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बहन को चोदकर बिवी बनाना मेरी मजबूरी थी-२ 
@Karan1984 09 सितंबर, 2023 8670

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नमस्कार दोस्तों मै करण , हाजीर हूँ कहाणी का अगला पार्ट लेकर | आप पढ रहे है ' मेरी बहन को चोदकर बिवी बनाना मेरी मजबूरी थी ' कहाणी का पार्ट 2 | पढीए आगे अमन की जुबान से |

         हाय मै अमन , आपने पिछली कहाणी मे पढा की कैसे मेरे लंड से उस लडकी की चुत फट गयी | पढीए आगे... 

मै बाहर आकर रिसेप्शन मे बैठ गया , उस लडकी को अंदर ही फस्ट एड किया गया और उसे अंदर किसी रूम मे सुलाया गया | थोडी देर बाद रिसेप्शनिस्ट ने आकर मुझे पुछा क्या हुआ तो मैने सब हकिकत बयां कर दी | उन्होने मुझे वादा किया की वो मेरे पैसों को फालतू नही जाने देंगे | मेरे लायक एक लडकी है वहां पर जो मेरा अंदर तक लेने की क्षमता रखती है | बेशक मुझे और पैसे देने होंगे क्योंकी उस लडकी का रेट वहां पर सबसे हाय था , दस हजार | मैने तुरंत हा कह दिया | उन्होने मुझे थोडा इंतजार करने को कहा क्यों की उसके होल मे अभी अभी क्लायंट गया हुआ है जो अगले एक घंटे तक बाहर नही आने वाला | लेकिन रिसेप्शनिस्ट ने ये भी बताया की उस लडकी के पास आज तक जो भी गया है वो पूरा एक घंटा नही रूक पाया है| जादा से जादा आधा घंटा, आधे घंटे के अंदर सब मर्द उस होल से तृप्त होकर बाहर चले आते है |

वो मस्त लडकी एक नंबर के स्पेशल होल मे मौजूद है | मैने बाकी के पैसे पेड किए और बैठकर इंतजार करने लगा | बीस मिनट के बाद मुझे अंदर बुलाया | एक लडके ने मुझे एक नंबर होल तक छोडा | मैने दरवाजा खोला और अंदर चला गया | दरवाजे को मैने बंद किया तो लाईट ओन हो गयी | रूम सही मे स्पेशल था | बडा सा रूम था | एसी चल रहा था , सोफे लगे थे | म्यझिक भी ओन था | सेंटर टेबल पर ब्लैक डाग व्हिस्की , ग्लास , पाणी और नमकिन रखा था | सिगार , लाइटर , अटैच्ड बाथरूम था मगर ना तो बैंच दिखा ना लडकी, बस दिवार मे बैंच की नाप का होल था | 

           मै सोफेपर बैठ गया | और व्हिस्की का एक पैग ग्लास मे डालकर और पाणी मिलाया और पी गया | थोडी देर बाद और एक पैग लगाया और नमकिन खाया | दो पैग मार चुका था मै , थोडी देर बाद दिवार के उस पार से कुछ आवाजे आ गयी तो मैंने उधर देखा, दिवार के होल से बैंच स्लाइड सोया हुआ इस तरफ आ रहा था | बैंच पर लडकी लेटी हुई थी | वही स्कर्ट और वही टाप जो पहली लडकी ने पहना था सेम इसने भी वही पोशाख पहनी थी | लेकिन ये वाली लडकी काफी मजबूत शरीर की लगी, बिलकुल प्रतिभा जैसी लंबी ......  मै देखता ही रह गया ... ये तो सेम प्रतिभा लग रही थी | 

           वही टांगे, वही पेट, उतने ही बडे बडे मम्मे.... मै नजदिक गया और ध्यान से देखने लगा | प्रतिभा जब सुबह घर से निकली थी तब टाप और जिन्स पर थी | लेकिन यहां तो सभी लडकियों का एक ही ड्रेस है | मैने डाउट क्लीयर करने के लिए नजदिक जाकर देखा तो सेम नेल पाँलीस लगी थी | सब सेम ही था प्रतिभा की तरह | अब एक और पहचान देखनी बाकी थी वो थी पैंटी | मैने उसका स्कर्ट उपर उठाया .... और मै शाँक हुआ | वही ब्लैक पैंटी जो उसने आज पहनी थी | इस पैंटी के उपर मैंने कयी बार मूठ मारी थी | मुझे उसकी हर पैंटी की पहचान है | अब मुझे यकिन हो गया की ये मेरी बहन प्रतिभा  ही है | कयी तरह के सवाल मन मे आ गये | व्हिस्की का  नशा भी कम हो गया था तो मैने और तिन पैग एक ही बार मे गटक लिए और फैसला किया की अब तो चुत मारूंगा ही चाहे ये प्रतिभा ही क्यों न हो और प्रतिभा को देखकर तो मैने कयी बार मुठ भी मारी थी | मैने तुरंत उसकी पैंटी खिंचकर निकाली तो चुत गीली गीली थी, और चुत के उपर झांटो का समोसा कट किया हुआ था, बाकी क्लीन शेव की थी | चुत को देखकर मेरा लौडा बिलकुल तन चुका था | मैने उसकी टांगे उठाकर अपना मूँह चुत पर लगाया और चुत चाटने लगा | वो उछलने लगी शायद पहली बार किसीने उसकी चुत चाटी हो | तकरीबन दस मिनट मै चुत ही चाट रहा था | अब मुझसे रहा नही गया और मैने लंड को बिना कोंडम के ही चुत पर रखा और धिरे धिरे जोर लगाने लगा | सामने खुद की बहन चुदवा रही हो तो कोंडम कौन लगाएगा? मैने धिरे धिरे आधा लंड उसकी चुत मे पेल दिया | लंड बिलकुल टाइट जा रहा था , वो कसमसा रही थी | छटपटा रही थी, जैसे पहली बार लंड अंदर ले रही हो | लेकिन फिर भी सहन कर रही थी | हांफ रही थी | सांस को रोककर रखती और जोर से छोडती थी लगता है उसको परेशानी हो रही थी | 

          मै थोडा रूका , पाँच मिनट तक हाँल्ट किया | अब वो थोडी नाँर्मल हुई तो मैने फिर से हल्का लंड को पिछे खिंचा और उतनी ही जगह मे, आगे पिछे करना शुरू किया | आधे लंड से धिरे धिरे चोदने से उसकी चुत ने और पाणि छोडा और मैने लंठ को और थोडा अंदर किया  | ऐसे ही धिरे धिरे पुरा नौ इंच का मुसल मैने उसकी चुत मे समा दिया | बडी मुश्कील से वो सह रही थी | मै धिरे धिरे हलके हलके झटके मार रहा था | उतने झटकों से भी वो परेशान लग रही थी | दस मिनट के बाद उसकी चुत थोडी खुल गयी और मैने अपने झटकों को बडा कर किया | अब मै जोर जोर से चुदाई करने लगा | 

      अब उसको भी मजा आने लग गया था | मैने लंड बाहर खिंचा और देखा उसकी चुत का होल बहुत चौडा हो गया था | जैसे सांप का बील हो | होल खुला ही रहता था , इतना बडा मुसल जो घुसा था अंदर | चुत काफी फट गयी थी, खून भी निकला था और मेरे लंड पर भी खून लगा था |मैने उसकी पोझिशन चेंज करा दी, उसको उल्टा कर दिया | और फिर चुत मे लंड पेल दिया | इस बार लंड थोडा आसानी से घुसा | तकलीफ़ तो फिर भी हुई उसको | मूँह से दर्दभरी आवाज आ गयी | मैने अब पिछे से चुत मारनी शुरू की | मैने चोदते चोदते उसके बडे बडे मम्मे दबाने शुरू किए | मुझे बडा ही मजा आ रहा था | ऐसा शरीर जिसकी मै कामना करता रहता था, आज मै दस हजार रूपये देकर चोद रहा था वो भी मेरी ही सगी बहन का |

       मैने बिस मिनट तक नाँन स्टाँप चुदाई करी , शायद उसको भी बहुत मजा आया होगा | मेरा एक घंटे का समय भी समाप्त हो गया था और अब मैने उसकी चुत मे ही विर्य का फव्वारा छोड दिया | थोडी देर वैसे ही लेटा रहा फिर उठकर अपने कपडे पहने| बेंच भी उस पार चला गया | मै बाहर निकल गया और घर पर वापस आया | 

         शाम को प्रतिभा कालेज से जब आयी थी तब वो बडी थकी हुई लग रही थी , चलते समय लंगडा रही थी | मैने उसे तुरंत पकडकर सहारा दिया और उसके रूम तक लेकर गया वो मुझसे नजरे नही मिला रही थी | मैने उसे पुछा की कहाँ चोट आयी है तो पैरों की तरफ ईशारा करते हुए बोली मोच आयी है | अगले दिन वो कालेज नही गयी थी , घर मे सोई रही | शाम को मै जब घर वापस आया तो प्रतिभा सोई हुई थी | मै उसके पास जाकर बैठा ,उसके माथे पर हात रखा तो उसको काफी तेज बुखार आया था | मैने तुरंत उसे उठाया , और तैयार कराकर निचे लेकर आया | गाडी निकाली और हाॅस्पिटल मे लेकर आया | वहाँ डाँक्टर ने उसे एडमिट कराया | मैने आँफिस मे खबर कर के पंधरा दिन की छुट्टी सेंशन कराई | 

           अगले तिन दिन मे वो बिलकुल ठिक हो गयी , लेकिन डाँक्टर ने बताया की अब दो चार दिन आपने सेक्स नही करना है | बाद मे कर सकते है | ये बात उन्होने प्रतिभा के सामने ही बताई | प्रतिभा ने शर्म से चेहरा निचे किया | मै प्रतिभा को लेकर घर वापस आ गया | अगले तिन चार दिनों तक मै उसके साथ ही रहा , उससे बाते करता रहा , प्रतिभा अब बहुत खुश लग रही थी | वो मेरे से सटकर ही बैठी रहती या मेरे गोद मे सर रखकर सोती रहती | 

        उसके ऐसे करीब आने से मेरा लंड खडा हो जाता था और उसका एहसास उसको होता रहता था | उस रात रात को हम एक ही बिस्तर मे सो गये थे | रात एक बजे मेरी निंद खुल गयी | मैने देखा प्रतिभा मेरे उपर टांगे डालकर सो रही थी | जिससे मेरा लंड खडा हो गया था | उसकी गरम सांसे मेरे चेहरे पर टकरा रही थी | मैने अपने ओंट आगे करके उसके ओंठों पर रखे.... मजा आ गया .... क्या मुलायम ओंठ थे , वो थोडी भी हिली नही | मै उसे किस करते करते अपनी जीभ उसके ओंठों के बिच मे से गुजारकर उसके मूँह के अंदर ले गया | ऐसा करते समय उसने अपना मूँह धिरे से खोला | काफी देर तक मै किस करते रहा | अब वो भी चेहरा हिलाकर मेरा साथ देने लगी | 

     उसने एक हात मेरे लंड पर ले गयी और हातों मे पकडकर दबाने लगी | मै अब उसके उपर चढ गया , उसके कानों मे आय लव यू दिदी बोला| वो भी मुझे चुसते हुए आय लव यू भैया बोली | अब मै ने उसके सारे कपडे निकाले और उसे नंगा किया , साथ मे मै भी नंगा हो गया | अब मैने देखा उसकी चुत पर बालों का समोसा कट बना हुआ है मतलब वो प्रतिभा ही थी | सेम चुत , सेम टांगे .... सब वही है | उसने मेरे लंड को देखा और देखती ही रह गयी | फिर वो लंड को मूँह मे लेने की कोशीस करने लगी पर सिर्फ टोपा ही मूँह मे ले पाई | हम 69 की पोझिशन  मे एक दुसरे के अंग को चाटते रहे | फिर अचानक प्रतिभा निचे लेट गयी और टांगे खोलकर मुझे ईशारा किया | मै ने भी पोझिशन संभालते हुए लंड को चुत पर रखकर धिरे धिरे जोर लगाया और लंड धिरे धिरे करके पूरा चुत मे समा गया | 

        प्रतिभा के चेहरे पर खुशी के भाव नजर आ रहे थे | थोडी देर मे वे अपनी गांड को निचे से उपर की ओर उठाते हुए चोदने को कहने लग और अब मैने मोर्चा संभाला | मैने चुदाई शुरू कर दी | धका धक .... खचा खच... पचा पच... छपाक ....फचाक्.... फचाक् ....की आवाज के साथ मै प्रतिभा को ठोक रहा था | उसके मूँह से आह् आह्  आह् .... धिरे से भैय्य्य्या.....मर गयी... चोदो चोदो। मेरे पती देव... चोदो.... अब मै आपसे ही शादी करूंगी.... हाय्य्.... हाय्य्.... धिरे.... धिरे्््् मार डाला.... मुझे यही लंड चाहीए मेरी चुत मे ... जिंदगी भर के लिए .... 

        प्रतिभा इस तरह की बाते कर रही थी और मुझे बार बार चुत रही थी | मैने उसे एक घंटे तक अलग अलग पोझिशन  मे चोदा और हम दोनों एक साथ झड गये | मैने माल उसकी चुत मे ही छोड दिया | अब हम रोज ही चुदाई करते और हमने अपना एक ही बेडरूम बनाया | 

         हमे पता चल गया था की हम दोनों का शरीर एक ही सांचे मे बना है इसलिए हम दोनों को खुश करने के लिए हमारे जो सा ही साथी चाहिए होगा और वो मिलते मिलते हम दोनों भी बुढे हो जाते |इसलिए अब हमने आपस मे शादी करने का फैसला किया | जैसे प्रतिभा की पढाई पूरी हुई हमने शादी कर ली | उसने अब उस ग्लोरी होल मे चुदवाना भी बंद कर दिया क्योंकी मेरी एकबार की चुदाई उसे दो दिन तक हलने नही देती थी | 

       दुनिया मे कोई औरत मेरा लंड नही सह सकती थी सिवाय प्रतिभा के , और दुनिया मे कोई मर्द उसे खुश नही कर पाता सिवाय मेरे | हम दोनों एक दुसरे के लिए ही बने है | दोस्तों कैसी लगी कहाणी  मुझे कमींट करके जरूर बताइएगा |

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