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भाभी : दोस्ती, प्यार और चुदाई (भाग - 1) 
@Kamvasna 04 मई, 2023 2382

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मैं बिहार के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। मेरे घर मे मेरा बड़ा भाई जो की फौज मे है और मेरी माँ रहती हैं। मेरे भाई की शादी हो चुकी हैं तो अब मेरी भाभी भी हैं। मैं सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करता हूँ और हमेशा पढ़ता रहता हूँ। हम गरीब परिवार से हैं तो नौकरी ही हमारे लिए सब कुछ हैं। मेरी भाभी जिनका नाम रितु है वो पढ़ने मे काफी होशियार है और वो भी सरकारी नौकरी की ही तैयारी कर रही हैं। भाई की पोस्टिंग ऐसी जगह है जहां उन्हे अपने साथ किसी को भी रखने की मनाही है तो भाभी हमारे साथ ही रहती है। भाई दो तीन महीनों से घर आ जाते हैं। 
 

भाभी से दोस्ती 

मैं और भाभी अक्सर पढ़ाई की ही बातें किया करते थे और हम एक दुसते की हेल्प भी किया करते थे। मैं भी भाभी की हर बात मानता हूँ। जब भाई आए हुए होते तो भाई भाभी को घूमने लेके जाते तो भाभी के कहने पर भाई मुझे अपने साथ ले जाते। मैं उनसे बहुत कहता है के मैं आपके  बीच क्या करूंगा जाकर। पर भाभी जिद करके मुझे अपने साथ ले जाती। फिर हम जहां भी जाते काफी मस्ती करते। क्योंकि मैं और भाई काफी मजाकिया है तो भाभी का हंस हँसकर पेट दर्द करने लग जाता था। फिर एक बार भाभी ने कहा के जब हम तीनों साथ होते है तो ऐसा लगता है के हम दोस्त हैं और घूमने आए हैं। भाभी की बात सुनकर भाई ने कहा के हम तीनों अब बड़े हो चुके हैं और समझदार हैं और अपनी सारी बातें एक दूसरे से शेयर करते है तो हम दोस्त ही है। 
 
फिर भाभी मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे मे पूछती तो मैं कहता के अभी नहीं एक बार पढ़कर नौकरी लग जाऊँ फिर ही किसी लड़की के बारे मे सोचूँगा। फिर भाई के सामने भाभी मुझसे हाथ मिला लेती थी और कभी कभी मुझे छू भी लेती थी पर मैंने कभी इस बारे मे कुछ गलत नहीं सोचा और भाभी का भी कुछ ऐसा वैसा मतलब नहीं था। फिर भाई चले जाते तो मेरी माँ तो घर का थोड़ा बहुत काम करती और फिर बस आराम करती रहती। बाकी बचा हुआ काम भाभी करती है और कुछ काम मे मैं उनकी हेल्प भी करवाता। मैं और भाभी आपस मे काफी सारी बातें करते। हम दोनों को ही एक दूसरे से बातें करना काफी अच्छा लगता था। फिर हम साथ मे ही पढ़ाई करते थे और एक दूसरे को कोई चीज नहीं आती तो हम एक दुसरे को वो चीज समझाते थे। भाभी और मेरे मन मे एक दूसरे के प्रति ऐसा वैसा कुछ नहीं था तो भाभी एकदम मेरे साथ बैठ जाती थी। 
 
फिर फ्रेंडशिप डे आया तो मैंने भाभी को देने के लिए एक ग्रीटिंग कार्ड तैयार किया। पर फिर मैंने भाभी को नहीं दिया। फिर वो कार्ड मे बैठा बैठा देख ही रहा था तो इतने मे भाभी आ गई तो मैंने वो कार्ड एकदम से अपनी किताब मे छुपा लिया। लेकिन भाभी मे वो देख लिया था और फिर भाभी पूछने लगी के क्या छुपा रहे हो। फिर मैं बोला के कुछ नहीं भाभी। फिर भाभी ने कहा के कुछ तो है। मुझे दिखाओ। फिर मैं बोला के कुछ नहीं है लेकिन फिर भाभी ने मेरे हाथ से किताब छीन ली और फिर भाभी ने जब वो ग्रीटिंग कार्ड देखा तो भाभी देखती ही रह गई। फिर भाभी बोली के मेरे लिए बनाया और मुझे ही नहीं दे रहे थे। फिर मैंने कहा के कहीं आप गुस्सा ना हो जाओ तो मैंने नहीं दिया। फिर भाभी बोली गुस्सा होने वाली क्या बात है इसमे। फिर भाभी मुझसे बोली के हम दोस्त ही है फिर भाभी ने मुझसे हाथ मिलाया। फिर भाभी ने मुझे ब्रेसलेट दिया जो की उन्होंने मेरे हाथ पर बांध दिया। फिर हमारी दोस्ती पक्की हो गई। फिर मैं और भाभी एक दूसरे से थोड़ा और खुलकर बातें करने लगे। 
 
फिर भाभी मुझसे हर वो बात कहने लगी जो शायद भाई को कहनी चाहिए थी। भाभी को पिरियड्स आते तो भाभी मुझसे पैड वगेरह मँगवाती पर और लाने वाला भी कौन था मेरे अलावा। भाभी हमारे कपड़े धोकर रस्सी पर सूखा देती थी और जब भाभी दोपहर मे सो जाती तो फिर वो सब कपड़े मे रस्सी से उतारकर अंदर रख देता था। उनमे भाभी की ब्रा और पैंटी भी होती थी पर उन्हे कभी हाथ नहीं लगाता था और बाद मे वो भाभी खुद ही उतारकर ले आती थी। इसके लिए भाभी ने मुझसे एक दो बार कहा भी था की तुम मेरी ब्रा पैंटी क्यों नहीं उतारकर लाते हो तो मैं शर्मा जाता और बस बात आई गई हो जाती। फिर एक दिन आंधी आ गई और सदा की तरह मैं भाभी की ब्रा पैंटी को छोड़कर बाकी सब कपड़े उतार लाया था। फिर भाभी ने जब सब कपड़ों को देखा तो उनमे भाभी की ब्रा पैंटी नहीं थी तो ये देखकर भाभी काफी गुस्सा हो गई। फिर थोड़ी आंधी कम हुई तो बाहर रस्सी पर देखकर आई तो इतनी तेज आंधी मे भाभी की ब्रा पैंटी कहाँ टिकने वाली थी वो तो आंधी के साथ ही उड़ चुकी थी।  तब मेरी माँ तो दूसरे कमरे मे थी तो भाभी ने मुझे जमकर डांटा और मैं चुपचाप सब सुनता रहा। 
 
फिर भाभी दूसरे कमरे से अपने ब्रा पैंटी लाई और मेरे सामने डाल दिए और बोली के इन्हे उठाओ। मैं भी देखती हूँ के इन्हे छूने मे तुम्हें कौनसा करंट लगता है। फिर भाभी ने गुस्से से कहा तो मैंने भाभी की ब्रा पैंटी उठा ली और फिर भाभी बोली के तुम्हें कुछ हुआ क्या अब। तुम ब्रा पैंटी के हाथ लगाने से ही डरते हो तो शादी हो जाएगी तब पता नहीं तुम्हारा क्या होगा। भाभी की ये बात सुनकर थोड़ा गुस्सा मुझे भी आ गया। फिर मैं भाभी से बोला के भाभी वो आपकी ब्रा पैंटी थी इसलिए मैं नहीं उतारकर लाता था। आपकी ब्रा पैंटी मैं उतारकर लाऊं इसमे मुझे कुछ अजीब सा लगता था। आप मेरी भाभी हो इसलिए मैं आपकी ब्रा पैंटी के हाथ नहीं लगाता था। फिर भाभी ने मेरे हाथ पर बंधा हुआ ब्रेसलेट दिखाकर कहा के ये क्या है तो। हम दोस्त नहीं है। हम क्या सिर्फ देवर भाभी है। ये सुनकर तो मेरा दिमाग भी घूम गया और फिर मैंने भाभी से सॉरी मांगी। पर भाभी मुझसे नाराज हो गई थी। 
 
फिर मैंने भाभी के लिए कुछ गिफ्ट लाया पर भाभी नहीं मानी। फिर भाभी बोली के मुझे नई ब्रा पैंटी लाकर दो मैं फिर ही तुमसे बात करूंगी। फिर मैं बोला के ठीक हैं। फिर भाभी बोली के मेरी साइज़ की होनी चाहिए। लेकिन मुझे भाभी का साइज़ कहाँ पता था। फिर मैं भाभी से भाभी का साइज़ पूछने की कोशिश करने लगा लेकिन पुछ ही नहीं पा रहा था। फिर मैंने हिम्मत करके पूछा के भाभी आपका साइज़ क्या है। फिर भाभी ने हँसते हुए मुझसे कहा के कोई अपनी भाभी से उसकी साइज़ पूछता है क्या। अगर रितु कहकर पूछोगे तो बता दूँगी। फिर मैंने पूछा के रितु आपका साइज़ क्या है तो फिर भाभी ने बताया के ब्रेस्ट 38 और कमर 40। फिर भाभी ने काफी देर तक मेरी खिंचाई की और मुझसे मजाक करती रही। 
 
फिर मैं अगले दिन मार्केट गया पर मुझे ब्रा पैंटी लेने का कोई अनुभव नहीं था लेकिन फिर भी मैं एक दुकान मैं चला गया और उन्हे साइज़ बता दिया तो उन्होंने काफी सारी ब्रा और पैंटी मेरे सामने लाकर रख दी। फिर मैं जब उनमे से ब्रा पैंटी को देख रहा था मेरे मन मैं मुझे भाभी उस ब्रा पैंटी मे दिखने लग जाती। फिर मैंने जैसे तैसे एक थोड़ी महंगी वाली ब्रा पैंटी ले लि जो की पिंक कलर की थी। फिर वो मैं लेकर घर आ गया। फिर शाम को जब माँ सो गई तो मैंने भाभी को वो ब्रा पैंटी ले जाकर दे दी। फिर भाभी ने जब वो ब्रा पैंटी देखि तो उन्हे काफी पसंद आई। फिर वो बोली के मैं पहनकर देख लेती हूँ। फिर भाभी दूसरे कमरे मे जाकर वो पहनकर देखी तो उन्हे पूरी फिट आई थी। फिर भाभी ने मुझसे पूछा के कभी किसी और के लिए भी ली है क्या ब्रा पैंटी। तो मैं बोला के नहीं तो क्यों क्या हुआ। फिर भाभी बोली के तो पहली बार मे ही बिल्कुल सही ब्रा पैंटी लेकर आ गए। फिर भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे डांटने के लिए मुझसे सॉरी मांगा। 
 

भाभी से प्यार 

फिर भाभी ने अकेले मे उन्हे सिर्फ रितु बुलाने के लिए कहा तो मैं उन्हे रितु कहने लगा। फिर एक बार भाभी के पापा का फोन आया और उन्होंने भाभी को ले जाने के लिए कहा तो भाभी ने अपने पापा से झूठ बोल दिया के माँ थोड़ी बीमार रहती है तो उनसे से घर का काम नहीं होता है तो वो नहीं आ सकती है। फिर मैं भाभी से बोला के आपने झूठ क्यों बोला। माँ तो बिल्कुल ठीक हैं। फिर भाभी बोली के मैं चली जाती तो तुम किससे बातें करते। मेरे बगैर तुम्हारा मन लग जाता क्या। भाभी की ये बात सुनकर मैं बोला के मेरा क्या है आप जाकर मिल आते अपने पापा से। फिर भाभी बोली के उनसे बाद मे मिल लूँगी जब तुम्हारे भाई आए हुए होंगे तब। 
 
भाभी मेरा काफी ख्याल रखती थी और मुझसे बहुत खुलकर बातें करती थी। भाई नहीं थे तो मैं भी भाभी का काफी ध्यान रखता था। पर भाभी को भाई की कमी महसूस होती थी पर वो किसी से कुछ नहीं कहती थी। भाई घर खर्च के लिए हर महीने पैसे भेज देते थे तो उन्ही मे से मैं थोड़े पैसे बचाकर भाभी के लिए कोई खाने की चीज जैसे मिठाई वगेरह ले आता था। फिर जब माँ उस मिठाई के बारे मे पूछती तो मैं बहाना मार देता के कोई दोस्त की शादी थी तो वो दे गया था। पर भाभी ने मेरा ये झूठ जल्द ही पकड़ लिया था पर माँ को कुछ नहीं बताया था।
 
मैं भाभी का काफी ध्यान रखता था तो ये सब देखकर भाभी एक दिन मेरे गले लग गई और मुझसे कहने लगी के तुम्हारी जिससे भी शादी होगी वो बहुत खुश रहेगी। फिर मेरे मन मे हमेशा भाभी के ही ख्याल चलने लगे। भाभी मेरे सामने होती तो मैं चुपके चुपके उन्हे ही देखता रहता था। फिर भाभी ने ही मुझे कई बार उन्हे देखते हुए पकड़ लिया था। फिर भाभी भी सब कुछ समझ चुकी थी। फिर कुछ दिनों के लिए माँ एक रिश्तेदार के यहाँ शादी मे चली गई। फिर घर पर सिर्फ मैं और भाभी ही थे। फिर भाभी ने मुझसे इस बारे मे बात की तो मैंने भाभी को सब बताया के आप ही मेरे खयालों मे घूमती रहती हो। आपके लिए जो ब्रा पैंटी लेकर आया आप उसमे मेरे सपनों मे आती हूँ। 
 
ये सब सुनकर भाभी कुछ नहीं बोली। फिर कुछ दिनों तक हमने एक दूसरे से बिल्कुल बात नहीं की। फिर भाभी ने मुझसे कहा के मुझे तुमसे ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए था। पर जो हो गया सो हो गया अब मैं ही इसे ठीक करूंगी। फिर एक दिन शाम को मैं कमरे मे था तो भाभी उस ब्रा पैंटी मे ही मेरे सामने आकर खड़ी हो गई जो की मैंने भाभी को लाकर दी थी। भाभी को ऐसे देखकर मैं देखता ही रह गया। फिर भाभी मुझसे बोली के इसका अब यही इलाज है के तुम मुझसे कर लो। फिर मैं बोला के आप पागल हो नहीं हो गए हो। फिर भाभी बोली के करने के बाद ही तुम और मैं रह पाएंगे। मुझे भी इसकी काफी जरूरत हैं। फिर भाभी मुझे काफी देर तक समझाती रही पर मैंने हाँ नहीं की। लेकिन फिर भाभी ने कहा के अगर तुम नहीं करोगे तो बाहर मुझे और भी मिल जाएंगे। इससे अच्छा है के तुम ही मुझसे कर लो ताकि घर की बात घर मे ही रह जाए। 
 
फिर मैं भी क्या करता। मैंने भाभी के आगे घुटने टेक दिए। फिर भाभी बोली के हम सिर्फ दोस्त बनकर करेंगे। फिर मैं बोला के रितु मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। फिर भाभी भी बोली के वो भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं। फिर मेरे पास एक गुलाब का फूल था जो की मैंने एक किताब मे रखा था तो फिर मैंने वो फूल भाभी को दे दिया। तो भाभी ने वो फूल ले लिया और फिर सूंघने लगी। फिर भाभी ने उस फूल की पत्तियां तोड़ी और मेरे बिस्तर पर फ़ैला दी और फिर खुद उस बिस्तर पर सो गई और फिर मुझे इशारे से अपने पास बुलाया तो मैं भाभी के पास चला गया। 
 
 

भाभी की चुदाई

फिर भाभी ने मुझे अपने ऊपर लेटा लिया और मेरे कपड़े खोलने लगी और मैं भी भाभी के बदन पर किस करने लगा। फिर भाभी ने मुझे नंगा करके मेरा लंड पकड़ लिया और फिर मैंने भी भाभी की ब्रा पैंटी उतार कर भाभी को नंगी कर दिया। भाभी को नंगी देखकर तो मैं फूल गरम हो गया और भाभी के बदन को दबाने लगा और भाभी के बोबे चूसने लगा। फिर भाभी ने मुझसे अपनी चुत भी चटवाई। फिर काफी देर चुत चटवाने के बाद भाभी ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चुत पर लगा लिया और मुझसे कहा के आओ आज तुम्हें लड़के से मर्द बनाती हूँ और फिर मेरा लंड धीरे धीरे भाभी की चुत मे जाने लगा। मुझसे इससे पहले चुदाई का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था तो भाभी मुझे सब कुछ बता रही थी। फिर मेरा लंड भाभी की चुत मे चला गया तो भाभी ने मुझे धक्के लगाने के लिए कहा तो मैं वैसे ही करने लगा। 
 
इससे मुझे और भाभी को बहुत मजा आने लगा। लेकिन ज्यादा गरम होने के कारण मैं जल्दी ही भाभी की चुत मैं झड़ गया और भाभी के ऊपर ही लेट गया। फिर भाभी मुझसे बोली के कोई बात नहीं पहली बार कर रहे हो तो जल्दी झड़ गए। फिर भाभी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया और फिर मेरा लंड हिलाने लगी और फिर चूसने भी लगी। जिससे मेरा लंड जल्दी ही खड़ा हो गया और फिर भाभी मेरे ऊपर आकर मेरे लंड पर बैठकर करने लगी। जिससे मुझे काफी मजा आया। फिर भाभी नीचे या गई और मैं ऊपर आकर करने लगा और इस बार काफी देर तक किया और फिर झड़ गया। फिर भाभी ने पूछा के कैसा लगा तो मैं बोला के बहुत मजा आया। फिर मैं और भाभी एक दूसरे से लिप किस करने लगे। 
 
फिर हम एक दूसरे से लिपट कर सो गए। फिर रात को मुझे जाग आई तो मैं फिर भाभी के ऊपर आकर करने लगा और अपना लंड भाभी की चुत मे खाली कर दिया। फिर जब सुबह उठे तो तब एक बार और हमने किया। फिर भाभी ने मुझे मेडिकल से गर्भनिरोधक दवाई और कान्डम लाने के लिए कहा तो मैं कपड़े पहनकर मार्केट चला गया और वो सब लेकर या गया। फिर आने के बाद भाभी ने गोली ले लि और फिर हमने कान्डम लगाकर किया। फिर इस तरह माँ के आने तक भाभी और मैं घर मे नंगे ही रहे और मैंने भाभी की काफी बार चुदाई की। फिर माँ आ गई तो भी हम चुपके से कर लेते थे। लेकिन फिर मुझे भाई की चिंता सताने लगी और डर लगने लगा के अगर उन्हे पता चलेगा के तो वो क्या कहेंगे। फिर भाभी बोली के तुम चिंता मत करो। सब ठीक हो जाएगा। 
 
फिर मैं और भाभी सब कुछ भूलकर सिर्फ चुदाई के मजे लेने लगे। फिर भाभी बोली के मेरी गाँड अभी कुंवारी है तो तुम इसका उद्घाटन कर दो। फिर भाभी मेरे सामने घोड़ी बन गई और मैंने भाभी की गाँड और मेरे लंड पर काफी तेल लगाया और फिर भाभी की गाँड मे डाल दिया। भाभी को काफी दर्द हुआ लेकिन मैं करता रहा और फिर भाभी भी मजा लेने लगी। फिर मैंने भाभी की गाँड काफी बार चोदी। फिर भाभी लंगड़ाकर चलने लगी और जब माँ ने इसका कारण पूछा तो  भाभी ने कह दिया के पैर मे मौच आ गई है। ये कहकर भाभी मेरी तरफ देखकर हल्की सी मुस्कुरा दी। फिर मैं भाभी की चुत और गाँड  दोनों की चुदाई करने लगा। फिर भाभी की गाँड खुल गई तो फिर भाभी को ज्यादा दर्द नहीं होता था तो मैं काफी जमकर भाभी की गाँड मारता और फिर गाँड मे ही झड़ जाता था। 
 
फिर भाई के आने तक मैंने भाभी को काफी बार चोदा। फिर भाई आ गए तो फिर मुझे भाई से डर लगने लगा। फिर भाई के आने के कई दिन बाद भाई और भाभी मेरे पास आए और फिर भाभी भाई के सामने ही मेरी कमर में हाथ डालकर खड़ी हो गई और मेरे किस भी कर दिया। फिर मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैं भाभी से दूर हो गया और फिर भाभी से कहने लगा के ये क्या कर रही हो आप। फिर भाभी बोली के पहले तो खूब मजे लिए और अब कह रहे हो भाभी ये क्या कर रही हो आप। भाभी की ये बात सुनकर भाई और भाभी हंसने लगे पर मैं काफी घबराया हुआ था। 
 
आखिर ऐसा क्या हुआ के भाई भाभी को कुछ नहीं कह रहे थे। क्या भाभी ने भाई को सब सच बता दिया था ? अगर सब सच बता दिया तो क्या भाई को गुस्सा नहीं आया ? क्या भाभी इस सबके लिए मान  गए थे और हमे माफ कर दिया था ? आखिर हुआ क्या था ? ये सब सवाल मेरे मन मे घूमने लगे और शायद आपके मन मे भी घूम रहे होंगे? तो चलिए इन सवालों के जवाब हम अगले भाग मे जानेंगे। 
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