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जवान बेटी के जिंदगी भर मजे लिए 
@Kamvasna 04 मई, 2023 7108

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मेरी बेटी दिखने में काफी सुंदर है। दूध सी गोरी है और फिगर भी काफी अच्छा है। मेरी एक ही बेटी है और मेरी बीवी अक्सर बीमार रहती है। उससे सेक्स किए हुए मुझे काफी साल हो चुके थे। वो काफी कमजोर हो चुकी है बीमारी के कारण। मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था पर कोई और नहीं मिली तो बस लंड हिलाकर ही काम चला रहा था। मैं रोज रात को और कभी कभी तो दिन में भी लंड हिला लेता था। मुझे मोबाईल वगेरह चलाना नहीं आता है तो मैं अखबार के साथ दो पन्नों का एक अखबार और आता है उसमें बॉलीवुड की हेरोइन की बिकीनी वगेरह में फोटो होती थी तो उन्हे देखकर ही लंड हिला लेटा था। फिर मैं कुछ ऐसी किताबे भी लेकर आया जिसमें सेक्सी औरतों के फोटो थे। मैं ऐसी काफी किताबे लाया करता था और उन्हे एक अलमारी में रख देता और मूड होता तो निकालकर लंड हिला लेटा। 

 

 

बीवी कभी कभार साफ सफाई करती और उसे वो किताबें मिलती तो वो साफ करके उन्हे वापिस वहीं रख देती और कुछ नहीं कहती। फिर बीवी ज्यादा बीमार रहने लगी और बेटी भी थोड़ी बड़ी हो गई तो फिर बेटी घर का काम करने लगी। फिर एक बार बेटी पढ़ रही थी तो मैंने देखा के उसने अपनी किताब की जिल्द ऐसे अखबार की चढ़ा रखी थी की उस अखबार में एक हिरोइन बिकीनी पहनकर खड़ी थी। मुझे ये देखकर थोड़ी शर्म आई एक बार तो मन किया की बेटी से कह दूँ के वो ये जिल्द उतार दे। लेकिन फिर मैंने कुछ नहीं कहा। 

फिर कुछ दिन बाद बेटी घर की सफाई कर रही थी तो उसने वो अलमारी खोल ली जिसमें वो सब किताबे थी जिनमें सेक्सी औरतो के फोटो थे। मैं भी तब वहीं था। फिर बेटी वो किताबें देखने लगी और फिर उसने मुझसे पूछा के क्या वो ये किताबें अपनी नोटबुक पर जिल्द वगेरह चढ़ाने के लिए ले सकती है। ये सुनकर मैं कभी बेटी की तरफ तो कभी उन किताबों की तरफ देखता रहा और फिर उसे वो किताबें रखने के लिए दे दी। फिर वो कुछ किताबें लेकर अपने कमरे में चली गई और फिर बाकी के घर की सफाई करने लगी। 

फिर मैं ऐसी मैगजीन लाने लगा जिसमें बिल्कुल नंगी औरतो के फोटो थे और मैंने ये मैगजीन उसी अलमारी में रख दी थी। फिर एक बार दिन में मैं वो सब मैगजीन लेकर चारपाई पर बैठा था और अपना लंड हिला रहा था। फिर तभी अचानक बेटी आ गई। फिर बेटी मुझे नंगा देखकर मुड़कर खड़ी हो गई और फिर मुझसे अपने स्कूल की फीस के लिए पैसे मांगने लगी। बेटी तब 11वीं क्लास में पढ़ती थी। फिर मैं जल्दी से खड़ा हुआ और अपना पायजामा पहन लिया और फिर अलमारी से पैसे निकालने लगा। फिर मैं जब पैसे लेकर पीछे मुड़ा तो देखा के बेटी चारपाई पर पड़ी उन मैगजीन को देख रही थी जिसमें नंगी औरतो के फोटो थे। फिर मैंने बेटी को पैसे दिए तो वो चली गई। 

उस दिन मुझे बेटी से काफी शर्म आई और फिर कभी दिन में ना लंड हिलाने की कसम खाई। फिर मैं कुछ दिनों तक बेटी से आँखें नहीं मिला पाया और बेटी ने भी मुझसे ज्यादा बातें नहीं की। लेकिन फिर कुछ दिनों के बाद वो मुझसे पहले की तरह ही बातें करने लगी। 

 

फिर एक दिन रात को खाना खाने के बाद मैं बीवी के साथ जाकर लेट गया और बेटी दूसरे कमरे में चली गई। मुझे नींद नहीं आ रही थी तो फिर मैं उठकर बाहर आकर बैठ गया और अपना लंड बाहर निकालकर सहलाने लगा। तब बेटी के कमरे की लाइट जल रही थी तो मैंने सोचा पढ़ रही होगी। फिर मेरे मन में कुछ विचार आया और फिर मैं खड़ा हुआ और एक हाथ से अपना पायजामा पकड़ा और दूसरे हाथ में अपना लंड पकड़े पकड़े मैं बेटी के कमरे की खिड़की की तरह जाने लगा। फिर मैं जब खिड़की के पास पहुँचा और फिर जैसे ही अंदर का नजारा देखा तो देखता ही रह गया। बेटी ने वो किताबें जिसमें सेक्सी औरतो के फोटो थे दीवारों पर टाँग रखी थी और बेटी ने खुद ने ब्रा पैंटी पहन रखी थी और उन किताबों वाली औरतों को देखकर अपने बदन को सहला रही थी। ये देखकर तो मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। 

 

फिर मैं देखता रहा। फिर बेटी अपनी ब्रा पैंटी निकालकर पूरी नंगी हो गई और फिर अपने छोटे छोटे बोबो को और चुत को सहलाने लगी। बेटी नंगी काफी मस्त लग रही थी। फिर बेटी किसी हिरोइन की तरह कमरे में नंगी ही इधर उधर घूमने लगी। बेटी ने मेकअप वगेरह भी कर रखा था जिससे वो और ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। फिर कुछ देर के बाद वो कपड़े पहनकर सो गई। ये नजारा देखकर मेरे मन में उठल पुथल मच गई। फिर मैं सारी रात और अगले दिन भी बस इसी के बारे में सोचता रहा। फिर बेटी जब दोपहर बाद स्कूल से आई तो वो घर के काम में लग गई। फिर शाम हुई तो मैं और बेटी घर के पीछे की साइड घूमने चले गए। घर के पीछे काफी सारे पेड़ पौधे उगे हुए है और पूरा जंगल बना हुआ है। हम गाँव में रहते है। फिर मेरा मन कल रात के बारे में बेटी से बात करने का हुआ तो मैं बेटी से पूछने लगा के तुम्हें हिरोइन बनना है क्या। 

 

फिर वो मेरी तरह देखने लगी और हंसने लगी और बोली के नहीं तो। फिर मैं बोला ले तो तू कल रात उन औरतों के जैसे ब्रा पैंटी पहनकर क्यों घूम रही थी। ये सुनते ही बेटी का मुँह शर्म से लाल हो गया। फिर बेटी नीचे गर्दन करके मुस्कुराने लगी। फिर मैंने बेटी की कमर में हाथ डालकर अपने से चिपका लिया और फिर से पूछा के बोल ना। लेकिन वो कुछ नहीं बोली और बस मुसकुराती रही। फिर मैं बोला के तुम मुझे बता सकती हो मैं तुम्हारा पापा हूँ। मुझसे कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं है। लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर मैं उससे ऐसे ही बातें करता रहा। फिर मैं उससे कहने लगा के तुम्हारी मम्मी काफी टाइम से बीमार ही रही है तो मुझे वो कभी औरत का सुख नहीं दे पाई। तुम्हें जब कल रात ऐसे देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। अगर तुम्हें वैसे कपड़े पहनना अच्छा लगता है तो तुम पहन सकती हो मैं कुछ नहीं कहूँगा। फिर वो बोली के सच में। फिर मैंने कहा के हाँ। ये सुनकर वो काफी खुश हुई। 

 

फिर मैंने उससे कहा के वो जाकर ब्रा पैंटी ले आए और साथ में अलमारी से कुछ किताबें लेकर आए और फिर यहीं मेरे सामने वो ब्रा पैंटी पहनकर दिखाए। ये सुनकर वो काफी खुश हुई। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे पूछा के उसे मुझसे शर्म नहीं आएगी तो वो शर्म से फिर से लाल हो गई और फिर मुसकुराते हुए वहाँ से चली गई। वो भागते हुए गई। फिर मुझे पता चल गया के वो मेरे जैसे ही सेक्सी मिजाज की है। फिर वो कुछ देर बाद में वापिस आई तो उसके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी। उसके हाथ में ब्रा पैंटी थी और साथ में कुछ किताबें भी थी। फिर उसने वो किताबें तो मेरे पास छोड़ दी और फिर वो मेरे पास खड़ी हो गई। फिर मैंने वो किताबें देखी तो देखा के वो नंगी औरतों वाली मैगजीन थी। फिर मैंने उससे कहा के वो दूसरी किताबें लेकर आनी थी। फिर वो बोली के मैं अलमारी से लेकर आई थी और जो मेरे हाथ मे जो आई वो मैं ले आई। फिर मैं बोला के कोई बात नहीं। 

 

फिर वो झाड़ियों में चली गई और मैं वो किताबें देखने लगा। फिर जब वो झाड़ियों से निकलकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया। वो पिंक ब्रा पैंटी में थी और बहुत ही सेक्सी लग रही थी। वो मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और शर्माने लगी। फिर मैं बोल के शरमाओ मत हिरोइन की तरह चलकर दिखाओ जैसे कल रात को चल रही थी तो वो वैसे ही चलने लगी तो उसे देखकर तो मेरा लंड तो पूरा खड़ा हो गया। बेटी फिर कुछ और भी ब्रा पैंटी चेंज करके आई। वो सब में बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर मैंने उसे कहा के तुम बहुत सेक्सी हो। ये सुनकर वो शर्मा गई। फिर वो काफी देर तक मेरे सामने बस ब्रा पैंटी में ही रही। फिर वो बार बार चेंज करने के लिए झाड़ियों मे जा रही थी तो फिर मैंने उससे कहा के वो मेरे सामने ही चेंज कर सकती है क्योंकि मैं कल रात को तुम्हें नंगी देख चुका हूँ तो ये सुनकर वो हंसने लगी। फिर वो मेरे सामने ही चेंज करने लगी। वो नंगी और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। उसे नंगी देखकर मैंने सोचा के जब इसे ही शर्म नहीं आ रही है तो मैं क्यों शर्म करूँ। फिर मैं अपना लंड बाहर निकालकर हिलाने लगा तो मेरा लंड देखकर वो शर्माने लगी। लेकिन कुछ नहीं बोली और फिर मैंने जमकर लंड हिलाया और फिर झड़ गया। उस दिन मुझे झड़ने में बहुत ही मजा आया था। 

 

फिर जब अंधेरा होने लगा तो बेटी ने कपड़े पहन लिए और हम वापिस घर आ गए। फिर खाना वगेरह खाकर मैंने बीवी को दवाई दे दी तो वो सो गई और फिर मैं बेटी के कमरे मे आया तो बेटी तब ब्रा पैंटी में ही थी। फिर मैं जाकर चारपाई पर बैठ गया और अपना लंड निकालकर सहलाने लगा और बेटी मेरे सामने ही अलग अलग रंग की ब्रा पैंटी पहन रही थी। फिर मैंने अपना पूरा पायजामा खोल दिया और कुर्ता भी खोलकर पूरा नंगा हो गया और पास पड़ी नंगी औरतो वाली मैगजीन भी खोल ली और फिर जोर जोर से लंड हिलाने लगा। तब बेटी दूसरी ब्रा पैंटी पहन रही थी तो मैंने बेटी से कुछ देर के लिए नंगी ही रहने के लिए कहा तो बेटी फिर नंगी ही खड़ी रही और मैं और तेजी से लंड हिलाने लगा और फिर मेरे लंड का पानी निकलकर चारपाई पर और फर्श पर गिरने लगा और फिर मैं शांत होकर चारपाई पर लेट गया । फिर बेटी एक कपड़ा लेकर नंगी ही मेरा पानी पोंछने लगी और फिर वो कपड़े पहनकर मेरे साथ ही आकर सो गई क्योंकि मैं उसी की चारपाई पर सोया था और उस कमरे में एक ही चारपाई थी। 

 

फिर मैंने उसे पकड़कर सो गया और उससे माफी मांगने लगा के मैं उसके सामने ये काम करता हूँ। फिर वो बोली के मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। मैं आपको समझती हूँ। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। फिर मैं भी बोला के मैं भी उससे बहुत प्यार करता हूँ। फिर हम एक दूसरे से चिपक कर सो गए। मैं तो नंगा ही सो गया। फिर सुबह जाग आई तो मैं लूँगी बांधकर कमरे से बाहर आया तो देखा के बेटी ब्रा पैंटी में ही घर का काम कर रही थी। फिर मैंने उससे कहा के तुम्हारी मम्मी देख लेगी तो। फिर बेटी बोली के मैंने मम्मी को चाय दे दी है अब बस उन्हे खाना देना है और उसमें काफी टाइम है अभी। मम्मी कमरे से बाहर कहाँ आती है जो वो देख लेगी। फिर ये सुनकर वो हंसने लगी और फिर मैं भी मुस्कुराने लगा और फिर मैंने अपनी भी लूँगी खोलकर फेंक दी तो मुझे नंगा देखकर वो जोर से हंसने लगी तो मैंने उसके पास जाकर उसके मुँह पर हाथ रख दिया। क्योंकि तब हम बीवी के कमरे के पास ही खड़े थे। 

 

फिर उस दिन के बाद से मेरी और बेटी की जिंदगी ही बदल गई। बेटी अब अपनी मर्जी से ब्रा पैंटी में रह रही थी और मैं उसे देखकर अपना लंड खूब हिला रहा था तो अब हम दोनों की ही मनोकामना पूरी हो रही थी। फिर धीरे धीरे हम आपस में और ज्यादा खुलते चले गए। फिर बेटी मेरे साथ नंगी ही सोने लगी और मैं भी उसकी गाँड पर अपना लंड रगड़कर झड़ जाता। फिर बेटी का भी सेक्स करने का मन करने लगा तो वो अपनी चुत में उंगली करने लगी। हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठकर अपने लंड और चुत को सहलाते और फिर झड़ जाते। फिर धीरे धीरे वो मेरा लंड सहलाने लगी और मैं उसकी चुत सहलाने लगा। हम तब काफी गरम हो जाते। फिर एक दिन मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने बेटी की चुदाई कर दी तो बेटी को चुदाई में काफी मजा आया। फिर तो हम रोज ही चुदाई करने लगे। बेटी की छुट्टी होती उस दिन तो हम पूरा पूरा दिन बिस्तर से नीचे ही नहीं उतरते और खूब चुदाई करते। मैं बेटी को घर के पीछे जंगल में ले जाकर भी खूब चोदता और वहाँ उसे पूरा पूरा दिन नंगी ही रखता। 

 

फिर इसी तरह दो साल निकल गए। फिर बेटी ने कॉलेज मे प्राइवेट एडमिसन ले लिया तो वो अब घर पर ही रहती और बस पेपर देने ही कॉलेज जाती थी। फिर मैंने एक नया फोन भी ले लिया तो फिर उस फोन से बेटी सारा दिन अपनी फोटो खींचती रहती और फोन को अपने फोटो और विडिओ से भरकर ही रखती। बेटी अपने नंगे फोटो भी काफी लेती और हम चुदाई करते टाइम विडिओ भी बनाते थे। फिर हम ऐसे ही मस्ती करते रहे। फिर बीवी की तबीयत बिगड़ने लगी और फिर कुछ दिन बाद बीवी चल बसी। फिर मेरे जो थोड़े बहुत रिश्तेदार थे वो घर पर आए और कई दिन तक शोक चलता रहा। जिस दिन बीवी चली उस दिन रात को भी मैंने और बेटी ने चुदाई की थी जंगल मे जाकर। फिर जब तक सब रिश्तेदार घर पर रहे तो हमने हर रात जंगल में जाकर खूब चुदाई की। 

 

फिर शोक पूरा होते ही सब चले गए। फिर तो अब घर में अब हम दोनों ही बचे थे तो हम सुबह शाम, दिन रात चुदाई करने लगे। हम हर समय नंगे ही रहते और खूब मस्ती करते। बेटी ने अपने कमरे की दीवारों पर नंगी औरतो की मैगजीन से फोटो काटकर लगा रखे थे। जिन्हे देखकर हम और भी गरम हो जाते। इसी तरह बेटी ने कॉलेज की पढ़ाई कर ली और बेटी ने मेरे सामने हिरोइन बनने की इच्छा प्रकट की तो मैंने उसकी इच्छा खुशी खुशी मान ली और फिर हम दोनों बाप बेटी अपना घर छोड़कर मुंबई चले गए और फिर वहाँ जाकर रहने लगे और इधर उधर एक छोटे से रोल के लिए चक्कर काटने लगे। फिर धीरे धीरे हमें सब बातें पता चलनी शुरू हो गई। हमें दूसरी लड़कियों ने बताया के रोल के लिए डायरेक्टर के साथ एक रात सोना पड़ता है। फिर मैंने बेटी से कहा के बस सेक्स ही तो करना है चाहे मुझसे करो या किसी और से क्या फर्क पड़ता है और वैसे भी कुछ पाने के लिए तो कुछ खोना ही पड़ता है। फिर बेटी ने एक डायरेक्टर के साथ रात बिताई तो उसे एक छोटा सा रोल मिला। 

 

 

फिर इसी तरह कई और छोटे छोटे रोल के लिए बेटी कई डायरेक्टर के साथ और सोई। फिर एक बार तो वो 2-3 डायरेक्टर के साथ एक साथ सोई। तब बेटी एक डायरेक्टर के घर गई थी और मैं भी उसके साथ गया था। फिर वो सब घर के बाहर लॉन मे ही बैठे थे और बेटी उन सबके सामने नंगी बैठी थी। फिर उन्होंने एक एक करके उसकी चुदाई की। मैं ये सब छिपकर देख रहा था। फिर इसी तरह बेटी एक साथ 4-5 मर्दों से भी चुदी। बेटी को इतने सारे मर्दों से चुदता देखकर मैं भी बहुत गरम हो जाता और फिर वहीं बैठकर लंड हिलाता और फिर सुबह बेटी को लेकर वापिस आता तो फिर उसकी खूब चुदाई करता। इसी तरह चलता रहा और बेटी रोल के लिए चुदती रही लेकिन फिर भी कोई खास रोल नहीं मिला। हम कई साल तक मुंबई में रहे। चुद चुदकर बेटी की गाँड और बोबे काफी सेक्सी हो गए थे और वो अब और भी ज्यादा सेक्सी लगने लगी थी। फिर आखिर में बेटी बोली के पापा इनसे चुद चुदकर इनकी रखैल बनने से अच्छा है के हम वापिस गाँव चलते है और वहाँ आप मेरी शादी कर देना। मुझे अब नहीं बनना हिरोइन। फिर बेटी की बात सुनकर मैंने उसे फिर से कोशिश करने के लिए कहा लेकिन इस बार भी रिजल्ट ज़ीरो ही था। 

 

फिर थक हारकर हम वापिस गाँव आ गए और मैं बेटी के लिए लड़का ढूँढने लगा। फिर एक दिन मेरे घर पर गाँव का सरपंच आया। वो काफी बड़ा आदमी था। फिर उसने मेरी बेटी को देखा तो उसने फिर उसका हाथ अपने बेटे के लिए मांग लिया। सरपंच का बेटा कम दिमाग का था पर उसके पास काफी धन था बेटी ऐसों आराम से रह सकती है। फिर मैंने बेटी से भी पूछा तो बेटी भी मान गई इस रिश्ते के लिए। फिर मैंने बेटी की शादी करवा दी और फिर वो सरपंच कर घर रहने लगी। सरपंच का बेटा चुदाई करने लायक नहीं था पर बेटी को तो हर रात चुदाई की आदत पड़ चुकी थी। फिर बेटी परेशान रहने लगी। फिर धीरे धीरे सरपंच ने बेटी से नजदीकियाँ बढ़नी शुरू कर दी और फिर उन्होंने आपसे में सेक्स कर लिया। सरपंच काफी कड़क आदमी था तो वो बेटी को चोदकर संतुष्ट कर देता था। फिर बेटी ने मुझे जब ये बताया तो मैंने उसे कुछ नहीं कहा। फिर वो अपने ससुर से मजे करती रही और फिर वो अपने ससुर से प्रेग्नेंट हो गई और उसके एक बेटा हो गया। फिर वो सब के सामने तो अपने भोले पति के साथ रहती और रात को अपने ससुर के साथ मजे करती। 

 

मैं वैसे तो अपने घर पर ही रहता और मेरा खाना वगेरह बेटी भेज देती थी सुबह शाम। पर कई बार सरपंच की हवेली चला जाता और फिर कुछ दिन वहीं रहता। फिर एक बार मैं हवेली गया हुआ था और मुझे हवेली में रहते हुए कई दिन हो चुके थे तो मैं देखता था के रात को खाने के बाद बेटी सरपंच के कमरे में चली जाती और फिर वो दोनों खूब चुदाई करते। फिर मैं उन्हे खिड़की से रोज रात को देखने लगा। इसका बेटी को पता था। फिर सरपंच तो बेटी की चुदाई करके सो जाता तो बेटी नंगी ही मेरे पास आ जाती और फिर मैं बेटी की चुदाई करता और फिर बेटी वापिस जाकर सरपंच के साथ सो जाती। कई बार तो सरपंच बेटी की रात रात भर चुदाई करता तो फिर बेटी मेरे पास नहीं आ पाती थी और मैं लंड हिलाता हुआ ही रह जाता। फिर ऐसा ही एक रात हो रहा था सरपंच बेटी को चोदे जा रहा था और आधी रात हो चुकी थी। उस रात सरपंच का बेटी को पूरी रात चोदने का कार्यक्रम था और मैं कमरे से बाहर खड़ा खड़ा ये सब देख रहा था। 

 

मैं तब नंगा हो चुका था और अपना लंड हिलाए जा रहा था। फिर कई देर चोदने के बाद सरपंच झड़ गया तो वो आराम करने लगा और बेटी भी सीधी लेटकर आराम कर रही थी। फिर मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उनके कमरे में घुसा और सीधा बेड पर जाकर बेटी की चुत में अपना लंड डालकर करना लगा। सरपंच तब आँखें बंद करके लेटा था तो तब उसे बेटी की सिसकारियाँ सुनाई दी और बेड पर हलचल महसूस हुई तो उसने मुझे जब बेटी से करते हुए देखा तो देखता ही रह गया और वो बिल्कुल हैरान हो गया। फिर मैं कुछ देर के बाद जब झड़ गया तो मैं बेटी के साइड में लेट गया और अब बेटी हम दोनों के बीच लेटी हुई थी। सरपंच को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। फिर मैंने और बेटी ने मिलकर सरपंच को सब बताया के कैसे मैंने बेटी से पहली बार किया और कैसे बेटी ने मुंबई ने डायरेक्टर से चुदवाया और एक साथ कई मर्दों के साथ चुदाई की। फिर मैंने कहा के मुझे पता के बेटी का बेटा भी आपका ही है। पर मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। ये सुनकर सरपंच सब कुछ समझ गया। फिर सरपंच कहने लगा के आपकी बेटी है ही ऐसी के आप भी खुद को इसे चोदने से नहीं रोक पाए तो और कोई खुद को कैसे रोक पाएगा। 

 

सरपंच की बात सुनकर मैं और बेटी हंसने लगे। फिर मैंने और सरपंच ने मिलकर बेटी की सारी रात चुदाई की। फिर रोज रात को हमारा यह कार्यक्रम चलने लगा। फिर हमने महल से बाहर भी बेटी को कई बार चोदा। फिर सरपंच धीरे धीरे बूढ़ा होता गया तो वो अब बेटी को ज्यादा अच्छे से नहीं चोद पाता था और फिर मैं अकेला भी बेटी को कैसे खुश रखता। सरपंच के पास कई लठैत थे। वो काफी पहलवान थे। फिर बेटी ने उनसे सेक्स करने को कहा तो सरपंच ने फिर सरपंच ने इजाजत दे दी और फिर मैंने भी इजाजत दे दी। फिर सरपंच ने उनमें से एक लठैत को अपनी हवेली बुलाया शाम को। फिर मैं और सरपंच तो हवेली के बाहर लॉन में बैठकर शराब पीने लगे और फिर वो लठैत आ गया। फिर बेटी भी अंदर से आ गई और फिर वो हमारे सामने ही नंगी हो गई। ये देखकर लठैत कुछ समझ नहीं पाया। फिर बेटी लठैत के पास गई और उसके कपड़े खोलने लगी। फिर लठैत सरपंच की तरह देखने लगा तो फिर सरपंच ने उससे कहा के तुझे आज इसे खुश करना है। फिर ये सुनकर लठैत खुश हो गया। फिर बेटी ने उसे नंगा कर दिया और फिर उसका लंड सहलाने लगी। फिर उसका लंड पूरा खड़ा हो गया तो बेटी फिर उसका लंड चूसने लगी। फिर थोड़ी देर चूसने के बाद बेटी ने उसे नीचे लेटाया और फिर उसके ऊपर आकर उसके लंड पर बैठकर ऊपर नीचे होने लगी। ये देखकर मैं और सरपंच भी गरम हो गए तो फिर हम भी नंगे होकर बैठ गए और अपने लंड हिलाने लगे। 

 

फिर वो लठैत झड़ने लगा तो फिर बेटी उसका लंड फिर से चूसने लगी और उसका सारा पानी पी गई। फिर करने के बाद बेटी हमारे साथ आकर बैठ गई और फिर उसने भी एक पैग पिया। फिर उस लठैत को भी एक पैग दिया। फिर हम उठकर अंदर चले गए तो फिर अंदर जाते ही पहले सरपंच ने बेटी से किया और फिर वो जल्दी ही झड़ गए तो फिर वो जाकर दूसरे कमरे में सो गए। फिर मैं बेटी से करने लगा। फिर मैंने बिना झड़े ही अपना लंड बेटी की चुत से बाहर निकालकर बेटी की साइड में लेट गया और फिर उस लठैत से बेटी की चुदाई करने के लिए कहा तो फिर वो बेटी के ऊपर आकर बेटी की चुदाई करने लगा। बेटी मेरे साथ ही लेटी लेटी किसी और मर्द से चुद रही थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिला रहा था। फिर लठैत झड़ने वाला हुआ तो फिर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और फिर मैं बेटी की चुदाई करने लगा। फिर ऐसे ही करते करते हम पूरी रात करते रहे। फिर मैंने और लठैत ने बेटी से एक साथ किया और फिर झड़कर सो गए। उस रात बेटी को काफी मजा आया। फिर वो लठैत ऐसे ही कई दिन आकर बेटी की चुदाई करता रहा। फिर बेटी का उससे मन भर गया तो फिर बेटी ने दूसरा लठैत बुला लिया। फिर ऐसे ही करते करते बेटी 10-12 लठैतों से चुद चुकी थी। फिर बेटी दो दो लठैतों को बुलाने लगी और उनसे सारी रात मजे करती। फिर तो दिन में भी बेटी उनसे चुदने लगी। 

 

फिर सरपंच चल बसे तो अब बस मैं, बेटी और उसका बेटा ही रह गए थे। बेटी का बेटा यानि मेरा नाती बड़ा हो रहा था लेकिन फिर भी बेटी को इसकी कोई फिक्र नहीं थी और वो वैसे ही मर्दों से चुदवा रही थी। फिर मेरा नाती बड़ा हो गया तो उसे भी अपनी माँ की इस चुदाई करवाने की इस आदत का पता चला और उसे ये भी पता चला के वो अपने बाप की नहीं बल्कि अपने दादा की औलाद है। पर इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने इन बातों को बहुत आसानी से स्वीकार कर लिया। सरपंच के काफी प्रॉपर्टी थी तो मैं तो उसका हिसाब किताब करने में लगा रहता और बेटी सारा दिन बस अपने कमरे में चुदाई करवाती रहती और मेरा नाती मन करता तो स्कूल चला जाता वरना घर पर ही रहता। वो जवान हो रहा था तो उसका लंड भी खड़ा होने लगा था। बेटी को शर्म तो किसी से आती हीं नहीं थी तो वो अपने बेटे के सामने और घर के बाकी सब नौकरों के सामने घर पर नंगी ही घूमती रहती। अपनी मम्मी को ऐसे देखकर मेरा नाती गरम हो जाता। फिर जब बेटी और मर्दों से चुदवाती तो ये देखकर नाती गरम हो जाता और उसे गुस्सा भी आता। नाती जवान था और उसका गरम खून था तो एक दिन उसने अपनी मम्मी को पकड़ कर चोद दिया। बेटी को भी अपने बेटे से चुदकर कफी मजा आया और वो बहुत खुश हुई। फिर वो अपने बेटे से भी चुदवाने लगी। फिर अपने बेटे के सामने ही वो और मर्दों से भी चुदवा लेती, नाती को इससे कोई दिक्कत नहीं थी। 

 

बेटी को नंगी देखकर मैं भी गरम हो जाता तो फ्री मैं भी सबके सामने बेटी की चुदाई कर देता और बेटी भी दिल खोलकर चुदाई करवाती। फिर मेरा नाती घर की नौकरानियों को और गाँव की औरतो को चोदने लगा और इसके बदले उन्हे खूब पैसे देता। उधर बेटी भी पास के कमरे में घर के नौकरों से चुदवाती रहती। इस प्रकार वो दोनों माँ बेटे बस चुदाई मे ही मशगूल रहते। इस प्रकार बेटी अपनी पूरी जिंदगी चुदाई के मजे लेती रही और उधर मेरा नाती भी अनेकों औरतो को चोद चुका था। फिर नाती की शादी हो गई तो फिर वो अपनी बीवी को दिन रात चोदने लगा। फिर उसके एक बेटा हो गया। फिर उसकी बीवी भी बेटी की तरह सब के सामने मेरे नाती से चुदवा लेती। उसे भी कुछ शर्म नहीं आती थी। इस प्रकार जिंदगी भर मैंने बेटी की जवानी के पूरे मजे लिए। 

 

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