कामवासना डॉट नेट

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कमसीन बहन की चुदाई -1  अब आगे...

 

विक्की तो हर पिक के बाद उसे ऐसे प्रोत्साहित कर रहा था जैसे अगली सूपरमॉडल वही बनेगी इंडिया की। 

विक्की : "वाहह......क्या बात है...शाबाश.... ऐसे ही..... हां थोड़ा सा नीचे झुक.... चेहरा केमरे की तरफ... आइ कॉंटॅक्ट बना केमरे से.... शाबाश... ऐसे ही ...पाउट कर..... होंठो को दांतो से दबा.... थोड़ा सा सैक्सी ... अर्रे नही यार....ऐसे नही....''

 

पोज़ लेते-2 उसने झुंझलाने का नाटक किया...

 

उसने नेहा को अपने पास बिठाया और सारी पिक्स एक-2 करके दिखाई..

 

विक्की ने नेहा को समझाया कि पिक्स तो अच्छी थी पर वो अपनी बॉडी को सही से उभार नही रही थी...

 

विक्की : "देख नेहा, मॉडेल बनने के लिए तुझे अपनी बॉडी को अच्छे से बेझिझक दिखाना होगा....जैसे ये देख, मेरी पिक्स में था....''

 

नेहा ने भी नोट किया की उसके भाई मे फोटो खिंचवाते हुए कितना कॉन्फिडेन्स था...

 

नेहा : "हां भाई....आप सही कह रहे हो....आई थिंक मुझे थोड़ा टाइम लगेगा ये सब सीखने में ...''

 

इतना कहकर वो मुस्कुरा दी..

 

विक्की ने भी उसकी मोटी जाँघो को निहारते हुए मन ही मन में कहा 'मेरे साथ रहेगी तो ज़्यादा टाइम नही लगेगा....'

 

नेहा बेचारी नही जानती थी की विक्की के मन में क्या चल रहा है। 

 

उसके बाद विक्की ने उसकी एक भी पिक नही ली....

शायद वो उसे बताना चाहता था की अगली फोटोस के लिए तो अभी सही से तैयार नही है..

 

नीचे जाने से पहले नेहा ने एक बार फिर से विक्की की टी शर्ट उसी के सामने उतारी और अपने कपड़े पहन कर नीचे चली गयी...

पर वो ये नही जान पाई की विक्की ने फ्लेश ऑफ करके चुपके से उसके नंगेपन को अपने केमरे में समेट लिया था जिसे वो पूरी रात मुठ मारते हुए एकटक देखता रहा और अपनी आगे की प्लानिंग करता रहा.

 

अगली दिन उसने एक अच्छा सा प्लान बनाया और कैमरा और नेहा के कुछ कपड़े साथ में लेकर नेहा को स्कूल से लेने के लिए निकल पड़ा..

 

हमेशा की तरह वो दोनो कमसिन कालियां स्कूल की छुट्टी होते ही भागती हुई बाहर निकली ताकि रोज की तरह चॉकलेट आइस्क्रीम जीतने और खाने को मिले..

और आज नेहा आगे निकली..

शायद कल की हार और रात को अपने भाई से मिली स्पेशल अटेन्शन का असर था की वो उसके पास पहले पहुँची...

 

भागती हुई नेहा को अपनी बाहो में संभालते हुए विक्की की बाजू उसके बूब्स से टच कर गयी.....

ये नेहा के लिए तो आम सी बात थी पर विक्की अपनी बाजू को उसके मुम्मे पर काफ़ी देर तक रगड़ता रहा...

इस बार नेहा जीती थी इसलिए वो विक्की के पीछे बैठने वाली थी...

 

मंजू बेचारी का चेहरा बयान कर रहा था की उसके दिल पर क्या बीत रही है आज हारने के बाद...

अब ये आइस्क्रीम खोने का गम था या विक्की के पीछे बैठकर अपने मुम्मे ना रगड़ने की झुंझलाहट,

ये तो वही जाने पर उसका चेहरा देखते ही बनता था.

 

आइस्क्रीम खाते हुए नेहा बोली : "भैय्या , आज मंजू हमारे घर ही रहेगी शाम तक, खाना भी वहीं खाएगी...इसके मम्मी पापा किसी काम से शहर से बाहर गये है....''

 

विक्की ने जो प्लान बना रखा था उसमे मंजू तो शामिल थी ही नही...

पर चतुर लोगो की यही तो पहचान होती है, हालात के अनुसार वो अपना प्लान बदल भी देते है...

 

विक्की ने जल्द से दूसरा प्लान बनाया और बोला : "चलो , ये तो अच्छा है, यानी मंजू भी आज हमारे साथ शूटिंग के लिए चल सकती है....''

 

शूटिंग वर्ड ही ऐसा था की नेहा के चेहरे का नूर एकदम से बढ़ गया....

मंजू भी हैरानी भारी नज़रों से उन दोनो को देख रही थी की मुझे भी तो बताओ, आख़िर ये चक्कर क्या है शूटिंग का...

 

मंजू के चेहरे के भाव देखकर नेहा ने जल्दी से उसे कल रात का सारा किस्सा सुना डाला...

ये भी बताया की उसने भी फोटो खिंचवाई थी...और विक्की की फोटो खींची भी थी...

 

ये सुनकर उसके अंदर की कुलबुलाहट भी सॉफ दिखाई देने लग गयी....

अपनी फोटो खिंचवाना भला किस लड़की को पसंद नही होता और वो भी DSLR कैमरे से...

 

इसलिए उसने तुरंत साथ चलने के लिए हाँ कर दी....

भला वो ऐसी शूटिंग कैसे मिस कर दे...

 

विक्की का पहले तो प्लान यही था की मंजू को उसके घर छोड़कर नेहा के साथ दूर किसी खेत या ऐसी जगह पर जाकर पिक्स खींचे जहा फोटो अच्छी आए और उन्हें देखने वाला भी कोई ना हो ताकि वो उसके रसीले जिस्म का आनंद सही से ले पाए, पर मंजू के आ जाने के बाद प्लान में थोड़ा बहुत बदलाव करना पड़ा था, जो विक्की के लिए बहुत आसान सा था, और मंजू के आ जाने के बाद तो प्लान और भी अच्छा बना लिया था उसने...

 

वो उन दोनो को लेकर अपने शहर की बाउन्ड्री पर बने एक पुराने से किले पर ले आया...

वहाँ अक्सर शाम के समय युगल प्रेमी प्रेमिका आकर चूमा चाटी किया करते थे, पर इस वक़्त दिन का समय था इसलिए वहां तो कुत्ता भी नही भोंक रहा था...

एकदम सुनसान जगह थी वो, उनकी शूटिंग के लिए..

और बाकी सब काम के लिए भी.

 

दोनो सहेलियां शूटिंग के नाम से इतनी एक्साईटिड थी की उन्होने इतनी दूर आने का और ऐसी जगह पर फोटो खिंचवाने का विरोध भी नही किया...

 

अंदर जाते ही विक्की ने कैमरा निकालकर नेहा को दिया जो बड़ी शान से उसके फंक्शंस का इस्तेमाल करते हुए अपने भाई की फोटो खींचने लगी। 

 

आज विक्की पहले से ही शेव करके, नयी जीन्स और वाइट शर्ट पहनकर किसी हीरो जैसा चिकना बनकर आया था...

साथ में उसने ब्लैक कलर का चश्मा भी डाल लिया, ऐसा करके वो सच में किसी हीरो से कम नही लग रहा था..

 

मंजू तो उसे देखकर मन ही मन खुश हो रही थी,

उसे शायद अपनी सहेली के भाई की तरफ एक आकर्षण का एहसास हो रहा था...

होता भी क्यों नही, कल उसके पीछे बैठकर जो एहसास उसे मिला था वो पूरी रात उसे याद करती रही थी..

 

वो तीनो उस किले के अंदर गये और उपर खड़े होकर, जहाँ से पूरा शहर दिखाई देता था वहां से नेहा ने एक -2 करके उसकी पिक्स लेनी शुरू कर दी...

दिन की रोशनी में और अच्छे बेकग्राउंड की वजह से कमाल की पिक्स आ रही थी...

 

कुछ देर बाद विक्की ने नेहा से कहा : "अब तुम आओ नेहा, मैं तुम्हारी फोटो लेता हूँ ....''

 

नेहा : "पर भैय्या, मेरी हालत देख रहे हो...स्कूल ड्रेस में हूँ ...और वो भी सुबह से अब तक इतनी गंदी हो चुकी है....देखो तो...''

 

सही कह रही थी वो, उसकी वाइट शर्ट पर जगह -2 दाग लगे हुए थे...

ऐसी हालत में वो भला कैसे फोटो खिंचवाती..

 

विक्की ने मुस्कुराते हुए अपना बेग उठाया और बोला : "और इसलिए मैं पहले से ही तुम्हारी अलमारी में से कपड़े निकाल कर ले आया हूँ ...''

 

ये सुनते ही वो हैरान रह गयी....

उसकी अलमारी में से कपड़े निकाल कर लाया था उसका भाई, कितना ख़याल था उसे अपनी छोटी बहन का..

 

वो ये सुनते ही खुश हो गयी और जल्दी से बेग विक्की के हाथ से लेकर अपने कपड़े देखने लगी...

 

विक्की उसके लिए एक जीन्स की शोर्टस टी शर्ट लाया था...

जो उसने करीब 1 साल से पहनी भी नही थी, छोटी हो चुकी थी वो...

 

नेहा : "ओोह भैय्या , ये कपड़े लाए हो...शॉर्टस तो चलो ठीक है पर ये टी शर्ट, ये तो बहुत टाइट है मुझे...''

 

विक्की : "देख नेहा, मॉडल्स ऐसे ही कपड़े पहनते है, जिसमें उनकी बॉडी दिखे, ढीले कपड़ों में तो सारा शरीर ढक ही जाएगा, ऐसा लगेगा जैसे किसी और के माँगे हुए कपड़े है...चल अब, देर ना कर, इन्हे बदल ले और मुँह धोकर जल्दी से आ, देर हो रही है...''

 

वो अपने साथ मुँह धोने के लिए पानी की बॉटल भी लाया था...

 

नेहा ने कपड़े लिए और बोली : "पर भैय्या , मैं कपड़े बदलूँ कहाँ पर...यहाँ तो चारों तरफ एकदम खुल्ला है...''

 

विक्की ने एक गहरी नज़र मंजू पर डाली और बोला : "देख नेहा, मैने कल भी समझाया था ना, इस लाइन में शर्म त्यागनी पड़ती है....मॉडेल्स की जब रेम्प वॉक होती है ना, उन्हे कपड़े बदलने के लिए अलग से चेंजिंग रूम नही मिलता, वहीं एक दूसरे के सामने वो नंगे होकर कपड़े बदलते है, ये तो आम सी बात है, और वैसे भी कल रात भी तूने मेरे सामने कपड़े बदले थे ना, तो इसमे क्या नया है , मंजू तो तेरी सहेली है, इस से भला क्या शरमाना और हमारे सिवा यहाँ दूर -2 तक कोई भी नही है....''

 

विक्की की बात सुनकर मंजू की आँखे फटी रह गयी,

वो इमेजीन भी नही कर सकती थी की नेहा ने कल अपने भाई के सामने कपड़े बदले थे,

और उस कमिनी ने ये बात उसे बताई भी नही थी...

 

विक्की ने मंजू से पूछा : "तुम्हे तो कोई प्राब्लम नही है ना....''

 

बेचारी भला क्या कहती, उसने ना में सिर हिलाया और नेहा को जल्दी से कपड़े बदलने के लिए कहा.

 

नेहा ने शरमाते हुए दूसरी तरफ मुँह किया और अपनी स्कूल की शर्ट उतार दी...

 

नीचे उसने ब्रा नही पहनी थी, उसकी नंगी कमर देखकर विक्की की नज़रे एकदम लाल सी हो गयी, दिन की रोशनी में ऐसा लग रहा था जैसे किसी नागिन की बलखाती कमर पर नागमडी का प्रकाश पड़ रहा है...

उसने धीरे-2 अपनी स्कर्ट भी उतार दी, अब वो सिर्फ़ एक ब्लेक कलर की चड्डी में खड़ी थी...

 

कपड़े उतारने से पहले वो अपने दूसरे कपड़े लेना तो भूल ही गयी थी,

वो बेग अभी तक विक्की के हाथ में था, उसने मुढ़कर देखा और विक्की से कपड़े लेने के लिए हाथ बढ़ाये ...

विक्की एक झटके से खुद ही वो कपड़े लेकर उसके सामने आकर खड़ा हो गया..

 

ये पल नेहा के लिए बड़ा ही शर्म से भरा था,

क्योंकि इस वक़्त विक्की ठीक उसके सामने खड़ा था और वो उसकी छातियों को अच्छे से देख पा रहा था..

 

मंजू भी हैरान थी की ऐसे कौन भला अपनी बहन को नंगा देखता है,

पर फिर उसने सोचा की इसमे बुराई ही क्या है, कुछ साल पहले तक तो वो तीनों ही कई बार एक दूसरे के सामने नंगे होकर नहाया करते थे....

इसलिए उसने वो विचार त्याग दिया..

 

इधर विक्की की हालत खराब थी, वो मन ही मन अपनी हिम्मत की तारीफ कर रहा था जिसने ऐसा काम कर डाला था..

अपनी बहन के नंगे मुम्मे ठीक उसकी नज़रों के सामने थे...

उसने काँपते हाथो से उसे टी शर्ट दी जो उसने झट्ट से पहन ली और फिर शॉर्ट्स भी.

 

पानी से मुँह धोकर वो अपनी फोटो खिचवाने के लिए तैयार हो गयी....

उसका उत्साह देखते ही बनता था...

और इस उत्साह में वो ये भी भूल गयी थी की उस टाइट टी शर्ट में से उसके मोटे निप्पल अलग ही छाप छोड़ रहे है.

 

खैर, विक्की ने अलग-2 पोज़ में उसकी फोटो लेनी शुरू कर दी,

वो काला चश्मा भी उसे दिया ताकि उसकी फोटो भी अच्छी आए,

कल के मुक़ाबले आज वो ज़्यादा कॉन्फिडेंस में थी,

और वो अपने नन्हे से शरीर को काफ़ी उभार -2 कर फोटो खिंचवा रही थी..

 

विक्की का फोकस उसकी छातियो पर ही था...

जिनपर लगे नन्हे-2 निप्पल्स दूर से ही चमक रहे थे....

मन तो उसका कर रहा था की उन्हे मुँह में लेकर चूस ले,

और यही प्लान था उसका की किसी भी तरह से नेहा के मुम्मे आज वो चूस्कर ही रहेगा,

पर मंजू के आ जाने के बाद वो प्लान गड़बड़ हो चुका था...

पर फिर भी उसने हिम्मत करके उसे अपनी बातों में लेकर मंजू के सामने ही सही, उसकी नंगी चुचियों के दर्शन तो कर ही लिए थे.

 

करीब 10 मिनट बाद वो एक साथ बैठकर उन फोटोस को देखने लगे...

फोटो वाकई में अच्छी आई थी बस हर फोटो मे उसके निप्पल्स के दर्शन आसानी से हो रहे थे...

नेहा और मंजू ने ये बात नोट भी की थी पर बेचारी शर्म के मारे कुछ बोल नही पाई..

 

विक्की उनकी उलझन देखकर बोला : "अरे , ये तो बस हमारे लिए है, मैं इन फोटोस को कौन सा किसी और को दिखाने जा रहा हूँ , ये तो बस इसलिए दिखा रहा हू ताकि नेहा को पता चल सके की वो वाकई में अच्छी मॉडल या हिरोइन बन सकती है...''

 

मंजू ने चहकते हुए पूछा : "और मैं ....क्या मैं भी बन सकती हूँ अच्छी मॉडेल...''

 

विक्की ने उसके चेहरे को अच्छे से देखा और फिर उसे थोड़ा दूर खड़ा करके उसे उपर से नीचे तक अपनी नज़रों से नापा, घुमा-2 कर उसने उसके हर अंग का जायजा भी लिया और बोला : "बन तो तुम भी सकती हो....पर थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी बस...''

 

मंजू : "मैं तैयार हूँ ....''

 

नेहा : "अर्रे, ये बड़ी डिफिकल्ट लाइन है, इसमे सारी शर्म - हया त्यागनी पड़ती है...है ना भैय्या ...''

 

वो शायद अपने भाई की कही हुई कल की बात दोहराना चाह रही थी....

 

विक्की : "हाँ , ये तो है... मैने भी कल रात नेहा को यही समझाया था...इसलिए, तुमने देखा ना अभी, उसने कैसे बिना झिझक के अपने कपड़े मेरे सामने ही उतार दिए...ये सब करना है तो शर्म त्यागनी होगी...''

 

मंजू : "मैं तैयार हूँ ....''

 

इतना कहने के साथ ही उसने अपनी शर्ट के बटन खोले और उसे निकालकर ज़मीन पर फेंक दिया...

अब वो टॉपलेस होकर उन भाई बहन के सामने खड़ी थी.

 
विक्की ने तो सोचा भी नही था की आज के दिन उपर वाला उसपर इतना मेहरबान होने वाला है....
 
अब तो वो इस पल को एक अच्छे दिन में बदलने के बारे में सोचने लगा..
 
दिन तो विक्की का अच्छा हो ही चुका था....
नेहा के बाद अब मंजू के बूब्स को नंगा देख पाना उसके लिए किसी सपने से कम नही था...
 
मंजू जिस अंदाज से विक्की के सामने अर्धनग्न खड़ी थी उसे देखकर एक बात तो सॉफ थी की वो सिर्फ़ एक फोटो के लिए नही बल्कि विक्की के लिए ये सब कर रही है...
उसकी आँखो में एक अजीब सी चाहत थी, जो वो चाहती थी की विक्की नोट करे...
पर विक्की की नज़रें तो उसकी दोनो आँखों से ज़्यादा उसके नन्हे और तंदुरुस्त मुम्मों पर थी...
 
एकदम मस्त आकार था उनका...
नेहा से थोड़े बड़े थे उसके बूब्स इसलिए ज़्यादा ही मनमोहक लग रहे थे...
जैसे नारियल के दो टुकड़े करके चिपका दिए हो उसकी छाती से...
एकदम कठोर,
तने हुए...
और उनपर लगे नन्हे लाल रंग के निप्पल्स....
उफफफ्फ़....
मन तो उसका कर रहा था की आगे बढ़कर उन्हे दबोच ले अपने मुँह में और देखे की उनमें से से कितना रस निकलता है बाहर....
ऐसे नारियल पानी को पीकर उसकी आत्मा अंदर तक तृप्त हो जानी थी.
 
और उधर नेहा भी हैरान परेशान सी अपनी सहेली के इस अवतार को देख रही थी की कितनी बेशर्मी से उसने अपने कपड़े उतार दिए थे उसके भाई के सामने...
आज तक उसके सामने भी कपड़े बदलते हुए वो घूम जाया करती थी, पर आज देखो तो कैसे उसी के भाई के सामने छाती उभार-2 कर दिखा रही है...
माना की उसके मुम्मे थोड़े बड़े है उसके मुक़ाबले पर इसका मतलब ये नही की वो उसके भाई पर डोरे डालेगी...
उसपर तो पहला हक उसका ही बनता है ना...
 
पता नही क्या-2 सोचने लग गयी वो...
और इसी बीच उसे विक्की की आवाज़ सुनाई दी...
 
विक्की : "नेहा...ओ नेहा....कहां खो गयी.....अपनी टी शर्ट उतारो, मंजू नंगी ही खड़ी है, उसे पहननी है ताकि वो फोटो खिंचवा सके....उतारो जल्दी से...''
 
विक्की की बात सुनकर पता नही कैसा ताव सा आया नेहा को की उसने एक ही झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और विक्की की तरफ मुँह करके खड़ी हो गयी....
बाद में उसने अपनी छाती को ढकने की या अपनी स्कूल की शर्ट पहनने की भी जहमत नही उठाई..

अब माहौल ऐसा था की नेहा और मंजू, दोनो उसके सामने टॉपलेस होकर खड़ी थी...

दोनो ही अपनी-2 नन्ही छातियों को ज़्यादा से ज़्यादा उभार कर विक्की के सामने अपने आप को साबित करने की कोशिश कर रही थी की कौन ज़्यादा सैक्सी दिख रही है ...

विक्की की हालत खराब थी....

उसने सिर घुमा कर इधर उधर देखा की कोई उस तरफ तो नही आ रहा...

दिन का समय था इसलिए दूर -2 तक कोई नही था...

विक्की तो उन दोनो की हिम्मत देखकर दंग था...

की कैसे वो दोनो अपना नंगा बदन उसे परोस कर दिखा रही थी..

 

अचानक उसके मन में कुछ आया और उसने तुरंत अपने कैमरे से उनकी पिक ले ली...

एक ही पल मे उनका नंगा यौवन उसके कैमरे में क़ैद हो गया..

 

उन दोनो ने चोंककर उसे देखा तो विक्की हंसते हुए बोला : "अरे , घबराओ मत...डिलीट कर दूँगा...वैसे भी ये सब पिक्स तो हमारे देखने के लिए ही है, किसी और के लिए नही...''

 

उसकी बात सुनकर दोनो के चेहरे के भाव बदले, शायद उन्हे अब अपने नंगेपन का एहसास हो चुका था...

नेहा ने अपनी स्कूल की शर्ट उठा कर पहन ली और मंजू ने उसकी उतारी हुई टी शर्ट पहन ली.

 

उसके बाद मंजू ने अलग-2 पोज़ में कई फोटो खिंचवाए...

विक्की को अंदर से पता था की उसकी बहन के मुक़ाबले मंजू का बदन ज़्यादा नशीला था और फोटो भी उसी के ज़्यादा अच्छे आ रहे थे...खासकर उसके खड़े हुए निप्पल्स बहुत ही सैक्सी लग रहे थे , जो टी शर्ट को फाड़कर बाहर आने को आतुर थे

 

वो मंजू की और उसके बूब्स की तारीफ करना चाहता था पर ये बात वो इस वक़्त बोलकर अपनी बहन का मूड खराब नही करना चाहता था.

 

उसके बाद विक्की ने कैमरा नेहा को दिया और मंजू के साथ एक जोड़े की तरह उसने फोटो खिंचवाई...

इस बार ये उसने जान बूझकर किया था क्योंकि कुछ देर पहले नेहा का जो रूप उसने देखा था उससे ये बात सॉफ जाहिर थी की वो अपने भाई को अपनी सहेली के साथ बाँटने मे इंट्रेस्टेड नही है, इसलिए वो नही चाहती की उसका भाई मंजू की तरफ देखे भी वो भी उस वक़्त जब वो नंगी हो..

 

नेहा ने जब फोटो खींचने शुरू किए तो मंजू जान बूझकर विक्की से लिपटकर , उसके इर्द गिर्द बाहे फंसा कर फोटो खिंचवाने लगी जैसे कोई फिल्म की शूटिंग चल रही हो...

विक्की तो उसकी बिना ब्रा की नारंगियो को महसूस करके काफ़ी उत्तेजित हो रहा था, नेहा सामने ना होती तो वो उन्हे पकड़कर निचोड़ ही डालता और उसे पक्का विश्वास था की मंजू भी उसे मना नही करती...

 

पर ये काम उसने एक ना एक दिन तो करना ही था...

और वो दिन भी जल्द ही आने वाला था.

 

पर अभी के लिए जब भी उसका हाथ उसके मुम्मो के करीब आता तो उन्हे वो हाथ उपर करके छू ज़रूर लेता...

हाथो के पिछले हिस्से पर उसके बूब्स बीच-2 मे टकरा रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे पानी से भरे गुब्बारे टच कर रहा है उसका हाथ.

 

एक बार तो उसके हाथ उसके कड़क निप्पल्स से भी टकराए...

ऐसा लगा जैसे समय ही ठहर गया...

ऐसा लग रहा था विक्की को जैसे उसकी साँसे ही रुक जाएँगी उस मखमली एहसास से...

 

और कुछ ऐसा ही हाल मंजू का भी हो रहा था...

आज लाइफ में पहली बार उसने खुद को इतना एक्साईटिड फील किया था...

चूत से भी पानी लगातार बह रहा था...

नन्हे स्तनों में भी ऐसी झनझनाहट उसे आज तक फील नही हुई थी...

उपर से विक्की की वो मर्दाना खुश्बू उसे पागल सा कर रही थी...

वो जब भी उसके करीब आता तो वो जान बूझकर अपने बदन को उसके शरीर से रगड़ डालती, ऐसा करके एक तरह से वो खुद की खुजली ही मिटा रही थी...

विक्की के सीने के बाल उसे बड़े ही आकर्षक लग रहे थे...

उसका मन कर रहा था की अपने होंठो से उसके सीने पर ढेर सारी क़िस्सिया कर डाले पर नेहा के होते हुए वो कुछ भी करने से घबरा रही थी.

मंजू जान तो गयी थी की विक्की को भी उसके छूने से कोई परहेज नही है, पर नेहा के चेहरे के भाव देखकर उसे भी सॉफ पता चल रहा था की उसे अपने भाई के साथ उसका इतना खुला बर्ताव पसंद नही आ रहा है...

पर मंजू के लिए तो विक्की के साथ ऐसा करना एक तरह से एडवान्टेज ही था क्योंकि नेहा का तो अपने भाई से किसी भी तरहा का रोमॅंटिक एंगल से कुछ करना सही नही था ...

हालाँकि वो अपने भाई के सामने अपने कपड़े उतार कर उसे अपने बूब्स दिखा चुकी थी, पर इसका मतलब ये नही था की उसके बाद का भी सारा कुछ करने का उसे हक़ है..

 

विक्की भी दोनो के हाव भाव देखकर ये बात अच्छे से समझ चुका था की दोनो के बदन में आग तो लग ही चुकी है...

पर उन दोनो को ही ये पता नही था की इस आग का करना क्या है...

अब ये काम तो विक्की को ही सिखाना पड़ेगा उन दोनो कमसिन जवानियो को..

ख़ासकर अपनी बहन नेहा को ताकि आने वाली ठंडी रातो का अच्छे से इंतज़ाम हो सके.

 

कुछ देर तक और फोटो खिंचवाने के बाद वो तीनो वापिस घर की तरफ चल दिए...

 

आज वो जिस तरफ निकल कर आए थे, वहां से वापिस जाते हुए पहले विक्की का ही घर आता था, इसलिए नेहा को घर पर छोड़कर वो मंजू को उसके घर छोड़ने के लिए निकल पड़ा..

 

और आज उसके घर पर उसके माँ बाप तो थे नही, इसलिए इस गोल्डन पल को वो अपने हाथो से जाने नही दे सकता था...

आज के दिन मंजू ने जो उसके लंड का बुरा हाल किया था, उसे शांत करना तो बनता ही था.

नेहा के बाइक से उतरते ही मंजू ने विक्की को अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपना सिर उसके कंधे पर रखकर सामने देखने लगी...

 

दोनो के गाल आपस में रगड़ खा रहे थे..

 

बात करते हुए विक्की जान बूझकर उसकी तरफ घूम रहा था ताकि उसके नर्म गालों पर अपने होंठ लगा सके..

मंजू भी मंद-2 मुस्कुरा कर उसका साथ दे रही थी...

 

एक दो बार तो उसने भी उसके चेहरे की तरफ देखते हुए कुछ बोला और अपने होंठो से उसके गालो को छू लिया...

विक्की का लंड किसी दोनाली बंदूक की तरह उसकी पेंट में खड़ा था, कोई सामने से देख ले तो सॉफ पता चल जाए की तमंचा पूरी तरह से लोडेड था उसका..

 

कुछ देर आगे जाने के बाद विक्की ने कुछ पूछा मंजू से.....

और जैसे ही उसने विक्की की तरफ मुँह करके कुछ बोलते हुए उसके गालों से अपने होंठ लगाए, विक्की ने भी अपना सिर घुमा कर उसकी तरफ कर लिया....

 

बिजली सी कड़क गयी जब विक्की के होंठो से मंजू के नर्म होंठ छुए तो...

 

विक्की ने भी अपनी हरामीपंति दिखाते हुए उसके होंठो को धीरे से चूस लिया, मंजू की आँखों में शर्म के भाव तैर गये और उसने नज़रें झुका ली...पर उसने अपनी किस्स नहीं तोड़ी

 

बाइक चल रही थी इसलिए उसपर ज़्यादा देर तक ये चुम्मेबाजी वाला करतब हो नही सकता था, वरना विक्की उस नन्ही सी किस्स को एक लंबे स्मूच में बदलने में कोई कसर ना छोड़ता...

 

कुछ देर में ही उसका घर आ गया...

मंजू नज़रें झुका कर उसकी बाइक से उतरी और अपने बेग से चाबी निकाल कर ताला खोलने लगी...

अंदर जाकर वो धीरे से पलटी और बोली : "अंदर आ जाओ ना विक्की भैय्या ...चाय पीकर चले जाना...''

 

विक्की तो इसी पल की प्रतीक्षा कर रहा था...

उसने तुरंत बाइक को साइड में खड़ा किया और लगभग उछलता हुआ सा उसके घर के अंदर आ गया, मंजू ने पीछे से दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और अपनी नशीली आँखो से मुस्कुराते हुए वो अंदर की तरफ आ गयी.

 

विक्की सोफे पर जाकर बैठ गया और मंजू उसके लिए किचन से पानी लेकर आई, जैसे ही वो जाने लगी तो विक्की ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और वो लड़खड़ा कर उसकी गोद में आ गिरी.

विक्की का लंड तो पहले से ही खड़ा था, उसके खड़े लंड पर उसके नर्म कूल्हे जब टकराए तो उसके मुँह से मज़े के साथ-2 एक दर्द भरी आह भी निकल गयी, पीछे से जवानी थोड़ी भारी थी उसकी..

 

मंजू : "ओह्ह्ह ....सॉरी विक्की भैय्या ....आपको लगी तो नही ना...''

 

विक्की ने बड़ी मुश्किल से अपने लंड से निकल रही दर्द की लहर पर काबू पाया और बोला : "इतना भार जब एक ही झटके से मेरे उपर गिरेगा तो दर्द तो होगा ही ना...''

 

मंजू ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा : "ओोहो ...तो अब मैं मोटी हो गयी हूँ ...अभी कुछ देर पहले तो मुझे बोल रहे थे की अच्छी मॉडेल बन सकती हूँ ...और अब एकदम से मोटी बोल दिया....जाओ मैं आपसे बात नही करती...''

 

वो झूठमूठ का मुँह फूला कर दूसरी तरफ सिर घुमा कर बैठ गयी...

पर उसकी गोद से उतरने की जहमत नही उठाई उसने.

 

विक्की ने उसकी कमर को पकड़ कर उसके चूतड़ों को अपने लंड के चारों तरफ एडजुस्ट किया, अब उसका खड़ा हुआ लंड उसके चूतड़ों की दरार में फंसकर आगे की तरफ मुँह निकाल कर मंजू की चूत को टच कर रहा था..

 

विक्की ने उसकी कमर मे हाथ डालकर उसकी पीठ को अपनी छाती से सटा लिया और उसके गुदाज और नर्म पेट को सहलाते हुए बोला : "अर्रे...मैं तुझे उस तरह से मोटी थोड़े ही बोल रहा हूँ , वो तो बस कुछ-2 जगह ऐसी होती है ना लड़कियों के शरीर की, जहाँ चर्बी थोड़ी ज़्यादा होती है, वो हिस्सा जब हमारे अंग पर तरबूज की तरह से गिरे तो दर्द तो होगा ही ना....''

 

विक्की की सफाई सुनकर मंजू अपनी हँसी ना रोक पाई और ज़ोर-2 से हँसने लगी...

हंसते हुए उसकी नर्म गांड विक्की के लंड पर किसी वाईब्रेटर की तरह घिसाई कर रही थी जिसकी वजह से उसका लंड और भी ज़्यादा कड़क होने लगा..

 

पर उस बुद्धू मंजू को शायद अभी तक उस चीज़ का एहसास नही हो पाया था.

 

कुछ देर बाद जब उसकी मैराथॉन वाली हँसी रुकी तो वो बोली : "अच्छा ...तो आप मुझे बताओ, इस तरबूज के अलावा और कौन सी जगह पर एक्सट्रा चर्बी है मेरे....''

 

बेचारी भोलेपन में वो बात बोल गयी जिसका शायद विक्की भी इंतजार कर रहा था.

उसने तुरंत अपने हाथो में उसके मोटे मुम्मे थाम लिए और बोला : ''ये है ना...तुम्हारे बूब्स...''

 

एक ही पल में मंजू के चेहरे के एक्शप्रेशन चेंज हो गये....

हँसी गायब हो गयी और एक उत्तेजना का संचार उसके चेहरे पर होने लगा...

विक्की ने उसके वक्षस्थल को अपने हाथो से थाम रखा था पर वो उसे मना भी नही कर पा रही थी...

शायद अंदर से वो भी यही चाहती थी की वो उन्हें थामे...

क्योंकि ऐसा करवाके उसके अंदर कुछ-2 हो रहा था, जो आज से पहले कभी फील नही हुआ था उसे.

एक कमसिन लड़की के स्तनों पर किसी मर्द का पहला टच था, जो उसे बहुत भा रहा था.

 

विक्की ने उसके मुम्मों को पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया, और उन्हे दबाते हुए अपनी तरफ खींच लिया..

 

''आअहह विक्की भय्या....धीरे...दर्द होता है....''

 

यानी वो विक्की को वैसा करने से मना नही कर रही थी, बस धीरे से करे यही गुज़ारिश थी उसकी..

 

पर विक्की तो एक नंबर का हरामी लौंडा था,

उसने नेट पर कहानियों में अच्छे से पड़ रखा था की जब ऐसा वक़्त अकेली लड़की के साथ मिले तो क्या-2 करना चाहिए...

 

इसलिए उसने तुरंत अपने दोनो हाथो की उंगलियो से उसके बूब्स को सहलाया और फिर बीचो बीच जाकर उसके उभर रहे निप्पल्स को अपनी उंगली और अंगूठे की गिरफ़्त में लेकर उन्हे होले से भींच डाला..

 

''आआआआआआआआआआआहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... उम्म्म्मममममममममम भेयययययाआआआआअ....''

 

इस वक़्त तो उसके मुँह से सिसकारी के साथ भैय्या शब्द बड़ा ही सैक्सी लग रहा था जैसे उसकी चूत की चाशनी में डुबोकर उसे निकाला हो....

 

विक्की ने अपने उंगली और अंगूठे से उसके निप्पल्स को उमेठना जारी रखा, मंजू किसी साँप काटी लड़की की तरह उसकी गोद में बैठी तड़प रही थी, और अपनी गद्देदार गांड से उसके नाग को कुचल भी रही थी..

शायद अब उसे नीचे भी कुछ-2 होने लगा था क्योंकि विक्की के लंबे लंड को वो अपनी चूत पर जोरों से रगड़ कर एक लय बना रही थी जैसे नाव में बैठने से हिचकोले आते है, ठीक वैसे ही वो अपनी गांड की नाव को विक्की के लंडसागर पर हिचकोले खिला रही थी और उपर तो विक्की ने उसके निप्पल्स को पतवार बना कर उसकी नाव को और तेज़ी से चलने पर विवश सा कर रखा था..

 

अचानक विक्की ने उसे अपनी तरफ पलटाया और उसके दहकते हुए होंठो पर अपने होंठ रख कर उन्हे चूसने लगा..

मंजू भी शायद इसी पल की प्रतीक्षा कर रही थी...

दोनो की लाइफ का ये पहला चुंबन था पर वो दोनो ही उसे ऐसे परफॉर्म कर रहे थे जैसे बरसों से करते आए हो...

दोनो ही बोर्न किस्सर थे...

एक दूसरे के होंठो और जीभ को मुँह में लेकर ऐसे चूस रहे थे जैसे सारी चाशनी आज ही ख़त्म कर देनी है एक दूसरे के मुँह की.

 

विक्की के हाथ अभी भी मंजू की ब्रेस्ट पर ही थे, जिन्हे वो धीरे-2 मसल रहा था, उन्हे दबाने में एक अजीब सा आनंद प्राप्त हो रहा था विक्की को, मन तो कर रहा था की उन गुब्बारों को उम्र भर हाथों में लेकर दबाता रहे...

 

पर मंजू शायद कुछ और चाहती थी,

उसने किस्स तोड़ी और विक्की के मुँह को पकड़ कर नीचे अपनी छाती की तरफ करने लगी...

विक्की समझ गया की वो क्या चाहती है..

वो उसकी नर्म गर्दन को चूमता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा, और ठीक उसके बूब्स के उपर पहुँचकर उसने शर्ट के उपर से ही उसके मुम्मे को अपने मुँह में भरकर ज़ोर से काट लिया...

 

एक बार फिर से आनंद से भरी एक किलकारी मंजू के मुँह से निकल गयी

 

''आआआआआआआआआआआआआहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़...... काटो मत ना भैय्या .......बस प्यार करो इन्हे.......''

 

मंजू की प्यार भरी रिक्वेस्ट को उसने मान लिया और उन्हे चूसने लगा...

तब तक मंजू ने अपनी शर्ट के बटन खुद ही खोलने शुरू कर दिए....

और जैसे ही आख़िरी बटन खोलकर उसने अपनी शर्ट के कपाट खोले, अंदर से दूधिया प्रकाश में नहाए हुए 2 कलश विक्की के सामने प्रकट हो गये..

 

हालाँकि कुछ देर पहले भी उसने इन मुम्मो को देखा था, पर इस वक़्त वो उन्हे और करीब से और अपने हाथो और होंठो की पहुँच के अंदर देख पा रहा था,

विक्की ने उसकी शर्ट को निकाल फेंका और मंजू के नंगे बूब्स को जी भरकर देखने लगा..

 

 

 

पर देखते रहने से उसका पेट भरने वाला नही था, उसने उन दोनो मुम्मो को अपने हाथो में पकड़ा और अपना मुँह खोलकर उनपर टूट पड़ा...

 

उफफफफफफफफफफ्फ़ क्या स्वाद था उनका....

एकदम ककचे आम जैसी चिकनाहट और कठोरपन था उनमे पर साथ ही साथ पके हुए आम जैसी मिठास भी थी...

 

 

 

वो चपर -2 करके उन्हे चूसने लगा....

निप्पलों को मुँह में लेकर उसका दूध दोहने लगा, इतनी ज़ोर से सक करने लगा जैसे आज तो वो उसकी कच्ची छातियों से दूध निकाल कर ही रहेगा..

 

 

 

 

उधर दूसरी तरफ मंजू का तो बुरा हाल था, जिस पल को सपना बनाकर वो पिछले 2 दिनों से देख रही थी वो उसके साथ सच में हो रहा था....

इसलिए उसका उत्साह देखते ही बनता था....

और सबसे बड़ी बात ये थी की उन दोनो की लाइफ का ये पहला सैक्सुअल एक्सपीरियेन्स था

 

विक्की ने उसकी शर्ट को पूरी तरह से निकाल कर फेंक दिया और फिर उसने खुद ही अपनी शर्ट भी उतार दी,

हालाँकि उसके दिमाग़ में अभी तक चुदाई करने की कोई बात नही आई थी पर वो उसकी नंगी छातियो को अपने नंगे सीने से लगा कर उस आनंद को प्राप्त करना चाहता था जिसके लिए वो बरसो से तरसता आया था...

 

और जब उन दोनो के आधे नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे तो दोनो के मुँह से एक आह सी निकल गयी,

बड़ा ही सुखद सा एहसास था वो,

एकदम नर्म सा,

और साथ ही दोनो ने जब स्मूच करनी शुरू की तो सोने पर सुहागा सा हो गया...

वो दोनो ना जाने कितनी देर तक एक दूसरे के होंठो , गर्दन और छाती पर किस्स करते रहे उन्हे भी पता नही चला...

 

और अचानक मंजू का हाथ उसके खड़े हुए लंड से जा टकराया...

एक पल में ही उसके चेहरे पर हैरानी के भाव आ गये, जैसे उसे पता ही नही था की वो क्या है...

 

पर वो हैरानी शायद इस बात की थी की इतना बड़ा भी लंड होता है क्या...

शायद आज तक उसने गली के छोटे बच्चों की लुल्लिया ही देखी थी,

आज पहली बार वो ऐसा कुछ फील कर रही थी जो शायद उसकी समझ से परे था

 

और विक्की का ये फ़र्ज़ बनता था की वो उसे इस जादुई दुनिया के जिन्न से मिलवाए...

इसलिए उसने उसके हाथ पर हाथ रखकर अपने लंड पर दबाव और तेज कर दिया....

मंजू की साँसे तेज हो गयी, क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने किसी साँप की गर्दन पर हाथ रखकर उसे दबोच रखा हो और वो छटपटा कर उसकी गिरफ़्त से निकलना चाहता हो..

 

साँप का मालिक, विक्की भी शायद यही चाहता था....

इसलिए उसने उसका हाथ हटा कर अपनी जीन्स के बटन खोने शुरू कर दिए....

और सब कुछ खोलने के बाद जब वो लहराता हुआ नाग मंजू की आँखो के सामने आया तो उसकी चीख निकलते हुए बची...

क्योंकि स्कूल में मेडम ने उसे किताबो में जिस शिश्न के बारे में पढ़ाया था ये तो उस से कही ज़्यादा बड़ा था....

 

उसकी आँखो का कोतूहूल देखते ही बनता था,

वो दम साधे विक्की के लंड को एकटक देखे जा रही थी,

पर एक डर भी था शायद उसके चेहरे पर जिसे विक्की ने समझा और बोला

विक्की : "डरो मत.....पास आओ और छूकर देखो इसको.....काटेगा नही ये...''

 

वो बिना पलके झपकाए उसके करीब आई और घुटनो के बल उसके सामने बैठ गयी...

विक्की ने उसके चेहरे पर आए बालो को पीछे किया और उसके चेहरे के बिल्कुल करीब अपने लंड को लाकर एक जोरदार तरीके से झटका दिया

 

आँखों में लाल डोरे चमक गए मंजू के, जब विक्की के लहराते हुए नाग ने उसके चेहरे पर दस्तक दी....

एक अजीब सा आकर्षण था विक्की के लंड में , जिसे वो नजरअंदाज नही कर पा रही थी...

धीरे-2 उसके हाथ उपर आए और उसने विक्की के लंड को अपने कोमल हाथो में जकड़ लिया....

 

विक्की के मुँह से एक तेज सिसकारी निकल गयी

 

''आआआआआआआआआआआआआअहह.......... मंजूऊउउ.... म्‍म्म्मममममममममम.......... चूसो इसको........... तो.......चाटो मेरी जाआंन ''

 

मंजू के चेहरे के भाव एकदम से बदल से गये...

 

चुसू इसको.....चाटू .....और वो भी इस सूसू करने वाली जगह को.....भला क्यूँ ....

 

वो अपने चेहरे पर आए इन सवालो के साथ विक्की को देख रही थी...

पर वो तो अपनी आँखे भींचे उस पल में डूबा सा हुआ था...

 

फिर मंजू को पिछले सारे दिनों की बाते एक झटके में याद आ गयी....

 

की कैसे उसका खुद का दिल विक्की के लिए धड़कता था...

कैसे उसे देखकर उसके निप्पल टाइट से हो जाते थे....

कैसे बाइक के पीछे बैठकर वो अपने मुम्मे उसकी पीठ से रगड़ती थी....

और उसके बारे में सोचकर अपनी चूत को रगड़ने में कितना मज़ा आता था....

और विक्की ने कितनी बार उसे चोकोबार खिलाई थी...

 

आज उन सभी कोकोबार्स का बदला उतारने का वक़्त आ गया था....

वैसे भी विक्की के लंड से निकल रही भीनी गंध उसे अपनी तरफ खींच रही थी...

 

उसने धीरे से अपना मुँह खोला और अपनी जीभ बाहर निकाल कर विक्की के लंड को नीचे से उपर तक चाट लिया और फिर उपर जाते ही उसके लंड को मुँह में लेकर अंदर निगल गयी.

आज शायद विक्की को भी नही पता था की उसके साथ क्या-2 होने वाला है.

 

 

कहानी आगे जारी रहेगी...                     

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