कामवासना डॉट नेट

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मेरी बहन 16 साल की थी तभी उसने अपने बॉयफ्रेंड से चुदवा लिया था। फिर बॉयफ्रेंड के बाद उसने अपने एक टीचर से चुदवाया। उस टीचर के बाद हमारे खेत पर काम करने वाले एक आदमी से चुदवाया। वो आदमी दिमाग से भोला था तो बहन उसका फायदा बहुत अच्छे से उठा रही थी। फिर मैंने एक दिन उसे उस आदमी से चुदाई करते पकड़ लिया। तब बहन की उम्र 20 साल की थी। फिर मैंने बहन को बहुत पीटा तो तब मुझे पता चला के बहन को चुदवाते हुए चार साल हो गए और अब तक तीन मर्दों से चुदवा चुकी है। फिर इसके बाद मैं बहन का काफी ध्यान रखने लगा और घर पर ये बात किसी को नहीं बताई। 
 
फिर एक दिन बहन अपने कमरे में थी और जब मैं उसके कमरे मे गया तो देखा के वो उंगली कर रही थी। फिर मुझे देखकर उसने अपने ऊपर एक कपड़ा ले लिया और फिर ये देखकर मैं कमरे से बाहर आ गया। फिर कुछ दिन बाद बहन नहा रही थी तो बाथरूम से उसकी सिसकारियों की आवाजें आ रही थी। मुझे पता था के बहन नहा रही है। फिर मैंने रोशनदान से देखा तो वो उंगली कर रही थी। फिर मैंने उसे जल्दी से बाथरूम से बाहर निकलने के लिए कहा तो वो कपड़े पहनकर बाहर आ गई। फिर मैंने उससे कहा के ये तो मैं था अगर कोई और ये सब सुन लेता और देख लेता तो क्या होता। फिर बहन मुझसे बोली के उसे अब रहा नहीं जाता है।  फिर वो बोली के मुझे उससे कर लेने दो। फिर मैंने उसे कहा के तुम्हें पिछली बार की पिटाई याद नहीं है क्या। अगर मैंने तुम्हें उसके साथ देख लिया तो मैं तुम्हें जान से  मार दूंगा। फिर मैं बहन की जबरदस्त निगरानी रखने लगा। कहीं बहन हमारे नौकर से चुदवाने ना चली जाए। 
 
 

 

 
फिर कुछ दिन बाद बहन खाना बना रही थी तो मैं किचन मे गया तो देखा तो बहन किचन में ही अपनी सलवार खोलकर एक बैगन अपनी चूत में डालकर अंदर बाहर कर रही थी। उसे ऐसे करता देख में देखता ही रह गया। फिर मैंने उसे कुछ नहीं कहा और किचन के बाहर ही खड़ा होकर देखने लगा के कहीं कोई आ ना जाए। फिर बहन ने जब झड़ गई तो वो फिर से खाना बनाने लगी। उस दिन बहन को ऐसे करते देख मैं गरम हो गया। फिर उस दिन रात को मैंने बहन को अपने कमरे मे सोने के लिए कहा तो बहन मेरे कमरे मे आ गई। तब तक मम्मी पापा सब सो चुके थे। फिर मैं बहन के बदन को सहलाने लगा तो वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं पहली बार किसी लड़की के बदन को सहला रहा था। हालांकि मैं बहन से बड़ा था लेकिन चुदाई के मामले मे बहन मुझसे काफी आगे निकल चुकी थी। फिर मैंने उसे नंगी कर दिया और फिर खुद भी नंगा हो गया। फिर बहन ने मुझसे पूछा के तुमने अभी तक किसी से किया है क्या। फिर मैं बोला के नहीं। फिर बहन ने कहा के तो मैं जैसा कहती हूँ वैसा करते जाओ। फिर बहन ने मुझसे पहले अपनी चुत चटवाई और फिर उसने मेरा लंड चूसा। फिर उसने मेरा लंड अपनी चुत मे ले लिया और फिर मैं धक्के लगाने लगा। 
 
मेरा पहली बार था तो मैं जल्दी ही झड़ गया। फिर बहन बोली के कोई बात नहीं आपका पहली बार है तो हो जाता है कई बार। फिर बहन ने मेरा लंड चूसकर खड़ा कर दिया तो फिर मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुदाई करना लगा और इस बार मैंने उसे काफी देर तक चोदा और फिर झड़ गया। फिर बहन बोली के भाई तुम तो काफी जल्दी सीख गए। फिर हम दोनों आराम करने लगे। फिर बहन ने मुझसे पूछा के मजा आया क्या आपको। फिर मैं बोला के हाँ। फिर बहन बोली के आगे आगे और भी मजा आएगा। फिर बहन मेरा लंड हाथ मे लेकर सहलाने लगी तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। फिर इस बार बहन घोड़ी बन गई और फिर पीछे से अपना लंड उसकी गाँड मे डालकर करने लगा। तब हर एक धक्के के साथ मुझे बहन की कोमल गाँड का एक अलग ही अहसास हो रहा था जिस कारण मैं काफी गरम हो गया था। फिर मैं की कमर पकड़कर बहन को जोर जोर से चोदने लगा। तब मुझे इतना मजा आ रहा था के पूछो मत। फिर झड़ने के बाद मैं बहन से बोला के अब से मैं तुम्हारी गाँड ही मारूँगा। गाँड मारने मे बहुत मजा आता है। फिर बहन मुस्कुराकर बोली के तुम्हारा मन करे वो मार लेना। 
 
फिर उस पूरी रात हम करते रहे। अब मैं बहन से करने लगा था तो वो भी खुश रहने लगी थी और मैं भी। फिर मेरे मन में आया के बहन ने पहले जिन मर्दों से किया था उन्होंने पता नहीं बहन के कितने ही मजे लिए होंगे। लेकिन मैं फिर पिछली बातों को भूलकर बहन के मजे लेने लगा और बहन भी मेरा पूरा साथ देती। बहन चुदवाकर अब काफी खुल चुकी थी जिस कारण वो चुदाई के काफी मजे लेती। फिर मेरे पापा बीमार रहने लगे। उन्हे कैंसर हो गया था तो हम सब उनका ध्यान रखने लगे। लेकिन फिर भी टाइम निकालकर हम चुदाई कर लेटे थे। फिर पापा को अस्पताल मे भर्ती कर दिया तो फिर मम्मी और मेरा मामा वगेरह अस्पताल मे पापा के साथ रहने लगे और बहन और मैं घर पर ही रहे। बहन घर का काम करती और मैं खेत वगेरह संभालता। घर पर कोई ना होने की वजह से बहन घर पर नंगी ही रहती और फिर मेरा मन करता वहीं मैं बहन को चोदने लग जाता और बहन भी कुछ नहीं कहती थी। फिर मैंने घर को कोई ऐसा कोना नहीं छोड़ा जहां मैंने बहन को ना चोदा हो। 
 
उन दिनों खेत में काफी काम था तो मैं नौकर को लेकर सुबह ही खेत में जाता था इस कारण नौकर सुबह जल्दी ही उठकर घर पर आ जाता था। फिर एक दिन जब नौकर आया तो बहन नंगी ही घूम रही थी और मैं भी नंगा ही सोया हुआ था। फिर जब वो नौकर आया तो बहन ने मुझे आकर उठाया और फिर वो खुद किचन मे जाकर चाय बनाने लगी। फिर मैं उठा और एक चादर लपेटकर किचन में जाकर मुँह धोने लगा। तब बहन चाय बना रही थी और वो नौकर आँगन में बैठा हुआ था। फिर मैं नंगा होकर जाकर बहन से चिपक गया और मस्ती करने लगा। फिर बहन बोली के मैं उसे नंगी ही चाय देने चली जाऊँ क्या। ये सुनकर मैं कुछ नहीं बोला। फिर बहन बोली के वैसे भी वो मुझे कई बार चोद चुका है तो उससे क्या शर्म करनी और अब तुम भी चोद चुके हो तो तुम से भी क्या शर्माना। फिर मैंने कहा के ठीक है। फिर बहन उसे नंगी ही चाय देने जाने लगी और मैं बहन को देखने लगा। बहन को नंगी देखकर नौकर देखता ही रह गया। फिर बहन उसे चाय देकर आ गई तो फिर बहन ने मुझे भी चाय दी और फिर मैं चाय लेकर नंगा ही जाकर नौकर के पास बैठ गया। 
 
नौकर भोला भाला सा था तो उससे शर्माने और डरने वाली कोई बात नहीं थी। नौकर 35-40 साल का था और देखने में काला सा था पर उसका शरीर काम करने की वजह से काफी अच्छा था।  फिर हम चाय पी रहे थे तो बहन वहीं नंगी ही घूमकर काम कर रही थी। बहन को देखकर मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। फिर मैंने नौकर को बाहर जाकर इंतजार करने के लिए कहा तो नौकर चाय पीकर चला गया और फिर मैं बहन को आँगन मे ही घोड़ी बनाकर चोदने लगा और फिर चोदने के बाद मैं खेत चला गया और बहन फिर से घर के काम में लग गई। फिर तो ये रोज का ही काम हो गया। बहन नौकर के सामने नंगी ही रहती और घूमती रहती। फिर एक दिन मुझसे रहा नहीं गया तो मैं बहन को नौकर के सामने ही चोदने लगा। हमें चुदाई करता देख नौकर भी गरम हो गया और फिर वो भी अपना लंड निकालकर हिलाने लगा। उसए लंड हिलाता देख मैं और बहन हँसने लगे। फिर तो मैं नौकर के सामने ही बहन की चुदाई कर देता और नौकर भी अपना लंड हिलाकर मजे ले लेता। 
 
फिर कुछ दिन बाद बहन ने मुझसे खेत घूमाकर लाने के लिए कहा तो फिर मैं, बहन और नौकर ट्रैक्टर पर बैठकर खेत चले गए। खेत जाकर मैं और बहन पूरा खेत घूमा और फिर हम एक जगह आकर बैठ गए। फिर बहन ने कहा के खुले में चुदाई करने का मजा ही अलग है। फिर मैं बोला के तो देर किस बात की। फिर मैं और बहन नंगे होकर चुदाई करने लगे और मैंने बहन को कई बार चोदा। हमें देखकर नौकर भी नंगा हो गया और अपना लंड हिलाने लगा। फिर मैं और बहन झड़ गए तो फिर बहन मेरे लंड पर ही बैठी थी और नौकर पास में ही खड़ा था तो फिर बहन ने उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी। ये देखकर मैं जल्दी ही फिर से गरम हो गया। बहन मेरे लंड पर ही बैठी थी तो मेरा लंड खड़ा होकर उसकी चुत मे चला गया। फिर जब बहन ने मेरा लंड अपनी चुत मे महसूस किया तो वो बोली के इतनी जल्दी फिर से खड़ा हो गया। फिर मैं बोला के तुम मेरे सामने दूसरे मर्द का लंड हिलाओगी तो और क्या होगा। फिर बहन ये सुनकर हंसने लगी। फिर नौकर झड़ गया तो फिर मैं बहन की फिर से चुदाई करने लगा। इस  प्रकार उस दिन खेत में हल चलाने की बजाय मैं बहन की चुत में ही अपना हल चलाता रहा और फिर हम दोपहर तक वापिस घर आ गए। 
 
घर आने के बाद बहन नंगी हो गई और घर के काम मे लग गई और मैं भी नंगा हो गया। नौकर हमारे घर के पीछे ही एक कमरे मे रहता था। फिर नौकर भैंसों को पानी पिलाने के लिए एक डिग्गी बनी हुई थी उसे पानी से भर रहा था। फिर ये देखकर बहन बोली के चलो आज उस डिग्गी में नहाते है। फिर मैं और बहन नंगे ही उस डिग्गी में चले गए और पानी से खेलने लगे। फिर डिग्गी पूरी भर गई तो फिर बहन ने नौकर को भी अंदर बुला लिया। तो वो भी अंदर आ गया। वो डिग्गी इतनी गहरी थी के अगर आदमी खड़ा हो जाए तो बस उसकी कमर तक ही पानी आए। हम सब पानी में बैठे थे। हम दोनों नंगे मर्दों के साथ बहन नंगी होकर हमारे साथ नहा रही थी। मेरा और नौकर का लंड खड़ा था। फिर बहन बोली के जब मैंने इसका लंड हिलाया तब तुम इतने गरम हो गए और अगर तुम्हारे सामने इससे चुदवाऊँ तो तुम्हारा क्या हाल होगा। फिर मैं बोला के तब तो मैं तुम्हारी चुत और गाँड चोद चोद कर फाड़ दूंगा। ये सुनकर वो हंसने लगी। फिर बहन जाकर नौकर की गोद में बैठ गई और उसके हाथ उसने अपने बोबो पर रख लिए तो ये देखकर मैं गरम हो गया। फिर नौकर बहन के बोबे सहलाने लगा तो मुझसे रहा नहीं गया तो फिर मैं बहन के सामने जाकर बैठ गया और उसके बोबो को चूसने लगा। 
 
फिर मैंने बहन की चुत में लंड डाल दिया और उसकी चुदाई करने लगा और नौकर बहन के बोबे दबाने और सहलाने लगा। फिर बहन ने मुझसे रुकने के लिए तो मैं रुक गया और लंड चुत से बाहर निकाल लिया और फिर बहन थोड़ा उठी और फिर नौकर का लंड पकड़कर सीधा किया और फिर उसे अपनी गाँड मे लेकर बैठ गई और मैं फिर से बहन की चुदाई करने लगा। इस प्रकार बहन हम दोनों मर्दों से काफी देर चुदवाती रही। फिर मैं बहन को पानी में ही घोड़ी बनाकर चोदा। फिर करने के बाद हम बैठ गए। फिर बहन मुझसे बोली के जब तुम मुझे नौकर के साथ देखते हो तो तुम्हें भी मजा आता है और तुम गरम हो जाते हो और मुझे भी दो मर्दों से करना अच्छा लगता है। अगर तुम कहो तो हम इसे अपने साथ ही रख ले। फिर बहन बोली के वैसे भी मैं इससे कई बार कर चुकी हूँ तो अब करने में क्या हर्ज है। फिर मैंने सोचा के बहन इससे चुद चुकी है अगर अब ये इसे मेरे सामने चोदता भी है तो क्या हो जाएगा। फिर बहन बोली के इसमें दिमाग तो है नहीं बस इसका लंड ही काम का है तो क्या फर्क पड़ेगा। फिर मैं बोला के ठीक है। 
 
फिर 2-3 घंटे बाद हम उस डिग्गी से निकले और फिर घर के अंदर आ गए। फिर हमने अपने शरीर को पोंछा और फिर हम तीनों बेड पर लेट गए। बहन हमारे बीच मे लेटी थी। फिर हम थक चुके थे तो सो गए। फिर लगभग 2 घंटे बाद मुझे जाग आई तो मैंने देखा के बहन मुझसे चिपक कर सो रही है और बहन के पीछे से नौकर चिपक कर सो रहा है। फिर ये देखकर मुझसे रहा नहीं गया तो मैं फिर बहन कि चुदाई करने लगा। तब तक बहन नींद में ही थी। फिर बहन जाग गई तो फिर वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने झड़ गया तो मैंने सारा पानी बहन की चुत पर निकाल दिया और फिर बहन ने नौकर से अपनी चुत चटवा कर साफ करवा ली। फिर बहन ने उठकर चाय वगेरह बनाई और फिर वो घर का काम करने लगी और हम दोनों आँगन में बैठकर बहन को देखने लगे और साथ में अपना लंड सहलाने लगे। फिर शाम को खाना वगेरह खाकर हम लेट गए। फिर बहन हम दोनों के लंड पकड़कर सहलाने लगी। फिर हमारे लंड खड़े हो गए तो बहन घोड़ी बन गई और फिर वो नौकर से चुदवाने लगी। फिर नौकर झड़ गया तो फिर मैं बहन की चुदाई करने लगा। फिर मैं भी झड़ गया तो फिर हम लेट गए। 
 
फिर बहन बोली के इस बार मैं तुम दोनों से एक साथ करूंगी। फिर मैं बोला के दोपहर को किया था वैसे। फिर बहन बोली के हाँ पर इस बार थोड़ा अलग होगा। फिर वो हमारे लंड फिर से हिलाने लगी और हिलाकर खड़े कर दिए। फिर बहन बोली के आपको मेरी गाँड मारना पसंद है तो आप मेरे पीछे से करना। फिर ये कहकर बहन नौकर के ऊपर उलटी होकर लेट गई और उसका लंड चुत मे ले लिया और फिर पीछे से जाकर मैंने लंड उसकी गाँड मे डाल दिया। फिर मैं और नौकर बहन की चुत और गाँड मारने लगे तो बहन को काफी मजा आने लगा। इस तरह हम बहन की काफी देर तक चुदाई करते रहे और फिर झड़ गए तो बहन नौकर के ऊपर ही लेट गई और मैं बहन के ऊपर लेट गया। बहन हम दोनों के बीच मे थी। फिर मैं बहन के ऊपर से उतरा और फिर बहन भी उतर कर बिस्तर पर लेट गई। फिर नौकर तो दूसरी तरफ करवट लेकर सो गया और मैं बहन के बोबो मे अपना सिर डालकर सो गया। फिर अगले दिन जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा के नौकर बहन के ऊपर चढ़कर बहन को चोद रहा था। उन्हे देखकर मैं उठकर बैठ गया और फिर मै अपना लंड सहलाने लगा। 
 
फिर नौकर झड़ गया तो मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैं बहन के ऊपर आ गया और बहन की खुली हुई चूत में लंड डालकर करने लगा और फिर मैं भी झड़ गया। फिर बहन उठी और चाय बनाने चली गई। फिर चाय पीने के बाद नौकर तो पीछे की तरह जाकर काम करने लगा और बहन झाड़ू लगाने लगी। बहन को झाड़ू लगाते देख मैं फिर से गरम हो गया और फिर मैं बहन के पीछे जाकर खड़ा हो गया और बहन की गाँड में लंड डालकर सहलाने लगा। फिर मैंने बहन की गाँड मे लंड डाल दिया और बहन के साथ साथ चलने लगा। फिर कभी मेरा लंड निकल जाता तो मैं वापिस डाल देता। बहन बार बार पीछे देखकर मुस्कुरा रही थी। फिर बहन ने खाना बनाया और फिर हम खाना खाकर कमरे मे चले गए और फिर शाम तक बहन की चुदाई करते रहे। फिर ये रोज का ही रूटीन बन गया। अब मुझे भी नौकर के साथ बहन की चुदाई करने में काफी मजा आने लगा था। 
 
हम हफ्ते में एक दो बार अस्पताल जाकर पापा से मिलकर आते थे। वहाँ सब होते थे तो हम मिलकर वापिस आ जाते थे और चुदाई की दुनिया मे मस्त हो जाते थे। फिर कुछ दिन बाद हमें पापा की मौत की खबर मिली और फिर पापा को लेकर घर पर आये और पापा का अंतिम संस्कार कर दिया। उस दिन घर पर काफी लोग आए हुए थे। मैं भी काफी उदास था और मम्मी और बहन भी काफी रो रही थी। फिर रात होते होते ज्यादातर मेहमान तो चले गए बस कुछ ही बचे थे। फिर रात को जब सब सो गए तो मैं बहन के पास गया और उसका हाथ पकड़कर उसे पीछे की तरह ले गया। फिर हम नौकर के कमरे मे चले गए और जाकर नंगे होकर चुदाई करने लगे। तब गर्मियों के दिन थे। कमरे मे पंखा वगेरह नहीं था तो हम दोनों पसीने से पूरा भीग गए। नौकर तब बाहर सोया था। फिर एक राउन्ड करने के बाद हम दोनों नंगे ही कमरे से बाहर आ गए और बहन नौकर की चारपाई पर बैठ गई। 
 
फिर इतने में नौकर भी उठकर बैठ गया और बहन को नंगी देखकर वो बहन के बोबो को सहलाने लगा और मैं उन दोनों को खड़े खड़े देखने लगा। फिर बहन चारपाई पर लेट गई तो नौकर बहन की चुत चूसने लगा। फिर बहन ने नौकर को लेटाया और खुद उसके ऊपर आ गई और उसका लंड अपनी चुत में डालकर बैठ गई और फिर घोड़ी बन गई तो फिर मैंने पीछे से बहन की गाँड में लंड डाल दिया और फिर हम करने लगे। थोड़ी देर करने के बाद मैंने और नौकर ने पज़िशन बदल लि। फिर मैं बहन के नीचे आ गया और नौकर बहन की गांड मारने लगा। हमारी चुदाई 2-3 घंटे तक चली। फिर हम सब शांत हो गए। फिर हम वापिस आने लगे और कपड़े पहनने लगे। लेकीन हम पसीने से भीगे हुए थे तो फिर हम तीनों वहाँ बनी डिग्गी में नहाए। फिर नहाकर मैं तो कपड़े पहनने लगा। बहन ने अपने कपड़े वहीं एक साइड में रखे थे लेकिन फिर वो नीचे कीचड़ में गिर गए और गंदे हो गए। 
 
फिर मैं बोला के अब क्या करोगी। फिर वो बोली के ऐसे ही जाऊँगी और फिर अंदर जाकर दूसरे कपड़े पहन लूँगी फिर मैं बोला के अंदर सब है किसी ने देख लिया तो। फिर बहन बोली के सब सोये होंगे कोई नहीं देखेगा। फिर हम अंदर जाने लगे और बहन मेरे साथ ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी होकर चल रही थी। फिर जब हम अंदर आँगन में पहुंचे तो सब सोये हुए थे। फिर मैं तो जाकर अपनी जगह पर लेट गया और फिर बहन को देखने लगा। फिर बहन सब के बीच से होते हुए कमरे मे चली गई और फिर वो भी दूसरे कपड़े पहनकर आकर लेट गई। फिर मैंने बहन की तरफ देखा तो वो मुस्कुराई और फिर वो सो गई और मैं भी सो गया। फिर पापा के बारहवें तक काफी लोग आये। इसी बीच मैं और बहन चुदाई का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। दिन में दोपहर को जब सब आराम कर रहे होते तो बहन पेशाब करने के बहाने पीछे की और जाती तो फिर मैं भी उसके पीछे चला जाता और फिर उसे किसी कमरे मे ले जाकर उसकी सलवार नीची करके उसे घोड़ी बनाकर चोद देता। फिर रात को भी सब के सोने के बाद हम चुदाई करते। बहन को नंगी रहने की आदत पड़ चुकी थी और मुझे भी बहन को नंगा देखना अच्छा लगता था। फिर रात को चुदाई के बाद मेरे कहने पर बहन नंगी ही अंदर चली जाती और फिर सबके बीच अपनी जगह पर जाकर वो कपड़े पहनकर सो जाती। 
 
फिर पापा के बारहवें के बाद सब लोग धीरे धीरे चले गए और अब घर पर मैं, मम्मी, बहन और नौकर ही रह गए थे। फिर कुछ ही दिन हुए होंगे के एक दिन मैं पेशाब करने टॉइलेट में गया। टॉइलेट और बाथरूम साथ मे ही बने है तो फिर मुझे बाथरूम से सिसकारियों की आवाजें सुनाई देने लगी। मैंने सोचा बहन होगी। लेकिन आवाज कुछ अलग लग रही थी और फिर मैंने सोचा के बहन की तो अब फुल चुदाई होती है तो वो उंगली क्यों करेगी। फिर मैं सोचने लगा और कौन हो सकता है। फिर मैंने किसी तरह रोशनदान से बाथरूम के अंदर देखने की कोशिश की तो मैं देखता ही रह गया। अंदर मम्मी बिल्कुल नंगी होकर अपने पैर फैलाकर उंगली कर रही थी। ये देखकर मेरा दिमाग घूम गया और फिर मैं जल्दी से बिना आवाज किए वहाँ से आया और फिर बहन को ढूँढने लगा। फिर मैं पीछे की तरफ गया तो देखा एक बहन वहाँ भी नहीं थी। फिर नौकर के कमरे का दरवाजा बंद था तो मैंने सोचा वो वहीं होंगी। फिर मैंने गेट को धक्का दिया तो गेट बंद था फिर मैंने बहन को आवाज लगी तो फिर बहन ने दरवाजा खोला तो बहन नंगी थी और नौरक बिस्तर पर लेटकर अपना खड़ा लंड सहला रहा था। 
 
फिर मैंने अंदर आकर दरवाजा बंद के लिया और फिर बहन को जो देखा वो बताने लगा तो बहन बोली के ये तो मुझे पहले से पता था। बहन की बात सुनकर मैं हैरान रह गया। मैं बोला के कैसे। फिर बहन बोली के मैंने भी मम्मी को कई बार उंगली करते देखा है। पापा तो काफी समय से बीमार है तो इस कारण वो मम्मी की चुदाई नहीं कर पा रहे थे जिस कारण मम्मी उंगली करके ही काम चला रही थी। बहन की बात सुनकर मैं चौंक गया। फिर बहन बोली के मम्मी को भी चुदाई की जरूरत है। ये सब बातें सुनकर मैं गरम हो गया तो फिर मैं बहन को बिस्तर पर ले जाकर चोदने लगा और फिर नौकर ने भी चोदा। फिर हम वहाँ से आ गए। उस दिन के बाद से मैंने मम्मी को एक अलग नजरिए से देखना शुरू कर दिया। मम्मी अब पहले से ज्यादा उदास रहने लगी थी। एक तो मम्मी को पापा के जाने का दुख था और ऊपर से मम्मी की शारीरिक जरूरते पूरी नहीं हो रही थी। फिर दिन बस ऐसे ही निकलने लगे और मेरी और बहन की चुदाई चलती रही। मम्मी ज्यादातर अपने कमरे मे ही रहती तो मैं और बहन आसानी से चुदाई कर लेते। 
 
 
मम्मी घर का कोई काम नहीं करती थी सारा काम बहन ही करती थी। फिर जब बहन घर का काम करती तो मैं बहन से मस्ती करता रहता और बहन भी मेरा पूरा साथ देती। फिर मैंने बहन से नंगी होकर झाड़ू निकालने के लिए बोला तो फिर बहन ने जाकर मम्मी के कमरे मे देखा के मम्मी सोई है या जगी हुई है। तब मम्मी सोई हुई थी तो बहन ने फिर अपने सब कपड़े उतारके खूंटी पर टाँग दिए और एक दम नंगी होकर झाड़ू लगाने लगी। मैं बहन को कुछ देर तो देखने लगा और फिर मैं फुल गरम हो गया तो बहन को उठाकर कमरे मे ले गया और चोदने लगा। चुदाई के बाद बहन फिर से झाड़ू लगाने लगी और फिर कपड़े पहन लिए। फिर ऐसे ही बहन नहाकर आती तो वो नहाने के बाद बाथरूम से नंगी ही बाहर आ जाती और फिर अपने कमरे मे जाकर ही कपड़े पहनती। जब बहन किचन मे खाना बना रही होती तो मैं बहन की सलवार खोलकर अपना लंड बहन की गाँड मे डालकर खड़ा हो जाता और फिर वो जब तक खाना बनाती तो मैं ऐसे ही खड़ा रहता और धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करता रहता। कई बार जब वो बैठकर खाना बनाती तो वो अपना मेरा लंड कभी चुत मे तो कभी गाँड मे लेकर बैठ जाती और फिर ऊपर नीचे होती रहती। 
 
 
जब बहन घर के पीछे काम करने जाती तो बहन को देखकर नौकर तो तब ही नंगा हो जाता और अपना लंड हिलाने लग जाता। फिर बहन भी नंगी हो जाती और काम करने लग जाती। फिर बहन का मूड बन जाता तो वो नौकर से चुदाई करवाने लग जाती। फिर कई बार मैं भी वहाँ होता तो फिर हम दोनों मिलकर बहन की चुदाई करते। फिर काम करने के बाद बहन नंगी ही घर मे चली जाती और जाकर मम्मी को देखती। मम्मी सोई होती तो बहन नंगी ही रहती और मम्मी जागी हुई होती तो वो कपड़े पहन लेती। एक बार बहन घर के अंदर नंगी ही चली गई और उसने कपड़े घर के पीछे ही रह गए। फिर मम्मी जब घर के पीछे गई तो मम्मी ने बहन के कपड़े वहाँ देख लिए। फिर मम्मी बहन के कपड़े उठाकर अंदर ले आई और फिर बहन से पूछने लगी के उसके कपड़े बाहर कैसे पड़े थे। फिर बहन बोली के मैं पीछे कुछ काम से गई थी और मेरे हाथ मे ये कपड़े थे तो फिर ये कपड़े वहाँ छोड़कर मैं कोई दुसरा काम करने लग गई और फिर आते टाइम लाना भूल गई। फिर बहन की बात सुनकर मम्मी वो कपड़े वहीं छोड़कर अपने कमरे मे चली गई और बात आई गई हो गई। 
 
 
मैं और नौकर कई बार खेत सुबह जल्दी चले जाते थे तो फिर बहन खाना लेकर खेत आ जाती थी। हमारा खेत घर से नजदीक ही था। फिर वो खाना लाती तो हम खाना बाद मे और बहन की चुदाई पहले करते। फिर कई बार तो खाना खाने के बाद हम फिर चुदाई करने लग जाते और 3-4 घंटे तक चुदाई करते रहते। बहन को खेत में चुदवाने में काफी मजा आता था और मुझे भी बहन को खुले मे चोदने में बहुत मजा आता। फिर मम्मी कुछ दिन के लिए गाँव यानि मेरे ननिहाल चली गई। फिर मम्मी के जाने के बाद हम फिर पहले की तरह खुलकर चुदाई करने लगे और नंगे ही रहने लगे। तभी कुछ दिनों मे मेरा जन्मदिन आने वाला था। फिर बहन बोली के इस बार तुम्हारे जन्मदिन पर हम पार्टी करेंगे। फिर मैं बोला के पार्टी कैसी। फिर बहन बोली के तुम बस वैसा ही करना जैसा मैं कह रही हूँ। फिर मैं बोला के ठीक है। फिर बहन ने मुझे 5 बीयर की बोतल और एक व्हिस्की की बोतल लाने के लिए कहा। फिर मैंने कहा के तुम पीती हो। फिर बहन बोली के हाँ कभी कभी। मैं टीचर से चुदाई करती थी तो कई बार वो मुझे पिलाता था और फिर चुदाई करता था। पीने के बाद चुदाई करने मे बहुत मजा आता है। फिर बहन ने केक और सजावट के लिए कुछ और सामान भी मँगवाया। फिर मैं वो सब सामान ले आया। 
 
फिर दोपहर के बाद बहन घर के आँगन मे ही दीवारों पर सजावट करने लगी और साथ मे नौकर को भी लगा लिया। फिर शाम होते होते उन्होंने सब सजावट कर दी और आँगन के बीच मे एक बड़ा टेबल रख दिया और के म्यूजिक सिस्टम भी लगा दिया। फिर बहन ने घर का काम किया और फिर वो तैयार होने चली गई। फिर मैं और नौकर नंगे ही आँगन में बैठ गए और बहन का इंतजार करने लगे। तब तक अंधेरा हो चुका था। फिर जब बहन कमरे से बाहर तैयार होकर निकली तो मैं और नौकर उसे देखते ही रह गए। उसने तब एक डिजाइनर ब्रा पैंटी फनी थी, कानों में बड़ी बड़ी बालिया और पैरों में हाई हील सेंडल थे और बाल खुले छोड़ रखे थे। तब बहन बहुत ज्यादा सेक्सी लग रही थी। फिर बहन किचन से केक लेकर हमारे पास आई और केक को टेबल पर रख दिया। फिर मैं से चिपक गया और उससे किस करने लगा। फिर बहन हँसकर बोली के अभी इतनी जल्दी क्या है इसके लिए तो अभी पूरी रात पड़ी है। पहले केक काटते ही फिर पीकर थोड़ा डांस करते है फिर जब फुल गरम हो जाएंगे तो फिर चुदाई करेंगे। 
 
 
फिर मैंने केक काट और फिर मैं बहन को केक खिलाने लगा तो बहन बोली के ऐसे केक खिलोओगे क्या। फिर मैंने बोला के तो कैसे। फिर बहन घुटनों के बल बैठ गई और फिर मेरे लंड पर केक लगाने लगी और फिर लंड चूसने लगी। फिर बहन ने मेरे लंड से केक खाया और फिर वो खड़ी होकर मेरे मुँह पर केक लगाने लगी और फिर मैंने भी बहन के मुँह पर और गले पर केक लगा दिया। फिर बहन ने नौकर के लंड पर भी केक लगाया और फिर उसके लंड को चाटने लगी। फिर बहन ने हम सबके लिए व्हिस्की के पेग बनाए और फिर हम पीने लगे। फिर 2-3 पैग पीने के बाद हमें काफी नशा हो गया और फिर हम म्यूजिक लगाकर डांस करने लगे। बहन तब सुपर सेक्सी मोडल लग रही थी। फिर डांस करते करते मैंने बहन की ब्रा निकाल दी और फिर उसके बोबो को दबाने लगा। फिर बहन ने एक बियर की बोतल खोली और फिर उसे अपने बोबो पर डालने लगी और फिर मैं और नौकर उसके बोबो से गिरती हुई बियर को पीने लगे। 
 
फिर मैंने एक दूसरी बियर की बोतल खोली और फिर उसे हिलाकर प्रेसर से सारी बियर बहन कर ऊपर डालने लगा। मैंने बहन को बियर से नहला दिया। फिर मैं उसके बदन को चूमने लगा। फिर हमने व्हिस्की के कई पैग और पिए। फिर हमें फुल नशा चढ़ गया तो हमने म्यूजिक बंद कर दिया। फिर नौकर ने बहन की पैंटी खोल दी और फिर उसके ऊपर चढ़कर चुत मारने लगा। फिर मैं बहन के मुँह के पास जाकर बहन को अपना लंड चुसवाने लगा। फिर नौकर को मैंने धक्का देकर बहन के ऊपर से साइड कर दिया और खुद बहन के ऊपर आकर बहन की चुदाई करने लगा। फिर हमने बहन को घोड़ी बना लिया और फिर कसकर उसकी चुदाई करने लगे। नशे के कारण हमें कुछ पता नहीं चल रहा था हम बस बहन को चोदे जा रहे थे और वो चुदती जा रही थी। फिर बहन ने व्हिस्की की बोतल अपने मुँह से लगा लि और वो सारी व्हिस्की पी गई। जिस कारण उसे बहुत नशा हो गया। 
 
फिर ये प्रोग्राम सारी रात चलता रहा और हम सुबह 4 बजे सोये। फिर अगले दिन हम 10 बजे के लगभग उठे। तब तक धूप काफी आ चुकी थी। बहन का सिर दर्द कर रहा था और फिर उसने उलटी की तब जाकर वो ठीक हुई। फिर वो चाय बनाकर लाई और फिर हम सबने चाय पी। चाय पीने के बाद हमारा शरीर कुछ काम करने लगा। आँगन में बियर की बोतले इधर उधर लुढ़क रही थी और बहन के बदन से अभी तक बियर की गंध आ रही थी। फिर हम सबने मिलकर आँगन की सफाई की और बियर की बोतलें और दारू की बोतल घर से बाहर डाल आए ताकि किसी को पता नहीं चल सकें। फिर बहन ने खाना बनाया। तब तक दोपहर के 2 बज गए थे। फिर खाना खाकर हम सब डिग्गी में नहाने चले गए। मैंने और नौकर ने बहन को रगड़ रगड़ कर नहलाया किया। फिर नहाने के बाद हम आकर फिर से सो गए और फिर शाम को उठे तो थोड़ा अंधेरा हो चुका था। सोने के बाद हम काफी अच्छा महसूस कर रहे थे। 
 
फिर मैंने बहन से मेरे जन्मदिन को इतना शानदार बनाने के लिए थैंक यू कहा तो वो बोली मैं तुम्हारी बहन हूँ और अब से हर साल ऐसे ही तुम्हारा जन्मदिन मनाएंगे और फिर ये कहकर वो मेरे किस करने लगी। फिर खाना खाकर हम एक दूसरे से चिपक कर सो गए। फिर मम्मी के आने तक हमने काफी मजे किये। एक दिन शाम को हम जल्दी खाना खाकर लेटे थे। हमारे पास करने के लिए कुछ नहीं था। हम दिन में बहन को काफी बार चोद चुके थे हमारा चुदाई का भी मन नहीं कर रहा था। फिर बहन बोली के खेत चले। फिर मैं बोला के अब रात को खेत जाकर क्या करेंगे। फिर बहन बोली के ऐसे ही घूमने चलते है। फिर बहन बोली के मैं सिर्फ ब्रा पैंटी में ही खेत जाऊँगी। फिर मैं बोला के किसी ने देख लिया तो। फिर बहन बोली के कोई नहीं देखेगा। अब रात हो चुकी है तो सब सो चुके है और वैसे भी रात का टाइम है तो किसी को क्या पता चलेगा। फिर मैं बोला के ठीक है। फिर बहन ब्लैक कलर की ही ब्रा पैंटी पहनकर आ गई और मैंने लोअर टी-शर्ट पहन लिए और नौकर ने लूँगी पहन लि।  
 
हमारा घर गाँव से थोड़ा बाहर तरफ की है और घर से खेत पैदल जाने में 20-25 मिनट लगते है। फिर हम तीनों घर से बाहर निकले और फिर हम गली मे चलने लगे। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था के बहन सिर्फ ब्रा पैंटी में है। आसपास कई घर थे और हम उन घरों के आगे से होकर जा रहे थे। फिर एक घर के आगे लाइट जल रही थी। फिर जब हम उस घर के आगे से गुजरे तो फिर बहन को देखकर मैं देखता ही रहा गया और फिर मैं अपना लंड बाहर निकालकर हिलाने लगा। फिर हम गाँव से निकलकर खेतों के बीच चलने लगे और फिर कुछ देर बाद हम खेत पहुँच गए। खेत पहुंचते पहुंचते मेरे और नौकर के लंड का बुरा हाल हो चुका था तो फिर मैं और नौकर बहन की चुदाई करने लगे और बहन की ब्रा पैंटी उतारकर फेंक दी। फिर करने के बाद हम शांत हुए और फिर हम लेटकर बातें करने लगे। फिर बहन बोली के मैं बस नंगी रहना चाहती हूँ। मुझे नंगी रहना बहुत पसंद है। मैं गाँव की गलियों मे से नंगी होकर गुजरना चाहती हूँ ताकि सब मर्द मुझे देखकर अपना लंड हिलाए और मेरे नाम की मूठ मारे। 
 
बहन की ऐसी सेक्सी बातें सुनकर मैं बोला के तुम बहुत सेक्सी हो। बहन की बातें सुनकर मैं फिर से गरम हो गया तो फिर मैंने बहन की चुदाई की। फिर हम वापिस आने लगे तो बहन अपनी ब्रा पैंटी ढूँढने लगी पर अंधेरा होने की वजह से कही नहीं मिल रही थी। फिर मैंने और नौकर ने भी ढूँढी। लेकिन हमें भी नहीं मिली। फिर बहन बोली के चलो छोड़ो मैं ऐसे नंगी ही जाऊँगी घर। फिर हम चलने लगे। फिर रास्ते में मैं और नौकर बहन की गाँड और बोबो को सहला और दबा रहे थे। फिर जब हम गाँव में आए तो बहन हमारे साथ गली में नंगी चल रही थी। मेरे साथ मेरी बहन खुलेआम ऐसे नंगी घूम रही थी। ये सोचकर मैं फिर से गरम होने लगा। फिर चलते चलते नौकर की लूँगी खुल गई तो फिर नौकर लूँगी बांधने लगा। लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से खुल गई। फिर घर नजदीक ही था तो नौकर ने लूँगी खोलकर अपने कंधे पर डाल लि। फिर बहन ने नौकर के खड़े लंड को देखा तो फिर वो चलते चलते उसका लंड पकड़कर सहलाने लगी। फिर मैंने मेरा लंड भी बाहर निकाल लिया तो फिर बहन ने मेरा लंड भी पकड़ लिया। 
 
फिर हम घर आकर लेट गए और फिर मैं और बहन से एक साथ करने लगे और फिर करते करते ही सो गए। फिर अगले दिन जब मुझे ये सब सोचा तो सोच सोचकर मैं फिर से गरम होने लगा। फिर मैंने बहन से बोला के तुम बहुत बेशर्म हो। फिर बहन मुस्कुराकर बोली के तुम्हें मेरा बेशर्म होना पसंद नहीं है क्या। फिर मैंने बहन को अपनी बाहों मे लेकर कहा बहुत पसंद है। फिर ये सुनकर बहन हंसने लगी। इस प्रकार मम्मी के आने के तक हम इसी तरह मस्ती करते रहे। फिर एक बार बहन सुबह सुबह एक भैंस का दूध निकाल रही थी और नौकर भैंसों को चारा वगेरह डाल रहा था। मैं भी वहीं था। फिर नौकर एक छोटी भैंस के पीछे खड़े होकर अपना खड़ा लंड भैंस के अंदर डाल दिया और धक्के मारने लगा। ये देखकर मैं और बहन एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगे। फिर मैं नौकर के पास चला गया और उसे देखने लगा। फिर मैंने उससे अपना लंड बाहर निकालने के लिए कहा तो उसने निकाल लिया और फिर मैंने भैंस की चुत मे लंड डाल दिया और करने लगा। मुझे तब लड़की की चुत और भैंस की चुत में बिल्कुल फर्क नहीं लग रहा था। 
 
फिर दूध निकालने के बाद बहन भी हमारे पास आकर खड़ी हो गई और देखने लगी। फिर बहन बोली के मर्दों को तो बस छेद दिखना चाहिए लंड डालने के लिए। वो छेद चाहे किसी लड़की का हो या भैंस का उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया तो फिर नौकर फिर से उससे करने लगा और फिर मैं और बहन अंदर आ गए। फिर इसके कुछ दिन बाद हमारे घर का कुत्ता के लंड बाहर निकला हुआ था। उसका लंड देखकर बहन उसके लंड को देखने लगी। फिर मैं बोला के तुम मुझे कह रही थी और आज खुद कुत्ते के लंड को देखकर तुम्हारे मुँह में पानी आ गया। फिर बहन बोली के मैं सिर्फ देख रही हूँ। फिर मैं बोला के हाँ मुझे पता है तुम किस नजर से देख रही हो। फिर इस तरह हम आपस में मजाक करने लगे। फिर मैंने बहन से पूछा के अगर तुम्हारा लेने का मन कर रहा है तो कुत्ते के लेकर आऊँ क्या। फिर बहन अपनी चुत सहलाते हुए बोली के ले आओ। फिर मैं कुत्ते को लेकर कमरे में आ गया और बहन को घोड़ी बनने के लिए कहा। फिर बहन घोड़ी बन गई तो मैंने कुत्ते को बहन के ऊपर चढ़ा दिया और और उसके लंड को बहन की गाँड पर सेट कर दिया और फिर मैंने कुत्ते को पीछे से धकेला तो फिर कुत्ते का थोड़ा सा लंड अंदर चला गया। फिर बहन बोली के हाँ अंदर जा रहा है। 
 
वो कुत्ता हमारा पालतू था। इस कारण वो बिल्कुल नहीं डर रहा था। फिर मैंने कुत्ते को थोड़ा सा और पीछे से धक्का दिया तो फिर कुत्ते का आधा लंड अंदर चला गया। फिर कुत्ते ने लंड वापिस बाहर निकाल लिया और फिर वो अपने आप ही फिर से अंदर डालने लगा। लेकीन इस बार उसका लंड बहन की गाँड मे जाने के बजाय चुत मे चला गया। फिर कुत्ता अपने आप ही करने लगा। वो कभी लंड बाहर निकालता और कभी अंदर डालता। फिर वो चुत में डालकर करने लगा। तो उसे करता देख मैं और बहन हंसने लगे। कुत्ता थोड़ा बड़ा था और उसका लंड भी मोटा था। बहन को उससे चुदकर मजा आ रहा था। फिर मैंने पीछे जाकर कुत्ते के लंड को बहन की गाँड मे डाल दिया और फिर वो गाँड मे करने लगा। लेकिन फिर वो वापिस बहन की चुत मारने लगा और फिर कुछ देर बाद वो बहन की चुत मे ही झड़ गया और फिर उसने लंड बाहर निकाला तो बहन की चुत से उसका पानी बाहर आने लगा और फिर कुत्ता बहन की चुत और गाँड को चाटने लगा। फिर बहन सीधी होकर बैठ गई। बहन की चुत से लगातार पानी निकले ही जा रहा था। फिर मैंने बहन से कहा के कहीं तुम कुत्ते के बच्चे को जन्म मत दे देना। ये सुनकर हम दोनों  हंसने लगे। फिर बहन टॉइलेट गई और पेशाब करने लगी तो उसके पेशाब के साथ पहले तो कुत्ते का पानी निकला और फिर अकेला पेशाब ही आने लगा। फिर बहन ने अपनी चुत को अच्छे से धोया। 
 
फिर बहन जब टॉइलेट से वापिस आई तो कुत्ता बहन के आसपास घूमने लगा और उसकी चुत और गाँड को जीभ से चाटने लगा। ये देखकर बहन हंसने लगी और फिर उसे भगा दिया। फिर कुत्ता बाहर जाकर बैठ गया। फिर बहन नंगी तो होती ही थी और फिर वो कुत्ते के सामने घोड़ी बन जाती तो कुत्ता बहन के ऊपर चढ़ जाता और फिर बहन उसका लंड पकड़कर अपनी गाँड में डाल लेती और फिर वो करने लग जाता। फिर मम्मी के आने से पहले बहन ने उससे कई बार चुदवाया। फिर अब हम बहन को चोदने वाले तीन हो गए थे। 
 
फिर मम्मी गाँव से आ गई तो मम्मी पहले की तरह ही रहने लगी। बिल्कुल गुमसुम सी। वो हमसे भी बहुत कम बोलती थी। लेकिन अभी भी वो उंगली कर लेती थी। नहाती तब करती और कई बार अपने कमरे मे ही कर लेती। फिर एक दिन बहन मम्मी को चाय देने गई तो मम्मी सलवार खोलकर उंगली कर रही थी और फिर बहन जब कमरे मे गई तो फिर सलवार ऊपर खींच ली और उठकर बैठ गई। लेकिन तब वो एक दूसरे से कुछ नहीं बोले। फिर ये आकर मुझे बहन ने बताया। फिर बहन भी मम्मी को लेकर उदास रहने लगी। लेकिन मैं और बहन चुदाई किये जा रहे थे। अब हमें मम्मी के होने और न होने का कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।  फिर एक दिन की बात है बहन ने पहले नंगी होकर झाड़ू लगाई और दूसरे काम किये और फिर वो किचन मे नंगी ही खाना बनाने लगी। फिर खाना बनाने के बाद बहन नहाने चली गई और फिर नहाने के बाद भी वो नंगी ही बाहर आ गई। फिर मैंने उससे कहा के मम्मी अंदर कमरे मे ही तुम ज्यादा देर नंगी मत रहा करो। फिर वो ये सुनकर मेरी तरफ मुसकुराती हुई चली गई। फिर बहन ने मम्मी को कमरे मे ही खाना ले जाकर दिया तो मम्मी खाना खाकर सो गई। फिर हमने भी खाना खाया। फिर बहन फिर से नंगी होकर नौकर को खाना देने चली गई और मैं अपने कमरे मे नंगा होकर लेट गया और बहन के आने का इंतजार करने लगा और अपना लंड सहलाने लगा। फिर बहन काफी देर तक नहीं आई तो फिर मैं नंगा ही पीछे गया और फिर नौकर के कमरे में जाकर देखा तो वो दोनों एक दूसरे से चिपक कर सोये हुए थे। फिर मैंने बहन को जगाया और उसे अंदर ले आया। 
 
फिर मैं बहन के बदन को सहलाने लगा तो बहन गरम होने लगी और फिर मैं बहन के बदन के अंग अंग को चूमने लगा। तब हम दोनों किचन में थे। मम्मी का कोई डर नहीं था तो हम कहीं भी करने लग जाते थे। तब दोपहर हो चुकी थी। फिर बहन गरम हो गई तो मैं नीचे लेट गया और बहन मेरे लंड पर बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी। हम कर ही रहे थे और मैं झड़ने वाला ही था के तभी अचानक मम्मी आ गई और हमें चुदाई करते देख वो देखती ही रह गई। मम्मी को देखकर हम दोनों भी खड़े हो गए। मेरा पानी छूटने वाला था तो फिर मैंने थोड़ा सा अपने लंड को हिलाया तो लंड से पानी निकलने लगा। मेरे लंड की पिचकारियाँ सामने खड़ी मम्मी तक जा रही थी। ये देखकर मम्मी देखती ही रह गई और फिर वो गुस्से मे लाल होकर मेरे पास आई और मेरे मुँह पर दो थप्पड़ मारे। फिर वो बहन के पास गई और फिर बहन के भी थप्पड़ मारे। फिर वो पूछने लगी के ये सब कबसे चल रहा है। तो फिर मैंने को बहन के बारे मे बताया के उसने पहले अपने बॉयफ्रेंड से किया और फिर अपने टीचर से और नौकर से भी कर चुकी है। फिर ये सुनकर मम्मी बोली के और अब अपने भाई से कर रही है। फिर मम्मी जब बहन को दोबारा से मारने के लिए हाथ उठाने लगी तो बहन ने मम्मी का हाथ पकड़ लिया और फिर बहन मम्मी से कहने लगी के के मैं आपकी तरह अपनी चुत नहीं रगड़ सकती। 
 
ये सुनकर मम्मी थोड़ी नरम पड़ गई। फिर बहन मम्मी से कहने लगी के आप पापा के जाने से उतनी दुखी नहीं है जितनी की अपनी चुत को लेकर है। आप कब तक सहन करोगी। बहन लगातार बोलती रही और मम्मी सुनती रही।बात क्या थी और बहन बात को वापिस मम्मी पर ले गई। मम्मी कुछ देर तो सुनती रही और फिर रोती हुई अपने कमरे मे चली गई। हमारी बातें काफी देर तक चलती रही। फिर मैंने तो कपड़े पहन लिए थे लेकिन बहन नंगी ही रही। फिर शाम हो गई तो फिर बहन ने मुझसे पूछा के मेरे पास कितने कोंडोम पड़े है। फिर मैंने बहन से पूछा के वो क्या करने वाली है। फिर बहन बोली के मम्मी खुद से तो कुछ नहीं करेगी। वो हमारे बारे मे सोचकर सारी जिंदगी ऐसे ही घुट घुट कर जीती रहेगी। मैं मम्मी को नौकर से जबरदस्ती चुदवाऊँगी। मम्मी को एक मर्द की बहुत जरूरत है। फिर बहन मुझसे बोली के तुम शायद अपनी मम्मी को किसी दूसरे से चुदते हुए ना देख पाओ। लेकिन अब यही एक तरीका बचा है मम्मी को इस दुख से निकालने का। फिर मैं सब सुनकर बहन से बोला के मुझे तुम पर पूरा भरोसा है तुम जो करोगी सही करोगी। फिर मैंने अपने कमरे में देखा तो कोंडोम की एक डिब्बी पड़ी थी जिसमें 4 कोंडोम पड़े थे। उसमें से एक कोंडोम लगाकर मैंने बहन के साथ किया था। फिर बाद में कोंडोम की कोई जरूरत नहीं पड़ी और हम ऐसे ही करने लगे। 
 
फिर शाम को जब बहन मम्मी को खाना देने गई तो मम्मी ने खाना नहीं खाया और रोटी रही। फिर बहन ने मुझे नौकर को बुलाने के लिए कहा तो मैं जाकर उसे बुला लाया। तब नौकर नंगा ही था और बहन भी नंगी ही थी। फिर बहन नौकर को लेकर मम्मी के कमरे में चली गई। मम्मी नौकर को नंगा देखकर खड़ी हो गई और बोली के ये यहाँ क्यों आया है। मैं ये सब कमरे से बाहर खड़ा होकर खिड़की से देख रहा था। फिर बहन मम्मी के पास गई और मम्मी के कपड़े उतारने लगी तो मम्मी ने नहीं उतारने दिए। फिर बहन को गुस्सा आ गया तो उसने मम्मी के गालों पर थप्पड़ मारे। जिससे मम्मी थोड़ी शांत हो गई। फिर बहन ने मम्मी के सब कपड़े उतार दिए और फिर मम्मी को बेड पर सीधी लेटा दिया और मम्मी के पैर फैला दिए। फिर बहन ने नौकर मम्मी के पैरों के बीच आने के लिए कहा तो नौकर आ गया। फिर ये देखकर मम्मी उठकर बैठ गई और बहन को बोलने लगी के तुझे शर्म नहीं आती तू मुझे इससे चुदवा रही है। फिर बहन बोली के नहीं आती और कुछ दिन बाद आपको भी नहीं आएगी। फिर बहन मम्मी की छाती पर चढ़कर बैठ गई। फिर नौकर ने थूक लगाकर अपने लंड को मम्मी की चुत पर रखा और अंडर डालने लगा। 
 
जिससे मम्मी को दर्द हुआ तो मम्मी पहले तो चीखने लगी लेकिन फिर शांत हो गई और रोने लगी। फिर नौकर का लंड मम्मी की चुत से अंदर बाहर होने लगा। फिर बहन मम्मी की छाती से नीचे उतर गई तो फिर नौकर मम्मी के बोबो को चूसने लगा और मम्मी की चुत मे जोर जोर से अपना लंड पेलने लगा। फिर बहन ने नौकर के लंड पर कोंडोम लगा दिया और नौकर फिर से मम्मी से करने लगा। ये सब देखकर मैं बहुत गरम हो गया और फिर मैं भी अपना लंड हिलाने लगा। मम्मी को चुदता देखकर मैं बहुत ज्यादा गरम हो गया और फिर मैं झड़ने लगा तो मेरा सारा पानी वहीं फर्श पर ही गिर गया। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी सिसकारिया लेने लगी और वो भी अपनी गाँड ऊंची ऊंची कर करके नौकर का लंड लेने लगी। फिर बहन कमरे से बाहर आ गई। फिर बहन भी गरम हो चुकी थी तो मेरा लंड चूसने लगी। फिर मेरा लंड खड़ा हो गया तो मैं बहन को घोड़ी बनाकर चोदने लगा। मम्मी के कमरे से मम्मी की सिसकारियों की आवाज लगातार आ रही थी। फिर मैं और बहन  चुदाई के बाद खाना खाकर आँगन में ही लेट गए। 
 
फिर एक बार मम्मी की सिसकारियों की आवाज बंद हो गई और फिर कई देर बाद फिर से शुरू हो गई। शायद उनका दूसरा राउन्ड शुरू हो गया था। फिर मैं और बहन तो सो गए और उनकी चुदाई चलती रही। फिर सुबह हमें जाग आई तो बहन ने भागकर जाकर मम्मी के कमरे मे देखा और फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। फिर मैंने भी मम्मी के कमरे मे जाकर देखा तो मम्मी नौकर से चिपक कर सो रही थी और मम्मी का एक हाथ नौकर के लंड पर था। फिर बहन मझसे बोली के अब देखना सब ठीक हो जाएगा। फिर बहन की कोंडोम की डिब्बी की तरह इशारा किया जो की खाली थी। फिर ये सब देखकर हम वापिस आ गए। फिर बहन बोली के इन्हे सोये रहने देते है पता नहीं रात को कब सोये होंगे। फिर मैं और बहन चाय पीकर काम मे लग गए। फिर 9 बजे बहन चाय लेकर मम्मी के कमरे में गई और मम्मी और नौकर को उठाया। फिर नौकर तो चाय लेकर कमरे से बाहर आ गया और फिर बहन ने मम्मी की तरह देखा तो मम्मी नीची गर्दन करके मुस्कुराने लगी। फिर बहन जाकर मम्मी के गले लग गई और मम्मी से कहने लगी के आपको हमसे शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। आप बस मजे करो। फिर मम्मी चाय पीने लगी और बहन कोंडोम की डिब्बी और यूज किये हुए कोंडोम उठाकर कमरे से बाहर आ गई। फिर मम्मी चाय पीते अपनी चुत पर हाथ फेरने लगी। फिर जब बहन वापिस अंदर कमरे मे गई तो मम्मी ने अपनी चुत से हाथ हटा लिया लेकिन तब तक बहन देख चुकी थी। 
 
फिर बहन ने पूछा के दर्द हो रहा है क्या। फिर मम्मी बोली के नहीं। फिर बहन ने मम्मी को बाहर चलने के लिए कहा तो फिर मम्मी खड़ी हुई और फिर अपने कपड़े पहनने लगी। फिर बहन बोली के अब आपको किस्से शर्म आ रही है। फिर बहन बोली के आपको भाई से शर्माने की जरूरत नहीं है उसको मैं अपनी चुत से ठंडा कर देती हूँ तो वो कुछ नहीं कहेगा। वो भी आपको खुश देखना चाहता है। लेकिन फिर मम्मी ने कपड़े पहन ही लिए। मम्मी थोड़ी लंगड़ाकर चल रही थी तो फिर बहन मम्मी का हाथ पकड़कर मम्मी को टॉइलेट ले गई। बहन तब नंगी ही थी। लेकिन मम्मी उसे कुछ नहीं बोल रही थी। फिर पेशाब करने के बाद बहन मम्मी को लेकर किचन में चली गई और वहीं मम्मी को बैठा लिया और साथ में बहन खाना बनाने लगी। फिर वो बातें करने लगी और उनकी बातें मुझे सुनाई दे रही थी। मैं तब आँगन मे बैठा था। फिर मम्मी ने बहन से कहा के मैंने तुझे कल बहुत मारा। फिर बहन बोली के कोई और होता तो वो भी मारता। फिर मम्मी और बहन ने काफी बातें की। आज मम्मी काफी खुश थी। फिर बहन मम्मी को आँगन मे लाकर बैठा दिया। फिर मैंने मम्मी से पूछा के वो कैसी है तो मम्मी नीची गर्दन करके बोली के ठीक हूँ। मम्मी मुझसे शर्मा रही थी। फिर बहन ने मम्मी के नहाने के लिए पानी डाल दिया तो मम्मी नहाने चली गई। फिर नहाने के बाद बहन मम्मी को लेकर कमरे मे चली गई। 
 
फिर मम्मी ने बहन से पूछा के कोंडोम और है क्या। फिर बहन बोली के और तो नहीं है लेकिन मैं भाई से मँगवा लूँगी। फिर बहन ने मम्मी से पूछा के आपको कौनस फ्लेवर पसंद है तो मम्मी बोली के वो क्या होता है तो फिर बहन ने बताया के अलग अलग खुशबू वाले कोंडोम आते है। फिर सेक्स के टाइम उसी फ्लेवर की खुशबू आती है। फिर मम्मी बोली के कोई से भी मँगवा लेना। फिर बहन बोली के ठीक है।  फिर बहन ने मम्मी को खाना डालकर दिया तो मम्मी ने खाना खा लिया। फिर बहन ने मुझसे कोंडोम मँगवाए तो मैं कोंडोम लेकर आ गया। फिर नौकर पीछे से काम करके नंगा ही आ गया तो फिर बहन ने उसे नहाने के लिए कहा। फिर नौकर नहाकर आ गया तो बहन से उसे लेकर मम्मी के कमरे मे चली गई। तब मम्मी भी अंदर नंगी बैठी थी और अपनी चुत सहला रही थी। फिर नौकर और बहन को देखकर मम्मी मुस्कुराने लगी। फिर नौकर तो जाकर मम्मी के पास बैठ गया और बहन ने कोंडोम मम्मी को दे दिए। फिर बहन ने मम्मी से पूछा के और कुछ चाहिए तो फिर मम्मी ने ना मे गर्दन हिला दी। फिर बहन वापिस आने लगी तो मम्मी नौकर का लंड पकड़कर हिलाने लगी। फिर बहन मम्मी के कमरे का गेट बंद करके बाहर आ गई और फिर मैं और बहन उन्हे खिड़की से देखने लगे और अपने अपने चुत और लंड सहलाने लगे। 
 
फिर नौकर मम्मी की चुत चूसने लगा तो मम्मी की सिसकारियाँ लेने लगी और फिर नौकर लंड डालकर करने लगा। कुछ देर करने के बाद फिर मम्मी ने नौकर के लंड पर कोंडोम चढ़ाया और फिर उससे करने लगी। फिर हम दोनों अपने कमरे मे आ गए और करने लगे। फिर करने के बाद हम सो गए। फिर हम उठे और फिर हम एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे तो फिर हम गरम हो गए। फिर बहन ने मुझे  खड़ा कर लिया और फिर मेरा लंड अपने बोबो के बीच डालकर सहलाने लगी और साथ मे चूसने लगी। फिर मैं झड़ने वाला हुआ तो फिर मैं अपने लंड को अपने हाथ से सहलाने लगा और फिर सारा पानी बहन के मुँह पर डाल दिया। फिर इतने में कमरे का गेट खुला और सामने मम्मी चाय लेकर खड़ी थी और मैं बहन के मुँह के आगे खड़ा होकर लंड हिला रहा था। फिर बहन खड़ी हो गई और हँसती हुई मम्मी के पास जाने लगी। फिर मम्मी भी अंदर आ गई और फिर चाय टेबल पर रख दी और फिर अपने पल्लू से बहन के मुँह पर लगा मेरा पानी पोंछने लगी। फिर मम्मी ने मेरी तरफ भी देखा और फिर वो बोली के चाय पी लो ठंडी हो जाएगी। फिर इतना बोलकर वो चली गई। 
 
आज मम्मी काफी दिनों बाद हमारे लिए चाय बनाकर लाई थी। फिर हम दोनों बैठकर चाय पीने लगे। फिर बहन बोली के मैंने कहा था ना सब ठीक हो जाएगा। फिर मैं बोला के हाँ। फिर बहन बोली के अब सिर्फ एक काम और रह गया है। फिर मैंने पूछा के वो क्या तो फिर बहन बोली तुम्हारी और मम्मी की चुदाई। फिर मैं बोला के क्या। मम्मी की चुदाई मैं नहीं करूंगा। फिर बहन बोली के क्यों मम्मी तुझे पसंद नहीं है। फिर मैं बोला के ये बात नहीं है। फिर बहन बोली के तो क्या बात है। फिर बहन बोली के मम्मी की गाँड अभी तक कुंवारी है उसकी सील तुझे ही तोड़नी है। तू मम्मी की चुदाई कर लेगा तो फिर मम्मी तुझसे शर्माना छोड़ देगी और भी खुलकर रह सकेगी। मम्मी की चुदाई की बात सुनकर मैं काफी खुश हो गया। फिर मैं बोला के तो कब करनी है चुदाई है। फिर बहन बोली के आज रात को ही। फिर चाय पीने के बाद मैं और बहन कमरे से बाहर निकले तो नौकर तो पीछे की तरफ जा रहा था और मम्मी किचन की तरफ जा रही थी। फिर मैं नौकर के साथ पीछे की तरफ चला गया। फिर नौकर तो काम करने लगा और मैं उसके लंड को देखने लगा जिसने मेरी माँ की चुदाई की है। फिर मैं ये सोचकर भी खुश हो गया के आज मैं भी मम्मी की चुदाई करने वाला हूँ। 
 
फिर कुछ देर के बाद मैं वापिस अंदर आ गया। तब बहन और मम्मी रात को होने वाली मेरी और मम्मी की चुदाई की ही बातें कर रही थी। बहन मम्मी से कह रही थी के भाई से चुदवाने के बाद आप भाई के सामने नंगी रह सकती हो। आपको फिर उसे शर्माने की कोई जरूरत नहीं होगी। साथ में भाई आपको चोद लेगा तो फिर उसकी भी आपको चोदने की इच्छा पूरी हो जाएगी। फिर आप उसके सामने और किसी से करोगी तो भी वो कुछ नहीं कहेगा। बहन बोले जा रही थी और मम्मी ये सब बातें नीची गर्दन करके सुनती जा रही थी। फिर बहन ने कहा के आप शाम को अपने कमरे मे नंगी ही रहना मैं भाई को लेकर आ जाऊँगी। फिर बहन और मम्मी ने मिलकर घर का सब काम जल्दी ही कर लिया। फिर बहन ने मम्मी को नहाने और तैयार होने के लिए कहा। फिर मम्मी नहाकर अपने कमरे मे चली गई। फिर बहन ने मुझे भी नहाने के लिए कहा और साथ में लंड के बाल भी काटने के लिए कहा तो मैंने बाल काट लिए। फिर नहाकर मैं कमरे मे गया तो बहन ने मेरी पूरी बॉडी पर सेंट छिड़का और मेरे बाल अच्छे से बनाए और फिर मुझे लेकर शाम को 5 बजे ही मम्मी के कमरे मे चली गई। फिर हम मम्मी के कमरे मे गए तो सारा कमरा महक रहा था और मम्मी शीशे के आगे नंगी ही बैठी थी और मेकअप कर रही थी। 
 
फिर हमें देखकर मम्मी खड़ी होकर हमारे पास आ गई। मम्मी ने लिप्स्टिक लगा रखी थी हाथों मे नैलपॉलिस और गले में एक सोने की चैन और बालों का जुड़ा बना रखा था। मम्मी तब कहीं से भी विधवा नहीं लग रही थी। फिर बहन हम दोनों से बोली के आज अपनी सारी शर्म मिटा लो। फिर बहन ने मम्मी को मेरी तरह धक्का दे दिया तो मम्मी आकर मुझसे चिपक गई और फिर मैंने मम्मी को पकड़ लिया। तब मम्मी के बोबे मेरी छाती से टच हो रहे थे और मेरे दोनों हाथ मम्मी की कमर पर थे। फिर बहन बाहर चली गई और मैं और मम्मी ऐसे खड़े रहे। फिर मैं मम्मी की गर्दन पर किस करने लगा तो मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लि। फिर मैं नीचे हाथ ले जाकर मम्मी की गाँड सहलाने लगा। मुझे तो तब यकीन ही नहीं हो रहा था के मम्मी मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी है और मैं मम्मी की गाँड सहला रहा हूँ। मेरी दिल की धड़कन बहुत तेजी से चल रही थी। फिर मैं मम्मी की गालों पर किस करने लगा और फिर अपने होंठ मम्मी के होंठों पर रख दिए और फिर मैं मम्मी के होंठ चूसने लगा। मेरा लंड खड़ा हो गया और मम्मी की चुत पर लगने लगा। फिर मैंने गौर किया के मम्मी ने भी चुत के बाल काट रखे थे। फिर मैंने मम्मी को घुमाया और फिर मम्मी की पीठ मेरी तरफ हो गई तो मैं मम्मी की गाँड में अपना लंड डालकर खड़ा हो गया और दोनों हाथों से मम्मी के बोबो को दबाने लगा। फिर मैं एक हाथ नीचे ले गया और फिर मम्मी की चुत सहलाने लगा। 
 
मम्मी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। फिर मैंने मम्मी को वापिस अपनी तरफ घुमाया और फिर घुटनों के बल बैठा लिया। अब मम्मी के मुँह के बिल्कुल सामने मेरा लंड था। फिर मम्मी ने मेरा लंड अपने हाथ मे ले लिया और गौर से देखने लगी। फिर मैं लंड से मम्मी के होंठों को सहलाने लगा तो फिर मम्मी ने मुँह खोलकर मेरा लंड मुँह मे ले लिया तो फिर मैं लंड मम्मी के मुँह से अंदर बाहर करने लगा। जिससे मम्मी की लार मेरे लंड से लगकर नीचे पड़ने लगी। फिर कुछ देर ऐसे करने के बाद मैंने दोनों हाथों से मम्मी के बोबो को पकड़ा और फिर उनके बीच अपना लंड डालकर आगे पीछे करने लगा। फिर मम्मी ने खुद अपने हाथों से अपने बोबो को पकड़ लिया और फिर मेरे लंड को अपने बूब से सहलाने लगी। फिर मैंने मम्मी को उठाया और बेड पर ले जाकर लेटा दिया और मैं खुद मम्मी के सामने बैठ गया और फिर मम्मी की चुत को गौर से देखना लगा। मम्मी की चिकनी चुत बहुत ही सेक्सी लग रही थी। फिर मैं मम्मी की चुत को चूसने लगा तो मम्मी सिसकारियाँ लेने लगी और अपने हाथों से मेरे सिर को अपने चुत में दबाने लगी। फिर मम्मी जब बहुत ज्यादा गरम हो गई तो वो कहने लगी अब रहा नहीं जा रहा है अंदर डाल दे अब। फिर मैंने लंड मम्मी की चुत में डाल दिया और करने लगा। जिससे मम्मी को मजा आने लगा और वो और जोर से सिसकारियाँ लेने लगी। पूरा कमरा मम्मी की सिसकारियों से गूंजने लगा। 
 
मेरा लंड मम्मी की चुत मे अंदर बाहर हो रहा था और मम्मी मजे ले रही थी। ये देखकर मैं और ज्यादा गरम हो गया और फिर और जोर से करने लगा। फिर मैं झड़ने वाला हुआ तो मैंने लंड बाहर नहीं निकाला और करता रहा और चुत मे ही झड़ गया। मम्मी भी कई बार झड़ गई थी। फिर मम्मी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी। फिर मैं मम्मी के ऊपर ही लेट गया तो मम्मी ने मुझे अपनी बाहों मे भर लिया। फिर मैं मम्मी के बोबो को चूसने लगा। फिर मम्मी मुझसे बोली के तू अंदर ही झड़ गया अगर बच्चा ठहर गया तो। फिर मैं बोला के बहन के पास पिल पड़ी है। वो दे दूंगा सुबह तो कुछ नहीं होगा। फिर मैं मम्मी के होंठों को चूसने लगा। फिर मेरा लंड पूरा बैठ गया तो मैं मम्मी के ऊपर से हट गया और आराम करने लगा। फिर मम्मी मुझसे चिपक कर लेट गई और मेरे लंड को अपने हाथ मे लेकर हिलाने लगी। फिर हम बातें करने लगे। फिर तभी अचानक कमरे का गेट खुला और बहन अंदर आ गई। बहन को देखकर मैं और मम्मी वैसे ही लेटे रहे। बहन हमारे लिए खाना लाई थी। तब शाम हो चुकी थी। फिर मम्मी बहन के सामने ही मेरा लंड सहलाती रही। फिर बहन खाने रखकर और हमें खाना खाने का कहकर वापिस चली गई और गेट बंद कर दिया। हमे भूख लग चुकी थी तो फिर मम्मी खड़ी होकर खाना लाई और फिर हमने खाना खाया। फिर खाना खाने के बाद मम्मी जब बर्तन टेबल पर रखने गई तो मम्मी की गाँड देखकर मैं देखता ही रह गया। फिर मम्मी जब वापिस मेरे पास आई तो मैंने मम्मी को घोड़ी बनने को कहा। फिर मम्मी घोड़ी बन गई तो फिर मैं मम्मी के गाँड के छेद को चाटने लगा। 
 
फिर मैं मम्मी की सारी गाँड चूमने लगा। मम्मी की नरम नरम गाँड बहुत सेक्सी थी। फिर मैंने मम्मी की गाँड को अपने मुँह मे लेकर खाने की कोशिश करने लगा। लेकिन मम्मी की गाँड मेरे मुँह मे नहीं आ रही थी। मैंने काफी कोशिश की जिस कारण मम्मी की गाँड पर कई जगह मेरे दांतों के निशान पड़ गए। फिर मैं मम्मी की गाँड पर थप्पड़ मारने लगा। पहले मैं थप्पड़ आराम से मार रहा था और फिर जोर जोर से मारने लगा। मम्मी को दर्द हो रहा था लेकिन मम्मी कुछ नहीं बोली। मम्मी की आँखों मे थोड़े थोड़े आँसु भी आ गए थे। फिर मैं अपने खड़े लंड को से मम्मी की गाँड के छेद को सहलाने लगा। मम्मी की गाँड सच मे कुंवारी थी। गाँड का छेद भी छोटा ही था। फिर मम्मी बोली के ऐसे नहीं जाएगा तेल लगा ले। फिर मैंने लंड पर काफी सारा तेल लगाया और फिर गाँड मे डालने लगा। अभी थोड़ा सा ही गया था के मम्मी चीखने चिल्लाने लगी। लेकिन मुझे जरा भी रहम नहीं आया और मैंने मम्मी के दोनों हाथों को पीछे की तरफ करके अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और फिर जोर से झटका मारा तो आधा लंड अंदर चला गया। फिर मम्मी और जोर से चिल्लाई और रोने लगी। मम्मी की आवाज सुनकर बहन कमरे का गेट खोलकर देखने लगी के क्या हो रहा है। फिर मैंने एक और झटका मारा और पूरा लंड अंदर डाल दिया। फिर तो मम्मी रोने ही लगी थी। लेकिन मैं नहीं रुका और करता रहा। मम्मी को दर्द हो रहा और थोड़ा खून भी आ गया था। जिस कारण मुझे ऐसा लगा के जैसे मैंने मम्मी की सील तोड़ी है। 
 
मम्मी की गाँड मारने का मजा कुछ अलग ही था। फिर कुछ देर गाँड मारने के बाद मैं गाँड मे ही झड़ गया। झड़ने के बाद मैंने लंड बाहर निकाल लिया तो फिर मम्मी अपने गाँड के छेद को छूकर देखने लगी जो की थोड़ा सूज गया था। फिर बहन ने पेनकिलर लाकर दी और मम्मी को दे दी। फिर मम्मी उलटी ही लेटी लेटी आराम करने लगी और मम्मी को देखकर लंड सहलाने लगा। पेनकिलर के असर से मम्मी का दर्द गायब हो गया तो फिर वो मुझसे बातें करने लगी। उन्होंने मुझसे काफी बातें की और खेत वगेरह के बारे में पूछा और भी कई चीजों के बारे में पूछा। वो मुझसे नॉर्मल तरीके से बातें कर रही थी। फिर वो मेरा लंड सहलाने लगी तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। फिर मेरे खड़े लंड को देखकर वो मुस्कुराने लगी। फिर मैंने मम्मी को घोड़ी बनने के लिए कहा तो मम्मी घोड़ी बन गई। फिर मैं पीछे से पहले मम्मी की चुत में डाला और फिर गाँड मे डाला। गाँड मे डाला तो मम्मी को दर्द हुआ। लेकिन फिर उन्हे मजा आने लगा। फिर मैं कभी उनकी चुत तो कभी गाँड मारता रहा। फिर बीच मे मैंने कुछ देर उनकी गाँड को चूसा। फिर मैंने उनकी पूरे बदन को चूसा और अपने थूक से गीला कर दिया। जिससे मम्मी फुल गरम हो गई तो मैंने मम्मी की चुदाई फिर से शुरू कर दी। हमें इस बार करते हुए 1 घंटे से भी ज्यादा समय हो चुका था। फिर मैं उनकी टाइट गाँड मार रहा था तो मैं झड़ गया। 
 
फिर हम लेटकर आराम करने लगे तो मम्मी ने कहा ऐसे मुझसे किसी ने नहीं किया। तेरे पापा को तो चाटना वगेरह अच्छा नहीं लगता था और नौकर बस सीधा ही डालकर करने लगा। मुझे हमेशा से ही ऐसे चुदाई करवानी थी। फिर मैं बोला के तो आज आपकी इच्छा पूरी हो गई। मम्मी की चेहरे पर संतुष्टि के भाव मैं साफ देख सकता था। फिर मम्मी मेरे ऊपर आकर मेरा लंड चूसने लगी और फिर लंड खड़ा हो गया तो मम्मी मेरे लंड पर बैठ गई और फिर ऊपर नीचे होने लगी। मैं आराम से लेटा रहा। फिर मम्मी झड़ गई लेकिन मैं नहीं झड़ा था। फिर मैंने मम्मी को अपने ऊपर से उतारा और फिर हम दोनों बेड से नीचे उतर गए और फिर मैंने उनके एक पैर को बेड पर रख दिया और एक बेड नीचे फर्श पर ही रहा। फिर मैं उनके आगे खड़े हो गया और उनकी चुत में डालकर करने लगा। फिर मैंने उन्हे दीवार के सहारे लगाकर चोदा। फिर मैंने उन्हे अपनी गोद में उठा लिया और नीचे से लंड उनकी चुत में डाल दिया और फिर खड़े खड़े ही उनकी चुत मारने लगा। फिर ऐसे ही मैंने मम्मी को काफी पोज में चोदा और फिर झड़ने लगा तो मैंने पूरा लंड उनकी गाँड में जड़ तक डाल दिया और फिर झड़ गया। फिर हमने टाइम देखा तो रात के 12 बज चुके थे। हम पिछले 7 घंटों से चुदाई कर रहे थे। फिर मम्मी ने बाहर घूमकर आने के लिए कहा और साथ में पेशाब करके आने के लिए बोला। फिर मैंने मम्मी की चुत के आगे अपना मुँह कर लिया और पेशाब करने के लिए कहा। फिर मम्मी बोली के तुम मेरा गंदा पेशाब पियोगे। फिर मैं बोला के आपकी चुत से निकला पेशाब मेरे लिए गंदा नहीं बल्कि अमृत है। ये सुनकर मम्मी मुस्कुराने लगी। 
 
फिर मम्मी पेशाब करने लगी। मैं मम्मी की चुत से निकलता हुआ पेशाब देखने लगा और साथ मे पीने लगा। फिर कुछ पेशाब मैंने पी लिया और कुछ बेड पर ही गिर गया। फिर मुझे भी पेशाब आ रहा था तो फिर मैं खड़ा होकर मम्मी के मुँह पर पेशाब करने लगा तो मम्मी ने भी मेरा कुछ पेशाब पीया और बाकी पेशाब मम्मी के बोबो से होता हुआ बेड पर गिरने लगा। मम्मी पूरी मेरे पेशाब से नहा लि। फिर मैं मम्मी से चिपक गया और मेरे पेशाब से भीगे हुए मम्मी के बोबो को चूसने लगा। फिर पेशाब करने के बाद हम कमरे से बाहर निकले तो देखा के बहन नौकर के साथ नंगी सोई थी। फिर मम्मी बहन को देखकर कुछ नहीं बोली और फिर मैं और मम्मी घर के पीछे की तरफ चले गए। हम इधर उधर घूमने लगे और बातें करने लगे। मम्मी की गाँड सूज हुई थी तो मम्मी थोड़ी लंगड़ा के चल रही थी। फिर हम पीछे पड़ी नौकर की चारपाई पर लेट गए और मैं मम्मी के बदन को सहलाने लगा। फिर मम्मी बोली के तुम्हारा और चोदने का मन कर रहा है क्या। फिर मैं बोला के आप मुझे बहुत पसंद हो। आपको चाहे जितना ही चोद लूँ मेरा मन कभी नहीं भरेगा। फिर मम्मी मुस्कुराकर बोली के अच्छा ऐसा क्या है मुझमे तो मैं बोला के आपने मुझे पालकर इतना बड़ा किया है और आज मैं आपको चोद रहा हूँ तो आपको कैसा लग रहा है। फिर मम्मी बोली के मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अपने बेटे से ही चुदने में कोई डर नहीं और ना ही किसी से पूछने की जरूरत। अब तो मैं जिंदगीभर तुमसे चुदवाऊँगी। ये सुनकर मैं बोला के मेरा मन भी कभी नहीं भरेगा आपसे। मैं भी आपको ऐसे ही चोदता रहूँगा। 
 
फिर कुछ देर बाद हम वापिस कमरे में आ गए और फिर हम चुदाई करने लगे। फिर चुदाई करके सो गए। फिर सुबह हमें 8 बजे जाग आई और फिर हम दोनों कमरे से बाहर आ गए तो देखा देखा के नौकर और बहन अभी तक सो रहे थे। नौकर का हाथ बहन के बोबो पर था और बहन भी नौकर से बिल्कुल चिपक कर सो रही थी। फिर मम्मी चाय बनाकर ले आई तो फिर मैंने और मम्मी ने उन दोनों को जगाया और फिर मम्मी और नौकर एक चारपाई पर बैठकर चाय पीने लगे और मैं और बहन दूसरी चारपाई पर बैठे थे। फिर  चाय पीने के बाद नौकर हमारे सामने ही मम्मी के बदन को सहलाने लगा। फिर उसने मम्मी को लेटा दिया और खुद मम्मी के ऊपर आ गया और फिर अपना लंड मम्मी की चिकनी चुत में डालकर करने लगा। मेरे और बहन के सामने नौकर मम्मी की चुदाई कर रहा था। मम्मी की चुदाई देखकर मैं और बहन अपना लंड और चुत सहलाने लगे। फिर मैं भी बहन को लेटाकर उसकी चुत मारने लगा। इस प्रकार मैं और नौकर उन दोनों माँ बेटी को चोदने लगे। फिर नौकर झड़ने वाला हुआ तो नौकर ने लंड बाहर निकालकर सारा पानी मम्मी की चुत पर डाल दिया और फिर मैं झड़ने वाला हुआ तो बहन ने मेरा लंड मुँह में ले लिया और सारा पानी पी गई। फिर बहन उठी और जाकर मम्मी की चुत पर लगा नौकर का पानी चाटकर मम्मी की चुत साफ कर दी। फिर चुदाई के बाद बहन नौकर के साथ पीछे चली गई और मम्मी झाड़ू वगेरह लगाने लगी और मैं आँगन में ही चारपाई पर लेट गया। 
 
फिर थोड़ी देर बाद जब मैं और मम्मी पीछे की तरफ गए तो देखा के नौकर बहन को घोड़ी बना कर चोद रहा था। तब मेरी बहन काफी सेक्सी लग रही थी। फिर उनके पास जाकर मैंने बहन के मुँह में अपना लंड डाल दिया तो फिर वो मेरा लंड चुसने लगी। फिर मेरा लंड फुल खड़ा हो गया तो फिर मैं जाकर बहन के नीचे लेट गया और फिर मैंने लंड बहन की चुत में डाल दिया और नौकर ने गाँड मे डाल दिया। दो लंडों से एक साथ चुदाई होती देखकर मम्मी हैरान हो गई और वो काफी गरम भी हो गई। फिर वो अपनी चुत सहलाने लगी खड़ी खड़ी। फिर नौकर झड़ गया और बहन भी झड़ गई। लेकिन मैं नहीं झड़ा था तो मैं उठा और फिर मैंने मम्मी को जमीन पर ही घोड़ी बना लिया और चोदने लगा और मम्मी की गाँड मे झड़ गया। फिर मम्मी बहन से पूछने लगी के तुमने दो लंड एक साथ कैसे ले लिए तो फिर बहन मम्मी को बताने लगी के इसमे क्या है। दोनों जगह लंड आसानी से चले जाते है। फिर बहन बोली के पहले काम कर लेते है फिर आप भी इन दोनों से एक साथ कर लेना। फिर आपको सब पता चल जाएगा। फिर मम्मी और बहन ने जल्दी से सब काम कर लिया और फिर हम नहाने लगे। मैं और नौकर पहले ही नहा लिए थे और आँगन में बैठ गए थे और मम्मी और बहन बाद में नहाई और फिर बाद में कपड़े वगेरह धोए। फिर वो हमारे पास आकर अपने बाल सुखाने लगी। फिर नौकर खड़ा हुआ और मम्मी को अपनी बाहों में ले लिया और मम्मी के बोबो को दबाने लगा और मम्मी भी उसका साथ देने लगी और साथ में हंसने लगी। फिर मैंने भी बहन को पकड़ लिया और मैं भी बहन के बदन को मसलने लगा। फिर कुछ देर ऐसे मस्ती करने के बाद हमने खाना खाया और फिर हम चारों कमरे में चले गए। 
 
फिर मम्मी और बहन ने  हमारे लंड चूसकर खड़े कर दिए तो फिर मैं और नौकर मम्मी की एक साथ चुदाई करने लगे। जिसमें मम्मी को काफी मजा आ रहा था। फिर चुदाई के बाद मम्मी बोली के आज तो सच में बहुत मजा आया। ऐसा मजा तो कभी किसी चीज में नहीं आया। मम्मी काफी खुश थी हम से एक साथ चुदकर। फिर बस इसी तरह चलता रहा। मम्मी अब काफी खुश रहने लगी और मम्मी को भरपूर चुदाई मिलने लगी थी जिस कारण मम्मी का बदन और भी निखर गया और वो और भी जवान लगने लगी। बहन भी काफी मस्त हो गई थी। फिर मैं और बहन पढ़ाई के बहाने शहर मे जाकर रहने लगे और मम्मी घर पर अकेली ही नौकर के साथ रहती। खेती करने के लिए मैंने जमीन किसी को दे दी तो वो मुझे साल के साल पैसे दे देता। वो पैसे इतने होते के हम सब का गुजारा काफी आराम से निकल जाता। शहर में मैं और बहन ने पढ़ाई तो नहीं की पर मस्ती काफी की। बहन को अब नंगा होने में कोई परहेज नहीं था। जिस कारण वो कहीं भी कभी भी नंगी हो जाती। हमार पास कार थी। जब हम कार में कहीं जाते तो बहन ऐसे कपड़े पहनकर जाती जिन्हे जल्दी से खोला और पहना जा सके। फिर बहन कहीं भी किसी के सामने भी नंगी हो जाती। हम कार में जाते तो कई बार तो बहन नंगी होकर ही कार में बैठ जाती और देखने वाले उसे देखते ही रह जाते। फिर एक बार मैं पेट्रोल डलवाने के लिए पेट्रोल पम्प पर रूका। तब पेट्रोल पम्प पर कुल मिलाकर 4 लोग ही थे। तो बहन ने पहले तो अपने बोबे बाहर निकाले और फिर कार से बाहर निकल गई।
 
बहन को ऐसे देखकर वो सब कार के पास आ गए। फिर बहन कार में बैठ गई और फिर पूरी नंगी हो गई और फिर उन सबको अपने बदन के दर्शन करवाने लगी। वो सब बहन को देखते ही रह गए। फिर वो बहन से बोली चुदवाओगी क्या। तो बहन पहले तो कुछ नहीं बोली। फिर एक आदमी बोला के हड़ताल की वजह से कई दिन पेट्रोल पम्प बंद रहेगा। हम यहाँ पास में ही रहते है। अगर मजे करने चाहती हो तो हमारे साथ रहो। उसकी बात सुनकर बहन ने मुझसे कहा के चलो चलते है। फुल मजे करेंगे। फिर बहन बोली के ठीक है। फिर वो सब अपनी बाइक से और हम कार में वहाँ जाने लगे। फिर वहाँ पहुँचे तो वहाँ आसपास कोई और नहीं रहता था तो बहन नंगी ही कार से निकलकर उनके कमरे मे चली गई। फिर वहाँ जाते ही वो सब भी नंगे हो गए और फिर वो और बहन चुदाई करने लगे। फिर एक राउन्ड के बाद वो सब बैठकर बातें करने लगे। फिर बहन बोली के चलो बाहर करते है अब। फिर वो सब नंगे ही बाहर चले गए और फिर वहाँ करने लगे। इस प्रकार 4-5 दिनों तक उन सबने बहन के काफी मजे किए और बहन ने भी उनके लंड खूब चुदवाया। फिर हम वापिस आने लगे तो फिर वो सब बोले के इस बार कब आओगी। फिर बहन ने उनका नंबर ले लिया और बोला के आऊँगी तो बता दूँगी। इस प्रकार बहन ने काफी मर्दों से चुदवाया। बदले में मैं भी कई बार दूसते मर्दों की औरतों को चोद लेता। हमने रोकने टोकने वाला कोई नहीं था तो बस हम मजे करने में ही लगे रहते। 
 
घर पर मम्मी भी नौकर से फुल मजे करती। फिर मैंने मम्मी को भी खेत में ले जाकर चोदा और कई और जगह भी चोदा। जिस कारण अब मम्मी भी पूरी बेशर्म हो चुकी थी। फिर हम मम्मी को भी अपने साथ ले गए और फिर मम्मी को भी कई मर्दों से चुदवाया। जिससे मम्मी भी काफी खुश हुई। इस प्रकार हम सब करीब 8-10 सालों तक मजे करते रहे। मेरी उम्र 34 के करीब हो गई और बहन की 32 हो गई। फिर हमारे रिश्तेदार हम पर शादी का दबाव बनाने लगे। लेकिन मैं और बहन एक दूसरे के साथ रहकर ज्यादा खुश थे। फिर हम सोचने लगे हम क्या करें। मैं कई लड़कियों को चोदा था जिस कारण कुछ से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई थी। लेकिन एक से मेरी कुछ ज्यादा ही बनती थी। फिर मैंने उससे शादी करने को कहा तो वो तैयार हो गई। उसे मेरी बहन और मम्मी के बारे मे सब पता था और उसे भी चुदाई करना काफी पसंद था। वो भी कई लोगों से चुद चुकी थी। फिर मैं मम्मी और बहन उसके घर गए। घर पर उसका पापा और भाई था। उसकी माँ नहीं थी। उसका पापा पूरा लंबा चौड़ा मर्द था। फिर हमने रिश्ते की बात की तो उसका पापा मान गए। फिर हम कुछ दिन उनके घर पर ही रुके। फिर हमें एक दूसरे के बारे में सब पता था तो फिर मेरी होने वाली होने बीवी ने मम्मी और बहन के साथ लेसबों किया और फिर मैंने भी उसकी चुदाई की। फिर उसके पापा से मम्मी ने भी चुदवा लिया तो फिर मेरे होने ससुर ने बहन और मम्मी की चुदाई की और मैंने उनके सामने ही उनकी बेटी की चुदाई की। उनका बेटा यानि मेरा होने वाला साला थोड़ा भोला था। लेकिन फिर उससे भी बहन ने चुदवा लिया। 
 
फिर मैंने मेरे ससुर से मेरी समस्या बताई तो फिर ससुर ने मेरी समस्या हल कर दी। ससुर बोले के तुम्हारी बहन की शादी मेरे बेटे से कर देते है और तुम मेरी बेटी से लव मेरिज करके अपने घर ले जाओ और अपने रिश्तेदारों को ये मत पता चलने देना के ये मेरी बेटी है। उनकी ये बात सुनकर मैं काफी खुश हुआ। उनका घर अच्छा था और वो इम्पोर्ट एक्सपर्ट का बिजनस करते थे। फिर मैं उनकी बेटी को कोर्ट मेरिज करके अपने घर ले आया। मेरी बीवी काफी खूबसूरत है तो सबने उसे बहुत पसंद किया। फिर हमने बहन की रिश्ता मेरे साले से कर दिया। सब रिश्तेदार भी इस रिश्ते से खुश थे। फिर कुछ महीनों मे हमने बहन की शादी कर दी। फिर वहाँ भी बहन नंगी रहती और अपने ससुर और पति से खूब चुदवाती और यहाँ मैं मम्मी और बीवी को खूब चोदता। फिर एक साल के अंदर ही मेरे और बहन के एक एक लड़का हो गया। मेरी मम्मी भी कुछ दिन बहन के पास रहने चली जाती तो मेरा ससुर मम्मी और बहन की काफी चुदाई करते। इस प्रकार हमारी जिंदगी मजे से कटने लगी। फिर शादी के बाद भी हमारी मस्ती चलती रही। मेरे ससुर ने अपनी बेटी से भी कर लिया था। वो पहले भी करते थे लेकिन फिर वो हमारे सामने भी करने लगे। फिर हम चोदने वाले तीन मर्द हो गए और चुदवाने वाली तीन औरते हो गई तो फिर हम बदल बदलकर उनकी चुदाई करते रहते। मेरी बहन को मेरे साथ रहना अच्छा लगता था तो फिर वो मेरे साथ आकर रहने लगी और मेरी मम्मी और बीवी मेरे ससुर के घर जाकर रहने लगी। मेरी बीवी ने अपनी भाई से भी चुदवा लिया था तो फिर वो सब मिलकर काफी चुदाई करते और मैं और बहन पहले की तरह मस्ती करने लगे। बहन दूसरे मर्दों के साथ करती और मैं भी उसे उनके साथ मिलकर खूब चोदता। मेरी मम्मी को मेरे ससुर अच्छे लगने लगे थे तो फिर मम्मी गुपचुप तरीके से उनसे शादी कर लि और फिर उनके साथ ही रहने लगी। फिर इसी तरह हम मस्ती करते रहे। 
 

 

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