कामवासना डॉट नेट

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घर है या रंडीखाना - 2 अब आगे... 

 

मैं होटल से निकल कर सीधे ही काजल को फोन लगाया ,

 

“हैल्लो कहा मिलु,आज मेरे पहली कमाई तुम्हे देना चाहता हु..”

 

उसकी हल्की मुझे सुनाई दी

 

“कितनी है ..”

 

“6 लाख “

 

“वाट ??? कौन सा बकरा फंस गया आज..”

 

काजल ने हंसते हुए कहा ..

 

“रूपचंद नाम है उसका ,बहुत बड़ा सराफा व्यापारी है “

 

“ओह वो साला ठरकी “

 

इतना बोल कर ही काजल चुप हो गई ,मैं कैसे भूल गया था की काजल भी उसके साथ रात बिता चुकी थी …

 

“तुम्हारा तो पुराना कस्टमर है ना “मेरी आवाज अचानक ही ठंडी हो गई और पूरा जोश अचानक ही कही गायब सा हो गया…

 

“आप आ जाइये मेरे पास ,होटल के पार्किंग में मिलना ,और प्लीज् उदास चहरा लेकर नही उसी जोश में आना “

 

“काजल तुम्हे नही लगता की अब बहुत हो गया,छोड़ देते है सब ये शहर ,ये धंधा ,तुम्हारे पास भी बहुत पैसे हो चुके है अब ,कोई छोटा मोटा बिजनेस शुरू कर लेंगे”

 

दूसरी ओर से बस शांति थी ..

 

“काजल “

 

“ह्म्म्म “

 

“कुछ बोलोगी “

 

“हमने इस बारे में बात किया था,जो शुरू हो गया उसे खत्म करके ही छोड़ना है,और आपकी बहनों का भी तो सोचो “

 

उसकी बात से मैं भी थोड़ा खामोश हो गया,

 

“ठीक है मैं आता हु “

 

मैं उसके होटल के पार्किंग में पहुचा जंहा वो पहले से ही मौजूद थी ,वो हमेशा की तरह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ,

 

मैंने पूरे पैसे चेक छोड़कर उसके हाथो में पकड़ा दिए ..

 

उसने एक गहरी सांस ली ,

 

“ये सब कितना गलत है वो हम दोनो ही जानते है देव लेकिन तुम भी समझते हो की मैं क्या चाहती हु ,प्लीज् आज के बात मेरी कसम खाओ की ये सब छोड़ने नही बोलोगे,जब तक की हमारा काम पूरा नही हो जाता “

 

काजल का चहरा सचमे सीरियस था..

 

“मैं कसम नही खा सकता जान ,तुम जानती हो क्यो “

 

मेरा स्वर ठंडा था लेकिन दिल में एक जोश भरा हुआ था,उसने भी हामी में सर हिलाया ..

 

“तो चल रही हो घर या कोई कस्टमर है तुम्हारा भी “

 

मैं थोड़े मजाक के मूड में बोला ..

 

“भग जाओ आप,कोई कस्टमर नही है मेरा ...और ऐसे भी अभी यंहा आने से सबकी फट रही है,”वो खिलखिलाई फिर चुप हो गई ..

 

“होटल की हालत बहुत ही खराब है ,पूरी रेप्युटेशन दाव पर लगी है मुझे ही कुछ करना होगा “

 

“क्या करोगी ? और जो कदम तुमने उठाया इससे ये सब तो होना ही था “

 

“ह्म्म्म खान साहब से एक डील करनी होगी ,बस वो थोड़े और मजबूर हो जाए ..”

 

काजल के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान खिल गई,मेरी मासूम सी काजल आज क्या क्या करने पर तुली है ..

 

“तो अगला शिकार कौन है “

 

मैं थोड़ा उत्सुक था ..

 

“पहले तो खान के दूसरे बिजनेस में घटा करवाना होगा ,ताकि वो इस होटल पर ज्यादा ध्यान दे,उसके बाद ही कोई डील हो पाएगी …”

 

“लेकिन तुम्हे लगता है खान किसी भी डील के लिए हा कहेगा ,यानी तुम ही सोचो कोई अपने मेहनत से खड़ा किये इतने बड़े होटल का 50 % तुम्हे क्यो देगा “

 

ऐसे मुझे काजल के दिमाग पर शक तो नही था लेकिन खान इतना बड़ा चुतिया आदमी भी नही था की काजल को 50% का हिस्सेदार बना दे,उसके पर मैनेजर की कोई कमी तो नही थी …..

 

काजल फिर से मुस्कुराई ..

 

“इसी इम्पॉसिबल को तो पॉसिबल करना है,पहले कुछ चोट फिर डील फिर चोट फिर 50% लेके उसी का पैसा लगा के इस होटल को टॉप में ले जाना है ...फिर बस कुछ परसेंट की बात होगी किसी तरह उससे 10 परसेंट और निकलवाने होंगे ..तब हमारे पास होगा 60% और हम हो जाएंगे इस होटल के मालिक …”

 

मुझे नही पता था की काजल ऐसा कैसे करेगी लेकिन जो भी हो मुझे उसका साथ देना था,अब चाहे फलक मिले या गर्दिशों की खाक ,जो भी हो हम साथ साथ है …

 

तभी पार्किंग के सुने सुनसान से जगह में कोई आता हुआ दिखा ,मुझे लगा की कोई गार्ड होगा लेकिन ये कोई दूसरा ही आदमी था ,मैं थोड़ा डर गया ..

 

“डरो नही ये अपना ही आदमी है..”

 

“हाय हर्ष ..इनसे मिलो ये देव है मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त “

 

वो एक नवजवान सा लड़का था,मुझसे और काजल से भी छोटा रहा होगा,लेकिन बहुत ही हेंडसम और लंबा चौड़ा बॉडीबिल्डर टाइप की पर्सनाल्टी थी उसकी ..

 

“हैल्लो सर ..”

 

“हैलो “

 

“देव ये हमारे होटल का नया चमकता चिराग है ,बहुत मेहनती और सबसे बड़ी बात बहुत ही आज्ञाकारी “

 

काजल ने हँसते हुए कहा ,सच में मेरी काजल हंसते हुए कितनी सुंदर लगती है …

 

“क्या मेडम आप भी ..अब यंहा आपकी बात नही मानूंगा तो किसकी मानूंगा ,आप के कारण तो मुझे ये जॉब मिली है”

 

काजल ने मेरे अपेक्षा के विरुद्ध एक कदम उठाया वो जाकर मेरे ही सामने उसके गालो को हाथो से मला और उसके गालो पर एक किस कर दिया..जिससे मैं तो आश्चर्य में पड़ गया लेकिन हर्ष शर्म से लाल हो गया ,

 

“सो क्यूट बेबी “

 

काजल उस 6’2” के लंबे चौड़े हेंडसम हल्क से बंदे को क्यूट बेबी बुला रही थी….बड़ा याराना लगता है…

 

“तो देव आप चलिए मैं आपको बाद में जॉइन करती हु “

 

उसके सामने वो मुझे और कुछ बोल भी तो नही सकती थी,मैं उसे गुस्से से देखने लगा शायद वो मेरे मन की दशा समझ चुकी थी ..

 

“हर्ष यार वो मैंने तुम्हे जो फाइल दी थी ना अकाउंट की वो कहा है “

 

काजल बड़ी चालक थी

 

“मेडम वो ऊपर में ही है आपके केबिन में ,मैंने चेक किया है सब कुछ सही है “

 

“ओके अभी लाओ उसे “

 

उस बेचारे का चहरा उतर गया

 

“मेडम मैं घर जा रहा था “

 

“तो ...चलो ठीक है कल सुबह ही मुझे वो दिखाना “

 

“ओके मेडम “वो जल्दी से भागा की कही काजल उसे फिर से ना किसी काम में फंसा दे ,काजल और मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई

 

मैंने उसके जाते ही काजल को अपने बांहो में ले लिया

 

“बहुत बेबी बोल रही हो “

 

“क्यो जलन हुई क्या “वो हल्के से मुस्कुरा रही थी .

 

“हम्म थोड़ी सी “

 

“तो निकाल लेना पूरी जलन घर तो आने दो ,”

 

“यंहा थोड़ी ठंडक पहुचा दो ना “मैं उसके साड़ी से झांकते हुए उसके नंगी कमर पर हाथ फेरा

 

“पागल हो क्या “वो मचली

 

“मरवाओगे आप “वो हँसने ,जब मैंने थोड़ा और जोर दिया

 

“छोड़ो ना ,घर आ रही हु ,पूरी जलने को बहा दूंगी “

 

वो खिलखिलाते हुए मेरी पकड़ से बाहर हुई ,

 

“बहूँगा तो लेकिन तेरे अंदर “मैं फिर से उसे पकड़ने को हुआ लेकिन वो छूट कर मुझे चिढ़ाते हुए भाग गई …..

 

मैं भी घर की राह लिया ..

 

आज मुझे खुसी थी की मेरे साथ मेरी काजल होगी,और उसकी वो बहाने वाली बात से मेरा लिंग झटके मारने लगा था..

 

आज इतने दिनों के बाद मैं फिर से काजल को वैसे ही प्यार करूँगा,,और अपनी सारी तकलीफे वीर्य के रूप में उसके अंदर डाल दूंगा ……..

 

खाली बिस्तर में मेरी स्वप्न सुंदरी की आशा में मैं करवटे बदल रहा था,काजल अभी भी नही आई थी,मुझे लगा कि फिर से आज मेरे साथ धोखा तो नही हो जाएगा,

 

मैं अपने लिंग को भी तसल्ली दे रहा था,

 

“तू सोया रह भाई, जब जिंदगी के ही लवडे लगें हो तो अपना लवडा शांत ही रखना चाहिए”

 

मैंने अपने बाबूराव से कहा..(जैसे शेक्सपियर की कहानी के लाइन को लोग quote के रूप में यूज करते है,आप भी मेरी इस लाइन को qoutation के रूप में यूज़ कर सकते हो )

 

लेकिन मैं गलत था,मेरे कमरे का दरवाजा खुला और काजल अंदर आयी ,उसने आते ही मुझे प्यार से देखा,मेरा बाबूराव खड़ा होकर अकड़ने लगा,जैसे कह रहा हो की आज कुछ तूफानी करते है...

 

मैं काजल पर टूट पड़ा,वो भी मुझे पागलो की तरह किस किये जा रही थी

 

काजल को बिस्तर पर पटकते ही मैं अपने कपड़े खोल कर फेक दिया और काजल के गालो को खाने लगा,उसके गुलाबी से गाल जो रस से भरे हुए थे ,मेने उसके गालो को पूरी तरह से भिगो दिया था,मेरे थूक से गिला हुआ उसका गाल अपनी नरमी से मुझे सुख दे रहा था और मैं और भी टूटकर उसके गालो को खा रहा था,अपने दांतो से मेने उसके गालो में निशान ही बना दिए जिसपर काजल ने मुझे एक शिकायत भरे निगाहों से देखा पर उसकी आंखों में अब भी वही प्यार था जो मैं हमेशा से ही मेरे लिए महशुस करता हु…………….

 

उसके बालो को अपने हाथो में फसाकर मैं उसे सहलाने लगा,और वो भी बेहद कामुक अंदाज में मेरे होठो पर टूट पड़ी,दो जिस्मो की गर्मी ने हमारे बदन में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया था,

 

मैं काजल के कपड़ो के तरफ रुख किया और उसके कपड़ो को धीरे धीरे उतारने लगा , मैं उसके भरे हुए नितंबो को अपने हाथो से भरकर उसे मसलने लगा,काजल और भी गहरे से मुझे चूमने लगी ,मैं उसका शर्ट खोलकर फेक चुका था,शायद अब काजल को सहन नही हो रहा था और वो जल्दी से ही अपने कपड़े खोलने लगी,लेकिन मैंने उसको उसकी पेंटी खोलने से मना कर दिया वो मुझे फिर से शिकायत के भाव से देखने लगी ,मैं अपने पूरे कपड़े खोल कर नंगा हो कर उसके सामने खड़ा हो गया ,मेरे लिंग को देखकर वो हल्के से हँसी और उसे पकड़कर उसे इतने प्यार से चूसने लगी जैसे की वही वो चीज थी जिसके लिए वो इतनी प्यासी थी,.....

 

मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच रहा था और मैं झरने को बिल्कुल भी तैयार नही था,मुझे तो अभी जितनी देर हो सके अपनी जान के साथ खेलना था,मैं काजल के मुह से अपना लिंग निकल कर अलग किया ,वो जल्दी से अपनी पेंटी निकालने को हुई पर मैंने उसे फिर से रोक दिया वो मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगी ,और मेरे होठो में एक शरारती सी मुस्कान उभर आयी .,....

 

“नही ना जान करो ना “

 

उसने लगभग रोते हुए कहा ,वो आमतौर पर इतनी बेताब नही होती पर आज तो कई दिनों के बाद हम प्यार के गोते में डूबने वाले थे...वो मछली जैसे तड़फने लगी और मुझे उसकी तड़फन बहुत ही मजेदार और मनमोहक लग रही थी ,मैं उसके पास जाकर उसे लिटा दिया और खुद उसके पेंटी के पास अपनी नाक ले जाकर जोरो से सूंघ लिया,उसके कामरस से भीगा वो अंतःवस्त्र इतने मादक खुसबू से भरा था की मैं फिर से उसे जोरो से सूंघने से अपने को नही रोक पाया,लेकिन मेरी इस हरकत से काजल की हालात और भी खराब हो गयी उसे होने वाले का अंदेशा हो चुका था और उसका शरीर छटपटाने लगा था वो अपनी कमर ऊपर कर मुझे आमंत्रण दे रही थी और जब मैं अपना नाक उसके योनि के भाग से लगाया वो अपने कमर को ऊपर कर मेरे नाक से अपनी योनि को रगड़ने लगी,काजल की योनि से बहते हुए गीले गीले से प्यार की धार ने मेरे नाक को भी भिगो दिया और मेरे मुख से एक मुस्कान सी निकल गयी ….

 

वो बस झरने ही वाली थी और मैं उसे यू बेताबी में झरने नही देना चाहता था उसे भी वो मजा मिले जिसके लिए वो इतनी तड़फ रही थी ,मै उसकी पेंटी को उसकी योनि के ऊपर से हटा कर अपनी जीभ से उसे चाटने लगा,काजल का हाथ मेरे सर पर था और वो पूरे ताकत से उसे अपने अंदर लेने की चेष्टा कर रही थी पर शायद उसे वो आनंद नही मिल पा रहा था जिसके लिए वो तडफ रही थी और आखिर में वो हारकर मुझे अपने ऊपर खिंच ही लिया ,आज मैं काजल की ताकत देखकर दंग ही रह गया वो मुझे बिल्कुल ही आराम से उलटा कर के मेरे ऊपर चढ़ गयी ,अपने हाथ मेरे लिंग पर रख उसे अपने आग की उस भट्ठी में डाल दी जो पानी से भरी थी,........

 

काजल अंदर से इतनी गर्म होगी मुझे पता नही था आज तो उसकी योनि मानो कोई भठ्ठी ही हो,मेरे लिंग के अंदर जाते ही काजल को ऐसे सुख का अहसास हुआ जैसे सालो से प्यासे को कोई अमृत ही पिला दे,

 

“aaaahhhhhh जाआआआआन लव यु बेबीईईईईई “

 

वो अपनी रफ्तार तेज करने लगी उसकी सिसकियों से ही मैं झट जाता इतनी मादकता अपने अंदर लिए है मेरी रानी काजल ……

 

“आह आह आह आह आह आह ,ओ ओ ओ आह जआआआननन आह जाआआआआआआनननन “

 

वो किसी पम्प की तरह मेरे ऊपर कूद रही थी और मेरे होश ही उड़ा रही थी मुझे पता था की काजल इतनी गर्म हो चुकी थी की वो ज्यादा समय तक नही टिकने वाली ,मेरी अकड़ को आज काजल शायद तोड़ ही देती वो बिल्कुल भी आराम के मूड में नही थी ,वो लगातार ही कूद रही थी ,

 

“लव यू बेबी ,लव यू ,फ़क मि जान आह आह आह ,”

 

“लव यू मेरी रानी “

 

हमारी सांसे कब उखाड़ जाती इसका कोई भी भरोषा ही नही था,पर आनद के उस सागर से मैं कभी भी बाहर नही निकलना चाहता था,लेकिन शायद काजल को जल्दी से ही झरना था वो अपनी बेताबी के इंतहा पर थी और वो उस ज्वाला को निकाल देना चाहती थी जो उसके अंदर भरी हुई थी ,काजल ने अपने स्तनों को मेरे मुह में ठूस दिया और मैं भी किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसके स्तनों का पान करने लगा..मैं और भी उत्तेजित हो गया और उसे नीचे से ही और जोरो के धक्के देने लगा पर शायद वो जोर नही बन पा रहा था ,काजल भी अब कूदना बन्द कर जोरो से धक्के मारे जा रही थी मेरे अंडों में एक दर्द भर गया पर उसी दर्द का तो मजा था,,....

 

हम दोनो ही अपने तरफ से पूरी ताकत से धक्के दे रहे थे…

 

“आह वो आह आह आह आह जान जान आह “

 

दोनो के धक्के एक साथ मिलकर और भी तेज और प्रभावशाली हो जाते और दोनो के मुह से ही एक सिसकारी फुट पड़ती थी...उसके योनि से रगड़ते हुए मेरे लिंग की चमड़ी से उठाने वाला वो आनद मैं कभी भी खोना नही चाहता था पर वो एक धारा सी मेरे वृषनकोशों से आती हुई मुझे प्रतीत हुई और काजल भी अपने चरम के नजदीक ही थी हम दोनो ही अंतिम धक्कों पर अपनी पूरी की पूरी ताकत खर्च कर रहे थे ,और वो ज्वाला फूटा और काजल मेरे ऊपर झरने सी धार छोड़ती हुई लेट गयी,मेरा भी हाल उससे अन्यथा नही था और मैं भी उसके अंदर ही एक तेज फुहारे को छोड़ता हुआ हाँफने लगा,...............

 

दोनो ही हाफ रहे थे और दोनो ही उस आनंद में डूबे थे जो हमे अभी अभी मिला था...वो गीलापन हमारे यौन अंगों से बाहर आ रहा था,चिपचिपे वीर्य में मिला काजल का कामरस मुझे इच्छा तो हुई की उसे पी लू पर उठाने की हिम्मत ही नही जुटा पाया और मुझे पूरा यकीन था की यही हाल काजल का भी हो रहा होगा उसे भी मेरा वीर्यपान करना बहुत ही पसंद था ,खासकर जब गहरे संतोष की दशा हमे घेरे हुए हो …………………

 

उखड़ती सांसो में मेरा प्यार काजल के अंदर जा रहा था और वो भी मेरे वीर्य को अपनी योनि सिकुडकर अपने अंदर ही रखने का प्रयाश कर रही थी ,मैं उसे और भिगोना चाहता था पर मेरे अभी का कोटा पूरा हो चुका था …………..

 

काजल के नंगे जिस्म की गर्मी ने सुबह सुबह ही उत्तेजित कर दिया था,रात को उठा हुआ तूफान फिर से उठ खड़ा हो गया,बिस्तर से उठने के बाद एक राउंड बाथरूम में नहाते हुए भी निपटा लिया गया था…

 

सच में ये प्यार कई दिनों को बाद ही उमड़ कर आ रहा था,असल में जब किसी चीज को खोने का डर ज्यादा हो तो प्यार भी ज्यादा हो जाता है...यंही हमारे साथ भी हो रहा था..

 

अक्सर पति पत्नी के रिस्तो में कुछ सालो बाद ही एक सुस्ती सी आ जाती है,कारण साफ है की जब आपको पता है की ये कही नही जाने वाली तो आप उसे महत्व देना ही बन्द कर देते है...ये चीज गर्लफ्रैंड बॉयफ्रेंड के रिलेशन में भी दिखता है..लेकिन अगर कुछ ऐसा हो जाए की वो आपसे दूर हो जाए तब उसकी अहमियत समझ आने लगती है..

 

आज मैं जल्दी ही होटल पहुच गया था,पहुचते ही मुझे रूपचंद दिखाई दिया,वही जो कल रात शबनम के साथ था..

 

“वाह यार देव मान गए क्या कमाल का माल दिया था तुमने ,पूरे 15 वसूल हो गए ,ये तो खान के काजल से भी मस्त थी “

 

वो साला अपनी गंदी शक्ल के साथ मुझे बेमकसद ही जला रहा था,मैं उस मोटे के साथ काजल को इमेजिंन भी नही करना चाहता था,मन किया की एक झापड़ उसके गालो में लगा दु ,,..लेकिन हाय नॉकरी हँसकर ही बात करना पड़ता है..

 

“थैंक्यू सर आप हमारे खास कस्टमर है,खास लोगो को खास चीज ही दी जाती है,ऐसे आप जा रहे है..”

 

“हा अपना काम तो हो गया,मिलते है कभी और कोई खास माल आये तो रखना मेरे लिए ऐसा ही कोई तगड़ा माल ..अभी अभी और ले के आ रहा हु उसकी “

 

वो हंसता हूं वँहा से चला गया ,और मेरे पैर अपने ही आप उस कमरे की ओर चले गए जंहा वो ठहरे थे,मेरे पास उस रूम का पास था,जिसे मुझे रूपचंद ने हैंडल किया था ..मैं रूम खोलकर अंदर पहुचा,शबनम अभी अभी नहा कर निकली थी और मुझे देखकर मुस्कुराने लगी,देखा तो बिस्तर के बाजू में ही उसकी पेंटी पड़ी हुई थी जिसे उठाकर ओ डस्टबिन में डाल देती है..

 

“अरे तुमने तो मुझे कहा था की तुम फेंकती नही ,धो कर रखो गी ..”

 

वो खिलखिला कर हँसने लगी..

 

“जब कोई इसे गंदा करने के लाखो दे रहा हो तो 2-3 हजार की पेंटी तो ले ही सकती हु ना “

 

“लेकिन उस दिन तो ..”

 

वो मेरे पास खड़ी थी और उसके शरीर से आती हुई महक ने मुझे उत्तेजित कर दिया था मैंने उसे अपने से कस लिया..

 

“अरे देव बाबू ,जब किसी के साथ बिना पैसों के सोया जाय तो क्यो पेंटी को फेकूँगी,ये तो उन कस्टमर के लिए है जो हमे पैसा देते है,नया कस्टमर नई पेंटी “वो मेरे गालो में एक किस कर मुझसे अलग हो गई,मेरे दिमाग में काजल के बेग से निकली हुई पेंटी घूम गई ..

 

“काजल के बेग से भी मुझे एक मिली थी “

 

वो मुझे थोड़े आश्चर्य से देखी और जोरो से खिलखिलाकर हँसने लगी ..

 

“तो वो भी सोई होगी किसी के साथ बिना पैसे लिए “

 

वो अपने टॉवेल को की उसके शरीर से लिपटा हुआ था उतार कर फेक देती है,अब मेरे सामने पूरी तरह से नंगी खड़ी थी ,वो अपने बेग से एक नया सेट निकालकर पहनने लगती है ,और फिर अपना ड्रेश पहन कर तैयार हो जाती है..

 

“ऐसे क्या देख रहे हो देव “

 

मैं उसे ये सब करते देख रहा था,वो अभी दर्पण के सामने खड़ी थी और अपना मेकअप लगा रही थी …

 

“देख रहा हु की किसे एक परी सी सुंदर लड़की एक भद्दे से मर्द के साथ रात बिता लेती है ...और उसके बाद भी सुबह यू हँसती हुई दिखती है”

 

मेरा स्वर ठण्डा था..शबनम मुझे आश्चर्य से देख रही थी वो मेरे पास आकर मेरे गालो को सहलाने लगी ..

 

“देब ये एक धंधा है और धंधे में इमोशन को बीच में नही लाना चाहिए...अगर वो आया तो किसी के साथ सोना तो दूर किसी को हाथ लगाने भी नही दिया जा सकता...और जब हमे धंधा करना ही है तो कस्टमर के चहरे में क्या रखा है...हमने तो यही सीखा है की खुद भी किसे मजे लिए जाय,ये देखो “

 

वो एक दवाई अपने बेग से निकाल कर दिखाने लगी..

 

इसे कस्टमर को खिला दो तो भी हल्क बन जाता है,रात भर घोड़े के जैसे दौड़ता है,और आंखे बंद करने के बाद कौन सा किसी का चहरा दिखाई देता है...हम भी संतुस्ट और कस्टमर भी खुस “

 

वो फिर से खिलखिलाई ,लेकिन मुझे उसकी बात पर आश्चर्य हुआ क्योकि मुझे आज पता चला की शबनम जो की इतनी सुंदर और मासूमियत की देवी लगती है,इस धंधे की इतनी बड़ी खिलाड़ी है,वो सच में किसी रंडी सी बाते करने लगी थी..

 

इधर रश्मि भी इस धंधे की पहली कमाई से खुस थी ,वक्त बीतता गया और हमारा होटल बहुत ही तेजी से नाम कमाता गया,होटल में अभी कुछ 15-20 ऐसी लडकिया थी जो वक्त आने पर जिस्म का धंधा करती थी ,ये सभी आम लड़कियों की तरह ही थी जो होटल में काम करती थी ,कोई देखकर नही कह सकता की ये क्या काम करती होगी,सभी का कंट्रोल शबनम के हाथो में ही था,मुझे मेरा कमीशन मिल जाया करता,जो की ग्राहक के ऊपर होता था,मैं भी इन कामो में अब एक्सपर्ट सा बन गया था,MBA की डिग्री का ये तो फायदा हुआ की मैं अच्छे से मोलभाव कर लिया करता था,मुझे लोगो के हैसियत की पहचान थी ,कम से कम 1 लाख और ज्यादा से ज्यादा 15-20 लाख तक का सौदा होता था,मैं जितना ज्यादा पैसा लड़कियों को दिलाता उतना ही बड़ा कमीशन मुझे मिलने लगा था..इतने पैसों की तो कल्पना भी नही की थी जितने मुझे 1 महीने में ही मिल गए थे…….

 

इधर काजल के होटल की हालत बहुत ही खराब चल रही थी,खान साहब के बिजनेस में बड़ा घटा हुआ था ,पुलिस को उनके कई गैरकानूनी धंधों के बारे में पता चल गया,जिससे अजीम और खान साहब के ऊपर मुकदमो की संख्या बढ़ती गई,...

 

मुझे पता था की ये सभी कुछ काजल का ही किया धरा था,लेकिन दुनिया की और अजीम और खान की नजरो में वो उनकी सबसे करीबी सहलाकर बनकर उभरी,वही थी जो अजीम के वकील के साथ उसके मुकदमो में जाया करती थी ,या उससे मिलने जेल जाया करती थी ,वही खान पूरी तरह से टूट गया था,एक इकलौता बेटा जेल में हो और धंधे में इतना घटा उसके लिए सहन से बाहर हो रहा था,उसे सांत्वना देने का काम भी काजल का हि था,......

 

वही रश्मि और खान के बीच एक अजीब सा कनेक्शन भी उभरने लगा था,रश्मि मुझे लेकर खान के होटल गई थी ,

 

“तुम बाहर बैठो मैं आती हु “

 

हम खान के केबिन के बाहर खड़े थे ,बाहर ही हमे काजल मिल गई जो की खान के केबिन से अभी अभी निकली थी ,वो हमेशा की तरह ही साड़ी में थी ,लेकिन उसके बाल अभी बिखरे हुए थे,साड़ी थोड़ी अस्त व्यस्त दिख रही थी ..वो हमे देख कर चौकी नही ,शायद खान ने उसे बता दिया होगा की रश्मि आ रही है,लेकिन मैं उसकी ये हालत देखकर चौका ..

 

“गुड मॉर्निंग मेडम “

 

काजल ने रश्मि को हल्के से मुस्कुराते हुए विस् किया ..

 

“बीच (हिंदी में कुतिया )”

 

रश्मि ने उसके अभिवंदन का जवाब देते हुए कहा,और मुह बना कर अंदर चली गई ..

 

काजल ने मुझे देखा जो की हैरत से उसे देख रहा था वो मुझे आंख मारकर हल्के से हंसते हुए वँहा से चली गई,मैं बाहर ही रखे सोफे में बैठ गया ..

 

रश्मि जिस शख्स से सबसे ज्यादा चिढ़ती थी वो थी काजल …

 

उसे लगता था की काजल की ही वजह से उसके और अजीम के रिश्तों के बीच में दरार आयी है...ऐसे काजल ने मुझे ये बात बता दी थी इसलिए मुझे इससे कुछ फर्क नही पड़ा लेकिन अब ये खान ……..

 
रश्मि और खान के बीच क्या बाते हो रही थी ये तो मुझे नही पता लेकिन इससे हमारा भविष्य और हमे क्या करना है इसकी रूपरेखा जरूर तय हो रही थी…
 
मैं बैठे हुए बोर हो रहा था मैं उठा और काजल को काल किया ,मैं टहलता हुआ एक सीढ़ियों से ही एक फ्लोर ऊपर चला गया,जहा मेहमानों के कमरे बने हुए थे,सामने एक गैलरी थी जिसमे से नीचे का रिसेप्शन दिख रहा था,
 
“हलो ..”
 
काजल की मधुर एवं मेरे कानो में पड़ी
 
“क्या कर रही थी खान के साथ “
 
मैंने उसे छेड़ते हुए कहा
 
“क्या करोगे जानकर “वो मुझे जलाने लगी ,मुझे वो नीचे रिसेप्शन में दिखाई दी,
 
“ऊपर देखो “
 
उसने सर उठाया मैंने हाथ हिलाया
 
“पागल हो गए हो क्या हाथ क्यो हिला रहे हो,कोई देख लेगा तो “
 
“तो क्या “
 
“तो कुछ नही प्रॉब्लम हो जाएगी जानते हो ना,मैंने तुम्हे क्या बताया था…..”
 
“हम्म ऐसे सच में जब भी तुम्हे किसी और के साथ देखता हु खून खोल जाता है”मेरी आवाज से मेरे दिल की जलन साफ साफ झलक रही थी जिसका आभास काजल को भी हो गया ,
 
“ओ मजनू जलना बंद करो कुछ ही दिनों की तो बात है फिर मैं सिर्फ और सिर्फ आपकी ही रहूंगी,,,,”
 
हम दोनो ही थोड़े देर को चुप हो गए
 
“अभी भी तो सिर्फ आपकी ही हु,लेकिन इस जिस्म को किसी और को भी सौपना पड़ता है”
 
मेरे लिए उसकी ये बात सहन से बाहर हो रही थी
 
“बस करो यार छोड़ो इन बातो को “
 
“शुरू किसने किया था “
 
अचानक मुझे कुछ हलचल का आभास हुआ ,मैंने पलट कर कमरों की तरफ देखने लगा,एक कमरे का दरवाजा खुला और एक लड़का बाहर आया,मैं उसे पहचानता था,वो हर्ष था,वही जिससे मैं पार्किंग में मिला था,शायद वो भी मुझे देखकर पहचान गया,उसके चाल से लगा की वो घबराया हुआ है,वो बड़ी जल्दी जल्दी आया और मुझे क्रॉस करके सीधे लिफ्ट के पास पहुच गया,लिफ्ट को आने में समय था वो सीढ़ियों से ही उतरने लगा ..मुझे उसकी हरकत बड़ी अजीब लगी क्योकि उसने मुझे एक बार भी नही देखा …
 
“ये हर्ष को क्या हो गया कमरे से बाहर आया और इतनी जल्दी में भाग गया,देखा भी नही मुझे जबकि हमारी नजर मिली थी और मुझे पूरा यकीन है की वो मुझे पहचान गया होगा “
 
काजल जो की किसी को कोई काम समझा रही थी फिर से ऊपर देखती है,इस बार उसकी अदा में भी एक डर का आभास हुआ ,दरवाजा फिर से खुला ,मेरी नजर दरवाजे पर थी क्योकि ये वही दरवाजा था जंहा से हर्ष निकला था,एक अधेड़ उम्र की महिला कोई 55-60 साल की उम्र की बाहर आयी ,उसके चहरे में एक अजीब से संतोष का भाव था,देखकर लगा जैसे अभी अभी तैयार हुई हो ,वो एक मोटी सी आंटी टाइप की महिला थी ,वो भी मेरे पास से गुजरी और लिफ्ट तक आयी लेकिन हर्ष से विपरीत वो मुझे देख कर एक स्माइल पास कर गई,ये एक औपचारिक सी मुस्कान थी जो की हम किसी अनजाने व्यक्ति को देखकर दिया करते है…
 
वो बड़े ही आराम में थी..
 
“उसके लिफ्ट में घुसते तक मैं चुप थी था ..
 
“ये हो क्या रहा है यंहा पर “
 
काजल अब भी लाइन में थी “
 
“कुछ भी तो नही “
 
“तुम मुझसे छुपा रही हो …”मैं थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए उससे बोला ,तब तक वो महिला नीचे जाकर काजल के पास पहुच चुकी थी,उसने काजल को गले से लगाया थोड़ी बात की और चली गई …
 
“ओह तो जो मैं समझ रहा हु क्या वही हो रहा है यंहा पर “
 
मैंने जैसे कुछ समझ गया था
 
“ये आईडिया मेरा है ,इसे अपने होटल में ट्राय करने की सोचना भी मत समझे….”
 
काजल की बात से मेरे चहरे में एक मुस्कान खिल गई,
 
“क्या करू यार होटल इतने घाटे में चल रहा है की कुछ तो करना ही पड़ेगा ना,मैं नही चाहती की ये होटल बंद हो जाए और हमारे हाथ सिर्फ कुछ भी नही आये ,कुछ फायदा हो तभी तो खान इसे चालू रखेगा “
 
मैं जोरो से हंसा
 
“तो हर्ष तेरे होटल का जिगिलो है ,दिखने में तो मासूम सा लगता है”मैं फिर से हंसा
 
“दिखने में मैं भी मासूम ही लगती हु ,वो रश्मि और तुम्हारी प्यारी सी शबनम भी मासूम ही लगती है..”
 
काजल ने प्यारी सी शबनम में बड़ा जोरो डाला..
 
“क्यो अब तुम्हे जलन हो रही है “
 
“क्यो ना हो..लेकिन फिर भी एक तस्सली तो है की वो तुम्हारा ख्याल रख रही है….”
 
काजल की आवाज में एक प्यार सा आ गया था…
 
“मुझे आज रश्मि और खान की मीटिंग को लेकर डर लग रहा है…”
 
मैंने अपनी चिंता जाहिर की
 
“कोई बात नही मैं जानती हु वो यंहा क्यो आयी है ,वो खान के कान मेरे खिलाफ भरना चाहती है,लेकिन फिक्र मत करो ,मर्दो की कमजोरी का मुझे पता है...और मुझे नही लगता की जो मैं खान को दे सकती हु वो रश्मि उसे देगी..आखिर वो ससुर है उसका ..”
 
काजल का कमीना पन फिर से बाहर आ रहा था..
 
“क्या दे रही हो तुम खान को “
 
मैं थोड़ा सीरियस था
 
“इन बातो से दूर ही रहो क्यो खुद को जलाना चाहते हो …”
 
काजल ने ठंडे आवाज में कहा..
 
“चलो शायद उनकी मीटिंग खत्म हो गई होगी “
 
मैं फोन रखकर नीचे पहुचा,थोड़ी ही देर में रश्मि और खान दोनो ही बाहर आ गए थे..
 
“मैंने जो बोला है उसपर गौर कीजियेगा पापा”
 
रश्मि खान को पापा बोल रही थी यानी अभी भी उसके दिल में रिश्तों की मर्यादा बची थी,मतलब की रश्मि ने खान को वो नही दिया है जो काजल उसे देती है ..
 
“हा बेटा तुम चिंता ना करो ,मैं ध्यान रखूंगा,और तुम्हारी बात अजीम तक भी पहुचा दूंगा “
 
हम दोनो ही कार से जा रहे थे जिसे रश्मि ही चला रही थी ,
 
“क्या बात हुई तुम लोगो में “
 
मैं ऐसे तो पूछना नही चाहता था लेकिन थोड़ी हिम्मत करने पूछ ही लिया ,उसने मुझे देखकर बुरा सा मुह बनाया ..
 
“वो साली रंडी उनके दिमाग में सवार है ...जब सब बिक जायेगा तब समझ आएगा उन्हें “
 
वो किस रंडी की बात कर रहे थे वो तो मैं समझ गया था…
 
मैंने अपना चहरा बुरा सा बना लिया ,ऐसे उसकी बात पर मुझे दुख तो नही हुआ लेकिन ये करना जरूरी था,क्यो???
 
ये बाद में पता चल जाएगा ..
 
“अब तुम क्यो दुखी हो रहे हो “
 
“कुछ नही “मैंने ऐसे कहा जैसे काजल को रंडी बोलने से मुझे बहुत ही दुख पहुचा है ..
 
“क्यो काजल को रंडी बोली इसलिए ,तुम्हारी बहन की सहेली है ना वो …..उससे अपनी बहनों को दूर ही रखा करो पता नही कब उन्हें धंधे में ले आये “
 
रश्मि ने बड़े ही रूखे स्वर में कहा लेकिन मेरे मन में आया की अभी इसकी अतड़िया निकाल कर निचोड़ दु …
 
“तुम भी तो खान को बर्बाद करना चाहती थी “
 
मैंने रश्मि के जले में नमक डालना चाहता था जैसा की उसने मेरे में डाला था..
 
“हा अब भी चाहती हु ,लेकिन इसका फायदा मुझे होना चाहिए उस रांड को नही “
 
रश्मि ने साफ साफ लफ्जो में अपनी बात कह दी थी …
 
“तो जो वो खान को दे रही हो वो तुम भी दे दो ,आखिर ऐसा क्या है उस मैनेजर में जो खान साहब उनके दीवाने बने फिर रहे है ,जबकि उनका होटल आज इतने घाटे में चल रहा है….”
 
मैंने अपना दाव खेल दिया ,जिससे रश्मि बुरी तरह से झल्ला गई ,उसने कार को जोरो से ब्रेक मारा ..
 
“आउट “
 
“वाट “
 
“आई सेस आउट ,निकलो यंहा से “
 
मेरी फट गई मैं इस तरह के रिएक्शन की तो उम्मीद नही किया था ..
 
“बट वाय “
 
“जस्ट आउट ,मैं तुमसे बहस नही करना चाहती और मेरा मूड बहुत ही खराब है मुझे समझने की कोशिस मत करो वरना...मैं अपना आपा खो दूंगी “
 
मैं चुपचाप ही बाहर निकल गया उसने दरवाजा बन्द किया और तेजी से कार लेकर चली गई …….
 
वैसे उसकी इस हरकत से मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई,काजल का प्लान सचमे काम कर रहा था,लेकिनमैंने आस पास नजर दौड़ाई कोई ऑटो नही दिखा,मुझे ऐसी जगह पर ये बात नही कहनी थी ...अब साला अब इतने दूर मैं जाऊंगा कैसे ?????????
 
मैं करीब रात 9 बजे घर आया,मुझे 8 बजे ही काजल का मेसेज मिल गया था की वो आज घर नही आ रही है,,,आजकल काजल मुझे पहले से ही मेसेज कर देती है,उसने मुझसे बहुत सी बाते छुपानी छोड़ दी है,लेकिन जो वो छुपती है मैंने उसे पूछना भी बंद कर दिया,मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट अब ये सब जल्द से जल्द खत्म कर एक आरामदायक जिंदगी जीना था,मैं एक नार्मल सा इंसान हु जो की जिंदगी की ज्यादा उथल पुथल को सह नही पाता,मुझे शांति चाहिए थी,मुझे एक आम जीवन जीना था ,लेकिन अब वो पूरी तरह से संभव नही रहा,
 
मैं उन मर्दो में नही हु जो की अपनी बीबी को अपना गुलाम समझते है और किसी और मर्द से साथ कल्पना भी नही कर सकते ,ना मैं ऐसे मर्दो में शामिल हु जो की अपनी बीबी के गुलाम है और उसे किसी दूसरे मर्दो के साथ देखकर उत्तेजित हो जाते है जिसे हम CUCKOLD कहते है...मैं दोनो ही तरह का नही हु ना ही दोनो के बीच का ही हु …
 
मैं अपनी बीबी से अपने परिवार से बेपनाह प्यार करता हु ,लेकिन मैं उनका गुलाम नही हु,मैं अपनी बीबी या बहनों को किसी मर्द के साथ नही देख सकता लेकिन अगर वो मजबूर हो या अपनी इच्छा से किसी कारण से ये कर रहे हो तो मैं उनके विरोध में भी नही जा सकता…..शायद इसी लिए मैं इतना परेशान था,अगर मैं दोनो में से एक होता तो मेरे लिए ये सब सहन करना ज्यादा मुश्किल नही था,मैं या तो काजल को मार चुका होता या तलाक दे चुका होता,या उसकी चुदाई देख कर हिला रहा होता,लेकिन मैं इनमें से कुछ भी नही कर रहा था……
 
घर में मेरा स्वागत हमेशा की तरह मेरी बहनों ने बड़े प्यार से किया ,जब उन्हें पता चला की आज काजल नही आ रही है तो दोनो के चहरे खिल गए …
 
“मतलब आज हम आपके साथ सोएंगे..”मेरी प्यारी पूर्वी ने बड़े चहक के कहा
 
“तुम मेरे साथ क्यो मैं तुम्हारे साथ सो जाता हु “
 
“मतलब “पूर्वी को मेरी बात समझ नही आयी थी
 
“मलतब मेरी बहना रानी की मैं तुम्हारे कमरे में सो जाता हु “
 
मेरे इस बात से दोनो ने एक दूसरे को देखा,जैसे की कोई शॉक लग गया हो ..
 
“नही नही भइया हम आपके ही कमरे में सोएंगे “निशा ने जल्दी से कहा,उसके चहरे में एक डर साफ झलक रहा था,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई थी,क्योकि काजल ने मुझे कुछ ऐसा पहले ही बता दिया था जिसके कारण ये मुझे अपने कमरे से दूर ही रखना चाह रही थी ,लेकिन काजल ने ये भी कहा था की अगर मैं सब कुछ ठीक करना चाहता हु तो मुझे अपने इमोशन पर काबू करना होगा ,मैंने कुछ दिनों की प्रेक्टिस से अपने चहरे का भाव बदलने और उसे छुपाने की थोड़ी खूबी तो हासिल कर ही ली थी ,जिसका उपयोग मैं आज रश्मि के सामने करके आया था,
 
“क्या हुआ “मैंने जोर दिया
 
“वो क्या है भइया हमारे कमरे का बिस्तर बहुत छोटा है 3 लोग कैसे आएंगे,,और समान भी इधर उधर पड़ा हुआ है आप देखोगे तो डाटोगे …”
 
पूर्वी ने जल्दी जल्दी से कहा ,
 
वाह रे मेरी प्यारी बहना ,कितने सफाई से झूट बोल रहे हो ,उनके इस झूट में भी मुझे बड़ा प्यार आया और आंखों में आंसू ही आ जाते लेकिन मैंने खुद को सम्हाल लिया,मेरी मासूम सी पूर्वी को ना जाने क्या क्या सहना पड़ रहा था ,वो किसी को बचाने के लिए कितने आराम से झूट बोल रही थी ,लेकिन उसकी आंखे ……..
 
वो अभी भी उतनी ही मासूम थी और उसकी आंखों अब भी सच बोल रही थी ,उसकी आंखों में डर और झूट से आयी हुई ग्लानि साफ साफ झलक रही थी ,लेकिन मैंने उन्हें कुछ भी नही कहा…
 
“ओके चलो ठीक है तैयार होकर मेरे कमरे में आ जाओ “
 
“जी भइया दोनो ही एक साथ खड़े हो गए “
 
 
 
मैं अपने कमरे में सोया हुआ आने वाले भविष्य की संभावनाएं तलाश रहा था की दोनो परिया मेरे कमरे में दाखिल हुई..
 
दोनो के ऊपर काजल का प्रभाव साफ साफ झलक रहा था ,उनके ये कपड़े काजल की ही पसंद के थे ,लेकिन काजल इन्हें मुझे या पता नही किसे किसे उत्तेजित करने के लिए पहना करती थी ,वो कपड़े मेरी बहने मेरे साथ सोने के लिए ही पहन कर आ जाती थी …
 
मुझे इस बात पर हँसी भी आयी और उनके हुस्न को देखकर मैं उनपर मोहित भी हो गया,खासकर पूर्वी के लिए मेरे दिल में बहुत ही प्यार उमड़ जाता था,नई नई कली की तरह उनखिली हुई मेरी पूर्वी मासूमियत और चंचलता से भरी हुई थी,और मेरे लिए उसका असीम प्यार उसकी आंखों से ही झलक जाता था,वही निशा उसके अपेक्षा जिस्म से कही ज्यादा भरी हुई थी ,और किसी भी मर्द की पहली पसंद निशा ही होती लेकिन निशा में वो मासूमियत नही थी जो की पूर्वी के हर एक अदा से झलकती थी..
 
हमेशा की तरह ही दोनो मेरे आजु बाजू आकर लेट गए और पूर्वी ने मुझे अपनी बांहो में कस लिया ,उसकी कोमलता और कोमल स्तन और उसका चहरा मेरे सीने में आ धसे ..वही निशा का चहरा मेरे चहरे के पास ही था वो मुझे ही देख रही थी,वो मुझसे ऐसे सटी हुई थी की उसके स्तन मेरे कोहनियों से लग रहे थे,मैं भी उसपर जोर दे देता ,वो अपने बांहो को मेरे गले से लपेट ली ,वो मेरे ऊपर आना चाहती ही लेकिन वँहा पहले से ही पूर्वी का राज था,उसका मेरे ऊपर अधिकार पूर्वी के बाद ही आता था...वो इंतजार करने लगी की कब पूर्वी नींद में चली जाय,और उसे उसके कमरे में छोड़ कर आया जाय..
 
उसके चहरे में पूर्वी के लिए थोड़े गुस्से का भाव आ गया ,जिसे मैं आसानी से पढ़ सकता था,जिससे मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई..
 
“वो छोटी है रे “
 
मैंने उसके कानो में कहा
 
“तो क्या हमेशा आपके ऊपर चढ़ जाती है ,मुझे जगह ही नही मिलता “
 
उसने रूठने वाले स्वर में कहा ,
 
“तो क्या हुआ बेचारी जल्दी सो भी तो जाती है,फिर तो तू ही पूरी रात मेरे ऊपर चढ़े रहना “
 
मुझे अपनी ही बात पर हँसी आ गई क्योकि हम ये क्या बोल रहे थे..
 
“हम्म इसीलिए तो इसे कुछ नही बोलती “निशा ने मेरे गालो में एक किस करते हुए कहा …..
 
ना जाने ऐसे ही मेरी नींद कब लग गई ,शायद मैं आज इतना चला था की थक चुका था,नींद टूटी किसी कोमल होठो के अहसास से जो की मेरे होठो को छू रहा था,उस होठ का गीलापन मेरे होठो से मिल रहा था,मैंने हल्के से ही आंखे खोली,ये निशा थी जो मुझे सोता हुआ पाकर मेरे होठो को हल्के हल्के चूम रही थी ,उसने पूर्वी को उसके कमरे में रुला दिया था,मैं थोड़ी देर तक ऐसे ही रहा लेकिन फिर मैंने अपना हाथ उसके कमर से लपेट लिया..
 
वो ऐसे हड़बड़ाई जैसे की उसकी चोरी पकड़ी गई हो
 
“क्या हुआ मेरी जान ,क्या कर रही हो “
 
मैंने निशा को छेड़ा
 
“सॉरी भइया “वो झेप सी गई
 
मैंने अपना हाथ उसके कमर के नीचे रखा मुझे उसके सुडौल गोल गोल नितम्भो का आभास हो रहा था,उसकी नाइटी थी ही इतनी झीनी सी की मुझे उसकी पेंटी के इलास्टिक तक का पता चल रहा था ,मेरे इस हरकत से वो भी थोड़ी मचली,उसने मुझसे दूर हटने की बजाय और मुझसे चिपक गई………
 
उसका सर मेरे गालो के पास था,जबकि उसकी कमर मेरे कमर के ऊपर, उसके बड़े मुलायम वक्ष मेरे सीने से दबे हुए थे, उसके शरीर की गर्मी मेरे बदन में घुलने लगी थी….
 
मैं बिना किसी रोक टोक के उसके नितम्भो को सहला रहा था, वो हल्की आई आहों के साथ मुझसे और सटने की कोसिस कर रही थी,या शायद मेरे सीने से अपने वक्षो को सहला रही थी, उसकी इस हरकत से मेरे लिंग में भी एक हरकत आ गई,
 
मैं अपनी सगी छोटी बहन के साथ था, और मेरा लिंग अकड़कर उसके जांघो के बीच रगड़ खा रहा था…
 
ना जमाने की ना ही इस पवित्र रिश्ते की कोई भी परवाह मेरे मन मे बची थी, अब हम दोनो बस जिस्म रह गए थे,एक लड़की और एक लड़के का जिस्म,जो मिलन को बेकाबू होने लगे थे…
 
मेरे हाथो का दबाव उसके नितम्भोपर और भी जोरो से बढ़ता जा रहा था ,मैं उसे मसल ही रहा था, वो भी बेकाबू हो रही थी, उसकी सांस उखड़ने लगी थी, वो अपने गालो को मेरे दाढ़ी के कारण थोड़े खुरदुरे गालो में रगड़ने लगी थी,शायद उससे उसे कोई दर्द सा उठा और वो अपने चहरे को मेरे चेहरे के पास लायी…
 
उसकी आंखें थोड़ी बंद सी हो गई थी,बिखरे बाल ,अध खुली आंखे और माथे में आया पसीना ...वो पूरी तरह से वासना के गिरफ्त में मतवाली हो चुकी थी..
 
हमारी आंखे मिली और साथ ही होठ भी मिल गए…
 
इसबार मैंने उन्हें चूसने में कोई कमी नहीं दिखाई,जब मेरे और निशा के होठो ने एक दूजे के थूक से खुद को मिला लिया था,और उस गीलेपन से उठाने वाले आनन्द में हम दोनो ही मगन हो गए थे ठीक उसी समय निशा के जांघो के बीच मेरा तना हुआ लिंग भरपूर मालिस कर रहा था,और उसकी नाइटी उसके कमर से ऊपर हो चुकी थी जिससे मेरे हाथ सीधे उसके नितम्भो को उसकी पेंटी के ऊपर से ही पूरी तरह से महसूस कर पा रहे थे,वही उसकी पैंटी के आगे के भाग जो अपने में उसकी कोमल योनि को छुपाए हुए थे,वो गिला होकर मेरे निकट को सामने से गीला कर रहा था……
 
हवस….हवस ,वासना ,काम ये आग ही ऐसी है जो सभी मर्यादाओ और रिस्तो को भुला देती है,निशा मेरी छोटी बहन ,वही निशा जिसे मैंने बचपन से खिलाया था,अपने बांहो में उठाया था,एक बाप के रूप में जिसकी मैं परवरिश कर रहा था,जो मुझे अपना भगवान मानती थी,जिसके लिए मैं ही सबकुछ था,वही निशा मेरे नीचे थी और मैं एक मर्द बना हुआ उसके स्त्री के जिस्म को मसले जा रहा था,और वो भी इसके आनद में डूब रही थी ,मर्यादाओ को बचाने एक दीवार हमारे बीच थी जो कपड़ो के रूप में थी,हमारे अंतःवस्त्रों के रुप में थी,मेरे हाथ अब उनतक भी पहुचने लगे थे,मैं उस इलास्टिक को अपने उंगलियों से फंसाकर उसे नीचे करने की कोशिस कर रहा था ,वो भी उसके कमर को छोड़कर नीचे होने लगे थे,उसके नितम्भ अब पूरी तरह से आजाद थे,उसकी कोमल गोलाइया मेरे हाथो में सामने लगे थे,मैं उन्हें उसे भी नीचे कर रहा था,जिससे उसके सामने का भाग भी नंगा होने लगा,उसके योनि के बालो का अहसास मुझे होने लगा था,
 
“भइया ऊह “वो मचलने लगी शायद उसे भी पता था की इस तूफान का क्या अंत होने वाला है,सभी मर्यादाओ का अंत,और दो नंगे जिस्मो का मिलन जो की सिर्फ जिस्म होंगे ,बिना रिस्तो के किसी बंधन के,उसकी पेंटी कमर से उतर कर जांघो तक पहुच गई थी और उसने थोड़ी मेहनत करके उसे अपने पैरो से नीचे उतार दिया,लेकिन अभी भी मैं निकर में ही था,जिसे उतारने की शुरूवार निशा ने ही की,वो मेरे निकर के दोनो छोरो को पकड़कर उसे नीचे खिंचने लगी और आहिस्ता आहिस्ता मेरे जिस्म में बस एक अंडरवियर ही बच गया था,जिसमे से मेरा कड़ा लिंग उसके नंगे यानी में रगड़ खा रहा था और उसे और भी उत्तेजित कर रहा था,मेरे अंडरवियर का आगे का भाग उसके कामरस और मेरे प्रिकम से बुरी तरह से गीला हो चुका था….
 
इधर हमारे होठो में एक दूसरे के होठो से मानो जंग ही छेड़ दी थी ,जैसे जैसे हमारे कपड़े उतरे थे वैसे वैसे ही हम और उत्तेजित होकर एक दूसरे पर आक्रामक रूप से टूट पड़े थे,बस एक आखरी दीवार हमारे सामने थी जिसका भी कोई भरोषा नही की वो कब हट जाए,..
 
अभी तक मेरे ऊपर चढ़ी हुई निशा को मैंने अपने नीचे खिंच लिया अब मैं उसके साथ मनमानी करने को पूरी तरह से आजाद था वही उसने भी मुझे अपना सब कुछ सौप दिया था,वो पूरी तरह से समर्पण की स्तिथि में आ गई थी ,वो अपने हाथो को मुझसे लपेटे हुए बस आहे ले रही थी ,मैं अपने अंडरवियर की पतली दीवार के बावजूद भी उसमे घुसने को जोर लगा रहा था,जिससे मेरा लिंग के हल्के से कपड़े की दीवार के माध्यम से ही सही लेकिन उसके योनि को फांको को बुरी तरह से रगड़ रहा था,गीलापन बढ़ने लगा था और मुझसे और सहन नही हो रहा था वही हाल शायद निशा का भी रहा हो ,हम अपने वासना के चरम पर थे,निशा ने अपना हाथ मेरे अंडरवियर के इलास्टिक पर रख दिया था,उसकी उंगलिया उसमे फसने लगी थी वो मेरे शरीर में बस कुछ ही देर का मेहमान था और उसके उतरते ही जो होने वाला था उससे हम दोनो ही बाकिफ थे………
 
लेकिन शायद कुदरत को कुछ और ही मंजूर था ,इससे पहले की निशा अपने उंगलियों के माध्यम से मेरे आखिरी कपड़े को उतार फेके हमे गेट के खुलने की आवाज सुनाई दी ,शायद वो हाल का गेट था,यानी काजल के आने का संकेत...हम दोनो की ही सांसे बेकाबू थी ,
 
“मुझे भाभी पर इतना गुस्सा कभी नही आया,रोज तो 5-6 बजे ही आती है आज 4 बजे ही आ गई”निशा ने बड़े ही गुस्से में कहा और तुरंत ही अपने कपड़ो को ठीक करने लगी मैं भी जल्दी से अपने निक्कर को पहन कर सो गया,निशा जल्दी ही अपनी पेंटी को ढ़ंढने लगी और उसे पहन कर मुझसे लिपट कर सोने की एक्टिंग करने लगी...ये उस समय हुआ जब काजल ने हमारे कमरे का गेट खोला ,हम दोनो की ही सांसे अब भी तेज चल रही थी ,काजल ने कमरे की लाइट नही जलाई और अपना बेग रखकर सीधे ही बाथरूम में चली गई ,बाथरूम के प्रकाश से हमारा कमरा भी रौशन हो गया था,
 
“अरे भाभी आप आ गई ,मैं अपने कमरे में जाती हु “
 
निशा आंखों को मलते हुए बोली और सीधे अपने कमरे में चली गई,लेकिन मैं…...मुझे तो सोने की ही एक्टिंग करनी थी…..
 
 
 
 
कहानी आगे जारी रहेगी...
 
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