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पड़ोसन चाची के साथ मस्ती भरी रंगरेलियाँ 
@8445rohit 23 जून, 2023 6063

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आज जो सेक्स कहानी मैं आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ, वो तब की है जब मेरी उम्र 19 साल थी.

उस समय मेरे पड़ोस के घर में नई नई शादी हुई थी और उस शादी में जो हॉट सी लड़की नई नवेली दुल्हन आई थीं, मैं उन्हें चाची कहता था.

उनका नाम हेमा (बदला हुआ नाम) था और उनकी उम्र यही कुछ 27-28 साल की थी.

हेमा चाची के मोहल्ले में आने के कुछ दिनों बाद से ही मेरी उनसे बातचीत होने लगी थी.

उस समय मैं अपने मोहल्ले का बड़ा ही फ्रेण्डली किस्म का लड़का था, जो मोहल्ले की लगभग सभी भाभियों और चाचियों से बात करता रहता था.

हेमा चाची की घुमावदार गांड और मोटी चूचियों वाले आकर्षित जिस्म और मर्दों को दीवाना बना देने वाली अदाओं में जो बात थी, वो मोहल्ले की किसी भाभी में नहीं थी.

मुझे जब भी हेमा चाची से बात करने का मौका मिलता, मैं तुरन्त पहुंच जाता.

चाची को मोहल्ले में आए 5 महीने हो गए थे. अब तक हम दोनों में एक दोस्ती वाला रिश्ता बन गया था.

चाची को भी मैं पसंद आने लगा था. हेमा चाची मेरे गोरे रंग और मेरी मजाकियां बातों पर फिदा हो गई थीं.

कभी कभी तो हेमा चाची मुझसे बात करते समय किसी मजाक पर हंसते हुए मुझे छूने की कोशिश करतीं.

कभी वो मेरे कंधे पर हाथ रखतीं, तो कभी मेरी जांघ पर.

जब भी कभी मैं चाची को नजर आता, तो चाची मुझे अपने पास बात करने बुला लेती थीं.

हेमा चाची के हुस्म और कामुक चेहरे में इतना आकर्षण था कि मैं जब भी हेमा चाची से मिलता, तो ना चाहते हुए भी मेरा ध्यान ज्यादातर चाची के रसीले होंठों, चूचियों और गांड पर ही टिक जाता था.

सावन का मौसम था. एक दिन चाची ने मुझे अपने घर पर बुला लिया और हम दोनों काफी टाईम तक बातें करने में मस्त रहे.

तभी तेज बारिश शुरू हो गई.

तो चाची ने कहा- भास्कर, चलो न छत पर चलते हैं … बारिश में भीगेंगे. बहुत मजा आएगा.

मैंने कहा- चाची ऐसा करना ठीक नहीं है. अगर किसी ने हमें छत पर बारिश में नहाते देख लिया तो वो क्या सोचेगा?

हेमा चाची ने कहा- अरे  बहुत डरते हो. ऊपर वाली छत पर चलते हैं, वहां से किसी को कुछ नहीं दिखेगा और तुम्हारे चाचा भी काम से गांव गए हुए हैं … तो उनका भी डर नहीं है.

चूंकि हेमा चाची के घर की छत बहुत बड़ी और मोहल्ले की सबसे ऊंची छत थी, तो वहां किसी की नजर आसानी से नहीं जा सकती थी.

फिर मैं हेमा चाची की बात मान गया और हम दोनों छत पर बारिश में नहाने चले गए.

उस दिन हेमा चाची ने सफेद रंग की टाईट नाईटी पहन रखी थी और भीगने के बाद तो उस टाईट सफेद नाईटी में हेमा चाची का एक एक अंग उभर कर आ रहा था.

ये देख कर मैं दंग रह गया क्योंकि इससे पहले मैंने ऐसा नजारा कभी नहीं देखा था और वो भी हेमा चाची के सेक्सी जिस्म का.

बारिश का पानी हेमा चाची के चेहरे और होंठों पर इस तरह टपक रहा था कि मेरा मन कर रहा था कि मैं हेमा चाची के लाल रसीले होंठों से रिसते पानी को अपने होंठ को लगा कर पी लूं.

मैंने ब्लू टी-शर्ट और काले रंग का पजामा पहन रखा था.

हेमा चाची की मोटी चूचियों और गांड के अक्श को देख मेरा लंड जैसे तना जा रहा था, जिसे पजामे से साफ देखा जा सकता था.

चाची की नजर मेरे खड़े लंड पर न पड़े, उसके लिए मैं अपनी उत्तेजना को शान्त करने की कोशिश कर रहा था. मैं अपने खड़े लंड को भीतर ही भीतर टांगों के बीच में दबाने की कोशिश कर रहा था ताकि हेमा चाची को नजर न आ जाए.

मुझे ये डर था कि अगर हेमा चाची ने ये सब देख लिया … तो वो मेरे बारे में पता नहीं क्या सोचेंगी?

लेकिन क्या बताऊं यार … मैं उस टाईम खुद को उत्तेजित होने से रोक ही नहीं पाया क्योंकि सामने हेमा चाची जैसी अप्सरा ऐसी हालत में हो, तो कौन खुद पर काबू कर पाता.

फिर जब बारिश बंद हुई, तो हमें ठंड लगने लगी और फिर हमने छत से नीचे जाने का फैसला किया.

तभी वहां पता नहीं कहां से कुछ बंदरों का झुण्ड आ टपका. बंदरों के झुण्ड को देख हेमा चाची बहुत तेज घबरा गईं और उन्होंने मेरा हाथ कस कर पकड़ लिया.

आह … क्या कोमल हाथ था हेमा चाची का कि मैं शब्दों में बयान ही नहीं कर सकता.

फिर मैं चाची को बंदरों के झुण्ड से बचाता हुआ छत के नीचे जाने वाले दरवाजे की तरफ धीरे धीरे लेकर जा ही रहा था.

तो देखा कि वहां कुछ बंदर बैठे हुए थे.

ये देखकर हेमा चाची और घबरा गईं और फिर हम जल्दी से वहां पास में ही छत पर बने बाथरूम का गेट खोल कर घुस गए.

वो बाथरूम बहुत ही छोटा था, जिसमें हम दो जन भी आराम से फिट नहीं हो पा रहे थे. हेमा चाची मेरे आगे पीठ करके खड़ी थीं और मैं चाची के पीछे खड़ा था.

हम दोनों के जिस्म एक दूसरे के जिस्म को स्पर्श कर रहे थे और ऊपर से मेरा तना हुआ लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था.

तभी हेमा चाची की गांड मेरे लंड से टकराई.

ये देखकर मैं बहुत डर गया था क्योंकि उस टक्कर से हेमा चाची को पता चल चुका था कि मेरा लंड खड़ा हुआ है.

उस समय जब हेमा चाची की गांड मेरे लंड से टकराई … तो क्या मस्त मजा आया था यार … बता ही नहीं सकता.

इतनी ही देर में उस छोटे से बाथरूम के जंगले पर एक बंदर आ धमका और गुर्राने लगा.

फिर क्या था हेमा चाची ये देखकर इतना डर गई कि वो चीख पड़ीं और पीछे मुड़कर मुझसे बहुत कसके चिपक गईं.

ओये होये होये … यारो …

वो सीन मैं आज तक नहीं भूला.

मेरा खड़ा और टाईट तना हुआ लंड अब हेमा चाची की चूत के बराबर में आ गया था.

हालांकि हेमा चाची को भी इस बात का पता था कि मेरा लंड तना हुआ है और उनकी चूत के बराबर में लगा है. लेकिन हेमा चाची को छत पर मौजूद बंदरों से इतना डर लग रहा था कि उन्हें इस सबसे कोई दिक्कत ही नहीं हो रही थी.

मेरी छाती से चिपकी हेमा चाची की कसी और मोटी चूचियों के स्पर्श ने मुझे सब कुछ भुलाने पर मजबूर कर दिया था और फिर मेरा लंड कितना भी तना हो, मैंने भी उस पर ध्यान देना छोड़ दिया.

कुछ देर तक हम दोनों इसी मुद्रा में खड़े रहे. शायद हेमा चाची को भी मुझसे चिपके रहने से मजा आने लगा था.

वो मुझसे हटने की जगह कहने लगीं कि मुझे काफी ठंड भी लग रही है.

मैंने भी बिंदास उनकी चुत से लंड रगड़ा और कहा- हां चाची, भीगने के बाद काफी सर्दी लग रही है.

वो मुझसे बड़ी बेतकल्लुफी से चिपकी रहीं, शायद उन्हें सर्दी का बहाना अच्छा लगने लगा था.

कुछ ही पलों में मैं महसूस कर पा रहा था कि हेमा चाची अपनी चूत वाले हिस्से से मेरे खड़े लंड को दबा रही थीं.

मैं भी समझ गया कि हेमा चाची अब कामुक हो गई हैं और काबू से बाहर होने लगी हैं.

मैंने भी अपने लंड से हेमा चाची की चूत के हिस्से को दबाना शुरू कर दिया. मेरा मन तो था कि हेमा चाची की चूचियां भी मसल लूं, पर क्या करूं … उस समय इतना कुछ ज्यादा करने की हिम्मत ही नहीं हुई.

कोई 10-12 मिनटों तक यही सब करते करते अब मैं झड़ने की स्थिति में आ गया था.

मेरे लंड का पानी निकलने ही वाला था, तो मैंने अपने लंड को हेमा चाची की चूत के हिस्से पर ही लगाये रखा.

फिर जो मैं झड़ा तो ऐसा झड़ा कि मेरे लंड का पानी मेरे पजामे के बाहर तो आ ही गया था और साथ साथ हेमा चाची की नाईटी से पार होता हुआ हेमा चाची की चूत तक पहुंच गया था.

हेमा चाची की चूत हल्की सी मेरे लंड के पानी से गीली हो गई थी.

झड़ने के बाद मेरा मूड बदल गया और मैंने हेमा चाची से कहा- चाची अब बंदर चले गए हैं. अब हमें नीचे जाकर नहा लेना चाहिए.

हेमा चाची ने मुझसे अपनी पकड़ हटा ली और सामान्य भाव से सिर हिलाते हुए कहा- हां चलो चलते हैं.

हम दोनों छत से नीचे उतर कर घर में आ गए.

नीचे आकर मैंने हेमा चाची से कहा- आप नहा लो, मैं अपने घर जाकर नहा लूंगा.

पर हेमा चाची ने कहा- अरे रुको तुम यहीं नहा लेना … और मैं तुम्हारे लिए अदरख वाली चाय बना दूंगी, वो पीकर चले जाना.

मैंने हामी भर ली और वहीं रुक गया.

कुछ देर बाद हेमा चाची घर के बाथरूम से नहा कर गुलाबी नाईटी पहनी हुई और तौलिया को सिर पर लपेटकर गुनगुनाती हुई बाहर निकलीं.

क्या बताऊं यारो … उस टाईम हेमा चाची तो बस कयामत ढा रही थी.

चाची ने मुझसे कहा- भास्कर जाओ बाथरूम में … अब तुम भी नहा लो, मैं तुम्हारे लिए अदरख वाली चाय बना देती हूँ.

फिर मैं भी बाथरूम में नहाने चला गया.

बाथरूम के अन्दर खूंटी पर सफेद नाईटी के साथ साथ हेमा चाची की काली रंग की चड्डी और ब्रा टंगी हुई थी, जिन्हें हेमा चाची ने उतार कर टांगा था.

मैंने हेमा चाची की चड्डी को उस खूंटी से उतार कर अपने लंड पर फेरना शुरू कर दिया और ब्रा को सूंघने लगा.

भाई उस टाईम मेरे अन्दर सेक्स का ऐसा भूत सवार था कि मेरा खुद पर कोई बस नहीं था. मैंने मुठ मार कर अपनी मुठ के पानी को बाहर टपकने से रोकने के लिए हेमा चाची की चड्डी से पौंछ लिया.

फिर हेमा चाची की ब्रा की खुशबू लेते हुए उनकी चूचियों का ध्यान करने लगा.

मैं तो जैसे दीवाना ही हो गया था. जवानी क्या होती है पहली बार मुझे उस दिन पता चली थी.

मैं नहा लिया और मेरे पास मेरी भीगी हुई ब्लू टी-शर्ट और काले पजामे के अलावा कुछ नहीं था.

मैंने तौलिया मांगने के लिए हेमा चाची को आवाज लगाई.

हेमा चाची वही तौलिया लाईं … जिससे उन्होंने अपना जिस्म पौंछा था.

मैंने बाथरूम के गेट को हल्का सा खोल रखा था. हेमा चाची आईं और सीधा बाथरूम के अन्दर तक घुस आईं

मैं उस वक्त बिल्कुल नंगा था, मैंने चड्डी भी नहीं पहनी हुई थी.

हेमा चाची मुझे ऊपर छाती से लेकर नीचे लंड तक एकदम कामुक और वासना भरी नजरों से घूरने लगीं.

मैंने शर्म के मारे हेमा चाची के हाथों से तौलिया ली और अपने लंड के ऊपर उसे कर लिया.

फिर हेमा चाची मुझे घूरती हुई बाथरूम से बाहर चली गईं.

पहले तो मैंने उस तौलिया को जी भर कर सूंघा … क्योंकि उस तौलिया से हेमा चाची ने अपना सेक्सी जिस्म जो पौंछा था.

फिर मैंने उसी तौलिया से अपना बदन पौंछा और उसे लपेट कर बाहर आ गया.

मेरे बाहर आते ही चाची ने मुझे अदरख वाली चाय पकड़ा दी और कहा- मैं तुम्हारे कपड़े वाशिंग मशीन में सुखा देती हूँ … कुछ ही देर में वो पहनने लायक हो जाएंगे.

मैंने कहा- ठीक है चाची जैसा आप चाहो, लेकिन थोड़ा जल्दी करना … कोई आ न जाए.

हेमा चाची हंसी और बोलीं- चिंता मत करो … तुम्हारे चाचा जरूरी काम से गांव गए हैं और वो रात तक ही आएंगे. मुझे मालूम है कि कल उन्हें एक हफ्ते के लिए दिल्ली जाना है, तो वो आज अपना पूरा काम निपटा कर ही आएंगे.

चाची के मुँह से ये सुनकर मेरी आस जाग उठी कि अगले एक हफ्ते तक हो सकता है कि मेरे लंड की शादी चाची की चूत से हो जाए.

चाची गांड मटकाती हुई मेरे कपड़े लेकर वाशिंग मशीन की तरफ चली गईं और मैंने चुदाई की इस हसीन कल्पना में डूबकर चाय पीकर खत्म की. अब मैं उनके आने का इन्तजार करने लगा.

हेमा चाची जल्दी ही मेरे कपड़ों को वाशिंग मशीन में सुखा कर ले आईं. मैंने अपने कपड़े पहने और हेमा चाची को बाय बोलकर अपने घर . पड़ोसन चाची के साथ बारिश में सेक्सी मस्ती करने के बाद मैं अब उनकी चूत में लंड पेलना चाहता था; मौके की तलाश में था

उस दिन छत पर हेमा चाची के साथ चिपककर झड़ने का खुमार मेरे दिमाग से अब तक नहीं उतरा था.

मैं दिन रात बस हेमा चाची के कामुक हुस्न के बारे में सोचता रहता और हेमा चाची के नाम की मुठ मार लिया करता था.

जब भी मैं हेमा चाची से बात करता था, तब हेमा चाची भी मुझे कामुक और हवस भरी नजरों से देखती थीं.

कभी कभी तो हेमा चाची मुझसे वो छत पर लिए मजे के बारे में पूछती रहती थीं और मैं बस शर्माने का नाटक कर देता था.

फिर एक रात करीब 10:30 बजे मैंने अपने घर के मैंने दरवाजे के खटकने की आवाज सुनी.

उस दिन मेरे परिवार समेत मोहल्ले के ज्यादातर लोग एक शादी में गए हुए थे और मैं उस दिन घर पर अकेला 

मैंने दरवाजा खोला तो सामने पाया कि काले रंग की नाईटी पहने और अपने सिर पर सफेद रंग का दुपट्टा ओढ़े हेमा चाची खड़ी थीं.

उन्हें देखकर तो मानो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मैं तो बस हेमा चाची की तिरछी भौंहों, कटीले नैनों और रसीले होंठों को देखता ही रह गया.

तभी हेमा चाची बोलीं- क्या हुआअब मुझे ताकते ही रहोगे या अन्दर भी आने दोगे?

उनकी ये सुनकर मैं सकपका गया और हेमा चाची को घर में अन्दर बुला लिया.

घर में कोई नहीं था और घर के सभी कमरे बंद पड़े थे, सिवाय मेरे कमरे के.

मैं हेमा चाची को सीधा अपने ऊपर वाले कमरे में ले गया. मेरे कमरे की टीवी में एक हॉलीवुड की फिल्म चल रही थी, जिसमें उसी समय हीरो और हीरोईन के बीच कुछ अतरंग सीन चलने लगे.

ये देखकर मैं हैरान हो गया और उसे हटाने के लिए जल्दी से यहां-वहां रिमोट ढूंढने लगा.

ये देखकर हेमा चाची हंस पड़ीं और बोलीं- ये तुम्हें क्या हो गया … चलते रहने दो न!

मैंने कहा- अरे वो सीन …

चाची ने मेरी बात काटते हुए कहा- अब हॉलीवुड फिल्मों में तो ये सब आम बात है … और हम तो अच्छे दोस्त है न, तो हम दोनों के बीच में किस बात की शर्म!

ये सुनकर मैं मुस्कुरा उठा … क्योंकि ये हेमा चाची का एक इशारा था कि आज हेमा चाची मस्त मूड में हैं.

हम दोनों बैठ गए. मैं चाची से पानी के लिए पूछा, तो उन्होंने मना कर दिया और मुझसे बैठने के लिए कह दिया.

मैंने हेमा चाची के सामने बैठते हुए उनसे पूछा कि इतनी रात को आपने यहां आने का कष्ट क्यों किया … मुझे अपने घर बुला लिया होता.

हेमा चाची बोलीं-   मेरे घर की टीवी में क्या हो गया है … उसमें शायद कुछ सैटिंग गड़बड़ हो गई है, वो चल ही ही नहीं रहा है. क्या तुम उसे ठीक कर दोगे?

मैंने कहा- अरे चाची क्यों नहीं … आप तो बस आधी रात को भी हुकुम करोगी न, तो ये बंदा सीधा आपके दरवाजे पर खड़ा मिलेगा.

ये सुनकर हेमा चाची हंस पड़ीं और बोलीं-  तुम भी न!

मैंने हेमा चाची से कहा- चलो चाची, मैं आपकी टीवी की सैटिंग ठीक कर देता हूँ.

चाची- अरे बाद में ठीक कर देना, तब तक मैं यहीं तुम्हारे पास टीवी देख लेती हूँ.

मैंने हेमा चाची से पूछा- चाची आपको क्या देखना है? बताओ मैं लगा देता हूँ.

हेमा चाची ने एक रोमान्टिक सीरियल लगवाने की पेशकश की … और मैंने खड़े होकर रिमोट खोजा और वो सीरियल लगा दिया.

उस सीरियल में लड़का लड़की के बेड पर सेक्स करने वाला सीन चल रहा था. मैं अभी भी खड़ा था और टीवी पर इस सीन को देखकर मेरा लंड तेजी से खड़ा हो गया.

हेमा चाची वो सीन बड़ी ही कंटीली मुस्कान देते हुए देखे जा रही थीं.

हेमा चाची ने मेरी तरफ नजर डाली और अपनी कटीली निगाहें मेरे पजामे पर लंड वाले हिस्से की तरफ घुमा दीं.

लंड खड़े होने के कारण मेरा पजामा उस जगह से उठा हुआ था.

मैं शर्मा गया और पलंग पर बैठ गया.

ये देखकर हेमा चाची हंसने लगीं.

हेमा चाची को देख कर मेरे अन्दर से हवस का जैसा ज्वालामुखी फूट रहा था और मैं बेकाबू होता जा रहा था.

मुझे ये भी डर था कि कहीं घर वाले आ गए और उन्होंने मुझे और हेमा चाची को मेरे कमरे में एक साथ देखा … तो वो क्या सोचेंगे?

इसी सोच और डर को लेकर मैंने चाची को उनके घर ले जाना ज्यादा ठीक समझा.

फिर मैंने हेमा चाची से कहा- चलो न चाची, पहले मैं आपके टीवी की सैटिंग ठीक कर देता हूँ.

हेमा चाची बोलीं- रिलेक्स … बाद में कर देना.

मैंने बात बनाते हुए कहा- चाची अगर घर वाले आ गए, तो वो मुझे किसी न किसी काम में लगा देंगे … फिर मैं आपका टीवी ठीक करने कैसे आ पाऊंगा?

हेमा चाची ने कहा- अरे हां … तुम्हारी ये बात तो बराबर है. चलो पहले मेरे घर चलकर मेरा टीवी ठीक कर दो.

फिर मैंने अपने कमरे का टीवी बंद किया और थोड़ा नीचे झुक गया ताकि मेरा खड़ा और तना लंड थोड़ा शान्त हो जाए.

पर हेमा चाची जैसी हुस्न की मल्लिका के वहां होते भला मेरा लंड कैसे शान्त हो सकता था.

फिर हम दोनों मेरे कमरे से बाहर आकर सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे.

मेरे अन्दर सेक्स की आग अभी भी भड़क रही थी. हेमा चाची मेरे आगे थीं और मैं उनके पीछे था.

तभी सीढ़ियों से नीचे उतरते वक्त मेरी नजर सीधी हेमा चाची के गांड पर पड़ी, जो सीढ़ियों से उतरते वक्त बड़ी ही मस्ती से थिरक रही थी. मेरी नजरें उनके मटकते चूतड़ों पर जम गई.

मुझे लगा कि चाची अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही मटका रही हैं. मगर मुझे इससे क्या … मुझे तो मस्त मजा आ रहा था.

फिर सीढ़ियों से नीचे उतरकर हेमा चाची आगे आगे चलती हुई घर के मुख्य दरवाजे की तरफ जा रही थीं और उन्होंने अपनी नाईटी को आगे पेट की तरफ से कस कर पकड़ रखा था.

 देखा कि उस काली सिल्की नाईटी से हेमा चाची की घुमावदार गांड अच्छी तरह से उभर कर नजर आ रही थी.

चूंकि नाईटी पतली थी, तो उसमें हेमा चाची की गांड के बीच की लकीर भी उभर रही थी.

अब ये बात साफ़ थी कि चाची खुद ही अपनी गांड को दिखाने के लिए ऐसा कर रही थीं और अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थीं.

मगर वो कितना हॉट सीन था … ओये होये होये … यारों क्या बताऊं. उस रात को तो मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं अपनी जवानी के सबसे खुशनुमा पलों में जी रहा हूँ.

फिर मैं और हेमा चाचा उनके घर पर पहुंचे. घर में चाची अकेली ही थीं, क्योंकि चाचा भी शादी में गए हुए थे.

मैंने पूछा- चाची आप शादी में नहीं गईं?

उन्होंने कहा- मैं गई तो थी … लेकिन वहां मेरा मन नहीं लगा और मैं सोनम के साथ जल्दी आ गई.

ये सोनम भाभी हमारे मोहल्ले में ही रहती हैं.

मैंने कहा- चाची, आपका मन क्यों नहीं लगा शादी में? मोहल्ले के ज्यादातर लोग तो वहीं हैं.

हेमा चाची ने मेरी आंखों में देखा और बोलीं-नहीं थे वहां, इसीलिए मेरा मन नहीं लग रहा था.

ये सुनकर और हेमा चाची के कामुक चेहरा देख कर मेरा लंड फिर से फड़फड़ाने लगा.

हेमा चाची मुझे बार बार इशारे कर रही थीं कि वो मुझसे प्यार करने लगी हैं … लेकिन मैं सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनने का नाटक करने में लगा था.

फिर हेमा चाची मुझे अपने बेडरूम में ले गईं.

मैं पहली बार हेमा चाची के बेडरूम में आया था. मेरा शरीर हवस की आग में तप कर गर्म हो रहा था लेकिन मैंने खुद पर काबू पा रखा था.

हेमा चाची के बेडरूम के टीवी को मैंने चालू किया.

तो देखा कि टीवी की सैटिंग वाकयी थोड़ी खराब थी, जैसे टीवी का कलर और कुछ आवाज की सैटिंग की समस्या इत्यादि.

मैंने सैटिंग को ठीक करना शुरू कर दिया.

मैं टीवी ठीक करता जा रहा था और हेमा चाची से बातें करता जा रहा था.

मैंने हेमा चाची से कहा- चाची, थोड़ा पानी पिला दो.

हेमा चाची पानी लेने किचन में गईं, तो मैंने टीवी के पीछे की तारों को गलत जोड़ दिया, जिससे टीवी धुंधली आने लगी. जैसे ही हेमा चाची पानी लेकर आईं, तो मैंने आधा ग्लास पानी पिया. थोड़ा सा पानी मेरे मुँह से बाहर निकलकर मेरी ठोड़ी से गुजरकर गले से होता हुआ मेरी छाती पर रिसने लगा.

ये सीन देखकर हेमा चाची और उत्तेजित हो गईं. हेमा चाची मुझे लगातार घूरे जा रही थीं.

फिर मैंने हेमा चाची से कहा कि चाची देखो मुझे लगता है कि टीवी के पीछे के तारों में कुछ दिक्कत है.

मैंने हेमा चाची को टीवी के पास ले जाकर कहा कि देखो चाची मैं आपको सिखा देता हूँ कि टीवी की तार कैसे लगाते हैं.

चाची को मैंने अपने आगे खड़ा करके टीवी के तारों को इधर उधर सैट करने लगा.

हेमा चाची के इतने नजदीक आकर मैं तो एकदम से उत्तेजित हो गया था.

मेरी नजर तारों से ज्यादा हेमा चाची की मोटी चूचियों पर थी. इसके साथ ही बगल से हेमा चाची के चेहरे और रसीले होंठों को देखने का जो मौका मिला था, वो मैं गंवाना नहीं चाहता था.

मैंने जानबूझकर अपना लंड हेमा चाची की गांड से थोड़ा टच कर दिया और तभी न चाहते हुए भी मेरे मुँह से ‘आह्ह ..’ की आवाज निकल गई.

मेरे मुँह से ‘आह्ह ..’ की आवाज निकलते ही मैं बहुत डर गया था, लेकिन तभी हेमा ने पीछे मुड़कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मुझसे कसके चिपक गईं.

मैंने भी हेमा चाची को जोर से अपनी बांहों में जकड़ लिया और हेमा चाची के हसीन जिस्म पर अपने हाथ फेरने लगा. मैं अपने हाथ हेमा चाची की पीठ पर लगातार फेरे जा रहा था.

अब हम दोनों के अन्दर सेक्स की आग बहुत ज्यादा भड़क चुकी थी.

तभी मैंने हेमा चाची को बिस्तर पर पटक लिया. उनके सिर से दुपट्टा निकाल दिया और हेमा चाची के होंठों को कस के चूम लिया.

ओये होये होये … क्या मस्त मजा आया था यार … ऐसा करते समय समझो मेरा तो काम ही हो गया था.

अब हम दोनों सेक्स के खुमार में बेकाबू हो चुके थे. हेमा चाची मेरी गर्दन पर किस कर रही थीं और अपने हाथों को मेरी छाती पर फेर रही थीं.

मैं अपने हाथों से हेमा चाची की मोटी चूचियों को मसलने लगा और उनकी गांड को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा.

क्या बताऊं यार … मुझे उस रात क्या मस्त मजा आने लगा था … शब्दों में बयान नहीं कर सकता.

हम दोनों करीब 15 मिनट तक बिना कपड़े उतारे इसी तरह ऊपर ही ऊपर से सेक्स कर रहे थे. मैं अपने दाएं हाथ की उंगली को हेमा चाची की गांड के बीच की लकीर पर फेर रहा था. मेरा मन तो कर रहा था कि हेमा चाची की गांड में उंगली कर दूं … पर पता नहीं मुझे लगा कि ऐसा करना ठीक नहीं रहेगा.

फिर थोड़ी देर बाद मैं झड़ने की स्थिति में आ गया था. मेरे लंड का पानी मेरे लंड से बाहर आने ही वाला था कि तभी मैंने वहां बगल में पड़ा हुआ हेमा चाची के सिर का दुपट्टा उठाया और अपने लंड को बाहर निकाल कर उस दुपट्टे से लपेट लिया.

जब मैं झड़ा तो मेरे लंड का सारा पानी उस दुपट्टे पर आ गया. झड़ते समय मैं इतना मदहोश था कि अपने लंड को पजामे के अन्दर करना ही भूल गया.

अब मेरा मन सेक्स से हट चुका था और मैं अब हेमा चाची से चिपकने की बजाए उनसे दूर हट कर लेट गया.

हेमा चाची बार बार मेरे खुले लंड को ताके जा रही थीं. लेकिन अब हेमा चाची को भी चाचा के आने का डर सताने लगा था तो हेमा चाची बाथरूम में चली गईं और थोड़ी देर बाद वापस आ गईं.

चाची के बाथरूम से आते ही मैं बाथरूम में चला गया.

जैसे ही मैं बाथरूम में घुसा, तो मैंने देखा कि बाथरूम में खूंटी पर हेमा चाची की गुलाबी रंग की चड्डी टंगी थी.

शायद ये हेमा चाची की वही चड्डी थी, जो अभी अभी हेमा चाची उतार कर टांग गई थीं.

मैंने जल्दी से बाथरूम को अन्दर से बंद कर लिया और हेमा चाची की उस चड्डी को लेकर सूंघने लगा. फिर मैंने उस चड्डी को अपने पजामे की जेब में छिपा लिया और मुँह हाथ धोकर कमरे में हेमा चाची के पास चला गया.

वहां कमरे में हेमा चाची मेरा इंतजार कर रही थीं.

मेरे वहां पहुंचते ही हेमा चाची बिस्तर से खड़ी होकर मेरे पास आईं और मेरे गले लग गईं.

चाची बोलीं- तुम्हारे साथ उस दिन छत से भी ज्यादा मजा आया.

हेमा चाची का हाथ मेरे लंड के पास था. मैं डरा हुआ था कि कहीं हेमा चाची का हाथ मेरे पजामे की जेब पर ना चला जाए, जहां मैंने हेमा चाची की चड्डी छिपा रखी थी.

फिर मैंने हेमा चाची का हाथ पकड़कर मेरे लंड के पास से उठाकर अपनी छाती पर रख दिया और मैंने अपने दोनों हाथों को हेमा चाची की गांड पर दबा कर उनके चूतड़ों को मसल दिया.

हेमा चाची की गांड पर हाथ मलते समय मैंने महसूस किया कि हेमा चाची अन्दर से बिल्कुल नंगी थीं, उन्होंने नाईटी के अन्दर कोई चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

मैं पूरी तरह से समझ गया कि हेमा चाची ने ये गुलाबी रंग की चड्डी अभी अभी ही उतारी थी, जिसे मैंने बाथरूम से लेकर अपने पजामे की जेब में छिपा रखा था.

थोड़ी ही देर मैं मोहल्ले में सब लोगों के शादी से लौट आने की हलचल सुनाई दी और हम दोनों जल्दी से सतर्क हो गए.

हेमा चाची ने जल्दी से अपने घर के मैंने दरवाजे की कुंडी खोल दी. जैसे ही चाचा अन्दर आने के लिए घुसे तो मैं जल्दी से टीवी के पास जाकर तारों को ठीक करने लगा.

चाचा कमरे में आए और उन्होंने मुझे देखकर कहा- अरे भास्कर कैसा है … तू शादी में क्यों नहीं आया?

मैंने कहा- चाचा वो मेरे कॉलेज में टेस्ट परीक्षाएं आने वाली हैं, तो उसी की तैयारी में लगा था. फिर आपका टीवी खराब था, तो हेमा चाची ने मुझे ठीक करने बुला लिया.

फिर टीवी ठीक करके मैं वहां से जाने लगा, तो चाचा बोले- अरे बैठ जा … बाद में चले जाना.

मैंने कहा- नहीं चाचा, वो मुझे पढ़ाई करनी है … और घर पर सब आने वाले होंगे, मैं घर खुला छोड़ कर आ गया था.

ऐसा कहकर मैं जल्दी से अपने घर चला गया.

मेरे घर वाले भी शादी से लौट आए थे. मैं जल्दी से अपने कमरे में चला गया और दरवाजा अन्दर से बंद करके अपनी जेब से हेमा चाची की चड्डी निकालकर उसे सूंघने लगा.

मुझे चाची की चुत के निकले मादक मदन रस की मस्त महक पागल करने लगी थी.

पूरी रात भर सोते समय मैं चाची की चड्डी को अपने जिस्म पर मलता रहा और अपने लंड पर लपेटकर सो गया.

दोस्तो, ये मई का महीना था. इसलिए मुझे पूरा नंगा लेट कर चाची की चड्डी को अपने बदन में रगड़ने से एक अजीब सी मस्ती छा रही थी.

मेरा लंड खड़ा था गर्मी से पसीना मेरे बदन से चुआ जा रहा था … मगर मुझे बस चाची का महकता बदन उनकी चूचियों की रगड़न और चूमने से मेरे मुँह के अन्दर गई उनकी लार ही मदहोश करे जा रही थी.

उस रात दो बार मुठ मार कर चाची की चड्डी में ही अपना रस छोड़ा और सो गया.

अब मेरा और चाची का नैन मटक्का चलने लगा था.

जब तब मौका मिलते ही मैं चाची से चिपक जाता था और उन्हें चूम लेता था.

फिर एक बार शाम को हम सब मोहल्ले वाले बैठ कर बातें कर रहे थे. हमारे मोहल्ले में हर शाम इसी तरह बड़े छोटे साथ बैठते थे.

तभी हेमा चाची के पति यानि पड़ोस के चाचा आ गए.

उन्होंने मुझे एक तरफ बुलाया और बोले- मैं 2 दिन के लिए काम से बाहर जा रहा हूँ. तेरी हेमा चाची घर पर अकेली रह जाएंगी.

वहां पास ही मेरे पापा बैठे थे, उन्होंने सुन लिया. वे बोले- तो क्या हुआ … मोहल्ला तो भरा हुआ है और भला घर में अकेले रहने में कैसा डर?

चाचा बोले- अरे घर बहुत बड़ा है और हेमा को अकेले घर में डर लगता है … इसीलिए कोई रात को हेमा के पास रुक जाएगा, तो अच्छा रहेगा.

पापा ने बोला- ठीक है हेमा के पास ये चला जाया करेगा.

तभी चाचा बोले- मैं इसी लिए तो  बोल रहा हूँ … वो चला जाएगा.

उधर मेरे पापा ने भी मेरी ओर से हामी भर दी.

यह सुनकर मेरी तो जैसे लॉटरी निकल गई थी. मैं मन ही मन बहुत खुश था.

उस वक्त मैं 20 साल का हो गया था और मोहल्ले में सबसे कम उम्र के लड़कों में मैं ही था … बाकी सब कुछ ज्यादा ही छोटे थे.

अब मुझे बेसब्री से कल रात का इंतजार था.

मैं शाम को बाजार से रेजर ले आया और सुबह नहाते वक्त मैंने अपने लंड के बालों को बिल्कुल साफ कर लिया.

मेरा पूरा दिन रात के इंतजार में ही गुजरा.

रात के करीब 8:30 बजे होंगे … मैं उस समय बाहर बैठा था. तभी हेमा चाची ने मुझे आवाज लगाई और बोलीं-  9 बजे घर पर आ जाना.

मैंने हां बोल दिया लेकिन घर वालों के कहे बिना मैं खुद से हेमा चाची के घर कैसे जा सकता था.

9 बज चुके थे, मैं इसी इंतजार में था कि घर के किसी सदस्य को याद आ जाए कि आज की रात मुझे हेमा चाची के यहां रुकना है.

फिर अचानक से मेरी दादी को याद आया और उन्होंने मुझे रात में रुकने के लिए हेमा चाची के घर भेज दिया.

दादी के कहते ही मैं तुरन्त हेमा चाची के पास पहुंच गया.

हेमा चाची ने मुझे घर के अन्दर खींच लिया और बोलीं- क्या  आने में बहुत देर लगा दी … क्या चाची की याद नहीं आ रही थी तुझे?

मैंने कहा- मैं किसी के कहने का इन्तजार कर रहा था चाची कि आपके घर चला जाऊं.

चाची मुस्कुरा दीं.

हम दोनों कमरे में चले गए. उनके कमरे में घुसते ही हेमा चाची को देखकर मेरे अन्दर हवस जागने लगी और मेरा लंड खड़ा हो गया. मेरा लंड इतना सख्त खड़ा था कि मेरे पजामे से साफ नजर आ रहा था. लेकिन अब मुझे इस सबकी कोई शर्म नहीं थी.

हेमा चाची ने मेरे खड़े लंड की ओर देखा और कहा- भास्कर बड़ी जल्दी में हो … आज तो पूरी रात पड़ी है. थोड़ा रिलेक्स हो जाओ.

मैं हंस दिया और मैंने धीरे धीरे अपने अन्दर की हवस शांत की.

हम दोनों बैठ कर इसी तरह बातें करने लगे. बातें करते करते 10 बज गए थे.

फिर हेमा चाची बाथरूम में नहाने चली गईं. काफी देर के बाद हेमा चाची नहा कर कमरे में आईं. उनके नहा कर आने के बाद मैं नहाने चला गया.

मैंने बाथरूम में देखा कि बाथरूम की मोरी में छोटे छोटे बाल पड़े थे. मतलब चाची ने चुत की झांटें साफ़ की थीं.

फिर मैंने बाथरूम के जंगले के ऊपर देखा कि एक लेडीज रेजर रखा हुआ था.

मैंने उसे उठाकर देखा तो उस लेडीज रेजर के किनारों में छोटे छोटे बाल फंसे पड़े थे और वो लेडीज रेजर गीला भी था.

तभी मैं समझ गया कि आज रात हेमा चाची सेक्स के पूरे मूड में हैं और उन्होंने अपनी चूत के बाल भी साफ कर लिए हैं.

अब मैं भी कमरे में आ गया था और मैंने अपनी टी-शर्ट उतार कर वहां पड़े सोफे पर रख दी. मैं ऊपर से पूरा नंगा था.

हेमा चाची ने ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था.

ये देख कर मैं थोड़ा सोच में पड़ गया और हेमा चाची से बोला- चाची, आप तो रात में ज्यादातर नाईटी ही पहनती हैं, लेकिन आज से ब्लाउज और पेटीकोट क्यों?

हेमा चाची बोली – भास्कर मुझे रात में ब्लाउज और पेटीकोट में ही कम्फर्टेबल रहता है, इसीलिए रात को बिस्तर पर सोते टाईम यही पहनती हूँ.

मैं लगातर हेमा चाची के ब्लाउज की तरफ देखे जा रहा था. ब्लाउज में हेमा चाची की मोटी चूचियां उभर कर नजर आ रही थीं.

मेरा लंड तो जैसे हेमा चाची को देख कर तना ही रहता था. अब मैं बिस्तर पर आ गया और हेमा चाची मेरे पास आकर मुझसे चिपक कर लेट गईं.

मेरा लंड खड़े खड़े इतना कठोर हो गया था, जैसे पजामे को फाड़ कर बाहर ही आ जाएगा.

उसी समय हेमा चाची ने मेरे लंड पर अपना हाथ रख दिया.

ओये होये होये … यारो वो पहली बार था, जब किसी औरत ने मेरे लंड पर अपना हाथ रखा था.

मैं भी अपने हाथ से हेमा चाची की चूची मसल रहा था.

इसी बीच हम दोनों एक दूसरे के होंठों को कसकर चूसे जा रहे थे.

फिर हेमा चाची ने अपना हाथ मेरे पजामे के अन्दर डाल दिया और मेरे लंड को पकड़कर पजामे के बाहर निकाल लिया.

अब तो मेरी  का ज्वालामुखी फूट पड़ा और मैंने जल्दी से अपना पजामा और चड्डी उतार दिया. मैं चाची के सामने पूरा नंगा हो गया. मेरा झांट रहित गोरा लंड चाची की आंखों में वासना जगाने लगा.

फिर मैंने हेमा चाची के ब्लाउज के हुक खोल दिए और हेमा चाची की मस्त गोल गोल चूचियां बाहर आ गईं.

उन्होंने ब्रा पहनी ही नहीं थी. हेमा चाची की गोरी चूचियों वाली छाती मेरे सामने पूरी नंगी थी.

मैं खुद को रोक न सका. मैंने अपना मुँह हेमा चाची की चूचियों पर लगा दिया और बारी बारी से दोनों मम्मों को चूसने लग.

हेमा चाची के मुँह से ‘आह्ह्ह आह्ह्ह ..’ की आवाजें निकल रही थीं.

इस समय मेरा लंड इतना सख्त हो गया था कि उसको अपनी आग शांत करने के लिए सिर्फ हेमा चाची की चूत में समा जाने का इंतजार था.

मैंने हेमा चाची के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और पेटीकोट को खींचकर पास पड़े सोफे पर फैंक दिया.

अब हेमा चाची नीचे से भी पूरी नंगी हो चुकी थीं. उन्होंने पैंटी भी नहीं पहनी थी.

हाय … हेमा चाची का नंगा गोरा बदन ऐसे लग रहा था कि जैसे मेरे सामने कोई जन्न्त की हूर नंगी पड़ी हो.

हेमा चाची ने कहा-  अब इंतजार नहीं होता, तुम जल्दी से अन्दर डाल दो.

मैंने भी पोजीशन बनाई और अपना लंड हेमा चाची की चिकनी चूत में घुसेड़ दिया.

हाय … क्या मस्त मजा आया था यारों उस रात. मैंने पहली बार किसी की चूत में अपना लंड डाला था. वो मजा मैं आज तक नहीं भूला हूँ.

लंड पेला तो चाची की मीठी सी सीत्कार निकल गई- आह मर गई.

मैंने अपने लंड को जोर जोर से तेजी के साथ हेमा चाची की चूत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया था.

उधर हेमा चाची लंड की चोटों से जोर जोर से सिसकारियां ले रही थीं- आह्ह्ह … आह्ह … अईईया … उईई ईया …

मैं अपना लंड हेमा चाची की चूत के अन्दर बाहर उतनी तेजी से कर रहा था कि हेमा चाची की आंखें ऊपर चढ़ गई थीं. ये देखकर मैं समझ गया था कि आज हेमा चाची को चरम सुख की अनुभूति हुई है.

अब मैं झड़ने वाला था और मैंने हेमा चाची की गोरी गोरी चिकनी दोनों जांघों को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और अपने लंड को पूरी ताकत के साथ हेमा चाची की चूत में जड़ तक घुसेड़ दिया.

ये सब मैंने इतनी ताकत के साथ किया था कि हेमा चाची कांपने लगी थीं और बिस्तर पर पड़ी पड़ी आहें और कराहें भर रही थीं. वो हल्के हल्के से हिचकी के जैसे झटके भी लेने लगीं.

ये शायद इसीलिए हुआ था क्योंकि मैंने अपना लंड हेमा चाची के काफी अन्दर तक जो डाल दिया था.

 

अब मेरे लंड का पानी निकलने ही वाला था … तो मैंने जल्दी से हेमा चाची के लाल रसीले होंठों को कसकर चूमा और अपने लंड का सारा सफेद पानी हेमा की चूत में निकाल दिया.

झड़ने के बाद मेरा मूड बदल गया और मैं चित होकर बिस्तर पर लेट गया. हेमा चाची का भी कंपकंपाना बंद हो गया. वो मेरे पास सरक आईं.

चाची मुझसे चिपक कर अपने हाथ को मेरी छाती पर मसलते हुए बोलीं-  ऐसा सुख मुझे आज तक नहीं मिला.

हेमा चाची उस चुदाई से बहुत प्रसन्न हो गई थीं. फिर हम दोनों काफी देर तक इसी तरह नंगी हालत में एक दूसरे से चिपके पड़े रहे.

आज चाची की चुत में मेरा लंड खेल आया था, इससे मैं और मेरा लंड बहुत हैप्पी हैप्पी फील कर रहा था

चाची की चुदाई के बाद मेरा लंड मुरझाया हुआ पड़ा था. हेमा चाची अपने कोमल हाथ से मेरे मुरझाए हुए लंड को पकड़ कर सहला रही थीं. मैं भी अपने एक हाथ से हेमा चाची की चूचियां मसल रहा था.

फिर इसी तरह से मात्र कुछ ही मिनटों में मैं धीरे धीरे फिर से मूड में आने लगा था. अब मेरा लंड धीरे धीरे फूलता जा रहा था, जिसे हेमा चाची अपने हाथ में महसूस कर रही थीं. शायद पांच मिनट में ही मेरा लंड फौलाद की तरह तन कर एकदम से कड़क हो गया था.

मैं पूरे मूड में आ चुका था, तो मैंने हेमा चाची को अपनी बांहों में जकड़ा और अपने ऊपर खींच कर लिटा लिया था.

इस पोजीशन में मेरी छाती से हेमा चाची की छाती और मेरे कड़क लंड से हेमा चाची की मुलायम चूत चिपकी हुई थी.

मैंने अपना खड़ा कड़क लंड हेमा चाची की कोमल चूत में पेल दिया.

चाची फिर से आहें भरने लगीं और कामुक सिसकारियां लेने लगीं.

तभी मेरी नजर ठीक सामने की ओर पड़ी जहां एक बड़े शीशे वाली शृंगार करने वाली मेज थी, जिसमें हेमा चाची की गांड नजर आ रही थी.

यह देख कर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया और अपने लंड को जोर जोर से हेमा चाची के चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

मैंने अपने दोनों हाथों से हेमा चाची के नंगे कूल्हों को पकड़कर चौड़ा किया, जिससे उस शृंगार करने वाली टेबिल के शीशी में हेमा चाची की गांड का छेद भी साफ साफ नजर आ रहा था.

ओये होये होये … यारो जवानी क्या होती है … ये मुझे उस रात ही पता चला था.

हेमा चाची जैसी सुन्दर हुस्न और सेक्सी जिस्म वाली औरत के साथ मैं बिस्तर में लेट कर सेक्स कर रहा था. ये सब मेरे लिए किसी बड़ी लॉटरी से कम नहीं था.

मैं इसी तरह हेमा चाची के साथ सम्भोग करते समय लंड को लगातार चूत में घुसाए जा रहा था और हेमा चाची के कूल्हों को बार बार चौड़ाकर शीशे में हेमा चाची के गांड के छेद को देखे जा रहा था.

इससे बेकाबू होकर मैंने हेमा चाची की गांड में उंगली कर दी.

अपनी गांड के छेद में उंगली पाकर हेमा चाची हल्के से उछल पड़ीं.

पर मैं रुका नहीं … हेमा चाची की चूत में मेरा लंड था और गांड में मेरी उंगली थी.

इस बार सेक्स करते समय मैं पूरा जोश में था. हेमा चाची की चूत में घुसे हुए मेरे लंड पर मुझे कुछ गीलापन सा महसूस हुआ. वो गीलापन हेमा चाची की चूत के पानी का था, क्योंकि इस बार मैंने इतने जोश के साथ सेक्स किया था कि मेरे झड़ने से पहले ही हेमा चाची झड़ गई थीं. इसीलिए मुझे मेरे लंड पर हेमा चाची के चूत के झड़े हुए पानी का रिसाव महसूस हो रहा था.

कुछ ही देर बाद मैं भी झड़ गया और मैंने अपने लंड का सफेद पानी पूरा का पूरा हेमा चाची की चूत के भीतर ही छोड़ दिया.

 लंड और हेमा चाची की चूत, दोनों आपस में उलझे पड़े थे और उनमें से चिपचिपा सफेद पानी बाहर रिसकर बिस्तर पर टपकने लगा था.

दूसरी बार झड़ जाने से हम दोनों की हवस शांत हो गई और इसी तरह चिपचिपे सफेद पानी में भीगी चूत और लंड के साथ हम दोनों कुछ मिनटों तक लेटे ही रहे.

फिर हेमा चाची ने अपने ब्लाउज से मेरे लंड और अपनी चूत को पौंछा और बिस्तर की चादर को हटा कर कमरे के कोने में पटक दिया. उस चादर पर मेरी और हेमा चाची की जिस्मानी भूख की चाशनी उस चादर पर एक निशानी के रूप में छप गई थीं.

ये उस रात हम दोनों का दूसरा सेक्स था

अब रात के दो बज चुके थे और हम दोनों को नींद आने लगी थी. उस टाईम मैं हल्की सी थकान महसूस कर रहा था. मैं और हेमा चाची नंगे ही एक दूसरे से लिपटकर सो गए.

करीब घंटे भर बाद लगभग 3 बजे मेरी आंख खुली, तो मैंने पाया कि हेमा चाची का हाथ मेरी छाती पर था और उनकी गोरी जांघ मेरे लंड पर रखी हुई थी. ये दृश्य देख कर मेरा मूड फिर से बन गया.

मैंने हेमा चाची को धीरे से हिलाकर जगाने की कोशिश की कि हेमा चाची भी उठ जाएं और हम तीसरी बार भी सेक्स का भरपूर मजा ले सकें.

लेकिन हेमा चाची गहरी नींद में थीं और वो नहीं उठीं.

पर मेरे अन्दर जो सेक्स की आग भड़क चुकी थी … उसे मैं कैसे रोकता.

मेरा लंड फूलकर एकदम सख्त हो गया था, जो हेमा चाची की जांघ के नीचे था.

फिर मैंने जैसे ही हेमा चाची की जांघ को हल्का सा नीचे खिसकाते हुए अपने लंड पर से हटाया, तो मेरा लंड एकदम से सीधा खड़ा हो गया.

मैं सोई हुई हेमा चाची की गोरी जांघ पर कभी अपना हाथ मलने लगा, तो कभी हेमा चाची की चिकनी चूत पर अपना हाथ फेर देता.

मगर चाची नहीं उठीं.

अब मैं हेमा चाची की चूचियों को चूसने लगा. कुछ देर तक यही सब करने के बाद मैं बिल्कुल गर्म हो गया था.

मैं हेमा चाची की चूत में भी उंगली करने लगा, जिससे मेरी उंगली पर चिपचिपा सा पानी लग गया. जिसे मैंने हेमा चाची के बालों से पौंछ लिया.

मैं लेटा लेटा अपने खड़े लंड की खाल को अपने हाथ से ऊपर नीचे करने लगा.

मेरा मूड बनता गया और मैंने इस प्रक्रिया को जोर जोर से दोहराना शुरू कर दिया; यानि मैं लेटे लेटे ही मुठ मारने लगा.

अब मेरे लंड का पानी छूटने वाला था.

तभी मैंने जल्दी से गहरी नींद में सोई हुई नंगी हेमा चाची को उल्टा लिटा दिया और अपने दोनों हाथों से हेमा चाची की गांड को चौड़ा दिया. इससे हेमा चाची की गांड का छेद स्पष्ट नजर आने लगा था.

मैंने अपने लंड को जोर से हिलाया और हेमा चाची की गांड के छेद के मुँह पर अपना लंड रख दिया.

फिर जो मेरे लंड का पानी छूटा, तो ऐसा छूटा कि मैंने अपने लंड का सारा का सारा सफेद पानी हेमा चाची की गांड के छेद में उड़ेल दिया.

इस प्रकिया को करते समय हेमा चाची बस हल्की सी हिलडुल रही थीं लेकिन गहरी नींद में होने की वजह से उठी नहीं.

मैं भी झड़ कर शांत हो गया था तो वहीं हेमा चाची की गांड पर अपना हाथ रख कर सो गया.

सुबह मैं अपने घर आ गया.

पिछली रात हुए चाची की चुत चुदाई और उनके साथ हमबिस्तर होने के बाद से मैं हेमा चाची की चाहत में डूबता जा रहा था. मेरे जेहन में सोते-जागते, दिन-रात सिर्फ और सिर्फ हेमा चाची का ही ख्याल आता रहता था. मुझे हेमा चाची के सेक्सी जिस्म की खुशबू और बहुत ही आकर्षित हुस्न का नशा पूरी तरह चढ़ चुका था.

जब अगली दोपहर में मैं बाजार से कुछ सामान लेकर आ रहा था तो गली में घुसते ही रास्ते में पड़ने वाले हेमा चाची के घर की तरफ मैंने निगाहें घुमाईं.

तो देखा कि उसमें ताला लगा हुआ था.

यह देखकर मैं थोड़ा हैरान था, क्योंकि मुझे बिना बताए हेमा चाची कहीं कैसे जा सकती थीं!

मैंने और हेमा चाची ने पिछली रात जम कर हम बिस्तरी और मजेदार सेक्स किया था, लेकिन कहीं बाहर जाने के बारे में हेमा चाची ने मुझे बताया क्यों नहीं?

मेरा ध्यान इस बात पर गया कि शायद आज चाचा आ गए होंगे और वो हेमा चाची के साथ कहीं बाहर चले गए होंगे.

मैं पूरा दिन हेमा चाची के घर की तरफ झांकता रहा क्योंकि मैं हेमा चाची का दीदार करने के लिए बेताब था.

मेरा मन हेमा चाची को देखने के लिए इस कदर मचला जा रहा था कि जैसे मैं चाची से मिलते ही सेक्स करूंगा.

लेकिन वो दिन मेरे लिए बहुत बुरा था क्योंकि रात भर मैं हेमा चाची के इंतजार में ताक लगाये बैठा रहा पर मेरी हेमामालिनी रात में भी नहीं आई थीं.

अगली सुबह मैंने पाया कि हेमा चाची के घर का दरवाजा खुला पड़ा था और चाची घर के बाहर का चबूतरा साफ कर रही थीं. उस वक्त हेमा चाची ने गुलाबी रंग की नाईटी पहन रखी थी और सिर पर काला दुपट्टा डाल रखा था.

आय हाय … क्या कयामत माल लग रही थीं … चाची उन कपड़ों में.

मैं तो बस हेमा चाची को सफाई करते देखता ही रहा. जब चाची वाईपर से चबूतरे का पानी नीचे की ओर झुक कर खींच रही थीं, तो उस वक्त गुलाबी नाईटी से उनकी गांड मस्त उभर कर नजर आ रही थी. और तो और … गांड के बीच की लकीर तो मेरे तन बदन में आग लगा रही थी.

जैसे ही हेमा चाची चबूतरा साफ करके पीछे मुड़ीं … तो उन्होंने मुझे देख लिया और मुझे देख कर मुस्कान बिखेर दी.

हाय … क्या कातिल मुस्कान थी … कसम से हेमा चाची के कामुक चेहरे को चाटने और उनके रसीले होंठों को चूसने का मन कर रहा था.

मैंने आस-पास नजर घुमाई, तो वहां कोई नहीं था.

फिर मैंने हेमा चाची को एक फ्लाईंग किस दे दी.

हेमा चाची ये देखकर मुस्काईं और यहां वहां देखने लगीं.

जब उन्हें भी कोई नजर नहीं आया … तो उन्होंने भी मुझे फ्लाईंग किस फेंक दिया.

होये होये … उस वक्त तो मेरे मन में जैसे लड्डू फूट रहे थे.

फिर जैसे ही हेमा चाची को चाचा के बाहर आने की आहट महसूस हुई, तो वो जल्दी से अन्दर चली गईं.

जैसे ही चाचा बाहर आए … तो मैं भी वहां से टरक लिया.

मैं समझ गया था कि अब चाचा काम से लौटकर घर आ गए हैं. अब कई दिनों तक मैं और हेमा चाची सेक्स नहीं कर पाएंगे.

कई दिनों तक मैं हेमा चाची के साथ सोने के इंतजार में तड़पता रहा. मुझे पक्का यकीन था कि मेरी ही तरह हेमा चाची भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए बेताब हो रही होंगी, लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे.

इसी बीच में रात को सोते समय हेमा चाची की उस चड्डी को सूंघ लेता था, जिसे मैं हेमा चाची के बाथरूम से छिपा लाया था.

फिर 8 दिनों बाद एक बार फिर मैंने हेमा चाची के घर के बाहर ताला लगा पाया.

मैं फिर से निराश हो गया.

हेमा चाची की याद और उनकी चाहत की तड़प में मैं रोज शाम को छत पर जाकर अपने फोन में उनके फोटो देखता रहता था; उन फोटो को देख देख कर अपने लंड को सहलाता रहता था.

अगले दोपहर हेमा चाची एक बैग लेकर अपने घर पर आईं.

उन्हें देख कर मैं बहुत खुश हुआ.

हेमा चाची ने मुझे देख लिया और इशारा करते हुए मुझे अपने घर बुला लिया.

मैं फटाक से वहां पहुंच गया.

उस समय गली में बाहर कोई और नहीं था, तो मेरे घर में घुसते ही हेमा चाची ने मेन गेट अन्दर से बंद कर लिया.

अब हेमा चाची ने अपने कमरे में घुसते ही बैग पटक दिया और धड़ाम ने अपने बिस्तर में चित लेट गईं.

उस वक्त हेमा चाची ने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी.

बिस्तर पर लेटते वक्त हेमा चाची ने अपना पल्लू हटा दिया था, जिससे हेमा चाची का ब्लाउज और सेक्सी चिकना गोरा पेट दिखाई दे रहा था.

यह देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया

फिर मैंने कहा- चाची लगता है आप सफर करके बहुत थक गई हैं, कहां गई थीं आप … और चाचा कहां गए?

हेमा चाची बोलीं- हां भास्कर, मैं और तुम्हारे चाचा एक रिश्तेदार के घर गए थे. उधर से लौटते वक्त चाचा को काम से बाहर जाना था, तो वो वहीं से निकल गए और मैं अकेली यहां आ गई.

यह सुनकर मैं बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि अब मेरे इतने दिनों से सेक्स करने की भूख मिटने वाली थी.

मैंने मस्ताने अंदाज में हेमा चाची से कहा- चाची, आप चाहो तो क्या मैं आपकी थकान मिटा दूं?

हेमा चाची हंस पड़ीं और बोलीं- क्या भास्कर … ये भी कोई पूछने की बात है? मैंने मेरी थकान और इतने दिनों की प्यास बुझाने के लिए ही तो तुम्हें यहां बुलाया है.

ये सुनकर तो जैसे मेरा लंड एकदम से तन गया था. ये हेमा चाची की ओर से खुली इजाजत थी कि मैं जो चाहूँ, हेमा चाची के साथ कर सकता हूँ. मैंने झट से अपनी टी-शर्ट उतार दी और चित पड़ी हेमा चाची की मोटी और गोल गोल चूचियों से अपनी छाती मिलाकर उनके ऊपर चढ़ गया.

मेरे नीचे चुदासी पड़ीं हेमा चाची ने मुझे कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया और कुछ मिनटों तक हम दोनों इसी तरह लेटे लेटे बातें करते रहे.

बातों से मुझे पता चला कि चाचा अब दो-तीन दिनों के लिए घर से बाहर हैं. इस वजह से मेरी और हेमा चाची की ये दो-तीन रातें रंगीन होंगी.

हम दोनों को अब तक और भी अधिक सेक्स चढ़ गया था.

हेमा चाची ने मेरा लंड पकड़ने के लिए मेरी जींस की पैंट के अन्दर हाथ डाल दिया.

मेरी जींस की पैंट बहुत टाईट थी. हेमा चाची को अन्दर हाथ डालने में दिक्कत हो रही थी, तो मैंने अपनी जींस का हुक खोल दिया.

चाची ने अपने हाथ से मेरी जींस की चैन नीचे खोली और मेरे खड़े गर्म लंड को बाहर निकाल कर अपने हाथ से मेरे लंड की खाल को ऊपर नीचे करने लगीं.

इतने दिनों बाद चाची के हाथ से लंड सहलवाने में मस्त मजा आ रहा था.

मैंने अपने एक हाथ से हेमा चाची की चूचियां दबाना शुरू कर दीं.

फिर मैंने हेमा चाची को साड़ी खोलने को कहा, तो हेमा चाची ने साड़ी के साथ साथ पेटीकोट भी उतार दिया.

चाची ने नीचे सिर्फ सफेद रंग की जालीदार चड्डी पहन रखी थी, जिसमें लाल लाल धारियां बनी थीं.

मैंने हेमा चाची की चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया. मेरा हाथ हेमा चाची की चूत पर आ गया था, जिस पर मैं हल्के से बाल महसूस कर रहा था.

चाची की फुद्दी कुछ फूली हुई थी.

अपनी चूत पर मेरे हाथ के स्पर्श से हेमा चाची सेक्सी सिसकारियां लेने लगीं और आवाजें निकालने लगीं- आह्ह्ह आह्ह्ह!

चाची की मादक आवाजें सुनकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया.

मैंने हेमा चाची के ब्लाउज के हुक को खोल दिए.

हेमा चाची ने ब्लाउज के नीचे वही चड्डी की मैचिंग कलर की ब्रा पहनी हुई थी.

जैसे ही मैंने पीछे से ब्रा का हुक खोला, तो हेमा चाची की मस्त गोल गोल फूली हुई चूचियां बाहर की ओर फुदकने लगीं.

मेरा मुँह उसी पल हेमा चाची की चूचियों के निप्पलों को चूसने में व्यस्त हो गया था और अब मेरा हाथ हेमा चाची की सेक्सी गांड पर जम गया था.

मैंने अपनी जींस और चड्डी दोनों उतार दी. मैं और हेमा चाची दोनों ही बिल्कुल नंगे हो गए थे.

अपना लंड फटाक से मैंने हेमा चाची की चूत में घुसेड़ दिया. हेमा चाची तो बस सेक्स भरी आवाजें निकाले जा रही थीं

मस्त चुदाई होने लगी थीं मैं हुम्म हुम्म करके चाची की चुत में लंड पेले जा रहा था और चाची भी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर लंड से लिहा ले रही थीं.

कुछ मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई करते करते मैं अब झड़ने वाला हो गया था.

मैंने हेमा चाची से कहा- चाची लंड का सफेद पानी चूत के अन्दर ही छोड़ दूं या बाहर निकाल दूं?

हेमा चाची ने कहा- बाहर ही छोड़ दो … वैसे तूने पहले तो ये पूछा ही नहीं था. मुझे गोलियां लेनी पड़ी थीं.

मैंने अपने लंड को जल्दी से हेमा चाची की चूत से निकाला और अपने लंड का सारा पानी हेमा चाची की चूत के ऊपर ही बरसा दिया.

मैंने हांफते हुए कहा- चाची, उस समय मुझे याद ही नहीं रहा तय कि आपसे कुछ पूछ सकूं.

चाची ने कुछ नहीं कहा, बस मेरी पीठ पर हाथ फेर कर मुझे सहलाती रहीं.

जब मैं चाची के ऊपर से उठा, तो मेरे लंड का सफेद पानी हेमा चाची की चूत के छोटे छोटे बालों पर टपका हुआ साफ दिखाई दे रहा था.

मैं झड़ने के बाद हेमा चाची के बगल में बिस्तर में चित लेट गया और वहीं पड़ा रहा.

थोड़ी देर बाद हेमा चाची उठीं और उन्होंने पलंग के तकिए से खोली उतार ली.

उस खोली से चाची ने अपनी चूत पर पड़े मेरे लंड के सफेद पानी को पौंछा और उसी खोली से मेरे लंड को भी पौंछ कर साफ़ कर दिया.

हेमा चाची की हवस की आग अभी शांत नहीं हुई थी. वो मेरे ऊपर लेट गईं और मेरी छाती को चूमने लगीं.

लेकिन झड़ने के बाद मैं थोड़ा शांत था, मेरे मूड में सेक्स चढ़ने में थोड़ा टाईम था.

फिर हेमा चाची मुझसे चिपक कर मेरे बगल में लेट गईं और उन्होंने मुझसे कहा-  तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैंने कहा- नहीं चाची, आपके रहते मुझे किसी गर्लफ्रेंड की जरूरत नहीं है.

हेमा चाची ये सुनकर मुस्कुरा दीं और बोलीं- क्या मुझसे मिलने से पहले तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं थी … बड़ी अजीब बात है . तुम अच्छे दिखते हो, फिर भी गर्लफ्रेंड नहीं है?

मैंने कहा- हां चाची मैं सही कह रहा हूँ.

फिर हेमा चाची ने मुझसे कहा- क्या तुमने कभी ब्लू फिल्में देखी हैं?

मैं थोड़ा चौक गया क्योंकि अगर कोई औरत ब्लू फिल्मों के बारे में बात करे तो यकीनन कोई भी चौंक जाएगा

मैंने कह दिया- हां चाची कॉलेज में एक दोस्त ने मुझे ब्लू फिल्म दिखाई थी. फिर मैं भी ये सब देखने लगा. अब मैं खुद ही अकेले में देख लेता हूँ.

चाची हंस दीं.

मैंने उनसे पूछा- चाची, क्या आपने कभी ब्लू फिल्म देखी है?

हेमा चाची हंसने लगीं और बोलीं- हां यार, ब्लू फिल्में देखना तो आजकल आम बात हो गई है.

मैंने पूछा- चाची, क्या लड़कियां भी ब्लू फिल्में देखती हैं?

हेमा चाची ने कहा- हां क्यों नहीं.. देखो  जवानी में सेक्स की इच्छा हर किसी को होती है … और ज्यादातर कुंवारे लड़के और लड़कियां ब्लू फिल्म देखते ही हैं. आखिर उन्हें भी तो अपने जिस्म की कामुक वासनाएं शांत करनी होती हैं.

यह सुनकर मैं थोड़ा सोच में पड़ गया. अब तक मेरा लंड तन चुका था और मैं फिर से सेक्स करने के लिए आतुर था.

मैंने हेमा चाची से पूछा- क्या आप अपने कॉलेज के दिनों में ब्लू फिल्में देखती थीं?

हेमा चाची बोलीं- हां, मुझे तो ब्लू फिल्में देखना बहुत पसंद है. शादी से पहले मैं बहुत ब्लू-फिल्में देखती थी.

यह सुनकर मैं उत्तेजित होने लगा और मैंने हेमा चाची के साथ ब्लू फिल्म देखने की पेशकश कर दी.

हेमा चाची ने कहा- जरूर देखूंगी यार, क्या तुम्हारे पास ब्लू फिल्में हैं?

मैंने कहा- हां चाची मैंने कुछ ब्लू फिल्में मोबाईल में सेव कर रखी थीं, कभी कभी हवस शांत करने के लिए देख लेता हूँ.

चाची बोलीं- दिखाओ.

फिर मैंने जल्दी से अपना मोबाईल उठाया और ब्लू फिल्म चला ली.

फिल्म देखते समय हेमा चाची ने मेरे बांय कंधे पर अपना सिर रखा हुआ था और उनकी गोरी नंगी जांघ मेरे लंड के ऊपर थी. वो अपने हाथ को मेरी छाती पर मल रही थीं

ब्लू फिल्म चल रही थी, जिसके शुरूआत में लड़की लड़के का लंड चूस रही थी.

यह सीन देखकर मुझे भी हेमा चाची से अपना लंड चुसवाने का ख्याल आया, पर उस टाईम मैं कुछ नहीं बोला.

फिल्म चलती रही और अब लड़की लड़के के लंड से टपकता सफेद पानी (वीर्य) पी रही थी.

ये देखकर हेमा चाची ने जरा भी छी: या ऐसा वैसा शब्द नहीं बोला क्योंकि हेमा चाची ब्लू फिल्में देखती थीं, तो उन्हें इस सबकी आदत हो गई थी.

मैंने हेमा चाची से सवाल पूछ लिया- चाची क्या आपने कभी ऐसा किया है?

हेमा चाची बोलीं- नहीं , लेकिन तुम चाहो तो जरूर करना चाहूँगी.

फिर क्या था, ये सुनते ही मेरी तो जैसे तमन्ना ही पूरी हो गई थी.

फिर मैंने कहा कि चाची क्या आपको मर्दों के वीर्य (लंड के सफेद पानी) के फायदे पता हैं?

हेमा चाची बोलीं- हां  मुझे पता है कि मर्दों का वीर्य पीना और उससे अपने बदन की मालिश करना, औरतों की त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है.

ये सुनते ही मैं तो बड़ा हैरान था क्योंकि हेमा चाची तो मेरी उम्मीद से भी ज्यादा चुदक्कड़ निकली थीं.

मैंने कहा- हां चाची, आपने सही कहा है. मैंने भी वीर्य के फायदे के बारे में कहीं ऐसा ही पढ़ा था. तभी ब्लू फिल्मों में लड़कियां मजे लेकर मर्दों का वीर्य पीती हैं.

चाची बोलीं- तो क्या किसी से चुसवाया है तूने?

मैंने मजेदार अंदाज में कहा कि नहीं चाची अब तक कभी नहीं. आप ही मेरे लिए पहली हैं. अगर आप चाहो तो आप भी मेरे वीर्य के फायदे ले सकती हो.

हेमा चाची ने कहा- कैसे?

मैंने कहा- क्या चाची … मेरे होते हुए ये कैसे शब्द आपने कैसे बोला.

हेमा चाची मुस्कुरा दीं और मेरे होंठों पर एक किस देकर बोलीं- ठीक है ऊपर उठो … मुझे तुम्हारा वो (लंड) चूसना है.

हाय हाय … क्या मस्त टाईम था यार.

मैं पहली बार किसी औरत से अपना लंड चुसवाने जा रहा था और जब वो औरत हेमा चाची जैसी अप्सरा और बला की खूबसूरत हो, तो क्या कहने.

अब मैं ऊपर की ओर खिसक गया और हेमा चाची ने अपने लाल लाल रसीले होंठों से मेरे लंड के टोपे को चूम लिया.

हाय … क्या मस्त मजा आया था उस दोपहर लंड चुसवाने में!

फिर हेमा चाची ने अपना मुँह खोला और मेरा लंड हेमा चाची के मुँह में समा गया.

सच में बड़ा मजा आ रहा था.

हेमा चाची जोर जोर से मेरा लंड चूसने लगीं. मेरे मुँह से ना चाहते हुए भी ‘आह्ह्ह आह्ह्ह ..’ की कामुक आवाजें निकल रही थीं.

मैं घुटनों के बल बैठा और मैंने पूरी ताकत से अपना लंड हेमा चाची के मुँह में पूरा पेल दिया. मेरा लंड हेमा चाची के गले तक पहुंच गया था.

ये सुनते ही मैं तो बड़ा हैरान था क्योंकि हेमा चाची तो मेरी उम्मीद से भी ज्यादा चुदक्कड़ निकली थीं.

मैंने कहा- हां चाची, आपने सही कहा है. मैंने भी वीर्य के फायदे के बारे में कहीं ऐसा ही पढ़ा था. तभी ब्लू फिल्मों में लड़कियां मजे लेकर मर्दों का वीर्य पीती हैं

मैं अपने लंड से हेमा चाची के गले को स्पर्श कर पा रहा था. मुझे उस समय चरम सुख का आनन्द मिला और मैंने झड़ते हुए अपना सारा वीर्य हेमा चाची के मुँह में ही छोड़ दिया.

अचानक से हेमा चाची का जी खराब हुआ और उन्होंने उल्टी सी करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया.

मेरे लंड के बाहर निकलते ही मेरा लंड बहुत ही चिपचिपा और लिसलिसा सा हो गया था.

हेमा चाची का मुँह भी चिपचिपी लार से भर गया था. वो चिपचिपी लार मेरा वीर्य ही थी, जो चाची के मुँह में ही मेरे झड़ने से हुई थी.

फिर हेमा चाची इसी अवस्था में मेरी ओर देख कर मुस्कुरा दीं और अपने मुँह में मौजूद मेरे वीर्य को पी गईं.

पलंग के पास में रखी टेबल से मैंने पानी की भरी बोतल उठाकर हेमा चाची को दी. चाची वो पूरी बोतल पानी पी गईं और चित होकर बिस्तर पर लेट गईं.

चाची का गोरा नंगा बदन तो जैसे कयामत ढा रहा था. मैं भी हेमा चाची से चिपक कर लेट गया और मैंने दूसरी ब्लू फिल्म लगा ली.

उस ब्लू फिल्म में लड़का लड़की की चड्डी को कैंची से काट देता है और उसकी चूत चाटने लगता है.

फिर वो ब्लू फिल्म वाला लड़का उस लड़की की गांड के छेद में अपना लंड डाल देता है, जिससे लड़की बहुत चिल्लाने लगती है.

ब्लू फिल्म देख कर हम दोनों फिर से उत्तेजित हो गए.

मैंने हेमा चाची से कहा- चाची, अगर मैं भी आपके साथ इसी तरह पीछे से सेक्स करूं … तो क्या आपको मजा आएगा?

चाची हंसी और बोलीं- भास्कर, मजा तो आएगा … लेकिन दर्द भी होगा. अगर तुम मेरे साथ पीछे से करना चाहो, तो कर सकते हो, तुम्हारे लिए इतना दर्द तो मैं सह ही सकती हूँ.

कसम से यारो … ये सुनकर मुझे पता चला कि हेमा चाची मुझसे कितना प्यार करती हैं.

फिर जैसे ही हमने सेक्स करने का मूड बनाया, तभी अचानक से मेरे मोबाईल पर मेरे घर से फोन आ गया. मैं घबरा गया.

मैंने हेमा चाची को चुप रहने का इशारा किया और फोन उठाया, तो घर वालों को कुछ काम था. उन्होंने मुझे जल्दी घर आने को कहा.

यह सुनकर हेमा चाची उदास हो गईं और बोलीं- भास्कर एक बार और सेक्स करते जाओ … फिर चले जाना.

मैंने कहा- चाची घर वाले बुला रहे हैं … जल्दी जाना पड़ेगा. कोई बात नहीं मैं रात में तो आ ही जाऊंगा, फिर जम कर सेक्स करेंगे.

हेमा चाची मान गईं और बोलीं कि ठीक है भास्कर … चले जाओ, लेकिन रात में तुम पीछे से सेक्स कर लेना, मैं न नहीं कहूँगी.

चाची ने पलंग से चादर उतार कर वो चादर ओढ़ ली और थोड़ी देर के लिए कमरे से बाहर चली गईं.

हेमा चाची के बाहर जाते ही मेरी नजर वहां पलंग पर पड़ी हेमा चाची की उतारी हुई चड्डी पर पड़ी.

मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े पहने और हेमा चाची की चड्डी को उठाकर जल्दी से अपनी जींस की जेब में छिपा लिया.

अब हेमा चाची कमरे में आईं और उन्होंने मुझे बाहर आने को कहा.

घर के मेन गेट के पास पहुंचकर हेमा चाची ने जंगले से बाहर देखा, तो वहां कोई नहीं था.

फिर उन्होंने गेट खोल कर मुझे बाहर निकाल दिया और अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया.

आज हेमा चाची की चुदने की कामना अधूरी छोड़ कर मैं अपने घर आ गया था. लेकिन आज की रात चाची की चुत का भोसड़ा बनाने का सोचते हुए मैं अपने घर आ गया.

अपने घर से फोन आ जाने के कारण घर चला गया और वो काम किए, जिसके लिए घर वालों ने मुझे बुलाया था.

उस रात को मैं छत के रास्ते से चाची के घर में आ गया था और उनको नंगी करके मस्ती करने लगा था.

चाची मुझसे गुस्सा कर रही थीं- तुमको मेरी जरा भी फ़िक्र नहीं थी. फोन पर अपने घर वालों से कह देते कि किसी दोस्त के साथ गया हूँ. अभी आधा घंटे में आ जाऊंगा. उतनी देर में तुम मुझे पूरा संतुष्ट कर सकते थे.

मैंने उन्हें मनाते हुए कहा- अरे चाची सच कह रहा हूँ … मुझे ये बहाना बनाने की याद ही नहीं रही. आप भी मुझे उस वक्त ये कह देतीं तो मैं अपने घर पर यही कह कर आपको ढंग से चोद कर ही जाता.

चाची मुँह फुला कर बोलीं- उस समय मैं क्या कह देती जब तुमने फोन पर कह ही दिया था कि मैं अभी आता हूँ. मैं तुम्हें इशारे से कुछ कहना भी चाह रही थी, मगर तुम कुछ समझ ही नहीं रहे थे.

मैंने कान पकड़ कर चाची से माफ़ी मांगी और उनके सामने उठक बैठक लगाई.

तो चाची हंस दीं.

अब वो मुझसे चिपक गई थीं और प्यार से चूमने लगी थीं.

मैं भी चाची के चूचों को मस्ती से दबाते मसलते हुए गर्म करने लगा था.

जल्दी ही चाची की चुत आग उगलने लगी और मैंने उन्हें पूरी नंगी कर दिया.

चाची ने भी मुझे नंगा कर दिया.

चूंकि उन्हें लंड चूसने की आदत हो गई थी, तो वो मेरे लंड को चूसने लगीं और मुझे मजा आने लगा.

चाची लंड चूसते हुए मुझसे बोलीं- तुमने ब्लू फिल्म में सिर्फ लंड चुसवाना ही देखा था क्या?

मुझे एकदम से होश आया और मैंने कहा- नहीं चाची, मुझे चुत चाटना देखना भी अच्छा लगता है.

चाची हंस कर बोलीं- सिर्फ देखना अच्छा लगता है या चाटना भी अच्छा लगता है?

मैंने समझ लिया और झट से 69 में आ गया.

मैंने चाची की चुत को चाटना शुरू किया तो चाची की आहें और कराहों से कमरा गूंज उठा.

दस मिनट तक मैंने चाची की चुत को चाट कर उसे झड़ा दिया और सारा रस पी गया.

चाची निढाल हो गई थीं.

कुछ देर बाद हम दोनों चुदाई के लिए फिर से गर्म हो गए थे.

मैंने चाची को घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी चुत में लौड़ा पेल दिया.

चाची को इस पोज में चुदने में मजा आने लगा. मैं उनकी चूचियों को मींजता हुआ उनकी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

उसी समय मुझे उनकी गांड का छेद भी दिखा तो मैंने गांड में एक उंगली पेल दी. इससे चाची उछल पड़ीं और झड़ गईं.

मैंने भी दस बारह तेज शॉट मारे और उनकी चुत में झड़ गया.

उस दिन मैंने रात को चार बजे तक चाची की चुत को तीन बार रगड़ा और वापस छत के रास्ते अपने घर आ गया.

इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि कई दिनों तक हेमा चाची से चुदाई का सुख नहीं मिला.

उनसे दूर रहने के बाद मैं उनसे मिलने और उनके साथ सेक्स करने के लिए मचला जा रहा था.

एक दिन चाचा काम से बाहर चले गए और मुझे हेमा चाची के घर रुकने का मौका मिल गया.

हेमा चाची की फरमाईश पर मैंने कई दिनों तक मुठ मार मार कर शीशी में अपना वीर्य (लंड का सफेद पानी) भर रखा था.

चाचा के जाने के बाद मुझे रात में हेमा चाची के पास रुकने का मौका मिला और मैं अपने पजामे की जेब में उस वीर्य से भरी शीशी को छिपाकर हेमा चाची के पास ले आया.

मेरे वहां पहुंचते ही हेमा चाची ने मुझे कसकर गले लगा लिया और कहा-  तुम्हें बहुत मिस किया इतने दिनों तक तुमसे नहीं मिली तो मेरा मन बेचैन हो गया था.

मैंने भी वीर्य से भरी शीशी को जेब से निकालकर हेमा चाची को दिखाया और कहा- चाची, मिस तो मैंने भी बहुत किया और ये देखो आपकी याद में मैंने ये शीशी पूरी भर दी.

हेमा चाची ये सुनकर हंस पड़ीं और बोलीं- अरे  तुम तो सीरियस हो गए. चलो अच्छा है इस वीर्य को मैं अपनी त्वचा पर मलूंगी, तो मेरी त्वचा कोमल और मुलायम बन जाएगी.

ऐसा कहकर हेमा चाची ने मुझे खींचकर अपने पलंग पर पटक लिया और मेरी शर्ट के बटन खोल कर मेरी छाती को चूमने लगीं.

मैं अपने एक हाथ से हेमा चाची की चूची दबा रहा था और दूसरे हाथ से मैंने चाची के बाल पकड़ रखे थे.

मेरी हवस की आग और ज्यादा भड़क उठी तो मैंने हेमा चाची को उठाकर अपने ऊपर छाती से छाती मिलाकर लेटा लिया और अपने दोनों हाथों से हेमा चाची की मस्त गोल घुमावदार गांड को मसलने लगा.

मैं चाची की मक्खन गांड मसलते मसलते अपना आपा खो बैठा और मैंने हेमा चाची की गांड में उंगली कर दी.

गांड में उंगली घुसते ही हेमा चाची उछल पड़ीं और हंसने लगीं.

हम दोनों सेक्स की उत्तेजना से भर चुके थे.

तभी चाची ने वीर्य की शीशी उठाई और मुझे लेकर अपने बाथरूम में चली गईं.

हेमा चाची के घर का बाथरूम बहुत बड़ा था, जिसमें एक कोने में एक बड़ा सा बाथटब रखा था.

बाथरूम में पहुंचकर मैंने और हेमा चाची ने जल्दी से अपने अपने कपड़े उतार दिए और हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गए.

नंगे होते ही हम दोनों एक दूसरे पर टूट पड़े.

सबसे पहले मैंने हेमा चाची के लाल और रसीले होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उन्हें चुदाई की पोजीशन में लेते अपने लंड को चाची की चूत में डाल दिया.

चाची भी सेक्स से भरी हुई थीं, उन्होंने अपने दोनों हाथों को मेरे कूल्हों पर जमा लिए थे और वो भी दम लगाकर मेरे होंठों को चूसने में व्यस्त थीं.

हम दोनों अपनी धकापेल चुदाई में लग गए और कुछ देर बाद मैं झड़ गया. मैंने अपने लंड का पूरा वीर्य चाची की चूत में ही छोड़ दिया.

मेरे लंड का पानी हेमा चाची की चूत से रिसता हुआ बाहर बाथरूम के फर्श पर टपक रहा था.

झड़ने के बाद मैं थोड़ा शांत हुआ और हेमा चाची भी थोड़ी ठंडी पड़ गई थीं.

अब मैंने अपने वीर्य से भरी वो शीशी खोली, जिसमें मैंने कई दिनों तक अपना वीर्य एकत्रित कर रखा था.

मैंने उस शीशी में से थोड़ा वीर्य अपने हाथों में लेकर हेमा चाची के चेहरे पर मला.

फिर थोड़ा और वीर्य लेकर हेमा चाची की गोरी और मोटी कड़क चूचियों वाली छाती पर मला.

कुछ वीर्य उनके पेट पर मला और चाची की नाभि में भी उंगली से वीर्य लेकर रगड़ा.

फिर मैं वीर्य लेकर हेमा चाची की मस्त गोरी गोरी चिकनी जांघों पर रगड़ता हुआ नीचे पैरों के तलवे तक ले गया.

चाची बड़ी कामुकता से मेरे हाथों से अपने जिस्म पर वीर्य की मालिश करवा रही थीं.

उसके बाद मैंने थोड़ा सा वीर्य हेमा चाची की पूरी गांड पर मला और बचा हुआ वीर्य मैंने हेमा चाची की चूत के हिस्से पर रगड़ दिया.

अब वीर्य वाली शीशी में थोड़ा सा वीर्य ही बचा था, तो मैंने उस शीशी में थोड़ा पानी डालकर उस शीशी का पूरा वीर्य एक मग में पलट लिया और उस मग में पानी मिलाकर पूरा का पूरा वीर्य से मिला हुआ पानी हेमा चाची के सिर पर पलट दिया, जिससे हेमा चाची शरीर का बचा हुआ हिस्सा यानि सिर भी अब मेरे लंड के रस में पूरी तरह स्नान कर चुका था.

इसके बाद हेमा चाची ने शॉवर चालू कर दिया और उनके सेक्सी बदन पर पानी गिरने लगा.

हेमा चाची का पूरा बदन बिल्कुल चिकना हो गया और बदन की वो चिकनाहट मेरे वीर्य के कारण थी.

मैंने कुछ देर बाद फव्वारा बंद कर दिया और अपने हाथों से हेमा चाची का बदन मलने लगा.

हेमा चाची के बदन पर लगा मेरा वीर्य किसी तेल की तरह काम कर रहा था, जिससे उनका पूरा बदन एकदम चिकना हो गया था.

मुझे उनके बदन की चिकनाहट को अपने हाथों से मलने में बड़ा मजा आ रहा था.

मैंने हेमा चाची के चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लेकर मला और वीर्य को चेहरे पर मलता हुआ कानों तक ले गया … उनकी छाती और चूचियों को मला.

इसके बाद हेमा चाची के पेट को रगड़ा और दोनों हाथों को और बगलों को मसला. उनके जिस्म का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं रह गया था, जहां मैंने वीर्य लगा कर न मला हो.

हेमा चाची की चिकनी गांड पर अपना वीर्य मलते समय मैंने अपनी उंगली को चाची की गांड के छेद में डाल दी थी.

चाची अपनी गांड में मेरी उंगली का अहसास पाकर एक बार को उचक गई थीं लेकिन चिकनाहट के कारण चाची मेरी उंगली को अपनी गांड में जज्ब कर गईं.

उसके बाद हेमा चाची की गोरी गोरी जांघों और पैरों को तलवों तक मलने के बाद मैं हेमा चाची की चूत के हल्के हल्के बालों पर अपनी वीर्य की चिपचिपी उंगलियां फेरने लगा था.

चाची ने अपनी चुत खोल दी तो मैंने उनकी चूत में उंगली पेल दी और आगे पीछे करने लगा.

अब हेमा चाची के शरीर के किसी भी अंग को कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं बचा था, जो मेरे वीर्य में न नहाया हो. मेरा वीर्य हेमा चाची के शरीर के रोम रोम तक पहुंच गया था.

फिर हेमा चाची नीचे झुक गईं और उन्होंने मेरे खड़े और फूले हुए लंड को अपने मुँह में ले लिया.

ओये होये … लंड चुसवाते ही क्या मजा आने लगा था … उस समय मैं बस पागल होने के कगार पर आ गया था.

पूरे लंड को कुछ मिनटों तक हेमा चाची ने जबरदस्त लंड चूसा. वो मेरे टट्टों को सहलाते हुए लंड चूस रही थीं तो मेरी आंखें मदहोशी के आलम में बंद हो गई थीं.

फिर कुछ मिनटों बाद जब मैं झड़ा, तो मैंने अपने लंड का सारा का सारा सफेद पानी (वीर्य) हेमा चाची के मुँह में ही छोड़ दिया.

वीर्य हेमा चाची के मुँह से बाहर टपक रहा था, जिसे मैंने अपने हाथ में लेकर कुछ उनके मम्मों पर मल दिया. कुछ हाथ में ही लिए रहा.

बाकी का जो वीर्य हेमा चाची के मुँह में था, उसे हेमा चाची ने पी लिया.

हाथ में लिए हुए वीर्य को मैंने हेमा चाची की चूत के बारीक छोटे छोटे बालों पर मल दिया. इससे चाची को मजा आ गया और उन्होंने चुत खोल दी.

फिर हेमा चाची मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर मुझे बाथटब में ले गईं.

टब में पानी भरा हुआ था. हम दोनों उस बाथटब में चिपक कर लेटे रहे और एक दूसरे से चूमा-चाटी की मस्ती करते रहे.

उसके बाद मैंने हेमा चाची को आगे कर दिया और बाथटब के पानी के भीतर ही हेमा चाची की चूत में अपना लंड पेल दिया. मुझे पानी के भीतर सेक्स करना काफी अजीब लग रहा था लेकिन ऐसा करते समय हवस की आग अपने चरम पर थी.

चाची को पानी की छाप छप के साथ अपनी चुत में लंड लेना बड़ा सुखदायी लग रहा था. वो मस्ती से गांड उठा-उठा कर चुदवाती रहीं.

इसी तरह बहुत देर तक बाथरूम में सेक्स करने के बाद हम दोनों झड़ गए.

चुदाई खत्म हुई तो मैं और हेमा चाची बाथरूम में शॉवर चला कर नहाने लगे.

हेमा चाची के बदन से वीर्य की चिपचिपाहट और चिकनाई को दूर करने के लिए मैंने हेमा चाची के पूरे बदन पर 3 बार शैम्पू रगड़ा.

नहाने के बाद हम दोनों ने एक ही तौलिया से अपना अपना बदन पौंछा और बिना कपड़े पहने नंगे ही हेमा चाची के कमरे में आ गए.

कमरे में काफी देर तक हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर लेटे लेटे बातें करते रहे.

आधा घंटे बाद हेमा चाची ने फिर से सेक्स की फरमाईश कर दी, तो मैंने मूड बनाने के लिए अपने फोन को हेमा चाची की टीवी से कनेक्ट कर दिया. सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चला दी.

वो ब्लू फिल्म गैंग-बैंग कैटेगरी की थी, जिसमें एक लड़की के साथ 3-3 लड़के सेक्स कर रहे थे.

उस ब्लू फिल्म में एक लड़के ने अपना लंड उस लड़की की चूत में डाल रखा था और दूसरे लड़के ने अपना लंड उस लड़की की गांड में डाल रखा था.

तीसरे लड़के ने अपना लंड उस लड़की के मुँह में डाल रखा था.

यह देख कर तो मेरा लौड़ा जैसे हेमा चाची की चूत में घुसने के लिए आतुर हो उठा था.

ये सब सीन देख कर तो चाची की चूत भी सरसराने लगी और वो मेरे लंड को पकड़ने लगीं.

फिर मैंने हेमा चाची की चूत की अंदरूनी झिल्ली पर अपनी उंगलियां रख दीं और जोर जोर से चुत मसलने लगा.

हेमा चाची के मुँह से ‘आह्ह्ह … अह्ह्ह ..’ की कामुक आवाजें निकलने लगीं. लेकिन मैं फिर भी नहीं रुका, मैं लगातार चाची की चूत में जोर जोर से अपनी उंगलियां पेल रहा था.

तभी हेमा चाची चिल्ला दीं और चाची की चूत से सफेद सा पानी पिचकारी की धार की तरह छूट पड़ा. इससे मेरे हाथ की उंगलियां चिपचिपी हो गई थीं.

अपने हाथ को पौंछने के लिए वहां मुझे बिस्तर पर कोई कपड़ा नहीं मिला, तो मैंने अपने हेमा चाची की चूत के पानी से भीगे मेरे चिपचिपे हाथों को चाची के बालों से ही पौंछ लिया.

वो हंस दीं.

झड़ने के बाद हेमा चाची थोड़ी ठंडी पड़ गई थीं और लेटे लेटे टीवी पर चल रही ब्लू फिल्म को देखने में लगी थीं.

ब्लू फिल्म देखते देखते हम दोनों ही फिर से जोश में आ गए. मगर अब रात के करीब 2 बज गए थे, तो मैंने टीवी बंद कर दी और हेमा चाची की चूत को चाटने लगा.

चाची को अपनी चूत चटवाकर बहुत मजा आ रहा था. उन्होंने मेरे सिर को अपने एक हाथ से पकड़ रखा था.

हेमा चाची की चूत के ऊपरी हिस्से पर हल्के हल्के बाल थे जिन्हें चाची ने तिरछी डिजायन देकर सैट कर रखा था, जो बहुत ही आकर्षित लग रहे थे.

हम दोनों गर्म हो उठे थे. मगर इस बार मेरा मन हेमा चाची की गांड चुदाई का था.

मैंने हेमा चाची की चूत को चाटते चाटते चौड़ा दिया और अपनी जीभ को हेमा चाची की चूत के छेद में अन्दर तक घुसाते हुए चाटा.

इससे चाची ‘आह्ह्ह … आह्ह्ह्ह …’ करने लगीं.

मैंने मूड बना लिया था कि अब तो मैं हेमा चाची की गांड को ऐसा चोदूंगा कि उनकी चीखें निकलवा दूंगा. मगर चाची की मर्जी के बिना उनकी गांड मारना संभव नहीं था. मैं पहले उनकी चुत में लंड पेल कर उन्हें मस्त कर देना चाहता था.

मैंने अपने खड़े लंड को हेमा चाची की चूत के ऊपर पीटा.

तो हेमा चाची कामुकता से बोलीं- जल्दी अन्दर डालो  … अब रहा नहीं जा रहा.

ये सुनकर मैंने अपने मोटे और फूले लंड को हेमा चाची की चूत के अन्दर डाल दिया और जोर जोर से लंड को चूत के अन्दर बाहर करने लगा.

मेरी तेज चुदाई से हेमा चाची की आंखों में आंसू आ गए, तो मैंने अपनी स्पीड थोड़ी कम कर दी.

फिर मैंने अपने लंड को धीरे धीरे हेमा चाची की चूत में डाला निकाला तो चाची को उस समय ऐसी चरम सुख की अनुभूति हुई कि उनकी आंखें ऊपर की ओर चढ़ने लगी थीं.

अब मैं झड़ने वाला था, तो मैंने अपने लंड का सारा पानी हेमा चाची की चूत के भीतर ही छोड़ दिया.

मेरे साथ साथ हेमा चाची भी झड़ गई थीं, तो मेरे लंड का और चाची की चूत का सफेद पानी एक साथ मिलकर चूत के बाहर रिसता हुआ बिस्तर पर टपकने लगा.

फिर मैंने अपना झड़ा हुआ और मुरझाया हुआ लंड चाची की चूत के बाहर निकाला, जो चिपचिपा हो गया था.

हेमा चाची ने सोफे से अपनी एक काली रंग की जालीदार चड्डी उठाई और अपनी चूत को पौंछा. उसके बाद चाची ने उसी चड्डी से मेरे चिपचिपे लंड को पौंछा.

झड़ने के बाद मैं हाथ पैर फैलाये चित पड़ा था लेकिन हेमा चाची अपनी चूत के ऊपर हाथ रख कर हल्का हल्का दबा रही थीं.

ये देखकर मैंने पूछ लिया- चाची क्या हुआ … चुत में ज्यादा दर्द हो रहा है क्या?

हेमा चाची मुझे देखकर मुस्कुराईं और बोलीं- हां … दर्द तो हो रहा है लेकिन ये मीठा दर्द है, जल्द ही ठीक हो जाएगा.

मैं लंड हिलाने लगा.

हेमा चाची ने मेरे लंड को देखा और कहा- आज तो तुमने मेरे साथ पूरा दम लगा कर सेक्स किया है … अब इसे क्यों हिला रहे हो?

मैंने कहा- हां चाची सेक्स तो फुल स्पीड में किया है, लेकिन आप सच बताना मजा आया या नहीं!

हेमा चाची हंस कर बोलीं- हां  तुमने मुझे खुश कर दिया है.

इसी तरह नंगे ही लेटे लेटे हम दोनों ढेर सारी बात करते रहे. चार बजे करीब फिर से सेक्स का मन बन गया.

इस बार मेरी नजर हेमा चाची की गोल मटोल कसी हुई सेक्सी चूचियों पर थी, जिनका स्वाद मैं अच्छे से चखना चाहता था. मैंने हेमा चाची की चूचियों को चूसना शुरू कर दिया. मेरे मुँह में हेमा चाची की चूची की निप्पल थी, जिसे मैंने बुरी तरह से काट लिया.

हेमा चाची चीख पड़ीं, तो मैंने चूचियों को छोडकर गांड पर हाथ मलना शुरू कर दिया.

गांड पर हाथ मलते मलते मेरी उंगलियां हेमा चाची की गांड की लकीर के बीच में पहुंच गईं … जिन्हें मैं अन्दर तक डाल कर रगड़ रहा था. इससे मैं अपनी उंगलियों के स्पर्श से हेमा चाची की गांड के छेद को साफ महसूस कर पा रहा था.

कुछ समय तक ऐसा करते करते मैंने हेमा चाची की गांड के छेद में अपनी बीच वाली बड़ी उंगली डाल दी.

गांड में उंगली घुसते ही हेमा चाची उछल पड़ीं.

फिर मैंने हेमा चाची को पीछे से सेक्स करने के लिए पूछा.

पहले तो हेमा चाची ने मेरी बात हंस कर टाल दी.

लेकिन मैंने बार बार जिद की तो हेमा चाची बोलीं- भास्कर पीछे से डालोगे … तो मुझे बहुत दर्द होगा.

मैंने बोला कि चाची पहली बार तो जब आपने आगे से किया होगा, तब भी दर्द हुआ होगा न … तो क्या आप मेरे लिए इतना दर्द भी सहन नहीं कर सकती हो?

चाची कुछ नहीं बोलीं.

मैंने उन्हें चूमा और कहा- चाची, किसी कुंवारे छेद को फाड़ने का हक तो बनता है न मेरा?

चाची बोलीं- हां, मेरे मन में यही चल रहा है मगर मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं फट न जाए.

मैंने कहा- मैं पहले आपकी गांड को ढीला कर लूंगा फिर लंड पेलूंगा.

चाची गहरे सोच विचार में डूबी थीं वो निर्णय नहीं ले पा रही थीं कि क्या करें.

फिर मैंने कैसे भी करके हेमा चाची को उनकी गांड मारने लिए मना ही लिया.

अब हेमा चाची पेट के बल उल्टी लेट गईं और मैंने हेमा चाची के कूल्हों को इस तरह चौड़ाया, जिससे मैं हेमा चाची की गांड का छेद साफ देख पा रहा था.

मैंने उनकी ड्रेसिंग टेबल से केश तेल की शीशी उठा ली और उनकी गांड के छेद पर शीशी से तेल टपकाने लगा. तेल सीधे ही गांड के छेद में जाने लगा, जिसे मैं मैंने मलना शुरू कर दिया.

धीरे धीरे मैं अपनी एक उंगली को चाची की गांड में अन्दर बाहर करने लगा.

चाची को मेरी उंगली से मजा आने लगा.

मैंने दो उंगलियां अन्दर की तो चाची को दर्द होने लगा. मैंने रुक रुक कर तेल टपकाने के साथ अपनी दो उंगलियों के लिए गांड में जगह बना ली.

अब चाची का डर कम हो गया था. मैंने बार बार उनसे गांड को ढीला रखने की कह कर उंगली से गांड को रगड़ा, तो वो ये समझ गईं कि किस तरह से गांड की रगड़ाई के लिए गांड को ढीला छोड़ना पड़ता है.

 मैंने हेमा चाची के गांड के छेद के मुँह पर अपना फूला हुआ सख्त लंड रखा, तो मैंने देखा कि चाची की गांड का छेद लंड के हिसाब से काफी छोटा था और मेरा लंड इतना मोटा था कि उसका गांड में घुसना मुश्किल लग रहा था.

मैंने कुछ सोचा और हेमा चाची को घोड़ी बनने को कहा.

चाची के घोड़ी बनते ही मैंने हेमा चाची के कूल्हों को इतनी जोर से चौड़ा दिया कि उनकी गांड का छेद पहले के मुकाबले थोड़ा बड़ा दिखने लगा था.

हेमा चाची की गांड के छेद की अन्दर की गुलाबी त्वचा भी साफ दिख रही थी.

मैंने गांड के छेद के मुँह पर अपने लंड की नोक रखी और चाची से कहा कि गांड ढीली रखना चाची.

चाची ने पहले उंगली जैसा मजा याद करके गांड ढीली छोड़ दी.

मैंने लंड को हाथ से पकड़कर जोर से चाची की गांड के छेद के अन्दर घुसेड़ दिया.

लंड आसानी से अन्दर नहीं जा रहा था … तो मैंने हेमा चाची की चूत पर हाथ तेल मला और चूत पर लगे चिपचिपे तेल को अपने लंड पर रगड़ लिया.

इससे मेरा लंड भी चिकना हो गया. अब मैंने अपने लंड को पूरी ताकत के साथ हेमा चाची की गांड में प्रवेश करवा दिया.

जैसे ही मेरा फूला हुआ मोटा लंड हेमा चाची की गांड के अन्दर गया, तो हेमा चाची जोर से चीख पड़ीं और उन्होंने दर्द से कराहते हुए मुझसे अपना लंड गांड से बाहर निकालने के लिए कहा.

लेकिन उस वक्त मैं इतने जोश और मजे की हालत में था कि मैंने हेमा चाची की एक न सुनी और अपने लंड को अन्दर बाहर करता रहा.

हेमा चाची जोर जोर से चीख रही थीं, तो मैंने उनके मुँह पर अपना एक हाथ रख कर मुँह को बंद कर दिया और पीछे से दबादब लंड आगे पीछे करने लगा.

हालांकि चाची की गांड मारते समय मुझे भी लंड पर मीठा सा काफी दर्द हो रहा था, लेकिन उस वक्त मैं गुदासंभोग के सुख की जिस चरम सीमा में था, वो शब्दों से बयान करना मुश्किल है.

मैं चाची की गांड मारता रहा.

इसी तरह कुछ टाईम तक पीछे से सेक्स करने के बाद मैं झड़ गया और मैंने अपने लंड का सारा पानी हेमा चाची की गांड के भीतर ही छोड़ दिया.

झड़ने के बाद मेरा लंड मुरझा गया और हेमा चाची की गांड से बाहर निकल आया.

अब मैं हेमा चाची से थोड़ा दूर सरककर लेट गया लेकिन हेमा चाची अभी भी अपनी गांड पर हाथ लगाए दर्द का अनुभव कर रही थीं और दर्द से कराह रही थीं.

इसी अवस्था में मेरे लंड का पानी उनकी गांड के छेद से बाहर टपक रहा था.

कुछ समय बाद मैंने हेमा चाची को अपनी बांहों में जकड़ लिया और उनकी गांड को सहलाने लगा.

हेमा चाची को इतना दर्द हो रहा था कि उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे.

मैंने हेमा चाची के लाल रसीले होंठों पर किस किया और सॉरी बोला.

हेमा चाची मुझे देख कर दर्द की हालत में भी मुस्कुरा दीं और बोलीं- भास्कर, आज अगर तुम्हारी कोई और ख्वाहिश बची हो, तो बता दो … मैं आज वो भी पूरी कर देती हूँ.

यह सुनकर मैं हंस पड़ा और हेमा चाची को कस कर अपने जिस्म से चिपका लिया.

मैंने कहा- नहीं चाची अब कुछ नहीं चाहिए मुझे … अब आप आराम करो.

फिर उस रात हमने दोबारा सेक्स नहीं किया.

हेमा चाची ने एक गीले कपड़े से अपनी गांड और चूत पर फैले चिपचिपे पानी को साफ दिया और फिर उसी कपड़े से मेरे लंड पर लगे चिपचिपे पानी को पौंछ दिया.

उसके बाद हेमा चाची ने पलंग से लगे ड्रावर में से एक गोली निकाली और खा ली.

मैंने पूछा- चाची ये किस चीज की गोली थी?

तो हेमा चाची बोली कि ये गर्भ निरोधक गोली थी, जिस तरह से हम सेक्स करते हैं तो उससे गर्भधारण को रोकने के लिए मैंने गोली खाई थी.

उसके बाद हम इसी तरह नंगे ही चिपक कर सो गए.

कुल मिलाकर हेमा चाची के जिस्म का कोई भी ऐसा अंग और कोई रोम नहीं बचा था, जहां तक मेरा वीर्य न पहुंचा हो.

उस रात बाथरूम से लेकर बिस्तर तक हेमा चाची पूरी तरह मेरे लंड की वीर्य में नहा चुकी थी और बचा हुआ जो गांड का छेद था, तो हेमा चाची को चोदकर मैंने उनकी गांड के भीतर भी अपना वीर्य पहुंचा दिया था.

इसी तरह समय बीतता गया और जब कभी मुझे और हेमा चाची को साथ में रात गुजारने का समय मिलता, तो हम दोनों चुदाई करके भरपूर मजा ले लेते थे.

जितना मिस मैं हेमा चाची और उनके साथ बिताई कई सेक्स भरी रातों को करता हूँ; शायद हेमा चाची भी मुझे भी उतना ही मिस करती होंगी.

 

दोस्तो, मेरी ये सेक्स कहानी आप सभी को कैसी लगी … कृपया मेल करके जरूर बताइएगा.

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