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भाभी : दोस्ती, प्यार और चुदाई (भाग - 10) 
@Kamvasna 04 मई, 2023 1510

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मैं वापिस आया तब मम्मी और आंटी बैठी थी। फिर मैंने कंडोम और क्रीम वहां रख दी तो फिर मम्मी ने कंडोम की डिब्बी से कंडोम निकाल कर मुझे दे दिया। फिर मैंने वो कंडोम अपनी बीच वाली उंगली पर चढ़ाकर फिर उस पर क्रीम लगाने लगा। फिर इतने में मम्मी घोड़ी बन गई। फिर क्रीम लगाकर मैंने अपनी उंगली मम्मी की गाँड में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा। पास में आंटी ये सब देख रही थी।
 
 
 
 
फिर मम्मी एक्टिंग करने लगी जैसे उनके दर्द हो रहा हो। मैं ऐसे कई देर तक मम्मी की गाँड में उंगली करता रहा। फिर मैंने मम्मी की गाँड से उंगली बाहर निकाल ली और फिर कंडोम उतारकर रख दिया और फिर मम्मी की गाँड पर लगी एक्स्ट्रा क्रीम को पोंछकर मम्मी की गाँड पर लगाकर गाँड मसलने लगा। फिर मसलने के बाद मम्मी सीधी होकर बैठ गई और आंटी से बात करने लगी। फिर मम्मी आंटी को बताने लगी के उनकी गाँड के अंदर फुंसी हुई हैं जिससे सफेद पानी निकलता रहता हैं। फिर वो दोनों बातें करने लगी। फिर आंटी ने मम्मी से घर से बाहर चलने के लिए कहा और मैं अंदर कमरे में कंडोम और क्रीम छोड़ने चला गया। फिर मम्मी खड़ी होकर चलने लगी और तभी अचानक उन्हें कंडोम पड़ा हुआ दिखाई दिया और आंटी तब खड़ी हो ही रही थी के फिर मम्मी ने आंटी से कंडोम उठाकर लाने के लिए कहा। तो फिर आंटी ने कंडोम उठा लिया और फिर वो दोनों बाहर जाने लगी। वो दोनों नंगी बाहर जा रही थी और आंटी ने एक हाथ मे कंडोम पकड़ रखा था। उन दोनों को नंगी देखकर मैं फिर से गर्म होने लगा। फिर मैं कंडोम और क्रीम अंदर रखकर जल्दी से उनके पास चला गया।
 
 
 
 
फिर आंटी ने कंडोम वहीं पानी की नाली में डाल दिया और फिर वो दोनों और मैं नंगे ही घूमने लगे। तब दोपहर बाद का टाइम था और मैन रोड पर कोई आता जाता दिखाई नहीं दे रहा था। फिर वो दोनों आधे रास्ते तक नंगी ही चली गई। फिर आंटी डरने लगी के कहीं कोई देख लेगा। फिर मम्मी बोली के कोई नहीं देखेगा। लेकिन फिर आंटी नहीं मानी तो फिर हम आधे रास्ते से ही वापिस घर की तरफ आ गए। आंटी को ऐसे नंगी घूमने में काफी मजा आ रहा था। फिर आंटी के सामने ही मैं की चुत को छोड़कर बाकी सारा बदन सहला रहा था तो तब भी आंटी ने कुछ नहीं बोला। फिर मैं आंटी से भी चिपक कर खड़ा हो गया और आंटी की गाँड एक दो बार सहलाई। तब भी आंटी ने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने आंटी को गोद मे उठाकर ऊपर उठा दिया और घुमाने लगा। जिससे आंटी को काफी मजा आया। हम काफी देर तक घर से बाहर रहे और मस्ती करते रहे। मेरा लंड तब पूरा खड़ा था। लेकिन इससे आंटी को कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था। फिर मैं आंटी के सामने ही अपने लंड को पकड़कर सहलाने लगा और सहलाता ही रहा। लेकिन तब भी आंटी बस देखकर ही रह जाती। 
 
 
 
फिर शाम होने लगी तो आंटी फिर घर जाने लगी तो कपड़े पहनने से पहले आंटी मेरे और मम्मी से काफी देर तक चिपकी रही और मैंने भी आंटी को अपने से कसकर चिपका लिया। फिर आंटी को अचानक याद आया के उस दिन मंदिर में कोई विशेष पूजा थी। फिर आंटी ने मम्मी से चलने के लिए कहा। फिर मम्मी बोली के हाँ चलेंगे। फिर आंटी बोली के मैं जल्दी से खाना बनाकर और खाकर आ जाती हूँ। इतने में तुम दोनों भी खाना बनाकर खा लो जल्दी से। फिर मम्मी के बोली के ठीक हैं। फिर आंटी बिना कपड़े पहने ही जाने लगी तो फिर मम्मी ने उन्हें कपड़े पहनने के लिए कहा तो फिर वो जोर से हँसने लगी और फिर कपड़े पहनकर चली गई। फिर मम्मी ने जल्दी से खाना बनाया और फिर हमने खाना खाया। फिर मम्मी तैयार होने लगी और फिर एक नई नवेली दुल्हन की तरह सजकर तैयार हो गई। मम्मी ने मांग भरी, मंगलसूत्र पहना और मेकअप वगैरह भी किया। मम्मी तब काफी सेक्सी लग रही थी। फिर मैं मम्मी की सलवार खोलकर मम्मी की गाँड चाटने लगा। फिर इतने में आंटी आ गई तो मैं साइड में हो गया और मम्मी सलवार पहनने लगी। फिर आंटी ने जब मम्मी को देखा तो देखती ही रह गई। फिर आंटी बोली के ये क्या पहना हैं। फिर मम्मी बोली के रात को कौन देखने वाला हैं और वैसे भी किसे पता चलने वाला हैं। 
 
 
 
 
फिर आंटी बोली के फिर मैं भी तुम्हारी तरह तैयार हो जाती हूँ। फिर आंटी भी मेकअप वगैरह करके तैयार हो गई। फिर वो दोनों तैयार हो गई तो मैंने भी कपड़े पहन लिए और फिर हम मंदिर जाने लगे। फिर हम खेल के मैदान से होकर जा रहे थे जो कि बिल्कुल सुनसान था। लगभग सभी सड़क से ही मंदिर जाते थे। फिर आंटी बोली के मैदान देखो बिल्कुल खाली पड़ा हैं। फिर मम्मी आंटी से बोली के हम वापिस आएंगे तब काफी रात हो चुकी होगी तो हम मैदान में आते ही नंगी हो जाएंगी और फिर नंगी ही घर तक जाएंगी। ये सुनकर आंटी हँसने लगी और बोली के फिर तो बहुत मजा आएगा। फिर हम ऐसे ही बातें करते करते मंदिर पहुंच गए। मंदिर में उस दिन काफी भीड़ थी। फिर भाई का फोन आया तो मैंने बताया के हम मंदिर आये हैं। फिर भाई बोला के तो मम्मी की फ़ोटो ही भेज दे। फ़ोटो देखकर ही लंड हिला लूँगा। फिर मैंने मम्मी की फ़ोटो खींचकर उसे भेज दी तो वो मम्मी को ऐसे देखकर हैरान रह गया और फिर मुझे फोन करके पूछा के ये अपनी मम्मी ही हैं क्या। फिर मैंने भाई को बताया के मम्मी को ऐसे सज संवरकर रहना अच्छा लगता हैं। पापा नहीं रहे तो क्या हुआ अब वो मुझे ही अपना पति मानकर सजती हैं। 
 
 
 
 
फिर भाई बोला के ठीक हैं। फिर हम मंदिर में ही इधर उधर घूमते रहे। फिर पूजा के बाद हम वहीं बैठकर बातें करने लगे। फिर आंटी मम्मी से बोली के अगर हम दोनों इन सब के बीच नंगी हो जाएं तो क्या होगा। फिर मम्मी बोली के तो ये सब मर्द हमें चोद चोद कर रंडी बना देंगे। ये सुनकर आंटी और मैं हँसने लगे। फिर ऐसे ही बातें करते करते हमें 12 बज गए। लेकिन अभी भी लोग आ रहे थे। फिर मम्मी ने घर चलने के लिए कहा तो हम मंदिर से आने लगे। फिर आते टाइम मुझे एक थैला दिखाई दिया जो कि नीचे पड़ा था। फिर मैंने वो उठा लिया और फिर मंदिर से बाहर आ गए। फिर मम्मी ने मुझे कहा के ये थैला क्यों उठाया हैं। फिर मैं बोला के तुम दोनों नंगी होओगी तो कपड़े डालने के लिए काम आएगा। ये सुनकर आंटी हंसते हुए बोली के सही कहा। फिर हम रोड क्रोस करके दूसरी तरफ चले गए और थोड़ा चलने के बाद मैदान में पहुंच गए। फिर मैदान में पहुंचने के बाद हमने चारो तरफ देखा तो हमें कोई दिखाई नहीं दिया। फिर मम्मी अपने कपड़े खोलने लगी और फिर आंटी भी। फिर उन्होंने कपड़े खोलकर थैले में डाल दिये। फिर मैं भी कपड़े खोलकर नंगा हो गया और फिर वो दोनों मेरे आगे आगे चलने लगी। 
 
 
 
 
 
फिर मैंने फोन की फ़्लैश लाइट चालू की तो मुझे पीछे से उनकी हिलती हुई गाँड दिखने लगी। फिर मेरा मन होता तब में फ़्लैश लाइट जलाकर उनके बदन को निहार लेता। फिर मैं उनके साथ साथ चलने लगा तो मम्मी मेरा लंड पकड़कर सहलाने लगी। अंधेरे में आंटी को कहां पता चलने वाला था। फिर हम घर की तरफ जाने लगे। रात को ठंड थी पर हमें बिल्कुल नहीं लग रही थी। फिर हम आधे रास्ते पहुंचे तो फिर आंटी बोली के चलो मैदान में घुमके आते हैं। घर तो थोड़ा लेट ही चले जायेंगे। फिर मुझे और मम्मी को आंटी का ये आईडिया काफी पसंद आया। फिर मैंने वो कपड़ो का थैला वहीं एक जगह थोड़ा छिपाकर रख दिया। मैंने सोचा ये थैला कहाँ साथ मे लेकर घूमूँगा। फिर हम तीनों नंगे मैदान के बीचोबीच जाने लगे। मैं उनके बीच मे चल रहा था और उनकी गाँड सहला रहा था। फिर मैदान में एक जगह घास आ गई तो हम उस घास पर लेट गए और मस्ती करने लगे। मैं मम्मी से चिपक कर लेट गया और लंड मम्मी की गाँड में डाल कर करने लगा। फिर हम थोड़ी देर बाद उठ गए और दूसरी जगह चले गये। फिर हम घास पर लोटने लगे और मजे लेने लगे। हमें तब किसी का डर नहीं था तो मम्मी और आंटी जोर जोर से बोल रही थी। फिर मैं आंटी से लिपट गया और फिर हम साथ मे लोटने लगे। फिर मेरा लंड आंटी के पेट पर लगने लगा तो फिर आंटी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़कर साइड कर दिया। फिर मैंने भी आंटी की चुत सहला दी। लेकिन आंटी कुछ नहीं बोली। फिर मैंने आंटी को अपने सीने से लगा लिया तो फिर आंटी ने भी मुझे कसकर पकड़ लिया। 
 
 
 
 
 
फिर ऐसे ही हम मैदान में काफी देर तक घूमते रहे। फिर हम वापिस आने लगे। आते टाइम मैंने वो थैला ले लिया और फिर हम मैदान से निकलकर मैन रोड पर चलने लगे। हम तीनों बिल्कुल नंगे रोड पर चल रहे थे। आंटी का डर भी थोड़ा कम हो गया था तो वो बिल्कुल बिंदास होकर चल रही थी। फिर हम तीनों घर पर पहुंच गए। फिर आंटी ने अपने घर जाने के लिए कहा तो फिर मम्मी ने उन्हें हमारे घर पर ही रुकने के लिए कहा। लेकिन आंटी नहीं मानी। फिर मम्मी ने मुझे आंटी को छोड़कर आने के लिए कहा। फिर मैंने और आंटी ने कपड़े पहने और फिर आंटी ने मेरी बाजू पकड़ ली और फिर हम आंटी के घर जाने लगे। मम्मी नंगी ही गेट खोलकर अंदर चली गई। फिर थोड़ी देर बाद हम आंटी के घर पहुंचे और आंटी ने गेट बजाया। पर अंकल नींद में थे तो गेट कौन खोलता। फिर आंटी ने एक दो बार और कोशिश की लेकिन फिर भी गेट नहीं खुला। तो फिर मैंने आंटी से घर चलने के लिए कहा तो फिर आंटी मेरे साथ आ गई। आते टाइम मैंने आंटी की कमर में हाथ डालकर चल रहा था। फिर हम हमारे घर पहुंच गए और फिर अंदर आकर गेट लॉक करके कमरे में चले गए। मम्मी तब तक सोई नहीं थी। 
 
 
 
 
 
फिर हमें देखकर मम्मी ने पूछा के क्या हुआ। फिर मैंने बताया के किसी ने गेट खोला ही नहीं। फिर मम्मी बोली के मैंने पहले ही कहा था के रुक जाओ सुबह चले जाना। फिर आंटी बोली के मैंने सोचा घर चली जाती हूँ घर जाना तो हैं ही। फिर ऐसा कहते हुए आंटी अपने कपड़े खोलने लगी। फिर मम्मी बोली के घर वहीं मिल जाएगा। आजा अब एक रात मेरे साथ सो जा। फिर आंटी नंगी हो गई तो फिर बेड पर जाकर मम्मी के साथ लेट गई। मैं भी नंगा होकर जाकर उनके बीच लेट गया। उनके नरम नरम बोबे मेरी बॉडी से लग रहे थे। मैं सीधा लेटा था और वो दोनों मेरी तरफ मुँह करके लेटी थी। मेरा लंड पूरा खड़ा था। फिर मैं एक हाथ से अपना लंड सहलाने लगा तो वो दोनों मेरा लंड देखकर एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। फिर आंटी हँसकर बोली के अब इसकी जल्दी से शादी करवा दो। फिर मम्मी बोली के कोई अच्छी सी लड़की मिल जाये तो कल ही कर दूँ। फिर मम्मी ने आंटी के सामने ही मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर मम्मी कहने लगी के पर शादी तक तो इसे शांत रखना पड़ेगा। इसने मेरी बहुत सेवा की हैं। कोई सा ही बेटा होगा जो कि अपनी माँ को घर पर ऐसे नंगी रहने देगा। 
 
 
 
 
 
इसने जो मेरे लिए किया हैं वो तो इसके पापा भी नहीं कर पाते शायद। फिर मम्मी ने आंटी से पूछा के उसके पति का कितना बड़ा हैं। फिर आंटी बोली के इतना बड़ा तो नहीं हैं। फिर मम्मी मेरे लंड को बीच मे से पकड़ कर बोली के तो इससे आधा हैं। फिर आंटी बोली के आधे से थोड़ा ही बड़ा हैं। फिर मम्मी जल्दी जल्दी मेरा लंड सहलाने लगी और हँसने लगी। फिर मम्मी ने सहलाना छोड़ दिया और बोली के मेरा तो हाथ दुखने लग जाता हैं पर इसका तू पानी निकलता ही नहीं हैं। मम्मी की बात सुनकर मैं और आंटी हँसने लग जाती हैं। फिर आंटी उठकर मेरे ऊपर से मम्मी की तरफ जाने लगती हैं तो जब आंटी मेरे ऊपर होती हैं तो मैं आंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने से चिपका लेता हूँ और फिर आंटी की गाँड दबाने लगता हूँ। फिर आंटी हंसते हुए कहती हैं के मुझे तेरी मम्मी के पास जाने दे। लेकिन मैं आंटी को नहीं छोड़ता हूँ। मेरे लंड पर आंटी की चुत टिकी होती हैं। 
 
 
 
 
फिर मैं आंटी को छोड़ देता हूँ तो फिर आंटी मेरे पैरों पर बैठकर अपने बाल सही करने लगती है और उनकी चुत मेरे लंड के बिल्कुल पास में होती हैं। फिर मैं अपना लंड हिलाने लग जाता हूँ। फिर आंटी मम्मी के ऊपर चली जाती हैं और फिर वो एक दूसरे से मस्ती करने लगती है। उन्हें देखकर मैं अपना लंड सहलाता रहता हूँ। फिर आंटी मम्मी के बोबे चुस्ती हैं और फिर चुत चाटने लग जाती हैं। जिससे मम्मी काफी गर्म हो जाती हैं। फिर मम्मी आंटी को लेटाकर उनके ऊपर आकर चुत चुसने लग जाती हैं। जिससे कि आंटी को बहुत मजा आता हैं। फिर मम्मी मुझे अपने पीछे आने का इशारा करती हैं तो मैं उनके पीछे जाकर गाँड और चुत मारने लग जाता हूँ। कमरा उन दोनों की सिस्कारियों से गूंज उठता हैं। फिर मैं जल्दी ही झड़ जाता हूँ तो फिर मैं आकर आंटी की साइड में लेट जाता हूँ। फिर आंटी भी झड़ जाती हैं तो मम्मी आंटी के ऊपर ही लेट जाती हैं और आंटी मम्मी को कसकर पकड़ लेती हैं। फिर वो दोनों एक दूसरे को किस करने लग जाती हैं। फिर मम्मी आंटी से नीचे उतरकर मेरी तरफ लेट जाती हैं और फिर वो दोनों चिपक कर लेट जाती हैं। फिर हम सो जाते है। 
 
 
 
 
हम सुबह 4-5 बजे के लगभग सोते हैं। फिर 7 बजे के लगभग मेरा फोन बजता हैं तो मुझे जाग आ जाती हैं और फोन देखता हूँ तो अंकल का था। फिर मैं फोन उठाकर अंकल से बात करता हूँ। फिर अंकल आंटी के बारे में पूछते है तो मैं उन्हें बताता हूँ के हम सुबह 4-5 बजे ले लगभग मंदिर से आये थे और अब आंटी सो रही हैं। फिर अंकल बोले के ठीक हैं उसे सोने दो। फिर मैं बोला के आंटी दोपहर से पहले आ जायेगी। फिर अंकल बोले के ठीक हैं बेटा और वैसे भी मुझे उससे क्या करवाना हैं सोने दो उसे। फिर मैं बोला के ठीक हैं अंकल। तब मम्मी और आंटी भी जाग जाती हैं तो फिर मैं उन्हें सब बता देता हूँ। फिर वो फिर से सो जाती हैं। वो दोनों तब बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर मैं उठकर मम्मी के ऊपर से होता हुआ आंटी के ऊपर चला जाता हूँ और कुछ देर आंटी के ऊपर ही रहता हूँ। आंटी तब सो रही थी। मैं आंटी के बड़े बड़े बोबो और बदन को देखकर अपना लंड सहलाने लग जाता हूँ। फिर मैं आंटी के साइड में जाकर सो जाता हूँ तो फिर आंटी अपना एक हाथ मेरे ऊपर सो जाती हैं और आंटी के बूब मेरी छाती से लगने लग जाते हैं और फिर हम ऐसे ही सो जाते हैं। 
 
 
 
 
फिर लगभग 9 बजे मम्मी उठ जाती है और चाय बनाकर ले आती हैं और फिर हमें भी उठा देती हैं। फिर मैं जाग जाता हूँ और एक हाथ से आंटी के बूब दबाने लग जाता हूँ। फिर आंटी सीधी होकर उठने लगती हैं तो उनका हाथ मेरे पेट से होते हुए मेरे लंड पर चला जाता हैं। मैं तब आंटी से बिल्कुल चिपक कर ही लेटा हुआ था। फिर आंटी जब अपना हाथ मेरे लंड पर देखती हैं तो फिर हँसने लग जाती हैं और फिर अपना हाथ हटा लेती हैं। फिर मैं और आंटी उठकर एक साथ पेशाब करने चले जाते हैं। घर मे टॉयलेट तो बना हुआ हैं लेकिन हम कभी कभी पेशाब घर के बाहर बनी नाली में करके आते हैं। फिर मैंने आंटी से बाहर चलकर पेशाब करने के लिए कहा तो फिर आंटी मेरे पीछे आने लगती हैं। फिर मैं गेट खोलकर बाहर चला जाता हूँ और आंटी भी मेरे पीछे पीछे आ जाती हैं। फिर मैं वहां खड़ा होकर पेशाब करने लगता हूँ और आंटी बैठकर पेशाब करने लगती हैं। मैं अपने लंड को पकड़कर अपने पेशाब की धार से दीवार पर आंटी का नाम लिख देता हूँ। जिसे देखकर आंटी हँसने लगती हैं। फिर हम दोनों हंसते हुए अंदर आ जाते हैं पेशाब करके। फिर हमें हंसता देखकर मम्मी पूछती हैं के क्या हुआ तो फिर आंटी मम्मी को पूरी बात बताती हैं। फिर मम्मी भी हँसने लग जाती हैं। फिर चाय पीकर हम आंगन में आकर टहलने लगते है और फिर छत पर चले जाते है। फिर छत पर से मैदान देखते हैं तो हमें रात की बात याद आ जाती हैं के कैसे हमने मैदान में मस्ती की। फिर आंटी कहती हैं के काश हम ऐसे मजे दिन में भी कर पाते। फिर मम्मी बोलती हैं के अब तुझे शर्म नहीं आती क्या। फिर आंटी कहती हैं के शर्म, ये क्या होती हैं। फिर आंटी की बात पर मैं और मम्मी फिर से हँसने लगते है। 
 
 
 
 
फिर कुछ देर बाद हम नीचे आ जाते हैं। फिर हमें फ्रेश होना था। फिर आंटी कहती हैं के चलो बाहर ही होकर आते हैं फ्रेश। फिर हम तीनों बाहर चले जाते हैं और जाकर नाली पर बैठ जाते हैं। हम मैन रोड की तरफ देखने लगते हैं। फिर मैं देखता हूँ के आंटी और मम्मी की बड़ी बड़ी गाँड से पीली पीली लैट्रिन निकलने लगती हैं। फिर लैट्रिन करने के बाद अंदर आकर पानी से मैं अपनी गाँड धो लेता हूँ। तभी मम्मी आती हैं तो फिर वो मेरे हाथ मे पानी देखकर बैठ जाती हैं और फिर अपनी गाँड ऊपर उठा लेती हैं और फिर मुझे धोने के लिए कहती हैं तो फिर मैं धो देता हूँ। फिर मम्मी ने आंटी को भी धुलवाने के लिए कहा तो फिर आंटी भी वैसे ही बैठ जाती हैं और फिर मैं आंटी की गाँड धो देता हूँ। गाँड धुलवाकर आंटी बहुत खुश होती हैं और कहती हैं के बचपन से लेकर अब तक ये पहला मौका हैं के किसी ने मेरी गाँड धोई हैं। फिर मैं बोला के आंटी हमारे साथ रहोगी तो मैं रोज आपकी गाँड धो दिया करूँगा। फिर ये सुनकर आंटी फिर से हँसने लगती हैं। 
 
 
 
 
फिर हम आंगन में बैठकर बातें करने लगते है। फिर आंटी बोली के मुझे तुम लोगो के साथ बहुत मजा आता हैं। फिर मम्मी बोली के हमें भी। फिर मैं आंटी के बोबे पकड़कर चुसने लग जाता हूँ और मम्मी मेरा लंड पकड़कर सहलाने लग जाती हैं। फिर मैं आंटी की चुत सहलाने लग जाता हूँ तो फिर आंटी मुझसे पूछती हैं के चिकनी हो गई हैं ना। फिर मैं हंसते हुए कहता हूँ के हाँ। आंटी अपने पैर फैलाकर बैठी होती हैं तो मैं उनकी चुत काफी दी तक सहलाता रहता हूँ और बोबे चूसते रहता हूँ। फिर ऐसे करते करते 11 बज जाते है। फिर आंटी जाने के लिए कहती हैं और फिर कपड़े पहनने से पहले मुझसे और मम्मी से गले मिलती हैं। फिर जब आंटी मुझसे गले लगती हैं तो मैं अच्छे से आंटी की गाँड सहलाता हूँ। फिर मम्मी और आंटी एक दूसरे की गाँड पर थप्पड़ मारती हैं और हँसने लग जाती हैं। फिर मैं भी पहले मम्मी की और फिर आंटी की गाँड पर थप्पड़ मारता हूँ। फिर आंटी ने भी मेरी गाँड पर थप्पड़ मार दिया। फिर हम खूब हंसते हैं। फिर आंटी कपड़े पहन लेती हैं और जाने लगती हैं। फिर तभी मम्मी मुझे मार्केट से दूध लाने के लिए कहती हैं तो फिर मैं भी आंटी के साथ चला जाता हूँ। फिर हम दोनों साथ मे जाते हैं तो हम उस रास्ते से गुजरते हैं जिस रास्ते हम रात को नंगे आये थे तो ये आंटी मुझसे कहती हैं और हँसने लगती हैं। फिर मैं भी हँसने लगता हूँ। 
 
 
 
फिर हम आंटी के घर की तरफ जा रहे होते थे तो रास्ते मे अंकल मिल जाते है। वो अपने दोस्तों के पास जा रहे होते है। फिर वो आंटी को घर की चाबी देते हैं और थोड़ी देर बातें करते है और फिर चले जाते हैं। फिर हम आंटी के घर पहुंच जाते है तो आंटी ताला खोलकर अंदर जाने लगती हैं और साथ मैं मुझे भी अंदर आने के लिए कहती हैं। लेकिन मुझे मार्केट जाना था तो मैं मना कर देता हूँ। लेकिन फिर आंटी मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर ले जाती हैं। फिर अंदर आते ही आंटी घर के गेट बंद कर देती हैं। फिर अंदर आते ही आंटी मुझसे चिपक जाती हैं और कहती के मुझे तुम दोनों माँ बेटे के साथ बहुत मजा आया। फिर मैं आंटी की गाँड दबाकर कहता हूँ के मुझे भी। फिर आंटी हँसने लगती हैं। फिर मैं आंटी के बोबो और गालों पर किस कर देता हूँ। फिर मैं आंटी से उनके बदन की तारीफ करता हूँ तो आंटी हँसने लगती हैं। अब इसमें कोई शक नहीं था के आंटी को भी इस सबमे मजा आने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैं आंटी  के घर से निकलकर मार्केट चला जाता हूँ।
 
 
 
फिर जल्दी से दूध लेकर घर पर आता हूँ देखता हूँ के मम्मी भाई से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। मम्मी बात करते टाइम अपनी चुत सहला रही थी और उधर भाई अपना लंड हिला रहा था। फिर मम्मी अपनी चुत में उंगली करने लगी और साथ मे ये भाई को दिखाने लगी। चुत में उंगली करते हुए मम्मी जोरों से सिसकारी ले रही थी और बोल रही थी बेटा डाल दे लंड अपनी माँ की चुत में। फिर भाई बोला के मम्मी तुम्हारी चुत बहुत गर्म हैं। वो दोनों ही काफी गर्म हो चुके थे। फिर थोड़े देर बाद भाई का पानी निकल गया तो वो शांत हो गया और फिर थोड़ी देर और बात करके उसने फोन काट दिया। मम्मी अभी तक झड़ी नहीं थी तो फिर मैं मम्मी की चुदाई करने लगा और फिर हम दोनों साथ मे झड़ गए। तब जाकर हम दोनों को शांति मिली। फिर मम्मी ने खाना बनाया और फिर खाना खाकर आंगन में आकर लेट गए। कुछ दिनों से भाभी से बात नहीं कि थी और ना ही भाभी का कोई फोन आया था पर व्हाट्सएप्प पर बात होती रहती थी। फिर मैंने भाभी को फोन किया तो भाभी एक शादी में गई हुई थी। फिर मैंने और मम्मी ने उससे थोड़ी थोड़ी देर बात की और फिर वो बोली के वापिस जाकर फोन करूँगी। फिर भाभी से बात करने के बाद मैं और मम्मी आंगन में ही लेटे रहे और फिर हमें नींद आ गई। 
 
 
 
 
फिर शाम को मुझे जाग आई तो देखा के मम्मी मुझसे चिपक कर मेरा लंड पकड़ कर सो रही थी। फिर मैं मम्मी के बदन को सहलाने लगा तो फिर मम्मी भी जाग गई। फिर मम्मी ने उठकर चाय बनाई और फिर चाय पीकर हम मैन गेट खोलकर बाहर जाकर बैठ गए। फिर तभी थोड़ी देर बाद हमें आंटी आती हुई दिखाई दी। फिर हम उठकर खड़े हो गए। फिर मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर आंटी हमारे पास आ गई तो फिर आंटी मम्मी से मिली और फिर मैं भी आंटी से मिला। फिर मैं आंटी से चिपककर खड़ा हो गया तो मेरा खड़ा लंड आंटी के बदन से लग रहा था। फिर आंटी ने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और साथ मे मम्मी से बातें करती रही। फिर आंटी ने हमें बताया के वो सब्जी लेने आई थी तो फिर थोड़ी देर के लिए हमसे मिलने आ गई। आंटी ने तब बैंगन ले रखे थे। फिर मम्मी ने आंटी से कहा के बैंगन चुत में लेने के लिए खरीदे हैं क्या। फिर ये सुनकर आंटी जोर से हंसी और बोली के नहीं ये तो सब्जी के लिए ही हैं और चुत में लेने के लिए तो पति का लंड हैं ना। फिर आंटी की बात सुनकर हम हँसने लगे। फिर मम्मी ने आंटी से अंदर चलने के लिए कहा तो फिर आंटी बोली के अभी में लेट हो रही हूँ पर कल जल्दी आ जाऊँगी। फिर आंटी वापिस जाने लगी तो फिर मैं और मम्मी आंटी के साथ साथ मैन रोड तक गए। फिर आंटी जाने लगी तो फिर मम्मी और आंटी ने लिप किस किया और फिर मैं भी आंटी को लिप किस करने लगा और आंटी के होंठो को चुसने लगा। फिर मैंने आंटी के गालों पर किस किया। फिर आंटी चली गई और मैं वहीं मम्मी को दीवार सहारे लगाकर चुदाई करने लगा। हम दोनों माँ बेटे को किसी का डर नहीं था। फिर मैंने मम्मी को घोड़ी बना लिया और मम्मी की कमर को कसकर पकड़ लिया और फिर गाँड मारने लगा। मैं ऐसे बीच सड़क पर मम्मी को पागलों की तरह चोद रहा था। मैन रोड से काफी साधन आ जा रहे थे और मैं और मम्मी हमारी अंधेरी गली में चुदाई कर रहे थे। फिर मैं झड़ने लगा तो मैंने सारा पानी मम्मी की गाँड में ही डाल दिया और फिर हम वापिस घर मे आ गए।
 
 
 
 
फिर मम्मी ने खाने में सिर्फ खीर ही बनाई और खीर खाकर हम जाकर बेड पर लेट गए। फिर मैं और मम्मी पोर्न वीडियो देखने लगे और काफी देर तक देखते रहे। हम दिन में काफी सोये हुए थे तो नींद हमें बिल्कुल भी नहीं आ रही थी। हम काफी देर तक पोर्न वीडियो देखते रहे और फिर पोर्न वीडियो देख देखकर बोर हो गए तो फोन बंद करके छोड़ दिया। फिर हम दोनों एक दूसरे के चुत और लंड सहलाने लगे। मम्मी की चुत भी गीली हो चुकी थी और मेरा लंड भी पूरा खड़ा था। फिर मैंने मम्मी को अपनी तरफ किया और फिर मैंने मम्मी का एक पैर अपने ऊपर रख लिया जिससे मेरा लंड मम्मी की चुत में चला गया और साथ मे मैं मम्मी के बोबे चुसने और सहलाने लगा। फिर मैं मम्मी से बोला के राधा अब घर ही घर मे चुदाई करने में मजा नहीं आता हैं। फिर मम्मी बोली के हाँ मुझे भी नहीं आता हैं। फिर मम्मी बोली के तो बताओ क्या करें। मेरा लंड पूरा मम्मी की चुत में था और मुझे मम्मी की चुत की गर्मी महसूस हो रही थी। फिर मैं मम्मी से बोला के तुम बताओ तुम कैसे मजे करना चाहती हो। फिर मम्मी बोली के मैं तो तुम कहोगे वैसे ही कर लूँगी। फिर तभी अचानक बादल गरजने की आवाज आने लगी तो मैं ये आवाज सुनकर खुश हुआ और फिर मम्मी की तरफ देखकर बोला के चलो आज बरसात में रोमांस करेंगे। 
 
 
 
 
फिर मम्मी मुस्कुराने लगी तो फिर मैं मम्मी के लिप किस करने लगा और नीचे से मम्मी की चुत में धक्के लगाने लगा। फिर मैंने बिना झड़े ही लंड बाहर निकाल लिया और फिर हम उठकर बाहर आ गए। फिर हम आंगन में एक दूसरे से चिपक कर खड़े हो गए। फिर मैं मम्मी से बोला के आज हम ऐसे रोमांस करेंगे जैसे हमेशा से ही हम एक दूसरे के पति पत्नी रहे हो। फिर तभी बरसात आने लगी तो फिर हम फिर से लिप किस करने लगे। फिर मैं मम्मी के हर अंग को चूमने लगा और मम्मी को भी इसमें काफी मजा आ रहा था। फिर मैं मम्मी के बदन को सहलाने दबाने लगा। हम दोनों फुल गर्म हो चुके थे और ऊपर से बरसात की ठंडी ठंडी बूंदे जब शरीर पर गिरती तो उसका अलग ही मजा आ रहा था। फिर मम्मी नीचे बैठकर मेरा लंड चुसने लगी और मैं मम्मी के सिर को पकड़कर अपना पूरा लंड मम्मी के मुँह में डाल रहा था। फिर मैंने मम्मी को खड़ा कर लिया और हम एक दूसरे की आंखों में देखने लगे और फिर से लिप किस करने लगे। फिर मम्मी ने मुझे आंगन में लेटा लिया और फिर मेरे ऊपर आकर मेरे बदन को चूमने लगी। फिर चूमते चूमते मेरे लंड तक पहुंची तो फिर मेरा लंड चुसने लगी। फिर कुछ देर चुसने के बाद मम्मी मेरे लंड पर बैठ गई और लंड अपनी चुत में डाल लिया और फिर ऊपर नीचे होने लगी। इससे हम दोनों को ही काफी मजा आने लगा। 
 
 
 
 
ऐसे मम्मी काफी देर तक करती रही और मैं मम्मी के बोबो को दबाता रहा। फिर मैंने मम्मी को घोड़ी बना लिया और फिर जोर जोर से मम्मी की गाँड मारने लगा और मम्मी जोर जोर से सिस्कारियाँ लेने लगी। फिर मैं झड़ने वाला हुआ तो मैं मम्मी की गाँड से चिपक गया और मम्मी की नरम नरम गाँड का मजा लेने लगा और साथ मे झड़ने लगा। फिर मैं झड़ कर लेट गया और फिर मम्मी मुस्कुराते हुए मेरे ऊपर लेट गई। हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। फिर हम खड़े हो गए। फिर मैंने मम्मी से बाहर चलने के लिए कहा तो फिर मम्मी मेरे आगे आगे चलकर गेट की तरफ जाने लगी। तब मम्मी के बाल खुले हुए थे और भीगे हुए थे और पानी की बूंदे मम्मी के बदन पर गिर रही थी जिससे मम्मी बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर मम्मी ने गेट खोल दिया तो फिर हम दोनों माँ बेटे एक दूसरे की कमर में हाथ डालकर मैन रोड की तरफ जाने लगे। फिर हम मैन रोड तक जाकर रुक गए और इधर उधर देखने लगे। फिर मम्मी मुझसे बोली के इतनी बरसात में कौन बाहर निकलेगा। बरसात की वजह से लाइट नहीं थी तो सब तरफ अंधेरा था। फिर मैं मम्मी को लेकर मैन रोड के बीच मे चला गया। फिर मैं मम्मी की गाँड सहलाने लगा और मम्मी मेरा लंड। फिर मैं मम्मी को लेकर रोड पर चलने लगा और इधर उधर देखने लगा। 
 
 
 
 
हम इधर उधर टहलते रहे। फिर बरसात और तेज हो गई तो फिर हम भागकर घर की तरफ आने लगे। मम्मी मेरे आगे आगे भाग रही थी और बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर हम घर के अंदर आकर जल्दी से गेट बंद करके कमरे में आ गए। मैं और मम्मी पूरे भीगे हुए थे। फिर हम बेड पर चले गए और एक दूसरे से चिपक गए। हम दोनों गर्म हो चुके थे। फिर हम एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे। फिर मैं मम्मी के ऊपर आकर मम्मी की चुत मारने लगा और फिर मम्मी को घोड़ी बनाकर करने लगा। मम्मी पूरे मजे से चुद रही थी। मेरा तब झड़ने का मूड नहीं था तो मैं मम्मी के पीछे से लंड गाँड में डालकर चिपक कर सो गया और मम्मी के बोबे सहलाने लगा और साथ मे कभी कभी धक्का भी लगा देता जिससे मम्मी के मुंह से आवाज निकल जाती। फिर मम्मी बोली के मुझे आज बहुत मजा आया। ये रात हमारी सबसे अच्छी रात थी। फिर हम लिप किस करने लगे और फिर हम ऐसे ही सो गए। मेरा लंड मम्मी की गाँड में ही रहा सारी रात। 
 
रात को हम फिर से मैन गेट बंद करना भूल गए तो फिर आंटी आ गई और हमें जगाने लगी। तब 9 बज रहे थे। आंटी के जगाने से हमारी आंख खुली तो फिर आंटी को देखकर मैं और मम्मी समझ गए के हमने रात मैन गेट बंद नहीं किया। फिर मेरा ध्यान मेरे लंड पर गया तो वो अभी भी मम्मी की गाँड में ही था। फिर मैंने जल्दी से लंड बाहर निकाला तो फिर मम्मी ने मेरी तरफ देखा। इतने में आंटी भी नंगी होकर आकर मम्मी के पास लेट गई।
 
 
 
 
आगे कहानी जारी रहेगी.......
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