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कमसीन बहन की चुदाई - 3  अब आगे...

 

शरीर एकदम ढीला पड़ चुका था नेहा का,

लेकिन जब विक्की के मुँह की घोड़ी से उतरकर वो उसके लंड के करीब आई तो उसकी महक ने जैसे उसके ढीले शरीर में जान सी फूँक दी...उसमें से निकल रही सोंधी खुश्बू ने उसपर ठीक वैसा ही असर किया जैसा उसकी चूत की गंध ने विक्की पर किया था...

 

नेहा का अंग-2 फड़क उठा अपने भाई के लंड की खुश्बू सूँघकर..

 

उसने मुस्कुराते हुए अपने हाथों में उसके लंड को पकड़ा और अपने चेहरे पर रगड़ डाला..

 

उफ़फ्फ़.....

क्या फीलिंग थी...

ऐसा लग रहा था जैसे चिकन सलामी का पूरा रोल गर्म करके उसने चेहरे से लगा लिया हो.

 

 

 

नेहा की तो आँखे ही बंद सी होने लगी इस नशीली चीज़ को सूँघकर..

उसे ऐसा लग रहा था की उसके भाई के लॅंड ने तो उसे नशेड़ी बना देना है, क्योंकि आज के बाद तो वो हर रात ये नशा लेने वाली थी.

 

उत्तेजना के मारे उसकी लार निकल रही थी मुँह से जो सीधा विक्की के टट्टों पर जाकर गिर रही थी...

उसने अपने दूसरे हाथ से उसे तेल की तरह वहाँ पर रगड़ डाला जिससे वो बॉल्स चमक उठी..

और यही हाल अब उसे विक्की के लंड का भी करना था, अपने मुँह में लेजाकर सीधा अपनी लार से भिगो कर उसे चमकाने का काम.

 

उसने धीरे से अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके लंड को चाटना शुरू कर दिया...

जैसे कोई सॉफ्टी चाट्ता है, ठीक वैसे ही..

और फिर जब वो उसे चाटते हुए उपर तक पहुँची तो उसके लंड के टोपे को अपने होंठो और दांतो के बीच वाले हिस्से में फँसाया और ज़ोर से साँस अंदर लेते हुए उसके लंड के सिरे पर चमक रही बूँद को सडप करके निगल गयी..

 

विक्की का शरीर कमान की तरह बेड पर तिरछा हो गया..

और उसने खुद ही ज़ोर लगाकर अपना लंड उसके मुँह में पूरा धकेल दिया...

 

नेहा भी उसके लंड के पूरे मज़े लेना चाहती थी, उसने अपने होंठो और दांतो की ब्रेक ऐसी लगा रखी थी उसके लंड पर की वो भी खिसक-2 कर ही अंदर गया...

और जब पूरा लंड घुस गया तो विक्की को ऐसा फील हुआ जैसे वो हवा में तेर रहा है...

 

 

 

नेहा का भी मुँह अपने भाई के 7 इंची लंड से पूरा भर चुका था...

लंबाई तो एक तरफ थी, उसकी मोटाई ने उसके होंठो को फेलने पर मजबूर कर दिया था,

ऐसा लग रहा था की एक इंच भी और अंदर लिया तो उसके होंठ दोनो तरफ से फट जाएँगे..

 

पर मज़ा भी उतना ही मिल रहा था उसे...

इसलिए लंड को अंदर लेने के तुरंत बाद ही उसने अपनी जीभ से उसके लंड को तेल पिलाना शुरू कर दिया...

 

''आआआआआआआआआअहह नहााआआआआआआआआअ........ मेरी ज़ाआाआआआआआअन्न्‍नननणणन् उम्म्म्मममममममममममममममम..... मजाआाआआआ आआआआआआआआआ गय्ाआआआआआआआअ''

 

नेहा ने लंड को बाहर निकाला और बोली : "भाई, ये मज़ा तो अब रोज़ दिया करूँगी आपको....देख लेना..''

 

इतना कहकर वो फिर से उसके लंड को निगल गयी और चूसने लगी.

 

 

 

नेहा की चूत में बुरी तरह से खुजली हो रही थी....

वो विक्की की दाँयी टाँग पर चढ़ गयी, ऐसा करने से उसकी नुकीली चुचियाँ विक्की की जाँघो पर कील की तरह चुभ रही थी और उसकी चूत ठीक विक्की के पैर के पंजे के उपर थी,

विक्की ने अपने पैर की उंगलियो से उसकी गीली चूत को सहलाना शुरू कर दिया...

 

नेहा की रसीली गांड थिरक उठी जैसे ही विक्की के पैर का अंगूठा उसकी चूत पर लगा तो...

गीली तो वो पहले से ही थी, विक्की का अंगूठा उसे इस वक़्त एक छोटे लंड जैसा ही लग रहा था,

उसने थोड़ी सी गांड इधर उधर की और जैसे ही अंगूठा उसकी चूत के बीचो बीच सेट हुआ वो धम्म से उसपर चूत पटककर उसे अंदर निगल गयी...

 

ये तो शुक्र था की अंगूठे का साइज़ सिर्फ़ 2 इंच था वरना वो नेहा की चूत का कुँवारापन अभी हर लेता..

 

पर नेहा को मज़ा बहुत आ रहा था उस छोटे से लंड से अपनी चूत मरवाने का..

 

ये तो वही बात हुई की मज़ा भी ले लिया और किसी को पता भी नही चला...

यानी चूत में लंड जैसी चीज भी आ गयी और वो फटी भी नही..

 

अब एक साथ नेहा का मुँह और गांड एक ही लय में उपर नीचे हो रहे थे....

मुँह नीचे जाता तो गांड उपर आती, गांड नीचे जाती तो मुँह उपर आता..

 

विक्की ने शायद आज तक ऐसी उत्तेजना कभी महसूस नही की थी..

उसके निचले बदन पर उसकी बहन का नंगा शरीर जो धमाल मचा रहा था वो कबीले तारीफ था..

 

उसके पैर की सारी उंगलिया नेहा की चूत से निकल रहे गन्ने के रस से भीग चुकी थी...

उसके खुद के लंड के आस पास का सारा हिस्सा नेहा की लार से सना पड़ा था...

चेहरा वो पहले ही अपनी चूत के पानी से रंगीन कर चुकी थी विक्की का..

आज तो ऐसे लग रहा था की नेहा अपने मुँह और चूत से निकल रहे गीलेपन से उसे नहला कर रहेगी.

 

नेहा की चूत में हो रही खुजली अचानक से बढ़ने लग गयी थी,

चूत में उसने उंगली भी की थी पहले कई बार, पर वो भी शायद इसी हद तक ही जा पाई थी जहाँ तक आज विक्की के पैर का अंगूठा जा रहा था...

 

अब उसे खुजली हो रही थी और अंदर तक कुछ महसूस करने की और इसके लिए लंड से अच्छा कुछ और हो ही नहीं सकता था...

 

ये सोचते ही उसकी आँखो में वासना उतर आई...

अपने ही भाई के लंड को आज चूत में लेने की सोच रही थी वो...

सोचती भी क्यों नही...

इतना कुछ जो हो चुका था उनके बीच...

अब तो सिर्फ़ चुदाई ही बाकी रह गयी थी....

आज वो भी कर ही ली जाए...

 

इस विचार के साथ ही वो किसी नागिन की तरह खिसक कर उसके शरीर पर उपर की तरफ फिसलने लगी..

 

विक्की का लंड लगभग झड़ने के बिल्कुल करीब था...

ऐसे में जब नेहा ने उसके लंड को बाहर निकाला तो उसने भी चौंकते हुए आँखे खोली पर नेहा को अपनी तरफ घूरते देखकर और उसकी आँखो में छुपी वासना के डोरों को पहचानकर उसे समझते देर नही लगी की वो क्या चाहती है...

 

चाहता तो वो भी यही था पर पहले ही दिन वो ऐसा कुछ करके अपने आने वाले दिनों के मज़े को खराब नही करना चाहता था.

 

पर नेहा अब डिसाईड कर चुकी थी...

पलक झपकते ही वो उसके उपर आ पहुँची और अपने गीले मुँह से उसके होंठो को दबोच कर जोरों से स्मूच करने लगी.

 

 

 

विक्की का तमतमाता हुआ लंड उसने अपनी चूत पर रख कर उसे अंदर लेना शुरू कर दिया...

और उसी के साथ ही उसके चेहरे पर दर्द की एक लहर उठती चली गयी...

अब उस बेचारी को ये कौन समझाए की पैर के अंगूठे में और लंड नुमा खूँटे में ज़मीन आसमान का फ़र्क होता है...

वो अंगूठा तो उसकी चूत में 2 इंच अंदर तक चला गया था पर ये निगोडा 7 इंची लंड तो 1 इंच पर ही रुक सा गया..

नेहा की हिम्मत नही हो रही थी अपनी गांड को पटककर नीचे करने की जैसा की उसने अंगूठा अंदर लेते वक़्त किया था...

अब उसे सच में अपनी चूत के फटने का डर सता रहा था...

 

उधर विक्की का भी बुरा हाल था,

एक तो पहले ही वो झड़ने के करीब था जब नेहा ने उसके लंड को मुँह से निकाल बाहर किया था उपर से अब इतनी टाइट चूत में उसका लंड आकर फँसा हुआ था की उसके लंड से बर्दाश्त करना मुश्किल सा हो रहा था...

अब तो उसके सामने 1 ही रास्ता था की उसकी कमर को पकड़े और नीचे से धक्का मारकर अपने लंड की मिसाईल उसकी चूत के अंतरिक्ष में दाखिल कर दे...

 

पर अगले ही पल उसे इस बात का भी एहसास हो गया की वो इस वक़्त कहाँ पर है,

पहली चूत चुदाई मतलब ढेर सारी चीख पुकार और खून ख़राबा...

और इस वक़्त घर में होते हुए ये सब करना ख़तरे से खाली नही था..

इसलिए उसने ये विचार उसी वक़्त त्याग दिया..

 

पर लंड नही मान रहा था उसका...

और ना ही उस चूत के मुहाने से बाहर आने को तैयार था वो..

इसलिए समय की माँग के अनुसार उसने उसी एक इंच की जगह पर अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया...

 

अब एक तरह से नेहा का शरीर हवा में लटक रहा था और विक्की का लंड उसकी चूत में आगे की तरफ फँसा हुआ सिर्फ़ हल्के फुल्के झटके ही मार रहा था...

 

 

 

वैसे तो इन छोटे-मोटे झटकों से कुछ नही होना था पर विक्की का लंड इस वक़्त अपने आख़िरी पड़ाव पर था,

इसलिए अपने ऑर्गॅज़म तक पहुँचने में उसे थोड़ी भी देर नही लगी और उसके लंड से ताबड़तोड़ सफेद रंग के गोले निकलकर नेहा की चूत का शृंगार करने लगे..

 

ऐसा करते हुए उसने ख़ास तौर से ध्यान रखा की उसके लंड की पिचकारियाँ सिर्फ़ चूत के बाहरी हिस्से पर ही टक्कर मारें, अंदर की तरफ नही..

 

सारा रस निकल जाने के बाद विक्की का लंड थके हुए सैनिक की तरह वहीं ढेर हो गया...

और उसके उपर नेहा की चूत भी आकर धराशायी हो गयी..

 

दोनो के होंठ एक बार फिर से एक दूसरे से आ मिले...

नेहा को अपने भाई का केयरिंग करना काफ़ी पसंद आया,

और कोई होता तो इस वक़्त वो अपनी चूत को पकड़कर सुबक रही होती,

पर उसके भाई ने कितनी अक्लमंदी से इस स्थिति को संभाला था...

आज उसे सच में अपने भाई से प्यार हो गया था..

 

पर आने वाले दिनों में ये प्यार और केयरिंग कहाँ तक रहने वाली थी ये वो भी जानती थी और विक्की भी...

और आज के लिए उन दोनो के बीच का वो परदा तो गिर ही चुका था जिसके बाद अब उन्हे एक दूसरे से किसी भी तरह की कोई शर्म नही रह गयी थी..बस अपने इस प्यार को कैसे आगे बढ़ाना था ये उन्हे सोच समझकर डिसाईड करना था.

 

पर जितना आसान वो अपनी आने वाली लाइफ को सोच रहे थे उतनी आसान थी नही .....

आने वाले दिनों में लाइफ का एक जबरदस्त ट्विस्ट उनका इंतजार कर रहा था.

 

अगले दिन स्कूल में जब दोनो सहेलियाँ मिली तो वो काफ़ी खुश थी...

 

दोनो के पास अपनी-2 वजह थी खुश होने की...

पर कारण एक ही था..

विक्की

 

दोनो की मचल रही जवानी को विक्की ने जिस अंदाज से अपने प्यार से सींचा था, उसके बाद तो दोनो का यौवन पकी फसल की तरह लहलहाने लगा था...

जवानियाँ बेशक कच्ची थी दोनो की

पर इरादे पक्के थे विक्की के लंड से चुदने के

और उसे ही सोच-सोचकर दोनो अंदर ही अंदर खुश हो रही थी..

 

मंजू के पेट के अंदर तो जैसे बहुत बड़ी बात हिचकोले सी खा रही थी....

जिसे बाहर निकालना बहुत ज़रूरी था..

 

आख़िरकार उससे सहन नही हुआ और उसने नेहा को एक कोने में लेजाकर अपने दिल की बात बतानी शुरू की

 

मंजू : "यार....समझ नही आ रहा की ये बात कैसे बताऊँ ...पर बात ही कुछ ऐसी है की तुझसे छुपा भी नही सकती...''

 

नेहा समझ तो गयी थी की वो कल शाम वाली बात उसे बताना चाह रही थी जब विक्की उसे घर छोड़ने गया था...

जरूर कुछ ख़ास हुआ था उन दोनो के बीच.

 

और अचानक मंजू ने एक बम्ब सा फोड़ दिया उसके सिर पर...

 

''मैं तेरे भाई से प्यार करने लगी हूँ नेहा....सच्चा वाला प्यार...''

 

ये सुनते ही नेहा के सिर पर जैसे बिजली सी गिर गयी....

ये बात तो वो भी जानती थी की मंजू उसके भाई को पसंद करती है..

पर ये बात 'सच्चे प्यार ' तक पहुँच जाएगी ये उसने सोचा भी नही था...

और वैसे भी जब से उसे मंजू के मंसूबो का अंदाज़ा हुआ था उसके खुद के मन में अपने भाई के लिए प्यार ने जन्म ले लिया था...क्योंकि उसके हिसाब से तो अपने भाई पर उसका खुद का पहले हक़ बनता था..

 

नेहा के चेहरे को देखकर मंजू के चेहरे से भी हँसी गायब हो गयी...

उसे तो लगा था की वो खुश होगी...

पर उसने तो बुरा सा मुँह बना लिया था जैसे उसने नेहा के भाई पर नही उसके बाय्फ्रेंड पर डाका डाल दिया हो..

 

मंजू : "क्या हुआ नेहा....तुझे खुशी नही हुई...''

 

नेहा : "खुशी होनी होती तो वो चेहरे पर ही दिख जाती...और उस दिन मेरे और भाई के बारे में तुझे जब पता चल ही चुका है तो उसके बाद भी तेरी इतनी हिम्मत कैसे हुई की मेरे भाई से प्यार करे ...''

 

उसका गुस्से वाला रूप देखकर मंजू की समझ में भी नही आया की ये ऐसा बिहेव क्यों कर रही है...

वो शायद उस दिन की बात याद दिला रही थी जो नेहा ने अपने भाई के साथ हुई घटना के बारे में उसे बताया था...

और कुछ दिन बाद पुराने किले पर भी नेहा ने जिस बेबाकी से अपने भाई के सामने अपने कपड़े उतारे थे और तीनो ने मिलकर जो मजे लिए थे, वो उसे भी याद दिलाने की कोशिश कर रही थी..

 

मंजू : "हाँ ....वो सब मुझे याद है और इस बात से मुझे कोई फ़र्क भी नही पड़ता नेहा...भले ही वो तेरा भाई है फिर भी तुम दोनो ने जो किया वो मेरे लिए कोई मायने नही रखता...इनफेक्ट आगे भी विक्की और तुम्हारे बीच अगर कुछ होता है तो मुझे कोई प्राब्लम नही है...मैं तो बस तुझे अपने दिल की बात बता रही हूँ की मुझे तेरे भाई से प्यार हो गया है...और शायद वो भी मुझे प्यार करता है...''

 

नेहा : "और अगर ये बात मैं भी कहूँ की मुझे भी अपने भाई से प्यार है तो...''

 

मंजू : "मतलब ??''

 

नेहा : "मतलब वही जो तू समझ रही है....'सच्चा वाला प्यार ' काइंड ऑफ''

 

अब जिसके सिर पर बिजली गिरी वो मंजू थी...

 

उसका मुँह खुला का खुला रह गया...

ये क्या बकवास कर रही थी नेहा...

कोई भला अपने ही भाई से कैसे प्यार कर सकता है...

माना की दोनो की उम्र ऐसी है की अच्छे से अच्छा इंसान बहक जाए और तोड़ा बहुत दोनो बहक भी चुके थे , उसके बावजूद मंजू को उनके रिश्ते से कोई परेशानी नही थी...

पर ये 'सच्चे प्यार ' वाला एंगल उन दोनो के बीच कैसे आ गया...

ऐसा तो कहीं नही होता...

 

पर वो उस से लड़ भी तो नही सकती थी ...

एक तो वो उसके बचपन की सहेली और उपर से अब उसके भाई से उसे प्यार भी हो गया था तो वो नेहा को नाराज़ नही करना चाहती थी.

 

और नेहा की ज़िद्द का उसे भी पता था,

उसने अगर कुछ ठान लिया तो वो उसे किए बिना नही रहने वाली थी,

फिर चाहे अपनी जिद्द के लिए अपने खुद के भाई से चुदाई ही क्यों ना करवानी पड़े.

 

चुदाई का ख्याल आते ही उसके दिमाग़ में एक विचार कौंधा

 

हो सकता है जिसे नेहा प्यार समझ रही है वो सिर्फ़ अपने भाई से चुदाई करवाने का एक ज़रिया हो....

दोनो सहेलियां बचपन से ही एक दूसरे की रग-2 से वाकिफ़ थी...

ऐसे में मंजू अगर नेहा की जगह होती तो शायद वो भी यही कर रही होती, अपने ही भाई से प्यार का इज़हार...

फिर चाहे उस इज़हार के पीछे चुदाई ही क्यों ना छिपी हो...

 

फिर मंजू ने सोचा, देखा जाए तो वो भी तो यही चाहती है विक्की से,

बस वो उसकी सग़ी बहन नही है इसलिए प्यार नाम का इस्तेमाल कर सकती है वो..

 

कुल मिलाकर मंजू की समझ में ये परिस्थिति आ चुकी थी...

पर शायद नेहा अभी ये सब समझने की हालत में नही थी...

उसे तो बस यही लग रहा था की भाई उसका है तो सच्चा प्यार भी वही करेगी.

 

खैर, नेहा को इस वक़्त कुछ भी समझाना मुश्किल था इसलिए मंजू की ने ही हथियार डाल दिए, पर अंदर ही अंदर उसे भी पता था की आने वाले दिनों में नेहा का बर्ताव उसके प्रति कैसे होने वाला है...

ख़ासकर अब क्योंकि उसने उसके भाई के लिए अपने प्यार का इज़हार जो कर दिया था.

 

माहौल को ठंडा करने के लिए उसने नेहा से कहा : "चल छोड़ ये सब बातें , तुझे मेरे साथ आज एक शादी में चलना है रात को....''

 

नेहा को बचपन से बस एक ही शौंक था, सजने सँवारने का...

और शादी पर ये काम सबसे बढ़िया तरीके से हो पाता था..

 

शादी पर जाने की बात सुनकर, वो सब कुछ भूलकर, ऐसे चाहक उठी जैसे अभी कुछ देर पहले उनके बीच कुछ हुआ ही नही था..

 

नेहा : "शादी...वॉव ...पर किसकी....तेरे मम्मी पापा नही जाएँगे क्या..''

 

मंजू : "वो भी जाएँगे...मेरी माँ की मौसेरी बहन है, उसकी लड़की की शादी है...सबको बुलाया है...तू भी चल, मैं माँ से बात कर लूँगी...''

 

नेहा बड़ी खुश हुई....

अब उसके दिलो दिमाग़ से विक्की वाली बात निकल चुकी थी..

उसे तो अब ये चिंता हो रही थी की रात को वो पहनेगी क्या.

 

स्कूल की छुट्टी के बाद हमेशा की तरह विक्की उनका बाहर इंतजार कर रहा था..

पर इस बार मंजू ने जान बूझकर दौड़कर बाइक पर बैठने की जल्दी नही दिखाई...

वहीं दूसरी तरफ नेहा हिरनी की तरह उछलती हुई गयी और विक्की के पीछे चिपककर बैठ गयी...

मंजू को भागता ना देखकर विक्की को हैरानी ज़रूर हुई पर मंजू ने आँखो के इशारे से उसे चुप रहने को कहा,

विक्की समझ गया की ज़रूर दोनो के बीच कोई बात हुई है.

 

उसने भी चुप रहना सही समझा और दोनो को बिठा कर घर की तरफ चल दिया...

बाइक पर बैठते ही नेहा ने अपनी नन्ही छातियाँ विक्की की पीठ में गाड़ दी और अपने दोनो हाथों से उसकी छाती को ऐसे पकड़ लिया मानो वो उसकी प्रेमिका हो...

विक्की ने भी उसके हाथ पर हाथ रखकर उसे सहलाया, ये देखकर उसकी छातियाँ और बाहर निकल आई और विक्की को अच्छे से मसाज देने लगी.

 

वहीं दूसरी तरफ मंजू के दिमाग़ में सब प्लानिंग चल रही थी....

उसे कैसे विक्की से मज़े लेने है, कैसे नेहा को पटाकर रखना है,

ये सब उसके शातिर दिमाग़ में चल रहा था..

 

रास्ते में दोनों को आइसक्रीम खिलाकर वो घर की तरफ चल दिया , कुछ ही देर में नेहा का घर आ गया और वो बेमन से नीचे उतर गयी...

अब आगे विक्की ने मंजू को छोड़ने उसके घर जाना था, जो कुछ ही दूर था...

नेहा जानती थी की ऐसे मौके को पिंकी हाथ से जाने नही देगी, पर वो कुछ नही कर सकती थी...

बेचारी थके कदमो से अपने घर के अंदर आ गयी..

 

कुछ दूर आगे चलते ही मंजू ने उसी अंदाज से विक्की को पकड़ लिया जैसे कुछ देर पहले नेहा ने जकड़ा हुआ था उसे...

और अपने रसीले होंठो से उसके कान को टच करते हुए बोली : "मुझे तुम्हे किस्स करना है...अभी...''

 

ये एक ऐसी लाइन थी जिसे सुनने के लिए लड़के मरे जातें है...

उपर से इतनी हॉट लड़की जब खुद पहल करे तो उसका मज़ा दुगना हो जाता है...

विक्की के मन में भी सुबह से यही चल रहा था, और उसने तो जगह भी चुन ली थी,

इसलिए बिना कुछ कहे उसने बाइक को एक सुनसान सी जगह की तरफ मोड़ लिया...

ये एक टीला सा था, जहाँ उपर तक बाइक जा सकती थी, और उपर से ही दूर से कोई भी आता - जाता दिखाई भी दे सकता था..

 

उपर पहुँचते ही विक्की ने बाइक एक कोने में लगाई और एक मोटे से पेड़ के तने के पीछे मंजू को सटाकर खड़ा किया और उसके होंठो पर टूट सा पड़ा...

 

एक तूफान सा छिड़ गया दोनो के बीच,

एक जंग सी होने लगी दोनो के होंठो में ..

और दोनो ही वो जंग जीतना चाहते थे..

विक्की के हाथ उसके बूब्स पर थे...
वो उन्हे जोरों से मसल रहा था...
 
मंजू भी चाहती थी की विक्की उन्हे चूस डाले...अपने होंठ लगाकर उसके निप्पल्स को निचोड़ डाले.
 
मंजू ने एक ही झटके में अपनी शर्ट के बटन खोले और उसे निकाल फेंका, नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी, घने पेड़ के नीचे वो विक्की के सामने टॉपलेस खड़ी थी, उसके नन्हे बूब्स और उनपर लगे कड़क निप्पल्स विक्की को अपने पास बुला रहे थे
 
विक्की ने उसके बूब्स को पकड़कर होले से दबाना शुरू कर दिया और अपने होंठों से उसकी गर्दन से लेकर नीचे तक का सफर चाटते हुए तय करना शुरू कर दिया
 
 
 
पर जैसे ही विक्की ने अपना मुंह नीचे करके उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसना चाहा , दूर से कुछ बच्चे उन्हे उपर टीले की तरफ आते दिखाई दिए...
ये जामुन का मौसम था, और वो जिस पेड़ के नीचे खड़े थे वो जामुन से लदा पड़ा था...
उन दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा और वहाँ से जाने में ही भलाई समझी....
मंजू ने जल्दी से अपनी शर्ट पहन ली
शुक्र था की उन बच्चों में से कोई भी उन दोनो को नही जानता था, वरना जिस अंदाज से उन्हे वापिस जाते हुए बच्चे उन्हें घूर रहे थे वो पक्का वापिस जाकर उनकी चुगलखोरी कर देते..
 
रास्ते में मंजू ने विक्की को रात की शादी के बारे में बताया और ये भी कहा की नेहा भी आ रही है...
हो सके तो वो भी किसी तरह से वहां आ जाए ताकि बाकी का बचा हुआ काम वहां निपटाया जा सके.
 
आग दोनो में इतनी लगी हुई थी की विक्की ने बिना कुछ सोचे समझे हां कर दी...
 
अब तो बस सभी को रात की शादी का इंतजार था..
 

 

 

कहानी  जारी रहेगी...

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