कामवासना डॉट नेट

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घर है या रंडीखाना - 5      अब आगे... 

 

लिंग की चमड़ी में वो कोमल सा अहसास,

 

“आह “

 

मेरे मुह से अनायास ही निकले हुए शब्द थे…….

 

मैं अभी अर्धसुषुप्त अवस्था में था,ना जगा ही था ना ही पूरी तरह से सोया था,अपने लिंग की कसावट कुछ महसूस हो रही थी ,

 

ना जाने समय क्या हुआ था लेकिन मुझे लग रहा था की मैं सपनो में खोया हुआ हु,लेकिन धीरे धीरे ही मुझे अहसास हुआ की मैं जाग रहा हु ,और सचमे कोई गीली सी और कसी हुई चीज मेरे लिंग में घर्षण कर रही है…..

 

मेरे हाथ अनायास ही नीचे चले गए सोचा की सपने में शायद मजा आ रहा हो तो हाथो से ही शांत कर लू,

 

लेकिन ये क्या ????

 

नीचे किसी के कोमल बालो का संपर्क मेरे हाथो में हुआ ,मैं थोड़ा चौका …

 

“:आह”

 

मजे के अतिरेक में फिर के मेरे मुह से निकला…

 

ओह क्या अहसास था,मेरी लिंग की चमड़ी को चूसा जा रहा था,जिससे वो फैल गई थी और मेरे हाथ उस सर पर रख गए जो की उसे चूस रही थी …

 

मुझे याद आया की मैं कहा हु और वो कौन हो सकती है जो मुझे ये सेवा दे रही थी ,कमरे की खिड़कियों से आती हुई धूप से इतना तो समाज आ चुका था की ये मेरे जागने का समय है ,मैं अपने सर को हल्के से उठा कर देखने की कोशिस की …..

 

मेरे इस हलचल से निशा कोई भी समझ आ गया था की मैं जाग चुका हु,उसने अपना सर उठाया और हमारी आंखे मिली…………

 

जैसे नए जोड़े सुहागरात के बाद शर्मा रहे हो ,निशा के चहरे में मुझे देखते ही लाली आ गई ,लेकिन मैं उत्तेजित था,मैंने उसे प्यार से देखा और अपना हाथ उसके सर पर रखकर उसे हल्के से दबा दिया ,वो जैसे ,मेरा इशारा समझ गई थी और उसने फिर से मेरे लिंग में अपना मुह गड़ा दिया ….

 

कल तक जिस बहन के लिए मैं दुनिया की हर खुसी लाने को तैयार था आज वो मेरे जांघो के बीच मेरे लिंग को चूस रही थी ,...

 

मैं भी क्या करता असल में यही तो उसके लिये जीवन की सबसे बड़ी खुसी थी …..

 

जिस बहन को अपने बांहो में झुलाया था,जिसके इज्जत की पिता की तरह रक्षा करने की कसम हर रक्षाबंधन में खाई थी आज उसकी उसी इज्जत का मैं लुटेरा बन गया था,या शायद ये कहु की मैं उसकी इज्जत का मलिक था…….

 

जिसके कदमो में दुनिया बिछाने के ख्वाब देखे थे वो आज खुद मेरे लिए नंगी बिछी पड़ी थी ,......

 

 

 

गीले गीले होठो की लार मेरे लिंग से मिलकर मुझे सुकून दे रही थी और ना जाने निशा को क्या सुख दे रही थी की वो और भी जोरो से इसे चूसने लगी ,मैं अपने चरम में पहुचने वाला था…

 

“ओह मेरी रानी बहन चूस भइया का …….ओह नही “

 

मेरे मुख से ना जाने क्यो ये निकलने लगा था ..

 

वो इस बात के परेशान होने की बजाय और भी मस्ती में आ जाती थी और जोरो से चूसना शुरू कर देती थी ,उसके होठो से लार नीचे टपकने लगा था वही मेरी हालत और भी खराब हो रही थी ..

 

सांसे फूल रही थी और उसके मुख का चोदन कर रहा था,मैं अपने कमर को उठा उठा कर उसे स्वीकृति दे रहा था और वो भी अपने भाई के लिंग को पूरी तल्लीनता से चूस रही थी ,उसे देखकर तो ऐसा लग रहा था की उसे फिर खाने को कुछ ना मिलेगा और यही धरती पर एक ही चीज है जिसे चूसकर वो अपनी भूख मिटा पाएगी

 

वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी …..

 

मैंने उसे अपने ऊपर आने का संकेत दिया ,

 

वो मेरे ऊपर चढ़ गई ,

 

मैं उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगा,मेरे ही वीर्य के कुछ बून्द मेरे ही होठो में आ रहे थे……

 

हम दोनो ही मुस्कुरा उठे ,ये वो पल था जब हमारे बीच की सभी दीवारे ढह गई ,

 

सेक्स तो उत्तेजना में भी हो सकता है लेकिन जब बिना किसी अवरोध और उत्तेजना के भी जिस्म मिल जाए और ग्लानि की जगह जब होठो की मुस्कुराहट ले ले तो समझो की दीवार गिर गई ……………… …

 
“केशरगढ़ के महल उस खण्डर में जाकर के क्या करोगे साहब “
 
उस छोटे से और भद्दे से आदमी ने कहा ..
 
“तुझे क्या करना है तू चल रहा है की नही “
 
मैंने उसे घूरा ,ये गाइड के रूप में मुझे दिया गया था ये हमे पूरा केसरगढ़ घुमाने वाला था,”
 
“अरे साहब नाराज क्यो होते है छलिए छलिए लेकिन वँहा घूमने लायक कोई जगह नही है “
 
मैंने उसे फिर से घूरा क्योकि मेरी बहने उसकी बात को सीरियसली ले सकती थी लेकिन मुझे डॉ ने वही मिलने को कहा था,
 
“तू चल ना यार क्या नाम है तुम्हारा “
 
“छेदीलाल छिछोरे “
 
“क्या हा हा हा “निशा जोरो से हँस पड़ी ,पूर्वी के साथ साथ मैं भी मुस्कुरा उठा ,
 
“ये कैसा नाम है छिछोरे ??”
 
लेकिन उस शख्स ने हमारी बात का बिल्कुल भी गुस्सा नही किया जैसे उसे पता ही हो की हम ऐसा ही कुछ रिएक्ट करेंगे ,
 
“वो क्या है सर मैं छ को छ बोलता हु “
 
उसने अपने बड़े बड़े सड़े हुए दांत हमे दिखाए
 
“वो तो सभी छ को छ ही बोलते है “
 
पूर्वी बोल पड़ी
 
“नही मेडम आप समझी नही मैं छ को छ बोलता हु “
 
हम सभी कन्फ्यूज़ थे तभी एक स्टाफ वाले ने हमे देख लिया ,
 
“सर वो ये कह रहा है की वो च को छ बोलता है ,और इसका नाम छेदीलाल चिचोरे है “
 
“बड़ा अजीब सरनेम है है यार तुम्हारा “
 
वो फिर से अपने सड़े हुए दांत मुझे दिखा दिया ,मेरी बहने थोड़ी सी हँसी लेकिन इस बार ज्यादा नही …
 
“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “
 
हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,
 
“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “
 
छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई
 
“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”
 
पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,
 
“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “
 
दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …
 
अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..
 
“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “
 
ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,
 
“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “
 
वो मुस्कुराई ,
 
“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली
 
“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “
 
मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…
 
मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,
 
“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “
 
मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …
 
काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,
 
“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “
 
डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …
 
“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “
 
इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….
 
 

“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “

 

हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,

 

“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “

 

छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई

 

“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”

 

पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,

 

“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “

 

दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …

 

अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..

 

“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “

 

ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,

 

“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “

 

वो मुस्कुराई ,

 

“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली

 

“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “

 

मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…

 

मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,

 

“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “

 

मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …

 

काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,

 

“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “

 

डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …

 

“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “

 

इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….

 

मैं अभी अपनी बहनों के साथ मलीना मेडम के घर में बैठा हुआ था,वो मेरी बहनों से ऐसे घुल गई थी जैसे की वो उन्हें बहुत सालो से जानती हो ,डॉ निशा के नजर में आये बिना ही वँहा से जा चुका तथा शायद निशा को डॉ की जानकारी थी,मलीना मेडम हमे लंच के लिए अपने साथ ही ले आयी थी,मैं सोफे में बैठा इधर उधर देख रहा था वही मेरी बहने मेडम से गुफ्तगुह करने में व्यस्त थी ,मेरी नजर एक तस्वीर पर पड़ी और मेरी आंखे चौड़ी हो गई ,अभी तक तो मुझे डॉ और मलीना की हरकते ऐसे भी समझ नही आ रही थी लेकिन इस तस्वीर से तो मैं और भी परेशान हो गया था..

 

तस्वीर में एक लड़का और दो लडकिया थी ,अजीब बात थी की मैं दोनो ही लड़कियों को पहचानता था,लड़के के एक बाजू में खड़ी थी मलीना मेडम और दूसरे में जो खड़ी थी उसे मैं अभी तक काजल की माँ के रूप से ही जानता था,जी हा मुझे काजल ने उसी औरत को अपनी माँ कहा था,जो की उसके बचपन में ही गुजर गई थी ,बीच का शख्स मेरे लिए अनजान था जिसके हाथो में एक छोटी सी बेबी थी ,उसकी आंखे मुझे काजल की याद दिलाती थी ……..

 

क्या वो सच में काजल है ???

 

अगर ऐसा है तो क्या काजल मलीना की बेटी है या फिर उस औरत की जिसे काजल अपनी माँ कहती है,क्या काजल का नाम काजल ही है या फिर श्रुति जैसा की मलीना ने कहा ….

 

बहुत से सवाल मेरे दिमाग में थे ,सबसे बड़ी ये बात थी की अगर मलीना सच बोल रही है तो ऐसी क्या मजबूरी हो गई की काजल को अपना नाम बदलना पड़ा..और मुझसे ये बात छुपानी पड़ी ……..

 

“ये किसके साथ फ़ोटो खिंचाया है आपने “

 

काजल वो फ़ोटो देखकर बहुत ही उत्त्साहित लग रही थी जो की निशा ने अपने वाट्सअप के स्टेटस में डाला था,जिसमे निशा ने मेरे,पूर्वी और मलीना मेडम के साथ सेल्फी ली थी ..

 

“पहचानो ..तुम इन्हें जानती हो “

 

“हा जानती तो हो मैं इन्हें ,इन्ही की तो पुस्तके पढ़ती रही हु मैं ,मेडम मलीना “

 

काजल ने ऐसे कहा जैसे पुस्तको के अलावा मलीना से उसका कोई संबंध ही नही था,क्या वो सच में झूट बोलने में इतनी माहिर थी की अपनी माँ को पहचानने से भी इतने सफाई से इनकार कर दे …

 

“हम्म ये केशरगढ़ के किले में मिली हमे ,निशा और पूर्वी सके अच्छी ट्यूनिंग हो गई तो उन्होंने अपने घर खाने पर बुला लिया …”

 

“वाओ बहुत ही अच्छा “

 

झूट बोलने वाला कितना भी महारथी क्यो ना हो कुछ कमियां तो हर इंसान में होती है,काजल की आवाज थोड़ी धीमी हो चुकी थी शायद वो अपने भरे हुए गले को छुपाने की कोसीस कर रही थी ,मैंने उसे थोड़ा और कुरेदने की सौची शायद मैं जान पाउ की वो सच में भावनाओ में है या नही ..

 

“मैंने उन्हें तुम्हरे बारे में बतलाया वो बहुत खुस हुई की तुम उनके किताब की दीवानी हो “

 

काजल थोड़ी देर को चुप थी,

 

“फ़ोटो भी दिखाई क्या मेरी “

 

“ओ यार भूल गया ,कल दिखाऊंगा “

 

“नही ……..वो नही क्या जरूरत है “

 

लेकिन तब तक उसकी नही ने मेरे दिमाग में पूरा मामला साफ कर दिया था ,वो नही को थोड़ा जोर से बोल गई थी जिसका शायद आभास उसे भी हो गया था ,दोनो में कुछ तो संबंध जरूर है वरना कहा पुरातत्व विज्ञान और कहा वो मैनेजमेंट की लड़की ,मुझे तो पहले भी ये बात अजीब लगती थी की क्यो काजल उनकी और सिर्फ उनकी ही किताब पढ़ती है ..

 

“हम्म्म्म ओके …….”

 

“जान आपकी बहुत याद आ रही है “

 

काजल ने बात को बदलने की कोशिस की ,मुझे उसकी आवाज में वो भारीपन मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,समझने में कोई भी देरी नही लगी की ये बातो को घूमना चाहती है वरना उसे मेरी याद आएगी और वो इतनी दुखी हो जाएगी की उसकी आवाज ही भर जाए ये तो मुझे मुमकिन नही लगता था ,,,,

 

“तुम भी आ जाओ फिर यंहा ,अच्छी जगह है ,एक दो दिन और रुकने की सोच रहा हु “

 

“नही ..मत रुको जल्दी आ जाओ ,,मैं अपने काम कर कारण वँहा नही जा सकती “

 

वो मुझे आकर्षित करने के लिए अपनी आवाज को नशीली बनाने लगी …

 

“आ जाओ ना मुझे मसलने “उसने बड़ी ही सेक्सी अदा में कहा ..

 

“तुम्हे मसलने के लिए तो खान वँहा बैठा है “

 

मैंने एक व्यंग कर दिया जिससे वो बुरी तरह से बौखला गई

 

“तुम ...तूम ना ….कितनी बार कहा की ये सब को हमारे बीच में मत लाओ …”

 

उसके आवाज से नाराजगी साफ साफ थी..मैं जोरो से हँसने लगा ..

 

“अच्छा छोड़ो उसे मैं एक दो दिन में ही आता हु ,और तुम्हे कुछ चाहिए यंहा से …”

 

“बस तुम आ जाओ और कुछ भी नही चाहिए “

 

काजल की आवाज में वो गर्मी अब नही रही ,मुझे लगा कि शायद मुझसे कोई गलती हो गई है .

 

“नाराज हो गई क्या ,लव यु जान “

 

मैं अपनी आवाज नरम करके बोलने लगा ..वो हल्के से हँसी

 

“बहुत सारा लव यु ….ऊऊऊम्म्मम्माआआ “

 

वो खुस थी और उसकी आवाज में चहक वापस आ गया था ..

 

“अब जल्दी आओ ,बहुत सी बाते करनी है तुमसे ..”

 
मैं काजल से बात करके पलटा ही था की दरवाजे में मुझे निशा दिखाई दी ,वो अपने बालो में उंगलिया फिराते हुए मुझे घूर रही थी ,उसके होठो में एक कातिल सी मुस्कान थी और वो अपने पारदर्शी कपड़ो से अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी ,जवानी के इस मोड़ पर उसके जिस्म में पूरा भराव आ चुका था और वो कपड़े को फाड़ डालने को बेताब हो रहा था,अब वो मेरी बहन नही रह गई थी की मैं उसके जिस्म के भराव को ना निहारु…
 
वो इठलाते हुए मेरे पास आयी ,और अपनी बांहे मेरे गले में डालकर झूल गई ….
 
“हम यंहा पर हनीमून मनाने आये है और आप मेरी सौत से लगे हुए हो “
 
उसकी मुस्कान में नाराजगी भी मिक्स थी ,मैंने उसे कुछ बोलना सही नही समझा और अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ,
 
सभी बाते बस तूफान में बह गई वो प्यार का तूफान था ये की हवस का ??????
 
मुझे लगता है की वो हवस का ही तूफान था क्योकि प्यार का रिश्ता तो हम पीछे छोड़ आये थे ………….
 
जिस्म की प्यास बुझ चुकी थी और मैं अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था ,बाहर मुझे छिछोरे दिखाई दिया ,मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई और उसकी हरकतों को देखने लगा,
 
वो नाम का ही नही काम का भी छिछोरा था ,
 
इसी रेस्टरूम में काम करने वाली एक महिला को पकड़े हुए दिखाई दिया ,वो दोनो झाड़ियों के पीछे थे लेकिन मैं दूसरी मंजिल में खड़ा हुआ था ,गार्डन की झाड़ियों के पीछे का दृश्य देखकर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ,क्योकि वो महिला शादीशुदा थी और छिछोरे के बीवी तो नही थी ……
 
“छेदीलाल “
 
मैं जोरो से चिल्लाय जिसे सुनकर वो दोनो ही अलग हुए और मुझे ऊपर खड़ा देख जैसे उनके प्राण ही सुख गए …
 
महिला दौड़ती हुई भागी वही छेदीलाल बस मूर्ति बना हुआ मुझे ताक रहा था ,मैं खिलखिला के हँस पड़ा ,मैं अपनी शर्ट पहन नीचे आया ही था की छेदीलाल मेरे पाव में गिर गया ..
 
“मुझे माफ कर दीजिये दीजिये साहब,किसी को मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वो अलग लेकिन इसका पति मार मार के मेरा भर्ता ही बना देगा “वो गिड़गिड़ाने लगा और मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई
 
“अच्छा पहले बोल की चंदू के चाचा ने चंदू के चाची को चांदी के चमचे से चटनी चटाई ..”
 
मैं मुस्कुराकर उसे देखने लगा ,वो हड़बड़ाया सा मुझे देखने लगा
 
“छंदू के छाछा ने छंदू के छाछि को छांदी के छमचे से छटनी छटाई”वो बड़ी ही मुश्किल से बोल पाया
 
मैं जोरो से हँस पड़ा और उसका मुह मुरझा गया ..
 
“अच्छा चल मेरा एक काम कर तेरा कमरा कहा है “
 
वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,मैं उसे लेकर उसके कमरे में चला गया
 
एक छोटा सा रूम था उसका ..
 
मैंने मोबाइल निकाल कर उसे काजल की तस्वीर दिखाई
 
“इसे पहचानता है “उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जिसका मतलब मुझे समझ आ रहा था की ये इसे जानता है …
 
……………..
 
“साहब आपके पास इनकी तस्वीर कहा से आयी “
 
“तू वो बता जिसे मैं पूछ रहा हु “
 
“जी साहब जानता हु ..”
 
वो हड़बड़ा रहा था …
 
“कौन है ये “
 
“श्रुति श्रुति मेमसाहब”
 
उसकी जबान बुरी तरह से लड़खड़ा रही थी लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल चुका था की काजल असल में कौन है ..इससे पहले की मैं और कुछ पूछता मेरा मोबाइल बज उठा ,नंबर डॉ का था ..
 
“उससे पूछने से तुम्हे तुम्हारे सवालों का सही जवाब नही मिलेगा ,कल तुम मुझसे मिलो अकेले में …”
 
उन्होंने पता तो बता दिया लेकिन मैं और भी चकित रह गया क्योकि डॉ मुझपर भी नजर रखे हुए था …..
 
 

मैं बड़ी मुश्किल से डॉक्टर से बोल पाता हु,

 

“वो चाहती क्या हैं, “

 

मैं झुंझलाया था …..

 

“वह चाहती क्या है यह तो शायद वही बता पाएगी ,लेकिन एक चीज मैं तुम्हें बता देना चाहता हूं की बदले की आग व्यक्ति से कुछ भी करा सकती है.. चाहे वह कितना ही कमजोर क्यों ना”

 

हो डॉक्टर की बात मेरी समझ में आ रही थी लेकिन फिर भी मैं असमंजस की स्थिति में था आखिर काजल इतना परेशान क्यो थी ?

 

क्या मेरा कोई वजूद नहीं था शायद उसके लिए….शायद नही वो मुझसे प्यार करती है , वह मेरे लिए बहुत मायने रखती थी रखती है और रखती रहेगी, मेरे सामने काजल का अतीत घूम रहा था उसके बचपन की यादें रह रहकर मुझे सता रही थी न जाने कितने दुख उसने झेले थे जिसके बारे में वह बात नहीं करती ..शायद उसने कभी मुझसे यह नहीं चाहा कि मैं उसका साथ दु या शायद वो जानती थी कि मैं उसका साथ नहीं दे सकता, बात इतनी आसान तो नहीं थी जितना मैं समझ रहा था उसने कई दुख देखे हैं जो मेरी समझ से परे हैं, काजल मेरी अपनी काजल मैं उसे कैसे किसी सीमाओं में बांध पाऊंगा वो हर सीमाओं से परे है ,उस पानी की तरह जो बस बहती जाती है,वह उस सावन की तरह है जो कब आएगी इसका अंदेशा किसी को नहीं , मैं दर्पण में खड़ा अपने अक्स को निहार रहा था ,परछाई... वह तस्वीरें... वह हल्की हवा की खुशबू ,महक का जादू अतीत की कही अनकही कहानियां थी जो मुझे जानने थी, मैं परेशान था व्याकुल था मेरा दिल गवाही नहीं दे रहा था कि वह गलत है और वही हुआ मुझे जितना भी अब तक पता चला मुझे यही समझ आया कि काजल गलत नहीं थी ना वह है और शायद वह नहीं होगी उसके साथ जो बीती थी वह एक दर्दनाक घटना थी शायद उसका रोग उसके जीवन में आज भी कायम था, मैं अपनी पलकें गड़ाए डॉक्टर को निहार रहा था डॉक्टर भी मुझे घूर कर देख रहा था,, जैसे जानना चाहता हो कि मेरे दिल में क्या चल रहा है…

 

आखिर उसने कहा

 

“ मैंने जो भी तुम्हें बताया है कभी इसका जिक्र काजल से मत करना न जाने उसके लिए कितनी बड़ी बात होगी वह हर चीज तुमसे छुपाना चाहती है, क्योंकि उसे पता है तुम्हें बताने से सिर्फ उसका दुख बढ़ेगा, उसे खुशी देना हो सके तो उस का साथ देना मैं जानता हूं कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन मैं जानता हूं कि तुम यह कर सकते हो…”

 

डॉक्टर वहां से उठ कर चला गया और मैं बस एक तक दिवाल को घूरता रहा…

 
घूमते-घूमते ना जाने मैं कहा जा रहा था, मैं उन जगहों में घूम रहा था जहां काजल की पूरी जिंदगी थी ,लेकिन उसने कितने राज अपने सीने में छुपाए हुए थे वह 2 साल पहले ही तो यहां आई थी लेकिन मुझे कभी पता नही चल पाया …
 
मैं उस होटल में पहुंचा जहां से इन सब की शुरुआत हुई थी नाम था आदित्य इंटरनेशनल
 
मैं बस निहारे जा रहा था वह एक शानदार होटल था...
 
वह वापस अपनी बहनों के साथ आया और लजीज खाने का लुफ्त उठा रहा था आसपास नजर दौड़ाई कुछ खास नहीं कुछ ऐसा नहीं जिससे मुझे संदेह हो..
 
“भइया खाना तो बहुत अच्छा है” निशा ने कहा
 
“ हां” मैंने जवाब दिया…
 
अचानक ही मैं बहुत गुस्से में आ गया
 
“यह सब क्या है” मैंने जोरों से कहा वहां पर बेटर तुरंत उपस्थित हुआ.
 
“ क्या हुआ सर”
 
“ यह क्या है”
 
मैंने प्लेट में पड़े हुए एक काक्रोच की तरफ इशारा किया ,वह बुरी तरह चौका
 
“ सर सर यह कहां से आया”
 
मैंने उसे घूरकर देखा,
 
“ यह खाना तुमने ही लाया था ना “
 
वह चकित हुआ
 
“ जी जी सर,पता नहीं सर यह कैसे हुआ”
 
लेकिन मैं क्रोधित था मैंने उसकी एक न सुनी
 
“अपने मैनेजर को बुलाओ “ मैं फिर जोर से बोला, वह डरता हुआ भागा थोड़ी देर में होटल का मैनेजर मेरे सामने था, वह मुझसे माफी मांग रहा था लेकिन मैंने एक तमाशा खड़ा कर दिया..
 
आखिरकार थक कर उन्होंने कुछ फोन किए,और मेरे होठो में मुस्कान खिल गई …
 
कुछ ही देर में वहां एक लंबा चौड़ा सा व्यक्ति आकर खड़ा हुआ और बड़ी नम्रता से मुझसे कहा
 
“सर जो भी हुआ उसके लिए हमें माफ कर दीजिए मैं इस होटल का मालिक हूं आपका खाना फ्री है और आशा करता हूं कि यह बात यहां से बाहर नहीं जाएगी “
 
मैंने उस व्यक्ति को घूरा और उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया जैसे वह समझ गया हो कि मैं मान गया हूं..
 
“ हेलो सर मेरा नाम अयूब खान है मैं इस होटल का मालिक हूं” मैंने अपना हाथ बढ़ाया वह कुछ 25 साल का शख्स था, दिखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम लग रहा था आयूब मैंने मन ही मन दोहराया अच्छा तो यह अजीम का भाई है, मेरे चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई…
 
आयूब को देख पूर्वी के चेहरे पर एक अलग स्वभाव आया .मैं उस को पहचानता था मैं जानता था की पूर्वी उसकी तरफ आकर्षित है ,यह इस उम्र की नजाकत थी कि किसी भी स्मार्ट और हैंडसम लड़के को देखकर एक लड़की तथा किसी भी खूबसूरत लड़की को देखकर एक लड़का आकर्षित हो जाए एक सामान्य सी बात है मैं उससे हंसकर बात करने लगा और थोड़ी देर में वह हमसे बहुत ही घुल मिल गया देखते ही देखते निशा और पूर्वी की उससे दोस्ती हो गई ,हमने उससे विदा लिया और उसे शहर आने का निमंत्रण दिया जब उसे पता चला कि मैं एक होटल का मैनेजर हूं तो वह मुझसे और भी खुल गया और जब उसे पता चला कि मैं रश्मि के साथ काम करता हूं तो उसका चेहरा अचानक सूख गया मैं उसकी भावनाओं को समझ सकता था ,मैंने हंसा
 
“ कोई बात नहीं जो हुआ सो हो गया लेकिन मुझे एक चीज समझ नहीं आती आखिर खान साहब के दो बेटे हैं तो क्यों अजीम को ही अपना बेटा मानते हैं या ये कहे कि दुनिया के सामने सिर्फ अजीम ही आता है मुझे तो आज तक पता नहीं था कि खान साहब के दो बेटे हैं”
 
उसका चेहरा और मुरझा गया उसने बात को बदलना चाहा और मैंने भी कोई जोर नहीं डाला क्योंकि मैं जानता था की असलियत क्या है और यही असलियत शायद मुझे काजल का बदला लेने में मदद करने वाली थी
 
“तो मुझे लगता है तुम्हें आयूब बहुत पसंद आया”
 
मैंने हंसकर निशा और पूर्वी से कहा ,पूर्वी तो जैसा शर्मा ही गई मैंने पहली बार उसे शरमाते हुए देखा था मैं भी थोड़ा हंसा और निशा भी क्योंकि मुझे पता था कि निशा का आकर्षण सिर्फ मेरे लिए है ..
 
लेकिन क्या मैं पूर्वी का इस्तेमाल करूंगा ???
 
शायद???
 
मेरे लिए यह सोचना भी पाप है लेकिन क्या सच में ??
 
मैं सोच में गुम हो गया मैं यही सोच रहा था कि क्या मैं सच में पूर्वी का इस्तेमाल करना चाहता हूं आयुष को फसाने के लिए.. शायद नहीं, शायद हां ,शायद पता नहीं,
 
मैं असल में दोनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता था मैं चाहता था जो हो बस हो जाए, अगर इस दौरान मुझे कुछ ऐसी चीज पता चले या कुछ ऐसा हो जाए जिससे मैं काजल की मदद कर सकूं तो शायद वह कार्य मुझे करना चाहिए और अगर ऐसा ना हो तो ???
 
जिस तरह मैंने आयूब व पूर्वी को नजर मिलाते देखा था मुझे लग रहा था इन दोनों के बीच कुछ तो खिचड़ी पक सकती हैं अभी मैं कुछ कह नहीं सकता था लेकिन पूर्वी मेरी सबसे प्यारी बहन है मेरे लिए यह करना बहुत मुश्किल था कि मैं उसे मछली के दाने की तरह इस्तेमाल करू, मैं उसे उसकी स्वतंत्रता में रहने देना चाहता था ,मैं चाहता था कि अगर वह प्यार करें तो सफल हो, मैं चाहता था कि वह खुश रहे और शायद इसी प्यार में और इसी खुशी में मुझे मेरी मंजिल मिल सकती थी, मैं सोच में गुम सा हो गया मुझे डॉक्टर की बताई बातें याद आ रही थी तो साथ ही पूर्वी का उस लड़के को देखना ,उन दोनों की निगाहों में एक अजीब सा आकर्षण एक दूसरे के लिए ,वह आकर्षण किसी भी नौजवान की आंखों में जब देखा जाता है तब बड़े ही आराम से बताया जा सकता है कि आखिर उनके दिल में चल क्या रहा है लेकिन क्या आयूब एक अच्छा लड़का है ??
 
मुझे नहीं पता था जितना मैं उसे जान सका या जितना मैंने दूसरों के द्वारा सुना था.. जी हां मैं आज दिनभर यही तो कर रहा था होटल आदित्य इंटरनेशनल की पूरी जानकारियां मेरे पास थे आयूब की जानकारी मेरे पास थी, जितना मैंने उसे जाना मुझे बस इतना ही समझ आया कि वह एक बड़ा सुलझा हुआ लड़का है शायद पूर्वी के लिए अच्छा है, शायद ना भी हो?
 
लेकिन मैं इन दोनों को स्वतंत्रता देना चाहता था देखना चाहता था कि आखिर कितनी आगे बढ़ते हैं खैर जो भी हो मैं थक चुका था जमाने भर के विचार मेरे दिमाग में घूम रहे थे और अब मुझे जरूरत थी आराम की और शायद उससे पहले निशा की…
 
 

पता नहीं क्यों लेकिन मुझे निशा की आदत सी पड़ रही थी उसका मुझे इतना प्यार करना मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मुझे इतना भी प्यार कर सकता है, रही बात काजल की मैं जानता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती हैं लेकिन वह मेरी बीवी थी और निशा मेरी बहन दोनों के व्यक्तित्व में जमीन आसमान का फर्क है, न जाने क्यों लेकिन मैं दिन-ब-दिन निशा की और आकर्षित होते जा रहा हूं ,जिसे मैंने निशा को बचाने के लिए शुरू किया था ,जिसे मैंने अपनी बहन की भलाई के लिए शुरू किया था अब वह मेरे लिए पाप नहीं रह गया था अब शायद वह मजा बन गया एक ऐसा मजा जिसमें मैं डूबते जा रहा हूं ,उसके शरीर कण कण उसके अंग प्रत्यंग उसके कटाव उसके एक एक घुमाव, उसके जिस्म का भराव , उसकी मासूमियत ,उसकी हंसी ,उसके बाल ,उसके गाल, उसके होठों की लाली ,उसकी मतवाली चाल, उसके पसीने की सुगंध, उसका हंसना ,उसका बोलना, उसका चलना, उसका रुकना, उसका देखना, उसका मुझे छूना ,उसका मुझे प्यार करना उसका हर एक बर्ताव ,उसकी अदाएं ,उसके नखरे, उसके झूठ, उसकी सच, उसकी हया, उसकी बेहयाई , उसकी नजाकत उसकी फितरत उसकी मोहब्बत उसकी सिहरन, उसकी उलझन ,उसका द्वेष उसका राग ,उसकी सीमाओं को तोड़ना और नई सीमा बना देना ,उसका मेरे बालों पर हाथ फेरना.. उसके आंसू ...जब वह कहती है कि आप मेरे हो सिर्फ मेरे.. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और आंखों का वह काला घेरा जो काजल से बनता है, उसकी आंखों से झड़ते हुए प्यार के झरने उसका दिल जो इतना सख्त होकर भी कितना नरम है, मुझे कभी-कभी लगने लगा कि मैं कहीं पूरी तरह से तो उसका नहीं हो जा रहा हूं, हां शायद लेकिन नहीं शायद,

 

वह मेरी बीवी नहीं थी वह मेरी प्रेमिका नहीं थी लेकिन अब वह मेरे लिए इन दोनों से बढ़कर है मैं क्या हूं ? मैं क्यों हूं ? मैं किसका हूं ???यह सवाल बड़े पेचीदे हैं लेकिन उसका एक जवाब निशा के पास है कि ‘आप मेरी जान हो आप मेरे लिए हो और आप मेरे हो’ उसकी प्यार भरी बातें जिसका शायद कोई मूल्य ना हो, जो तर्क की सीमाओं में नहीं बंधती जो तर्क से बाहर है वो अलग ही दुनिया की बात है जो एक प्रेमिका एक प्रेमी से करती हैं,या एक बच्ची करती है अनगढ़ सी ,बेमतलब सी , वैसी बातें यह सब निशा की खूबी थी तर्क से दूर प्यार की किसी दुनिया में खोई हुई थी ,एक सागर में खोई हुई थी जिसका कोई किनारा उसके पास में ना था …

 

वह मुझे अपनी गहराई में पाना चाहती थी, वह हमेशा मुझ में समाना चाहती थी, उसके पास इसके सिवा और कोई काम नहीं था उसकी जिंदगी में इसके सिवा और कोई मकसद नहीं था और शायद यही बात मुझे उसकी ओर इतना आकर्षित करती है ,क्योंकि काजल की जिंदगी में एक मकसद है और वह मकसद मैं नहीं हूं…

 

लेकिन निशा की जिंदगी में जो मकसद है वह सिर्फ मैं हूं………………………

 

 

कहानी आगे जारी रहेगी...

 

घर है या रंडीखाना - 7

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