रहे थे। साथ मे पीछे से उसकी गाँड की दरार भी थोड़ी दिख रही थी। सीमा को ऐसे देखकर तो मैं देखता ही रह गया था। इतना ही नहीं फिर सीमा ने बताया के वो अपने घाघरे को थोड़ा और नीचे कर लेती है तब उसकी गाँड दिखने लगती और वो बस ऐसे ही घूमती रहती है। ऐसे सीमा काफी सेक्सी लगती थी। फिर मैंने सीमा से चोली की जगह ब्रा पहनने के लिए कहा तो सीमा बोली के ब्रा ज्यादा छोटी नहीं हो जाएगी। फिर मैंने कहा के पहन के देख लो। अगर तुम्हारी सास कुछ कहे तो फिर खोल देना। 

 

फिर सीमा ने ऊपर चोली की जगह सिर्फ ब्रा पहन ली। जिसमे से उसके आधे से ज्यादा बोबे दिख रहे थे। तब सीमा और भी ज्यादा सेक्सी लगने लगी थी। फिर सीमा की सास ने उसे कुछ नहीं कहा। लेकिन फिर सीमा ने सास से कह दिया के उसे ऐसे कपड़े पहनने के लिए उनका बेटा ही कहता है तो अब सास कहती भी क्या। फिर तो सीमा का ससुर भी सीमा को देखता ही रह गया। फिर रात हो गई और तब लाइट नहीं थी तो फिर सीमा मुझे, अपने ससुर और जीजाजी को खाना खिलाने लगी। सीमा की सास तब बच्चों को खिलाने लग गई तो फिर सीमा ने नीचे से अपना घाघरा भी खोल दिया और फिर वो जब हमारे पास खाना लेकर आती तो अपने सिर पर ओढ़ी हुई ओढनी से नीचे से खुद को ढक लेती। फिर वो जब थोड़ा झुकती तो उसके बोबो के निप्पल तक दिख जाते थे और बोबे थोड़े ब्रा से बाहर भी आ जाते थे। ये देखकर तो मैं बहुत ज्यादा गरम हो गया था। फिर खाना खाने के बाद मैं, सीमा का ससुर वहीं बैठकर बातें करने लगे और फिर जीजाजी छत पर चले गए थे तो फिर मैं भी छत पर चला गया। तब सीमा भी वहीं थी और वो सिर्फ ब्रा मे ही घूम रही थी। फिर सीमा ने अपनी ब्रा भी खोल दी और वो हमारे सामने नंगी ही घूमने लगी तो फिर सीमा को देखकर जीजाजी तो अपना लंड हिलाने लगे। फिर सीमा जीजाजी के पास आकर बैठ गई और उनका लंड बाहर निकाल कर सहलाने लगी और फिर जीजाजी तो मेरे सामने ही सीमा की चुदाई करने लगे। तब मैं तो और भी ज्यादा गरम हो गया। 

 

फिर जीजाजी से चुदाई के बाद सीमा मेरे पास आ गई तो फिर मैं सीमा पर चढ़ गया और उसके बदन को चूमने लगा और फिर उसे घोड़ी बनाकर चोदने लगा। तब जीजाजी भी हमे देख रहे थे। फिर जीजाजी गरम हो गए तो फिर उन्होंने भी सीमा की चुदाई की। फिर तो रात भर मैं और जीजाजी एक साथ सीमा की चुदाई करते रहे। उस रात मैंने और जीजाजी ने सीमा की चुत और गाँड मे एक साथ लंड डालकर सीमा की चुदाई की। जिसमे सीमा को बहुत मजा आया। फिर सुबह सीमा उठकर नीचे जाने लगी तो उसने तब सिर्फ ऊपर एक दुपट्टा ही ले रखा था और बाकी कुछ नही पहना था। फिर वो ऐसे ही जाकर घर का काम करने लगी। तब सास भी उठी हुई थी तो उसने सीमा को कुछ नहीं बोला। फिर थोड़ी देर बाद जब मै नीचे गया तो तब भी सास के सामने ही सीमा वैसे ही रही और सास कुछ नहीं बोली। तब मेरा लण्ड तो खड़ा हो चुका था। सीमा के ससुर और जीजाजी तो देरी से ही उठते थे तो फिर सीमा तो खुलकर घर का काम करने लगी। तब मैंने लुंगी पहनी थी तो मेरा लण्ड खड़ा होने के कारण तंबू बन गया था। फिर मै तब सीमा की सास के पास बैठकर बातें करने लगा और सीमा वहीं हमारे आसपास ही नंगी ही घूमती रही। सास थोड़ी बीमार रहती थी। उन्हें थोड़ी स्किन की प्रॉब्लम थी। उनके बदन में जलन सी होती रहती थी तो वो रात को बिना कपड़ों के ही सोती थी। ये बात मुझे सीमा ने बाद में बताई। तभी सास नंगी होने पर सीमा को कुछ नहीं कह रही थी क्योंकि तब सास खुद भी नंगी ही बैठी थी। फिर तब सीमा हमारे पास आई और फिर सास के ऊपर से मेरे सामने ही कम्बल कमर तक किय्या तो सास ऊपर से पूरी नंगी हो गई। तब फिर मै तो देखता ही रह गया। तब सास भी मुझसे ज्यादा नहीं शर्मा रही थी। फिर सास मेरे सामने सीमा की तारीफ करने लगी और कहने लगी के ये मेरा बहुत ध्यान रखती है। फिर मैंने भी कहा के हाँ ये मेरी बड़ी बहन कम और मां ज्यादा है। फिर तब मै खड़ा हुआ और सीमा के गले लग गया और फिर सीमा भी मेरे गले लग गई। 

 

तब मै और ज्यादा गर्म हो गया। फिर सीमा ने सास से पेशाब करके आने के लिए कहा। तो फिर सास कम्बल हटाकर मेरे सामने पूरी नंगी ही खड़ी हो गई और फिर पेशाब करने जाने लगी। तब तो सीमा की सास को देखकर मै देखता ही रह गया। फिर मै उठकर सीमा की सास को सहारा देने लगा तो वो बोली के मै अपने आप चली जाऊँगी। लेकिन फिर भी मै सास का एक हाथ पकड़कर उन्हें घर के पिछे की तरफ ले जाने लगा। सास वैसे तो ठीक थी बस उन्हें स्किन में जलन होती रहती थी थोड़ी थोड़ी। फिर सीमा की सास को ले जाते टाइम वो मुझसे काफी चिपक कर चल रही थी और फिर मै भी सास के बदन को सहला रहा था। फिर सास को टॉयलेट में पहुंचाने से पहले टॉयलेट के बाहर ही मेरी लुंगी खुल गई तो फिर मेरा खड़ा लण्ड देखकर सास देखती ही रह गई। फिर वो जब टॉयलेट में बैठने लगी तो फिर सास ने गलती से मेरा लण्ड पकड़ लिया और फिर मेरा लण्ड का सहारा लेकर वो नीचे बैठ गई। तब इस पर मैंने कुछ नहीं कहा और ना ही उन्होंने कोई रिएक्शन किया। फिर तब मै नंगा ही सास के आगे खड़ा रहा। फिर से ने मुझे जाने के लिए बोला भी लेकिन फिर भी मै कुछ देर वहीं पर खड़ा रहा। मेरी लुंगी नीचे पड़ने से खराब हो गई थी तो फिर मैं लुंगी को वहीं छोड़कर वापिस घर मे आ गया। सास को तब थोड़ा टाइम लगने वाला था। तब फिर मै वापिस आया तो देखा के सीमा अपना मेकअप वगैरह करके सज संवर रही है। फिर मै जाकर सीमा को पकड़ लेता हूँ और फिर उसे बेड पर लेटाकर हम चुदाई करने लगते है। 

 

फिर मै सीमा को घोड़ी बनाकर चुदाई करता हूँ और उसकी गाँड में झड़ जाता हूँ। फिर चुदाई के बाद मै नंगा ही सास के पास चला जाता हूँ तो फिर तब सास टॉयलेट से बाहर ही निकल रही होती है तो फिर मैं जाकर सास की कमर में हाथ डाल लेता हूँ और फिर सास भी मुझसे चिपक जाती है। तभी सीमा एक कपड़ा लेकर आती है और फिर मुझसे कहती है के इनकी चमड़ी पर ज्यादा देर पानी नहीं लगा रहना चाहिए। तो फिर सीमा के हाथ से कपड़ा लेकर मै सास से चिपका चिपका ही सास की गाँड साफ करने लगता हूँ। मै सास की गाँड की दरार में भी कपड़ा डालकर अच्छे से साफ करता हूँ। तब आगे से सास मुझसे चिपकी रहती है। फिर कपड़े से साफ करने के बाद अपने हाथों से सास की गाँड सहलाकर देखता हूँ और फिर सास खुद ही अपनी गाँड पर हाथ लगाकर देखती है और फिर हम घर के अंदर जाने लगते है। तब सीमा को एकदम नंगी देखकर भी सास कुछ नहीं कहती है। फिर सास मेरी तारीफ करती है और कहती है के तुम भी अपनी बहन के जैसे हो। काश ऐसी सेवा मेरा बेटा करता मेरी। फिर मैं सास से कहता हूँ के मै भी तो आपके बेटे जैसा ही हूँ। तो ये सुनकर सास मुस्कुराने लगती है और मुझे अपने गले से लगा लेती है। उधर सीमा को भी नंगी रहने में काफी मजा आ रहा था तो फिर वो तो ससुर के कमरे की तरफ सफाई करने चली जाती है और जाते जाते फिर मुझे सास की तेल मालिश करने के लिए कहकर जाती है तो फिर सास कहती है के बेटा तू रहने दे। तो पूरा तेल से भर जाएगा। फिर मैंने कहा के कोई बात नहीं। फिर मै और सास उठकर कमरे के चले जाते है और फिर बेड पर सास दूसरी चद्दर बिछा देती है और फिर मै सास को सीधा लेटाकर उनके बोबो, पेट और टांगों के बीच यानी चुत की भी मालिश करने लगता हूँ। फिर मेरी मालिश से सास को काफी आराम मिलने लगता है तो फिर वो चुपचाप अपनी मालिश करवाने लग जाती है। फिर मैं सास को उल्टा लेटाकर उनकी गाँड और उनकी गाँड की दरार में हाथ डालकर वहां भी मालिश करने लगता हूँ। तब सास मेरी मालिश का मजा लेने लगती है। फिर मै सास को अपनी गोद मे बैठाकर उनके बोबो की मालिश करने लगता हूँ और फिर उनके बोबो के निप्पल को जोर से दबा देता हूँ तो वो सिस्कारियाँ लेने लग जाती है। 

 

फिर मै सीमा की सास को अपनी तरफ मुँह करके अपनी गोद मे बैठा हूँ तो फिर वो मेरी तरफ मुँह करके बैठ जाती है और उनके बोबे मेरी छाती में लगने लगते है। फिर पीछे से मै उनकी गाँड की अच्छी तरह से मालिश करता हूँ। फिर सास गर्म हो जाती है तो उनकी चुत गीली हो जाती है। फिर सास मेरे बदन को सहलाने लगती है और फिर मै उनका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख देता हूँ तो फिर वो मेरा लण्ड सहलाने लग जाती है। फिर मैं समझ जाता हूँ के सास अब तैयार है। फिर मै सास के ऊपर आकर उनके बदन को चूमने लगता हूँ और फिर मै उनकी चुत पर लण्ड रखकर चिकना लण्ड उनकी चुत में डाल देता हूँ तो फिर वो आंखें बंद करके बस मजा लेने लगती है। फिर वो भी मेरा साथ देने लगती है और अपने पैर पूरे ऊपर की तरफ कर देती है। फिर मै जब सास को घोड़ी बनाकर पीछे से चुदाई करता हूँ तो तब सास को बहुत मजा आता है। फिर तभी सीमा कमरे में आ जाती है और हमे चुदाई करता देख मुस्कुराने लग जाती है। फिर सास सीमा को देखकर शर्माने लगती है पर मै सास की चुदाई चालू रखता हूँ। फिर सीमा भी खड़ी खड़ी अपनी चुत सहलाने लगती है। फिर वो बाहर चली जाती है और फिर मैं सास की चुत में ही झड़ जाता हूँ तो फिर हम एक दूसरे से चिपक कर लेट जाते है। फिर मैं सास के होंठो को चुसने लगता हूँ तो फिर वो भी मेरा साथ देने लगती है। 

 

फिर तब सीमा कमरे में आती है और कहती है के ससुर और जीजाजी के उठने का टाइम हो गया है तो फिर मै सीमा का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच कर लेटा लेता हूँ और फिर मै उसके होंठो को चुसने लगता हूँ तो फिर सीमा भी मेरा लण्ड सहलाने लग जाती है। ये देखकर सास मुस्कुराने लगती है। फिर सीमा कहती है के हम दोपहर को करेंगे। फिर मै घर वापिस जाने के लिए कहता हूँ तो फिर सास मुझे कुछ दिन रुकने के लिए कहती है। फिर हम तीनों उठकर कपड़े पहनने लगते है। तब मै तो लुंगी बांधकर नहाने चला जाता हूँ और फिर सास और सीमा दोनो ऊपर ब्रा पहन लेती है और सास नीचे घाघरा पहन लेती है। जिसमे वो काफी सेक्सी लगती है। उधर सीमा ऊपर ब्रा और ब्रा भी इतनी छोटी के उसके बोबो के निप्पल थोड़े थोड़े दिखते रहते है और नीचे चुन्नी जो कि एक पारदर्शी कपड़ा होता है वो बांध लेती है। जिसमे से उसका नीचे का शरीर दिखता रहता है और ऊपर सिर पर भी उसी कपड़े से अपना मुंह ढक लेती है। फिर वो तब ऐसे ससुर के पास जाती है तो वो तो देखते ही रह जाते है। फिर उधर जीजाजी भी उठकर आ जाते है। फिर सास और सीमा ससुर और जीजाजी दोनो को 2-3 दिनों के लिए किसी दूसरे गांव शादी में जाने के लिए कह देती है तो फिर वो दोनो तैयार होने लगते है। फिर ससुर तो बाहर बैठकर ही नहाने लगते है तो फिर वहीं सीमा वहीं झुक कर झाड़ू लगाने लगती हैं। जिससे कि उसके बोबे उसकी ब्रा से बाहर निकल आते है और निप्पल दिखने लगे जाते हैं। फिर वो अपने बोबो को वापिस अंदर भी नहीं करती हैं। 

 

फिर नीचे से भी सीमा ने कपड़ा ऐसे तरीके से बांध लेती हैं के उसका एक पैर पूरा नंगा ही रहता हैं। सीमा को ऐसे देखकर तो कोई भी मर्द गर्म हो जाये। फिर उधर आंगन में बने बाथरूम में सास नहाने के लिए चली जाती है। तब मै बाथरूम में नहा रहा होता हूँ तो फिर भी सास बाथरूम में घुस जाती हैं और नंगी हो जाती हैं। फिर मै सास के बदन को सहलाने लगता हूँ और फिर सास को नहाकर सिर्फ घाघरे में आने के लिए कह देता हूँ। उधर सीमा झाड़ू लगाकर अंदर आ जाती हैं तो फिर जीजाजी उसकी ब्रा खोल देते है तो वो ऊपर से नंगी हो जाती हैं और फिर वो तो वहीं सीमा की चुदाई करने लग जाते है। फिर ये देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है। फिर चुदाई के बाद सीमा बिना ब्रा के ऊपर से नंगी ही घूमने लगती हैं। फिर उधर सास नहाकर बिना ब्रा के ऊपर से बिल्कुल नंगी आ जाती हैं। फिर सास अपने बेटे से नहाने के लिए कहती हैं तो फिर वो भी अपनी मां को ऐसे देखने लगता हैं। तब फिर जीजाजी तो बाथरूम से बाहर ही नहाने लगते है तो फिर मै सास से अपना घाघरा खोलकर नंगी होने के लिए कह देता हूँ तो फिर वो मान भी जाति हैं। फिर सास अपना घाघरा खोलकर और पूरी नंगी होकर अपनी गाँड मटकाती हुई जाती हैं तो क्या नजारा होता हैं। फिर सीमा बताती हैं के सास इससे पहले भी जीजाजी के सामने नंगी हो चुकी हैं तो ये सास के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था। फिर सीमा हम सब के लिए खाना बना लेती हैं और फिर वो ब्रा पहन लेती हैं और अपने बोबे थोड़े बाहर निकाल लेती हैं और नीचे बस पैंटी पहन लेती हैं और चुन्नी से अपना मुंह ढक लेती हैं। फिर वो हमें खाना परोसती हैं तो हैं खाना कम खा रहे थे और सीमा को ज्यादा देख रहे थे। सीमा ने फिर तो अपने दोनो बोबो को पूरा ही अपनी ब्रा से बाहर निकाल लिया तो ये देखकर तो देखते ही रह गए। फिर सीमा यही नहीं रुकी फिर वो जब हम रोटियां देने आए तो उसने नीचे से पैंटी खोलकर बस चुन्नी लपेट ली जिससे उसकी गाँड और चुत एकदम साफ दिख रही थी। 

 

फिर जब सीमा दोबारा आई तो उसने अपनी ब्रा भी खोल दी थी और उसके बोबे एकदम नंगे थे। फिर ये देखकर तो जीजाजी ने जल्दी से खाना खाया और फिर वो कमरे में ले जाकर सीमा की चुदाई करने लगे। उधर ससुर भी अपना लण्ड हिलाने टॉयलेट में चले गए और फिर सास मुझे आवाज देकर एक कमरे में चली गई। फिर मै कमरे में जाकर सास की चुदाई करने लगा। फिर चुदाई के बाद जब जीजाजी और सीमा कमरे से बाहर निकले तो तब सीमा ने ऊपर सिर्फ चुन्नी ही ले रखी थी बाकी वो नीचे से पूरी नंगी थी। फिर मैं और सास भी कमरे से बाहर निकले तो सास ने फिर अपने बेटे से तैयार होने के लिए कहा। उधर ससुर तो तैयार होकर कमरे में बैठे थे। फिर सीमा जानबूझकर ससुर के कमरे में जाकर उन्हें अपने बदन के दर्शन करवा आई। तो ससुर तो देखते ही रह गए। फिर जीजाजी कमरे में कपड़े पहन रहे थे तो तब फिर मै भी कमरे में चला गया और नंगा हो गया। फिर वहां सीमा और सास भी आकर खड़ी हो गई। लेकिन फिर भी मै नंगा ही रह जीजाजी के सामने। फिर तब जीजाजी तो सीमा से मस्ती करने लगे तो फिर उधर सास भी मेरे आगे आकर खड़ी हो गई तो फिर मै भी उनकी गाँड की दरार में लण्ड रगड़ने लगा। फिर सास ने अपने बेटे से जल्दी से तैयार होकर जाने के लिए कहा। तो फिर सास अपने बेटे के पास जाकर खड़ी हो गई और फिर मैं सीमा के पास जाकर उसके बोबो को दबाने लगा तो फिर जीजाजी भी अपने माँ के बोबे दबाने लगे। 

 

इतना ही नहीं फिर फिर सास ने तो अपने बेटे का लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। उधर फिर सीमा जाकर बेड पर घोड़ी बन जाती हैं तो फिर जीजाजी सीमा की चुदाई करने लगते हैं। तब मै और सीमा की सास उनके पीछे खड़े होते हैं तो फिर मै सास का एक पैर उठाकर खड़े खड़े ही उनकी चूत में लण्ड डालकर चुदाई करने लग जाता हूँ। लेकिन फिर सास सीमा के साइड में जाकर लेट जाती हैं तो फिर मै भी सास के ऊपर जाकर लेट जाता हूँ और लण्ड उनकी चुत में डाल देता हूँ। फिर इतना ही नहीं सास फिर अपने बेटे के सामने ही घोड़ी बन जाती हैं तो फिर पीछे से मै भी सास की चुदाई करने लगता हूँ। तब सास अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगती हैं और फिर जीजाजी अपनी मां की गाँड सहलाने लगते है। फिर जीजाजी झड़ जाते है तो अपने पानी से सीमा की गाँड भर देते है। उधर फिर मै भी सास की चुत मै पानी छोड़ देता हूँ। फिर सीमा और सास चुदकर खुश होती हैं और फिर वो हमारे गले लग जाती हैं। फिर ससुर आंगन में आकर जीजाजी को आवाज देने लगते हैं तो फिर सीमा सिर्फ चुन्नी अपने सिर पर लेकर उनके सामने चली जाती हैं और उन्हें कुछ देर रुकने के लिए कहती हैं तो फिर ससुर वहीं आंगन में ही बैठ जाते हैं। फिर शरारती सीमा आंगन में बैठे अपने ससुर के सामने नीचे झुक जाती है। तब ससुर के मुंह के बिल्कुल सामने और थोड़ी नजदीक सीमा की गाँड होती है। 

 

कहानी आगे जारी रहेगी...

 

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